सनातन संस्था से घबराये भ्रष्ट नेता और मीडिया, कर रहे हैं बदनाम

21 August 2018
🚩गोवा में स्थित सनातन संस्था ने अनेक भ्रष्टाचारी नेताओं, बिकाऊ मीडिया, ईसाई मिशनरियों, जिहादीयों की पोल खोल के समाज के सामने रख दी है और उनको न्यायालय में भी घसीटा है जिसके कारण इन विधर्मियों को सुई की नाई सनातन संस्था चुभ रही है उसके लिए बोखलाए हुए है ।
🚩मुंबई के नालासोपारा के गौरक्षक श्री वैभव राऊत को 10 अगस्त 2018 को  महाराष्ट्र आतंकवादविरोधी दल ने गिरफ्तार कर लिया,
उन पर आरोप लगाया गया है कि उनके पास से बम बनाने का साहित्य व विस्फोटक सामग्री मिली ।
Deaf politicians and media, afraid of Sanatan Sanstha, are notorious
🚩आतंकवादविरोधी दल भले विरोध करें पर जनता का कहना है कि जैसे साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल पुरोहित आदि के घर पर पुलिस ने ही बम विस्फोटक सामग्री रखकर उनको गिरफ्तार किया और प्रताड़ित किया गया था उसके बाद सालों तक जेल में रहे ।
🚩ऐसा ही प्रकरण वैभव राऊत के साथ हो रहा ऐसा लग रहा है क्योंकि वे एक गौभक्त थे, कोई भी गौभक्त देश विरोधी कार्य कभी नही कर सकता है ।
🚩वैभव राऊत महाराष्ट्र में गौरक्षा कर रहे थे, वे सनातन संस्था के कई कार्यक्रमों में जाते थे लेकिन बिकाऊ मीडिया झूठ बोलकर जनता को गुमराह कर रही है कि वैभव राऊत सनातन संस्था के साधक है ।
🚩अधिवक्ता पुनाळेकर ने बताया कि श्री. वैभव राऊत गोवंश रक्षा कार्यकर्ता के रूप में काम करते हैं । महाराष्ट्र में गोवंश हत्याबंदी की विधि है; परंतु तब भी कुछ धर्मांध गोवंश की हत्या करते हैं और उसे बेचते हैं । श्री. वैभव राऊत ने सदैव इसका विरोध किया है । उसी के कारण श्री. वैभव धर्मांधों की आंखों में चूभ रहे थे । बकरी ईद की पृष्ठभूमिपर गोहत्या के लिए श्री. वैभव द्वारा विरोध न हो; इसके लिए उन्हें अपना जिला छोडकर जाने के नोटिस भी दिए गए थे । आज श्री. वैभव को जिस प्रकार से इस प्रकरण में फंसाया गया है, उसे देखते हुए इसके पीछे गोवंश की हत्या करनेवाले बीफ माफिया (गोमांस की तस्करी करनेवाले लोग) हैं ।
🚩पुनाळेकर की बात सही सिद्ध हो रही है क्योंकि मंगलवार (21/8/2018) को तेलंगाना के टाइगर राजा सिंह गौरक्षा कर रहे थे तो पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, राजा सिंह गौमाता के परम भक्त हैं इसलिए गौरक्षा  के लिए भाजपा से इस्तीफा भी दे दिया ।
🚩भारत में आज भी हिन्दूनिष्ठ लोगों के साथ षड्यंत्र चल रहा है । वैभव राउत और टाइगर राजा सिंह ने गौरक्षा के लिए कदम उठाया तो गिरफ्तार कर लिया, लेकिन अभी तक एक भी गौतस्कर को गिरफ्तार नही किया गया ।
🚩मीडिया और भ्रष्ट नेता वैभव राउत की आड़ लेकर सनातन संस्था को बदनाम कर रहे हैं, और उसपर बेन लगाने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि वे अच्छी तरह जानते हैं कि सनातन संस्था बन्द हो जाये तो हमे राष्ट्र विरोधी कार्य करेंगे तो कोई बोलेगा नही ओर हम आराम से जिंदगी जिएंगे ।
🚩भ्रष्टाचारी नेताओं, सेक्युलर, वामपंथी और मीडिया को ये पता नही है कि सनातन संस्था की जड़ पूरे देश मे फैली है अगर थोड़ी भी आंच आई तो करोड़ों हिन्दूओं का आक्रोश झेलना पड़ेगा, सनातन संस्था बंद करने से पहले शायद आपकी दुकान बंद न हो जाए इसका ध्यान रखना ।
🚩हिन्दुओं को भी जागना होगा जो भी हिंदुत्व के लिए कार्य करता है उसे टारगेट किया जा रहा है । एक के बाद एक हिंदुनिष्ठ को खत्म करने का प्लान करने का प्लान किया जा रहा है ।
🚩वर्तमान में भले हिंदूवादी कहलाने वाली सरकार हो, लेकिन इस सरकार ने अभी तक कोई हिंदुत्व का कार्य किया ऐसा दिखाई नही दे रहा है, लेकिन हाँ ये जरूर है कि जो हिंदुत्व का कार्य कर रहे है उनको झूठे केस बनाकर जेल भेजा जा रहा है इससे सिद्ध होता है कि आज भी षड्यंत्र चल रहे हैं ।
🚩इलेक्ट्रॉनिक मीडिया चैनल ज़ी न्यूज़ जो अपने को हिंदूवादी बताती है, वही पोल कर रही है कि क्या सनातन संस्था को बंद कर दी जाए ? इससे सिद्ध होता है कि ये लोग केवल हिंदुत्व का मुखटा पहनकर हिन्दुओ को लूट रहे है हिंदूवादी चैनल एकमात्र सुदर्शन न्यूज़ ।
🚩हिन्दू आप सावधान रहें, ऊपर हिंदूवादी दिखने वाले और षड्यंत्र करने वालो से तभी हिन्दू संस्कृति बचेगी ।
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उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने फरमान किया जारी : 24 घण्टे में गौहत्या करे बन्द

20 August 2018
http://azaadbharat.org
🚩भारत देश में गाय का बड़ा योगदान रहा है और उसकी महत्ता भी भारी है । गाय माता के दूध-दही-घी-मूत्र-गोबर से बने पंचगव्य से भयंकर बीमारियां भी ठीक हो जाती है, गाय के अंदर 33 करोड़ देवता का वास होता तभी तो भगवान श्री कृष्ण भी स्वयं गाये चराते थे, यहाँ तक बताया गया है की गाय के गोबर से जहाँ लीपन किया जाता है वहाँ अगर परमाणु बम भी गिरे तो भी उसकी असर नही होती है । गाय की उपयोगिता के बारे में कितना भी लिखो वो कम है ।
