इंटेलिजेंस रिपोर्ट : भीम सेना को नक्सली एवं वामपंथी दलों का भारी समर्थन, जानिए कौन है वामपंथी

इंटेलिजेंस रिपोर्ट : भीम सेना को नक्सली एवं वामपंथी दलों का भारी समर्थन, जानिए कौन है वामपंथी
मई 29, 2017
 उत्तर प्रदेश सहारनपुर में कई दिनों से बवाल चल रही है और जातीय हिंसा हुई, उसके लिए जिम्मेदार भीम आर्मी मानी जा रही है ।
Bhim Army
भीम आर्मी का संस्थापक चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण है। खुद को ‘रावण’ की उपाधि से पुकारा जाना पसंद करता है ये शख्स !!
रिपोट
अनुसार भीम आर्मी को विभिन्न दलों के नेताओं के अलावा हवाला के जरिये भी
फंडिंग की गई। पिछले दो महीने में भीम आर्मी के एकाउंट में एकाएक 40-50 लाख
रुपये ट्रांसफर हुए हैं।
नौ मई को #भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने सहारनपुर में आठ स्थानों पर पुलिस पर पथराव किया था।
श्री हनुमानजी की फोटो पर थूके और जूते फैंके,इसमें भी #भीम आर्मी के सदस्य नजर आये ।
इंटेलिजेंस
की रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि कई #वामपंथी दल भीम सेना के संयोजक
चंद्रशेखर के समर्थन में थे और उससे लगातार संपर्क में बने हुए थे और
नक्सलियों से संबंध होने की बात का खुलासा किया गया है।
रिपोर्ट
में कहा गया है कि, #वामपंथी विचारधारा के ये संघटन भीम सेना को नक्सलियों
सा #प्रशिक्षण देने के लिए उन्हें छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और मध्य
प्रदेश के उन बस्तियों में भी ले जाया जाता, जहां नक्सली #प्रशिक्षण पाते
रहे हैं।
रिपोर्ट
बताती है कि, भीम सेना के लोगों को नक्सलियों जैसा प्रशिक्षण देकर उनका
उपयोग #वामपंथी संघटन अपने हित के लिए करने की तैयारी में हैं ।
आखिर कौन हैं #वामपंथी ??
क्या है इनका इतिहास ??
इतने
बड़े विचारकों, विश्व राजनीति-अर्थनीति की गहरी समझ, तमाम नेताओं की
अप्रतिम ईमानदारी और विचारधारा के प्रति समर्पण के किस्सों के बावजूद भारत
का वामपंथी आंदोलन क्यों जनता के बीच स्वीकृति नहीं पा सका?
अब
लगता है कि भारत की महान जनता इन राष्ट्रद्रोहियों को पहले से ही पहचानती
थी, इसलिए इन्हें इनकी मौत मरने दिया। जो हर बार गलती करें और उसे ऐतिहासिक
भूल बताएं, वही #वामपंथी हैं।
#वामपंथी
वे हैं जिनके लिए 24 मार्च, 1943 को भारत के अतिरिक्त गृह सचिव रिचर्ड
टोटनहम ने टिप्पणी लिखी कि ”भारतीय कम्युनिस्टों का चरित्र ऐसा कि वे किसी
का विरोध तो कर सकते हैं, किसी के सगे नहीं हो सकते, सिवाय अपने स्वार्थों
के।”
ये
वही वामपंथी है जिन्हें ‘हिन्दुत्व को कमजोर करने का सुख मिलता है। इसीलिए
भारतीय #वामपंथ हर उस झूठ-सच पर कर्कश शोर मचाता है जिससे हिन्दू बदनाम हो
सकें। न उन्हें तथ्यों से मतलब है, न ही देश-हित से।
विदेशी
ताकतें उनकी इस प्रवृत्ति को पहचानकर अपने हित में जमकर इस्तेमाल करती है।
#मिशनरी एजेंसियाँ चीन या अरब देशों में इतने ढीठ या आक्रामक नहीं हो
पाते, क्योंकि वहां इन्हें भारतीय #वामपंथियों जैसे स्थानीय सहयोगी उपलब्ध
नहीं हैं। चीन सरकार विदेशी #ईसाई मिशनरियों को चीन की धरती पर काम करने
देना अपने राष्ट्रीय हितों के विरूद्ध मानती है। किंतु हमारे देश में
चीन-भक्त वामपंथियों का भी ईसाई #मिशनरियों के पक्ष में खड़े दिखना उनकी
हिन्दू विरोधी प्रतिज्ञा का सबसे प्रत्यक्ष प्रमाण है।
#वामपंथी
दलों में आंतरिक कलह, अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की पराकाष्ठा, पश्चिम बंगाल
में राशन के लिए दंगा, देश की लगभग हर मुसीबत में विपरीत बातें करना, चरम
पर भ्रष्टाचार, देशविरोधी हरकतें, विरोधी राजनीतिक कार्यकर्ताओं की सरेआम
हत्या जैसे वाक्यों को लेकर वामपंथ बेनकाब हो चुका है।
पाकिस्तान
बनवाने के #आंदोलन में सक्रिय भागीदारी करने वाले भारतीय कम्युनिस्टों का
हिन्दू-विरोध यथावत है। किंतु जैसे ही किसी गैर-हिन्दू समुदाय की उग्रता
बढ़ती है-चाहे वह नागालैंड हो या कश्मीर-उनके प्रति कम्युनिस्टों की
सहानुभूति तुरंत बढऩे लगती है।
अत: प्रत्येक किस्म के कम्युनिस्ट मूलत: हिन्दू विरोधी हैं। केवल उसकी अभिव्यक्ति अलग-अलग रंग में होती है।
पीपुल्स
वार ग्रुप के आंध्र नेता रामकृष्ण ने कहा ही है कि ‘हिन्दू धर्म को खत्म
कर देने से ही हरेक समस्या सुलझेगी’। अन्य कम्युनिस्टों को भी इस बयान से
कोई आपत्ति नहीं है। सी.पी.आई.(माओवादी) ने अपने गुरिल्ला दस्ते का आह्वान
किया है कि वह कश्मीर को ‘स्वतंत्र देश’ बनाने के संघर्ष में भाग ले। भारत
के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में चल रहे प्रत्येक #अलगाववादी आंदोलन का हर गुट
के #माओवादी पहले से ही समर्थन करते रहे हैं। अन्य कम्युनिस्ट पार्टियों की
स्थिति भी बहुत भिन्न नहीं। माकपा के प्रमुख अर्थशास्त्री और मंत्री रह
चुके अशोक मित्र कह ही चुके हैं, ‘लेट गो आफ्फ कश्मीर’-यानी, कश्मीर को
जाने दो।
वे वही है “जो पाकिस्तान निर्माण के समय “पाकिस्तान जिन्दाबाद के नारे लगा रहे थे। जो आज तक #JNU  में भी जारी है।
वे वही हैं जो चीन के साथ हुए युद्ध में भारत विरोध में खड़े रहे। क्योंकि चीन के  चेयरमैन माओ उनके भी चेयरमेन थे।
वे वही हैं जो आपातकाल के पक्ष में खड़े रहे।
वे वही हैं जो अंग्रेजों के मुखबिर बने और आज भी उनके बिगड़े शहजादे (माओवादी) जंगलों में आदिवासियों का जीवन नरक बना रहे हैं।
वे वही है, भारत छोड़ो आंदोलन के खिलाफ #वामपंथी अंग्रेजों के साथ खड़े थे।
वे वही है, #मुस्लिम लीग की देश विभाजन की मांग का भारी समर्थन कर रहे थे।
वे वही है, आजादी के क्षणों में नेहरू को ‘साम्राज्यवादियों’ का दलाल वामपंथियों ने घोषित किया।
वे वही है , वामपंथियों ने कांग्रेस के गांधी को ‘खलनायक’ और जिन्ना को ‘नायक’ की उपाधि दे दी थी।
खंडित
भारत को स्वतंत्रता मिलते ही वामपंथियों ने हैदराबाद के निजाम के लिए
पाकिस्तान में मिलाने के लिए लड़ रहे मुस्लिम रजाकारों की मदद से अपने लिए
स्वतंत्र #तेलंगाना राज्य बनाने की कोशिश की।
वामपंथियों ने भारत की क्षेत्रीय, भाषाई विविधता को उभारने की एवं इनके आधार पर देशवासियों को आपस में लड़ाने की रणनीति बनाई।
भारत
की आजादी के लिए लड़ने वाले गांधी और उनकी कांग्रेस को ब्रिटिश दासता के
विरुद्ध भूमिगत आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जयप्रकाश नारायण, राममनोहर
लोहिया, अच्युत पटवर्धन जैसे देशभक्तों पर वामपंथियों ने ‘देशद्रोही’ का
ठप्पा लगाया। भले पश्चिम बंगाल में माओवादियों और साम्यवादी सरकार के बीच
कभी दोस्ताना लडाई चल चुकी हो लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दोनों के बीच समझौता
था। चीन को अपना आदर्श मानने वाली कथित #लोकतंत्रात्क पार्टी माक्र्सवादी
#काम्यूनिस्ट पार्टी और भारतीय काम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) एक ही आका के
दो गुर्गे हैं।
भले
चीन भारत के खिलाफ कूटनीतिक युद्ध लड़ रहा हो लेकिन इन दोनों #साम्यवादी
धड़ों का मानना है कि चीन भारत का शुभचिंतक है लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक
संघ भारत का नम्बर एक दुश्मन।
देश
के सबसे बडे #साम्यवादी संगठन के नेता कामरेड प्रकाश करात ने चीन के
बनिस्पत देश के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को ज्यादा खतरनाक बताया है।
संत लक्ष्मणानंद की हत्या कम्युनिस्टों और ईसाई मिशनरी गठजोड़ का प्रमाण थी।
केरल
में, आंध्र प्रदेश में, उडीसा में, बिहार और झारखंड में, छातीसगढ में,
त्रिपुरा में यानी जहाँ भी #साम्यवादी हावी हैं। वहां इनके टारगेट में
राष्ट्रवादी हैं और आरएसएस कार्यकर्ताओं की हत्या इनके एजेंडे में शमिल है।
देश
की अस्मिता की बात करने वालों को अमेरिकी एजेंट ठहराना और देश के अंदर
#साम्यवादी चरंपथी, #इस्लामी जेहादी तथा ईसाई चरमपंथियों का समर्थन करना इस
देश के साम्यवादियों की कार्य संस्कृति का अंग है।
ये
वही #साम्यवादी हैं जिन्होंने सन 62 की लडाई में हथियार कारखानों में
हडताल का षडयंत्र किया था, ये वही साम्यवादी हैं जिन्होंने कारगिल की लडाई
को भाजपा का षडयंत्र बताया था।
ये वही #साम्यवादी हैं जिन्होंने पाकिस्तान के निर्माण को जायज ठहराया था।
ये वही #साम्यवादी हैं जो यह मानते हैं कि आज भी देश गुलाम है और इसे चीन की ही सेना मुक्त करा सकती है।
ये वही #साम्यवादी हैं जो बाबा पशुपतिनाथ मंदिर पर हुए माओवादी हमले का समर्थन कर रहे थे।
ये वही #साम्यवादी हैं जो महान संत लक्ष्मणानंद सरस्वती को आतंकवादी ठहरा रहे हैं।
ये
वही #साम्यवादी हैं जो बिहार में पूंजीपतियों से मिलकर किसानों की हत्या
करा रहे हैं, ये वही साम्यवादी हैं जिन्होंने महात्मा गांधी को बुर्जुवा
कहा।
अतः राष्ट्रविरोधी #वामपंथी और उनके विचारधाराओं से सावधान रहें नही तो ये देश के टुकड़े कर देंगे ।
Official Azaad Bharat Links:👇🏻
🔺Youtube : https://goo.gl/XU8FPk
🔺 Twitter : https://goo.gl/he8Dib
🔺 Instagram : https://goo.gl/PWhd2m
🔺Google+ : https://goo.gl/Nqo5IX
🔺Blogger : https://goo.gl/N4iSfr
🔺 Word Press : https://goo.gl/ayGpTG
🔺Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ
   🚩🇮🇳🚩 आज़ाद भारत🚩🇮🇳🚩

