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धर्मसत्ता व राजसत्ता में से बड़ा कौन? आसारामजी बापू सच्चे या झूठे संत ? : राजीव दीक्षित

🚩वर्तमान में #हिन्दू #धर्मगुरुओं पर जो #बहस चल रही है उसपर पहले से ही देशभक्त स्वर्गीय श्री राजीव दीक्षित ने बता दिया था कि धर्मसत्ता और राजसत्ता क्या होती है?
और कौन कौन संत धर्मसत्ता के प्रतीक हैं ।
🚩आइये  जानते हैं कि क्या कहा श्री राजीव दीक्षित जी ने…

rajiv dixit

 

🚩साधु समाज संत समाज जब भी निकला है, समाज उसके पीछे चला है ।  हमारे यहाँ की #राजनैतिक व्यवस्था #हमेशा #संत समाज के #नीचे रही है संत समाज ऊपर रहा है, राजनैतिक व्यवस्था नीचे रही है । संत समाज के आशीर्वाद से हमारे यहाँ नेता काम कर रहे हैं । आप जानते हैं कि भारत के महान राजा #चंद्रगुप्त, #विक्रमादित्य, #हर्षवर्धन , #सम्राट अशोक ये जितने भी बड़े-बड़े महान चक्रवर्ती सम्राट हुए इन सबका नियम था कि दरबार में कोई साधु आ गया तो राजा अपना सिंहासन छोड़ता था और साधु को अपने सिंहासन पर बिठाता था मतलब साधु के लिए सन्यासी के लिए सिंहासन खाली है।। राजा उनके चरणों में बैठता था इसका मतलब ये है कि साधु समाज #संत समाज धर्म समाज हमारी #राज्यसत्ता को #निर्देशित करती थी । तो जब तक भारत की धर्म सत्ता राज्य सत्ता को निर्देशित करती थी तब तक भारत सोने की चिड़िया था ।
🚩#चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के समय में देख लो #भारत #सोने की #चिड़िया था, समुद्रगुप्त का समय देख लो भारत सोने की चिड़िया था, #हर्षवर्धन का समय देख लो भारत सोने की चिड़िया था, #सम्राट अशोक का समय देख लो भारत सोने की चिड़िया था…
🚩 जब-जब #धर्म सत्ता #ऊपर रही है और #राज्य सत्ता नीचे रही तब-तब #भारत #सोने की #चिड़िया रहा लेकिन जब विदेशियों का हमला हुआ, #विदेशियों ने यहाँ आकर #साम्राज्य #स्थापित कर लिया तब #धर्म सत्ता नीचे चली गई राज्य सत्ता ऊपर आ गई । तब से भारत नीचे #रसातल में गिरता ही चला जा रहा है !!
🚩गिरता ही जा रहा है !!
🚩गिरता ही जा रहा है !!
🚩और इतना ही गिरता जा रहा है कि लोगों को भरोसा ही उठ गया है कि ये देश उठ सकता है !! #गरीबी बढ़ी, #व्यभिचार बढा, #पापाचार बड़ा , #अत्याचार बढ़ा, #भ्रष्टाचार #बढ़ा। जब से #धर्म सत्ता नीचे हो गई राज्य सत्ता ऊपर आ गई ।
🚩अब फिर से धर्म सत्ता ऊपर आ रही है #स्वामी #सत्यमित्रानंद गिरिजी धर्म सत्ता के प्रतीक हैं। महा-मंडलेश्वर जितने भी हैं धर्म सत्ता के #प्रतीक हैं। हमारे देश के महान #मोरारी बापू धर्म सत्ता के प्रतीक हैं। #पूज्य #आसारामजी बापू #धर्म सत्ता के #प्रतीक हैं । ये बड़े #साधु-महापुरुष-सन्यासी #धर्म सत्ता के #प्रतीक इक्कठे हो रहे हैं … !!
🚩अंग्रेजो के जमाने के बनाये कानूनों को खत्म करने की बात करते हो । ऐसे 15-20 मुद्दे तय हुए हैं उसके आधार पर आप वोट करिये ये बात कहने के लिए मैं जाने वाला हूँ और ऐसे दूसरे भी साधु-संत जाने वाले हैं ।
🚩आपको सुनकर हैरानी होगी हमारे देश के महा-मंडलेश्वर बहुत पूजनीय है । सत्य मित्रानंदजी गिरी वो परसो हमारे साथ थे हरिद्वार में । उनका पूरा आशीर्वाद है कि ये काम के लिए आप निकलते हो तो मैं भी आपके साथ हूँ,मोरारी बापूजी का पूरा आशीर्वाद है, 15 बड़े साधु-संत जिनके 1-1 कोटी से ज्यादा फॉलोवर हैं ऐसे 15 साधु-संत 600 जिलों का प्रभाव शुरू करने जा रहे हैं। अगले 2 साल में और ये प्रयास इसी बात के लिए है कि हमको गेट करार नहीं चाहिए, #मल्टी नेशनल #नहीं #चाहिए, डब्लू DO नहीं चाहिए, #विदेशीकरण जो हो रहा है इस देश में वो #नहीं चाहिए, कर्जबाजारी जो बढ़ रही है देश की ओर समाज की ओर वो नहीं चाहिए ।

🚩जब साधु-संत निकल रहे हैं तो समाज में तो आप जान लीजिए परिवर्तन तो होगा ही… इस देश में !! क्योंकि जब भी भारत का सन्यासी या साधु निकला है तो उसने देश और समाज को बदला है ये हमारा हजारों साल का इतिहास है आप कभी भी उठा कर देख सकते हैं ।
🚩आज #विदेशी #ताकतों द्वारा केवल #हिन्दू साधु-संतों को ही #बदनाम किया जा रहा है #क्योंकि #भारत में उनके #विदेशी #प्रोडक्ट #नही बिकते हैं, #धर्मान्तरण #नहीं हो #पाता है इसलिए #विदेशी #फंडिग #मीडिया से #बदनाम करवाते हैं ।
🚩हिन्दू #धर्मगुरु #आसारामजी बापू के बारे में तो राजीव दीक्षित पहले ही धर्म सत्ता के प्रतीक बता चुके हैं, लेकिन मीडिया की बातों में आकर कुछ हिन्दू ही उनको गलत बोल रहे हैं क्योंकि उनकी वास्तविकता पता नही है, वे 4 साल से जेल में बंद हैं लेकिन अभीतक एक भी #आरोप सिद्ध नही हुआ है और मेडिकल में क्लीन चिट भी मिल गई है, #डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी भी उनका केस लड़ चुके हैं पर आखिर उन्होंने बताया कि लाखों हिन्दुओं की घर वापसी करवाने के कारण #ईसाई मिशनरियां पीछे पड़ी है उनको बदनाम करवाने के और मुख्यमंत्री वसुंधरा भी डरपोक है इसलिए उनको जमानत नही मिल रही है।
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SAKSHI MAHARAJ

राम रहीम को बुला लिया, इमाम बुखारी को क्यों नही ? :साक्षी महाराज

राम रहीम को बुला लिया, इमाम बुखारी को क्यों नही बुलाती कोर्ट, यह षडयंत्र है: साक्षी महाराज
उन्नाव. बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने डेरा सच्चा सौदा
प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सपोर्ट करते हुए कहा- ”एक आदमी ने कंप्लेन की
है यौन शोषण की और करोड़ों लोग डेरा सच्चा बाबा को भगवान मान रहे हैं।

Called Ram Rahim, why not Imam Bukhari? : Sakshi Maharaj

तो
एक की बात सुनी जा रही है, करोड़ों की कोर्ट क्यों नहीं सुन रहा है। अगर
ज्यादा बड़ी घटनाएं घटती हैं तो इसके लिए डेरा के लोग ही नहीं कोर्ट भी
जिम्मेदार होगा।”


