महाराणा प्रताप जयंती 28 मई

महाराणा प्रताप जयंती 28 मई

 

महाराणा प्रतापका परिचय
maharana pratap

 

जिनका
नाम लेकर दिनका शुभारंभ करे, ऐसे नामोंमें एक हैं, महाराणा प्रताप । उनका
नाम उन पराक्रमी राजाओंकी सूचिमें सुवर्णाक्षरोंमें लिखा गया है, जो देश,
धर्म, संस्कृति तथा इस देशकी स्वतंत्रताकी रक्षा हेतु जीवनभर जूझते रहे !
उनकी वीरताकी पवित्र स्मृतिको यह विनम्र अभिवादन  है ।
मेवाडके
महान राजा, महाराणा प्रताप सिंहका नाम कौन नहीं जानता ? भारतके इतिहासमें
यह नाम वीरता, पराक्रम, त्याग तथा देशभक्ति जैसी विशेषताओं हेतु निरंतर
प्रेरणादाई रहा है । मेवाडके सिसोदिया परिवारमें जन्मे अनेक पराक्रमी
योद्धा, जैसे बाप्पा रावल, राणा हमीर, राणा संगको ‘राणा’ यह उपाधि दी गई;
अपितु ‘ महाराणा ’ उपाधिसे  केवल प्रताप सिंहको सम्मानित किया गया ।
महाराणा प्रतापका बचपन
महाराणा
प्रतापका जन्म वर्ष 1540 में हुआ । मेवाडके राणा उदय सिंह, द्वितीय, के ३३
बच्चे थे । उनमें प्रताप सिंह सबसे बडे थे । स्वाभिमान तथा धार्मिक आचरण
प्रताप सिंहकी विशेषता थी । महाराणा प्रताप बचपनसे ही ढीठ तथा बहादूर थे;
बडा होनेपर यह एक महापराक्रमी पुरुष बनेगा, यह सभी जानते थे । सर्वसाधारण
शिक्षा लेनेसे खेलकूद एवं हथियार बनानेकी कला सीखनेमें उसे अधिक रुचि थी ।
महाराणा प्रतापका राज्याभिषेक !
महाराणा
प्रताप सिंहके कालमें देहलीपर अकबर बादशाहका शासन था । हिंदू राजाओंकी
शक्तिका उपयोग कर दूसरे  हिंदू राजाओंको अपने नियंत्रणमें लाना, यह उसकी
नीति थी । कई रजपूत राजाओंने अपनी महान परंपरा तथा लडनेकी वृत्ति छोडकर
अपनी बहुओं तथा कन्याओंको अकबरके अंत:पूरमें भेजा ताकि उन्हें अकबरसे इनाम
तथा मानसम्मान मिलें । अपनी मृत्यूसे पहले उदय सिंगने उनकी सबसे छोटी
पत्नीका बेटा जगम्मलको राजा घोषित किया; जबकि प्रताप सिंह जगम्मलसे बडे थे,
प्रभु रामचंद्र जैसे अपने छोटे भाईके लिए अपना अधिकार छोडकर मेवाडसे निकल
जानेको तैयार थे । किंतु सभी सरदार राजाके निर्णयसे सहमत नहीं हुए । अत:
सबने मिलकर यह निर्णय लिया कि जगमलको सिंहासनका त्याग करना पडेगा । महाराणा
प्रताप सिंहने भी सभी सरदार तथा लोगोंकी इच्छाका आदर करते हुए मेवाडकी
जनताका नेतृत्व करनेका दायित्व स्वीकार किया ।
महाराणा प्रतापकी अपनी मातृभूमिको मुक्त करानेकी अटूट प्रतिज्ञा !
महाराणा प्रताप का वजन 110 किलो, लम्बाई 7’5”थी, दो म्यान वाली तलवार और 80 किलो का भाला रखते थे ।
महाराणा
प्रतापके शत्रुओंने मेवाडको चारों ओरसे घेर लिया था । महाराणा प्रतापके दो
भाई, शक्ति सिंह एवं जगमल अकबरसे मिले हुए थे । सबसे बडी समस्या थी आमने-
सामने लडने हेतु सेना खडी करना, जिसके लिए बहुत धनकी आवश्यकता थी ।
महाराणा
प्रतापकी सारी संदूके खाली थीं, जबकी अकबरके पास बहुत बडी सेना, अत्यधिक
संपत्ति तथा और भी सामग्री बडी मात्रामें थी । किंतु महाराणा प्रताप निराश
नहीं हुए अथवा कभी भी ऐसा नहीं सोचा कि वे अकबरसे किसी बातमें न्यून(कम)
हैं ।
महाराणा
प्रतापको एक ही चिंता थी, अपनी मातभूमिको मुगलोंके चंगुलसे मुक्त कराणा था
। एक दिन उ्न्होंने अपने विश्वासके सारे सरदारोंकी बैठक बुलाई तथा अपने
गंभीर एवं वीरतासे भरे शब्दोंमें उनसे आवाहन किया ।
उन्होंने
कहा,‘ मेरे बहादूर बंधुआ, अपनी मातृभूमि, यह पवित्र मेवाड अभी भी मुगलोंके
चंगुलमें है । आज मैं आप सबके सामने प्रतिज्ञा करता हूं कि, जबतक चितौड
मुक्त नहीं हो जाता, मैं सोने अथवा चांदीकी थालीमें खाना नहीं खाऊंगा,
मुलायम गद्देपर नहीं सोऊंगा तथा राजप्रासादमें भी नहीं रहुंगा; इसकी
अपेक्षा मैं पत्तलपर खाना खाउंगा, जमीनपर सोउंगा तथा झोपडेमें रहुंगा ।
जबतक चितौड मुक्त नहीं हो जाता, तबतक मैं दाढी भी नहीं बनाउंगा । मेरे
पराक्रमी वीरों, मेरा विश्वास है कि आप अपने तन-मन-धनका त्याग कर यह
प्रतिज्ञा पूरी होनेतक मेरा साथ दोगे ।
अपने
राजाकी प्रतिज्ञा सुनकर सभी सरदार प्रेरित हो गए, तथा उन्होंने अपने
राजाकी तन-मन-धनसे सहायता करेंगे तथा शरीरमें  रक्तकी आखरी बूंदतक उसका साथ
देंगे; किसी भी परिस्थितिमें मुगलोंसे चितौड मुक्त होनेतक अपने ध्येयसे
नहीं हटेंगे, ऐसी प्रतिज्ञा की  । उन्होंने महाराणासे कहा, विश्वास करो, हम
सब आपके साथ हैं, आपके एक संकेतपर अपने प्राण न्यौछावर कर देंगे ।
अकबर
अपने महल में जब वह सोता था तब महाराणा प्रताप का नाम सुनकर रात में नींद
में कांपने लगता था। अकबर की हालत देख उसकी पत्नियां भी घबरा जाती, इस
दौरान वह जोर-जोर से महाराणा प्रताप का नाम लेता था।
हल्दीघाटकी लडाई महाराणा प्रताप एक महान योद्धा
अकबरने
महाराणा प्रतापको अपने चंगुलमें लानेका अथक प्रयास किया किंतु सब व्यर्थ
सिद्ध हुआ! महाराणा प्रतापके साथ जब कोई समझौता नहीं हुआ, तो अकबर अत्यंत
क्रोधित हुआ और उसने युद्ध घोषित किया । महाराणा प्रतापने भी सिद्धताएं
आरंभ कर दी । उसने अपनी राजधानी अरवली पहाडके दुर्गम क्षेत्र कुंभलगढमें
स्थानांतरित की । महाराणा प्रतापने अपनी सेनामें आदिवासी तथा जंगलोंमें
रहनेवालोंको भरती किया । इन लोगोंको युद्धका कोई  अनुभव नहीं था, किंतु
उसने उन्हें प्रशिक्षित किया । उसने सारे रजपूत सरदारोंको मेवाडके
स्वतंत्रताके झंडेके नीचे इकट्ठा होने हेतु आवाहन किया ।
महाराणा
प्रतापके 22,000 सैनिक अकबरकी 80,000 सेनासे हल्दीघाटमें भिडे । महाराणा
प्रताप तथा उसके सैनिकोंने युद्धमें बडा पराक्रम दिखाया किंतु उसे पीछे
हटना पडा। अकबरकी सेना भी राणा प्रतापकी सेनाको पूर्णरूपसे पराभूत करनेमें
असफल रही । महाराणा प्रताप एवं उसका विश्वसनीय घोडा ‘ चेतक ’ इस युद्धमें
अमर हो गए । हल्दीघाटके युद्धमें ‘ चेतक ’ गंभीर रुपसे घायल हो गया था;
किंतु अपने स्वामीके प्राण बचाने हेतु उसने एक नहरके उस पार लंबी छलांग
लगाई । नहरके पार होते ही ‘ चेतक ’ गिर गया और वहीं उसकी मृत्यु  हुई । इस
प्रकार अपने प्राणोंको संकटमें डालकर उसने राणा प्रतापके प्राण बचाएं ।
लोहपुरुष महाराणा अपने विश्वसनीय घोडेकी मृत्यूपर एक बच्चेकी तरह फूट-फूटकर
रोया ।
तत्पश्चात
जहां चेतकने अंतिम सांस ली थी वहां उसने एक सुंदर उद्यानका निर्माण किया ।