सावधान!!! भारतवासियों को परोसा जा रहा स्लो प्वॉइजन..!!

सावधान!!! भारतवासियों को परोसा जा रहा स्लो प्वॉइजन..!!
26 मई 2017
आप इस शीर्षक से चौक गयें होंगे कि कैसे हमे स्लो #प्वॉइजन दिया जा रहा है?
हां, ये बात यथार्थ सत्य है कि भले आप इसे समझ नही पा रहें लेकिन आप और आपकी आने वाली पीढ़ी खतरे में है ।
अब आपके मन में सवाल उठेगा कि स्लो #पॉइजन कैसे और क्यों दिया जा रहा ?
आपको बता दें कि ये पॉइजन शारीरिक नही बल्कि मानसिक आघात पहुंचाने वाला है ।
यह स्लो #पॉइजन प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक #मीडिया द्वारा दिया जा रहा, जो हमारा ब्रेन वाश करने का कार्य कर रहा।
कैसे?
आपने
#”आज तक” चैनल की खबरें टीवी द्वारा या ऑनलाइन देखी या पढ़ी होंगी उसमें
अधिकतर भारतीय संस्कृति के विरोध में ही खबरें प्रसारित की जाती हैं।
आइये आपको बताते हैं, कौन सी खबरें हैं जो  हमें गुमराह कर रही हैं?
आज तक ने ये प्रसारित किया कि AIMIM प्रमुख असदुद्दीन #ओवैसी बड़े देशभक्त हैं।
उससे
ठीक विपरीत देशभक्त, गायक अभिजीत , अनुपम खेर, सोनू निगम आदि को कोई काम
नही हैं इसलिए वे ऐसी ट्वीट करते है और वे देश में अशान्ति फैलाते हैं ।
 #ओवैसी
बोलता है कि , गर्दन काट दो तो भी भारत माता की जय नही बोलूंगा वही  गायक
अभिजीत और अनुपम खेर देश हित की बात करते हैं अब आप ही बताइए गायक अभिजीत
देश भक्त हैं या #ओवैसी?
दूसरी एक खबर में प्रसारित किया गया था कि दंगल, Pk आदि अच्छी फिल्मे हैं वही बाहुबली-2 अच्छी फिल्म नही है ।
भारतीय
संस्कृति अनुसार बनाई गई फिल्म बाहुबली को घटिया फिल्म बताया जा रहा और
हिन्दू विरोधी# Pk आदि फिल्म को बढ़िया बताया जा रहा , और तो और बाहुबली के
खिलाफ कई मनगढंत खबरें भी प्रसारित की गई ।
तीसरी
एक खबर में लिखा था कि उत्तर प्रदेश में योगीजी की सरकार आई है तब से
मुस्लिमों को घरवापसी करवाया जा रहा है जबकि 46 मुस्लिमों ने अपने धर्म से
तंग आकर अपनी मर्जी से #हिन्दू धर्म में वापसी की है।
लेकिन
इसके विपरीत जब उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में 300 हिंदुओं का मिशनरियों
द्वारा #धर्मपरिवर्तन किया गया  तब एक भी खबर नही दिखाई गई और अभी नागपुर
में 60 मासूम हिन्दू बच्चों का ईसाई पादरी धर्म परिवर्तन करवा रहे थे तब एक
भी खबर नही दिखाई गई, ऐसे तो देश में विभिन्न स्थानों मे ईसाई मिशनरियां
लालच देकर हररोज #धर्मपरिवर्तन करवाती हैं, लेकिन उसके खिलाफ कोई खबर नही
बनती है और मुस्लिम या ईसाई धर्म के लोग अपनी मर्जी से #हिन्दू धर्म में
वापसी करते हैं तो दिन-रात खबरें बनाते हैं
चौथी
एक खबर में लिखा था कि #हिन्दू धर्म के स्वामी नित्यानन्द, संत आसारामजी
बापू, गुरमीत राम रहीम आदि साधु-संत सैक्स सकैंडल में लिप्त हैं । जबकि
सच्चाई ये है कि इन साधु-संतों पर एक भी आरोप सिद्ध नही हुए हैं।
लेकिन
इसके विपरीत चर्च के #ईसाई पादरी, मुस्लिम मौलवी कितने ही हैं जिनपर  छोटे
बच्चे-बच्चियों के साथ दुष्कर्म के अपराध सिद्ध हो चुके हैं, उनको कोर्ट
ने सजा भी सुनाई है उन्होंने अपने कुकर्म को कबूल भी कर लिया है लेकिन इसकी
एक भी खबर नही दिखाई गई ।
इनकी
खबरें हमेशा कामवासना भड़ाकाने वाली होती हैं और फिर बोलते हैं कि इतने
अपराध क्यों होते हैं जबकि सच्चाई यह है कि वे खबरें ही ऐसी दिखाते हैं कि
सज्जन पुरुष-महिला भी ऐसी खबरें और #विज्ञापन देखकर कामुक हो जाते हैं ।
#बीबीसी
ने आज एक खबर लिखी कि भारत से ज्यादा खुशहाली पाकिस्तान में है जबकि
पाकिस्तान से लौटी उज्मा ने बताया कि पाकितान नर्क से भी बदतर है और वहाँ
हररोज बम ब्लास्ट होते रहते हैं । तो फिर वहां खुशहाली कैसे हो सकती है ??
जबकि सच्चाई यह है कि भारत के लोग जितने खुश हैं उतने दुनिया के किसी भी देश में नही होंगे ।
#बीबीसी
ने लिखा  कि भारत में सनातन संस्था, बजरंगदल, विश्व हिन्दू परिषद,
आर.आर.एस आदि हिन्दू संगठनों में बेरोजगार युवक एवं गुंडे जुड़ते हैं और देश
में हिंसा करते हैं ।
लेकिन
सच्चाई यह है कि हिन्दू संगठन में पढ़े लिखे बुद्धिमान व्यक्ति होते हैं और
देश में जो अशान्ति फैलाते हैं,उनको ठीक करते हैं और देश में शांति की
स्थापना करते हैं । वहीं दूसरी ओर दंगा तो #मुस्लिम करवाते हैं जैसा कि
हमने देखा कि कश्मीर में से पण्डितों को भगा दिया गया, देश मे कई स्थानों
से #मुस्लिम आतंक से भयभीत होकर हिंदुओं ने पलायन किया है । गोधरा कांड,
सहारनपुर हिंसा आदि और हिंदुओं के जुलुस पर पथराव करना, हिंदुओं की
बहन-बेटियों के साथ छेड़खानी करना ये सब तो मुसलमान ही करवाते हैं फिर भी
देश में शांति की स्थापना करने वाले हिन्दू सगठनों पर उंगली उठाई जा रही है
और मुस्लिमों के कुकृत्यों को छुपाया जा रहा है ।
भारत
के लुटेरे बाबर द्वारा #राम मंदिर तोड़कर बनाई गई बाबरी मस्जिद के गिरने पर
#मीडिया छाती पिटती है और राम मंदिर का विरोध करती है ।
कुल मिलाकर आपको #मीडिया की खबरों द्वारा ऐसा मानसिक स्लो पॉइजन दिया जा रहा कि आपको पता ही नही चल पा रहा है कि सच्चाई क्या है !!
अधिकतर
#मीडिया  विदेशी फंड द्वारा संचालित होते हैं , जिनका लक्ष्य है महान
भारतीय संस्कृति को नष्ट करके फिर से भारत को गुलाम बनाना ।
अतः
हिन्दुस्तानी सावधान रहें, ऐसे न्यूज चैनलों की वेबसाइट पर जाना बन्द
करें, इनके पेज को डिसलाइक करें और न्यूज चैनल देखना बन्द करें। तभी इनको
पता चलेगा कि हर हिन्दुस्तानी सतर्क है हमारा #षडयंत्र यहाँ नही चलेगा ।
#सुदर्शन न्यूज़ चैनल आदि राष्ट्रवादी चैनल ही देखें बाकी न्यूज चैनल देखना बन्द करें ।
सरकार को भी इन बिकाऊ #मीडिया पर शीघ्र अंकुश लगाना चाहिए , नही तो ये देश की #संस्कृति तोड़ने में सफल हो जाएंगे ।
अभी नही चेते तो भविष्य में इतना नुकसान होगा कि भरपाई करना भी मुश्किल होगा ।
जय हिन्द!!
Official Azaad Bharat Links:👇🏻
🔺Youtube : https://goo.gl/XU8FPk
🔺 Twitter : https://goo.gl/he8Dib
🔺 Instagram : https://goo.gl/PWhd2m
🔺Google+ : https://goo.gl/Nqo5IX
🔺Blogger : https://goo.gl/N4iSfr
🔺 Word Press : https://goo.gl/ayGpTG
🔺Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ
   🚩🇮🇳🚩 आज़ाद भारत🚩🇮🇳🚩

