पाकिस्तान हिंदुओं के लिए बन चुका है नर्क से भी बत्तर..!!!

पाकिस्तान हिंदुओं के लिए बन चुका है नर्क से भी बत्तर..!!!

पाकिस्तान में सूदखोर मजबूर हिंदुओं की जवान लड़कियाँ उठाकर ले जाते हैं।

पाकिस्तान के दूर-दराज और देहात के इलाकों में अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव और उनके लिए परेशानियां खड़ी करना कोई नई बात नहीं है लेकिन मामला सिर्फ इतना ही नहीं है। पाकिस्तान में ऐसे बहुत से हिन्दू मां-बाप हैं, जिनके ना चाहते हुए भी उनकी बेटियों को सूदखोर उठाकर ले जाते हैं।

पाकिस्तान हिंदुओं के लिए बन चुका है नर्क से भी बत्तर

पाकिस्तान के सिंध की जीवती की उम्र मुश्किल से 14 साल की है लेकिन उसको अब अपने परिवार से दूर जाना है क्योंकि उसकी शादी कर दी गई है। जिस आदमी से उसकी शादी हुई है, उसने जीवती को अपने कर्ज के बदले खरीद लिया है। उसकी कीमत (करीब1000 अमेरिकी डॉलर) लगी है।

जीवती की मां अमेरी खासी कोहली की मौजूदगी में ये जबरदस्ती शादी हुई है क्योंकि उनके नए दामाद का उन पर कर्ज है और उनके पास सिर्फ एक यही तरीका था उस कर्ज को चुकता करने का।

उनको पैसा देने वाले शख्स ने आकर उनकी बेटी को चुन लिया और उन्हें ना चाहते हुए भी अब अपनी बेटी को उस आदमी के साथ भेजना होगा।

वो बताती है कि उनके शौहर ने कर्ज लिया था जो बढ़ कर दोगुना हो गया और वो जानती है कि इसे चुकाना उनके बस की बात नहीं है। रकम ना चुका पाने पर अमेरी की बेटी को वो शख्स ले गया, जिससे उन्होंने उधार लिया था। अमेरी को पुलिस से भी इस मामले में कोई उम्मीद नहीं है।

लड़की को ले जाने वाला, उससे कुछ भी करा सकता है..!!!

औरतों को यहां प्रोपर्टी की तरह ही देखा जाता है। उसे खरीदने वाला उसे बीवी बना सकता है, दूसरी बीवी बना सकता है, खेतों में काम करा सकता है, यहां तक कि वो उसे जिस्मफरोशी के धंधें में भी धकेल सकता है क्योंकि उसने उसकी कीमत चुकाई है और वो उसका मालिक बन गया है।

आमेरी कहती हैं कि सूदखोर अपने कर्जदार की सबसे खूबसूरत और कमसिन लड़की को चुन लेते हैं। ज्यादातर मामलों में वो लड़की को ईस्लाम में दाखिल करते हैं, फिर उससे शादी करते हैं और फिर कभी आपकी बेटी वापस नहीं आती। वो कहती है कि हम पुलिस स्टेशन या कोर्ट जाते हैं लेकिन इससे कोई फायदा नहीं होता क्योंकि हम हिन्दू हैं और हमारी सुनवाई कहीं नहीं है।

अमेरी और उनकी बेटी जीवती की ये स्टोरी टाइम्स ऑफ इंडिया ने कही है लेकिन पाकिस्तान में इस तरह की ये कोई अकेली घटना नहीं है।

ग्लोबल स्लेवरी इंडेक्स 2016 की रिपोर्ट कहती है कि 20 लाख से ज्यादा पाकिस्तानी हिन्दू गुलामों की जिंदगी बसर कर रहे हैं, इनमें अल्पसंख्यकों की बड़ी तादाद है। जिनसे खेती-बाड़ी से लेकर घर तक के काम कराए जाते हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में हर साल 1000 हिंदू और ईसाई लड़कियों (ज्यादातर नाबालिग) को मुसलमान बनाकर शादी करा दी जाती है।

गरीब अल्पसंख्यकों की लड़कियां होती हैं सबसे ज्यादा शिकार…!!!

पाकिस्तान में इस तरह के मामलों के लिए लड़ने वाले एक संगठन से जुड़े गुलाम हैदर कहते हैं कि वो खूबसूरत लड़कियों को चुनते हैं। हैदर कहते हैं कि इसका शिकार होने वाले गरीब परिवार होते हैं। यहां तक ना मीडिया के कैमरे पहुंचते हैं और ना पुलिस स्टेशन में इनकी कोई सुनवाई होती है।

पाकिस्तान में हिन्दुओं के लिये श्मशान घाट तक नही..!!!