भारतीय संस्कृति को बदनाम करने का षडयंत्र
– साक्षी महाराज ने कहा- ”एक आदमी यौन शोषण का आरोप लगा रहा
है। पूर्वाग्रह भी हो सकता है। कुछ लोभ लालच भी हो सकता है। हो सकता है
भारतीय संस्कृति की छवि को धूमिल करने, बर्बाद करने के लिए भी किया गया
हो।”
– ” कर्नल पुरोहित के साथ क्या हुआ? प्रज्ञा भारती ठाकुर के
साथ क्या हुआ? ये योजना बद्ध तरीके से साधु-सन्यासी नहीं बल्कि भारतीय
संस्कृति को बदनाम करने का षडयंत्र है।”
– ”मुझे लगता है कि माननीय न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय
को गंभीरता से इस बात को लेना चाहिए। इतना नुक्सान हो गया और ज्यादा नुकसान
न हो। अगर ज्यादा बड़ी घटनायें घटती है तो उसके लिए डेरा के लोग जिम्मेदार
नहीं होंगे न्यायालय भी जिम्मेदार होगा।”
जामा मस्जिद का इमाम कोर्ट का रिश्तेदार है क्या?
– साक्षी महाराज ने आगे कहा- ”लॉ एंड ऑडर की स्थिति खराब हो
गई। लोग मर रहे हैं, दंगे हो रहे हैं। जामा मस्जिद के इमाम को हाईकोर्ट
क्यों नहीं बुला लेता है। वो कोई रिश्तेदार लगता है क्या?”
– ”राम रहीम तो सीधे साधे हैं तो बुला लिया और जामा मस्जिद
के इमाम को नहीं बुला सकते। कितने केसों में वो वांछित है। कहीं न कहीं
प्रश्न चिन्ह तो खड़ा होता है।” ( स्त्रोत : दैनिक भास्कर)
आपको बता दें कि इमाम बुखारी पर कई गैरजमानती वारंट निकले हैं
पर वे कभी आजतक कोर्ट में पेश नही हुए । इसलिए साक्षी महाराज ने उनपर बयान
दिया ।
गुजरात द्वारका के केशवानंदजी महाराज पर कुछ समय पूर्व एक
महिला ने बलात्कार का आरोप लगाया और कोर्ट ने 12 साल की सजा भी सुना दी
लेकिन जब दूसरे जज की बदली हुई तब देखा कि ये मामला झूठा है तब उनको 7 साल
के बाद निर्दोष बरी किया गया था।
अब साक्षी महाराज की बात को लेकर कहीं न कहीं पुष्टि हो रही
है कि कहीं ये भारतीय संस्कृति को बदनाम करने का सुनियोजित षडयंत्र तो नही
चल रहा है?

 

गंगा दशहरा प्रारम्भ : 26 मई, समाप्त : 4 जून

मां गंगा की महिमा
गंगा दशहरा प्रारम्भ : 26 मई, समाप्त : 4 जून
गंगा
नदी उत्तर भारतकी केवल जीवनरेखा नहीं, अपितु हिंदू धर्मका सर्वोत्तम तीर्थ
है । ‘आर्य सनातन वैदिक संस्कृति’ गंगाके तटपर विकसित हुई, इसलिए गंगा
हिंदुस्थानकी राष्ट्ररूपी अस्मिता है एवं भारतीय संस्कृतिका मूलाधार है ।
इस कलियुगमें श्रद्धालुओंके पाप-ताप नष्ट हों, इसलिए ईश्वरने उन्हें इस
धरापर भेजा है । वे प्रकृतिका बहता जल नहीं; अपितु सुरसरिता (देवनदी) हैं ।
उनके प्रति हिंदुओंकी आस्था गौरीशंकरकी भांति सर्वोच्च है । गंगाजी
मोक्षदायिनी हैं; इसीलिए उन्हें गौरवान्वित करते हुए पद्मपुराणमें (खण्ड ५,
अध्याय ६०, श्लोक ३९) कहा गया है, ‘सहज उपलब्ध एवं मोक्षदायिनी गंगाजीके
रहते विपुल धनराशि व्यय (खर्च) करनेवाले यज्ञ एवं कठिन तपस्याका क्या लाभ
?’ नारदपुराणमें तो कहा गया है, ‘अष्टांग योग, तप एवं यज्ञ, इन सबकी
अपेक्षा गंगाजीका निवास उत्तम है । गंगाजी भारतकी पवित्रताकी सर्वश्रेष्ठ
केंद्रबिंदु हैं, उनकी महिमा अवर्णनीय है ।’
ganga dashahara
मां गंगा का #ब्रह्मांड में उत्पत्ति
‘वामनावतारमें
श्रीविष्णुने दानवीर बलीराजासे भिक्षाके रूपमें तीन पग भूमिका दान मांगा ।
राजा इस बातसे अनभिज्ञ था कि श्रीविष्णु ही वामनके रूपमें आए हैं, उसने
उसी क्षण वामनको तीन पग भूमि दान की । वामनने विराट रूप धारण कर पहले पगमें
संपूर्ण पृथ्वी तथा दूसरे पगमें अंतरिक्ष व्याप लिया । दूसरा पग उठाते समय
वामनके ( #श्रीविष्णुके) बाएं पैरके अंगूठेके धक्केसे ब्रह्मांडका
सूक्ष्म-जलीय कवच (टिप्पणी १) टूट गया । उस छिद्रसे गर्भोदककी भांति
‘ब्रह्मांडके बाहरके सूक्ष्म-जलनेब्रह्मांडमें प्रवेश किया । यह सूक्ष्म-जल
ही गंगा है ! गंगाजीका यह प्रवाह सर्वप्रथम सत्यलोकमें गया ।ब्रह्मदेवने
उसे अपने कमंडलु में धारण किया । तदुपरांत सत्यलोकमें ब्रह्माजीने अपने
कमंडलुके जलसे श्रीविष्णुके चरणकमल धोए । उस जलसे गंगाजीकी उत्पत्ति हुई ।
तत्पश्चात गंगाजी की यात्रा सत्यलोकसे क्रमशः #तपोलोक, #जनलोक, #महर्लोक,
इस मार्गसे #स्वर्गलोक तक हुई ।
पृथ्वी पर उत्पत्ति
 #सूर्यवंशके राजा सगरने #अश्वमेध यज्ञ आरंभ किया । उन्होंने दिग्विजयके
लिए यज्ञीय अश्व भेजा एवं अपने ६० सहस्त्र पुत्रोंको भी उस अश्वकी रक्षा
हेतु भेजा । इस यज्ञसे भयभीत इंद्रदेवने यज्ञीय अश्वको कपिलमुनिके आश्रमके
निकट बांध दिया । जब सगरपुत्रोंको वह अश्व कपिलमुनिके आश्रमके निकट प्राप्त
हुआ, तब उन्हें लगा, ‘कपिलमुनिने ही अश्व चुराया है ।’ इसलिए सगरपुत्रोंने
ध्यानस्थ कपिलमुनिपर आक्रमण करनेकी सोची । कपिलमुनिको अंतर्ज्ञानसे यह बात
ज्ञात हो गई तथा अपने नेत्र खोले । उसी क्षण उनके नेत्रोंसे प्रक्षेपित
तेजसे सभी सगरपुत्र भस्म हो गए । कुछ समय पश्चात सगरके प्रपौत्र राजा
अंशुमनने सगरपुत्रोंकी मृत्युका कारण खोजा एवं उनके उद्धारका मार्ग पूछा ।
कपिलमुनिने अंशुमनसे कहा, ‘`गंगाजीको स्वर्गसे भूतलपर लाना होगा ।
