rashtra bhasha

संसार की उन्नत भाषाओं में हिंदी सबसे अधिक व्यवस्थित भाषा है

14 सितम्बर : #राष्ट्रभाषा दिवस
🚩 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की #राजभाषा होगी। सरकारी काम काज #हिंदी भाषा# में ही होगा ।

🚩इसी महत्वपूर्ण निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिये #राष्ट्रभाषा #प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर #सन् 1953 से संपूर्ण भारत में 14 सितंबर को प्रतिवर्ष #हिन्दी-दिवस #के रूप में मनाया जाता है।

rashtra bhasha hindi

 

🚩 #लॉर्ड मैकाले ने कहा था : ‘मैं यहाँ# (भारत) की शिक्षा-पद्धति में ऐसे कुछ #संस्कार #डाल जाता हूँ कि आनेवाले वर्षों में भारतवासी अपनी ही संस्कृति से घृणा करेंगे… #मंदिर# में जाना पसंद नहीं करेंगे… माता-पिता को प्रणाम करने में तौहीन महसूस करेंगे… वे #शरीर से तो #भारतीय होंगे लेकिन दिलोदिमाग से हमारे ही #गुलाम होंगे..!
🚩अंग्रेजी भाषा के #मूल शब्द लगभग 10,000 हैं, जबकि हिन्दी के मूल# शब्दों की संख्या 2,50,000 से भी अधिक है। #संसार की #उन्नत भाषाओं में हिंदी सबसे अधिक व्यवस्थित #भाषा है।
🚩#हिंदी दुनिया की सबसे #अधिक# बोली जाने वाली भाषा है । लेकिन अभी तक हम इसे संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा नहीं बना पाएं ।
🚩हिंदी दुनिया की #सर्वाधिक तीव्रता से प्रसारित हो रही भाषाओं में से #एक है । वह सच्चे अर्थों में #विश्व भाषा बनने की #पूर्ण अधिकारी है । हिंदी का #शब्दकोष बहुत विशाल #है और एक-एक भाव को व्यक्त करने के लिए सैकड़ों #शब्द हैं जो अंग्रेजी भाषा में नही है ।
🚩हिन्दी लिखने के लिये प्रयुक्त #देवनागरी लिपि #अत्यन्त वैज्ञानिक है । हिन्दी को #संस्कृत शब्दसंपदा एवं नवीन #शब्द-रचना-सामर्थ्य विरासत में मिली है।
🚩आज उन# मैकाले की वजह से ही हमने अपनी मानसिक गुलामी बना ली है कि अंग्रेजी के बिना हमारा काम चल नहीं सकता । हमें हिंदी भाषा का महत्व समझकर उपयोग करना चाहिए ।
🚩#मदन मोहन मालवीयजी ने 1898 में सर एंटोनी #मैकडोनेल के सम्मुख हिंदी भाषा की प्रमुखता को बताते हुए, कचहरियों में हिन्दी भाषा को प्रवेश दिलाया ।
🚩#लोकमान्य तिलकजी #ने हिन्दी भाषा को खूब प्रोत्साहित किया ।
वे कहते थे : ‘‘ अंग्रेजी शिक्षा देने के लिए बच्चों को सात-आठ वर्ष तक अंग्रेजी पढ़नी पड़ती है । जीवन के ये आठ वर्ष कम नहीं होते । ऐसी स्थिति विश्व के किसी और देश में नहीं है । ऐसी #शिक्षा-प्रणाली किसी भी #सभ्य देश में नहीं पायी जाती ।’’
🚩जिस प्रकार बूँद-बूँद से घड़ा भरता है, उसी प्रकार #समाज में कोई भी बड़ा परिवर्तन लाना हो #तो किसी-न-किसीको तो पहला कदम उठाना ही पड़ता है और फिर धीरे-धीरे एक कारवा बन जाता है व उसके पीछे-पीछे पूरा #समाज चल पड़ता है ।
🚩हमें भी अपनी राष्ट्रभाषा को उसका खोया हुआ# सम्मान और गौरव# दिलाने के लिए व्यक्तिगत स्तर से पहल चालू करनी चाहिए ।
🚩एक-एक मति के मेल से ही बहुमति और फिर सर्वजनमति बनती है । हमें अपने #दैनिक जीवन# में से अंग्रेजी को तिलांजलि देकर विशुद्ध रूप से मातृभाषा अथवा #हिन्दी का प्रयोग# करना चाहिए ।
🚩#राष्ट्रीय अभियानों, राष्ट्रीय नीतियों व अंतराष्ट्रीय आदान-प्रदान हेतु अंग्रेजी नहीं #राष्ट्रभाषा हिन्दी ही साधन# बननी चाहिए ।
🚩 जब कमाल पाशा #अरब देश में तुर्की भाषा को लागू करने के लिए अधिकारियों की कुछ दिन की मोहलत  ठुकराकर रातोंरात परिवर्तन कर सकते हैं तो हमारे लिए क्या यह असम्भव है  ?
🚩आज सारे संसार की आशादृष्टि भारत पर टिकी है । हिन्दी की संस्कृति केवल देशीय नहीं सार्वलौकिक है क्योंकि #अनेक राष्ट्र ऐसे हैं जिनकी भाषा हिन्दी के उतनी करीब है जितनी भारत के अनेक राज्यों की भी नहीं है । इसलिए हिन्दी की संस्कृति को #विश्व को अपना #अंशदान करना है ।
🚩#राष्ट्रभाषा राष्ट्र का गौरव है# । इसे अपनाना और इसकी अभिवृद्धि करना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है । यह राष्ट्र की एकता और अखंडता की नींव है । आओ, इसे सुदृढ़ बनाकर राष्ट्ररूपी भवन की सुरक्षा करें ।
🚩स्वभाषा की महत्ता बताते हुए हिन्दू #संत आसारामजी बापू कहते हैं : ‘‘मैं तो जापानियों को #धन्यवाद दूँगा । वे अमेरिका में जाते हैं तो वहाँ भी अपनी मातृभाषा में ही बातें करते हैं । …और हम भारतवासी !# भारत में रहते हैं फिर भी अपनी हिन्दी, गुजराती, मराठी आदि भाषाओं में अंग्रेजी के शब्द बोलने लगते हैं । आदत जो पड़ गयी है ! आजादी मिले 70 वर्ष से भी अधिक समय हो गया, बाहरी गुलामी की जंजीर तो छूटी लेकिन भीतरी गुलामी, दिमागी गुलामी अभी तक नहीं गयी ।’’
(लोक कल्याण सेतु : नवम्बर 2012)
🚩#अंग्रेजी भाषा के #दुष्परिणाम
🚩#विदेशी शासन #के अनेक दोषों में देश के नौजवानों पर डाला गया #विदेशी भाषा के #माध्यम का घातक बोझ इतिहास में एक सबसे बड़ा दोष माना जायेगा। इस माध्यम ने राष्ट्र की शक्ति हर ली है, विद्यार्थियों की आयु घटा दी है, उन्हें आम जनता से दूर कर दिया है और शिक्षण को बिना कारण खर्चीला बना दिया है। अगर यह प्रक्रिया अब भी जारी रही तो वह राष्ट्र की आत्मा को नष्ट कर देगी। इसलिए शिक्षित भारतीय जितनी जल्दी विदेशी माध्यम के भयंकर वशीकरण से बाहर निकल जायें उतना ही उनका और #जनता का लाभ होगा।
🚩अपनी मातृभाषा की गरिमा को पहचानें । अपने बच्चों को अंग्रेजी#(कन्वेंट स्कूलो) में शिक्षा दिलाकर उनके विकास को# अवरुद्ध न करें । उन्हें मातृभाषा(गुरुकुलों) में पढ़ने की स्वतंत्रता देकर उनके चहुमुखी #विकास में सहभागी बनें ।
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Narendra Giri