अकबरने महाराणा प्रतापपर आक्रमण किया किंतु छह महिने युद्धके उपरांत भी
अकबर महाराणाको पराभूत न कर सका; तथा वह देहली लौट गया । अंतिम उपायके
रूपमें अकबरने एक पराक्रमी योद्धा सरसेनापति जगन्नाथको 1584 में बहुत बडी
सेनाके साथ मेवाडपर भेजा, दो वर्षके अथक प्रयासोंके पश्चात भी वह राणा
प्रतापको नहीं पकड सका ।
महाराणा प्रतापका कठोर प्रारब्ध
जंगलोंमें
तथा पहाडोंकी घाटियोंमें भटकते हुए राणा प्रताप अपना परिवार अपने साथ रखते
थे । शत्रूके कहींसे भी तथा कभी भी आक्रमण करनेका संकट सदैव  बना रहता था ।
जंगलमें ठीकसे खाना प्राप्त होना बडा कठिन था । कई बार उन्हें खाना छोडकर,
बिना खाए-पिए ही प्राण बचाकर जंगलोंमें भटकना पडता था ।
शत्रूके
आनेकी खबर मिलते ही एक स्थानसे दूसरे स्थानकी ओर भागना पडता था । वे सदैव
किसी न किसी संकटसे घिरे रहते थे ।  एक बार महारानी जंगलमें रोटियां  सेंक
रही थी; उनके खानेके बाद उसने अपनी बेटीसे कहा कि, बची हुई रोटी रातके
खानेके लिए रख दे; किंतु उसी समय एक जंगली बिल्लीने झपट्टा मारकर रोटी छीन
ली और राजकन्या असहायतासे रोती रह गई । रोटीका वह टुकडा भी उसके
प्रारब्धमें नहीं था । राणा प्रतापको बेटीकी यह स्थिति देखकर बडा दुख हुआ,
अपनी वीरता, स्वाभिमानपर उसे बहुत क्रोध आया तथा विचार करने लगा कि उसका
युद्ध करना कहांतक उचित है ! मनकी इस द्विधा स्थितिमें उसने अकबरके साथ
समझौता करनेकी बात मान ली ।
पृथ्वीराज,
अकबरके दरबारका एक कवी जिसे राणा प्रताप बडा प्रिय था, उसने राजस्थानी
भाषामें राणा प्रतापका आत्मविश्वास बढाकर उसे अपने निर्णयसे परावृत्त
करनेवाला पत्र कविताके रुपमें लिखा । पत्र पढकर राणा प्रतापको लगा जैसे उसे
10,000 सैनिकोंका बल प्राप्त हुआ हो । उसका मन स्थिर तथा शांत हुआ ।
अकबरकी  शरणमें जानेका विचार उसने अपने मनसे निकाल दिया तथा अपने
ध्येयसिद्धि हेतु सेना अधिक संगठित करनेके प्रयास आरंभ किए ।
भामाशाहकी
महाराणाके प्रति भक्ति महाराणा प्रतापके वंशजोेंके दरबारमें एक रजपूत
सरदार था । राणा प्रताप जिन संकटोंसे मार्गक्रमण रहा था तथा जंगलोंमें भटक
रहा था, इससे वह बडा दुखी हुआ । उसने राणा प्रतापको  ढेर सारी संपत्ति दी,
जिससे वह 25,000 की सेना 12 वर्षतक रख सके । महाराणा प्रतापको बडा आनंद हुआ
एवं कृतज्ञता भी लगी ।
आरंभमें
महाराणा प्रतापने भामाशाहकी सहायता स्वीकार करनेसे मना किया किंतु उनके
बार-बार कहनेपर राणाने संपात्तिका स्वीकार किया । भामाशाहसे धन प्राप्त
होनेके पश्चात राणा प्रतापको दूसरे स्रोतसे धन प्राप्त होना आरंभ हुआ ।
उसने सारा धन अपनी सेनाका विस्तार करनेमें लगाया तथा चितोड छोडकर मेवाडको
मुक्त किया ।
अपने
शासनकाल में उन्होने युद्ध में उजड़े गाँवों को पुनः व्यवस्थित किया। नवीन
राजधानी चावण्ड को अधिक आकर्षक बनाने का श्रेय महाराणा प्रताप को जाता है।
राजधानी के भवनों पर कुम्भाकालीन स्थापत्य की अमिट छाप देखने को मिलती है।
पद्मिनी चरित्र की रचना तथा दुरसा आढा की कविताएं महाराणा प्रताप के युग को
आज भी अमर बनाये हुए हैं।
महाराणा प्रतापकी अंतिम इच्छा
महाराणा
प्रतापकी मृत्यु हो रही थी, तब वे घासके बिछौनेपर सोए थे, क्योंकि चितोडको
मुक्त करनेकी उनकी प्रतिज्ञा पूरी नहीं हुई थी । अंतिम क्षण उन्होंने अपने
बेटे अमर सिंहका हाथ अपने हाथमें लिया तथा चितोडको मुक्त करनेका दायित्व
उसे सौंपकर शांतिसे परलोक सिधारे । क्रूर बादशाह अकबरके साथ उनके युद्धकी
इतिहासमें कोई तुलना नहीं । जब लगभग पूरा राजस्थान मुगल बादशाह अकबरके
नियंत्रणमें था, महाराणा प्रतापने मेवाडको बचानेके लिए 12 वर्ष युद्ध किया
अकबरने
महाराणाको पराभूत करनेके लिए बहुत प्रयास किए किंतु अंततक वह अपराजित ही
रहा । इसके अतिरिक्त उसने राजस्थानका बहुत बडा क्षेत्र मुगलोंसे मुक्त किया
। कठिन संकटोंसे जानेके पश्चात भी उसने अपना तथा अपनी मातृभूमिका नाम
पराभूत होनेसे बचाया । उनका पूरा जीवन इतना उज्वल था कि स्वतंत्रताका दूसरा
नाम ‘ महाराणा प्रताप ’ हो सकता है । उनकी पराक्रमी स्मृतिको हम
श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं ।
महाराणा
प्रताप में अच्छे सेनानायक के गुणों के साथ-साथ अच्छे व्यस्थापक की
विशेषताएँ भी थी। अपने सीमित साधनों से ही अकबर जैसी शक्ति से दीर्घ काल तक
टक्कर लेने वाले वीर महाराणा प्रताप की मृत्यु पर अकबर भी दुःखी हुआ था।
आज
भी महाराणा प्रताप का नाम असंख्य भारतीयों के लिये #प्रेरणास्रोत है। राणा
प्रताप का स्वाभिमान भारत माता की पूंजी है। वह अजर अमरता के गौरव तथा
मानवता के विजय सूर्य है। राणा प्रताप की देशभक्ति, पत्थर की अमिट लकीर है।
ऐसे #पराक्रमी भारत माँ के वीर सपूत महाराणा प्रताप को #राष्ट्र का
#शत्-शत् नमन।
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गंगा दशहरा प्रारम्भ : 26 मई, समाप्त : 4 जून

मां गंगा की महिमा
गंगा दशहरा प्रारम्भ : 26 मई, समाप्त : 4 जून
गंगा
नदी उत्तर भारतकी केवल जीवनरेखा नहीं, अपितु हिंदू धर्मका सर्वोत्तम तीर्थ
है । ‘आर्य सनातन वैदिक संस्कृति’ गंगाके तटपर विकसित हुई, इसलिए गंगा
हिंदुस्थानकी राष्ट्ररूपी अस्मिता है एवं भारतीय संस्कृतिका मूलाधार है ।
इस कलियुगमें श्रद्धालुओंके पाप-ताप नष्ट हों, इसलिए ईश्वरने उन्हें इस
धरापर भेजा है । वे प्रकृतिका बहता जल नहीं; अपितु सुरसरिता (देवनदी) हैं ।
उनके प्रति हिंदुओंकी आस्था गौरीशंकरकी भांति सर्वोच्च है । गंगाजी
मोक्षदायिनी हैं; इसीलिए उन्हें गौरवान्वित करते हुए पद्मपुराणमें (खण्ड ५,
अध्याय ६०, श्लोक ३९) कहा गया है, ‘सहज उपलब्ध एवं मोक्षदायिनी गंगाजीके
रहते विपुल धनराशि व्यय (खर्च) करनेवाले यज्ञ एवं कठिन तपस्याका क्या लाभ
?’ नारदपुराणमें तो कहा गया है, ‘अष्टांग योग, तप एवं यज्ञ, इन सबकी
अपेक्षा गंगाजीका निवास उत्तम है । गंगाजी भारतकी पवित्रताकी सर्वश्रेष्ठ
केंद्रबिंदु हैं, उनकी महिमा अवर्णनीय है ।’
ganga dashahara
मां गंगा का #ब्रह्मांड में उत्पत्ति
‘वामनावतारमें
श्रीविष्णुने दानवीर बलीराजासे भिक्षाके रूपमें तीन पग भूमिका दान मांगा ।