श्री गुरु अर्जुन देवजी शहीदी दिवस – 8 जून

श्री गुरु अर्जुन देवजी शहीदी दिवस – 8 जून
शक्ति
और शांति के पुंज, शहीदों के सरताज, सिखों के पांचवें गुरु श्री अर्जुन
देव जी की शहादत अतुलनीय है। मानवता के सच्चे सेवक, धर्म के रक्षक, शांत और
गंभीर स्वभाव के स्वामी श्री गुरु अर्जुन देव जी अपने युग के सर्वमान्य
लोकनायक थे। वह दिन-रात संगत की सेवा में लगे रहते थे। श्री गुरु अर्जुन
देव जी सिख धर्म के पहले शहीद थे।
Arjun Dev Shahidi diwas
#भारतीय #दशगुरु परम्परा के #पंचम #गुरु श्री गुरु अर्जुनदेव जी गुरु #रामदास के #सुपुत्र थे। उनकी माता का नाम बीवी भानी जी था।
उनका
जन्म 15 अप्रैल, 1563 ई. को हुआ था। प्रथम सितंबर 1581 को वे गुरु गद्दी
पर विराजित हुए। 8 जून 1606 को उन्होंने #धर्म व सत्य की रक्षा के लिए 43
वर्ष की आयु में अपने प्राणों की आहुति दे दी।
 संपादन कला के गुणी गुरु अर्जुन देव जी ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का
संपादन भाई गुरदास की सहायता से किया। उन्होंने रागों के आधार पर श्री
ग्रंथ साहिब जी में संकलित वाणियों का जो वर्गीकरण किया है, उसकी मिसाल
मध्यकालीन धार्मिक ग्रंथों में दुर्लभ है। यह उनकी सूझ-बूझ का ही प्रमाण है
कि श्री ग्रंथ साहिब जी में 36 महान वाणीकारों की वाणियां बिना किसी
भेदभाव के संकलित हुई । श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के कुल 5894 शब्द हैं,
जिनमें 2216 शब्द श्री गुरु अर्जुन देव जी महाराज के हैं। पवित्र बीड़ रचने
का कार्य सम्वत 1660 में शुरू हुआ तथा 1661 सम्वत में यह कार्य संपूर्ण हो
गया।
 ग्रंथ साहिब के संपादन को लेकर कुछ असामाजिक तत्वों ने अकबर बादशाह के पास
यह शिकायत की कि ग्रंथ में इस्लाम के खिलाफ लिखा गया है, लेकिन बाद में जब
अकबर को वाणी की महानता का पता चला, तो उन्होंने भाई गुरदास एवं बाबा
बुढ्ढाके माध्यम से 51 मोहरें भेंट कर खेद ज्ञापित किया।
#अकबर
की सम्वत 1662 में हुई #मौत के बाद उसका पुत्र #जहांगीर गद्दी पर बैठा जो
बहुत ही कट्टर विचारों वाला था। अपनी आत्मकथा ‘#तुजुके_जहांगीरी’ में उसने
स्पष्ट लिखा है कि वह गुरु अर्जुन देव जी के बढ़ रहे प्रभाव से बहुत दुखी
था। इसी दौरान जहांगीर का पुत्र #खुसरो बगावत करके आगरा से पंजाब की ओर आ
गया।
,जहांगीर
को यह सूचना मिली थी कि गुरु अर्जुन देव जी ने खुसरो की मदद की है इसलिए
उसने15 मई 1606 ई. को गुरु जी को परिवार सहित पकड़ने का हुक्म जारी किया।
उनका परिवार मुरतजाखान के हवाले कर घरबार लूट लिया गया। इसके बाद गुरु जी
ने शहीदी प्राप्त की। अनेक कष्ट झेलते हुए गुरु जी शांत रहे, उनका मन एक
बार भी कष्टों से नहीं घबराया।
गुरु
अर्जुन देव जी को लाहौर में 8 जून 1606 ई. को भीषण गर्मी के दौरान ‘यासा’
के तहत लोहे की गर्म तवी पर बिठाकर #शहीद कर दिया गया। यासा के अनुसार किसी
व्यक्ति का #रक्त #धरती पर गिराए बिना उसे यातनाएं देकर शहीद कर दिया जाता
है।
 गुरु जी के शीश पर गर्म-गर्म रेत डाली गई। जब गुरु जी का शरीर अग्नि के
कारण बुरी तरह से जल गया तो इन्हें ठंडे पानी वाले रावी दरिया में नहाने के
लिए भेजा गया, जहां गुरु जी का पावन शरीर रावी में आलोप हो गया। जिस स्थान
पर आप ज्योति ज्योत समाए उसी स्थान पर लाहौर में रावी नदी के किनारे
गुरुद्वारा डेरा साहिब (जो अब पाकिस्तान में है) का निर्माण किया गया है।
गुरुजी ने लोगों को #विनम्र रहने का #संदेश दिया। आप विनम्रता के पुंज थे।
कभी भी आपने किसी को #दुर्वचन नहीं बोले।
 #गुरबाणी में आप फर्माते हैं :
‘तेरा कीता जातो नाही मैनो जोग कीतोई॥
मै निरगुणिआरे को गुण नाही आपे तरस पयोई॥
तरस पइया मिहरामत होई सतगुर साजण मिलया॥
नानक नाम मिलै ता जीवां तनु मनु थीवै हरिया॥’
श्री
गुरु अर्जुनदेव जी की #शहादत के समय दिल्ली में मध्य एशिया के मुगल वंश के
जहांगीर का राज था और उन्हें राजकीय कोप का ही शिकार होना पड़ा। जहांगीर
ने श्री गुरु अर्जुनदेव जी को मरवाने से पहले उन्हें अमानवीय यातानाएं दी।
मसलन
चार दिन तक #भूखा रखा गया। ज्येष्ठ मास की तपती दोपहर में उन्हें तपते रेत
पर बिठाया गया। उसके बाद खोलते पानी में रखा गया। परन्तु श्री गुरु
अर्जुनदेव जी ने एक बार भी उफ तक नहीं की और इसे परमात्मा का विधान मानकर
स्वीकार किया।
#बाबर
ने तो श्री गुरु नानक जी को भी कारागार में रखा था। लेकिन श्री गुरु
#नानकदेव जी ने तो पूरे देश में घूम-घूम कर हताश हुई जाति में नई प्राण
चेतना फूंक दी। जहांगीर के अनुसार उनका परिवार #मुरतजाखान के हवाले कर लूट
लिया गया। इसके बाद गुरु जी ने #शहीदी प्राप्त की। अनेक कष्ट झेलते हुए
गुरु जी शांत रहे, उनका मन एक बार भी कष्टों से नहीं घबराया ।
तपता
तवा उनके शीतल स्वभाव के सामने सुखदाई बन गया। तपती रेत ने भी उनकी निष्ठा
भंग नहीं की। गुरु जी ने प्रत्येक कष्ट हंसते-हंसते झेलकर यही अरदास की-
तेरा कीआ मीठा लागे॥ हरि नामु पदारथ नाटीयनक मांगे॥
जहांगीर
द्वारा श्री गुरु अर्जुनदेव जी को दिए गए #अमानवीय #अत्याचार और अन्त में
उनकी मृत्यु जहांगीर की योजना का हिस्सा थी । श्री गुरु अर्जुनदेव जी
जहांगीर की असली योजना के अनुसार ‘#इस्लाम के अन्दर’ तो क्या आते, इसलिए
उन्होंने विरोचित शहादत के मार्ग का चयन किया। इधर जहांगीर की आगे की तीसरी
पीढ़ी या फिर मुगल वंश के बाबर की छठी पीढ़ी औरंगजेब तक पहुंची। उधर श्री
#गुरुनानकदेव जी की दसवीं पीढ़ी श्री गुरु गोविन्द सिंह तक पहुंची।
यहां तक पहुंचते-पहुंचते ही श्री नानकदेव की दसवीं पीढ़ी ने मुगलवंश की नींव में #डायनामाईट रख दिया और उसके नाश का इतिहास लिख दिया।
#संसार
जानता है कि मुट्ठी भर मरजीवड़े सिंघ रूपी खालसा ने 700 साल पुराने विदेशी
वंशजों को मुगल राज सहित सदा के लिए #ठंडा कर दिया।
100
वर्ष बाद महाराजा #रणजीत सिंह के नेतृत्व में भारत ने पुनः स्वतंत्रता की
सांस ली। शेष तो कल का #इतिहास है, लेकिन इस पूरे संघर्षकाल में पंचम गुरु
श्री गुरु अर्जुनदेव जी की #शहादत सदा सर्वदा सूर्य के ताप की तरह प्रखर
रहेगी।
गुरु
जी शांत और गंभीर स्वभाव के स्वामी थे। वे अपने युग के सर्वमान्य #लोकनायक
थे । मानव-कल्याण के लिए उन्होंने आजीवन शुभ कार्य किए।
गुरु
जी के शहीदी पर्व पर उन्हें याद करने का अर्थ है, धर्म की रक्षा
आत्म-बलिदान देने को भी तैयार रहना। उन्होंने संदेश दिया कि महान जीवन
मूल्यों के लिए आत्म-बलिदान देने को सदैव तैयार रहना चाहिए, तभी कौम और
#राष्ट्र अपने गौरव के साथ जीवंत रह सकते हैं।
Official Azaad Bharat Links:👇🏻

महाराणा प्रताप जयंती 28 मई

महाराणा प्रताप जयंती 28 मई

 

महाराणा प्रतापका परिचय
maharana pratap

 

