देवेंद्र गांधी, Devendra Gandhi

भारत का मीडिया बन गया है वेश्या का कोठा : पत्रकार देवेंद्र गांधी

अक्टूबर 5, 2017
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है पत्रकार देवेंद्र गांधी का उसमें उन्होंने मीडिया को पूरा नंगा कर दिया है ।
उन्होंने बताया – मीडिया का फंडिग कहाँ से आता है और कौन उसको हैंडल करता है, मीडिया में जो खबरें दिखाई जाती है वे कितनी सच होती है, उन्होंने मीडिया को वेश्या का कोठा बताया ।
India’s media has become prostitutes: journalist Devendra Gandhi

 

आइये जानते है क्या कहा देवेंद्र गांधी ने…
उन्होंने कहा कि नमस्कार दोस्तों मैं हूं देवेंद्र गांधी।
 #देवेंद्र गांधी एक नाम है आपके लिए, लेकिन मैं मीडिया से जुड़ा हुआ हूं।
मीडिया की क्या हैसियत है आज की तारीख में , मीडिया का क्या रुतबा है आज की तारीख में , मीडिया को लोग किस तरह से किस नजरिए से देखते हैं आज की तारीख
इस पर बात करूंगा और साथ ही साथ आपको ये भी बताऊंगा कि देश के बड़े-बड़े मीडिया हाउसेस कहां से चल रहे हैं ?
कौन उन्हें चला रहा है और कौन उनका मालिक हैं ?
आप और हम अक्सर ये सोचते होंगे कि मीडिया निष्पक्ष है, मीडिया दबाव में काम नहीं करता लेकिन अगर आप आंकड़े देखेंगे और मीडिया चैनल्स के मालिकों की लिस्ट देखेंगे तो आपको थोड़ा-थोड़ा लगने लगेगा कि मीडिया उतना निष्पक्ष नहीं रहा,मीडिया उतना स्वतंत्र नहीं रहा जितना कि हम सोचते हैं या जितने की हम कामना करते हैं।
यूं तो मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन आज की तारीख में मुझे लगता है कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ तो कतई नहीं है।
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ पूरी तरह से या तो ढेर हो चुका है, जर्जर हो चुका है या तो ढेर होने के कगार पर है ।
अगर आज हमने खुद को नहीं संभाला, हमको मतलब मीडिया ने खुद को नहीं संभाला तो ये पिल्लर एक दिन पूरी तरह से धराशाई हो जाएगा और इसका इल्जाम भी मीडिया के सिर ही आएगा, क्योंकि हम खुद इसके लिए जिम्मेदार हैं और हमें इसकी जिम्मेदारी लेनी भी होगी ।
आज मैं आपको यह बताना चाहूंगा कि मीडिया के कौन-कौन से हाउसेस प्रमुख हाउस इस देश में चल रहे हैं,
लेकिन इससे पहले मैं 2 बड़े सवाल उठाता हूं, क्या मीडिया इस समय मंडी बन चुका है ?
क्या #मीडिया #पूंजीवादी व्यवस्था की रखेल हो चुका है ?
क्या #मीडिया कोठे की #वेश्या बन चुका है?
 ये सवाल बड़े गंभीर हैं क्योंकि मैं खुद मीडिया से जुड़ा हुआ हूँ इसलिए ये सवाल और भी गंभीर हो जाते हैं, क्योंकि यह सवाल मैं किसी और पर नहीं उठा रहा यह सवाल मैं अपने आप पर ही उठा रहा हूँ एक तरह से।
मैं उतना बड़ा पत्रकार नहीं हूँ कि टेलीविजन चैनल पर खड़ा होकर के इन सब बातों को बोलूं ।
 कोई बोलेगा भी नहीं क्योंकि जब मैं आपको लिस्ट बताऊंगा कि चैनलों के मालिक कौन है तो आप भी सोच कर हैरान रहेंगे कि बड़े-बड़े पत्रकारों के नाम टेलीविजन चैनल पर देखते हैं और सोचते हैं कि शायद इन चैनलों की टेलीविजन चैनलों के मालिक भी यही होंगे और यह पत्रकार ही खबरें तय करते होंगे, नहीं ऐसा नही है पत्रकार कभी भी कतई खबरें तय नहीं करते। यह पूरा प्रोसेस होता है, प्रबंधन खबरों को तय करता है कौन सी खबर दिखाई जानी है , कौन सी खबर नहीं दिखाई जानी ।
TRP का तो मामला है ही कि #TRP की अंधी दौड़ चल रही है। इसके अलावा भी और भी बहुत सारे दबाव होते हैं कभी सत्ता पक्ष का तो कभी विपक्ष का और इस समय जो मीडिया की भूमिका है वह इस तरह से है जिस तरह से एक पूंजीवादी आदमी की कोई दूसरी रखेल हो।
