कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटाने वाले चीन की वस्तुओं का करें बहिष्कार : डाॅ. सुरेन्द्र जैन

कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटाने वाले चीन की वस्तुओं का करें बहिष्कार : डाॅ. सुरेन्द्र जैन
जून 29, 2017
#BoycottChina
नई
दिल्ली : कैलाश मानसरोवर यात्रा को चीन द्वारा रोके जाने पर विश्व हिन्दू
परिषद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है । उनका कहना है कि, नाथूला बोर्डर से जाने
वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा को चीन द्वारा रोके जाने से सभी स्तब्ध थे ।
अभी तक लगता था कि, इसके पीछे शायद प्राकृतिक विपदा ही मुख्य कारण रही होगी
। परन्तु चीनी अधिकारियों द्वारा किए गए पत्र व्यवहार तथा जारी बयानों से
अब यह स्पष्ट हो गया है कि, इस महत्वपूर्ण यात्रा के रोकने का एक मात्र
कारण क्षेत्रीय विस्तार की अमिट भूख व दादागिरी ही है ।
विश्व
हिन्दू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री डाॅ. सुरेन्द्र जैन ने
चीन की इस दादागिरी की कठोर शब्दों में आलोचना करते हुए जहां देश की जनता
से चीनी वस्तुओं के बहिष्कार की अपील की है वहीं भारत सरकार से जमीन के
भूखे चीन के साथ इस मामले को गंभीरता से उठाने को भी कहा है ।
उन्होंने
कहा कि, तिब्बत पर अबैध कब्जा जमाने के बाद ड्रेगन की भूख और बढ़ गई ।
इसलिए, उसने न केवल भारत के अरुणाचल प्रदेश समेत कई क्षेत्रों पर दावा कर
रखा है बल्कि उन क्षेत्रों के विकास में टांग भी अड़ाता रहता है । वह इन
क्षेत्रों को विकसित होते नहीं देखना चाहता । भूपेन हजारिका पुल बनाने के
बाद तो वह बुरी तरह बौखला गया । सिक्कम में दो भारतीय बंकर तोड़ना इसी
बौखलाहट का प्रतीक है ।
विहिप
के संयुक्त महामंत्री ने कहा कि, कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर रोक लगाकर
तो उसने सभी सीमाएं लांघ दी हैं । उसने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि, सिक्कम
के कुछ स्थानों पर उसका अधिकार स्वीकार किए बिना वह इस यात्रा को प्रारम्भ
नहीं होने देगा । चीन के मना करने पर वापस आए यात्री किस यंत्रणा से गुजरे
होंगे, संभवतया क्रूर मानसिकता वाला ड्रेगन इसे समझने की संवेदनशीलता नहीं
रखता ।
 विहिप भारत सरकार
से अपील करती है कि मानसरोवर यात्रा के विषय को और अधिक गंभीरता से ले तथा
चीन को चेताए कि वह जमीन की असीम भूख को इस यात्रा में बाधा न बनने दे ।
विहिप
के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री विनोद बंसल द्वारा जारी बयान में डाॅ. जैन ने
यह भी कहा है कि, चीन की निगाहें भारत के क्षेत्रों के साथ-साथ भारतीय
अर्थव्यवस्था पर भी है । इसलिए वह हमारे बाजार पर भी कब्जा कर रहा है ।
उन्होंने भारत की जनता से अपील की है कि, बहुत हो चुका, अब वह चीनी वस्तुओं
का बहिष्कार कर उसे उसी की भाषा में जबाव दे ।
(प्रेस विज्ञप्ति – डाॅ. सुरेन्द्र जैन)
पाकिस्तान
भारत में आतंकी हमले करा रहा है और चीन पाकिस्तान की तरफ है, भारत की जमीन
हड़प रहा है, कैलाश मानसरोवर की यात्रा रोक रहा है इसलिए हर भारतीय को चीनी
सामानों का बहिष्कार करना अत्यंत आवश्यक हो गया है ।
लेकिन यह कहा तक संभव है?