जिनका
नाम लेकर दिनका शुभारंभ करे, ऐसे नामोंमें एक हैं, महाराणा प्रताप । उनका
नाम उन पराक्रमी राजाओंकी सूचिमें सुवर्णाक्षरोंमें लिखा गया है, जो देश,
धर्म, संस्कृति तथा इस देशकी स्वतंत्रताकी रक्षा हेतु जीवनभर जूझते रहे !
उनकी वीरताकी पवित्र स्मृतिको यह विनम्र अभिवादन  है ।
मेवाडके
महान राजा, महाराणा प्रताप सिंहका नाम कौन नहीं जानता ? भारतके इतिहासमें
यह नाम वीरता, पराक्रम, त्याग तथा देशभक्ति जैसी विशेषताओं हेतु निरंतर
प्रेरणादाई रहा है । मेवाडके सिसोदिया परिवारमें जन्मे अनेक पराक्रमी
योद्धा, जैसे बाप्पा रावल, राणा हमीर, राणा संगको ‘राणा’ यह उपाधि दी गई;
अपितु ‘ महाराणा ’ उपाधिसे  केवल प्रताप सिंहको सम्मानित किया गया ।
महाराणा प्रतापका बचपन
महाराणा
प्रतापका जन्म वर्ष 1540 में हुआ । मेवाडके राणा उदय सिंह, द्वितीय, के ३३
बच्चे थे । उनमें प्रताप सिंह सबसे बडे थे । स्वाभिमान तथा धार्मिक आचरण
प्रताप सिंहकी विशेषता थी । महाराणा प्रताप बचपनसे ही ढीठ तथा बहादूर थे;
बडा होनेपर यह एक महापराक्रमी पुरुष बनेगा, यह सभी जानते थे । सर्वसाधारण
शिक्षा लेनेसे खेलकूद एवं हथियार बनानेकी कला सीखनेमें उसे अधिक रुचि थी ।
महाराणा प्रतापका राज्याभिषेक !
महाराणा
प्रताप सिंहके कालमें देहलीपर अकबर बादशाहका शासन था । हिंदू राजाओंकी
शक्तिका उपयोग कर दूसरे  हिंदू राजाओंको अपने नियंत्रणमें लाना, यह उसकी
नीति थी । कई रजपूत राजाओंने अपनी महान परंपरा तथा लडनेकी वृत्ति छोडकर
अपनी बहुओं तथा कन्याओंको अकबरके अंत:पूरमें भेजा ताकि उन्हें अकबरसे इनाम
तथा मानसम्मान मिलें । अपनी मृत्यूसे पहले उदय सिंगने उनकी सबसे छोटी
पत्नीका बेटा जगम्मलको राजा घोषित किया; जबकि प्रताप सिंह जगम्मलसे बडे थे,
प्रभु रामचंद्र जैसे अपने छोटे भाईके लिए अपना अधिकार छोडकर मेवाडसे निकल
जानेको तैयार थे । किंतु सभी सरदार राजाके निर्णयसे सहमत नहीं हुए । अत:
सबने मिलकर यह निर्णय लिया कि जगमलको सिंहासनका त्याग करना पडेगा । महाराणा
प्रताप सिंहने भी सभी सरदार तथा लोगोंकी इच्छाका आदर करते हुए मेवाडकी
जनताका नेतृत्व करनेका दायित्व स्वीकार किया ।
महाराणा प्रतापकी अपनी मातृभूमिको मुक्त करानेकी अटूट प्रतिज्ञा !
महाराणा प्रताप का वजन 110 किलो, लम्बाई 7’5”थी, दो म्यान वाली तलवार और 80 किलो का भाला रखते थे ।
महाराणा
प्रतापके शत्रुओंने मेवाडको चारों ओरसे घेर लिया था । महाराणा प्रतापके दो
भाई, शक्ति सिंह एवं जगमल अकबरसे मिले हुए थे । सबसे बडी समस्या थी आमने-
सामने लडने हेतु सेना खडी करना, जिसके लिए बहुत धनकी आवश्यकता थी ।
महाराणा
प्रतापकी सारी संदूके खाली थीं, जबकी अकबरके पास बहुत बडी सेना, अत्यधिक
संपत्ति तथा और भी सामग्री बडी मात्रामें थी । किंतु महाराणा प्रताप निराश
नहीं हुए अथवा कभी भी ऐसा नहीं सोचा कि वे अकबरसे किसी बातमें न्यून(कम)
हैं ।
महाराणा
प्रतापको एक ही चिंता थी, अपनी मातभूमिको मुगलोंके चंगुलसे मुक्त कराणा था
। एक दिन उ्न्होंने अपने विश्वासके सारे सरदारोंकी बैठक बुलाई तथा अपने
गंभीर एवं वीरतासे भरे शब्दोंमें उनसे आवाहन किया ।
उन्होंने
कहा,‘ मेरे बहादूर बंधुआ, अपनी मातृभूमि, यह पवित्र मेवाड अभी भी मुगलोंके
चंगुलमें है । आज मैं आप सबके सामने प्रतिज्ञा करता हूं कि, जबतक चितौड
मुक्त नहीं हो जाता, मैं सोने अथवा चांदीकी थालीमें खाना नहीं खाऊंगा,
मुलायम गद्देपर नहीं सोऊंगा तथा राजप्रासादमें भी नहीं रहुंगा; इसकी
अपेक्षा मैं पत्तलपर खाना खाउंगा, जमीनपर सोउंगा तथा झोपडेमें रहुंगा ।
जबतक चितौड मुक्त नहीं हो जाता, तबतक मैं दाढी भी नहीं बनाउंगा । मेरे
पराक्रमी वीरों, मेरा विश्वास है कि आप अपने तन-मन-धनका त्याग कर यह
प्रतिज्ञा पूरी होनेतक मेरा साथ दोगे ।
अपने
राजाकी प्रतिज्ञा सुनकर सभी सरदार प्रेरित हो गए, तथा उन्होंने अपने
राजाकी तन-मन-धनसे सहायता करेंगे तथा शरीरमें  रक्तकी आखरी बूंदतक उसका साथ
देंगे; किसी भी परिस्थितिमें मुगलोंसे चितौड मुक्त होनेतक अपने ध्येयसे
नहीं हटेंगे, ऐसी प्रतिज्ञा की  । उन्होंने महाराणासे कहा, विश्वास करो, हम
सब आपके साथ हैं, आपके एक संकेतपर अपने प्राण न्यौछावर कर देंगे ।
अकबर
अपने महल में जब वह सोता था तब महाराणा प्रताप का नाम सुनकर रात में नींद
में कांपने लगता था। अकबर की हालत देख उसकी पत्नियां भी घबरा जाती, इस
दौरान वह जोर-जोर से महाराणा प्रताप का नाम लेता था।
हल्दीघाटकी लडाई महाराणा प्रताप एक महान योद्धा
अकबरने
महाराणा प्रतापको अपने चंगुलमें लानेका अथक प्रयास किया किंतु सब व्यर्थ
सिद्ध हुआ! महाराणा प्रतापके साथ जब कोई समझौता नहीं हुआ, तो अकबर अत्यंत
क्रोधित हुआ और उसने युद्ध घोषित किया । महाराणा प्रतापने भी सिद्धताएं
आरंभ कर दी । उसने अपनी राजधानी अरवली पहाडके दुर्गम क्षेत्र कुंभलगढमें
स्थानांतरित की । महाराणा प्रतापने अपनी सेनामें आदिवासी तथा जंगलोंमें
रहनेवालोंको भरती किया । इन लोगोंको युद्धका कोई  अनुभव नहीं था, किंतु
उसने उन्हें प्रशिक्षित किया । उसने सारे रजपूत सरदारोंको मेवाडके
स्वतंत्रताके झंडेके नीचे इकट्ठा होने हेतु आवाहन किया ।
महाराणा
प्रतापके 22,000 सैनिक अकबरकी 80,000 सेनासे हल्दीघाटमें भिडे । महाराणा
प्रताप तथा उसके सैनिकोंने युद्धमें बडा पराक्रम दिखाया किंतु उसे पीछे
हटना पडा। अकबरकी सेना भी राणा प्रतापकी सेनाको पूर्णरूपसे पराभूत करनेमें
असफल रही । महाराणा प्रताप एवं उसका विश्वसनीय घोडा ‘ चेतक ’ इस युद्धमें
अमर हो गए । हल्दीघाटके युद्धमें ‘ चेतक ’ गंभीर रुपसे घायल हो गया था;
