रेप के झूठे केस में फंसाता था ये गिरोह, महिला वकील भी थी गैंग में शामिल..!!

रेप के झूठे केस में फंसाता था ये गिरोह, महिला वकील भी थी गैंग में शामिल..!!
राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने बलात्कार के झूठे मुकदमे में फंसाकर पैसे ऐंठने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है ।
 एसओजी ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है । गिरोह के तार गैंगस्टर आनंदपाल और उसके वकील से जुड़े हुए हैं । गैंग में कथित तौर पर एक महिला वकील भी शामिल है ।
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पुलिस के मुताबिक, गिरफ्त में आए आरोपियों के नाम अक्षत शर्मा और विजय शर्मा हैं । इस गिरोह ने महज ढाई साल के अंदर 25 लोगों को अपना शिकार बनाकर उनसे 15 करोड़ रुपये ऐंठे हैं । यह गिरोह कॉल गर्ल के जरिए अमीर लोगों को अपने जाल में फंसाकर ब्लैकमेल करता था । पुलिस की माने तो इनके गैंग में एक एनआरआई युवती भी शामिल है ।
गिरोह में शामिल कॉल गर्ल पहले अमीर लोगों से दोस्ती करती और नजदीकियों का फायदा उठाकर यह लोग उनके अश्लील वीडियो बना लेते थे । जिसके बाद शुरु होता था ब्लैकमेलिंग का घिनौना खेल । गिरोह का सरगना एडवोकेट नवीन देवानी है, जो गैंगस्टर आनंदपाल और अनुराधा चौधरी का वकील है ।
एसओजी के एडिशनल एसपी करण शर्मा ने बताया कि गिरोह में एनआरआई युवती के साथ कुछ वकील, बिजनेसमैन और आपराधिक गिरोह से जुड़े लोग भी शामिल हैं । एसओजी ने यह पूरा खुलासा जयपुर के एक नामी डॉक्टर सुनीत सोनी की शिकायत पर किया है । सोनी भी इस गिरोह की कारगुजारियों का शिकार हो चुके हैं और झूठे रेप केस की शिकायत पर 75 दिनों के लिए जेल भी जा चुके हैं ।
गिरोह के सदस्य डॉक्टर सोनी से बयान बदलने के नाम पर एक करोड़ रुपये भी वसूल कर चुके हैं । जिसके बाद हिम्मत दिखाते हुए डॉक्टर सोनी ने एसओजी से मामले की शिकायत की थी । एसपी करण शर्मा ने कहा कि गिरोह के सदस्य खुद को मीडिया से जुड़ा भी बता रहे हैं । फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के दूसरे सदस्यों के बारे में पता लगा रही है ।
निर्भया कांड के बाद नारियों की सुरक्षा हेतु बलात्कार-निरोधक नये कानून बनाये गये । परंतु दहेजरोधी कानून की तरह इनका भी भयंकर दुरुपयोग हो रहा है ।
आज निर्दोष प्रतिष्ठित व्यक्तियों से लेकर आम जनता तक सभी रेप कानूनों के दुरुपयोग के शिकार हो रहे हैं ।
महिला-सुरक्षा के लिए बनाये गये कानून महिलाओं के लिए ही घातक बन रहे हैं । झूठे रेप केसों के बढ़ते आँकड़ों को देखकर सभ्य परिवारों के पुरुष एवं महिलाएँ डरने लगी हैं । कोई भी निर्दोष पुरुष झूठे मामले में फँसाया जाता है तो उसके परिवार की सभी महिलाओं (माँ, बहनें, पत्नी,मामी, मौसी आदि आदि) को अनेक प्रकार की यातनाएँ सहनी पड़ती हैं ।
दिल्ली महिला आयोग की जाँच के अनुसार अप्रैल 2013 से जुलाई 2014 तक बलात्कार की कुल 2,753 शिकायतों में से 1,466 शिकायतें झूठी पायी गयी। विभिन्न कानूनविदों, न्यायधीशों व बुद्धिजीवियों ने भी इस कानून के बड़े स्तर पर दुरुपयोग के संदर्भ में चिंता जतायी है ।
वर्तमान में बलात्कार निरोधक कानून के दुरुपयोग का प्रत्यक्ष उदाहरण है संत आशारामजी बापू पर किया गया फर्जी केस । जिसमें न कोई ठोस सबूत है और न ही कोई मेडिकल आधार बल्कि उन्हें षड़यंत्र में फँसाये जाने के अनेकों प्रमाण सामने आये हैं –
1) आरोप लगानेवाली लड़की की मेडिकल जाँच करनेवाली डॉ. शैलजा वर्मा ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा कि “लड़की के शरीर पर रत्तीभर भी खरोंच के निशान नहीं थे और न ही प्रतिरोध के कोई निशान थे ।”
2) प्रसिद्ध न्यायविद् डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने केस अध्ययन कर बताया कि ‘‘लड़की के फोन रिकॉर्ड्स से पता लगा कि जिस समय पर वह कहती है कि वह कुटिया में थी, उस समय वह वहाँ थी ही नहीं ! बापू आसारामजी पर ‘पॉक्सो एक्ट’ लगवाने हेतु एक झूठा सर्टिफिकेट निकाल के दिखा दिया गया है कि वह 18 साल से कम उम्र की है । यह केस तो तुरंत रद्द होना चाहिए ।’’
3) पुलिस द्वारा दर्ज आरोप-पत्र में मुख्य गवाह सुधा पटेल ने उसके नाम पर लिखे गये बयान को झूठा एवं मनगढ़ंत बताते हुए न्यायालय में कहा कि आज से पहले न मैं कभी जोधपुर आयी और न कभी कहीं बयान दिये थे । मुझे पता नहीं है कि पुलिसवालों ने मेरे हस्ताक्षर किस बात के करवाये थे ।
4) बापूजी के खिलाफ पूरा प्रकरण तैयार किया, जम्मू पुलिस ने उनमें से कइयों को गम्भीर अपराध में आरोपी पाया है । साजिश रचनेवाले गिरोह के शातिर षड्यंत्रकारी, तथाकथित पत्रकार सतीश वाधवानी को जम्मू पुलिस ने इंदौर से गिरफ्तार किया था । वाधवानी व अन्य आरोपियों पर बापूजी के खिलाफ आरोप लगाने हेतु लड़कियाँ तैयार करके यौन-शोषण के झूठे मामले बनाने, उनके आश्रम में मुस्लिम कब्रिस्तान से निकाले हुए बच्चों के कंकाल गाड़ के बापूजी के ऊपर हत्या के झूठे केस लगवाने तथा हिन्दू-मुस्लिम दंगा करवा के आश्रम को सदा के लिए बंद करवाने की साजिश रचने आदि के लिए अनेक संगीन आपराधिक धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ था ।
गौरतलब है कि बापू आसारामजी पिछले 40 महीनों से जोधपुर कारागृह में हैं फिर भी बड़ी संख्या में माताएँ-बहनें उनकी सेवाओं में जुड़ती जा रही हैं, असंख्य महिलाएँ उनकी रिहाई की माँग के लिए सड़कों पर उतर आती हैं ।
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