सगरपुत्रोंकी अस्थियोंपर जब गंगाजल प्रवाहित होगा, तभी उनका उद्धार होगा
!’’ मुनिवरके बताए अनुसार गंगाको पृथ्वीपर लाने हेतु अंशुमनने तप आरंभ किया
।’  ‘अंशुमनकी मृत्युके पश्चात उसके सुपुत्र राजा दिलीपने भी गंगावतरणके
लिए तपस्या की । #अंशुमन एवं दिलीपके सहस्त्र वर्ष तप करनेपर भी गंगावतरण
नहीं हुआ; परंतु तपस्याके कारण उन दोनोंको स्वर्गलोक प्राप्त हुआ ।’
(वाल्मीकिरामायण, काण्ड १, अध्याय ४१, २०-२१)
‘राजा
दिलीपकी #मृत्युके पश्चात उनके पुत्र राजा भगीरथने कठोर तपस्या की । उनकी
इस तपस्यासे प्रसन्न होकर गंगामाताने भगीरथसे कहा, ‘‘मेरे इस प्रचंड
प्रवाहको सहना पृथ्वीके लिए कठिन होगा । अतः तुम भगवान शंकरको प्रसन्न करो
।’’ आगे भगीरथकी घोर तपस्यासे भगवान शंकर प्रसन्न हुए तथा भगवान शंकरने
गंगाजीके प्रवाहको जटामें धारण कर उसे पृथ्वीपर छोडा । इस प्रकार हिमालयमें
अवतीर्ण गंगाजी भगीरथके पीछे-पीछे #हरद्वार, प्रयाग आदि स्थानोंको पवित्र
करते हुए बंगालके उपसागरमें (खाडीमें) लुप्त हुईं ।’
ज्येष्ठ
मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि, भौमवार (मंगलवार) एवं हस्त नक्षत्रके शुभ
योगपर #गंगाजी स्वर्गसे धरतीपर अवतरित हुईं ।  जिस दिन #गंगा पृथ्वी पर
अवतरित हुईं वह दिन ‘गंगा दशहरा’ के नाम से जाना जाता है ।
जगद्गुरु
आद्य शंकराचार्यजी, जिन्होंने कहा है : एको ब्रह्म द्वितियोनास्ति ।
द्वितियाद्वैत भयं भवति ।। उन्होंने भी ‘गंगाष्टक’ लिखा है, गंगा की महिमा
गायी है । रामानुजाचार्य, रामानंद स्वामी, चैतन्य महाप्रभु और स्वामी
रामतीर्थ ने भी गंगाजी की बड़ी महिमा गायी है । कई साधु-संतों,
अवधूत-मंडलेश्वरों और जती-जोगियों ने गंगा माता की कृपा का अनुभव किया है,
कर रहे हैं तथा बाद में भी करते रहेंगे ।
अब
तो विश्व के #वैज्ञानिक भी गंगाजल का परीक्षण कर दाँतों तले उँगली दबा रहे
हैं ! उन्होंने दुनिया की तमाम नदियों के जल का परीक्षण किया परंतु गंगाजल
में रोगाणुओं को नष्ट करने तथा आनंद और सात्त्विकता देने का जो अद्भुत गुण
है, उसे देखकर वे भी आश्चर्यचकित हो उठे ।
 #हृषिकेश में स्वास्थ्य-अधिकारियों ने पुछवाया कि यहाँ से हैजे की कोई खबर
नहीं आती, क्या कारण है ? उनको बताया गया कि यहाँ यदि किसीको हैजा हो जाता
है तो उसको गंगाजल पिलाते हैं । इससे उसे दस्त होने लगते हैं तथा हैजे के
कीटाणु नष्ट हो जाते हैं और वह स्वस्थ हो जाता है । वैसे तो हैजे के समय
घोषणा कर दी जाती है कि पानी उबालकर ही पियें । किंतु गंगाजल के पान से तो
यह रोग मिट जाता है और केवल हैजे का रोग ही मिटता है ऐसी बात नहीं है, अन्य
कई रोग भी मिट जाते हैं । तीव्र व दृढ़ श्रद्धा-भक्ति हो तो गंगास्नान व
गंगाजल के पान से जन्म-मरण का रोग भी मिट सकता है ।
सन्
1947 में जलतत्त्व विशेषज्ञ कोहीमान भारत आया था । उसने वाराणसी से
#गंगाजल लिया । उस पर अनेक परीक्षण करके उसने विस्तृत लेख लिखा, जिसका सार
है – ‘इस जल में कीटाणु-रोगाणुनाशक विलक्षण शक्ति है ।’
दुनिया
की तमाम #नदियों के जल का विश्लेषण करनेवाले बर्लिन के डॉ. जे. ओ. लीवर ने
सन् 1924 में ही गंगाजल को विश्व का सर्वाधिक स्वच्छ और
#कीटाणु-रोगाणुनाशक जल घोषित कर दिया था ।
‘आइने
अकबरी’ में लिखा है कि ‘अकबर गंगाजल मँगवाकर आदरसहित उसका पान करते थे ।
वे गंगाजल को अमृत मानते थे ।’ औरंगजेब और मुहम्मद तुगलक भी गंगाजल का पान
करते थे । शाहनवर के नवाब केवल गंगाजल ही पिया करते थे ।
कलकत्ता
के हुगली जिले में पहुँचते-पहुँचते तो बहुत सारी नदियाँ, झरने और नाले
गंगाजी में मिल चुके होते हैं । अंग्रेज यह देखकर हैरान रह गये कि हुगली
जिले से भरा हुआ गंगाजल दरियाई मार्ग से यूरोप ले जाया जाता है तो भी कई-कई
दिनों तक वह बिगड़ता नहीं है । जबकि यूरोप की कई बर्फीली नदियों का पानी
हिन्दुस्तान लेकर आने तक खराब हो जाता है ।
अभी रुड़की विश्वविद्यालय के #वैज्ञानिक कहते हैं कि ‘गंगाजल में जीवाणुनाशक और हैजे के कीटाणुनाशक तत्त्व विद्यमान हैं ।’
फ्रांसीसी
चिकित्सक हेरल ने देखा कि गंगाजल से कई रोगाणु नष्ट हो जाते हैं । फिर
उसने गंगाजल को कीटाणुनाशक औषधि मानकर उसके इंजेक्शन बनाये और जिस रोग में
उसे समझ न आता था कि इस रोग का कारण कौन-से कीटाणु हैं, उसमें गंगाजल के वे
इंजेक्शन रोगियों को दिये तो उन्हें लाभ होने लगा !
संत #तुलसीदासजी कहते हैं :
गंग सकल मुद मंगल मूला । सब सुख करनि हरनि सब सूला ।।
(श्रीरामचरित. अयो. कां. : 86.2)
सभी
सुखों को देनेवाली और सभी शोक व दुःखों को हरनेवाली माँ गंगा के तट पर
स्थित तीर्थों में पाँच तीर्थ विशेष आनंद-उल्लास का अनुभव कराते हैं :
गंगोत्री, हर की पौड़ी (हरिद्वार),  #प्रयागराज त्रिवेणी, काशी और #गंगासागर
। #गंगादशहरे के दिन गंगा में गोता मारने से सात्त्विकता, प्रसन्नता और
विशेष पुण्यलाभ होता है ।
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वटसावित्री व्रत – अमावस्यांत पक्ष : 25 मई/वटसावित्री व्रतारम्भ (पूर्णिमांत पक्ष) : 6 जून