🚩देशवासी गाय को माता मानते हैं और उसका पूजन करते हैं, लेकिन दुर्भाग्य है कि आज भी देश में हजारों गाएं कट रही है, लेकिन वहीं एक अच्छी खबर भी आई है कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने गौहत्या पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया है ।
Uttarakhand High Court commits verdicts: Cow do not go off in 24 hours
🚩उत्तराखंड में गाय और अन्य आवारा पशुओं की सुरक्षा के लिए अब न्यायालय भी सामने आया है । उच्च न्यायालय ने राज्य में गौहत्या पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है ।
🚩कार्यवाहक चीफ जस्ट‍िस राजीव शर्मा और जस्ट‍िस मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने अपने आदेश में पूरे उत्तराखंड में गाय, बैल, सांड, बछिया या बछड़े का, किसी भी उद्देश्य के लिए हत्या पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है ।
🚩न्यायालय ने ‘परेन्स पैट्रिए’ सिद्धांत का उपयोग करते हुए गाय और अन्य आवारा पशुओं की भलाई के लिए निर्देश जारी किए हैं । लैटिन शब्द परेन्स पैट्रिए का मतलब है, ‘अपने देश के माता-पिता’ और इस सिद्धांत के तहत किसी राज्य को यह अधिकार होता है कि वह ऐसे निरीह प्राणियों के संरक्षण के लिए कानून बनाए, जो अपनी रक्षा स्वयं नहीं कर सकते हैं ।
🚩न्यायालय ने राज्य के सभी सर्किल ऑफिसर को आदेश दिया है कि 24 घंटे के अंदर यह सुनिश्चित करें कि अब किसी भी गाय की हत्या न हो ।’ इसके अलावा न्यायालय ने यह निर्देश भी दिए हैं कि ‘कोई भी पशु यदि सड़कों, चौराहों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर पाया जाता है तो उनके मालिक पर मुकदमा कायम किया जाए ।’
🚩न्यायालय ने सड़कों पर यातायात को सुचारु रूप से चलाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों तथा राज्य के राजमार्गों के विभाग, ग्राम पंचायतों और नगर निगमों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि ‘सड़कों पर कोई भी आवारा पशु घूमता दिखाई न दे ।’ न्यायालय ने यह भी कहा कि आवारा पशुओें को सड़कों से हटाते समय पूरी दया और करुणा दिखाई जाए और यह ध्यान रहे कि उन्हें किसी प्रकार के अनावश्यक दर्द का सामना न करना पड़े ।
स्त्रोत : आज तक
🚩आपको बता दें कि कुछ समय पहले हैदराबाद उच्च न्यायालय के जज बी. शिवा शंकर राव ने कहा था कि गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा मिलना ही चाहिए । साथ ही उन्होंने गाय को पवित्र राष्ट्रीय धरोहर बताते हुए यह भी कहा कि पवित्र गाय का स्थान मां और भगवान के तुल्य है ।
🚩कुछ समय पूर्व राजस्थान उच्च न्यायालय ने भी गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने की बात कही थी ।
भारत के ऐसे सपूत वीर न्यायधीशों को प्रणाम है जो करोड़ों हिन्दुओं की भावनाओं को समझ रहे हैं और गाय माता की महत्ता समझे हैं ।
🚩आज जो हमारे देश मे भूकंप, बाढ़ आदि आते हैं, उसका कारण भी गौहत्या ही है, जब गाय की हत्या हो रही होती है, तब उसकी चीख जो निकलती है उससे पृथ्वी माता काँपने लगती है । केरला में सरेआम गौहत्या की गयी थी, आज उसका परिणाम सभी केलरवासी भुगत रहे हैं ।
🚩शास्त्रों में लिखा है कि
भूकंप कहे गाइ की गाथा।
कांपे धरा त्रास अति जाता।
अथार्त् जब गौमाता को कष्ट होता है, तभी पृथ्वी कांपती है अर्थात भूकम्प आता है ।
🚩अथर्ववेद के अनुसार- गाय समृद्धि का मूल स्रोत व प्रचुरता की द्योतक है एवं सृष्टि के पोषण की स्रोत व जननी है । गाय माता में 33 करोड़ देवताओं का वास हैं ।
🚩गाय को सताना घोर पाप है । उसकी हत्या से तो नर्क के द्वार खुल जाते हैं तथा करोड़ों जन्मों तक दुख भोगना पड़ता है ।
🚩“गौमय वसते लक्ष्मी” यह हमारी प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक संस्कृति का मूल-मंत्र रहा है ।
🚩आज के वैज्ञानिक भी कहते हैं कि गाय ही एकमात्र ऐसा पवित्र प्राणी है जो ऑक्सीजन ग्रहण करता है और ऑक्सीजन ही छोड़ता है ।
🚩रुसी वैज्ञानिक शिरोविच ने बताया है कि 1 चम्मच गौघृत जला कर हम 1 टन  प्राणवायु प्राप्त कर सकते हैं ।
🚩बता दें कि एलोपैथिक दवाओं, रसायनिक खादों, प्रदूषण आदि के कारण शरीर में एकत्रित विष गाय के दूध से ही नष्ट होता है ।
🚩गौ माता का दूध,दही,गौ-मूत्र,गोबर आदि जीवन के लिए उपयोगी होने के साथ-साथ वरदान स्वरुप है ।
🚩अमेरिका केंसर की दवा बनाने के लिए भारत से गौमूत्र आयात करता है और हम लोग पवित्र गौ-माता को कत्लखाने भेज देते हैं । ये उचित नहीं है ।
🚩प्रत्येक हिन्दुस्तानी का यह परम् कर्तव्य है कि वो गौ-गीता और संतों का सम्मान करें । ऐसा करेंगे तभी हम देश को सही दिशा की ओर ले जा पाएंगे और देश को गुलाम होने से बचा पाएंगे ।
🚩मोदी सरकार ने जैसे रातोंरात नोटबन्दी कर दी थी, वैसे ही रातोंरात घोषणा कर देनी चाहिए कि पूरे देश में गौहत्या बंद हो और गाय को राष्ट्रीय माता घोषित करके गौहत्यारों को फांसी की सजा का प्रावधान कर देना चाहिए ।
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आज़ादी के 72 वर्ष बाद भी कुपोषण से हर साल होती है, हजारों बच्चों की मौत…

19 August 2018