चीन
पिछले दो साल में 956 अमेरिकी मिलियन डॉलर यानी करीब 65 अरब रुपये का
निवेश करके भारत में निवेश के मामले में दसवें नंबर पर पहुंच गया है। इसमें
दो राय नहीं कि भारत अमेरिका के साथ-साथ चीन के लिए भी बहुत बड़ा बाजार
है। चीन में बने माल से पूरा बाजार भरा पड़ा है, क्योंकि चीनी कंपनियों के
माल भारत में धड़ल्ले से बिक रहे हैं। उसका कारण यह भी है कि चीन का माल
सस्ते में बिकता है ।
भारत में ही, चीन से सस्ता सामान क्यूँ नही बनता?
चीन
से चले सामान में तो फैक्टरी से वहाँ के #बंदरगाह, फिर समुद्र के जहाज और
फिर हमारे सड़क या रेल परिवहन तक का लदान, उतरान, व यातायात की कीमत उसके
बाद भी #चीन भारत में सस्ता माल बेच रहा है ।
जो
सामान चीन में बनता है वो हमारे यहाँ इसलिए नही बनता क्योंकि हमारे श्रम
#कानून, हमारे #औद्योगिक कानून, हमारे न्यायालय इन सब में #भ्रष्टाचार है
इसलिए हमारे यहाँ पर सस्ता सामान नहीं बन पाता है ।
सरकार व्यापारी पर उतना टैक्स लगा देती है कि भारत की फैक्टरियां घाटे में आ जाती हैं ।
सरकार
टैक्स कम कर दे और भ्रष्टाचार बन्द हो जाये तो जैसे चीन से माल हम खरीदते
है वैसे पूरी दुनिया भारत से माल खरीदेगी और भारत में बेरोजगारी बिल्कुल
नही रहेगी ।
जहाँ तक संभव
हो चाइनीज फर्नीचर, गिफ्ट #आइटम, #इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं और अन्य सामान,
उसका तो हर भारतीय को तुंरन्त #बहिष्कार करना चाहिए  । लेकिन इससे पहले
सरकार को चीन से आने वाला सामना बंद कर देना चाहिये और भारत में कम्पनियां
खोलकर स्वदेशी वस्तुओं का प्रोडक्ट बनाकर सस्ती दर में बेचना चाहिए जिससे
#चीन की पूरी हेकड़ी बन्द हो जाये ।
अगर हर भारतवासी तय कर ले कि चीन में बना कोई माल नहीं खरीदेगा तब इससे चीन के निर्यात पर व्यापक रूप से असर पड़ सकता है  ।
हमलोग
आज से देश की रक्षा के लिए प्रण लें कि चीन के समान का बहिष्कार करेंगे और
देश को तकनीक या अन्य कोई भी क्षेत्र में इतने विकसित करें कि गद्दार
देशों की, किसी भी क्षेत्र में मदद लेने की आवश्यकता ही न पड़े ?
चीन
की इस नीति को देशवासियों को समझना पड़ेगा । यह तय करना होगा कि
विश्वासघाती चीन का उत्पाद खरीदकर उसको और मजबूत करें या देश को आत्मनिर्भर
बनाने में विभिन्न तकनीक को और विकसित करें और जरूरत से ज्यादा विदेशी
कम्पनियों की वस्तुओं का इस्तेमाल भी न करें । कुछ सावधानी रखें तो जैसे
सैनिक सीमा पर देश की सुरक्षा के लिए जान देने को तैयार रहते है वैसे ही
हमलोग भी देश के नागरिक होने के नाते अपना कर्त्तव्य निभाये तो देश
सुरक्षित रहेगा वरना हमारे यहाँ अरबों-खरबों का मुनाफा कमाकर हमारे पैसे से
हम पर ही चीन गोले-बम की भी बरसात कर सकता है ।
 अब आप ही विचार कीजिये आपको क्या पसंद है..?
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