वटसावित्री-व्रत
वटसावित्री व्रत – अमावस्यांत पक्ष : 25 मई/वटसावित्री व्रतारम्भ (पूर्णिमांत पक्ष) : 6 जून
वट पूर्णिमा : 8 जून
24 मई 2017
यह
व्रत ‘स्कंद’ और ‘भविष्योत्तर’ पुराणाेंके अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल
पूर्णिमापर और ‘निर्णयामृत’ इत्यादि ग्रंथोंके अनुसार अमावस्यापर किया जाता
है । उत्तरभारतमें प्रायः अमावस्याको यह व्रत किया जाता है । अतः
महाराष्ट्रमें इसे ‘वटपूर्णिमा’ एवं उत्तरभारतमें इसे ‘वटसावित्री’के नामसे
जाना जाता है ।
वटसावित्री-व्रत
🚩पतिके
सुख-दुःखमें सहभागी होना, उसे संकटसे बचानेके लिए प्रत्यक्ष ‘काल’को भी
चुनौती देनेकी सिद्धता रखना, उसका साथ न छोडना एवं दोनोंका जीवन सफल बनाना,
ये स्त्रीके महत्त्वपूर्ण गुण हैं ।
🚩सावित्रीमें
ये सभी गुण थे । सावित्री अत्यंत तेजस्वी तथा दृढनिश्चयी थीं ।
आत्मविश्वास एवं उचित निर्णयक्षमता भी उनमें थी । राजकन्या होते हुए भी
सावित्रीने दरिद्र एवं अल्पायु सत्यवानको पतिके रूपमें अपनाया था; तथा उनकी
मृत्यु होनेपर यमराजसे शास्त्रचर्चा कर उन्होंने अपने पतिके लिए जीवनदान
प्राप्त किया था । जीवनमें यशस्वी होनेके लिए सावित्रीके समान सभी
सद्गुणोंको आत्मसात करना ही वास्तविक अर्थोंमें वटसावित्री व्रतका पालन
करना है ।
🚩वृक्षों
में भी भगवदीय चेतना का वास है, ऐसा दिव्य ज्ञान #वृक्षोपासना का आधार है ।
इस उपासना ने स्वास्थ्य, प्रसन्नता, सुख-समृद्धि, आध्यात्मिक उन्नति एवं
पर्यावरण संरक्षण में बहुत महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है ।
🚩वातावरण
में विद्यमान हानिकारक तत्त्वों को नष्ट कर वातावरण को शुद्ध करने में
वटवृक्ष का विशेष महत्त्व है । वटवृक्ष के नीचे का छायादार स्थल एकाग्र मन
से जप, ध्यान व उपासना के लिए प्राचीन काल से साधकों एवं #महापुरुषों का
प्रिय स्थल रहा है । यह दीर्घ काल तक अक्षय भी बना रहता है । इसी कारण
दीर्घायु, अक्षय सौभाग्य, जीवन में स्थिरता तथा निरन्तर अभ्युदय की
प्राप्ति के लिए इसकी आराधना की जाती है ।
🚩वटवृक्ष
के दर्शन, स्पर्श तथा सेवा से पाप दूर होते हैं; दुःख, समस्याएँ तथा रोग
जाते रहते हैं । अतः इस वृक्ष को रोपने से अक्षय पुण्य-संचय होता है ।
वैशाख आदि पुण्यमासों में इस वृक्ष की जड़ में जल देने से पापों का नाश होता
है एवं नाना प्रकार की सुख-सम्पदा प्राप्त होती है ।
🚩इसी
वटवृक्ष के नीचे सती सावित्री ने अपने पातिव्रत्य के बल से यमराज से अपने
मृत पति को पुनः जीवित करवा लिया था । तबसे ‘#वट-सावित्री’ नामक #व्रत
मनाया जाने लगा । इस दिन महिलाएँ अपने #अखण्ड #सौभाग्य एवं कल्याण के लिए
व्रत करती हैं ।
🚩व्रत-कथा
: सावित्री मद्र देश के राजा अश्वपति की पुत्री थी । द्युमत्सेन के पुत्र
सत्यवान से उसका विवाह हुआ था । विवाह से पहले देवर्षि नारदजी ने कहा था कि
सत्यवान केवल वर्ष भर जीयेगा । किंतु सत्यवान को एक बार मन से पति स्वीकार
कर लेने के बाद दृढ़व्रता सावित्री ने अपना निर्णय नहीं बदला और एक वर्ष तक
पातिव्रत्य धर्म में पूर्णतया तत्पर रहकर अंधेे सास-ससुर और अल्पायु पति
की प्रेम के साथ सेवा की । वर्ष-समाप्ति  के  दिन  सत्यवान  और  सावित्री
समिधा लेने के लिए वन में गये थे । वहाँ एक विषधर सर्प ने सत्यवान को डँस
लिया । वह बेहोश  होकर  गिर  गया । यमराज आये और सत्यवान के सूक्ष्म शरीर
को ले जाने लगे । तब सावित्री भी अपने पातिव्रत के बल से उनके पीछे-पीछे
जाने लगी ।
🚩यमराज द्वारा उसे वापस जाने के लिए कहने पर सावित्री बोली :
‘‘जहाँ
जो मेरे पति को ले जाय या जहाँ मेरा पति स्वयं जाय, मैं भी वहाँ जाऊँ यह
सनातन धर्म है । तप, गुरुभक्ति, पतिप्रेम और आपकी कृपा से मैं कहीं रुक
नहीं सकती । #तत्त्व को जाननेवाले विद्वानों ने सात स्थानों पर मित्रता कही
है । मैं उस मैत्री को दृष्टि में रखकर कुछ कहती हूँ, सुनिये । लोलुप
व्यक्ति वन में रहकर धर्म का आचरण नहीं कर सकते और न ब्रह्मचारी या
संन्यासी ही हो सकते हैं ।
🚩विज्ञान
(आत्मज्ञान के अनुभव) के लिए धर्म को कारण कहा करते हैं, इस कारण संतजन
धर्म को ही प्रधान मानते हैं । संतजनों के माने हुए एक ही धर्म से हम दोनों
श्रेय मार्ग को पा गये हैं ।’’
🚩सावित्री के वचनों से प्रसन्न हुए #यमराज से सावित्री ने अपने ससुर के अंधत्व-निवारण व बल-तेज की प्राप्ति का वर पाया ।
🚩सावित्री
बोली : ‘‘#संतजनों के सान्निध्य की सभी इच्छा किया करते हैं । संतजनों का
साथ निष्फल नहीं होता, इस कारण सदैव संतजनों का संग करना चाहिए ।’’
🚩यमराज : ‘‘तुम्हारा वचन मेरे मन के अनुकूल, बुद्धि और बल वर्धक तथा हितकारी है । पति के जीवन के सिवा कोई वर माँग ले ।’’
🚩सावित्री ने श्वशुर के छीने हुए राज्य को वापस पाने का वर पा लिया ।
🚩सावित्री
: ‘‘आपने प्रजा को नियम में बाँध रखा है, इस कारण आपको यम कहते हैं । आप
मेरी बात सुनें । मन-वाणी-अन्तःकरण से किसीके साथ वैर न करना, दान देना,
आग्रह का त्याग करना – यह संतजनों का सनातन धर्म है । संतजन वैरियों पर भी
दया करते देखे जाते हैं ।’’
🚩यमराज बोले : ‘‘जैसे प्यासे को पानी, उसी तरह तुम्हारे वचन मुझे लगते हैं । पति के जीवन के सिवाय दूसरा कुछ माँग ले ।’’
🚩सावित्री ने अपने निपूत पिता के सौ औरस कुलवर्धक पुत्र हों ऐसा वर पा लिया ।
🚩सावित्री
बोली : ‘‘चलते-चलते मुझे कुछ बात याद आ गयी है, उसे भी सुन लीजिये । आप
आदित्य के प्रतापी पुत्र हैं, इस कारण आपको विद्वान पुरुष ‘वैवस्वत’ कहते
हैं । आपका बर्ताव प्रजा के साथ समान भाव से है, इस कारण आपको ‘धर्मराज’
कहते हैं । मनुष्य को अपने पर भी उतना विश्वास नहीं होता जितना संतजनों में
हुआ करता है । इस कारण संतजनों पर सबका प्रेम होता है ।’’
🚩यमराज बोले : ‘‘जो तुमने सुनाया है ऐसा मैंने कभी नहीं सुना ।’’
🚩प्रसन्न
यमराज से सावित्री ने वर के रूप में सत्यवान से ही बल-वीर्यशाली सौ औरस
पुत्रों की प्राप्ति का वर प्राप्त किया । फिर बोली : ‘‘संतजनों की वृत्ति
सदा धर्म में ही रहती है । #संत ही सत्य से सूर्य को चला रहे हैं, तप से
पृथ्वी को धारण कर रहे हैं । संत ही भूत-भविष्य की गति हैं । संतजन दूसरे
पर उपकार करते हुए प्रत्युपकार की अपेक्षा नहीं रखते । उनकी कृपा कभी
व्यर्थ नहीं जाती, न उनके साथ में धन ही नष्ट होता है, न मान ही जाता है ।
ये बातें संतजनों में सदा रहती हैं, इस कारण वे रक्षक होते हैं ।’’
🚩यमराज
बोले : ‘‘ज्यों-ज्यों तू मेरे मन को अच्छे लगनेवाले अर्थयुक्त सुन्दर
धर्मानुकूल वचन बोलती है, त्यों-त्यों मेरी तुझमें अधिकाधिक भक्ति होती
जाती है । अतः हे पतिव्रते और वर माँग ।’’
🚩सावित्री
बोली : ‘‘मैंने आपसे पुत्र दाम्पत्य योग के बिना नहीं माँगे हैं, न मैंने
यही माँगा है कि किसी दूसरी रीति से पुत्र हो जायें । इस कारण आप मुझे यही
वरदान दें कि मेरा पति जीवित हो जाय क्योंकि पति के बिना मैं मरी हुई हूँ ।
पति के बिना मैं सुख, स्वर्ग, श्री और जीवन कुछ भी नहीं चाहती । आपने मुझे
सौ पुत्रों का वर दिया है व आप ही मेरे पति का हरण कर रहे हैं, तब आपके
वचन कैसे सत्य होंगे ? मैं वर माँगती हूँ कि सत्यवान जीवित हो जायें । इनके
जीवित होने पर आपके ही वचन सत्य होंगे ।’’
🚩यमराज ने परम प्रसन्न होकर ‘ऐसा ही हो’ यह  कह  के  सत्यवान  को  मृत्युपाश  से  मुक्त कर दिया ।
🚩व्रत-विधि
: इसमें #वटवृक्ष की पूजा की जाती है । विशेषकर सौभाग्यवती महिलाएँ
श्रद्धा के साथ ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी से पूर्णिमा तक अथवा कृष्ण त्रयोदशी
से अमावास्या तक तीनों दिन अथवा मात्र अंतिम दिन व्रत-उपवास रखती हैं । यह
कल्याणकारक  व्रत  विधवा,  सधवा,  बालिका, वृद्धा, सपुत्रा, अपुत्रा सभी
स्त्रियों को करना चाहिए ऐसा ‘स्कंद पुराण’ में आता है ।
🚩प्रथम
दिन संकल्प करें कि ‘मैं मेरे पति और पुत्रों की आयु, आरोग्य व सम्पत्ति
की प्राप्ति के लिए एवं जन्म-जन्म में सौभाग्य की प्राप्ति के लिए
वट-सावित्री व्रत करती हूँ ।’
🚩वट
के  समीप  भगवान #ब्रह्माजी,  उनकी अर्धांगिनी सावित्री देवी तथा सत्यवान
व सती सावित्री के साथ #यमराज का पूजन कर ‘नमो वैवस्वताय’ इस मंत्र को
जपते हुए वट की परिक्रमा करें । इस समय वट को 108 बार या यथाशक्ति सूत का
धागा लपेटें । फिर निम्न मंत्र से #सावित्री को अर्घ्य दें ।
🚩अवैधव्यं च  सौभाग्यं देहि  त्वं मम  सुव्रते । पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते ।।
🚩निम्न श्लोक से वटवृक्ष की प्रार्थना कर गंध, फूल, अक्षत से उसका पूजन करें ।
वट  सिंचामि  ते  मूलं सलिलैरमृतोपमैः । यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले ।
तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मां सदा ।।
🚩#भारतीय
#संस्कृति #वृक्षों  में  भी  छुपी  हुई भगवद्सत्ता  का  ज्ञान
करानेवाली,  ईश्वर  की सर्वश्रेष्ठ कृति- मानव के जीवन में आनन्द, उल्लास
एवं चैतन्यता भरनेवाली है ।
🚩(स्त्रोत्र : संत श्री आशारामजी आश्रम द्वारा प्रकाशित ऋषि प्रसाद, जून 2007)
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मीडिया की झूठी खबरों से गुमराह होकर कवियों ने बापू आसारामजी के लिए बोला गलत,अब मांगी माफी