किंतु अपने स्वामीके प्राण बचाने हेतु उसने एक नहरके उस पार लंबी छलांग
लगाई । नहरके पार होते ही ‘ चेतक ’ गिर गया और वहीं उसकी मृत्यु  हुई । इस
प्रकार अपने प्राणोंको संकटमें डालकर उसने राणा प्रतापके प्राण बचाएं ।
लोहपुरुष महाराणा अपने विश्वसनीय घोडेकी मृत्यूपर एक बच्चेकी तरह फूट-फूटकर
रोया ।
तत्पश्चात
जहां चेतकने अंतिम सांस ली थी वहां उसने एक सुंदर उद्यानका निर्माण किया ।
अकबरने महाराणा प्रतापपर आक्रमण किया किंतु छह महिने युद्धके उपरांत भी
अकबर महाराणाको पराभूत न कर सका; तथा वह देहली लौट गया । अंतिम उपायके
रूपमें अकबरने एक पराक्रमी योद्धा सरसेनापति जगन्नाथको 1584 में बहुत बडी
सेनाके साथ मेवाडपर भेजा, दो वर्षके अथक प्रयासोंके पश्चात भी वह राणा
प्रतापको नहीं पकड सका ।
महाराणा प्रतापका कठोर प्रारब्ध
जंगलोंमें
तथा पहाडोंकी घाटियोंमें भटकते हुए राणा प्रताप अपना परिवार अपने साथ रखते
थे । शत्रूके कहींसे भी तथा कभी भी आक्रमण करनेका संकट सदैव  बना रहता था ।
जंगलमें ठीकसे खाना प्राप्त होना बडा कठिन था । कई बार उन्हें खाना छोडकर,
बिना खाए-पिए ही प्राण बचाकर जंगलोंमें भटकना पडता था ।
शत्रूके
आनेकी खबर मिलते ही एक स्थानसे दूसरे स्थानकी ओर भागना पडता था । वे सदैव
किसी न किसी संकटसे घिरे रहते थे ।  एक बार महारानी जंगलमें रोटियां  सेंक
रही थी; उनके खानेके बाद उसने अपनी बेटीसे कहा कि, बची हुई रोटी रातके
खानेके लिए रख दे; किंतु उसी समय एक जंगली बिल्लीने झपट्टा मारकर रोटी छीन
ली और राजकन्या असहायतासे रोती रह गई । रोटीका वह टुकडा भी उसके
प्रारब्धमें नहीं था । राणा प्रतापको बेटीकी यह स्थिति देखकर बडा दुख हुआ,
अपनी वीरता, स्वाभिमानपर उसे बहुत क्रोध आया तथा विचार करने लगा कि उसका
युद्ध करना कहांतक उचित है ! मनकी इस द्विधा स्थितिमें उसने अकबरके साथ
समझौता करनेकी बात मान ली ।
पृथ्वीराज,
अकबरके दरबारका एक कवी जिसे राणा प्रताप बडा प्रिय था, उसने राजस्थानी
भाषामें राणा प्रतापका आत्मविश्वास बढाकर उसे अपने निर्णयसे परावृत्त
करनेवाला पत्र कविताके रुपमें लिखा । पत्र पढकर राणा प्रतापको लगा जैसे उसे
10,000 सैनिकोंका बल प्राप्त हुआ हो । उसका मन स्थिर तथा शांत हुआ ।
अकबरकी  शरणमें जानेका विचार उसने अपने मनसे निकाल दिया तथा अपने
ध्येयसिद्धि हेतु सेना अधिक संगठित करनेके प्रयास आरंभ किए ।
भामाशाहकी
महाराणाके प्रति भक्ति महाराणा प्रतापके वंशजोेंके दरबारमें एक रजपूत
सरदार था । राणा प्रताप जिन संकटोंसे मार्गक्रमण रहा था तथा जंगलोंमें भटक
रहा था, इससे वह बडा दुखी हुआ । उसने राणा प्रतापको  ढेर सारी संपत्ति दी,
जिससे वह 25,000 की सेना 12 वर्षतक रख सके । महाराणा प्रतापको बडा आनंद हुआ
एवं कृतज्ञता भी लगी ।
आरंभमें
महाराणा प्रतापने भामाशाहकी सहायता स्वीकार करनेसे मना किया किंतु उनके
बार-बार कहनेपर राणाने संपात्तिका स्वीकार किया । भामाशाहसे धन प्राप्त
होनेके पश्चात राणा प्रतापको दूसरे स्रोतसे धन प्राप्त होना आरंभ हुआ ।
उसने सारा धन अपनी सेनाका विस्तार करनेमें लगाया तथा चितोड छोडकर मेवाडको
मुक्त किया ।
अपने
शासनकाल में उन्होने युद्ध में उजड़े गाँवों को पुनः व्यवस्थित किया। नवीन
राजधानी चावण्ड को अधिक आकर्षक बनाने का श्रेय महाराणा प्रताप को जाता है।
राजधानी के भवनों पर कुम्भाकालीन स्थापत्य की अमिट छाप देखने को मिलती है।
पद्मिनी चरित्र की रचना तथा दुरसा आढा की कविताएं महाराणा प्रताप के युग को
आज भी अमर बनाये हुए हैं।
महाराणा प्रतापकी अंतिम इच्छा
महाराणा
प्रतापकी मृत्यु हो रही थी, तब वे घासके बिछौनेपर सोए थे, क्योंकि चितोडको
मुक्त करनेकी उनकी प्रतिज्ञा पूरी नहीं हुई थी । अंतिम क्षण उन्होंने अपने
बेटे अमर सिंहका हाथ अपने हाथमें लिया तथा चितोडको मुक्त करनेका दायित्व
उसे सौंपकर शांतिसे परलोक सिधारे । क्रूर बादशाह अकबरके साथ उनके युद्धकी
इतिहासमें कोई तुलना नहीं । जब लगभग पूरा राजस्थान मुगल बादशाह अकबरके
नियंत्रणमें था, महाराणा प्रतापने मेवाडको बचानेके लिए 12 वर्ष युद्ध किया
अकबरने
महाराणाको पराभूत करनेके लिए बहुत प्रयास किए किंतु अंततक वह अपराजित ही
रहा । इसके अतिरिक्त उसने राजस्थानका बहुत बडा क्षेत्र मुगलोंसे मुक्त किया
। कठिन संकटोंसे जानेके पश्चात भी उसने अपना तथा अपनी मातृभूमिका नाम
पराभूत होनेसे बचाया । उनका पूरा जीवन इतना उज्वल था कि स्वतंत्रताका दूसरा
नाम ‘ महाराणा प्रताप ’ हो सकता है । उनकी पराक्रमी स्मृतिको हम
श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं ।
महाराणा
प्रताप में अच्छे सेनानायक के गुणों के साथ-साथ अच्छे व्यस्थापक की
विशेषताएँ भी थी। अपने सीमित साधनों से ही अकबर जैसी शक्ति से दीर्घ काल तक
टक्कर लेने वाले वीर महाराणा प्रताप की मृत्यु पर अकबर भी दुःखी हुआ था।
आज
भी महाराणा प्रताप का नाम असंख्य भारतीयों के लिये #प्रेरणास्रोत है। राणा
प्रताप का स्वाभिमान भारत माता की पूंजी है। वह अजर अमरता के गौरव तथा
मानवता के विजय सूर्य है। राणा प्रताप की देशभक्ति, पत्थर की अमिट लकीर है।
ऐसे #पराक्रमी भारत माँ के वीर सपूत महाराणा प्रताप को #राष्ट्र का
#शत्-शत् नमन।
Official Azaad Bharat Links:👇🏻
🔺Youtube : https://goo.gl/XU8FPk
🔺 Twitter : https://goo.gl/he8Dib
🔺 Instagram : https://goo.gl/PWhd2m
🔺Google+ : https://goo.gl/Nqo5IX
🔺Blogger : https://goo.gl/N4iSfr
🔺 Word Press : https://goo.gl/ayGpTG
🔺Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ
   🚩🇮🇳🚩 आज़ाद भारत🚩🇮🇳
🚩