राजा इस बातसे अनभिज्ञ था कि श्रीविष्णु ही वामनके रूपमें आए हैं, उसने
उसी क्षण वामनको तीन पग भूमि दान की । वामनने विराट रूप धारण कर पहले पगमें
संपूर्ण पृथ्वी तथा दूसरे पगमें अंतरिक्ष व्याप लिया । दूसरा पग उठाते समय
वामनके ( #श्रीविष्णुके) बाएं पैरके अंगूठेके धक्केसे ब्रह्मांडका
सूक्ष्म-जलीय कवच (टिप्पणी १) टूट गया । उस छिद्रसे गर्भोदककी भांति
‘ब्रह्मांडके बाहरके सूक्ष्म-जलनेब्रह्मांडमें प्रवेश किया । यह सूक्ष्म-जल
ही गंगा है ! गंगाजीका यह प्रवाह सर्वप्रथम सत्यलोकमें गया ।ब्रह्मदेवने
उसे अपने कमंडलु में धारण किया । तदुपरांत सत्यलोकमें ब्रह्माजीने अपने
कमंडलुके जलसे श्रीविष्णुके चरणकमल धोए । उस जलसे गंगाजीकी उत्पत्ति हुई ।
तत्पश्चात गंगाजी की यात्रा सत्यलोकसे क्रमशः #तपोलोक, #जनलोक, #महर्लोक,
इस मार्गसे #स्वर्गलोक तक हुई ।
पृथ्वी पर उत्पत्ति
 #सूर्यवंशके राजा सगरने #अश्वमेध यज्ञ आरंभ किया । उन्होंने दिग्विजयके
लिए यज्ञीय अश्व भेजा एवं अपने ६० सहस्त्र पुत्रोंको भी उस अश्वकी रक्षा
हेतु भेजा । इस यज्ञसे भयभीत इंद्रदेवने यज्ञीय अश्वको कपिलमुनिके आश्रमके
निकट बांध दिया । जब सगरपुत्रोंको वह अश्व कपिलमुनिके आश्रमके निकट प्राप्त
हुआ, तब उन्हें लगा, ‘कपिलमुनिने ही अश्व चुराया है ।’ इसलिए सगरपुत्रोंने
ध्यानस्थ कपिलमुनिपर आक्रमण करनेकी सोची । कपिलमुनिको अंतर्ज्ञानसे यह बात
ज्ञात हो गई तथा अपने नेत्र खोले । उसी क्षण उनके नेत्रोंसे प्रक्षेपित
तेजसे सभी सगरपुत्र भस्म हो गए । कुछ समय पश्चात सगरके प्रपौत्र राजा
अंशुमनने सगरपुत्रोंकी मृत्युका कारण खोजा एवं उनके उद्धारका मार्ग पूछा ।
कपिलमुनिने अंशुमनसे कहा, ‘`गंगाजीको स्वर्गसे भूतलपर लाना होगा ।
सगरपुत्रोंकी अस्थियोंपर जब गंगाजल प्रवाहित होगा, तभी उनका उद्धार होगा
!’’ मुनिवरके बताए अनुसार गंगाको पृथ्वीपर लाने हेतु अंशुमनने तप आरंभ किया
।’  ‘अंशुमनकी मृत्युके पश्चात उसके सुपुत्र राजा दिलीपने भी गंगावतरणके
लिए तपस्या की । #अंशुमन एवं दिलीपके सहस्त्र वर्ष तप करनेपर भी गंगावतरण
नहीं हुआ; परंतु तपस्याके कारण उन दोनोंको स्वर्गलोक प्राप्त हुआ ।’
(वाल्मीकिरामायण, काण्ड १, अध्याय ४१, २०-२१)
‘राजा
दिलीपकी #मृत्युके पश्चात उनके पुत्र राजा भगीरथने कठोर तपस्या की । उनकी
इस तपस्यासे प्रसन्न होकर गंगामाताने भगीरथसे कहा, ‘‘मेरे इस प्रचंड
प्रवाहको सहना पृथ्वीके लिए कठिन होगा । अतः तुम भगवान शंकरको प्रसन्न करो
।’’ आगे भगीरथकी घोर तपस्यासे भगवान शंकर प्रसन्न हुए तथा भगवान शंकरने
गंगाजीके प्रवाहको जटामें धारण कर उसे पृथ्वीपर छोडा । इस प्रकार हिमालयमें
अवतीर्ण गंगाजी भगीरथके पीछे-पीछे #हरद्वार, प्रयाग आदि स्थानोंको पवित्र
करते हुए बंगालके उपसागरमें (खाडीमें) लुप्त हुईं ।’
ज्येष्ठ
मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि, भौमवार (मंगलवार) एवं हस्त नक्षत्रके शुभ
योगपर #गंगाजी स्वर्गसे धरतीपर अवतरित हुईं ।  जिस दिन #गंगा पृथ्वी पर
अवतरित हुईं वह दिन ‘गंगा दशहरा’ के नाम से जाना जाता है ।
जगद्गुरु
आद्य शंकराचार्यजी, जिन्होंने कहा है : एको ब्रह्म द्वितियोनास्ति ।
द्वितियाद्वैत भयं भवति ।। उन्होंने भी ‘गंगाष्टक’ लिखा है, गंगा की महिमा
गायी है । रामानुजाचार्य, रामानंद स्वामी, चैतन्य महाप्रभु और स्वामी
रामतीर्थ ने भी गंगाजी की बड़ी महिमा गायी है । कई साधु-संतों,
अवधूत-मंडलेश्वरों और जती-जोगियों ने गंगा माता की कृपा का अनुभव किया है,
कर रहे हैं तथा बाद में भी करते रहेंगे ।
अब
तो विश्व के #वैज्ञानिक भी गंगाजल का परीक्षण कर दाँतों तले उँगली दबा रहे
हैं ! उन्होंने दुनिया की तमाम नदियों के जल का परीक्षण किया परंतु गंगाजल
में रोगाणुओं को नष्ट करने तथा आनंद और सात्त्विकता देने का जो अद्भुत गुण
है, उसे देखकर वे भी आश्चर्यचकित हो उठे ।
 #हृषिकेश में स्वास्थ्य-अधिकारियों ने पुछवाया कि यहाँ से हैजे की कोई खबर
नहीं आती, क्या कारण है ? उनको बताया गया कि यहाँ यदि किसीको हैजा हो जाता
है तो उसको गंगाजल पिलाते हैं । इससे उसे दस्त होने लगते हैं तथा हैजे के
कीटाणु नष्ट हो जाते हैं और वह स्वस्थ हो जाता है । वैसे तो हैजे के समय
घोषणा कर दी जाती है कि पानी उबालकर ही पियें । किंतु गंगाजल के पान से तो
यह रोग मिट जाता है और केवल हैजे का रोग ही मिटता है ऐसी बात नहीं है, अन्य
कई रोग भी मिट जाते हैं । तीव्र व दृढ़ श्रद्धा-भक्ति हो तो गंगास्नान व
गंगाजल के पान से जन्म-मरण का रोग भी मिट सकता है ।
सन्
1947 में जलतत्त्व विशेषज्ञ कोहीमान भारत आया था । उसने वाराणसी से
#गंगाजल लिया । उस पर अनेक परीक्षण करके उसने विस्तृत लेख लिखा, जिसका सार
है – ‘इस जल में कीटाणु-रोगाणुनाशक विलक्षण शक्ति है ।’
दुनिया
की तमाम #नदियों के जल का विश्लेषण करनेवाले बर्लिन के डॉ. जे. ओ. लीवर ने
सन् 1924 में ही गंगाजल को विश्व का सर्वाधिक स्वच्छ और
#कीटाणु-रोगाणुनाशक जल घोषित कर दिया था ।
‘आइने
अकबरी’ में लिखा है कि ‘अकबर गंगाजल मँगवाकर आदरसहित उसका पान करते थे ।
वे गंगाजल को अमृत मानते थे ।’ औरंगजेब और मुहम्मद तुगलक भी गंगाजल का पान
करते थे । शाहनवर के नवाब केवल गंगाजल ही पिया करते थे ।
कलकत्ता
के हुगली जिले में पहुँचते-पहुँचते तो बहुत सारी नदियाँ, झरने और नाले
गंगाजी में मिल चुके होते हैं । अंग्रेज यह देखकर हैरान रह गये कि हुगली
जिले से भरा हुआ गंगाजल दरियाई मार्ग से यूरोप ले जाया जाता है तो भी कई-कई
दिनों तक वह बिगड़ता नहीं है । जबकि यूरोप की कई बर्फीली नदियों का पानी
हिन्दुस्तान लेकर आने तक खराब हो जाता है ।
अभी रुड़की विश्वविद्यालय के #वैज्ञानिक कहते हैं कि ‘गंगाजल में जीवाणुनाशक और हैजे के कीटाणुनाशक तत्त्व विद्यमान हैं ।’
फ्रांसीसी
चिकित्सक हेरल ने देखा कि गंगाजल से कई रोगाणु नष्ट हो जाते हैं । फिर
उसने गंगाजल को कीटाणुनाशक औषधि मानकर उसके इंजेक्शन बनाये और जिस रोग में
उसे समझ न आता था कि इस रोग का कारण कौन-से कीटाणु हैं, उसमें गंगाजल के वे
इंजेक्शन रोगियों को दिये तो उन्हें लाभ होने लगा !