14 बाबाओं की लिस्ट बनाने वाला नरेन्द्र गिरी खुद निकला फर्जी, देशभर में हो रहा है विरोध

सितम्बर 12, 2017
नरेन्द्र गिरी ने अभी इलाहाबाद में मीटिंग करके बाबा राम रहीम, राधे मां आदि 14 साधुओं की लिस्ट बनाकर उनको फर्जी घोषित किया । लेकिन आज उनका देशभर में कई जगह पर पुतला जलाया गया है और कई जगहों से लीगली नोटिस निकाली जा रही है तो कई जगह पर देशव्यापी आंदोलन होने जा रहा है।
Narendra Giri himself is bogus
हिन्दू संत आसारामजी बापू के अधिवक्ता सज्जनराज सुरणा ने फर्जी बाबाओं की लिस्ट में आसारामजी बापू के नाम पर कहा कि अखाड़ा परिषद को यह अधिकार किसने दिया..???
कैसे वे किसी को फर्जी घोषित कर सकते हैं..??
टीवी पर ऐसे बोलते हैं जैसे डॉग्स। घिन्न आती है इन पर मुझको।
 चार लोग कैसे किसी का फैसला कर सकते हैं जबकि यह सन्यासी बन चुके तो इनकी सीविल डेथ हो चुकी है। बकवास करते रहते हैं ये लोग।
 इस पर पत्रकारों ने अगला सवाल कानूनी कार्रवाई को लेकर पूछा तो वे बोले कि कुत्ते भौंकते रहते हैं। किस-किस कुत्ते पर कार्रवाई करूँ ।
उनके ही अखाड़े में रहने वाले साधु ने उन पर आरोप लगाया है कि..
आचार्य कुश मुनि ने बताया कि मैंने अखाड़ों में हो रहे भ्रष्टाचार व चरित्रहीनता को देखकर 2012 में  छोड़ दिया था ।
नरेंद्र गिरी मेरा नाम फर्जी संतो की सूची में कैसे डाल सकता है..??
 और वो भी एक ऐसा आदमी मेरा नाम कैसे डाल सकता है जिस पर (नरेन्द्र गिरी)  खुद अनेकों आरोप लगे हैं । गिरी का अपराधिक इतिहास रहा है, गिरी ने स्वयं मठ की संपत्ति एक सपा के भूतपूर्व विधायक महेश सिंह को बेची थी। गिरि एक प्रॉपर्टी डीलर दलाल है, गिरी समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव के परिवार का दलाल है। ये कहां से हो गया अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष और अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष तो ज्ञानदास है।
नरेंद्र गिरी महाराज ने इलाहाबाद में सचिन दत्ता से पैसे लेकर के एक महामंडलेश्वर बनाया सच्चिदानंद गिरी, जब पूरे समाज ने विरोध किया तब जाकर के इसने वापस लिया। ये क्या बात करेंगे जो महामंडलेश्वर पद बेचते हैं।
समाज में नशे, गांजा चरस अफीम इन सब का प्रचार-प्रसार अखाड़े करते हैं, नई पीढ़ी को गुमराह अखाड़े करते हैं अखाड़े देश के विकास में कोई योगदान नहीं करते है। इनमें साधुता जैसे कोई लक्षण नहीं हैं,केवल गाँजे से इनकी सुबह होती है और साधु अपने आप को कहते हैं,इनसे बड़ा राक्षस कोई नहीं है, ये अपने आप को साधु कहते हैं,ये साधु कहां से हैं..?? संत के नाम पर कलंक हैं ।
मेरा ये मानना है तथाकथित अखाड़े के साधु का समाज बहिष्कार करें तभी हिंदू धर्म सुधर सकता है ।
दांडी अचुत्यानंद जी महाराज ने कहा कि नरेन्द्र गिरी जो अपने आपको तथाकथित अखाड़े का अध्यक्ष कहता है वो प्रमाण दे, कब उसका रजिस्ट्रेशन हुआ  है ? क्या उसका बायो लॉज है ? और किस अधिकार से उन्होंने फर्जी संत की व्याख्या करी ? कौन होता है वो फर्जी संत कहनेवाला ? किसने अधिकार दिया उसको? वो अधिकार के कागजात दिखाये । कौन से बायो लॉज में है ? वो कैसे कह सकता है? उसको भोगना पड़ेगा, प्रायश्चित करना पड़ेगा । उसका अधिकार क्षेत्रहीन है ।
गिरी पूर्णरूप से दोषी हैं,उसका प्रायश्चित करें वो माफी मांगे, माफिपत्र दे ।
अचुत्यानंद स्वामी ने कहा कि ये फ्लेट बेचते हैं, धर्माधर ट्रस्ट की सम्पति अपनी मानते है । 250 फ्लेट बनाकर बेच दिये, कहाँ जाता है पैसा..??
 कहाँ हिसाब है लाखों रुपयों का..???
अभी जगदीशपुर में जमीन बेची है इन्होंने । माननीय अखाड़ो ने बेची, जूना अखाड़ो ने बेची है ।
आपको बता दें कि संत आसारामजी बापू के करोड़ो भक्तों ने दावा किया है कि हमारे बापू को षड़यंत्र के तहत जेल में भेजा गया है अभीतक एक भी आरोप सिद्ध नही हुआ है ।
स्वामी विवेकानंद के 100 साल बाद World Religious Parliament में हिन्दू धर्म की ध्वजा फहराई है संत आसाराम जी बापू ने । अपने जीवन के 50 साल उन्होंने देश धर्म और संस्कृति पर न्यौछावर किये हैं ।
क्या किया है अखाड़ो वालो ने देश या समाज के लिए ??
किस आधार पर ये दूसरों को फर्जी लिस्ट में डाल सकते हैं,क्या प्रमाण है इनके पास कि ये फर्जी हैं..??
बस ये केवल अपनी बिगड़ती साख बचाने के लिए दूसरों को फर्जी संत घोषित कर रहे हैं ।

सावधान : विधर्मियों के द्वारा हिन्दुओं को आपस में बाँटने की साजिश को नाकाम करना होगा