🚩एक समय था जब भारत सोने की चिड़िया कहलाता था, फिर एक समय ऐसा आया जब क्रूर, आतताई, आक्रमणकारी, लुटेरे मुगलों और अंग्रेजों ने भारत देश लो लूटा, लेकिन फिर लाखों देशभक्तों के बलिदान के बाद देश आजादी का सूरज उदय हुआ, लेकिन फिर देश के ही कुछ भ्रष्ट नेताओं ने लूट देश को लूट लिया जिसकी वजह से आज भारत में गरीबी बढ़ती ही जा रही है ।
🚩आजादी के समय जहाँ एक
रुपए की कीमत एक डॉलर के  बराबर होती थी, वहीं आज एक डॉलर की कीमत लगभग 70 रुपए है ।
🚩भ्रष्ट नेताओं के कारण आज देश में किसान आत्महत्या कर रहे हैं और गरीब बच्चे मर रहे हैं ।
72 years of independence also happens every year
with malnutrition, thousands of children die …
🚩देश अपनी स्वतंत्रता की 72वीं सालगिरह मना रहा है, परंतु स्वतंत्रता के सात दशक बाद भी भारतीय बच्चों को अच्छा जीवन स्तर नहीं मिल पा रहा है । एक ओर देश में हर साल लगभग 3000 बच्चे कुपोषण की वजह से मर जाते हैं । वहीं दूसरी ओर गरीबी के कारण लाखों बच्चों को सड़कों पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है । विशेषज्ञों का कहना है कि भारत ने संयुक्त राष्ट्रीय के 192 सदस्य राज्यों के साथ साल 2030 तक टिकाऊ विकास हासिल करने का लक्ष्य तय किया था । इस तथ्य के बावजूद गरीब बच्चों की संख्या बढती जा रही है । हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एच.सी.एफ.आइ.) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने बताया कि 5.9 करोड़ से अधिक बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं । देश में सड़क पर रहनेवाले बेघर बच्चों की संख्या खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है । उन्हें रोजाना जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, उससे यह स्थिति और खराब होती जा रही है । भोजन की कमी से लेकर यौन शोषण तक इनके सामने कठिनाइयों की भरमार है । डॉ. अग्रवाल ने यह भी कहा कि यह एक गंभीर मेडिको-लीगल आपात स्थिति है ।
🚩गरीबी उन्मूलन, भूखमरी का अंत और स्वस्थ जीवन की सुनिश्चितता जैसे बाल केंद्रित लक्ष्य, केवल तभी हासिल हो सकते हैं, जब सरकार और निजी संस्थाएं मजबूत ढांचे और नीतियों की स्थापना करने और उन्हें लागू करने के लिए काम करें । सामाजिक कार्यकर्ता व प्रयास एन.जी.ओ. के संस्थापक आमोद के कंठ ने कहा कि सड़कों पर रहनेवाले बच्चे ज्यादातर निर्माण स्थलों या रेस्तरां में दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते हैं । शहरों में उनके साथ शारीरिक रूप से दुर्व्यवहार किया जाता है और दिन में सात घंटे से अधिक समय तक काम कराया जाता है । इसके अलावा उन्हें काम के दौरान पीटा भी जाता है । डॉ. अग्रवाल ने आगे कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद-21 बच्चों सहित सभी को गरिमा के साथ जीवन के अधिकार की गारंटी देता है । इस अधिनियम की समीक्षा करने और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि बेघर बच्चों और समाज के निम्न आर्थिक स्तर पर जी रहे लोगों की अनदेखी न की जाए ।
🚩उदाहरण के लिए, युवावस्था में प्रवेश करनेवाली लड़कियों को साप्ताहिक रूप से गुड़-चना (लौह और प्रोटीन) दिया जाना चाहिए । बच्चों का स्वास्थ्य और सुरक्षा एक जिम्मेदारी है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है । बच्चों में बुनियादी पोषण सुनिश्चित करने पर गंभीरता से काम करना चाहिए । अक्टूबर में होने वाले स्वास्थ्य मेले में इस मुद्दे पर विशेष रूप से जोर दिया जाएगा । प्रयास जुवेनाइल ऐड सेंटर (जे.ए.सी.) सोसायटी ने सड़क पर जिंदगी बितानेवाले बच्चों के सामने आनेवाली कठिनाइयों को लेकर एक कार्यक्रम किया । डॉ. के.के. अग्रवाल और आमोद के कंठ ने बाल यौन शोषण, कुपोषण और बच्चों की अन्य स्वास्थ्य समस्याओं पर चिंता जाहिर की । और नीति निर्माताओं का ध्यान इस तरफ खींचा कि किस तरह से बच्चों का जीवन स्तर बेहतर बनाया जा सकता है । उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए विशेष नीतियां बना कर काम करने से ही सशक्त व विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है ।
स्त्रोत : जनसत्ता
🚩श्रम और #रोजगार #मंत्रालय की रिपोर्ट (2011) उठाकर देखें तो लगभग 12 करोड़ बच्चों का बचपन होटलों, उद्योगों और सड़कों पर बीत रहा  है । 33 फीसदी वयस्क और तीन वर्ष से कम उम्र के 46 फीसदी बच्चे कुपोषण के शिकार हैं ।
🚩देश में हर 35 मिनट पर एक #किसान #खुदकुशी कर रहा है । एक रिपोर्ट के अनुसार 10.8 करोड़ नवयुवक आज भी बेरोजगार हैं ।
🚩15 अगस्त 1947 को भारत न सिर्फ #विदेशी कर्जों से मुक्त था, बल्कि उल्टे #ब्रिटेन पर भारत का 16.62 करोड़ रुपए का कर्ज था । आज देश पर 480.2 अरब डॉलर (करीब 317 खरब रुपये)  से भी ज्यादा  विदेशी कर्ज है । भारत में किसी नवजात के पैदा होते ही उस पर अप्रत्यक्ष रूप से करीब तीन हजार रुपये का विदेशी कर्ज चढ़ जाता है । भारत का #स्विस_बैंकों में जमा विदेशी धन करीब 8,392 करोड़ रुपये है ।
🚩लोगों ने सोचा अब शोषक #सरकार (#विदेशी_सरकार) चली गयी तो अब हमलोग सुखी होंगे, बेकारी मिटेगी, गरीबी हटेगी, भेदभाव की खाईं पटेगी, समानता आएगी, सामाजिक समानता मिलेगी, लेकिन 70 साल बाद भी जो सपने आजादी के दिवानों ने देखे थे, वे साकार हुए क्या ?