गंगा दशहरा प्रारम्भ : 26 मई, समाप्त : 4 जून

मां गंगा की महिमा
गंगा दशहरा प्रारम्भ : 26 मई, समाप्त : 4 जून
गंगा
नदी उत्तर भारतकी केवल जीवनरेखा नहीं, अपितु हिंदू धर्मका सर्वोत्तम तीर्थ
है । ‘आर्य सनातन वैदिक संस्कृति’ गंगाके तटपर विकसित हुई, इसलिए गंगा
हिंदुस्थानकी राष्ट्ररूपी अस्मिता है एवं भारतीय संस्कृतिका मूलाधार है ।
इस कलियुगमें श्रद्धालुओंके पाप-ताप नष्ट हों, इसलिए ईश्वरने उन्हें इस
धरापर भेजा है । वे प्रकृतिका बहता जल नहीं; अपितु सुरसरिता (देवनदी) हैं ।
उनके प्रति हिंदुओंकी आस्था गौरीशंकरकी भांति सर्वोच्च है । गंगाजी
मोक्षदायिनी हैं; इसीलिए उन्हें गौरवान्वित करते हुए पद्मपुराणमें (खण्ड ५,
अध्याय ६०, श्लोक ३९) कहा गया है, ‘सहज उपलब्ध एवं मोक्षदायिनी गंगाजीके
रहते विपुल धनराशि व्यय (खर्च) करनेवाले यज्ञ एवं कठिन तपस्याका क्या लाभ
?’ नारदपुराणमें तो कहा गया है, ‘अष्टांग योग, तप एवं यज्ञ, इन सबकी
अपेक्षा गंगाजीका निवास उत्तम है । गंगाजी भारतकी पवित्रताकी सर्वश्रेष्ठ
केंद्रबिंदु हैं, उनकी महिमा अवर्णनीय है ।’
ganga dashahara
मां गंगा का #ब्रह्मांड में उत्पत्ति
‘वामनावतारमें
श्रीविष्णुने दानवीर बलीराजासे भिक्षाके रूपमें तीन पग भूमिका दान मांगा ।
राजा इस बातसे अनभिज्ञ था कि श्रीविष्णु ही वामनके रूपमें आए हैं, उसने
उसी क्षण वामनको तीन पग भूमि दान की । वामनने विराट रूप धारण कर पहले पगमें
संपूर्ण पृथ्वी तथा दूसरे पगमें अंतरिक्ष व्याप लिया । दूसरा पग उठाते समय
वामनके ( #श्रीविष्णुके) बाएं पैरके अंगूठेके धक्केसे ब्रह्मांडका
सूक्ष्म-जलीय कवच (टिप्पणी १) टूट गया । उस छिद्रसे गर्भोदककी भांति
‘ब्रह्मांडके बाहरके सूक्ष्म-जलनेब्रह्मांडमें प्रवेश किया । यह सूक्ष्म-जल
ही गंगा है ! गंगाजीका यह प्रवाह सर्वप्रथम सत्यलोकमें गया ।ब्रह्मदेवने
उसे अपने कमंडलु में धारण किया । तदुपरांत सत्यलोकमें ब्रह्माजीने अपने
कमंडलुके जलसे श्रीविष्णुके चरणकमल धोए । उस जलसे गंगाजीकी उत्पत्ति हुई ।
तत्पश्चात गंगाजी की यात्रा सत्यलोकसे क्रमशः #तपोलोक, #जनलोक, #महर्लोक,
इस मार्गसे #स्वर्गलोक तक हुई ।
पृथ्वी पर उत्पत्ति
 #सूर्यवंशके राजा सगरने #अश्वमेध यज्ञ आरंभ किया । उन्होंने दिग्विजयके
लिए यज्ञीय अश्व भेजा एवं अपने ६० सहस्त्र पुत्रोंको भी उस अश्वकी रक्षा
हेतु भेजा । इस यज्ञसे भयभीत इंद्रदेवने यज्ञीय अश्वको कपिलमुनिके आश्रमके
निकट बांध दिया । जब सगरपुत्रोंको वह अश्व कपिलमुनिके आश्रमके निकट प्राप्त
हुआ, तब उन्हें लगा, ‘कपिलमुनिने ही अश्व चुराया है ।’ इसलिए सगरपुत्रोंने
ध्यानस्थ कपिलमुनिपर आक्रमण करनेकी सोची । कपिलमुनिको अंतर्ज्ञानसे यह बात
ज्ञात हो गई तथा अपने नेत्र खोले । उसी क्षण उनके नेत्रोंसे प्रक्षेपित
तेजसे सभी सगरपुत्र भस्म हो गए । कुछ समय पश्चात सगरके प्रपौत्र राजा
अंशुमनने सगरपुत्रोंकी मृत्युका कारण खोजा एवं उनके उद्धारका मार्ग पूछा ।
कपिलमुनिने अंशुमनसे कहा, ‘`गंगाजीको स्वर्गसे भूतलपर लाना होगा ।
सगरपुत्रोंकी अस्थियोंपर जब गंगाजल प्रवाहित होगा, तभी उनका उद्धार होगा
!’’ मुनिवरके बताए अनुसार गंगाको पृथ्वीपर लाने हेतु अंशुमनने तप आरंभ किया
।’  ‘अंशुमनकी मृत्युके पश्चात उसके सुपुत्र राजा दिलीपने भी गंगावतरणके
लिए तपस्या की । #अंशुमन एवं दिलीपके सहस्त्र वर्ष तप करनेपर भी गंगावतरण
नहीं हुआ; परंतु तपस्याके कारण उन दोनोंको स्वर्गलोक प्राप्त हुआ ।’
(वाल्मीकिरामायण, काण्ड १, अध्याय ४१, २०-२१)
‘राजा
दिलीपकी #मृत्युके पश्चात उनके पुत्र राजा भगीरथने कठोर तपस्या की । उनकी
इस तपस्यासे प्रसन्न होकर गंगामाताने भगीरथसे कहा, ‘‘मेरे इस प्रचंड
प्रवाहको सहना पृथ्वीके लिए कठिन होगा । अतः तुम भगवान शंकरको प्रसन्न करो
।’’ आगे भगीरथकी घोर तपस्यासे भगवान शंकर प्रसन्न हुए तथा भगवान शंकरने
गंगाजीके प्रवाहको जटामें धारण कर उसे पृथ्वीपर छोडा । इस प्रकार हिमालयमें
अवतीर्ण गंगाजी भगीरथके पीछे-पीछे #हरद्वार, प्रयाग आदि स्थानोंको पवित्र
करते हुए बंगालके उपसागरमें (खाडीमें) लुप्त हुईं ।’
ज्येष्ठ
मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि, भौमवार (मंगलवार) एवं हस्त नक्षत्रके शुभ
योगपर #गंगाजी स्वर्गसे धरतीपर अवतरित हुईं ।  जिस दिन #गंगा पृथ्वी पर
अवतरित हुईं वह दिन ‘गंगा दशहरा’ के नाम से जाना जाता है ।
जगद्गुरु
आद्य शंकराचार्यजी, जिन्होंने कहा है : एको ब्रह्म द्वितियोनास्ति ।
द्वितियाद्वैत भयं भवति ।। उन्होंने भी ‘गंगाष्टक’ लिखा है, गंगा की महिमा
गायी है । रामानुजाचार्य, रामानंद स्वामी, चैतन्य महाप्रभु और स्वामी
रामतीर्थ ने भी गंगाजी की बड़ी महिमा गायी है । कई साधु-संतों,
अवधूत-मंडलेश्वरों और जती-जोगियों ने गंगा माता की कृपा का अनुभव किया है,
कर रहे हैं तथा बाद में भी करते रहेंगे ।
अब
तो विश्व के #वैज्ञानिक भी गंगाजल का परीक्षण कर दाँतों तले उँगली दबा रहे
हैं ! उन्होंने दुनिया की तमाम नदियों के जल का परीक्षण किया परंतु गंगाजल
में रोगाणुओं को नष्ट करने तथा आनंद और सात्त्विकता देने का जो अद्भुत गुण
है, उसे देखकर वे भी आश्चर्यचकित हो उठे ।
 #हृषिकेश में स्वास्थ्य-अधिकारियों ने पुछवाया कि यहाँ से हैजे की कोई खबर
नहीं आती, क्या कारण है ? उनको बताया गया कि यहाँ यदि किसीको हैजा हो जाता
है तो उसको गंगाजल पिलाते हैं । इससे उसे दस्त होने लगते हैं तथा हैजे के
कीटाणु नष्ट हो जाते हैं और वह स्वस्थ हो जाता है । वैसे तो हैजे के समय
घोषणा कर दी जाती है कि पानी उबालकर ही पियें । किंतु गंगाजल के पान से तो
यह रोग मिट जाता है और केवल हैजे का रोग ही मिटता है ऐसी बात नहीं है, अन्य
कई रोग भी मिट जाते हैं । तीव्र व दृढ़ श्रद्धा-भक्ति हो तो गंगास्नान व
गंगाजल के पान से जन्म-मरण का रोग भी मिट सकता है ।
सन्
1947 में जलतत्त्व विशेषज्ञ कोहीमान भारत आया था । उसने वाराणसी से
#गंगाजल लिया । उस पर अनेक परीक्षण करके उसने विस्तृत लेख लिखा, जिसका सार
है – ‘इस जल में कीटाणु-रोगाणुनाशक विलक्षण शक्ति है ।’
दुनिया
की तमाम #नदियों के जल का विश्लेषण करनेवाले बर्लिन के डॉ. जे. ओ. लीवर ने
सन् 1924 में ही गंगाजल को विश्व का सर्वाधिक स्वच्छ और
#कीटाणु-रोगाणुनाशक जल घोषित कर दिया था ।
‘आइने
अकबरी’ में लिखा है कि ‘अकबर गंगाजल मँगवाकर आदरसहित उसका पान करते थे ।
वे गंगाजल को अमृत मानते थे ।’ औरंगजेब और मुहम्मद तुगलक भी गंगाजल का पान
करते थे । शाहनवर के नवाब केवल गंगाजल ही पिया करते थे ।
कलकत्ता
के हुगली जिले में पहुँचते-पहुँचते तो बहुत सारी नदियाँ, झरने और नाले
गंगाजी में मिल चुके होते हैं । अंग्रेज यह देखकर हैरान रह गये कि हुगली
जिले से भरा हुआ गंगाजल दरियाई मार्ग से यूरोप ले जाया जाता है तो भी कई-कई
दिनों तक वह बिगड़ता नहीं है । जबकि यूरोप की कई बर्फीली नदियों का पानी
हिन्दुस्तान लेकर आने तक खराब हो जाता है ।
अभी रुड़की विश्वविद्यालय के #वैज्ञानिक कहते हैं कि ‘गंगाजल में जीवाणुनाशक और हैजे के कीटाणुनाशक तत्त्व विद्यमान हैं ।’
फ्रांसीसी
चिकित्सक हेरल ने देखा कि गंगाजल से कई रोगाणु नष्ट हो जाते हैं । फिर
उसने गंगाजल को कीटाणुनाशक औषधि मानकर उसके इंजेक्शन बनाये और जिस रोग में
उसे समझ न आता था कि इस रोग का कारण कौन-से कीटाणु हैं, उसमें गंगाजल के वे
इंजेक्शन रोगियों को दिये तो उन्हें लाभ होने लगा !
संत #तुलसीदासजी कहते हैं :
गंग सकल मुद मंगल मूला । सब सुख करनि हरनि सब सूला ।।
(श्रीरामचरित. अयो. कां. : 86.2)
सभी
सुखों को देनेवाली और सभी शोक व दुःखों को हरनेवाली माँ गंगा के तट पर
स्थित तीर्थों में पाँच तीर्थ विशेष आनंद-उल्लास का अनुभव कराते हैं :
गंगोत्री, हर की पौड़ी (हरिद्वार),  #प्रयागराज त्रिवेणी, काशी और #गंगासागर
। #गंगादशहरे के दिन गंगा में गोता मारने से सात्त्विकता, प्रसन्नता और
विशेष पुण्यलाभ होता है ।
Official Azaad Bharat Links:👇🏻
🔺Youtube : https://goo.gl/XU8FPk
🔺 Twitter : https://goo.gl/he8Dib
🔺 Instagram : https://goo.gl/PWhd2m
🔺Google+ : https://goo.gl/Nqo5IX
🔺Blogger : https://goo.gl/N4iSfr
🔺 Word Press : https://goo.gl/ayGpTG
🔺Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ
   🚩🇮🇳🚩 आज़ाद भारत🚩🇮🇳🚩
vat savitri

वटसावित्री व्रत – अमावस्यांत पक्ष : 25 मई/वटसावित्री व्रतारम्भ (पूर्णिमांत पक्ष) : 6 जून