सावधान : विधर्मियों के द्वारा हिन्दुओं को आपस में बाँटने की साजिश को नाकाम करना होगा
🚩सनातन धर्म के संतों ने जब-जब व्यापकरूप से समाज को जगाने का प्रयास किया है, तब-तब उनको #विधर्मी #ताकतों के द्वारा #बदनाम करने के लिए षड्यंत्र किये गये हैं, जिनमें वे कभी-कभी हिन्दू संतों को भी मोहरा बनाकर #हिन्दू संतों के खिलाफ #दुष्प्रचार करने में सफल हो जाते हैं । यह हिन्दुओं की दुर्बलता है कि वे विधर्मियों के चक्कर में आकर अपने ही संतों की निंदा सुनकर विधर्मियों की हाँ में हाँ करने लग जाते हैं और उनकी हिन्दू धर्म को नष्ट करने की गहरी साजिश को समझ नहीं पाते । इसे हिन्दुओं का भोलापन भी कह सकते हैं । कुछ तो इतने भोले हैं कि जब किसी बड़े संत पर षड्यंत्रकारी आरोप लगाते हैं तो खुश होते हैं कि ‘अब हम बड़े हो जायेंगे’ और वे नं. 1 बनने की कवायद करने लग जाते हैं । उनको पता नहीं कि वे भी आगे चलकर षड्यंत्रकारियों के शिकार होंगे । ऐसे लोग भी विधर्मियों के षड्यंत्रों से अपनी संस्कृति की रक्षा करने के बदले उनके पिट्ठू बन जाते हैं ।
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🚩स्वामी #विवेकानंदजी जब अमेरिका में #सनातन धर्म की #महिमा गाकर #भारत का #गौरव बढ़ा रहे थे तब वहाँ कुछ हिन्दुओं ने ही उनकी निंदा करना, कुप्रचार करनेवालों को सहयोग देना शुरू कर दिया, जिनमें मुख्य थे वीरचंद गांधी और प्रतापचन्द्र मजूमदार । प्रतापचन्द्र मजूमदार ईसाई मिशनरियों की कठपुतली बन गया । ‘विवेकानंदजी एक विषयलम्पट साधु, विलासी युवान और हमेशा जवान लड़कियों के बीच रहनेवाला चरित्रहीन पुरुष है’ – ऐसा अमेरिका के प्रसिद्ध अखबारों में लिखने लगा । इन दुष्प्रचारकों ने विवेकानंदजी के भक्त की नौकरानी का विवेकानंदजी के द्वारा यौन-शोषण किया गया ऐसी #मनगढ़ंत कहानी भी छाप दी । जिस भवन में स्वामी विवेकानंदजी का प्रवचन होता उसके सामने वे लोग एक अर्धनग्न लड़की के साथ विवेकानंदजी के फोटो के पोस्टर भी लगा देते थे । फिर भी स्वामी विवेकानंदजी के अमेरिकन भक्तों की श्रद्धा वे हिला न सके । तब #प्रतापचन्द्र मजूमदार भारत आया और उनकी #निंदा करने लगा । विवेकानंदजी पर ठगी, अनेक स्त्रियों का चरित्रभंग करने के आरोप लगाने लगा । ‘स्वामी विवेकानंदजी भारत के सनातन धर्म के किसी भी मत के साधु ही नहीं हैं’ – ऐसा दुष्प्रचार करने लगा ।
🚩विधर्मियों द्वारा षड़्यंत्रों के तहत लगवाये गये ऐसे अनेक आरोपों को झेलते हुए भी स्वामी #विवेकानंदजी #सनातन धर्म का प्रचार करते रहे । उन्हें आज समस्त #विश्व के लोग एक महापुरुष के रूप में आदर से देखते हैं लेकिन मजूमदार किस नरक में सड़ता होगा हमें पता नहीं ।
🚩आरोप लगनेमात्र से यदि महात्मा कलंकित हो जाते तो वर्तमानकालीन शंकराचार्य श्री जयेन्द्र सरस्वतीजी, कृपालुजी महाराज, स्वामी केशवानंदजी आदि तथा पूर्वकालीन संत जैसे स्वामी विवेकानंदजी, नरसिंह मेहता, संत एकनाथजी आदि पर भी कई दुष्टों ने आरोप लगाये थे । आरोप लगानेवालों ने तो भगवान को भी नहीं बख्शा था । भगवान श्रीकृष्ण पर भी स्यमंतक मणि चुराने का आरोप और अन्य कई प्रकार के आरोप लगाये गये थे । भगवान श्रीरामचन्द्रजी पर भी आरोप लगा था कि बालि को उन्होंने युद्धधर्म की नीति का उल्लंघन करके मारा था और महान पतिव्रता नारी सीता देवी पर भी एक धोबी ने चरित्रभ्रष्ट होने का आरोप लगाया था । इससे क्या उनकी भगवत्ता कलंकित हो गयी ? महात्मा बुद्ध पर भी तत्कालीन दुष्ट अधर्मियों ने आरोप लगाये थे तो क्या इससे उनकी महानता कलंकित हो गयी ?
🚩#जीवन्मुक्त #महापुरुषों के व्यवहार में #भिन्नता होने पर भी वे सब #ज्ञाननिष्ठा में पूर्ण होते हैं । वेदव्यासजी के पुत्र शुकदेवजी बड़े त्यागी थे लेकिन उनको ज्ञान लेने के लिए गृहस्थी महापुरुष राजा जनक के पास जाना पड़ा । #रामकृष्ण परमहंस त्यागी परमहंस थे लेकिन उनके शिष्य #विवेकानंदजी देश-विदेश में #धर्म-प्रचार के लिए भ्रमण करते थे, पुरुष और स्त्री दोनों को शिक्षा-दीक्षा देते थे इसलिए वे महान संत नहीं थे यह कहना उचित नहीं है । राजा जनक, महात्मा बुद्ध, आद्य शंकराचार्यजी आदि अनेक संतों-महापुरुषों ने स्त्रियों के उद्धार के द्वारा समाज का उद्धार करने के लिए स्त्रियों को शिक्षा-दीक्षा दी ।