🚩भारत सरकार को अब इन पर ठोस कदम उठाने चाहिए, तभी देश आगे बढ़ पाएगा ।
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गाय बचाने वाले तीन साधुओं की निर्मम हत्या, सेकुलर, मीडिया ने साधी चुप्पी

18 August 2018
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🚩देश में हिन्दू धर्म को छोड़कर किसी अन्य धर्म के लोगों पर हमला होता है या हत्या हो जाती है तो सेकुलर नेता, वामपंथी, मीडिया सब मिलकर इतना शोर मचाते हैं कि मानो भारत में कोई भयंकर अघटित घटना घट गई हो, मीडिया 24 घण्टे डिबेट बैठा देती है और ब्रेकिंग न्यूज़ न्यूज चलाती है, लेकिन उसकी जगह कोई हिन्दू हो तो ये सभी चुप हो जाते हैं ।
Niram murder, secular, media silent killing of three sadhus save cow
🚩आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश औरैया के जंगल में सैंकड़ों गाएँ काटी जा रही थी, वहाँ पास में ही पुलिस स्टेशन भी था, लेकिन पुलिस आँख के आड़े कान कर रहे थे ।
🚩उस गाँव मे तीन हिन्दू साधू गौतस्करी का विरोध कर रहे थे, ये गौतस्करी करने वाले जिहादियों के खिलाफ पुलिस थाने में शिकायतें भी कर रहे थे, जिसके कारण गौतस्करों के निशाने पर थे ।
🚩तीनों हिन्दू साधु 14 अगस्त 2018 की रात को मंदिर में सोने के लिए अपने-अपने चारपाई पर चले गए, उसी रात को जिहादियों ने मंदिर पर हमला किया, मंदिर में तीन साधुओं के अलावा कोई नहीं था, ये तीनो ही वृद्ध थे, कई जिहादियों ने हमले को अंजाम दिया और तीनो साधुओं को उनकी चारपाई से बाँधा, हाथों और पैरों को बाँध दिया और सबसे पहले तीनो की जीभ को चाक़ू से काटा
और उसके बाद तीनो की गर्दनो को चाकुओं से काट कर तीनो को मार डाला गया, तीन वृद्ध साधुओं को मौत के घाट उतार दिया गया ।
🚩हिन्दू बाहुल्य देश में इतनी बड़ी घटना हुई है, तीन हिन्दू साधुओं की निर्मम हत्या करवा दी है फिर भी देश की मीडिया, देश के बुद्धिजीवी और नेता चुप है, क्या ये लिंचिंग में नहीं आता ?
🚩लिंचिंग, लिंचिंग, लिंचिंग, लिंचिंग, लिंचिंग, लिंचिंग करने वाले तमाम सेक्युलर, तमाम बुद्धिजीवी, तमाम मीडिया वाले, तमाम नेता इस घटना पर मौन हैं, सबके मुँह में दही जम गयी है, ये लिंचिंग-लिंचिंग तभी करते हैं, जब कोई जुनैद, अख़लाक़ इत्यादि हो, तीन वृद्ध साधुओं की निर्मम हत्या इन लोगों के लिए लिंचिंग में नहीं आती ।
🚩देश के तमाम लोगों को सोचना होगा कि हमारा देश किस तरफ जा रहा है, स्वतंत्रता दिवस पर कई मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में झंडा नहीं फहराने दिया गया, कई जगह राष्ट्रगान नहीं होने दिया गया, साधुओं को मार दिया जा रहा है, पर इस देश की मीडिया, नेता और बुद्धिजीवी, जो हिंदुओं के खिलाफ दिन रात बोलते रहते हैं, इन घटनाओं के होने पर, इनके मुँह में दही जमी हुई है ।
🚩हमे नेताओं मीडिया और बुद्धिजीवी सेकुलरों से पूछना होगा, तीन साधुओं की हत्या क्या लिंचिंग नहीं है, और लिंचिंग है तो तुम सब मौन क्यों हो ?
🚩भारत देश में गाय, गीता, गंगा और साधु ये हिन्दू धर्म के रक्षक है । आज इन सभी पर अत्याचार हो रहा है, कोई गौहत्या रोकने जाता है तो उसको बदनाम किया जाता है या गुंडा बताया जाता है, गीता का प्रचार करने वालों को ढोंगी बताया जाता है, गंगा मैया में आज भी बहुत सारी गंदगी भरी है और हिन्दू साधु-संत, समाज को अच्छी राह पर ले जाते हैं, स्वधर्म की महिमा बताते हैं, प्राचीन संस्कृति की तरफ ले जाते हैं,  जिससे हम स्वस्थ्य, सुखी, सम्मानित जीवन जीते हैं और हमें दुःखी परेशान करने वाली पश्चिम संस्कृति से दूर रहते हैं, जो विधर्मियों को भाता नहीं है तो साधु-संतों को मीडिया द्वारा बदनाम करके जेल भेज देते हैं या उनकी हत्या करवा दी जाती है ।
🚩हिंदुओं को सावधान रहना होगा क्योंकि उनका टारगेट है हिन्दू संस्कृति खत्म करके और हिंदुओं का धर्मान्तरण करवाकर खुद भारत पर राज करें ।
🚩भारत में साधुओं पर हो रहे षड्यंत्र का सभी को मिलकर मुकाबला करना होगा, नहीं तो एक के बाद एक करके साधुओं को खत्म कर दिया जाएगा ।
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एक चर्च में पादरियों ने, 1000 से अधिक बच्चों के साथ किया रेप

17 August 2018

🚩कैथलिक चर्च की दया, शांति और कल्याण की असलियत दुनिया के सामने उजागर ही हो गयी है । मानवता और कल्याण के नाम पर क्रूरता का पोल खुल चुकी है । चर्च  कुकर्मो की  पाठशाला व सेक्स स्कैंडल का अड्डा बन गया है । 
🚩अभी हाल ही में अमेरिका के पेन्सिलवेनिया से एक हैरान करने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें कहा जा रहा है कि एक कैथोलिक चर्च में पादरियों ने 1,000 से ज्यादा बच्चों का यौन शोषण किया है और यह काम पिछले कई दशकों से चल रहा था । ग्रांड ज्यूरी की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 300 पादरियों ने पिछले 70 सालों से इस घिनौने काम को अंजाम दिया है । माना जा रहा कि 1940 से बच्चों के साथ रेप और यौन शोषण का कम चल रहा था, जिसमें कई सीनियर चर्च अधिकारी भी शामिल है, जो अब वॉशिंगटन डीसी में आर्कबिशप बने बैठे हैं ।
Pastors in a church, raped with more than 1000 children

🚩इस रिपोर्ट के मुताबिक, कई पीड़ित आगे नहीं आ पाए हैं और कई अपराधी पादरियों के रिकॉर्ड्स को चर्च ने गायब कर दिया है, इसलिए यह आकंलन लगाना गलत नहीं होगा कि पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ भी सकती है । इस रिपोर्ट ने दावा किया है कि चर्चों ने कई पादरियों के बचाने की भी कोशिश की है ।
🚩रिपोर्ट ने कहा, ‘सबसे बड़ी बात यह है कि बच्चों की मदद नहीं की गई, लेकिन इस पूरे स्कैंडल को नजरअंदाज किया गया । तथाकथित अपने आप को ईश्वर बताने वाले लोगों ने चर्च में सालों से मासूम लड़कों और लड़कियों का रेप किया । वे ना सिर्फ इस घिनौने करतूतों के लिए जिम्मेदार थे, बल्कि उन्होंने इसको बड़ी चालाकी के साथ छुपाया भी है ।’