संत #तुलसीदासजी कहते हैं :
गंग सकल मुद मंगल मूला । सब सुख करनि हरनि सब सूला ।।
(श्रीरामचरित. अयो. कां. : 86.2)
सभी
सुखों को देनेवाली और सभी शोक व दुःखों को हरनेवाली माँ गंगा के तट पर
स्थित तीर्थों में पाँच तीर्थ विशेष आनंद-उल्लास का अनुभव कराते हैं :
गंगोत्री, हर की पौड़ी (हरिद्वार),  #प्रयागराज त्रिवेणी, काशी और #गंगासागर
। #गंगादशहरे के दिन गंगा में गोता मारने से सात्त्विकता, प्रसन्नता और
विशेष पुण्यलाभ होता है ।
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vat savitri

वटसावित्री व्रत – अमावस्यांत पक्ष : 25 मई/वटसावित्री व्रतारम्भ (पूर्णिमांत पक्ष) : 6 जून

वटसावित्री-व्रत
वटसावित्री व्रत – अमावस्यांत पक्ष : 25 मई/वटसावित्री व्रतारम्भ (पूर्णिमांत पक्ष) : 6 जून
वट पूर्णिमा : 8 जून
24 मई 2017
यह
व्रत ‘स्कंद’ और ‘भविष्योत्तर’ पुराणाेंके अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल
पूर्णिमापर और ‘निर्णयामृत’ इत्यादि ग्रंथोंके अनुसार अमावस्यापर किया जाता
है । उत्तरभारतमें प्रायः अमावस्याको यह व्रत किया जाता है । अतः
महाराष्ट्रमें इसे ‘वटपूर्णिमा’ एवं उत्तरभारतमें इसे ‘वटसावित्री’के नामसे
जाना जाता है ।
वटसावित्री-व्रत
🚩पतिके
सुख-दुःखमें सहभागी होना, उसे संकटसे बचानेके लिए प्रत्यक्ष ‘काल’को भी
चुनौती देनेकी सिद्धता रखना, उसका साथ न छोडना एवं दोनोंका जीवन सफल बनाना,
ये स्त्रीके महत्त्वपूर्ण गुण हैं ।
🚩सावित्रीमें
ये सभी गुण थे । सावित्री अत्यंत तेजस्वी तथा दृढनिश्चयी थीं ।
आत्मविश्वास एवं उचित निर्णयक्षमता भी उनमें थी । राजकन्या होते हुए भी
सावित्रीने दरिद्र एवं अल्पायु सत्यवानको पतिके रूपमें अपनाया था; तथा उनकी
मृत्यु होनेपर यमराजसे शास्त्रचर्चा कर उन्होंने अपने पतिके लिए जीवनदान
प्राप्त किया था । जीवनमें यशस्वी होनेके लिए सावित्रीके समान सभी
सद्गुणोंको आत्मसात करना ही वास्तविक अर्थोंमें वटसावित्री व्रतका पालन
करना है ।
🚩वृक्षों
में भी भगवदीय चेतना का वास है, ऐसा दिव्य ज्ञान #वृक्षोपासना का आधार है ।
इस उपासना ने स्वास्थ्य, प्रसन्नता, सुख-समृद्धि, आध्यात्मिक उन्नति एवं
पर्यावरण संरक्षण में बहुत महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है ।
🚩वातावरण
में विद्यमान हानिकारक तत्त्वों को नष्ट कर वातावरण को शुद्ध करने में
वटवृक्ष का विशेष महत्त्व है । वटवृक्ष के नीचे का छायादार स्थल एकाग्र मन
से जप, ध्यान व उपासना के लिए प्राचीन काल से साधकों एवं #महापुरुषों का
प्रिय स्थल रहा है । यह दीर्घ काल तक अक्षय भी बना रहता है । इसी कारण
दीर्घायु, अक्षय सौभाग्य, जीवन में स्थिरता तथा निरन्तर अभ्युदय की
प्राप्ति के लिए इसकी आराधना की जाती है ।
🚩वटवृक्ष
के दर्शन, स्पर्श तथा सेवा से पाप दूर होते हैं; दुःख, समस्याएँ तथा रोग
जाते रहते हैं । अतः इस वृक्ष को रोपने से अक्षय पुण्य-संचय होता है ।
वैशाख आदि पुण्यमासों में इस वृक्ष की जड़ में जल देने से पापों का नाश होता
है एवं नाना प्रकार की सुख-सम्पदा प्राप्त होती है ।
🚩इसी
वटवृक्ष के नीचे सती सावित्री ने अपने पातिव्रत्य के बल से यमराज से अपने
मृत पति को पुनः जीवित करवा लिया था । तबसे ‘#वट-सावित्री’ नामक #व्रत
मनाया जाने लगा । इस दिन महिलाएँ अपने #अखण्ड #सौभाग्य एवं कल्याण के लिए
व्रत करती हैं ।
🚩व्रत-कथा
: सावित्री मद्र देश के राजा अश्वपति की पुत्री थी । द्युमत्सेन के पुत्र
सत्यवान से उसका विवाह हुआ था । विवाह से पहले देवर्षि नारदजी ने कहा था कि
सत्यवान केवल वर्ष भर जीयेगा । किंतु सत्यवान को एक बार मन से पति स्वीकार
कर लेने के बाद दृढ़व्रता सावित्री ने अपना निर्णय नहीं बदला और एक वर्ष तक
पातिव्रत्य धर्म में पूर्णतया तत्पर रहकर अंधेे सास-ससुर और अल्पायु पति
की प्रेम के साथ सेवा की । वर्ष-समाप्ति  के  दिन  सत्यवान  और  सावित्री
समिधा लेने के लिए वन में गये थे । वहाँ एक विषधर सर्प ने सत्यवान को डँस
लिया । वह बेहोश  होकर  गिर  गया । यमराज आये और सत्यवान के सूक्ष्म शरीर
को ले जाने लगे । तब सावित्री भी अपने पातिव्रत के बल से उनके पीछे-पीछे
जाने लगी ।
🚩यमराज द्वारा उसे वापस जाने के लिए कहने पर सावित्री बोली :
‘‘जहाँ
जो मेरे पति को ले जाय या जहाँ मेरा पति स्वयं जाय, मैं भी वहाँ जाऊँ यह
सनातन धर्म है । तप, गुरुभक्ति, पतिप्रेम और आपकी कृपा से मैं कहीं रुक
नहीं सकती । #तत्त्व को जाननेवाले विद्वानों ने सात स्थानों पर मित्रता कही
है । मैं उस मैत्री को दृष्टि में रखकर कुछ कहती हूँ, सुनिये । लोलुप
व्यक्ति वन में रहकर धर्म का आचरण नहीं कर सकते और न ब्रह्मचारी या
संन्यासी ही हो सकते हैं ।
🚩विज्ञान
(आत्मज्ञान के अनुभव) के लिए धर्म को कारण कहा करते हैं, इस कारण संतजन
धर्म को ही प्रधान मानते हैं । संतजनों के माने हुए एक ही धर्म से हम दोनों
श्रेय मार्ग को पा गये हैं ।’’
🚩सावित्री के वचनों से प्रसन्न हुए #यमराज से सावित्री ने अपने ससुर के अंधत्व-निवारण व बल-तेज की प्राप्ति का वर पाया ।
🚩सावित्री
बोली : ‘‘#संतजनों के सान्निध्य की सभी इच्छा किया करते हैं । संतजनों का
साथ निष्फल नहीं होता, इस कारण सदैव संतजनों का संग करना चाहिए ।’’
🚩यमराज : ‘‘तुम्हारा वचन मेरे मन के अनुकूल, बुद्धि और बल वर्धक तथा हितकारी है । पति के जीवन के सिवा कोई वर माँग ले ।’’
🚩सावित्री ने श्वशुर के छीने हुए राज्य को वापस पाने का वर पा लिया ।
🚩सावित्री
: ‘‘आपने प्रजा को नियम में बाँध रखा है, इस कारण आपको यम कहते हैं । आप
मेरी बात सुनें । मन-वाणी-अन्तःकरण से किसीके साथ वैर न करना, दान देना,
आग्रह का त्याग करना – यह संतजनों का सनातन धर्म है । संतजन वैरियों पर भी
दया करते देखे जाते हैं ।’’
🚩यमराज बोले : ‘‘जैसे प्यासे को पानी, उसी तरह तुम्हारे वचन मुझे लगते हैं । पति के जीवन के सिवाय दूसरा कुछ माँग ले ।’’
🚩सावित्री ने अपने निपूत पिता के सौ औरस कुलवर्धक पुत्र हों ऐसा वर पा लिया ।
🚩सावित्री
बोली : ‘‘चलते-चलते मुझे कुछ बात याद आ गयी है, उसे भी सुन लीजिये । आप
आदित्य के प्रतापी पुत्र हैं, इस कारण आपको विद्वान पुरुष ‘वैवस्वत’ कहते
हैं । आपका बर्ताव प्रजा के साथ समान भाव से है, इस कारण आपको ‘धर्मराज’
कहते हैं । मनुष्य को अपने पर भी उतना विश्वास नहीं होता जितना संतजनों में
हुआ करता है । इस कारण संतजनों पर सबका प्रेम होता है ।’’
🚩यमराज बोले : ‘‘जो तुमने सुनाया है ऐसा मैंने कभी नहीं सुना ।’’
🚩प्रसन्न
यमराज से सावित्री ने वर के रूप में सत्यवान से ही बल-वीर्यशाली सौ औरस
पुत्रों की प्राप्ति का वर प्राप्त किया । फिर बोली : ‘‘संतजनों की वृत्ति
सदा धर्म में ही रहती है । #संत ही सत्य से सूर्य को चला रहे हैं, तप से
पृथ्वी को धारण कर रहे हैं । संत ही भूत-भविष्य की गति हैं । संतजन दूसरे
पर उपकार करते हुए प्रत्युपकार की अपेक्षा नहीं रखते । उनकी कृपा कभी
व्यर्थ नहीं जाती, न उनके साथ में धन ही नष्ट होता है, न मान ही जाता है ।
ये बातें संतजनों में सदा रहती हैं, इस कारण वे रक्षक होते हैं ।’’
🚩यमराज
बोले : ‘‘ज्यों-ज्यों तू मेरे मन को अच्छे लगनेवाले अर्थयुक्त सुन्दर
धर्मानुकूल वचन बोलती है, त्यों-त्यों मेरी तुझमें अधिकाधिक भक्ति होती
जाती है । अतः हे पतिव्रते और वर माँग ।’’
🚩सावित्री
बोली : ‘‘मैंने आपसे पुत्र दाम्पत्य योग के बिना नहीं माँगे हैं, न मैंने
यही माँगा है कि किसी दूसरी रीति से पुत्र हो जायें । इस कारण आप मुझे यही
वरदान दें कि मेरा पति जीवित हो जाय क्योंकि पति के बिना मैं मरी हुई हूँ ।
पति के बिना मैं सुख, स्वर्ग, श्री और जीवन कुछ भी नहीं चाहती । आपने मुझे
सौ पुत्रों का वर दिया है व आप ही मेरे पति का हरण कर रहे हैं, तब आपके
वचन कैसे सत्य होंगे ? मैं वर माँगती हूँ कि सत्यवान जीवित हो जायें । इनके