 मीडिया की झूठी खबरों से गुमराह होकर कवियों ने बापू आसारामजी के लिए बोला गलत,अब मांगी माफी
 #जोधपुर जेल में 4 साल से बिना सबूत हिन्दू संत बापू #आसारामजी बंद हैं।
अब तक उनके खिलाफ #मीडिया ट्रायल खूब चला है, मीडिया ने #टीआरपी और #पैसे
के चक्कर मे उनके खिलाफ झूठी कहानियां बनाकर खूब दिखाई और उसी को सच मानकर
कई #कवि और #कवयित्रियों ने उनके खिलाफ मजाक करते हुए बोला लेकिन जब उनको
सच्चाई का पता चला तो उन्होंने माफी मांगते हुए #वीडियो जारी किया ।
आइये आपको बताते है क्या कहा कवि और कवयित्रियों ने…
Poets apologized for Bapu Asharamji

 

 #कवित्री #पूनम वर्मा – अभी अभी संज्ञान में आया है  Youtube पर, मेरी
किसी वीडियो में कुछ संत आसारामजी बापू का मजाक बनाया गया है । उपहास किया
गया है । “मेरा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था लेकिन
जाने अनजाने में मेरे शब्दों से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची हो तो उसके
लिए मैं हृदय से खेद व्यक्त करती हूँ । हाथ जोड़ कर क्षमा चाहती हूँ “।
 #कवि #संपत सरल – मेरी किसी एक कवि #सम्मेलन प्रस्तुति को किसी मूर्ख ने
कट पेस्ट करके इस तरह से दुरुपयोग किया और उसको संत आसारामजी बापू के
चरित्र के साथ जोड़ दिया । हम हास्य  कवि लेखक है परिहास करते है उपहास नहीं
करते । वैसे भी लेखक प्रवृति पर होता है व्यक्ति पर नहीं होता । “जाने
अनजाने मेरे उस वक्तव्य से जो मैंने गलती की भी नहीं है अगर किसी आदमी की
संत #आसारामजी बापू के भक्तों की भावनाओं को आहत हुई हो उसके लिए खेद
व्यक्त करता हूँ उसके लिए क्षमा याचना करता हूँ और भविष्य में  इसकी
पुनरावृति नहीं होगी इस बात का आपको भरोसा दिलाता हूँ हरि ॐ” ।
कवि
शम्भू शिखर – दिल्ली के कार्यो की वीडियो you tube पर,जिसमें कि आसारामजी
बापू की हँसी मजाक मेरी ओर से कविताओं में कही गई ।जिस कारण से बहुत सारे
भक्तों का दिल दुःखा और बहुत भक्तों को तकलीफ हुई । मेरा #मकसद किसीका दिल
दुखाना या किसीको तकलीफ देना नहीं था न है । ये अज्ञानतावश मैंने ऐसा किया ।
“आप सभी से किसी भाई-बहन साधकों को अनुयायियों को तकलीफ हुई हो मैं उन सब
से क्षमा मांगता हूँ और आप सब से वादा करता हूँ आगे मेरे द्वारा संत
आसारामजी बापू पर किसी भी प्रकार की कोई टिप्पणी नहीं आएगी जिस किसी भाई का
दिल मेरी वजह से दुखा उसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूँ और उम्मीद करता हूँ
आप सबका प्रेम मुझ तक ऐसे ही अविरत पहुंचता रहेगा” ।
 #डॉ. सुरेश अवस्थी – अभी अभी संज्ञान में आया कि मैंने किसी कवि सम्मेलन
में कोई ऐसा शब्द,कोई ऐसी पंक्ति पढ़ी है जिससे संत आसारामजी बापू के
समर्थको और उनके भक्तों को ठेस पहुंची है । उनका मन आहत हुए है । उन्हें
लगा है कि उन शब्दों से संत श्री की अवमानना हुई है। यदि मेरे द्वारा ऐसा
कोई शब्द कोई टिप्पणी कविता की कोई पंक्ति प्रयुक्त की गई है जिससे संत
श्री आसारामजी बापू के भक्त आहत हुए हैं, उनकी आस्था को चोट पहुंची है या
उन शब्दों में कोई संत श्री की अपमानता प्रतीत होती है तो “मैं उसके प्रति
भावी मन से खेद व्यक्त करता हूँ मुझे क्षमा करें और मैं ये भविष्य में
सचेतता बरतूँगा, ध्यान रखूंगा कि कहीं कोई ऐसी टिप्पणी ऐसी पंक्ति ऐसी
कविता मेरे द्वारा प्रस्तुत न की जाए जिससे संत श्री आसारामजी  बापू के
भक्तों को दिक्कत हो उन्हें कोई #ठेस पहुँचे या किसी व्यक्ति विशेष को या
कोई प्रतीत हो कि उसकी अवमानना की जा रही है मैं इसका पूरा ख्याल रखूंगा
खेद क्षमा धन्यवाद”|
कवित्री
#अनामिका जैन अम्बर – मैं कवित्री अनामिका जैन अम्बर ये स्वीकारती हूँ कि
पूज्य संत श्री आसारामजी बापू के संदर्भ में मुझसे थोड़ा तिपुन दोहा बोला
गया है । जब मैंने ये पंक्तियां कही थी तब ये नया विवाद इनके चरित्र को
लेकर लगा था प्रथम #दृष्ट्या मुझे ऐसा लगा था कि मेरे अपने धर्म का चोला
पहन किसी अपने व्यक्ति ने हमें छल लिया । ये ऐसा था जैसे किसी बच्चे ने
अपनी माँ को छला हो ।किन्तु उसके बाद ऐसे साक्ष्य सामने आये जिनमें भान हुआ
कि ये एक बड़ा #षड्यंत्र है । हमारे हिंदुओं के साधुओं के प्रति संतों के
प्रति। मेरी कलम ने हमेशा माँ भारती की वंदना की है धर्म का मन रखा है ।
मुझसे जो हुआ वो वास्तव में गलत है मेरी पंक्तियों से पूज्य श्री के
अनुयायियों की भावनाएं आहत हुई हैं । “मैं उनसे करबद्ध क्षमा प्रार्थी हूँ
आप सब की साक्षी हूँ” भविष्य में कभी किसी #हिन्दू #संत के प्रति ऐसे शब्द
जो किसीका हृदय दुखाये नहीं कहूंगी एक आग्रह और करती हूं आप सब से कि उस
वीडियो को आप वायरल न करें उसे हमने अपलोड नहीं किया है । जिस चैनल से
अपलोड किया गया है उनसे भी निवेदन है कि नेट से उसे हटा दें मेरी कलम आप
सभी के साथ से बलशाली हुई है अतः अपना स्नेह बनाये रखे “|
 #डॉ. #सुनील जोगी – मैं आप सब से अपील करता हूँ बहुत से कार्टूनीय पत्रकार
कुछ ऐसे हैं जो आसारामजी बापू के विषय में अशोभनीय बातें करते हैं । वो
उचित नहीं है बहुत से लोग मुझे फ़ोन करते है । बहुत से उनके भक्त है, उनके
अनुयायी है,उनके चाहनेवाले है उनका हृदय दुखता है #बापूजी पर अभी कोई आरोप
सिद्ध नहीं हुआ है केवल अदालत में मामला है ।  जब तक आरोप सिद्ध नहीं हो
जाता हमें किसी भी संत पर इस तरह की टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए । इससे
हमारे #धर्म को क्षति पहुंचती है। नुकसान होता है । किसी भी वर्णीय बड़े संत
को और आसारामजी  बापू का बड़ा योगदान रहा है उनके करोड़ो शिष्य हैं, #भक्त
हैं,  उनका #हृदय दुखता है तो आप सबका कोई अधिकार नहीं कि आसारामजी बापू के
लिए अपमान जनक शब्द इस्तेमाल करें या उनके प्रति कोई अशुभ टिप्पणी करें
जिससे उनके भक्तों का,उनके माननेवालों का उनके फोल्लोवेर्स का दिल दुखे ।
इसलिए मेरी आप सब से अपील है कि इस मामले में कुछ भी ऐसी #टिप्पणी न करें।
मेरा अनुरोध आप सब स्वीकार करेंगे तो मुझे खुशी होगी ।
अब एक सवाल उठता है कि #मीडिया क्यों बिना सबूत ही  हिन्दू संतो के खिलाफ बोलती रहती है?
क्या उनको इतनी #स्वतन्त्रता दी गई है कि बिना सबूत कुछ भी दिखा सकते हैं ???
जबकि
सच्चाई ये है कि किसी भी पादरी या मौलवी के लिए सबूत होने के बाद भी
मीडिया दिखाती नहीं है और हिन्दू संतो के खिलाफ बिना सबूत ही जहर उगलती
रहती है।
इससे
सिद्ध हो जाता है कि वेटिंकन सिटी और सऊदी अरब से हिन्दू संतों और  हिन्दू
कार्यकर्ताओं को बदनाम करने का भारी फंडिग मिलता है मीडिया को ।
अतः #देशवासी #विदेशी #फंडिग से चलने वाली मीडिया से सावधान रहें ।
जय हिंद
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फिल्मकारों को गाने, डायलॉग लिखने से पहले अपनी बहन और मां के बारे में सोचना चाहिए : डीसीपी लक्ष्मी