🚩रिपोर्ट में दुर्व्यवहार के भयानक दास्तां शामिल हैं, जिसमें एक पादरी ने तो अस्पताल में लड़की के टॉन्सिल निकालने के बाद भी उसका रेप कर दिया था । वहीं, एक अन्य पादरी ने 17 वर्षीय लड़की को अपनाने के बाद, उसे चर्च में रहने की इजाजत दी थी और शादी प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद उस लड़की को तलाक दे दिया था ।
🚩लगभग हर मामले में, अभियोजकों ने पाया कि कई पादरियों पर अपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है, क्योंकि कई तो रिटायर्ड हो चुके हैं और 100 से अधिक पादरियों की मौत भी हो चुकी है । अधिकारियों ने फिलहाल दो पादरियों को दोषी ठहराया है, जिसमें से एक दोषी पाया जा चुका है। अटॉर्नी जनरल जोश शापिरो ने कहा कि इस मामले की जांच चल रही है । 
🚩ईसाई पादरियों ने किए कुकर्मों पर एक नजर अभी तक के बड़े आरोपों और जांच पर… 
🚩ऑस्ट्रेलिया:-
यौन शोषण के मामलों को छिपाने के दोष में पादरी ऐडिलेड में आर्कबिशप फिलिप विलसन को 12 महीने की जेल की सजा सुनाई गई । वह यौन शोषण के मामले को छिपाने वाले दुनिया के सबसे ऊंचे पद पर बैठे अधिकारी (पादरी) भी बने । 
🚩चिली:-
22 मई को यौन शोषण के आरोपों में ही 14 पादरियों को चर्च से निकाल दिया गया था। यह आरोप एक दशक पुराने थे। 
🚩ऑस्ट्रिया:-
यौन शोषण के करीब 800 मामलों का खुलासा हुआ । दो स्कैंडलों की वजह से वैटिकन को उच्च-पदस्थ पादरियों को 1995 और साल 2004 में हटाना पड़ा । 
🚩कनाडा:-
पादरियों के खिलाफ करीब 10 हजार शोषण के स्व-घोषित पीड़ितों ने मुआवजे के लिए प्रदर्शन किया । 
🚩जर्मनी:-
साल 2010 से सैकड़ों कथित मामले सामने आए हैं । साल 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक, 1945 से 1990 के दशक के बीच चर्च में प्रार्थना करने वाले समूह के 547 पूर्व सदस्य पादरियों द्वारा यौन शोषण के पीड़ित थे । 
🚩बेल्जियम:-
चर्च में 2012 के बाद से सैकड़ों यौन शोषण की शिकायतें मिली हैं । 
🚩नीदरलैंड्स:-
पादरियों द्वारा 1945 से 2010 के बीच हजारों नाबालिगों के साथ यौन शोषण हुआ । करीब 800 संदिग्धों की पहचान हुई । 
🚩आयरलैंड:- 
14 हजार 500 बच्चों के पादरियों द्वारा यौन शोषण के पीड़ित होने की जानकारी दी गई । 
🚩अमेरिका:-
1950 से 1980 के बीच 17 हजार शिकायतें मिलीं, जिनके मुताबिक 6 हजार 400 पादरियों ने यौन शोषण किया । 
🚩आपको बता दें कि अभी हाल ही में हजारों बच्चों के साथ यौनशोषण का आरोप साबित होने पर अदालत ने करोड़ों का मुआवजा भरने को कहा, तब एक कैथोलिक चर्च के उच्च पदस्थ पादरी कार्डिनल टिमोथी का एक चौंकाने वाला बयान आया था, मिल्वौकी के Archdiocese (आर्चडियोज़) ने दावा किया है कि बाल यौन शोषण (बच्चों का बलात्कार) पादरियों के लिए एक “ईश्वर प्रदत्त (धार्मिक) स्वतंत्रता ‘है ।
🚩पादरी का बयान कितना शर्मनाक है, ईसाई पादरी धर्मगुरु बनकर बैठे हैं और बच्चों के साथ दुष्कर्म करते हैं । जब #अदालत उन पर जुर्म लगाती है तब बयान देते हैं कि बच्चों का यौन शोषण करने की धार्मिक स्वतंत्रता है क्या ऐसे ईसाई के धर्मगुरु,लोगों का क्या भला करे पायेंगे?
🚩धार्मिकता के नाम पर छोटे-छोटे बच्चों के साथ बलात्कार करना, दारू पीना, #मांस खाना, धर्म का पैसा शेयर बाजार में लगाना, लोगों का शोषण करना, कानून का पालन नही करना, समाज उत्थान कार्य के नाम पर भोले-भाले #हिन्दुओं का #धर्मांतरण करवाना और बोलते हैं कि ईसाई धर्म सबसे बड़ा धर्म है ।
🚩सेक्युलर और मीडिया हिन्दू धर्म के पवित्र मंदिर, आश्रमों व साधु-संतों को बदनाम करते हैं, परंतु ईसाई पादरीयों के कुकर्म पर चुप रहते हैं क्योंकि उन्हें #वेटिकन सिटी से फंडिंग होता है ।
🚩कन्नूर (कैरल) के कैथोलिक चर्च की एक नन सिस्टर मैरी चांडी ने #पादरियों और #ननों का #चर्च और उनके शिक्षण संस्थानों में व्याप्त व्यभिचार का जिक्र अपनी आत्मकथा ‘ननमा निरंजवले स्वस्ति’ में किया है कि ‘चर्च के भीतर की जिन्दगी आध्यात्मिकता के बजाय #वासना से भरी थी । 
🚩हिंदुस्तानी ऐसे ईसाई पादरियों और उनका बचाव करने वाली मीडिया और सेक्युलर लोगो से सावधान रहें  ।
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भारत के दसवें प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में सबकुछ जानिए

16 August 2018

🚩सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का लंबी बीमारी के बाद गुरुवार को निधन हो गया । वाजपेयी ने 93 साल की उम्र में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में शाम पांच बजकर पांच मिनट पर अंतिम सांस ली । अटल जी की आत्मा को भगवान परम् शांति दें ।
🚩आरम्भिक जीवन :-
Know everything about India’s Tenth
Prime Minister Atal Bihari Vajpayee
उत्तरप्रदेश में आगरा जनपद के प्राचीन स्थान बटेश्वर के मूल निवासी पण्डित कृष्ण बिहारी वाजपेयी मध्य प्रदेश की ग्वालियर रियासत में अध्यापक थे । वहीं शिन्दे की छावनी में 25 दिसम्बर 1924 को ब्रह्ममुहूर्त में उनकी सहधर्मिणी कृष्णा वाजपेयी की कोख से अटल जी का जन्म हुआ था । पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर में अध्यापन कार्य तो करते ही थे, इसके अतिरिक्त वे हिन्दी व ब्रज भाषा के सिद्धहस्त कवि भी थे । पुत्र में काव्य के गुण वंशानुगत परिपाटी से प्राप्त हुए ।