जीवित होने पर आपके ही वचन सत्य होंगे ।’’
🚩यमराज ने परम प्रसन्न होकर ‘ऐसा ही हो’ यह  कह  के  सत्यवान  को  मृत्युपाश  से  मुक्त कर दिया ।
🚩व्रत-विधि
: इसमें #वटवृक्ष की पूजा की जाती है । विशेषकर सौभाग्यवती महिलाएँ
श्रद्धा के साथ ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी से पूर्णिमा तक अथवा कृष्ण त्रयोदशी
से अमावास्या तक तीनों दिन अथवा मात्र अंतिम दिन व्रत-उपवास रखती हैं । यह
कल्याणकारक  व्रत  विधवा,  सधवा,  बालिका, वृद्धा, सपुत्रा, अपुत्रा सभी
स्त्रियों को करना चाहिए ऐसा ‘स्कंद पुराण’ में आता है ।
🚩प्रथम
दिन संकल्प करें कि ‘मैं मेरे पति और पुत्रों की आयु, आरोग्य व सम्पत्ति
की प्राप्ति के लिए एवं जन्म-जन्म में सौभाग्य की प्राप्ति के लिए
वट-सावित्री व्रत करती हूँ ।’
🚩वट
के  समीप  भगवान #ब्रह्माजी,  उनकी अर्धांगिनी सावित्री देवी तथा सत्यवान
व सती सावित्री के साथ #यमराज का पूजन कर ‘नमो वैवस्वताय’ इस मंत्र को
जपते हुए वट की परिक्रमा करें । इस समय वट को 108 बार या यथाशक्ति सूत का
धागा लपेटें । फिर निम्न मंत्र से #सावित्री को अर्घ्य दें ।
🚩अवैधव्यं च  सौभाग्यं देहि  त्वं मम  सुव्रते । पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते ।।
🚩निम्न श्लोक से वटवृक्ष की प्रार्थना कर गंध, फूल, अक्षत से उसका पूजन करें ।
वट  सिंचामि  ते  मूलं सलिलैरमृतोपमैः । यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले ।
तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मां सदा ।।
🚩#भारतीय
#संस्कृति #वृक्षों  में  भी  छुपी  हुई भगवद्सत्ता  का  ज्ञान
करानेवाली,  ईश्वर  की सर्वश्रेष्ठ कृति- मानव के जीवन में आनन्द, उल्लास
एवं चैतन्यता भरनेवाली है ।
🚩(स्त्रोत्र : संत श्री आशारामजी आश्रम द्वारा प्रकाशित ऋषि प्रसाद, जून 2007)
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इस्लामिक धर्मगुरुओं ने कहा :”हिन्दू संत बापू आसारामजी पर हो रहा अन्याय, समस्त इंसानियत पर कहर है”

इस्लामिक धर्मगुरुओं ने कहा :”हिन्दू संत बापू आसारामजी पर हो रहा अन्याय, समस्त इंसानियत पर कहर है”
23 मई 2017
#जोधपुर जेल में हिन्दू संत बापू आसारामजी बिना सबूत 4 साल से बंद हैं ।
जबसे बापू आसारामजी अंदर गए हैं तबसे लेकर कट्टर हिन्दू संगठन हिन्दू
महासभा, हिन्दू जन जागृति समिति आदि आदि ने खूब समर्थन किया लेकिन बड़े-बड़े
हिन्दू संगठनों ने चुप्पी साध ली है ।
Add caption
जब
बापू #आसारामजी बाहर थे तब अटल बिहारी से लेकर प्रधान मंत्री
#नरेंद्र_मोदी तक आशीर्वाद लेने आते रहे हैं लेकिन जैसे ही वे
#अंतर्राष्ट्रीय #षड्यंत्र के शिकार हुए तो सबने चुप्पी साध ली ।
लेकिन अब बड़े-बड़े #मुस्लिम #धर्मगुरु उनकी रिहाई के लिए आगे आ रहे हैं ।
 #हिंदू_मुस्लिम_एकता_मंच के द्वारा हिन्दू संत बापू आसारामजी की शीघ्र
रिहाई और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए 8 मई को जंतर-मंतर पर सत्याग्रह
किया गया और 20 मई 2017 को  प्रेस क्लब नई दिल्ली में प्रेस वार्ता का
आयोजन किया गया l
उसमें
उन्होंने कहा कि #भारतीय #संस्कृति को समाप्त करने के षड्यंत्रों को हमें
समझना होगा और  जयचंद एवं मीर जाफर जैसे लोगों से सावधान रहना होगा l पिछले
कई वर्षों से #प्रतिष्ठित धर्मगुरुओं पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें जेल में
डाला जा रहा है ।
#शंकराचार्य
#जयेंद्र सरस्वती ,स्वामी #नित्यानंद, जगतगुरु #कृपालुजी महाराज, राघेश्वर
भारती, आदि अनेक धर्मगुरुओं को साजिश का शिकार बनाया गया है । भारतीय
संस्कृति की रक्षा कर , राष्ट्र में अमन शांति भाईचारा बनाए रखने  वाले ,
कुछ संत और फकीर अनेक कष्टों को सहते हुए सम्पूर्ण जीवन समाज सेवा में लगा
रहे हैं l इसी तरह विश्व प्रसिद्ध संत #आसाराम जी बापू का मसला #इंसानियत
का आज सबसे बड़ा मसला बन गया है।
#कार्यक्रम
के मुख्य अतिथि #सलीम_कासमी जी ने  कहा,” संत आसाराम जी  बापू के मामले
में न्यायिक समानता के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है  । आज के दौर में यह
#अन्याय का सबसे बड़ा मिसाल बन गया है ।  संत आसाराम जी बापू के मामले में
मेरी कई बड़े मुस्लिम संगठनों , बड़े-बड़े मुस्लिम धर्मगुरुओं से बात हुई
हैं ।   संत आसाराम जी बापू का अपमान समस्त इंसानियत  पर कहर हैं । हमें
अपने #मुल्क की फिक्र है, इसलिए हमने 8 मई को दिल्ली में #सत्याग्रह करके
सरकार से संत आसाराम जी बापू की रिहाई की मांग उठाई थी । संत आसाराम जी
बापू की रिहाई के लिए हम राष्ट्र जागृति #कार्यक्रम जारी रखेंगे ।
#अलीगढ़ से आए हुए #मुफ्ती डॉक्टर जाहिद #अली खान साहब ने कहा-  हिंदू
मुस्लिम धर्मगुरुओं के खिलाफ साजिश को अंजाम देने वाली ताकतों का विरोध
करते हैं,और हिंदू मुस्लिम भाईचारे को कायम रखने के लिए हम अपनी जान की
बाजी लगा देंगे । संत आसाराम जी बापू का मामला करोड़ों लोगों की भावनाओं से
जुड़ा है । इसके लिए इंसानियत का सम्मान करने वाली सभी ताकतों को हम एकजुट
करेंगे।
रायपुर
से आए हुए गौ कथा वाचक #मोहम्मद फैज खान ने कहा कि हिंदुस्तान की आन बान
और शान हमारे संत और फकीर हैं। पूरी दुनिया में पूरी मानवता के कल्याण के
लिए संत आसाराम जी बापू ने, अतुलनीय कार्य किये हैं।
नारी
रक्षा संगठन की सामाजिक कार्यकर्ता पूर्व #लेफ्टिनेंट इंडियन नेवी #रुपाली
दुबे ने कहा ,”भारत की राजधानी दिल्ली में पूज्य संत आसाराम जी बापू की
गिरफ्तारी के बाद बापू जी के  सत्संग के अभाव के कारण दिल्ली में #बलात्कार
के मामलें 3 गुना बढ़ गए हैं छेड़खानी  की घटनाएं 6 गुना बढ़ गई हैं । जब
देश की राजधानी का यह हाल है तो पूरे देश का क्या हाल होगा?
ऐसे संतों की रिहाई के लिए मानव अधिकार आयोग और वैश्विक नेतृत्व को सामने आना होगा ।
हिन्दू #मुस्लिम एकता मंच के राष्ट्रीय  #महासचिव #एडवोकेट शीराज #कुरेशी जी ने कहा”,
संत
आसाराम जी बापू वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांतों का प्रचार कर रहे हैं I
उनके #सत्संग से मत, पंथ , जाति ,संप्रदाय की संकीर्णता को मिटाकर प्रत्येक
व्यक्ति के जीवन को ऊंचा उठाने का ज्ञान मिलता है I
तनावपूर्ण
माहौल यहां तक कि गुजरात दंगों के कर्फ्यू में भी बापूजी का सत्संग
सफलतापूर्वक आयोजित होते रहे है I पूज्य बापू जी अपने सत्संग में  हिन्दू
मुस्लिम सभी लोगों को भाईचारे से रहना सिखाया है।
 #स्वामी #विवेकानंद के #वर्ल्ड रिलीजियस पार्लियामेंट के संबोधन के ठीक
100 वर्षों बाद संत आसाराम जी बापू ने वर्ल्ड रिलीजियस पार्लियामेंट में
भारत का प्रतिनिधित्व किया I भारत #पाकिस्तान के तनाव के माहौल में भी
बापूजी का पाकिस्तान में  सफलतापूर्वक सत्संग आयोजन हुआI
इस
समय राष्ट्र को  संत आसारामजी बापू जैसे संतों के सत्संग की अत्यंत
आवश्यकता है, हम सब उनके ऋणी हैं I इसीलिए हमारा राष्ट्रीय दायित्व एवं
हमारा नैतिक कर्तव्य है कि हम संत आसाराम जी बापू के सत्संग आयोजन की
बाधाओं को शीघ्र अति शीघ्र दूर करें I
इस बाबत हम अपनी वेदना  सरकार और जनता के सामने प्रकट कर रहे हैं I
गौरतलब
है कि शिकायतकर्ता लड़की की मेडिकल रिपोर्ट में उसका कौमार्य सुरक्षित
पाया गया है और उसके शरीर पर छेड़खानी के कोई निशान नहीं पाए गए हैं I पहले
भी कई संत वर्षो बाद निर्दोष साबित हुए है I
एडवोकेट
#विजय साहनी जी ने बताया कि संत आसाराम जी बापू की गिरफ्तारी के दस -बारह
दिन पहले से हम आज तक दिल्ली जंतर मंतर पर धरने पर बैठे हैं । संत
आशारामजी बापू की रिहाई के लिए हमने सरकार को लाखों लोगों के हस्ताक्षर
सहित  ज्ञापन  दिया है I
अब
देखते हैं कि #हिन्दूवादी कहलाने वाली #सरकार इन मुस्लिम धर्मगुरुओं की
बात पर कितना ध्यान देती है और बिना सबूत 4 साल से जेल में बंद बापू
आसारामजी को कब रिहा करती है ???