पाकिस्तान में पिछले कुछ समय से हिंदू समुदाय के लिए खैबर पख्तूनख्वाह और फाटा के विभिन्न स्थानों पर श्मशान घाट की सुविधा न होने के कारण अपने मृतकों को धार्मिक अनुष्ठानों के उलट यानी जलाने के बदले कब्रिस्तान में दफनाने के लिए मजबूर हो चुके हैं ।

इन इलाकों में हिंदू समुदाय हजारों की तादाद में पाकिस्तान की स्थापना से पहले से रह रहे हैं ।

खैबर पख्तूनख्वाह में हिंदू समुदाय की आबादी लगभग 50 हजार है । इनमें अधिकतर पेशावर में बसे हुए हैं । इसके अलावा फाटा में भी हिंदुओं की एक अच्छी खासी तादाद है । ये अलग-अलग पेशों में हैं और अपना जीवन गुजर-बसर करते हैं ।

पेशावर में ऑल पाकिस्तान हिंदू राइट्स के अध्यक्ष और अल्पसंख्यकों के नेता हारून सर्वदयाल का कहना है कि उनके धार्मिक अनुष्ठानों के अनुसार वे अपने मृतकों को जलाने के बाद अस्थियों को नदी में बहाते हैं, लेकिन यहां श्मशान घाट की सुविधा नहीं है इसलिए वे अपने मृतकों को दफनाने के लिए मजबूर हैं ।

उन्होंने कहा कि केवल पेशावर में ही नहीं बल्कि राज्य के ठीक-ठाक हिंदू आबादी वाले जिलों में भी यह सुविधा न के बराबर है । इन जिलों में कई सालों से हिंदू समुदाय अपने मृतकों को दफना रहा है ।

वह कहते हैं, “पाकिस्तान के संविधान की धारा 25 के अनुसार हम सभी पाकिस्तानी बराबर अधिकार रखते हैं और सभी अल्पसंख्यकों के लिए कब्रिस्तान और श्मशान घाट की सुविधा प्रदान करना सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है, लेकिन दुर्भाग्य से हिंदूओं को कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है ।”

उन्होंने कहा कि पेशावर के हिंदू पहले अपने मृतकों को बाड़ा के इलाके में लेकर जलाया करते थे क्योंकि वहाँ एक श्मशान घाट था लेकिन शांति की बिगड़ती स्थिति के कारण वह क्षेत्र अब उनके लिए बंद कर दिया गया है ।

उन्होंने दावा किया है कि पूरे पाकिस्तान में पहले अल्पसंख्यकों के लिए हर छोटे बड़े शहर में धार्मिक केंद्र या पूजा स्थल थे लेकिन दुर्भाग्य से उन पर या तो सरकार या भूमि माफिया ने कब्जा कर लिया है । जिससे अल्पसंख्यकों की मुसीबतें बढ़ी हैं ।

हारून सर्वदयाल के अनुसार, “जिस तरह पाकिस्तान के बनने के समय अल्पसंख्यक अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे थे, उनके हालात में 70 साल बाद भी कोई बदलाव नहीं आया है । वे आज भी अपने अधिकारों से वंचित हैं। ”

पाकिस्तान में हिंदू समुदाय देश का सबसे बड़े अल्पसंख्यक तबका माना जाता है। हिंदुओं की ज्यादातर आबादी सिंध और पंजाब के जिलों में रहती है । खैबर पख्तूनख्वाह में पेशावर के बाद हिंदुओं की संख्या कोहाट, बुनेर, हंगू, नौशहरा, स्वात, डेरा इस्माइल खान और बनू के जिलों में भी रहती है ।

पाकिस्तान में हिन्दू मंदिर तोड़े जाते हैं । हिन्दू महिलाओं के साथ दुष्कर्म किये जाते हैं । यहाँ तक कि उठाकर मुस्लिम बना दिया जाता है , श्मशान घाट तक नही है, हिन्दुओं की हत्यायें की जाती है इतना हिन्दुओं पर अत्याचार किया जाता है फिर भी उनके लिए कोई आवाज उठाने के लिए तैयार नही है ।

आज भी अगर भारत में हिंदुओं ने “हम दो हमारे दो” के सिद्धान्त को नहीं तोडा तो पाकिस्तान जैसा हाल होने में देरी नही लगेगी । अतः हिन्दू सावधान रहें।

मुस्लिम चार शादियां करके 40 बच्चे पैदा कर सकते है तो हिन्दू कम से कम 4 बच्चे तो पैदा कर ही सकता है ।

जय हिन्द!!!

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