🚩कुछ संकीर्ण मानसिकता से ग्रस्त नासमझ लोग शास्त्रों का गलत अर्थघटन करके समाज में भ्रांतियाँ फैलाते हैं कि ‘स्त्री का गुरु तो पति ही है, अतः अन्य गुरु का निषेध अपने-आप हो जाता है ।’ उन लोगों को शास्त्र के दृष्टांतों से ही बता सकते हैं कि उनकी मान्यता गलत है । #भगवान शंकर ने अपनी पत्नी #पार्वती को #वामदेव ऋषि से दीक्षा दिलायी थी । शबरी के गुरु उसके पति नहीं थे, भगवान श्रीराम भी नहीं थे, एक महापुरुष #मतंग ऋषि शबरी के गुरु थे । #मीराबाई के गुरु उनके पति नहीं थे, भगवान कृष्ण को भी मीरा ने गुरु नहीं बनाया, संत #रैदासजी को गुरु बनाया । सहजोबाई ने पति को गुरु नहीं बनाया, संत चरनदासजी को गुरु बनाया और वे कहती हैं :
🚩राम तजूँ पै गुरु न बिसारुँ ।गुरु के सम हरि कूँ न निहारुँ ।।
🚩कुछ तथाकथित निगुरे लेखक शास्त्रों का मनमाना अर्थ लगाकर लोगों को यहाँ तक कह डालते हैं कि श्रीकृष्ण या शिवजी को ही गुरु मान लो । भगवान श्रीकृष्ण ने ऐसा नहीं कहा कि उनको ही गुरु बना लो । जीवित महापुरुष सांदीपनि मुनि को गुरु बनानेवाले श्रीकृष्ण गीता के चौथे अध्याय के 34वें श्लोक में कहते हैं :
🚩तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया ।
उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः ।।
🚩‘उस ज्ञान को तू तत्त्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर समझ । उनको भलीभाँति दण्डवत् प्रणाम करने से, उनकी सेवा करने से और कपट छोड़कर सरलतापूर्वक प्रश्न करने से वे परमात्म-तत्त्व को भलीभाँति जाननेवाले ज्ञानी महात्मा तुझे उस तत्त्वज्ञान का उपदेश करेंगे ।’
🚩वैदिक साहित्य के उपनिषद्, गीता या अन्य किसी भी ग्रंथ में निगुरे रहने का उपदेश नहीं दिया गया । श्रुति कहती है :
🚩तद्विज्ञानार्थं स गुरुमेवाभिगच्छेत् समित्पाणिः श्रोत्रियं ब्रह्मनिष्ठम् ।
🚩‘उस जिज्ञासु को परमात्मा का वास्तविक तत्त्वज्ञान प्राप्त करने के लिए हाथ में समिधा लेकर श्रद्धा और विनय भाव के सहित ऐसे सद्गुरु की शरण में जाना चाहिए जो वेदों के रहस्य को भलीभाँति जानते हों और परब्रह्म-परमात्मा में स्थित हों ।’          (मुण्डकोपनिषद् : 1.2.12)
🚩ऐसी सनातन धर्म की दिव्य परम्परा को नष्ट करने का स्वप्न देखनेवाले लोगों से सावधान होना बहुत जरूरी है ।
🚩भगवान #विट्ठल ने अपने भक्त #नामदेव के लिए स्वयं गुरु न बनकर उन्हें ब्रह्मनिष्ठ महापुरुष विसोबा खेचर से दीक्षा लेने को कहा था । यही नहीं स्वयं आद्यशक्ति माँ काली ने $रामकृष्ण परमहंसजी को स्वयं दीक्षा न देकर उन्हें गुरु #तोतापुरीजी की शरण में जाने को कहा था । और तो और, स्वयं भगवान श्रीराम व श्रीकृष्ण ने भी गुरु बनाये थे ।
🚩अतः भ्रांतियाँ फैलानेवालों को कुछ बोलने या लिखने से पहले सोचना चाहिए । अपनी अल्पबुद्धि का परिचय नहीं देना चाहिए । डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी जैसे तटस्थ न्यायविदों ने जो बात कही है कि #‘‘संत आसाराम जी बापू के #खिलाफ किया गया #केस पूरी तरह #बोगस है ।’’ और यह भी कहा कि ‘‘हिन्दू-विरोधी एवं #राष्ट्रविरोधी ताकतों के गहरे #षड्यंत्रों को और हिन्दू संतों को बदनाम करने के उनके (विधर्मियों के) गुप्त हथकंडों को सीधे व भोले-भाले हिन्दू नहीं देख पा रहे हैं ।’’ इन बातों की कद्र करके अपनी हिन्दू संस्कृति की रक्षा करनी चाहिए । एक ईसाई या मौलवी से कोई गलत काम हो जाता है, न्यायालय में सिद्ध भी हो जाता है तो भी दूसरा ईसाई या मौलवी उसको दोषी नहीं कहता क्योंकि अपने धर्म का है । हिन्दू संस्कृति ये नहीं कहती कि तुम दोषी को दोषी न कहो लेकिन इतना जरूर कहती है कि निर्दोष पर दोषारोपण करने के पहले सच्चाई जानने का प्रयास तो करो । हिन्दू संस्कृति के दुश्मन, हिन्दुत्व के लिए पूरा जीवन अर्पण करनेवाले किसी संत को षड्यंत्र करके फँसाने का प्रयास करते हैं और दूसरे कुछ हिन्दू, जो अपने को हिन्दुत्व के रक्षक मानते हैं, बिना सत्य की गहराई में गये उन संत पर टिप्पणी करने लगते हैं यह कितने खेद की बात है !
🚩डॉ. डेविड फ्रॉली कहते हैं : ‘‘भारत को अपने लक्ष्य तक पहुँचना है और वह लक्ष्य है अपनी #आध्यात्मिक संस्कृति का #पुनरुद्धार । इसमें न केवल भारत का अपितु मानवता का कल्याण निहित है । यह तभी सम्भव है जब भारत के बुद्धिजीवी आधुनिकता का मोह त्यागकर अपने धर्म और अध्यात्म की कटु आलोचना से विरत होंगे ।’’         (पृष्ठ 14, ‘उत्तिष्ठ कौन्तेय’)
🚩अतः सावधान रहने की आवश्यकता है । #विधर्मियों के #हिन्दुओं को आपस में #बाँटने की #साजिश को समझना चाहिए । – वरिष्ठ पत्रकार श्री अरुण रामतीर्थकर
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swami VIVEKANANDJI