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पूर्व सचिव समेत 3 अफसरों को कोयला घोटाले में 2 साल की जेल, मिली तुरंत जमानत

पूर्व सचिव समेत 3 अफसरों को कोयला घोटाले में 2 साल की जेल, मिली तुरंत जमानत
🚩22 अप्रैल 2017
🚩आज
भी देश की जेलों में करीब 2.78 लाख विचाराधीन कैदी हैं। इनमें से कई ऐसे
हैं जो उस अपराध के लिए मुकर्रर सजा से ज्यादा समय जेलों में बिता चुके हैं
🚩जो
धनी लोग हैं और सत्ता के साथ अपना ताल मेल रखते हैं वो तो पैसे के बल पर
तुरन्त जमानत पा लेते हैं लेकिन जो गरीब हैं, झूठे #केस में फंसे हैं उनके
लिये न्याय पाना मुश्किल ही नही असंभव जैसा हो गया है ।
🚩ऐसे ही करीब 11 लाख करोड़ रुपये कोयला खदान आवंटन घोटाले का मामला सामने आया है ।
🚩दिल्ली
की पटियाला हाउस #कोर्ट स्थित स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने सोमवार को कोयला
घोटाले में दोषी पूर्व कोयला सचिव एच सी गुप्ता, #कोयला #मंत्रालय के
तत्कालीन संयुक्त सचिव के एस क्रोफा और तत्कालीन निदेशक के सी समारिया को
दो साल जेल की सजा सुनायी। हालांकि तीनों दोषियों को एक-एक लाख रुपये के
निजी मुचलके पर तत्काल #जमानत भी मिल गयी।
🚩
#यूपीए #सरकार के समय #मध्यप्रदेश के थेसगोड़ा-बी रूद्रपुरी कोयला ब्लॉक
के आवंटन घोटाले में गुप्ता, क्रोफा, समारिया और कंपनी केएसएसपीएल और उसके
प्रबंध निदेशक पवन कुमार आहलूवालिया को #दोषी करार दिया गया था। दो साल जेल
की सजा पाए आहलूवालिया को भी कोर्ट से जमानत मिल गयी।
इस कोयला घोटाले से जुड़े ये चार किरदार कौन हैं, इस पर एक रिपोर्ट-
🚩1.एच
सी गुप्ता- यह 31 दिसंबर 2005 से नवंबर 2GYह008 तक कोयला सचिव थे।
इन्होंने तत्कालीन #पीएम #मनमोहन सिंह के समक्ष कमल स्पॉंज स्टील एंड पावर
लिमिटेड (केएसएसपीएल) कंपनी को मध्य प्रदेश में कोयला ब्लॉक आवंटित करने की
सिफारिश की थी, जो उस समय आवंटन के नियमों को पूरा नहीं करती थी। सीबीआई
ने विशेष अदालत से गुप्ता को धोखाधड़ी और आपराधिक #षडयंत्र के जुर्म में
अधिकतम सात साल जेल की मांग की थी। गुप्ता के खिलाफ कोयला घोटाले से जुडे
10 और मामले लंबित हैं, जिन पर अलग से कार्रवाई चल रही है।
🚩2.
के एस क्रोफा- यह कोयला मंत्रालय के तत्कालीन संयुक्त सचिव थे। इन्हें भी
विशेष कोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन में #अनियमितता का दोषी माना है। क्रोफा
असम मेघालय कैडर के 1982 बैच के आईएएस अ​धिकारी हैं। फिलहाल यह मेघालय के
मुख्य सचिव हैं।  इन पर कोयला घोटाले से जुड़े 8 मामलों में शामिल होने का
आरोप है।
🚩3.
के सी समारिया- यह कोयला मंत्रालय के तत्कालीन निदेशक थे। कोयला ब्लॉक
आवंटन में य​ह भी दोषी माने गए हैं। इन पर कोयला घोटाले से जुड़े 6 मामलों
में संलिप्त होने का आरोप है।
🚩4.
पवन कुमार आहलूवालिया- यह कोयला घोटाले में शामिल कंपनी केएसएसपीएल के
प्रबंध निदेशक हैं। इनकी कंपनी के सतना और जयपुर में कार्यालय हैं।
🚩केवल
कोयला घोटाले के अपराधियों को ही जमानत मिल गई ऐसा नही है घोटाले –
#बोफोर्स_घोटाला – 64 करोड़ रुपये, #यूरिया_घोटाला – 133 करोड़ रुपये,
#चारा_घोटाला – 950 करोड़ रुपये, #शेयर_बाजार_घोटाला – 4000 करोड़ रुपये,
#सत्यम_घोटाला – 7000 करोड़ रुपये, #स्टैंप_पेपर_घोटाला – 43 हजार करोड़
रुपये, #कॉमनवेल्थ_गेम्स_घोटाला – 70 हजार करोड़ रुपये,
#2जी_स्पेक्ट्रम_घोटाला – 1 लाख 67 हजार करोड़ रुपये, अनाज_घोटाला – 2 लाख
करोड़ रुपए (#अनुमानित), विजय माल्या 9000 करोड़ घोटाला आदि के सभी आरोपी
बाहर स्वतंत्र घूम रहे हैं ।
🚩लेकिन
दूसरी ओर  हिन्दू संस्कृति की रक्षा करने वाले, शंकराचार्य अमृतानन्द,
कर्नल पुरोहित, संत आसारामजी बापू, श्री नारायण साई, श्री धनंजय देसाई आज
भी बिना सबूत सालों से जेल में बंद हैं ।
🚩इसे तो यही पता चल रहा है कि पूर्व जजों ने जो सवाल उठाये थे कि न्यायप्रणाली में भ्रष्टाचार व्याप्त है वे सही हैं ।
🚩सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस खरे ने कहा है कि आपके पास पैसे नही हैं तो कोर्ट के तरफ भूलकर भी नही देखना।
🚩सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश काटजू ने कहा था कि भारतीय #न्याय_प्रणाली में 50% जज भ्रष्ट हैं ।
🚩सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश संतोष_हेगड़े भी सवाल उठा चुके हैं कि ‘धनी और प्रभावशाली’ तुरंत जमानत हासिल कर सकते हैं ।
🚩कर्नाटक
हाईकोर्ट के पूर्व वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस के एल मंजूनाथ ने कहा कि यहाँ
सत्यनिष्ठा और ईमानदारी के लिए कोई स्थान नहीं है और इस देश में न्याय के
लिए कोई जगह नहीं ।
🚩भारत
की जेलों में कई सालों से बिना सबूत बहुत सारे निर्दोष लोग बन्द हैं, उनकी
कोर्ट में कोई सुनवाई नही हो रही है और न ही उनको जमानत मिल पा रही है,
लेकिन किसी भी नेता, अभिनेता, पत्रकारों और अमीरों को सजा होने का बाद
तुरंत जमानत हासिल हो जाती है ।
🚩इसलिये आज न्याय प्रणाली से जनता का भरोसा उठ गया है ।
🚩आरोप
साबित होने पर भी कई बड़ी हस्तियाँ बाहर घूम रही हैं और अभी तक जिन पर आरोप
साबित नही हुआ है वो जेल में हैं । पूर्ण रूप से अब ये समझा जाता है कि
मीडिया और #पॉलिटिक्स की आपस में मिलीभगत के कारण न्यायप्रणाली में भी
भ्रष्टाचार व्याप्त हो चुका है ।
🚩जनता के मन में कई सवाल उठ रहे हैं कि निर्दोषों के लिए न्याय प्रणाली #भ्रष्ट मुक्त होकर शीघ्र निर्णय कब लेगी ???