वटसावित्री-व्रत
वटसावित्री व्रत – अमावस्यांत पक्ष : 25 मई/वटसावित्री व्रतारम्भ (पूर्णिमांत पक्ष) : 6 जून
वट पूर्णिमा : 8 जून
24 मई 2017
यह
व्रत ‘स्कंद’ और ‘भविष्योत्तर’ पुराणाेंके अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल
पूर्णिमापर और ‘निर्णयामृत’ इत्यादि ग्रंथोंके अनुसार अमावस्यापर किया जाता
है । उत्तरभारतमें प्रायः अमावस्याको यह व्रत किया जाता है । अतः
महाराष्ट्रमें इसे ‘वटपूर्णिमा’ एवं उत्तरभारतमें इसे ‘वटसावित्री’के नामसे
जाना जाता है ।
वटसावित्री-व्रत
🚩पतिके
सुख-दुःखमें सहभागी होना, उसे संकटसे बचानेके लिए प्रत्यक्ष ‘काल’को भी
चुनौती देनेकी सिद्धता रखना, उसका साथ न छोडना एवं दोनोंका जीवन सफल बनाना,
ये स्त्रीके महत्त्वपूर्ण गुण हैं ।
🚩सावित्रीमें
ये सभी गुण थे । सावित्री अत्यंत तेजस्वी तथा दृढनिश्चयी थीं ।
आत्मविश्वास एवं उचित निर्णयक्षमता भी उनमें थी । राजकन्या होते हुए भी
सावित्रीने दरिद्र एवं अल्पायु सत्यवानको पतिके रूपमें अपनाया था; तथा उनकी
मृत्यु होनेपर यमराजसे शास्त्रचर्चा कर उन्होंने अपने पतिके लिए जीवनदान
प्राप्त किया था । जीवनमें यशस्वी होनेके लिए सावित्रीके समान सभी
सद्गुणोंको आत्मसात करना ही वास्तविक अर्थोंमें वटसावित्री व्रतका पालन
करना है ।
🚩वृक्षों
में भी भगवदीय चेतना का वास है, ऐसा दिव्य ज्ञान #वृक्षोपासना का आधार है ।
इस उपासना ने स्वास्थ्य, प्रसन्नता, सुख-समृद्धि, आध्यात्मिक उन्नति एवं
पर्यावरण संरक्षण में बहुत महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है ।
🚩वातावरण
में विद्यमान हानिकारक तत्त्वों को नष्ट कर वातावरण को शुद्ध करने में
वटवृक्ष का विशेष महत्त्व है । वटवृक्ष के नीचे का छायादार स्थल एकाग्र मन
से जप, ध्यान व उपासना के लिए प्राचीन काल से साधकों एवं #महापुरुषों का
प्रिय स्थल रहा है । यह दीर्घ काल तक अक्षय भी बना रहता है । इसी कारण
दीर्घायु, अक्षय सौभाग्य, जीवन में स्थिरता तथा निरन्तर अभ्युदय की
प्राप्ति के लिए इसकी आराधना की जाती है ।
🚩वटवृक्ष
के दर्शन, स्पर्श तथा सेवा से पाप दूर होते हैं; दुःख, समस्याएँ तथा रोग
जाते रहते हैं । अतः इस वृक्ष को रोपने से अक्षय पुण्य-संचय होता है ।
वैशाख आदि पुण्यमासों में इस वृक्ष की जड़ में जल देने से पापों का नाश होता
है एवं नाना प्रकार की सुख-सम्पदा प्राप्त होती है ।
🚩इसी
वटवृक्ष के नीचे सती सावित्री ने अपने पातिव्रत्य के बल से यमराज से अपने
मृत पति को पुनः जीवित करवा लिया था । तबसे ‘#वट-सावित्री’ नामक #व्रत
मनाया जाने लगा । इस दिन महिलाएँ अपने #अखण्ड #सौभाग्य एवं कल्याण के लिए
व्रत करती हैं ।
🚩व्रत-कथा
: सावित्री मद्र देश के राजा अश्वपति की पुत्री थी । द्युमत्सेन के पुत्र
सत्यवान से उसका विवाह हुआ था । विवाह से पहले देवर्षि नारदजी ने कहा था कि
सत्यवान केवल वर्ष भर जीयेगा । किंतु सत्यवान को एक बार मन से पति स्वीकार
कर लेने के बाद दृढ़व्रता सावित्री ने अपना निर्णय नहीं बदला और एक वर्ष तक
पातिव्रत्य धर्म में पूर्णतया तत्पर रहकर अंधेे सास-ससुर और अल्पायु पति
की प्रेम के साथ सेवा की । वर्ष-समाप्ति  के  दिन  सत्यवान  और  सावित्री
समिधा लेने के लिए वन में गये थे । वहाँ एक विषधर सर्प ने सत्यवान को डँस
लिया । वह बेहोश  होकर  गिर  गया । यमराज आये और सत्यवान के सूक्ष्म शरीर
को ले जाने लगे । तब सावित्री भी अपने पातिव्रत के बल से उनके पीछे-पीछे
जाने लगी ।
🚩यमराज द्वारा उसे वापस जाने के लिए कहने पर सावित्री बोली :
‘‘जहाँ
जो मेरे पति को ले जाय या जहाँ मेरा पति स्वयं जाय, मैं भी वहाँ जाऊँ यह
सनातन धर्म है । तप, गुरुभक्ति, पतिप्रेम और आपकी कृपा से मैं कहीं रुक
नहीं सकती । #तत्त्व को जाननेवाले विद्वानों ने सात स्थानों पर मित्रता कही
है । मैं उस मैत्री को दृष्टि में रखकर कुछ कहती हूँ, सुनिये । लोलुप
व्यक्ति वन में रहकर धर्म का आचरण नहीं कर सकते और न ब्रह्मचारी या
संन्यासी ही हो सकते हैं ।
🚩विज्ञान
(आत्मज्ञान के अनुभव) के लिए धर्म को कारण कहा करते हैं, इस कारण संतजन
धर्म को ही प्रधान मानते हैं । संतजनों के माने हुए एक ही धर्म से हम दोनों
श्रेय मार्ग को पा गये हैं ।’’
🚩सावित्री के वचनों से प्रसन्न हुए #यमराज से सावित्री ने अपने ससुर के अंधत्व-निवारण व बल-तेज की प्राप्ति का वर पाया ।
🚩सावित्री
बोली : ‘‘#संतजनों के सान्निध्य की सभी इच्छा किया करते हैं । संतजनों का
साथ निष्फल नहीं होता, इस कारण सदैव संतजनों का संग करना चाहिए ।’’
🚩यमराज : ‘‘तुम्हारा वचन मेरे मन के अनुकूल, बुद्धि और बल वर्धक तथा हितकारी है । पति के जीवन के सिवा कोई वर माँग ले ।’’
🚩सावित्री ने श्वशुर के छीने हुए राज्य को वापस पाने का वर पा लिया ।
🚩सावित्री
: ‘‘आपने प्रजा को नियम में बाँध रखा है, इस कारण आपको यम कहते हैं । आप
मेरी बात सुनें । मन-वाणी-अन्तःकरण से किसीके साथ वैर न करना, दान देना,
आग्रह का त्याग करना – यह संतजनों का सनातन धर्म है । संतजन वैरियों पर भी
दया करते देखे जाते हैं ।’’
🚩यमराज बोले : ‘‘जैसे प्यासे को पानी, उसी तरह तुम्हारे वचन मुझे लगते हैं । पति के जीवन के सिवाय दूसरा कुछ माँग ले ।’’
🚩सावित्री ने अपने निपूत पिता के सौ औरस कुलवर्धक पुत्र हों ऐसा वर पा लिया ।
🚩सावित्री
बोली : ‘‘चलते-चलते मुझे कुछ बात याद आ गयी है, उसे भी सुन लीजिये । आप
आदित्य के प्रतापी पुत्र हैं, इस कारण आपको विद्वान पुरुष ‘वैवस्वत’ कहते
हैं । आपका बर्ताव प्रजा के साथ समान भाव से है, इस कारण आपको ‘धर्मराज’
कहते हैं । मनुष्य को अपने पर भी उतना विश्वास नहीं होता जितना संतजनों में
हुआ करता है । इस कारण संतजनों पर सबका प्रेम होता है ।’’
🚩यमराज बोले : ‘‘जो तुमने सुनाया है ऐसा मैंने कभी नहीं सुना ।’’
🚩प्रसन्न
यमराज से सावित्री ने वर के रूप में सत्यवान से ही बल-वीर्यशाली सौ औरस
पुत्रों की प्राप्ति का वर प्राप्त किया । फिर बोली : ‘‘संतजनों की वृत्ति
सदा धर्म में ही रहती है । #संत ही सत्य से सूर्य को चला रहे हैं, तप से
पृथ्वी को धारण कर रहे हैं । संत ही भूत-भविष्य की गति हैं । संतजन दूसरे
पर उपकार करते हुए प्रत्युपकार की अपेक्षा नहीं रखते । उनकी कृपा कभी
व्यर्थ नहीं जाती, न उनके साथ में धन ही नष्ट होता है, न मान ही जाता है ।
ये बातें संतजनों में सदा रहती हैं, इस कारण वे रक्षक होते हैं ।’’
🚩यमराज
बोले : ‘‘ज्यों-ज्यों तू मेरे मन को अच्छे लगनेवाले अर्थयुक्त सुन्दर
धर्मानुकूल वचन बोलती है, त्यों-त्यों मेरी तुझमें अधिकाधिक भक्ति होती
जाती है । अतः हे पतिव्रते और वर माँग ।’’
🚩सावित्री
बोली : ‘‘मैंने आपसे पुत्र दाम्पत्य योग के बिना नहीं माँगे हैं, न मैंने
यही माँगा है कि किसी दूसरी रीति से पुत्र हो जायें । इस कारण आप मुझे यही
वरदान दें कि मेरा पति जीवित हो जाय क्योंकि पति के बिना मैं मरी हुई हूँ ।
पति के बिना मैं सुख, स्वर्ग, श्री और जीवन कुछ भी नहीं चाहती । आपने मुझे
सौ पुत्रों का वर दिया है व आप ही मेरे पति का हरण कर रहे हैं, तब आपके
वचन कैसे सत्य होंगे ? मैं वर माँगती हूँ कि सत्यवान जीवित हो जायें । इनके
जीवित होने पर आपके ही वचन सत्य होंगे ।’’
🚩यमराज ने परम प्रसन्न होकर ‘ऐसा ही हो’ यह  कह  के  सत्यवान  को  मृत्युपाश  से  मुक्त कर दिया ।
🚩व्रत-विधि
: इसमें #वटवृक्ष की पूजा की जाती है । विशेषकर सौभाग्यवती महिलाएँ
श्रद्धा के साथ ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी से पूर्णिमा तक अथवा कृष्ण त्रयोदशी
से अमावास्या तक तीनों दिन अथवा मात्र अंतिम दिन व्रत-उपवास रखती हैं । यह
कल्याणकारक  व्रत  विधवा,  सधवा,  बालिका, वृद्धा, सपुत्रा, अपुत्रा सभी
स्त्रियों को करना चाहिए ऐसा ‘स्कंद पुराण’ में आता है ।
🚩प्रथम
दिन संकल्प करें कि ‘मैं मेरे पति और पुत्रों की आयु, आरोग्य व सम्पत्ति
की प्राप्ति के लिए एवं जन्म-जन्म में सौभाग्य की प्राप्ति के लिए
वट-सावित्री व्रत करती हूँ ।’
🚩वट
के  समीप  भगवान #ब्रह्माजी,  उनकी अर्धांगिनी सावित्री देवी तथा सत्यवान
व सती सावित्री के साथ #यमराज का पूजन कर ‘नमो वैवस्वताय’ इस मंत्र को
जपते हुए वट की परिक्रमा करें । इस समय वट को 108 बार या यथाशक्ति सूत का
धागा लपेटें । फिर निम्न मंत्र से #सावित्री को अर्घ्य दें ।
🚩अवैधव्यं च  सौभाग्यं देहि  त्वं मम  सुव्रते । पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते ।।
🚩निम्न श्लोक से वटवृक्ष की प्रार्थना कर गंध, फूल, अक्षत से उसका पूजन करें ।
वट  सिंचामि  ते  मूलं सलिलैरमृतोपमैः । यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले ।
तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मां सदा ।।
🚩#भारतीय
#संस्कृति #वृक्षों  में  भी  छुपी  हुई भगवद्सत्ता  का  ज्ञान
करानेवाली,  ईश्वर  की सर्वश्रेष्ठ कृति- मानव के जीवन में आनन्द, उल्लास
एवं चैतन्यता भरनेवाली है ।
🚩(स्त्रोत्र : संत श्री आशारामजी आश्रम द्वारा प्रकाशित ऋषि प्रसाद, जून 2007)
🚩Official Azaad Bharat Links:👇🏻
🔺Youtube : https://goo.gl/XU8FPk
🔺 Twitter : https://goo.gl/he8Dib
🔺 Instagram : https://goo.gl/PWhd2m
🔺Google+ : https://goo.gl/Nqo5IX
🔺Blogger : https://goo.gl/N4iSfr
🔺 Word Press : https://goo.gl/ayGpTG
🔺Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ
   🚩🇮🇳🚩 आज़ाद भारत🚩🇮🇳🚩

