For the Sake of indian Culture Demand to Ban Sunburn Festival in pune

सनबर्न फेस्टिवल को स्थगित करने के लिए अनेक हिन्दू संगठनों ने मांग उठाई है !!

हिन्दू संस्कृति को नष्ट करने वाल सनबर्न यदि रद्द नहीं किया गया, तो तीव्र आंदोलन करेंगे – शिवसेना
पिंपरी (पुणे) : नशीले पदार्थों का दुरुपयोग तथा अनैतिक कृत्यों वाला, भारतीय संस्कृति भ्रष्ट बनानेवाला तथा युवा पीढ़ी को दूषित करनेवाला सनबर्न फेस्टिवल  28 से 31 दिसंबर 2016 तक पुणे में होनेवाले सनबर्न फेस्टिवल को स्थगित करने के लिए अनेक हिन्दू संगठनों ने मांग उठाई है ।
पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका शिक्षा मंडल के सदस्य एवं शिवसेना के श्री. गजानन चिंचवडे ने बताया कि हिन्दू संस्कृति का दर्शन करानेवाले पुणे नगर में ‘सनबर्न फेस्टिवल’ समान कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है । पुणे की संस्कृति को बिगाड़नेवाला कार्यक्रम नहीं होने देंगे । यदि शासन द्वारा ‘सनबर्न फेस्टिवल’ रद्द नहीं किया गया, तो केसनंद गांव में एवं अन्यत्र भी हम तीव्र आंदोलन करेंगे । यदि भविष्य में भी संंस्कृति विनाशक कोई कार्यक्रम होंगे, तो वह भी नहीं होने देंगे ।
Azaad BHarat For the Sake of indian Culture Demand to Ban Sunburn Festival in pune
केसनंद (जिला पुणे) में आयोजित ‘सनबर्न फेस्टिवल’ कार्यक्रम तत्काल रद्द करने तथा मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार मस्जिदों पर लगाए गए अवैध भोंगे बंद करने की मांगों के लिए विविध हिन्दुत्वनिष्ठ एवं सामाजिक संगठनों ने यहां के डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के पुतले के पास राष्ट्रीय हिन्दू आंदोलन किया गया ।
इस आंदोलन में शिववंदना उपक्रम के श्री. उमेश पवार, शिवप्रतिष्ठान के श्री. गणेश भुजबळ, अधिवक्ता श्री. पडवळेमामा, देहूरोड के धर्माभिमानी श्री. गाडगीळ, हिन्दू जनजागृति समिति के श्री. अभिजीत देशमुख एवं सनातन संस्था के श्री. चंद्रशेखर तांदळे के साथ 100 से अधिक धर्माभिमानी सम्मिलित हुए थे ।
अधिवक्ता श्री. पडवळेमामा ने कहा कि ‘सनबर्न फेस्टिवल’ को गोवा से हटाया गया है । इस फेस्टिवल में युवकों को नशीली पदार्थ देकर व्यसनाधीनता की ओर ढकेला जाता है । इस प्रकार का पाश्‍चात्त्य संस्कृति का अंधानुकरण पुणे में नहीं चलेगा । एक ओर श्री गणेशचतुर्थी को रात्रि 10 बजे ध्वनिक्षेपक बंद करवाए जाते हैं; परंतु सनबर्नसमान कार्यक्रम को रात्रि 12 बजे आरंभ होता है, यह कहां तक उचित है ? कानून सभी के लिए समान होना चाहिए । यदि इस कार्यक्रम को नहीं रोका गया, तो हमें अलग विचार करना पड़ेगा ।
मस्जिदों से ध्वनिप्रदूषण करनेवाले अवैध भोंगों पर कार्यवाही करनी चाहिए !
श्री. अभिजीत देशमुख ने कहा कि शासन द्वारा अथवा हिन्दुओं के त्यौहार के अवसर पर आवाज का बंधन लगाया जाता है; परंतु अन्य धर्मियों को समय एवं आवाज पर बंधन नहीं लगाया जाता । यह त्रूटिपूर्ण है । इसलिए मस्जिद से ध्वनिप्रदूषण करनेवाले अवैध भोंगों पर कार्यवाही करनी चाहिए तथा विद्या का मायका कहलानेवाले पुणे नगर से सनबर्न समान कार्यक्रम हटाए जाने चाहिए ।
भारत भोंगामुक्त करना चाहिए एवं ‘सनबर्न फेस्टिवल’ को भारत से हटा देना चाहिए !