🚩महात्मा रामचन्द्र वीर द्वारा रचित अमर कृति “विजय पताका” पढ़कर अटल जी के जीवन की दिशा ही बदल गई । अटल जी की बी०ए० की शिक्षा ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज (वर्तमान में लक्ष्मीबाई कालेज) में हुई । छात्र जीवन से वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने और तभी से राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे । कानपुर के डी०ए०वी० कालेज से राजनीति शास्त्र में एम०ए० की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की । उसके बाद उन्होंने अपने पिताजी के साथ-साथ कानपुर में ही एल०एल०बी० की पढ़ाई भी प्रारम्भ की लेकिन उसे बीच में ही विराम देकर पूरी निष्ठा से संघ के कार्य में जुट गये । डॉ॰ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पण्डित दीनदयाल उपाध्याय के निर्देशन में राजनीति का पाठ तो पढ़ा ही, साथ-साथ पाञ्चजन्य, राष्ट्रधर्म, दैनिक स्वदेश और वीर अर्जुन जैसे पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादन का कार्य भी कुशलता पूर्वक करते रहे ।
🚩सर्वतोमुखी विकास के लिये किये गये योगदान तथा असाधारण कार्यों के लिये 2014 दिसंबर में उन्हें  भारत रत्न से सम्मानित किया गया ।
🚩राजनीतिक जीवन :-
🚩वह भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वालों में से एक थे और सन् 1968 से 1973 तक वह उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके थे । सन् 1955 में उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, परन्तु सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सन् 1957 में बलरामपुर (जिला गोण्डा, उत्तर प्रदेश) से जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर लोकसभा में पहुँचे । सन् 1957 से 1977 तक जनता पार्टी की स्थापना तक | वे बीस वर्ष तक लगातार जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे । मोरारजी देसाई की सरकार में सन् 1977 से 1979 तक विदेश मन्त्री रहे और विदेशों में भारत की अच्छी छवि बनायी ।
🚩1980 में जनता पार्टी से असन्तुष्ट होकर इन्होंने जनता पार्टी छोड़ दी और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की | अप्रैल 1980 में बनी भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद का दायित्व भी वाजपेयी को सौंपा गया । दो बार राज्यसभा के लिये भी निर्वाचित हुए । लोकतन्त्र के सजग प्रहरी अटल बिहारी वाजपेयी ने सन् 1997 में प्रधानमन्त्री के रूप में देश की बागडोर संभाली । 19 अप्रैल 1998 को पुनः प्रधानमन्त्री पद की शपथ ली और उनके नेतृत्व में 13 दलों की गठबन्धन सरकार ने पाँच वर्षों में देश के अन्दर प्रगति के अनेक आयाम छुए ।
🚩सन् 2004 में कार्यकाल पूरा होने से पहले भयंकर गर्मी में सम्पन्न कराये गये लोकसभा चुनावों में भा०ज०पा० के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन (एन०डी०ए०) ने वाजपेयी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और भारत उदय (अंग्रेजी में इण्डिया शाइनिंग) का नारा दिया । इस चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला । ऐसी स्थिति में वामपंथी दलों के समर्थन से काँग्रेस ने भारत की केन्द्रीय सरकार पर कायम होने में सफलता प्राप्त की और भा०ज०पा० विपक्ष में बैठने को मजबूर हुई । सम्प्रति वे राजनीति से संन्यास ले चुके हैं और नई दिल्ली में 6-ए कृष्णामेनन मार्ग स्थित सरकारी आवास में रहते थे ।
🚩भारत को परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र बनाना :-
अटल सरकार ने 11 और 13 मई 1998 को पोखरण में पाँच भूमिगत परमाणु परीक्षण विस्फोट करके भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर दिया । इस कदम से उन्होंने भारत को निर्विवाद रूप से विश्व मानचित्र पर एक सुदृढ वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया । यह सब इतनी गोपनीयता से किया गया कि अति विकसित जासूसी उपग्रहों व तकनीकी से संपन्न पश्चिमी देशों को इसकी भनक तक नहीं लगी । यही नहीं इसके बाद पश्चिमी देशों द्वारा भारत पर अनेक प्रतिबंध लगाए गए लेकिन वाजपेयी सरकार ने सबका दृढ़तापूर्वक सामना करते हुए आर्थिक विकास की ऊचाईयों को छुआ ।
🚩पाकिस्तान से संबंधों में सुधार :-
19 फ़रवरी 1999 को सदा-ए-सरहद नाम से दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा शुरू की गई। इस सेवा का उद्घाटन करते हुए प्रथम यात्री के रूप में वाजपेयी जी ने पाकिस्तान की यात्रा करके नवाज़ शरीफ से मुलाकात की और आपसी संबंधों में एक नयी शुरुआत की ।
🚩कारगिल युद्ध :-
कुछ ही समय पश्चात् पाकिस्तान के तत्कालीन सेना प्रमुख परवेज़ मुशर्रफ की शह पर पाकिस्तानी सेना व उग्रवादियों ने कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ करके कई पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लिया । अटल सरकार ने पाकिस्तान की सीमा का उल्लंघन न करने की अंतर्राष्ट्रीय सलाह का सम्मान करते हुए धैर्यपूर्वक किंतु ठोस कार्यवाही करके भारतीय क्षेत्र को मुक्त कराया । इस युद्ध में प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण भारतीय सेना को जान माल का काफी नुकसान हुआ और पाकिस्तान के साथ शुरु किए गए संबंध सुधार एकबार फिर शून्य हो गए ।
🚩स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना :-
भारत भर के चारों कोनों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना (अंगरेजी में- गोल्डन क्वाड्रिलेट्रल प्रोजैक्ट या संक्षेप में जी क्यू प्रोजैक्ट) की शुरुआत की गई । इसके अंतर्गत दिल्ली, कलकत्ता, चेन्नई व मुम्बई को राजमार्ग से जोड़ा गया । ऐसा माना जाता है कि अटल जी के शासनकाल में भारत में जितनी सड़कों का निर्माण हुआ इतना केवल शेरशाह सूरी के समय में ही हुआ था ।
🚩वाजपेयी सरकार के अन्य प्रमुख कार्य :-
-संरचनात्मक ढाँचे के लिये कार्यदल, सॉफ्टवेयर विकास के लिये सूचना एवं प्रौद्योगिकी कार्यदल, विद्युतीकरण में गति लाने के लिये केन्द्रीय विद्युत नियामक आयोग आदि का गठन किया ।