वर्ल्ड रिलीजियस पार्लियामेंट में दो संतों ने हिन्दू संस्कृति का परचम लहराया है

10 Sep 2017


स्वामी# विवेकानंद #ने अमरीका के शिकागो में 11# सितंबर #1893 को आयोजित #विश्व धर्म परिषद #में जो भाषण दिया था उसकी प्रतिध्वनि युगों-युगों तक सुनाई देती रहेगी।

हिन्दू संस्कृति का परचम लहराने #वर्ल्ड रिलीजियस पार्लियामेंट #(विश्व धर्मपरिषद) शिकागो में भारत का नेतृत्व 11 सितम्बर 1893 में स्वामी विवेकानंदजी ने और ठीक उसके 100 #साल बाद 4 सितम्बर 1993 #संत# आसारामजी बापू ने किया था ।
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 लेकिन दुर्भाग्य है कि जिन संतो को #”भारत रत्न” #की उपाधि से #अलंकृत #करना चाहिए उन्हें ईसाई मिशनरियों के इशारे पर राजनीति के तहत झूठे आरोपों द्वारा #जेल #में भेजा जाता है और विदेशी# फण्ड #से चलने वाली भारतीय मीडिया द्वारा उन्हें बदनाम कराया जाता है ।
शिकागो की #धर्म सभा के दाैरान पादरियों द्वारा यह कहा गया कि भारत भिखारियों का देश है वहाँ पर #धर्म प्रचार #करने की आवश्यकता है।
जब स्वामी #विवेकानंद जी #तक यह बात पहुंची तो वे तिलमिला उठे और गर्जना भरे शब्दों में पादरियों की सभा में बोले कि तुम कहते हो भारत भिखारियों का देश है तो इस भ्रम को निकाल दो, #भारत भिखारियों का नहीं बल्कि भिक्षुकों का #देश है।
भिखारी वो होते हैं  जो #धन के अभाव #में किसी से याचना करते हैं ,
पर तुम नहीं जानते हो तो सुनो !
भारत में ऐसे राजा हुए जो सोने के महल में रहते व चांदी के थाल में भोजन करते थे।
लेकिन जब उन्हें सनातन ज्ञान का मार्गदर्शन मिला तो वे वैराग्य को धारण करके सत्य की खोज के लिए सब कुछ त्याग कर #भिक्षुक बन गए , जंगलों में गुरु की सेवा करते और रोटी का टुकड़ा भिक्षा में माँग कर खाते।
 राजा भर्तृहरि, परीक्षित, सिद्धार्थ, महावीर, भरत जैसे महात्मा राजा इसका #प्रयत्क्ष# उदाहरण हैं ।
और उन्होंने उस परमानन्द की प्राप्ति की जिसकी तुम कल्पना भी नहीं कर सकते हो ।
देखो तुम आनंद से इतने नीरस हो गए हो कि धन और डंडे के भय से #धर्म प्रचार कर रहे हो।
लेकिन #उन महापुरुषों के रहने मात्र से पशु पक्षी भी शांति का अनुभव करते हैं इसलिए भारत भिक्षुकों का #देश #है।
तुम थोड़ा सा भी भारत का प्रसाद पाओगे तो कृतार्थ हो जाओगे।
स्वामी जी के इस उपदेश से कितने #ईसाई सुधरे, कितने जल भून गए पर स्वामी जी बिना किसी की परवाह किये सनातन #धर्म का डंका बजाते रहे।
स्वामी जी के हयाती #काल में उन्हें इतना परेशान# किया गया ,उनका इतना #कुप्रचार किया गया कि उनके गुरूजी की समाधि के लिये #एक गज जमीन तक# उन्हें नहीं मिली थी । पर अब पूरी दुनिया स्वामी #विवेकानंद जी व उनके गुरूजी का जय-जयकार करती है ।
जब वे धरती से चले गए, अर्थात् #इतिहास के पन्नों पर जब उनकी महिमा आयी तब लोग उनको इतना आदर – सम्मान देते हैं पर उनकी# हयातीकाल में उनके साथ दुष्टों ने कैसा #व्यवहार किया…!!
सावधान!!
क्या हम भी ऐसा #व्यवहार हयात संतों के साथ तो नहीं कर रहें..??
वर्त्तमान समय में भी ऐसे #महान संत इस धरती पर# विराजमान हैं जिन्होंने अपना पूरा जीवन हिन्दू संस्कृति के# उत्थान में लगा दिया ।
 अभी भी #जिन साधु -संतो को #ईसाई मिशनरियों के इशारे पर #मीडिया द्वारा बदनाम किया जा रहा है उनका भी आगे जयकारा दुनिया बोलेगी ।
#ईसाई मिशनरियां स्वामी विवेकानंदजी के समय से संतो के #विरुद्ध षड़यंत्र कर #रही हैं क्योंकि हिन्दू संत इनके आँखों की किकरी बन गए हैं ये हमारे संतों के सामने #धर्मान्तरण में विफल #हो रही हैं ।
इसका #प्रयत्क्ष उदाहरण संत आसारामजी बापू हैं जिनका #जीवन चरित्र पढ़ने से पता चलता है कि उन्होंने संस्कृति उत्थान के लिए अतुलनीय कार्य किये हैं।
 आज मल्टी #नेशनल कंपनियों को भारी घाटा होने के कारण ही वे #षड़यंत्र के तहत फंसाये गए हैं । क्योंकि उनके 6 करोड़ भक्त बीड़ी, सिगरेट, दारू, चाय, कॉफी, सॉफ्ट कोल्ड्रिंक आदि नही पीते हैं । वेलेंटाइन डे आदि नहीं मनाते जिससे विदेशी कपनियों को अरबो-खबरों का घाटा हो रहा था और उन्होंने लाखों हिन्दुओं की घर वापिस कराई इसलिए ईसाई मिशनरियों ने और विदेशी कंपनियों ने मिलकर मीडिया में बदमाम करवाया और राजनीति से मीकलर झूठे केस में फंसाया और कुछ गंजेड़ी-भंगेड़ी साधु का चोला पहने हुए उनको संत बोलने से इंकार करते है कितनी नादान बुद्धि है ।
संत नारसिंह मेहता जी को भी ब्राह्मणों ने बहिष्कार किया था तो क्या वे संत नही थे? आज भी वे करोड़ो के हृदय में बसे है ।
वो समाज अभागा है जो सच्चे संतों की महिमा नहीं समझ रहा !!
उनके साथ हो रहे अन्याय को नहीं समझ रहा !!
संत तो संत होते हैं कोई उन्हें माने या न माने, इससे उनकी आंतरिक स्थिति पर कोई अन्तर नहीं पड़ता पर जो समाज उनकी हयाती में उनसे फायदा नहीं उठा पाया तो ये उस समाज का दुर्भाग्य है ।
स्वामी विवेकानंद को लोगों ने नहीं पहचाना तो इसे विवेकानंद का क्या बिगड़ा..??
स्वामी रामतीर्थ को लोग नहीं समझ पाये तो इसे रामतीर्थ क्या बिगड़ा..??
महात्मा बुद्ध के साथ घिनौने षड़यंत्र किये गए तो इसे बुद्ध का क्या बिगड़ा..??
कबीर जी को बदनाम किया गया इसे कबीर जी का क्या बिगड़ा..??
 #गुरुनानक के लिए लोग उल्टा-सीधा बोलते थे तो इसे नानक जी का क्या बिगड़ा..??
 #समर्थ रामदास,एकनाथ महाराज,तुकाराम,ज्ञानेश्वर जी आदि आदि…
 कितने संतों के नाम बताये जिनके हयातीकाल में उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया कि आज जब हम इतिहास पढ़ते हैं तो नजरें शर्म से झुक जाती हैं ।
पर उन #महापुरुषों का क्या बिगड़ा…???
बिगड़ा तो उस समाज का बिगड़ा जो ऐसे महापुरुषों की हयाती में उनका लाभ नहीं उठा पाये ।
अपने अंदर झांककर देखे कि आज हम भी कहीं वही गलती तो नहीं दोहरा रहे..??
सोचे,समझे और हकीकत तक पहुँचने का प्रयास करें !!
मीडिया की बातों में आकर किसी भी संत पर ऊँगली उठाने से पहले सच्चाई तक पहुँचने का प्रयास करना ये आज हर हिन्दू का कर्त्तव्य बनता है ।
अगर सच तक पहुचने की कोशिश करेंगे तो आपको जो दिखाई दे रहा है उसे विपरीत कुछ और ही सच्चाई देखने को मिलेगी ।
उठे, किसी की बातों में न आकर स्वयं सच्चाई तक पहुँचे !!
जय हिन्द !!
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parshuram

देश को आज परशुराम की ही जरूरत है !!