नागरिकों कोे अपने क्षेत्र के मस्जिदों पर के अवैध भोंगों के विरुद्ध वैधानिक रूप से परिवाद प्रविष्ट करना चाहिए । इन भोंगों द्वारा दी जानेवाली अजान हमें सहन करने की आवश्यकता नहीं है । हम इस आंदोलन के माध्यम से पूरे देश को भोंगामुक्त भारत का संदेश देंगे । ‘सनबर्न फेस्टिवल’ के माध्यम से किए जानेवाले व्यसनों से युवक-युवतियों को रोकना चाहिए । ‘सनबर्न फेस्टिवल’ पुणे से ही नहीं, अपितु भारत से हटा देना चाहिए । इस के माध्यम से किए जानेवाले अनाचारों पर ध्यान देकर शासन को उचित कार्यवाही करनी चाहिए ।
इस अवसर पर सनातन संस्था के श्री. चंद्रशेखर तांदळे ने प्रतिपादित किया कि सनबर्न पाश्‍चात्त्य कार्यक्रम हिन्दुओं का तेजोभंग करनेवाला है । उसे रद्द करें ।
स्वतंत्रतावीर सावरकर प्रतिष्ठान की श्रीमती वर्षा देशपांडे ने कहा कि, देश को स्वतंत्रता तो मिल गई; परंतु क्या हम वास्तव में स्वतंत्र हैं ? अभी भी हम अनेक पश्‍चिमी परंपराआें के मानसिक परतंत्र हैं । भारतीय संस्कृति महान है तथा हमें प्राचीन परंपरा प्राप्त है। अतः हिन्दू संस्कृति की महान धरोहर को ध्यान में रखते हुए हमें नया वर्ष 1 जनवरी को मनाने के बजाय उसे गुढी पाडवा के दिन ही मनाना चाहिए ।
पूर्व प्रधानाध्यापिका श्रीमती लता कोल्हटकर ने कहा कि, पश्चमियों के तथा हम भारतीयों के वातावरण में बहुत बड़ा अंतर है । भारतीय संस्कृति में गुढीपाडवा की अवधि में वातावरण में अनेक अच्छे परिवर्तन होते हैं । इस अवधि में वृक्षों को बहार आती है । इसकी अपेक्षा पश्‍चिमी संस्कृति में ऐसा कुछ नहीं होता । होली, रंगपंचमी, दीपावली जैसे हमारे प्रत्येक त्यौहार का धर्मशास्त्रीय आधार है । हिन्दुआें को गुढीपाडवा के दिन ही नववर्ष की शुभकामनाएं देनी चाहिए।
अभिनेता शरद पोंक्षे ने कहा कि,सनबर्न फेस्टिवल में गुटखा, साथ ही नशीले पदार्थों का सेवन किया जाता है । पुणे जैसी पुण्यनगरी में इस प्रकार का फेस्टिवल होना अत्यंत अयोग्य है । महाराष्ट्र में इस प्रकार के फेस्टिवल होने से युवा पीढ़ी की हानि होगी । भारतीय संस्कृति इस प्रकार के फेस्टिवल से कभी भी सहमत नहीं होगी । अतः इस प्रकार के फेस्टिवल के लिए अनुमति देने की आवश्यकता ही नहीं है । इसका सभी स्तरों द्वारा विरोध किया जाना आवश्यक है ।
सनबर्न कार्यक्रम में भारी मात्रा में नशीली पदार्थों का सेवन किया जाता है । इससे पूर्व गोवा में संपन्न सनबर्न कार्यक्रमों में नशीली पदार्थ विरोधी दल द्वारा छापा मारने के पश्चात वहां अनेक स्थान पर युवक-युवतियां सार्वजनिक रूप से हुक्का तथा चिलिम का एवं अस्थाई प्रसाधनगृहों में नशीली पदार्थों का सेवन करते हुए दिखाई दिए थे ।
‘सनबर्न’ कार्यक्रम को भारी मात्रा में संस्कृतिप्रेमियों का विरोध हो रहा है । इसलिए संस्कृतिप्रेमी एवं हिन्दुत्वनिष्ठों ने सुसंस्कृति को कलंकित करनेवाले इस कार्यक्रम को ही रद् करने की मांग की है ।
भाजपा सरकार द्वारा जनता संस्कृतिहीन बनेगी, ऐसा कार्यक्रम रखना अपेक्षित नहीं है ! ऐसे कार्यक्रमों से राजस्व मिलने से भौतिक विकास होगा; परंतु जनता की अवनति होगी । ऐसा विश्वास क्यों नही है कि यदि संस्कृति की रक्षा की गई, तो ईश्‍वर विकास के लिए राजस्व की कमी नहीं होने देगा ?
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