फिल्मकारों को गाने, डायलॉग लिखने से पहले अपनी बहन और मां के बारे में सोचना चाहिए : डीसीपी लक्ष्मी
14 मई  2017
DCP Lakshmi
भारतीय
#फिल्मों में बढ़ती हिंसा और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध का मुद्दा
निरंतर समाज में उठता रहा है। कई बार ऐसी बातें सामने आयी जिसमें कहा गया
है कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध में कहीं न कहीं इस तरह की फिल्में खास
रोल निभाती हैं।
 #तमिलनाडु की तीन महिला पुलिस #अधिकारियों ने इस मुद्दे को उठाया है। इन
महिला आयपीएस अधिकारियों ने वीडियो के जरिए भारतीय फिल्मकारों से फिल्मों
में हिंसात्मक दृश्य से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि महिलाओं के
खिलाफ हिंसा और दुर्व्यवहार को स्क्रीन पर नहीं दिखाएं।
फिल्मों
में महिलाओं के साथ #हिंसात्मक दृश्य को लेकर खास अपील तमिलनाडु के
कोयंबटूर की डीसीपी एस. लक्ष्मी (लॉ एंड ऑर्डर), एसपी राम्या भारती
(कोयंबटूर) और तिरूपुर शहर कीडीसीपी दिशा मित्तल (लॉ एंड ऑर्डर) ने वीडियो
के जरिए फिल्मकारों से खास अपील जारी की है।
उन्होंने
कहा कि जिस तरह से #फिल्म में महिलाओं को लेकर हिंसात्मक दृश्य दिखाए जाते
हैं इसका लोगों पर असर होता है। फिर सामान्य जीवन में भी महिलाओं को ऐसी
घटनाओं से गुजरना पड़ जाता है। ऐसी स्थिति सामने नहीं आए इसके लिए जरूरी है
कि फिल्मों में ऐसे दृश्यों से बचा जाए।
अधिकारियों ने फिल्म के #एक्टर्स को भी इस मामले में समझाने की कोशिश की है।
कोयंबटूर
की डीसीपी एस. लक्ष्मी (#लॉ एंड ऑर्डर) ने कहा कि, हमारे देश में महिलाओं
का खास सम्मान है। यही वजह है कि इसे भारत माता कहकर बुलाया जाता है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से फिल्मों में महिलाओं के खिलाफ #हिंसात्मक दृश्य
दिखाए जाते हैं ये ठीक नहीं है।
-#महिला
विरोधी दृश्यों से महिलाओं पर #अत्याचार बढ़े हैं। लोग फिल्म देखकर वैसा
ही करने की कोशिश करते हैं। फिल्म बेहद सशक्त माध्यम है ऐसे में इसका बेहद
गंभीरता से इस्तेमाल होना चाहिए। जिससे लोगों में अच्छा संदेश जाए।
उन्होंने कहा कि जो भी गाने या #डायलॉग लिखते हैं उन्हें पहले अपनी बहन और
मां के बारे में सोचना चाहिए। उनके बारे में सोचकर ही शब्दों का चयन होना
चाहिए।
वहीं
#डीसीपी दिशा #मित्तल ने कहा कि फिल्मों के साथ-साथ टीवी पर आनेवाले
कार्यक्रम, विज्ञापन, गाने सभी हम पर काफी असर डालते हैं। ऐसे में इनका सही
इस्तेमाल बेहद जरूरी है।
 #एसपी #राम्या भारती ने कहा कि फिल्म के #डायलॉग, गाने सभी का अपना असर
होता है। लोगों में कहीं इनका गलत असर नहीं जाए इससे बचने के लिए जरूरी है
कि फिल्मकार इसको लेकर गंभीर बने। इसमें सुधार के जरिए महिलाओं के खिलाफ
हिंसा को कम किया जा सकता है।
आपको
बता दें कि कुछ दिन पहले केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी
ने भी देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ रही हिंसा के लिए बॉलीवुड और क्षेत्रीय
सिनेमा को जिम्मेदार ठहराया है।
मेनका
गांधी ने कहा कि बॉलीवुड में महिलाओं से जुड़े अशोभनीय दृश्यों के कारण
देश में हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं और #महिलाओं के साथ छेड़छाडी होती है ।
‘फिल्मों में रोमांस की शुरुआत छेड़छाड़ से होती है। लगभग सभी फिल्मों में
छेड़छाड़ को बढ़ावा दिया जाता है।
#मेनका #गांधी ने #फिल्मकारों और विज्ञान बनाने वालों से अपील की कि वे महिलाओं की अच्छी छवि को दिखाएं।
भला
जिस देश में जहां, नर में राम और नारी में सीता देखने की संस्कृति रही हो,
नदियों को भी माता कहकर पुकारा जाता हो, भगवान के विभिन्न अवतारों,
ऋषि-मुनियों, #योगियों-तपस्वियों आदि की क्रीड़ा व कर्म-स्थली रही हो, महिला
सशक्तिकरण के लिए दिन-रात एक कर दिया गया हो, उसके बाद भी महिलाओं पर हो
रहे अत्याचार के जिम्मेदार गन्दी फिल्में और ज्ञापन है ।
जानिए भारत को बॉलीवुड ने दिया क्या है ?
1. #बलात्कार गैंग रेप करने के तरीके।
2. विवाह किये बिना लड़का लड़की का शारीरिक सम्बन्ध बनाना।
3. #विवाह के दौरान लड़की को मंडप से भगाना ।
4. चोरी #डकैती करने के तरीके।
5. भारतीय संस्कारों का उपहास उठाना।
6. लड़कियों को छोटे कपड़े पहने की सीख दे उसे फैशन का नाम देना।
7. दारू #सिगरेट चरस गांजा कैसे पिया और लाया जाये।
8. #गुंडागर्दी कर के हफ्ता वसूली करना।
9. भगवान का मजाक बनाना और अपमानित करना।
10. पूजा पाठ यज्ञ करना पाखण्ड है व नमाज पढ़ना ईश्वर की सच्ची पूजा है।
11. भारतीयों को #अंग्रेज बनाना।
12. भारतीय #संस्कृति को #मूर्खता पूर्ण बताना और पश्चिमी संस्कृति को श्रेष्ठ बताना।
13. माँ बाप को वृध्दाश्रम छोड़ के आना।
14. #गाय पालन को मजाक दिखाना और कुत्तों को उनसे श्रेष्ठ बताना और पालना सिखाना।
15. रोटी हरी सब्जी खाना गलत बल्कि रेस्टोरेंट में पिज्जा बर्गर #कोल्ड_ड्रिंक और नॉन वेज खाना श्रेष्ठ है।
16.
#पंडितों को जोकर के रूप में दिखाना, चोटी रखना या यज्ञोपवीत पहनना
मूर्खता है मगर बालों के अजीबों गरीब स्टाइल (गजनी) रखना व क्रॉस पहनना
श्रेष्ठ है उससे आप सभ्य लगते हैं ।
17. शुद्ध हिन्दी या संस्कृत बोलना हास्य वाली बात है और उर्दू या अंग्रेजी बोलना सभ्य पढ़ा-लिखा और अमीरी वाली बात।
18.हिन्दू देवी-देवताओं और हिन्दू साधू-संतों का अपमान करने और अल्लाह और मोलवियों की बढ़ाई करना ।
हमारे
देश की युवा पीढ़ी बॉलीवुड को और उसके अभिनेता और #अभिनेत्रियों का अपना
आदर्श मानती है…..भोले हिन्दू फिल्म देखने के बाद गले में क्रोस मुल्ले
जैसी छोटी सी दाड़ी रख कर
 खुद को मॉडर्न समझते हैं
हिन्दू युथ के रगोें में धीमा जहर भरा जा रहा है।
फिल्म जेहाद
अगर यही बॉलीवुड देश की संस्कृति सभ्यता दिखाए ..
तो सत्य मानिये हमारी #युवा पीढ़ी अपने रास्ते से कभी नही भटकेगी ।
अधिकतर फिल्मों में #हिन्दू नास्तिक मिलेगा या धर्म का उपहास करता हुआ कोई कारनामा दिखेगा ।
फिल्मों
में #हिन्दूधर्म के देवी-देवताओं का अपमान करना, #साधू-संतों का मजाक
उड़ना, मंदिरों में जाना अंधश्रद्धा बताना, स्त्री को भोग्या दिखाना आदि आदि
एक सोची समझी साजिश है।
 #बॉलीवुड द्वारा देशवासियों को मीठा जहर दिया जा रहा है जिससे भारतीय संस्कृति को तोड़ने का काम किया जा रहा है ।
देश को फिर से गुलामी की जंजीरों में जकड़ने की साजिश राष्ट्रविरोधी ताकतों द्वारा देश के अंदर ही चल रही है।
अतः हर #हिन्दुस्तानी इस मीठे जहर से सावधान रहें ।
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माँ गंगा के पौराणिक इतिहास एवं महत्ता