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मीडिया की झूठी खबरों से गुमराह होकर कवियों ने बापू आसारामजी के लिए बोला गलत,अब मांगी माफी

 मीडिया की झूठी खबरों से गुमराह होकर कवियों ने बापू आसारामजी के लिए बोला गलत,अब मांगी माफी
 #जोधपुर जेल में 4 साल से बिना सबूत हिन्दू संत बापू #आसारामजी बंद हैं।
अब तक उनके खिलाफ #मीडिया ट्रायल खूब चला है, मीडिया ने #टीआरपी और #पैसे
के चक्कर मे उनके खिलाफ झूठी कहानियां बनाकर खूब दिखाई और उसी को सच मानकर
कई #कवि और #कवयित्रियों ने उनके खिलाफ मजाक करते हुए बोला लेकिन जब उनको
सच्चाई का पता चला तो उन्होंने माफी मांगते हुए #वीडियो जारी किया ।
आइये आपको बताते है क्या कहा कवि और कवयित्रियों ने…
Poets apologized for Bapu Asharamji

 

 #कवित्री #पूनम वर्मा – अभी अभी संज्ञान में आया है  Youtube पर, मेरी
किसी वीडियो में कुछ संत आसारामजी बापू का मजाक बनाया गया है । उपहास किया
गया है । “मेरा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था लेकिन
जाने अनजाने में मेरे शब्दों से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची हो तो उसके
लिए मैं हृदय से खेद व्यक्त करती हूँ । हाथ जोड़ कर क्षमा चाहती हूँ “।
 #कवि #संपत सरल – मेरी किसी एक कवि #सम्मेलन प्रस्तुति को किसी मूर्ख ने
कट पेस्ट करके इस तरह से दुरुपयोग किया और उसको संत आसारामजी बापू के
चरित्र के साथ जोड़ दिया । हम हास्य  कवि लेखक है परिहास करते है उपहास नहीं
करते । वैसे भी लेखक प्रवृति पर होता है व्यक्ति पर नहीं होता । “जाने
अनजाने मेरे उस वक्तव्य से जो मैंने गलती की भी नहीं है अगर किसी आदमी की
संत #आसारामजी बापू के भक्तों की भावनाओं को आहत हुई हो उसके लिए खेद
व्यक्त करता हूँ उसके लिए क्षमा याचना करता हूँ और भविष्य में  इसकी
पुनरावृति नहीं होगी इस बात का आपको भरोसा दिलाता हूँ हरि ॐ” ।
कवि
शम्भू शिखर – दिल्ली के कार्यो की वीडियो you tube पर,जिसमें कि आसारामजी
बापू की हँसी मजाक मेरी ओर से कविताओं में कही गई ।जिस कारण से बहुत सारे
भक्तों का दिल दुःखा और बहुत भक्तों को तकलीफ हुई । मेरा #मकसद किसीका दिल
दुखाना या किसीको तकलीफ देना नहीं था न है । ये अज्ञानतावश मैंने ऐसा किया ।
“आप सभी से किसी भाई-बहन साधकों को अनुयायियों को तकलीफ हुई हो मैं उन सब
से क्षमा मांगता हूँ और आप सब से वादा करता हूँ आगे मेरे द्वारा संत
आसारामजी बापू पर किसी भी प्रकार की कोई टिप्पणी नहीं आएगी जिस किसी भाई का
दिल मेरी वजह से दुखा उसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूँ और उम्मीद करता हूँ
आप सबका प्रेम मुझ तक ऐसे ही अविरत पहुंचता रहेगा” ।
 #डॉ. सुरेश अवस्थी – अभी अभी संज्ञान में आया कि मैंने किसी कवि सम्मेलन
में कोई ऐसा शब्द,कोई ऐसी पंक्ति पढ़ी है जिससे संत आसारामजी बापू के
समर्थको और उनके भक्तों को ठेस पहुंची है । उनका मन आहत हुए है । उन्हें
लगा है कि उन शब्दों से संत श्री की अवमानना हुई है। यदि मेरे द्वारा ऐसा
कोई शब्द कोई टिप्पणी कविता की कोई पंक्ति प्रयुक्त की गई है जिससे संत
श्री आसारामजी बापू के भक्त आहत हुए हैं, उनकी आस्था को चोट पहुंची है या
उन शब्दों में कोई संत श्री की अपमानता प्रतीत होती है तो “मैं उसके प्रति
भावी मन से खेद व्यक्त करता हूँ मुझे क्षमा करें और मैं ये भविष्य में
सचेतता बरतूँगा, ध्यान रखूंगा कि कहीं कोई ऐसी टिप्पणी ऐसी पंक्ति ऐसी
कविता मेरे द्वारा प्रस्तुत न की जाए जिससे संत श्री आसारामजी  बापू के
भक्तों को दिक्कत हो उन्हें कोई #ठेस पहुँचे या किसी व्यक्ति विशेष को या
कोई प्रतीत हो कि उसकी अवमानना की जा रही है मैं इसका पूरा ख्याल रखूंगा
खेद क्षमा धन्यवाद”|
कवित्री
#अनामिका जैन अम्बर – मैं कवित्री अनामिका जैन अम्बर ये स्वीकारती हूँ कि
पूज्य संत श्री आसारामजी बापू के संदर्भ में मुझसे थोड़ा तिपुन दोहा बोला
गया है । जब मैंने ये पंक्तियां कही थी तब ये नया विवाद इनके चरित्र को
लेकर लगा था प्रथम #दृष्ट्या मुझे ऐसा लगा था कि मेरे अपने धर्म का चोला
पहन किसी अपने व्यक्ति ने हमें छल लिया । ये ऐसा था जैसे किसी बच्चे ने
अपनी माँ को छला हो ।किन्तु उसके बाद ऐसे साक्ष्य सामने आये जिनमें भान हुआ
कि ये एक बड़ा #षड्यंत्र है । हमारे हिंदुओं के साधुओं के प्रति संतों के
प्रति। मेरी कलम ने हमेशा माँ भारती की वंदना की है धर्म का मन रखा है ।
मुझसे जो हुआ वो वास्तव में गलत है मेरी पंक्तियों से पूज्य श्री के
अनुयायियों की भावनाएं आहत हुई हैं । “मैं उनसे करबद्ध क्षमा प्रार्थी हूँ
आप सब की साक्षी हूँ” भविष्य में कभी किसी #हिन्दू #संत के प्रति ऐसे शब्द
जो किसीका हृदय दुखाये नहीं कहूंगी एक आग्रह और करती हूं आप सब से कि उस
वीडियो को आप वायरल न करें उसे हमने अपलोड नहीं किया है । जिस चैनल से
अपलोड किया गया है उनसे भी निवेदन है कि नेट से उसे हटा दें मेरी कलम आप
सभी के साथ से बलशाली हुई है अतः अपना स्नेह बनाये रखे “|
 #डॉ. #सुनील जोगी – मैं आप सब से अपील करता हूँ बहुत से कार्टूनीय पत्रकार
कुछ ऐसे हैं जो आसारामजी बापू के विषय में अशोभनीय बातें करते हैं । वो
उचित नहीं है बहुत से लोग मुझे फ़ोन करते है । बहुत से उनके भक्त है, उनके
अनुयायी है,उनके चाहनेवाले है उनका हृदय दुखता है #बापूजी पर अभी कोई आरोप
सिद्ध नहीं हुआ है केवल अदालत में मामला है ।  जब तक आरोप सिद्ध नहीं हो
जाता हमें किसी भी संत पर इस तरह की टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए । इससे
हमारे #धर्म को क्षति पहुंचती है। नुकसान होता है । किसी भी वर्णीय बड़े संत
को और आसारामजी  बापू का बड़ा योगदान रहा है उनके करोड़ो शिष्य हैं, #भक्त
हैं,  उनका #हृदय दुखता है तो आप सबका कोई अधिकार नहीं कि आसारामजी बापू के
लिए अपमान जनक शब्द इस्तेमाल करें या उनके प्रति कोई अशुभ टिप्पणी करें
जिससे उनके भक्तों का,उनके माननेवालों का उनके फोल्लोवेर्स का दिल दुखे ।
इसलिए मेरी आप सब से अपील है कि इस मामले में कुछ भी ऐसी #टिप्पणी न करें।
मेरा अनुरोध आप सब स्वीकार करेंगे तो मुझे खुशी होगी ।
अब एक सवाल उठता है कि #मीडिया क्यों बिना सबूत ही  हिन्दू संतो के खिलाफ बोलती रहती है?
क्या उनको इतनी #स्वतन्त्रता दी गई है कि बिना सबूत कुछ भी दिखा सकते हैं ???
जबकि
सच्चाई ये है कि किसी भी पादरी या मौलवी के लिए सबूत होने के बाद भी
मीडिया दिखाती नहीं है और हिन्दू संतो के खिलाफ बिना सबूत ही जहर उगलती
रहती है।
इससे
सिद्ध हो जाता है कि वेटिंकन सिटी और सऊदी अरब से हिन्दू संतों और  हिन्दू
कार्यकर्ताओं को बदनाम करने का भारी फंडिग मिलता है मीडिया को ।
अतः #देशवासी #विदेशी #फंडिग से चलने वाली मीडिया से सावधान रहें ।
जय हिंद
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जहर परोसने वाली पेप्सी और कोका कोला का जनता कर रही है त्याग, अपना रहे है देशी पेय पदार्थ

जहर परोसने वाली पेप्सी और कोका कोला का जनता कर रही है त्याग, अपना रहे है देशी पेय पदार्थ
20 मई 2017
पेप्सी 1989 में भारत आई थी । कोका-कोला को जॉर्ज फर्नींडीज ने एक बार भगा दिया था, दोबारा वो 1993 में इंडिया फिर से आई ।
coca cola pepsi
इन
दोनों अमेरिकी कंपनियों ने बाकी कंपनियों को रास्ते से हटाने के लिए
धमकाने से लेकर कंपनी खरीदने तक की हर टैक्टिक का इस्तेमाल किया और सफल रहे
। बाद में आपस में जूझ गए । सॉफ्ट ड्रिंक का ये मार्केट इंडिया में 60
हजार करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया ।
कोका
कोला और पेप्सी दोनों कंपनियां भारत सॉफ्ट ड्रिंक मार्केट में राज करती
हैं लेकिन अब उनका मार्केट खतरे में है, क्योंकि जनता लो-शुगर और लो-कैलोरी
सॉफ्ट ड्रिंक्स की तरफ शिफ्ट हो रही है ।
दोनों
कंपनियां एक तरफ हैं । दूसरी तरफ डाबर, पार्ले, हेक्टर बीवरेज, आईटीसी और
मनपसंद बीवरेज जैसी कंपनियां हैं । इन कंपनियों ने नये तरीके के ड्रिंक
निकाले हैं और स्मार्ट मार्केटिंग की है ।
ये
मार्केट दूध बेस्ट ड्रिंक्स और पैकड पानी का है। हेल्थ को लेकर नई
कॉन्शसनेस बनी है । जनता इधर शिफ्ट हो रही है। पेप्सी और कोला इसे नहीं देख
पाई है।
वड़ोदरा की कंपनी बीवरेज और कई भारत की कंपनियों ने 5 प्रतिशत फ्रूट जूस मिलना शुरू कर दिया है ।
मार्केट इन कंपनियों के बारे में क्या कह रहा है?