मैं आपको बताऊंगा दोस्तों कि मीडिया में आज कौन-कौन से प्रमुख चैनल है व इसके मालिकाना हक किस-किस के पास हैं।
सबसे पहले मैं आपको बताता हूँ आज तक टेलीविजन चैनल के बारे में, ये #इंडिया न्यूज ग्रुप चैनल है जिसके संचालनकर्ता धर्ता जो है वो #अरुण पूरी जी हैं, अरुण पूरी वैसे पेशे से पत्रकार ही हैं।
दूसरा बड़ा चैनल है देश में #ABP न्यूज कुछ समय पहले तक ABP News उसका नाम स्टार न्यूज हुआ करता था तब इसमें ज्यादा हिस्सेदारी थी स्टार न्यूज की, इसका नाम जो है स्टार न्यूज होता था। अरसे बाद कुछ समय पहले ही इस चैनल का नाम एबीपी न्यूज हो गया क्योंकि ABP अनंत बाजार पत्रिका ने इसका मेजर शेयर स्टॉक था, इसने अपने पास रख लिया।  इस चैनल को चलाती है #अभिजीत सरकार जो कि पश्चिम बंगाल की पुष्ट भूमि से आते हैं जो टेलीविजन से भी जुड़े रहे है।
तीसरा बड़ा चैनल है देश का #India TV, India TV की स्थापना 20 मई 2004 को हुई थी और जिसको होस्ट करते हैं आज की तारीख में #रजत शर्मा, #ऋतु धवन को तो आप जानते ही हैं , ये भी पेशे से पत्रकार हैं ।
एक चैनल और है News24,
 News24 के जो मालिक है उनके बारे में दिलचस्प जानकारी देता हूँ, केंद्रीय मंत्री जो है श्री रवि शंकर प्रसाद जी उनकी बहन है #अनुराधा प्रसाद और #राजीव शुक्ला जो #कांग्रेस के नेता हैं ये दोनों मिलकर के इस चैनल को चलाते हैं ।
क्रिकेट एसोसिएशन से भी, बीसीसीआई से भी जुड़े रहे राजीव शुक्ला जी।
 वैसे राजीव शुक्ला जी की पहचान एक पत्रकार के तौर से शुरुआत होती है लेकिन वो कब इतने बड़े ग्रुप के मालिक बन जाते हैं ये अपने आप में एक सवाल है।
तीसरा बड़ा घराना है जो है ZeeNews,
# ZeeNews के जो मालिक है डॉक्टर सुभाष चंद्रा एस्सेल ग्रुप ही Zee News चैनल को चलाता है Zee News के अलावा और भी Zee हिंदुस्तान व और भी कई सारे चैनल है जो एस्सल ग्रुप की तरफ से चलाए जाते हैं और जिनके मालिक है #डॉक्टर सुभाष चंद्रा।
डॉक्टर सुभाष चंद्रा इन दिनों राज्यसभा के मेंबर हैं, सभी जानते हैं कि #हरियाणा से #राज्यसभा मेंबर चुने गए थे वो और भाजपा ने उन्हें समर्थन दिया था।
वैसे वो निर्दलीय तौर पर राज्यसभा के सदस्य चुने गए थे और ये जो Zee ग्रुप है वो उनका उनके मालिकाना हक वाली कंपनी है।
तीसरी बड़ी कंपनी है #इंडिया न्यूज। इंडिया न्यूज जो है वो है विनोद शर्मा, यानी #मनु शर्मा के जो पिताजी है विनोद शर्मा, हरियाणा के मंत्री भी रहे केंद्र में भी वो मंत्री रहे, कार्तिक शर्मा जो विनोद शर्मा जी का बेटा हे वो इस न्यूज चैनल को चलाता है।
और एक न्यूज चैनल है हमारे देश में न्यूज 18 इस न्यूज चैनल पर जो दबदबा है जो रुतबा है या इस न्यूज का जो मालिकाना हक है वो है रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास। आप चैनल खोलिएगा जब आप टेलीविजन खोलते हैं तो सबसे पहले न्यूज इंडिया TV फिर न्यूज 18 फिर ABP News फिर इस तरह से आप चैनलों की रिमोट पर हाथ रखते रखते चैनल आगे बढ़ते जाते हैं। तो ये जो चैनल है ये कार्तिक शर्मा इसको चला रहे हैं ।
इसके अलावा एक  चैनल और है NDTV इंडिया।  #NDTV इंडिया की स्थापना 1988 में हुई थी जो कि मैंने नेट से चेक किया है और इसको चलाने वाले हैं #प्रणव राय और उसकी पत्नी #राधिका राय और चेयर पर्सन और उनके मालिक का नाम दिया है विधान सिंह जो कि NDTV इंडिया के बारे में बताया जा रहा है।
आज सवाल यह है कि क्या ये चैनल निष्पक्ष है ??