माँ गंगा जयंती : 2 मई
पौराणिक
कथा के अनुसार राजा सगर ने #तपस्या करके साठ हजार पुत्रों की प्राप्ति की।
एक दिन राजा #सगर ने देवलोक पर विजय प्राप्त करने के लिये एक #यज्ञ किया।
यज्ञ के लिये #घोड़ा आवश्यक था जो #ईर्ष्यालु इंद्र ने चुरा लिया था।
Ganga Jayanti
सगर
ने अपने सारे पुत्रों को घोड़े की खोज में भेज दिया अंत में उन्हें घोड़ा
#पाताल लोक में मिला जो एक #ऋषि के समीप बँधा था। सगर के पुत्रों ने यह सोच
कर कि ऋषि ही घोड़े के #गायब होने की वजह हैं उन्होंने ऋषि का अपमान किया।
तपस्या में #लीन ऋषि ने हजारों वर्ष बाद अपनी आँखें खोली और उनके क्रोध से
सगर के सभी साठ हजार पुत्र जल कर वहीं #भस्म हो गये।
सगर
के पुत्रों की #आत्माएँ भूत बनकर विचरने लगीं क्योंकि उनका #अंतिम संस्कार
नहीं किया गया था। सगर के पुत्र #अंशुमान ने आत्माओं की मुक्ति का #असफल
प्रयास किया और बाद में अंशुमान के पुत्र #दिलीप ने भी।
भगीरथ
राजा दिलीप की #दूसरी पत्नी के पुत्र थे। उन्होंने अपने #पूर्वजों का
अंतिम संस्कार किया। उन्होंने गंगा को पृथ्वी पर लाने का प्रण किया जिससे
उनके #अंतिम संस्कार कर, राख को गंगाजल में #प्रवाहित किया जा सके और भटकती
आत्माएं #स्वर्ग में जा सकें। भगीरथ राजा ने ब्रह्मा की घोर तपस्या की
ताकि गंगा को #पृथ्वी पर लाया जा सके। ब्रह्मा प्रसन्न हुये और गंगा को
पृथ्वी पर भेजने के लिये तैयार हुये और गंगा को पृथ्वी पर और उसके बाद
#पाताल में जाने का आदेश दिया ताकि सगर के पुत्रों की आत्माओं की मुक्ति
संभव हो सके।
तब
गंगा ने कहा कि मैं इतनी ऊँचाई से जब पृथ्वी पर #गिरूँगी, तो पृथ्वी इतना
#वेग कैसे सह पाएगी? तब भगीरथ ने भगवान ₹शिव से निवेदन किया और उन्होंने
अपनी खुली #जटाओं में गंगा के वेग को रोक कर, एक लट खोल दी, जिससे गंगा की
अविरल धारा पृथ्वी पर प्रवाहित हुई। वह धारा भगीरथ के पीछे-पीछे गंगा सागर
#संगम तक गई, जहाँ सगर-पुत्रों का #उद्धार हुआ। शिव के स्पर्श से गंगा और
भी पावन हो गयी और पृथ्वी #वासियों के लिये बहुत ही श्रद्धा का केन्द्र बन
गयीं।
भारत
की सबसे #महत्वपूर्ण नदी गंगा जो भारत और बांग्लादेश में मिलाकर 2,510
किमी की दूरी तय करती हुई #उत्तराखंड में हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी के
#सुंदरवन तक विशाल भू भाग को सींचती है, देश की प्राकृतिक संपदा ही नही,
जन जन की #भावनात्मक आस्था का आधार भी है। 2,071 कि.मी तक भारत तथा उसके
बाद बांग्लादेश में अपनी लंबी यात्रा करते हुए यह सहायक नदियों के साथ दस
लाख वर्ग किलोमीटर #क्षेत्रफल के अति विशाल उपजाऊ मैदान की रचना करती है।
सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से #अत्यंत महत्वपूर्ण
गंगा का यह मैदान अपनी घनी जनसंख्या के कारण भी जाना जाता है। 100 फीट (31
मी) की अधिकतम गहराई वाली यह नदी भारत में #पवित्र मानी जाती है तथा इसकी
#उपासना माँ और देवी के रूप में की जाती है। #भारतीय पुराण और साहित्य में
अपने #सौंदर्य और महत्व के कारण बार-बार आदर के साथ #वंदित गंगा नदी के
प्रति विदेशी साहित्य में भी #
प्रशंसा और भावुकतापूर्ण वर्णन किए गए हैं।
गंगा नदी पर बने पुल, बाँध और नदी #परियोजनाएँ भारत की बिजली, पानी और कृषि से संबन्धित जरुरतों को पूरा करती हैं।
भागीरथी नदी गंगोत्री में
गंगा
नदी की #प्रधान शाखा भागीरथी है जो #कुमायूँ में हिमालय के गोमुख नामक
स्थान पर #गंगोत्री हिमनद से निकलती है।  गंगा के इस उद्गम स्थल की #ऊँचाई
3140 मीटर है। यहाँ गंगा जी को समर्पित एक #मंदिर भी है।
गंगोत्री
तीर्थ, शहर से 19 कि.मी. उत्तर की ओर 3892 मी.(12,770 फी.) की ऊँचाई पर इस
#हिमनद का मुख है। यह हिमनद 25 कि.मी. लंबा व 4 कि.मी. चौड़ा और लगभग 40
मी. ऊँचा है। इसी #ग्लेशियर से भागीरथी एक छोटे से #गुफानुमा मुख पर अवतरित
होती है। इसका जल #स्रोत 5000 मी. ऊँचाई पर स्थित एक बेसिन है। इस #बेसिन
का मूल पश्चिमी ढलान की संतोपंथ की चोटियों में है। गौमुख के रास्ते में
3600 मी. ऊँचे चिरबासा ग्राम से विशाल #गोमुख हिमनद के दर्शन होते हैं। इस
हिमनद में नंदा देवी, कामत पर्वत एवं त्रिशूल पर्वत का हिम #पिघल कर आता
है। यद्यपि गंगा के आकार लेने में अनेक छोटी #धाराओं का योगदान है लेकिन 6
बड़ी और उनकी सहायक 5 छोटी धाराओं का भौगोलिक और सांस्कृतिक महत्व अधिक
है।
अलकनंदा
की सहायक नदी धौली, विष्णु गंगा तथा मंदाकिनी है। धौली गंगा का अलकनंदा से
#विष्णु प्रयाग में संगम होता है। यह 1372 मी. की ऊँचाई पर स्थित है। फिर
2805 मी. ऊँचे नंद प्रयाग में #अलकनन्दा का #नंदाकिनी नदी से संगम होता है।
इसके बाद कर्ण प्रयाग में अलकनन्दा का कर्ण गंगा या पिंडर नदी से #संगम
होता है।
फिर
#ऋषिकेश से 139 कि.मी. दूर स्थित रुद्र प्रयाग में अलकनंदा मंदाकिनी से
मिलती है। इसके बाद भागीरथी व अलकनन्दा 1500 फीट पर स्थित #देव प्रयाग में
संगम करती हैं यहाँ से यह सम्मलित जल-धारा गंगा नदी के नाम से आगे प्रवाहित
होती है। इन पांच प्रयागों को सम्मलित रूप से #पंच प्रयाग कहा जाता है।इस
प्रकार 200 कि.मी. का #संकरा पहाड़ी रास्ता तय करके गंगा नदी ऋषिकेश होते
हुए प्रथम बार मैदानों का #स्पर्श हरिद्वार में करती है।
त्रिवेणी-संगम, प्रयाग
हरिद्वार
से लगभग 800 कि.मी. #मैदानी यात्रा करते हुए गढ़मुक्तेश्वर, सोरों,
फर्रुखाबाद, कन्नौज, बिठूर, कानपुर होते हुए गंगा #इलाहाबाद (प्रयाग)
पहुँचती है। यहाँ इसका संगम #यमुना नदी से होता है। यह संगम स्थल हिन्दुओं
का एक महत्वपूर्ण तीर्थ है। इसे तीर्थराज प्रयाग कहा जाता है। इसके बाद
हिन्दू धर्म की प्रमुख #मोक्षदायिनी नगरी काशी (वाराणसी) में गंगा एक वक्र
लेती है, जिससे यह यहाँ #उत्तरवाहिनी कहलाती है। यहाँ से मीरजापुर, पटना,
भागलपुर होते हुए पाकुर पहुँचती है। इस बीच इसमें बहुत-सी सहायक #नदियाँ,
जैसे सोन, गंडक, घाघरा, कोसी आदि मिल जाती हैं। भागलपुर में #राजमहल की
पहाड़ियों से यह दक्षिणवर्ती होती है। पश्चिम बंगाल के #मुर्शिदाबाद जिले
के गिरिया स्थान के पास गंगा नदी दो शाखाओं में #विभाजित हो जाती
है-भागीरथी और पद्मा। भागीरथी नदी गिरिया से दक्षिण की ओर बहने लगती है