1.
यूरोमॉनीटर के मुताबिक 2014 और 2016 के बीच कोका कोला का इंडियन मार्केट
35.5 प्रतिशत से घटकर 33.5 प्रतिशत हो गया है । पेप्सी का मार्केट 23.2
प्रतिशत से घटकर 22.2 प्रतिशत हो गया है ।
2.
सॉफ्ट ड्रिंक के मार्केट में बॉटल्ड वाटर पिछले 5 सालों में बढ़कर 24
प्रतिशत हिस्सा पकड़ चुका है । 24 प्रतिशत के साथ पार्ले बिस्लेरी इस मामले
में सबसे आगे है । कोका कोला का किनले 17 प्रतिशत था, पर अब घट गया है।
3.
कॉर्बोनेटेड ड्रिंक्स के मार्केट में कोका कोला और पेप्सी का 96 प्रतिशत
शेयर है। पिछले दो-तीन सालों में ये मार्केट 16 हजार करोड़ रुपये बढ़ा और
ये दोनों कंपनियां इसका ज्यादा फायदा उठा पाने में कामयाब नहीं रहीं । ये
फायदा नई कंपनियों को ही गया ।
4.
कोका कोला ने तीन नये नॉन-कॉर्बनेटेड यानी प्लेन ड्रिंक लॉन्च किये ।
एक्वेरियस, दूध आधारित वायो और नारियल पानी बेस्ड जिको।  पेप्सी ने प्रॉमिस
किया कि अपने ड्रिंक्स में वो कैलोरी का लेवल कम करेंगे। पर ये टैक्टिक
काम नहीं कर रही है।
5.
लगातार ये चीजें भी सामने आती गई हैं कि ये दोनों ड्रिंक्स हेल्थ के लिए
हानिकारक हैं। पेप्सी पर तो बाकायदा कीटनाशक होने का आरोप लगा था।
ये दोनों कंपनियां पीछे जा रही हैं, भारत की कंपनियां आगे आ रही हैं
1.
वॉट्सऐप पर लगातार इनसे जुड़ी खबरें चलती हैं कि इनके गिलास में इतनी चीनी
होती है कि खीर बन जाए। पर इन दोनों कंपनियों ने इस चीज को ज्यादा
सीरियसली नहीं लिया। अब इनकी सच्चाई पता चलने पर लोग पीना छोड़ रहे है ।
सरकार द्वारा इनको पाप यानी कि अनहेल्दी चीजों में रखा जा रहा है।
2.
पेप्सी के फ्रूट प्रोडक्ट ट्रॉपिकाना भी जूस के मार्केट में 33.5 प्रतिशत
हिस्सेदारी से नीचे गिरकर 28.7 प्रतिशत तक आ गया । डाबर इसमें 56.3 प्रतिशत
मार्केट की हिस्सेदारी रखता है ।
3.
देसी ब्रांड्स के साथ फायदा ये है कि लोग इनसे जुड़ें जा रहे हैं। अभी
नेशनलिज्म का दौर है तो पहले वाली बात नहीं रही कि अमेरिका का है तो अच्छा
है। पार्ले एग्रो तो अपने एप्पी फिज्ज के साथ बहुत आगे निकल गया है। अभी
हाल में ही फ्रूटी फिज्ज भी लॉन्च किया है। ये मैंगो ड्रिंक है। जिसमें 11
प्रतिशत फल की मात्रा है। जबकि फैंटा या मिरिंडा बस फ्रूट फ्लेवर वाले
ड्रिंक्स हैं।
4.
यहां तक कि 100 साल पुराने ब्रांड रूह अफजा वाले हमदर्द ने भी रेडी टू
ड्रिंक मार्केट में 20 प्रतिशत फल की मात्रा वाला जूस लॉन्च कर दिया है,
रूह अफजा फ्यूजन। डाबर तो फ्रूट जूस के अलावा वेजीटेबल जूस भी बना रहा
है।इनका नया मैंगो जूस Ju C भी लॉन्च हुआ है।
5
हेक्टर बीवरेज जैसी देसी कंपनियां तो ठंडई और आम का पना भी बना रही हैं।
ये अपने पेपर बोट ब्रांड से लोगों तक पहुंच रही हैं। हेक्टर बीवरेज बनाने
वाले लोग पहले कोका कोला कंपनी में ही काम करते थे। नये जमाने में इंडियन
होना नया कॉन्फिडेंस दे रहा है तो देसी नॉस्टैल्जिया मार्केटिंग में काम आ
रहा है।
6
कोका-पेप्सी दोनों कंपनियों को मार्केट के अलावा भी दिक्कतें हैं। पानी की
समस्या देश में कई जगह पर है। जहां पर इन कंपनियों के प्लांट लगते हैं,
विरोध होना शुरू हो जाता है। मार्च 2017 में देश के सबसे इंडस्ट्रियलाइज्ड
राज्य तमिलनाडु की दो बड़ी ट्रेड एशोसिएशन्स ने कोका-कोला और पेप्सी को
राज्य में बैन कर दिया। कहा कि ये कंपनियां जो पानी खा जाती हैं, वो
किसानों को मिलेगा।
“पेप्सी
और कॉक” में उपयोग होने वाले रासायनिक तत्व सोडियम मोनो ग्लूटामेट,
पोटेशियम सोरबेट, ब्रोमिनेटेड वेजिटेबल ऑइल (BVO), और सोडियम बेन्जोईट ये
चारो  कैंसर करते है।
मिथाइल बेन्जीन – ये #किडनी को खराब करता है।
इसमें सबसे खराब जहर है – एंडोसल्फान – ये #कीड़े मारने के लिए खेतों में डाला जाता है।
और ऊपर से होता है – #कार्बन डाईऑक्साइड – जो कि बहुत जहरीली गैस है इसीलिए इन #कोल्ड ड्रिंक्स को “#कार्बोनेटेड वाटर” कहा जाता है
सरकार
के एक अध्ययन के अनुसार #स्वास्थ्य राज्यमंत्री फग्गन सिंह कुलास्ते ने
राज्यसभा में बताया है कि कुछ सॉफ्ट ड्रिंक्स और फार्मा प्रोडक्ट वाली
पीईटी बोतलों (#स्प्राइट, #माउंटेन #ड्यू, #सेवन अप, #पेप्सी और #कोकाकोला)
के सैंपल में भारी धातु मिले हैं जो #स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं।
अमेरिका
हावर्ड #यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध के मुताबिक सॉफ्ट ड्रिंक की लत से हर
साल 1.33 लाख जानें जाती हैं, हृदयरोग से लगभग 45,000 और कैंसर से 6,500
लोग मौत का शिकार बनते हैं। यानी कुल 1.84 लाख मौतों के लिए सॉफ्ट ड्रिंक
जिम्मेदार है।
यह ड्रिंक्स हड्डियों, मांसपेशियों, दांतों, आंखों और किडनी की सेहत के लिए भारी हानिकारक है।
कई
विदेशी कंपनियाँ कुछ #नेताओं की #मिलीभगत से #हिन्दुस्तान में बोतलबंद
#जहर खुल्लेआम बेच रही है, इस जहर को हिन्दुस्तान की सांसदों की केंटीन में
प्रतिबंधित कर दिया गया है,  अगर कोल्ड्रिंक जहरीला है ये हमारे सांसद
जानते हैं तो इसे पूरे भारत में प्रतिबंधित क्यों नहीं करते??
🚩नेताओं का स्वास्थ्य बेहतर रहना चाहिए तो जनता का क्यो नहीं??
🚩हमारे
देश मे बहुत सी विदेशी कम्पनियाँ हानिकारक पेय व खाद्य सामग्री बेच रही है
और #सरकार टेक्स के चक्कर में आंखे बन्द करके बैठी है ।
🚩नींबू स्वास्थ्य में उत्तम लाभदायी !!
🚩#नींबू
का रस स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी  है। #रक्त की अम्लता को दूर करने
का विशिष्ट गुण रखता है। त्रिदोष, वायु-सम्बन्धी रोगों, मंदाग्नि, कब्ज और
हैजे में नींबू विशेष उपयोगी है। #नींबू में कृमि-कीटाणुनाशक और सड़न दूर
करने का विशेष गुण है। यह रक्त व त्वचा के विकारों में भी लाभदायक है।
#नींबू की खटाई में #ठंडक उत्पन्न करने का विशिष्ट गुण है जो हमें गर्मी से
बचाता है।
मुँह
सूखना, पित्तप्रकोप, उदररोग, अपच, अरुचि, पेटदर्द, मंदाग्नि,  मोटापा,
कब्ज, दाँतों से खून निकलना, बालों की रूसी, सिर की फोड़े-फुंसी आदि #नीबू
के प्रयोग से मिट जाते हैं ।
क्यों
ऐसी #विदेशी कंपनियों के #ज़हरीले पेय-पदार्थों का सेवन करना जो हमारा पैसा
लेने के साथ-साथ हमारे शरीर को भी बिमारियों का घर बनाना चाहते है।
इसे
तो प्राकृतिक वस्तुओं जैसे #नीबूंपानी #गुलाब शर्बत, नारियल पानी आदि का
सेवन कर #गरीबों की रोजी #रोटी में मदद रूप हो और #देश की समृद्धि में
सहायक होने के साथ-साथ अपना स्वास्थ्य भी बढ़िया रखे।
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