09-Sep-2017
शक्तिधर #परशुराम का चरित्र एक ओर जहाँ शक्ति के केन्द्र सत्ताधीशों को #त्यागपूर्ण आचरण की #शिक्षा देता है वहीं दूसरी ओर वह शोषित #पीड़ित क्षुब्ध #जनमानस को भी उसकी शक्ति और #सामर्थ्य का एहसास दिलाता है । #शासकीय दमन के विरूद्ध वह क्रान्ति का #शंखनाद है । वह सर्वहारा वर्ग के लिए अपने न्यायोचित अधिकार प्राप्त करने की मूर्तिमंत प्रेरणा है।  वह राजशक्ति पर लोकशक्ति का विजयघोष है।
The-country-needs-parashuram-today
आज स्वतंत्र भारत में सैकड़ों-हजारों #सहस्रबाहु देश के कोने-कोने में विविध स्तरों पर #सक्रिय हैं । ये कहीं न कहीं #न्याय का #आडम्बर करते हुए भोली जनता को छल रहे हैं, कहीं उसका श्रम हड़पकर अबाध विलास में ही राजपद की सार्थकता मान रहे हैं, तो कहीं #अपराधी #माफिया गिरोह #खुलेआम #आतंक फैला रहे हैं। तब असुरक्षित जन-सामान्य की रक्षा के लिए आत्म-स्फुरित ऊर्जा से भरपूर व्यक्तियों के निर्माण की बहुत आवश्यकता है । इसकी आदर्श पूर्ति के निमित्त परशुराम जैसे प्रखर व्यक्तित्व विश्व इतिहास में विरल ही हैं।  इस प्रकार परशुराम का चरित्र शासक और शासित-दोनों स्तरों पर प्रासंगिक है ।
शस्त्र शक्ति का विरोध करते हुए #अहिंसा का ढोल चाहे कितना ही क्यों न पीटा जाये, उसकी आवाज सदा ढोल के पोलेपन के समान #खोखली और #सारहीन ही #सिद्ध हुई है । उसमें ठोस यथार्थ की सारगर्भिता कभी नहीं आ सकी। सत्य हिंसा और अहिंसा के संतुलन बिंदु पर ही केन्द्रित है । कोरी अहिंसा और विवेकहीन पाश्विक हिंसा, दोनों ही मानवता के लिए समान रूप से घातक हैं । आज जब हमारे #राष्ट्र की सीमाएं #असुरक्षित हैं, कभी #कारगिल, कभी #कश्मीर, कभी #बंग्लादेश तो कभी देश के अन्दर #नक्सलवादी शक्तियों के कारण हमारी #अस्मिता का #चीरहरण हो रहा है तब परशुराम जैसे वीर और विवेकशील व्यक्तित्व के नेतृत्व की आवश्यकता है ।
गत शताब्दी में कोरी अहिंसा की उपासना करने वाले हमारे नेतृत्व के प्रभाव से हम जरुरत के समय सही कदम उठाने में हिचकते रहे हैं । यदि सही और सार्थक प्रयत्न किया जाये तो देश के अन्दर से ही प्रश्न खड़े होने लगते हैं। परिणाम यह है कि हमारे तथाकथित बुद्धिजीवियों और व्यवस्थापकों की धमनियों का लहू इतना सर्द हो गया है कि देश की जवानी को व्यर्थ में ही कटवाकर भी वे आत्मसंतोष और आत्मश्लाघा का ही अनुभव करते हैं। अपने नौनिहालों की कुर्बानी पर वे गर्व अनुभव करते हैं, उनकी वीरता के गीत तो गाते हैं किन्तु उनके हत्यारों से बदला लेने के लिए उनका खून नहीं खौलता। प्रतिशोध की ज्वाला अपनी #चमक #खो बैठी है । #शौर्य के #अंगार तथाकथित संयम की राख से ढंके हैं । शत्रु-शक्तियां सफलता के उन्माद में सहस्रबाहु की तरह उन्मादित हैं लेकिन परशुराम अनुशासन और संयम के बोझ तले मौन हैं ।
राष्ट्रकवि दिनकर ने सन् #1962 ई. में #चीनी #आक्रमण के समय देश को ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ शीर्षक से ओजस्वी काव्यकृति देकर सही रास्ता चुनने की प्रेरणा दी थी । युग चारण ने अपने दायित्व का सही-सही निर्वाह किया । किन्तु #राजसत्ता की #कुटिल और अंधी #स्वार्थपूर्ण #लालसा ने हमारे तत्कालीन नेतृत्व के बहरे कानों तक उसकी पुकार ही नहीं आने दी । पांच दशक बीत गये । इस बीच एक ओर साहित्य में परशुराम के प्रतीकार्थ को लेकर समय पर प्रेरणाप्रद रचनाएं प्रकाश में आती रही और दूसरी ओर सहस्रबाहु की तरह विलासिता में डूबा हमारा नेतृत्व #राष्ट्र-विरोधी #षड़यंत्रों को देश के भीतर और बाहर दोनों ओर #पनपने का अवसर देता रहा । परशुराम पर केन्द्रित साहित्यिक रचनाओं के संदेश को व्यावहारिक स्तर पर स्वीकार करके हम साधारण जनजीवन और राष्ट्रीय गौरव की रक्षा कर सकते हैं ।
#महापुरूष किसी एक देश, एक युग, एक जाति या एक धर्म के नहीं होते । वे तो सम्पूर्ण मानवता की, समस्त विश्व की, समूचे #राष्ट्र की #विभूति होते हैं । उन्हें किसी भी सीमा में बाँधना ठीक नहीं । दुर्भाग्य से हमारे यहां स्वतंत्रता में महापुरूषों को स्थान, धर्म और जाति की बेड़ियों में जकड़ा गया है । विशेष महापुरूष विशेष वर्ग के द्वारा ही सत्कृत हो रहे हैं । एक समाज विशेष ही विशिष्ट व्यक्तित्व की जयंती मनाता है । अन्य जन उसमें रूचि नहीं दर्शाते,अक्सर ऐसा ही देखा जा रहा है। यह स्थिति दुभाग्यपूर्ण है । महापुरूष चाहे किसी भी देश, जाति, वर्ग, धर्म आदि से संबंधित हो, वह सबके लिए समान रूप से पूज्य है, अनुकरणीय है  ।
इस संदर्भ में भगवान परशुराम जो उपर्युक्त विडंबनापूर्ण स्थिति के चलते केवल ब्राह्मण वर्ग तक सीमित हो गए हैं । समस्त #शोषित वर्ग के लिए प्रेरणा स्रोत #क्रान्तिदूत के रूप में स्वीकार किये जाने योग्य हैं और सभी शक्तिधरों के लिए संयम के अनुकरणीय आदर्श हैं ।
#भा माना -#अध्यात्म
#रत माना – उसमें #रत रहने वाले
“जिस देश के लोग #अध्यात्म में #रत रहते हैं उसका नाम है #भारत।”
#भारत की #गरिमा उसके #संतों से ही रही है सदा । भगवान भी बार-बार जिस धरा पर अवतरित होते आये हैं वो भूमि भारत की भूमि है । किसी भी देश को माँ कहकर संबोधित नहीं किया जाता पर भारत को “भारत माता” कहकर संबोधित किया जाता है क्योंकि यह देश आध्यात्मिक देश है,संतों महापुरुषों का देश है । भौतिकता के साथ-साथ यहाँ आध्यात्मिकता को भी उतना ही महत्व दिया गया है। पर आज के #पाश्चात्य कल्चर की ओर बढ़ते कदम इसकी गरिमा को भूलते चले जा रहे हैं । #संतों महापुरुषों का #महत्व,उनके #आध्यात्मिक स्पन्दन #भूलते जा रहे हैं ।
 संत और समाज में #खाई खोदने में एक #बड़ा वर्ग #सक्रीय है । #मिशनरियां सक्रीय हैं । #मीडिया सक्रीय है । #विदेशी #कम्पनियाँ सक्रीय हैं । विदेशी फण्ड से चलने वाले #NGOs सक्रीय हैं । कई #राजनैतिक दल अपने फायदे के लिए #सक्रीय हैं ।
इतने #सब वर्ग जब एक साथ #सक्रीय होंगे तो किसी के भी प्रति भी गलत धारणाएं #समाज के मन में उत्पन्न करना बहुत ही आसान हो जाता है और यही हो रहा है हमारे संत समाज के साथ ।
पिछले कुछ सालों से एक दौर ही चल पड़ा है हिन्दू संतों को लेकर । हर #संत को सिर्फ #आरोपों के #आधार पर सालों #जेल में #रखा जाता है फिर #विदेशी फण्ड से चलने वाली #मीडिया उनको अच्छे से #बदनाम करके उनकी #छवि समाज के सामने इतनी #धूमिल कर देती है कि समाज उन झूठे आरोपों के पीछे की सच्चाई तक पहुँचने का प्रयास ही नहीं करता ।
पर अब #समाज को #जगना होगा, #संतों के साथ हो रहे #अन्याय को समझने के लिए । अगर अब भी #हिन्दू #मौन दर्शक बनकर देखता रहा तो #हिंदुओं का #भविष्य #खतरे में हैं ।
indonesia & india the-limits-of-atrocities-hindus-are-ending-in-indonesia-bangladesh-and-pakistan