-राष्ट्रीय राजमार्गों एवं हवाई अड्डों का विकास; नई टेलीकॉम नीति तथा कोकण रेलवे की शुरुआत करके बुनियादी संरचनात्मक ढाँचे को मजबूत करने वाले कदम उठाये ।
-राष्ट्रीय सुरक्षा समिति, आर्थिक सलाह समिति, व्यापार एवं उद्योग समिति भी गठित कीं ।
-आवश्यक उपभोक्ता सामग्रियों की कीमतें नियन्त्रित करने के लिये मुख्यमन्त्रियों का सम्मेलन बुलाया ।
-उड़ीसा के सर्वाधिक गरीब क्षेत्र के लिये सात सूत्रीय गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम शुरू किया ।
-आवास निर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए अर्बन सीलिंग एक्ट समाप्त किया ।
-ग्रामीण रोजगार सृजन एवं विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों के लिये बीमा योजना शुरू की ।
🚩कवि के रूप में अटल :-
अटल बिहारी वाजपेयी राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ एक कवि भी थे । मेरी इक्यावन कविताएँ अटल जी का प्रसिद्ध काव्यसंग्रह थे। वाजपेयी जी को काव्य रचनाशीलता एवं रसास्वाद के गुण विरासत में मिले हैं । उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ग्वालियर रियासत में अपने समय के जाने-माने कवि थे । वे ब्रजभाषा और खड़ी बोली में काव्य रचना करते थे । पारिवारिक वातावरण साहित्यिक एवं काव्यमय होने के कारण उनकी रगों में काव्य रक्त-रस अनवरत घूमता रहा है । उनकी सर्व प्रथम कविता ताजमहल थी । इसमें श्रृंगार रस के प्रेम प्रसून न चढ़ाकर “एक शहंशाह ने बनवा के हसीं ताजमहल, हम गरीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मजाक” की तरह उनका भी ध्यान ताजमहल के कारीगरों के शोषण पर ही गया । वास्तव में कोई भी कवि हृदय कभी कविता से वंचित नहीं रह सकता । राजनीति के साथ-साथ समष्टि एवं राष्ट्र के प्रति उनकी वैयक्तिक संवेदनशीलता आद्योपान्त प्रगट होती ही रही है । उनके संघर्षमय जीवन, परिवर्तनशील परिस्थितियाँ, राष्ट्रव्यापी आन्दोलन, जेल-जीवन आदि अनेक आयामों के प्रभाव एवं अनुभूति ने काव्य में सदैव ही अभिव्यक्ति पाई । विख्यात गज़ल गायक जगजीत सिंह ने अटल जी की चुनिंदा कविताओं को संगीतबद्ध करके एक एल्बम भी निकाला था ।
🚩अटल जी की प्रमुख रचनायें :-
-मृत्यु या हत्या
-अमर बलिदान (लोक सभा में अटल जी के वक्तव्यों का संग्रह)
-कैदी कविराय की कुण्डलियाँ
-संसद में तीन दशक
-अमर आग है
-कुछ लेख: कुछ भाषण
-सेक्युलर वाद
-राजनीति की रपटीली राहें
-बिन्दु बिन्दु विचार, इत्यादि
-मेरी इक्यावन कविताएँ
🚩पुरस्कार :-
-1992: पद्म विभूषण
-1993: डी लिट (कानपुर विश्वविद्यालय)
-1994: लोकमान्य तिलक पुरस्कार
-1994: श्रेष्ठ सासंद पुरस्कार
-1994: भारत रत्न पंडित गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार
-2014 दिसम्बर : भारत रत्न से सम्मानित।
-2015 : डी लिट (मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय)
-2015 : ‘फ्रेंड्स ऑफ बांग्लादेश लिबरेशन वार अवॉर्ड’, (बांग्लादेश सरकार द्वारा प्रदत्त)
-2015 : भारतरत्न से सम्मानित
🚩जीवन के कुछ प्रमुख तथ्य :-
-आजीवन अविवाहित रहे ।
-वे एक ओजस्वी एवं पटु वक्ता (ओरेटर) एवं सिद्ध हिन्दी कवि भी हैं ।
-परमाणु शक्ति सम्पन्न देशों की संभावित नाराजगी से विचलित हुए बिना उन्होंने अग्नि-दो और परमाणु परीक्षण कर देश की सुरक्षा के लिये साहसी कदम भी उठाये ।
-सन् १९९८ में राजस्थान के पोखरण में भारत का द्वितीय परमाणु परीक्षण किया जिसे अमेरिका की सी०आई०ए० को भनक तक नहीं लगने दी ।
-अटल सबसे लम्बे समय तक सांसद रहे हैं और जवाहरलाल नेहरू व इंदिरा गांधी के बाद सबसे लम्बे समय तक गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री भी थे । वह पहले प्रधानमंत्री थे जिन्होंने गठबन्धन सरकार को न केवल स्थायित्व दिया अपितु सफलता पूर्वक संचालित भी किया ।
-अटल ही पहले विदेश मंत्री थे जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दीमें भाषण देकर भारत को गौरवान्वित किया था ।
🚩अटल जी की टिप्पणियाँ :-
🚩चाहे प्रधान मन्त्री के पद पर रहे हों या नेता प्रतिपक्ष; बेशक देश की बात हो या क्रान्तिकारियों की, या फिर उनकी अपनी ही कविताओं की; नपी-तुली और बेवाक टिप्पणी करने में अटल जी कभी नहीं चूके । यहाँ पर उनकी कुछ टिप्पणियाँ दी जा रही हैं ।
“भारत को लेकर मेरी एक दृष्टि है- ऐसा भारत जो भूख, भय, निरक्षरता और अभाव से मुक्त हो ।”
“क्रान्तिकारियों के साथ हमने न्याय नहीं किया, देशवासी महान क्रान्तिकारियों को भूल रहे हैं, आजादी के बाद अहिंसा के अतिरेक के कारण यह सब हुआ ।
“मेरी कविता जंग का ऐलान है, पराजय की प्रस्तावना नहीं। वह हारे हुए सिपाही का नैराश्य-निनाद नहीं, जूझते योद्धा का जय-संकल्प है। वह निराशा का स्वर नहीं, आत्मविश्वास का जयघोष है ।
🚩वाजपेयी कवि, पत्रकार व एक प्रखर राष्टवादी वक्ता थे । राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया ।
🚩भगवान उनकी आत्मा को परम शांति दे । 
भावभीनी श्रद्धांजलि….
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इस पीड़ा के साथ कैसे जश्न मनायें आज़ादी का ?

15 August 2018
🚩हमारे देश का आज 72 वां स्वतंत्रता दिवस है, पर अयोध्या में करोड़ों के आराध्य भगवान श्रीरामचंद्र अभी भी टाट में हैं और देश नेता ठाठ में हैं | लाखों लोगो ने राम जन्मभूमि पर राममंदिर बनाने की सांस्कृतिक क्रांति में अपने प्राणों की आहुति दी है, पर अभी तक अयोध्या में करोड़ों के आराध्य भगवान श्रीराम मंदिर बनाने की कोई हलचल नजर नहीं आती ।
🚩दूसरा आज़ाद भारत में हजारों कत्लखाने हैं, एक दिन में ही हजारों-लाखों गौमाता कट रही है । करोड़ों हिन्दू होते हुए भी अभीतक गौरक्षा के लिए कानुन नहीं बन सका ।
How to celebrate this pain with freedom?