जबकि पद्मा नदी दक्षिण-पूर्व की ओर बहती #फरक्का बैराज (1974 निर्मित) से
छनते हुई बंगला देश में प्रवेश करती है। यहाँ से गंगा का #डेल्टाई भाग शुरू
हो जाता है। मुर्शिदाबाद शहर से #हुगली शहर तक गंगा का नाम भागीरथी नदी
तथा हुगली शहर से मुहाने तक गंगा का नाम #हुगली नदी है। गंगा का यह मैदान
मूलत: एक भू-अभिनति गर्त है जिसका निर्माण मुख्य रूप से हिमालय #पर्वतमाला
निर्माण प्रक्रिया के तीसरे चरण में लगभग 3-4 #करोड़ वर्ष पहले हुआ था। तब
से इसे #हिमालय और प्रायद्वीप से निकलने वाली नदियाँ अपने साथ लाये हुए
अवसादों से पाट रही हैं। इन मैदानों में #जलोढ़ की औसत गहराई 1000 से 2000
मीटर है। इस मैदान में नदी की #प्रौढ़ावस्था में बनने वाली अपरदनी और
निक्षेपण स्थलाकॄतियाँ, जैसे- बालू-रोधका, विसर्प, गोखुर झीलें और गुंफित
नदियाँ पाई जाती हैं।
गंगा
की इस #घाटी में एक ऐसी सभ्यता का उद्भव और विकास हुआ जिसका #प्राचीन
इतिहास अत्यन्त गौरवमयी और #वैभवशाली है। जहाँ ज्ञान, धर्म, अध्यात्म व
सभ्यता-संस्कृति की ऐसी किरण प्रस्फुटित हुई जिससे न केवल भारत बल्कि समस्त
#संसार आलोकित हुआ।
पाषाण
या #प्रस्तर युग का जन्म और विकास यहाँ होने के अनेक #साक्ष्य मिले हैं।
इसी घाटी में #रामायण और महाभारत कालीन युग का उद्भव और विलय हुआ। शतपथ
ब्राह्मण, पंचविश ब्राह्मण, गौपथ ब्राह्मण, ऐतरेय आरण्यक, कौशितकी आरण्यक,
सांख्यायन आरण्यक, वाजसनेयी संहिता और #महाभारत इत्यादि में वर्णित घटनाओं
से #उत्तर वैदिककालीन गंगा घाटी की जानकारी मिलती है। प्राचीन मगध महाजनपद
का उद्भव गंगा घाटी में ही हुआ जहाँ से #गणराज्यों की परंपरा विश्व में
पहली बार प्रारंभ हुई। यहीं भारत का वह स्वर्ण युग विकसित हुआ जब मौर्य और
गुप्त वंशीय राजाओं ने यहाँ #शासन किया।
सुंदरवन-विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा-गंगा का #मुहाना-बंगाल की खाड़ी में है ।
हुगली
नदी कोलकाता, हावड़ा होते हुए #सुंदरवन के भारतीय भाग में सागर से #संगम
करती है। #पद्मा में ब्रह्मपुत्र से निकली शाखा नदी जमुना नदी एवं मेघना
नदी मिलती हैं। अंततः ये 350 कि.मी. चौड़े सुंदरवन डेल्टा में जाकर #बंगाल
की खाड़ी में सागर-संगम करती है। यह #डेल्टा गंगा एवं उसकी सहायक नदियों
द्वारा लाई गई नवीन #जलोढ़ से 1,000 वर्षों में निर्मित समतल एवं निम्न
मैदान है। यहाँ #गंगा और बंगाल की खाड़ी के संगम पर एक प्रसिद्ध हिन्दू
तीर्थ है जिसे #गंगा-सागर-संगम कहते हैं।
गोमुख पर शुद्ध गंगा
गंगा
नदी विश्व भर में अपनी #शुद्धीकरण क्षमता के कारण जानी जाती है। लंबे समय
से प्रचलित इसकी शुद्धीकरण की मान्यता का #वैज्ञानिक आधार भी है। वैज्ञानिक
मानते हैं कि इस नदी के जल में #बैक्टीरियोफेज नामक विषाणु होते हैं, जो
जीवाणुओं व अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों को जीवित नहीं रहने देते हैं। नदी
के जल में #प्राणवायु (ऑक्सीजन) की मात्रा को बनाए रखने की #असाधारण क्षमता
है। किंतु इसका कारण अभी तक अज्ञात है। एक राष्ट्रीय सार्वजनिक #रेडियो
कार्यक्रम के अनुसार इस कारण हैजा और पेचिश जैसी #बीमारियाँ होने का खतरा
बहुत ही कम हो जाता है, जिससे #महामारियाँ होने की संभावना बड़े स्तर पर टल
जाती है।
लेकिन
गंगा के तट पर घने बसे #औद्योगिक नगरों के #नालों की गंदगी सीधे गंगा नदी
में मिलने से गंगा का प्रदूषण पिछले कई सालों से #चिंता का विषय बना हुआ
है। औद्योगिक कचरे के साथ-साथ #प्लास्टिक कचरे की #बहुतायत ने गंगा जल को
भी बेहद प्रदूषित किया है।
वैज्ञानिक जांच के अनुसार गंगा का #बायोलाजिकल ऑक्सीजन स्तर 3 डिग्री (सामान्य) से बढ़कर 6 डिग्री हो चुका है।
गंगा
में 2 करोड़ 90 लाख लीटर प्रदूषित कचरा #प्रतिदिन गिर रहा है।  यह घोर
#चिन्तनीय है कि कब गंगा-जल की सफाई पूर्ण होगी । गंगा नदी की सफाई के लिए
कई बार पहल की गयी लेकिन कोई भी #संतोषजनक स्थिति तक नहीं पहुँच पाया।
वाराणसी घाट
भारत
की अनेक #धार्मिक अवधारणाओं में गंगा नदी को देवी के रूप में निरुपित किया
गया है। बहुत से पवित्र #तीर्थस्थल गंगा नदी के किनारे पर बसे हुये हैं ।
जिनमें वाराणसी और #हरिद्वार सबसे प्रमुख हैं। गंगा नदी को भारत की पवित्र
नदियों में सबसे पवित्र माना जाता है एवं  गंगा में स्नान करने से मनुष्य
के सारे #पापों का नाश हो जाता है । गंगाजल को पवित्र समझा जाता है तथा
समस्त #संस्कारों में उसका होना आवश्यक है। पंचामृत में भी गंगाजल को एक
#अमृत माना गया है।
महाभारत
के अनुसार मात्र प्रयाग में माघ मास में #गंगा-यमुना के संगम पर तीन करोड़
दस हजार तीर्थों का संगम होता है। ये तीर्थ स्थल सम्पूर्ण भारत में
#सांस्कृतिक एकता स्थापित करते हैं।
माँ गंगा की अपार महिमा
भारत
की राष्ट्र-नदी गंगा जल ही नहीं, अपितु भारत और #हिंदी साहित्य की #मानवीय
चेतना को भी प्रवाहित करती है। ऋग्वेद, महाभारत, रामायण एवं अनेक पुराणों
में #गंगा को पुण्य सलिला, पाप-नाशिनी, मोक्ष प्रदायिनी, सरित्श्रेष्ठा एवं
महानदी कहा गया है।
जैसे
मंत्रों में #ॐकार, स्त्रियों में #गौरीदेवी, तत्वों में #गुरुतत्व और
विद्याओं में #आत्मविद्या उत्तम है, उसी प्रकार सम्पूर्ण तीर्थों में
#गंगातीर्थ विशेष माना गया है । गंगाजी की वंदना करते हुए कहा गया है :
संसारविषनाशिन्यै जीवनायै नमोऽस्तु ते । तापत्रितयसंहन्त्र्यै प्राणेश्यै ते नमो नमः ।।
‘देवी
गंगे ! आप संसाररूपी विष का नाश करनेवाली हैं । आप जीवनरूपा हैं । आप
आधिभौतिक,आधिदैविक और आध्यात्मिक तीनों प्रकार के तापों का संहार करनेवाली
तथा प्राणों की स्वामिनी हैं । आपको बार-बार नमस्कार है ।’
(स्कंद पुराण, काशी खं. पू. : 27.160)
जिस
दिन #गंगाजी की उत्पत्ति हुई वह दिन ‘गंगा जयंती’ (वैशाख शुक्ल सप्तमी – 2
मई) और जिस दिन गंगाजी पृथ्वी पर #अवतरित हुईं वह दिन ‘गंगा दशहरा’
(ज्येष्ठ शुक्ल दशमी – 4 जून) के नाम से जाना जाता है । इन दिनों में
गंगाजी में #गोता मारने से विशेष #सात्विकता, प्रसन्नता और पुण्यलाभ होता
है । वैशाख, कार्तिक और माघ मास की पूर्णिमा, माघ मास की #अमावस्या तथा
#कृष्णपक्षीय अष्टमी तिथि को गंगास्नान करने से भी विशेष #पुण्यलाभ होता है
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