अत्याचार की हदें हुई पार: इंडोनेशिया, बांग्लादेश व पाकिस्तान में तेजी से खत्म हो रहे हैं हिन्दू |

सितम्बर 8, 2017
 भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहंगिया को देशवासियों की सुरक्षा को देखते हुए वापस भेजने का फैसला लिया गया तो मानवाधिकारी केन्द्र के इस फैसले को अत्याचार कह कर विरोध कर रहे हैं और कुछ वकील तो सरकार के फैसले के खिलाफ अदालत में बिना सोचे समझे याचिका भी दायर कर रहे हैं । शायद ये बुद्धिजीवी इंडोनेशिया, बांग्लादेश और पाकिस्तान की घटनाओं से वाकिफ नहीं हैं । भारत की तरह इंडोनेशिया भी हिन्दू राष्ट्र हुआ करता था लेकिन अब वहाँ हिन्दुओं की तादाद न के बराबर रह गयी है। वजह है अवैध तरीके से वहाँ बसे लोग जिन्होंने अपनी तादाद बढ़ाने के लिए हिंदुत्ववादियों को मारना शुरू कर दिया और अगर बात करें खुद भारत की तो जहां-जहां से भारत की सीमा बांग्लादेश से लगती है अब वहां जातीय गणित गड़बड़ा रहा है। वहाँ हिन्दू अल्पसंख्‍यक और मुसलमान बहुसंख्‍यक हो गये हैं । बांग्लादेश की ओर से घुसपैठ जारी है जिसके चलते असम में हालात बिगड़ रहे हैं ।
Extinction of Hindus In Indonesia
आपको बता दें कि जब पाकिस्तान का जबरन हिस्सा बन गए बंगालियों ने विद्रोह छेड़ दिया तो इसे कुचलने के लिए पश्‍चिमी पाकिस्तान ने अपनी पूरी ताकत लगाते हुए हिन्दुओं को चुन-चुनकर मारना शुरू कर दिया। जिसमें लाखों बंगालियों की मौत हुई। हजारों बंगाली औरतों का बलात्कार हुआ।
 आकड़ो के अनुसार लगभग 30 लाख से ज्यादा हिन्दुओं का युद्ध की आड़ में कत्ल कर दिया गया। 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ 9 महीने तक चले बांग्लादेश के स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान हिन्दुओं पर अत्याचार, बलात्कार और नरसंहार के आरोपों में दिलावर को दोषी पाया गया तो भारतीय सेना ने अपना खून बहाकर सन् 1971 में बांग्लादेश को पाकिस्तान के कब्जे से आजाद कराया । इस खूनी संघर्ष में पूर्वी बंगाल (बांग्लादेश) के लगभग 1 करोड़ मुसलमान भारत के पश्‍चिम बंगाल, पूर्वोत्तर राज्य में आ गये । जिनकी  संख्‍या 1 करोड़ से बढ़कर 3.50 करोड़ के आसपास हो गई है।
 जहां-जहां से भारत की सीमा बांग्लादेश से लगती है वहाँ हिन्दू अल्पसंख्‍यक और मुसलमान बहुसंख्‍यक हो गये हैं ।
आपको बता दें कि 2011 में बांग्लादेशी सरकार द्वारा जारी किए गए धार्मिक जनगणना के डाटा अनुसार इस समय बांग्लादेश में हिन्दुओं की संख्या महज 8.6 प्रतिशत रह गई है। बांग्लादेश में हिन्दुओं पर कई उत्पीड़न के मामले भी सामने आये हैं जिसमें हिन्दुओं की संपत्ति को लूटा गया, घरों को जला दिया गया तथा मंदिरों को आग के हवाले कर दिया गया ।
वही इंडोनेशिया में बाली द्वीप प्रांत पर ही हिन्दू बचे हैं। कभी हिन्दू राष्ट्र रहे इंडोनेशिया में आज भी हिन्दू काल के कई प्रचीन और विशालकाय मंदिर मौजूद हैं जो उस देश की पहचान हैं। वहाँ के मुस्लिमों को कभी हिन्दुओं से तकलीफ नहीं रही है क्यूंकि वे जानते हैं कि उनके पूर्वज हिन्दू थे लेकिन पिछले कुछ वर्षों में वहां बाहरी लोगों ने आकर कट्टरवाद को बढ़ावा दिया है। वर्तमान में यहां पर अल कायदा और आईस के सक्रिय होने से देश की सरकार‍ चिंता में है और वहाँ के हिन्दू नागरिकों पर भी खतरा मंडरा रहा है ।
पाकिस्तान में गैर-मुस्लिमों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार हो रहा है। #स्कूलों में #इस्लाम की #शिक्षा दी जाती है। गैर-मुस्लिमों, खासकर हिंदुओं के साथ असहिष्णु व्यवहार किया जाता है।  #हिंदू युवतियों और महिलाओं के साथ #दुष्कर्म, #अपहरण की घटनाएं आम हैं। उन्हें #इस्लामिक मदरसों में रखकर जबरन #धर्मतांरण का दबाव डाला जाता है। गरीब हिंदू तबका बंधुआ मजदूर की तरह जीने को मजबूर है। हिंसक हमले भी किये जाते है । अभी कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान के थार जिले में एक नाबालिग हिन्दू लड़की का कथित तौर पर अपहरण करके उसको धर्मान्तरित करा दिया गया।
अब जानिए भारत क्यों रोहिंग्याओं को वापस भेजना चाहता है…
केंद्रीय गृहराज्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि UNHCR का पेपर होने के बावजूद रोहिंग्या शरणार्थियों को भारत में नहीं रहने दिया जा सकता। भारत रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस भेजने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। इसके पीछे के कुछ कारण ये हैं…
भारत में 40,000 रोहिंग्या शरणार्थी जम्मू, हैदराबाद, देहली-एनसीआर, हरियाणा, यूपी और राजस्थान में शरण लिए हुए हैं। इनमें 17,000 के पास UNHCR के कागजात हैं।
1. शरणार्थियों के आतंकी संगठनों से संबंध है !
2. रोहिंग्या शरणार्थी न केवल भारतीय नागरिकों के अधिकार पर अतिक्रमण कर रहे हैं अपितु सुरक्षा के लिए भी चुनौती हैं !
3. रोहिंग्या शरणार्थियों के कारण सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक समस्याएं खड़ी हो सकती हैं !
4. इसके पीछे की एक सोच यह भी है कि, भारत के जनसांख्यिकीय स्वरूप सुरक्षित रखा जाए !
मुद्दे की बात यह है कि जिस तरह से घुसपेठियों ने देश में आकर देश की जनता को मजहब के नाम पर और खुद की संख्या ज्यादा करने के लिए मारना शरू किया है उससे देश में आतंक फैल सकता है जिससे खून खराबे हो सकते हैं जो कि किसी भी देश के लिए सही बात नहीं है । इसलिए इस पर काबू पाना अनिवार्य बन गया है। जिसपर केंद्र ने फैसला भी लिया लेकिन कुछ बुद्धिजीव इस बात को समझ नहीं रहे हैं ।
rajiv dixit, asaram bapu,