🚩तीसरा आज भी अंग्रेजों के बनाये ही कानून चल रहे हैं । स्वतंत्र भारतीय न्यायव्यवस्था अभी तक बन नहीं पाई ।
🚩चौथा अपने ही देश में लाखों कश्मीरी पंडित शरणार्थी की तरह रह रहे हैं, अभी तक 370 खत्म करके उनको वापस कश्मीर में बसा नहीं सके ।
🚩पांचवा आज भी सरकारीतंत्र, न्यायालय, मीडिया, आदि में भयंकर भ्रष्टाचार व्याप्त है ।
🚩छट्ठा कृषि प्रधान देश में आज भी किसान की बुरी हालत है, जिससे तंग आकर आत्महत्या कर रहा है । 
🚩सातवां राष्ट्र, संस्कृति, समाज और गौमाता की सेवा करनेवाले, धर्मांतरण को रोकने वाले, विदेशी कम्पनियों से लोहा लेने वाले, विदेशों में भारतीय संस्कृति का परचम लहराने वाले लोकप्रिय संतों को निर्दोष होते हुए भी जेल में भेजा जाता है, भयंकर यातनाएं दी जाती है ।
🚩साध्वी प्रज्ञासिंह और स्वामी असीमानंदजी  – हिंदु आतंकवाद के नाम पर इन्हें कई वर्षो तक जेल में रखा, प्रताड़ित किया, आखिर में निर्दोष साबित हुए | 
🚩शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वतीजी  – 2004 में खून केस के आरोप में दिवाली के दिन जयललिता सरकार ने इनको जेल में डाल दिया, काफी साल बाद निर्दोष साबित हुए | 
🚩जगद्गुरु कृपालु महाराज, स्वामी नित्यानंद, स्वामी केशवानंद – यौन शोषण के आरोपों में इन संतों को पहले तो दोषी माना गया और काफी समय बाद न्यायालय ने उनको बाइज्जत बरी किया | 
🚩अब बारी आई है धर्मान्तरण रोकने वाले, करोड़ों लोगों को सन्मार्ग दिखाने वाले व देश-विदेश में भारतीय संस्कृति का परचम लहराने वाले निर्दोष संत आशाराम बापू और उनके परिवार की,  सच्चाई जानने के लिए ये 
🚩वीडियो जरुर देखिए:https://youtu.be/ph80RJD3kZQ
🚩सवाल ये है कि षड्यंत्र सिर्फ हिंदु संतो के साथ ही हो रहे हैं और  देश में भ्रष्ट जज दोहरा मापदंड रखते है, या किसी के दबाव में काम करते हों ऐसा लगता है।
🚩आप भी जरा सोचिए…
🚩अभिनेता सलमान को दोनों केस में राहत और संजय दत्त और लालू यादव को बार-बार पेरोल कौन दिलवाता है ?
🚩ललित मोदी, विजय माल्या और नीरव मोदी अरबों-खरबों लूटकर फ़रार कैसे हुए ?
🚩इन अपराधी नेता, अभिनेता और उद्योगपतिओं को अदालत से तुरंत राहत मिल जाती है, या फरार हो जाते हैं,  पर निर्दोष संतों को जमानत तक नहीं मिलती | 
🚩गौरतलब है कि जब पवित्र साधु-संतों पर आरोप लगते हैं तो घंटों तक Media trial होता है, पर जब ये संत निर्दोष साबित होते है तो एक मिनिट का भी कवरेज नहीं देते | उधर #Media420 दोषी नेता और अभिनेताओं को मसीहा बताते थकती नहीं, क्यों?
🚩मीडिया में अन्य धर्म के धर्मगुरुओं के लिए कभी कुछ सुनने को नहीं मिलता, क्या वो सब दूध के धुले हैं क्या ? कहीं ये सनातन हिंदु धर्म को मिटाने की साजिश तो नहीं ?
🚩ये सूची पढ़ने के बाद आप भी मानने लगोगे कि देश में न्याय एक समान नहीं हो रहा है, अपितु बड़े केसों में जज पर दबाव बनाकर मनचाहा फैसला दिया जाता है | 
🚩देश का ये हाल देख के आप ही बताइए कि ये कैसी आज़ादी है ? जहाँ बहुमति की आस्था के केंद्र भगवान श्रीराम का मंदिर नहीं बन सकता और संतों को न्याय नहीं मिल सकता और गौहत्या पर रोक नहीं लग सकती है ।
🚩सेकुलरिज्म की चद्दर ओढ़ के सोने वाले मित्रों, अब तो जागो ! भाईचारा ऐसा नहीं होता जिसमें छोटा भाई बड़े भाई को ख़त्म कर दे … इसलिए अपनी आँखें खोलो वर्ना आपको बचाने वाला भी कोई नहीं होगा ।
🚩15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों की बाह्य गुलामी तो दूर हुई, लेकिन अंग्रेजी भाषा की, उनके विचारों की गुलामी तो हमारे दिल-दिमाग में घुसी हुई है । अतः अपनी वैदिक संस्कृति, अपने देश की जलवायु और रीति-रिवाजों के अनुसार स्वास्थ्य लाभ, सामाजिक जीवन और आत्मिक उन्नति करानेवाली भारत की महान संस्कृति का आदर करना चाहिये, लाभ लेना चाहिए । अंग्रेजी कल्चर का दिखावटी जीवन भीतर से खोखला कर देता है । संयमी, सदाचारी और साहसी भारतीय संस्कृति के सपूतों को अपनी मिली हुई आजादी को सावधानी से सँभाले रखना चाहिये । 
🚩याद रखिए, एसा ज्ञान हमें शंकरचार्य जी , आसाराम बापू जैसे संत-महात्मा ही देते हैं, जिनके साथ अभी अन्याय हो रहा है इसलिए… जागो भारतवासी जागो, षड्यंत्रों को पहचानो ।
🚩भारतवासियों पृथ्वी जल रही है । मानव-समाज में जीवन के आदर्शों का अवमूल्यन हो रहा है । अधर्म बढ़ रहा है, दीन-दु:खियों को सताया जा रहा है, सत्य को दबाया जा रहा है । यह सब कुछ हो रहा है फिर भी तुम सो रहे हो ? उठकर खड़े हो जाओ । समाज की भलाई के लिए अपने हाथों में वेदरूपी अमृत कलश उठाकर लोगों की पीड़ाओं को शांत करो, अपने देश और संस्कृति की रक्षा के लिए अन्याय, अत्याचार एवं शोषण को सहो मत । उनसे बुद्धिपूर्वक लोहा लो । सज्जन लोग संगठित हों । लगातार आगे बढ़ते रहो… आगे बढ़ते रहो । विजय हमारी ही होगी ।
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