इस्लामिक धर्मगुरुओं ने कहा :”हिन्दू संत बापू आसारामजी पर हो रहा अन्याय, समस्त इंसानियत पर कहर है”

इस्लामिक धर्मगुरुओं ने कहा :”हिन्दू संत बापू आसारामजी पर हो रहा अन्याय, समस्त इंसानियत पर कहर है”
23 मई 2017
#जोधपुर जेल में हिन्दू संत बापू आसारामजी बिना सबूत 4 साल से बंद हैं ।
जबसे बापू आसारामजी अंदर गए हैं तबसे लेकर कट्टर हिन्दू संगठन हिन्दू
महासभा, हिन्दू जन जागृति समिति आदि आदि ने खूब समर्थन किया लेकिन बड़े-बड़े
हिन्दू संगठनों ने चुप्पी साध ली है ।
Add caption
जब
बापू #आसारामजी बाहर थे तब अटल बिहारी से लेकर प्रधान मंत्री
#नरेंद्र_मोदी तक आशीर्वाद लेने आते रहे हैं लेकिन जैसे ही वे
#अंतर्राष्ट्रीय #षड्यंत्र के शिकार हुए तो सबने चुप्पी साध ली ।
लेकिन अब बड़े-बड़े #मुस्लिम #धर्मगुरु उनकी रिहाई के लिए आगे आ रहे हैं ।
 #हिंदू_मुस्लिम_एकता_मंच के द्वारा हिन्दू संत बापू आसारामजी की शीघ्र
रिहाई और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए 8 मई को जंतर-मंतर पर सत्याग्रह
किया गया और 20 मई 2017 को  प्रेस क्लब नई दिल्ली में प्रेस वार्ता का
आयोजन किया गया l
उसमें
उन्होंने कहा कि #भारतीय #संस्कृति को समाप्त करने के षड्यंत्रों को हमें
समझना होगा और  जयचंद एवं मीर जाफर जैसे लोगों से सावधान रहना होगा l पिछले
कई वर्षों से #प्रतिष्ठित धर्मगुरुओं पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें जेल में
डाला जा रहा है ।
#शंकराचार्य
#जयेंद्र सरस्वती ,स्वामी #नित्यानंद, जगतगुरु #कृपालुजी महाराज, राघेश्वर
भारती, आदि अनेक धर्मगुरुओं को साजिश का शिकार बनाया गया है । भारतीय
संस्कृति की रक्षा कर , राष्ट्र में अमन शांति भाईचारा बनाए रखने  वाले ,
कुछ संत और फकीर अनेक कष्टों को सहते हुए सम्पूर्ण जीवन समाज सेवा में लगा
रहे हैं l इसी तरह विश्व प्रसिद्ध संत #आसाराम जी बापू का मसला #इंसानियत
का आज सबसे बड़ा मसला बन गया है।
#कार्यक्रम
के मुख्य अतिथि #सलीम_कासमी जी ने  कहा,” संत आसाराम जी  बापू के मामले
में न्यायिक समानता के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है  । आज के दौर में यह
#अन्याय का सबसे बड़ा मिसाल बन गया है ।  संत आसाराम जी बापू के मामले में
मेरी कई बड़े मुस्लिम संगठनों , बड़े-बड़े मुस्लिम धर्मगुरुओं से बात हुई
हैं ।   संत आसाराम जी बापू का अपमान समस्त इंसानियत  पर कहर हैं । हमें
अपने #मुल्क की फिक्र है, इसलिए हमने 8 मई को दिल्ली में #सत्याग्रह करके
सरकार से संत आसाराम जी बापू की रिहाई की मांग उठाई थी । संत आसाराम जी
बापू की रिहाई के लिए हम राष्ट्र जागृति #कार्यक्रम जारी रखेंगे ।
#अलीगढ़ से आए हुए #मुफ्ती डॉक्टर जाहिद #अली खान साहब ने कहा-  हिंदू
मुस्लिम धर्मगुरुओं के खिलाफ साजिश को अंजाम देने वाली ताकतों का विरोध
करते हैं,और हिंदू मुस्लिम भाईचारे को कायम रखने के लिए हम अपनी जान की
बाजी लगा देंगे । संत आसाराम जी बापू का मामला करोड़ों लोगों की भावनाओं से
जुड़ा है । इसके लिए इंसानियत का सम्मान करने वाली सभी ताकतों को हम एकजुट
करेंगे।
रायपुर
से आए हुए गौ कथा वाचक #मोहम्मद फैज खान ने कहा कि हिंदुस्तान की आन बान
और शान हमारे संत और फकीर हैं। पूरी दुनिया में पूरी मानवता के कल्याण के
लिए संत आसाराम जी बापू ने, अतुलनीय कार्य किये हैं।
नारी
रक्षा संगठन की सामाजिक कार्यकर्ता पूर्व #लेफ्टिनेंट इंडियन नेवी #रुपाली
दुबे ने कहा ,”भारत की राजधानी दिल्ली में पूज्य संत आसाराम जी बापू की
गिरफ्तारी के बाद बापू जी के  सत्संग के अभाव के कारण दिल्ली में #बलात्कार
के मामलें 3 गुना बढ़ गए हैं छेड़खानी  की घटनाएं 6 गुना बढ़ गई हैं । जब
देश की राजधानी का यह हाल है तो पूरे देश का क्या हाल होगा?
ऐसे संतों की रिहाई के लिए मानव अधिकार आयोग और वैश्विक नेतृत्व को सामने आना होगा ।
हिन्दू #मुस्लिम एकता मंच के राष्ट्रीय  #महासचिव #एडवोकेट शीराज #कुरेशी जी ने कहा”,
संत
आसाराम जी बापू वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांतों का प्रचार कर रहे हैं I
उनके #सत्संग से मत, पंथ , जाति ,संप्रदाय की संकीर्णता को मिटाकर प्रत्येक
व्यक्ति के जीवन को ऊंचा उठाने का ज्ञान मिलता है I
तनावपूर्ण
माहौल यहां तक कि गुजरात दंगों के कर्फ्यू में भी बापूजी का सत्संग
सफलतापूर्वक आयोजित होते रहे है I पूज्य बापू जी अपने सत्संग में  हिन्दू
मुस्लिम सभी लोगों को भाईचारे से रहना सिखाया है।
 #स्वामी #विवेकानंद के #वर्ल्ड रिलीजियस पार्लियामेंट के संबोधन के ठीक
100 वर्षों बाद संत आसाराम जी बापू ने वर्ल्ड रिलीजियस पार्लियामेंट में
भारत का प्रतिनिधित्व किया I भारत #पाकिस्तान के तनाव के माहौल में भी
बापूजी का पाकिस्तान में  सफलतापूर्वक सत्संग आयोजन हुआI
इस
समय राष्ट्र को  संत आसारामजी बापू जैसे संतों के सत्संग की अत्यंत
आवश्यकता है, हम सब उनके ऋणी हैं I इसीलिए हमारा राष्ट्रीय दायित्व एवं
हमारा नैतिक कर्तव्य है कि हम संत आसाराम जी बापू के सत्संग आयोजन की
बाधाओं को शीघ्र अति शीघ्र दूर करें I
इस बाबत हम अपनी वेदना  सरकार और जनता के सामने प्रकट कर रहे हैं I
गौरतलब
है कि शिकायतकर्ता लड़की की मेडिकल रिपोर्ट में उसका कौमार्य सुरक्षित
पाया गया है और उसके शरीर पर छेड़खानी के कोई निशान नहीं पाए गए हैं I पहले
भी कई संत वर्षो बाद निर्दोष साबित हुए है I
एडवोकेट
#विजय साहनी जी ने बताया कि संत आसाराम जी बापू की गिरफ्तारी के दस -बारह
दिन पहले से हम आज तक दिल्ली जंतर मंतर पर धरने पर बैठे हैं । संत
आशारामजी बापू की रिहाई के लिए हमने सरकार को लाखों लोगों के हस्ताक्षर
सहित  ज्ञापन  दिया है I
अब
देखते हैं कि #हिन्दूवादी कहलाने वाली #सरकार इन मुस्लिम धर्मगुरुओं की
बात पर कितना ध्यान देती है और बिना सबूत 4 साल से जेल में बंद बापू
आसारामजी को कब रिहा करती है ???
Official Azaad Bharat Links:👇🏻
🔺Youtube : https://goo.gl/XU8FPk
🔺 Twitter : https://goo.gl/he8Dib
🔺 Instagram : https://goo.gl/PWhd2m
🔺Google+ : https://goo.gl/Nqo5IX
🔺Blogger : https://goo.gl/N4iSfr
🔺 Word Press : https://goo.gl/ayGpTG
🔺Pinterest : https://goo.gl/o4z4BJ
   🚩🇮🇳🚩 आज़ाद भारत🚩🇮🇳🚩