धर्मसत्ता व राजसत्ता में से बड़ा कौन? आसारामजी बापू सच्चे या झूठे संत ? : राजीव दीक्षित

🚩वर्तमान में #हिन्दू #धर्मगुरुओं पर जो #बहस चल रही है उसपर पहले से ही देशभक्त स्वर्गीय श्री राजीव दीक्षित ने बता दिया था कि धर्मसत्ता और राजसत्ता क्या होती है?
और कौन कौन संत धर्मसत्ता के प्रतीक हैं ।
🚩आइये  जानते हैं कि क्या कहा श्री राजीव दीक्षित जी ने…

rajiv dixit

 

🚩साधु समाज संत समाज जब भी निकला है, समाज उसके पीछे चला है ।  हमारे यहाँ की #राजनैतिक व्यवस्था #हमेशा #संत समाज के #नीचे रही है संत समाज ऊपर रहा है, राजनैतिक व्यवस्था नीचे रही है । संत समाज के आशीर्वाद से हमारे यहाँ नेता काम कर रहे हैं । आप जानते हैं कि भारत के महान राजा #चंद्रगुप्त, #विक्रमादित्य, #हर्षवर्धन , #सम्राट अशोक ये जितने भी बड़े-बड़े महान चक्रवर्ती सम्राट हुए इन सबका नियम था कि दरबार में कोई साधु आ गया तो राजा अपना सिंहासन छोड़ता था और साधु को अपने सिंहासन पर बिठाता था मतलब साधु के लिए सन्यासी के लिए सिंहासन खाली है।। राजा उनके चरणों में बैठता था इसका मतलब ये है कि साधु समाज #संत समाज धर्म समाज हमारी #राज्यसत्ता को #निर्देशित करती थी । तो जब तक भारत की धर्म सत्ता राज्य सत्ता को निर्देशित करती थी तब तक भारत सोने की चिड़िया था ।
🚩#चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के समय में देख लो #भारत #सोने की #चिड़िया था, समुद्रगुप्त का समय देख लो भारत सोने की चिड़िया था, #हर्षवर्धन का समय देख लो भारत सोने की चिड़िया था, #सम्राट अशोक का समय देख लो भारत सोने की चिड़िया था…
🚩 जब-जब #धर्म सत्ता #ऊपर रही है और #राज्य सत्ता नीचे रही तब-तब #भारत #सोने की #चिड़िया रहा लेकिन जब विदेशियों का हमला हुआ, #विदेशियों ने यहाँ आकर #साम्राज्य #स्थापित कर लिया तब #धर्म सत्ता नीचे चली गई राज्य सत्ता ऊपर आ गई । तब से भारत नीचे #रसातल में गिरता ही चला जा रहा है !!
🚩गिरता ही जा रहा है !!
🚩गिरता ही जा रहा है !!
🚩और इतना ही गिरता जा रहा है कि लोगों को भरोसा ही उठ गया है कि ये देश उठ सकता है !! #गरीबी बढ़ी, #व्यभिचार बढा, #पापाचार बड़ा , #अत्याचार बढ़ा, #भ्रष्टाचार #बढ़ा। जब से #धर्म सत्ता नीचे हो गई राज्य सत्ता ऊपर आ गई ।
🚩अब फिर से धर्म सत्ता ऊपर आ रही है #स्वामी #सत्यमित्रानंद गिरिजी धर्म सत्ता के प्रतीक हैं। महा-मंडलेश्वर जितने भी हैं धर्म सत्ता के #प्रतीक हैं। हमारे देश के महान #मोरारी बापू धर्म सत्ता के प्रतीक हैं। #पूज्य #आसारामजी बापू #धर्म सत्ता के #प्रतीक हैं । ये बड़े #साधु-महापुरुष-सन्यासी #धर्म सत्ता के #प्रतीक इक्कठे हो रहे हैं … !!
🚩अंग्रेजो के जमाने के बनाये कानूनों को खत्म करने की बात करते हो । ऐसे 15-20 मुद्दे तय हुए हैं उसके आधार पर आप वोट करिये ये बात कहने के लिए मैं जाने वाला हूँ और ऐसे दूसरे भी साधु-संत जाने वाले हैं ।
🚩आपको सुनकर हैरानी होगी हमारे देश के महा-मंडलेश्वर बहुत पूजनीय है । सत्य मित्रानंदजी गिरी वो परसो हमारे साथ थे हरिद्वार में । उनका पूरा आशीर्वाद है कि ये काम के लिए आप निकलते हो तो मैं भी आपके साथ हूँ,मोरारी बापूजी का पूरा आशीर्वाद है, 15 बड़े साधु-संत जिनके 1-1 कोटी से ज्यादा फॉलोवर हैं ऐसे 15 साधु-संत 600 जिलों का प्रभाव शुरू करने जा रहे हैं। अगले 2 साल में और ये प्रयास इसी बात के लिए है कि हमको गेट करार नहीं चाहिए, #मल्टी नेशनल #नहीं #चाहिए, डब्लू DO नहीं चाहिए, #विदेशीकरण जो हो रहा है इस देश में वो #नहीं चाहिए, कर्जबाजारी जो बढ़ रही है देश की ओर समाज की ओर वो नहीं चाहिए ।

🚩जब साधु-संत निकल रहे हैं तो समाज में तो आप जान लीजिए परिवर्तन तो होगा ही… इस देश में !! क्योंकि जब भी भारत का सन्यासी या साधु निकला है तो उसने देश और समाज को बदला है ये हमारा हजारों साल का इतिहास है आप कभी भी उठा कर देख सकते हैं ।
🚩आज #विदेशी #ताकतों द्वारा केवल #हिन्दू साधु-संतों को ही #बदनाम किया जा रहा है #क्योंकि #भारत में उनके #विदेशी #प्रोडक्ट #नही बिकते हैं, #धर्मान्तरण #नहीं हो #पाता है इसलिए #विदेशी #फंडिग #मीडिया से #बदनाम करवाते हैं ।
🚩हिन्दू #धर्मगुरु #आसारामजी बापू के बारे में तो राजीव दीक्षित पहले ही धर्म सत्ता के प्रतीक बता चुके हैं, लेकिन मीडिया की बातों में आकर कुछ हिन्दू ही उनको गलत बोल रहे हैं क्योंकि उनकी वास्तविकता पता नही है, वे 4 साल से जेल में बंद हैं लेकिन अभीतक एक भी #आरोप सिद्ध नही हुआ है और मेडिकल में क्लीन चिट भी मिल गई है, #डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी भी उनका केस लड़ चुके हैं पर आखिर उन्होंने बताया कि लाखों हिन्दुओं की घर वापसी करवाने के कारण #ईसाई मिशनरियां पीछे पड़ी है उनको बदनाम करवाने के और मुख्यमंत्री वसुंधरा भी डरपोक है इसलिए उनको जमानत नही मिल रही है।
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