 बड़ा सवाल आपके सामने ये भी उठता होगा कि जब आप टेलीविजन पर रिमोट पर हाथ दबाते होंगे न्यूज चैनल की तरफ तो जब भी आप टेलीविजन खोलते हैं तो आपके मन में ये बड़ा सवाल उठता होगा, क्या ये चैनल वही दिखा रहा है जो आप देखना चाहते हैं ?
 या चैनल अपना एजेंडा चला रहे हैं, ये सवाल क्यों उठ रहे हैं ?
ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि जो कुछ आप देखना चाहते हैं वो ये चैनल दिखाना नहीं चाहते। अगर ऐसा होता तो आपके मन में ये शंका ये सवाल कतई नहीं उठते। इसलिए आज सोशल मीडिया पर सबसे बड़ा जो सवाल है वो मीडिया पर ही उठ रहा है ।
मैं रोज देखता हूँ आप भी देखते होंगे कि मीडिया रोज ये दिखाता है कि वायरल सच।  इसका वायरल सच क्या है किसका वायरल सच क्या है। लेकिन मीडिया कभी ये दिखाने की कोशिश नहीं करता कि उनका (मीडिया का) अपना वायरल सच क्या है।
आज #मीडिया को #चोर , #भ्रष्ट #बेईमान न जाने किन किन तरीकों से नवाजा जा रहा है और जब मैं  इन चीजों को देखता हूँ तो कई बार व्यथित भी हो जाता हूँ, दुखी भी होता हूँ क्योंकि मैं भी मीडिया से जुड़ा हुआ हूं और ये पीड़ा सहनी पड़ती है कि जब लोग कहते हैं कि मीडिया #बिकाऊ है । मीडिया बिक गया है और  ये सवाल मीडिया को सोचना चाहिए।
 क्या उनके सामने यह तस्वीर नहीं जाती की उनके बारे में क्या कहा जा रहा है ? और आज देश में जो हालात है मीडिया को लेकर । ये बातें क्यों होती है ? क्योंकि मीडिया में बहुत सारे पूंजीवादी व्यवस्था के हाथों खेल रहे हैं, वो जो ग्रुप है वो जो प्रबंधन है ,वो तय करता है कि आप कौन सी खबर दिखाएंगे कौन सी खबर नहीं दिखाएंगे।
ये आज से नहीं है , ये काफी समय से ऐसा होता आ रहा है, चला आ रहा है कि आज कौन सी खबर कौन तय करेगा।
 हम पत्रकार है, मैं बड़ी सच्चाई के साथ बड़ी ईमानदारी के साथ यह कहना चाहता हूँ कि पत्रकार के पास ये अधिकार नहीं है कि क्या खबर चलाई जाए, क्या खबर दिखाई जाए ??
 शुक्र है मार्क जुकरबर्ग का जिसने हमें facebook पर एक मंच दे दिया , इसलिए हम कुछ भी बताते हैं , कोई भी वीडियो अपलोड करते हैं , कुछ भी लाइव चला देते हैं। ये स्वतंत्रता थोड़ी बची है जबकि मीडिया की जो स्वतंत्रता टेलीविजन चैनल हो या अखबार हो उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं और यह सवाल हमने खुद ही अपने ऊपर खड़े किए हैं क्योंकि हम उतने निष्पक्ष नहीं है जितने कि लोग सोचते हैं।
लोगों को लगता है कि हमारे सामने महंगाई का मुद्दा उठाया जाएगा लेकिन हम नहीं उठाते। हम क्या मुद्दे उठाते हैं, तीन तलाक ट्रिपल तलाक पर रहता है। तीन चार मौलानाओं को बुला लिया जाता है इधर से बीजेपी के एक लीडर को उधर से कांग्रेस के एक लीडर को इधर से सीपीआई के एक लीडर को उधर से आम आदमी पार्टी के लीडर को यानी व्यवस्था को इस तरह से कर दिया जाता है कि तमाम व्यवस्था को सिर्फ यह पांच सात दस लोग ही चलाने वाले हैं। आम लोगों से इस बारे में कोई राय नहीं ली जाती कोई मशवरा नहीं किया जाता इसलिए भी मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं।
आज कल इन दिनों हिंदू मुसलमान का एक बड़ा फसाद दिखाया जा रहा है और रोहिंग्या मुसलमानों को ले करके भी TRP और अभी थोड़े दिन पहले बाबा राम रहीम का जो प्रकरण हुआ गुरमीत राम रहीम का, उसको लेकर के तो मीडिया की भूख मिट ही नहीं रही। TRP की भूख इस तरह से हासिल है कि जो काम हुआ ही नहीं उसको एकदम से फ़्लैश किया।
 यानी आप देखिए इतनी जल्दी थी मीडिया चैनलों को फैसले को लेकर कि मीडिया चैनलों ने अपने आप ही सजा सुना दी 10 साल की। जज ने सजा सुनाई 10+10 की लेकिन मीडिया में ब्रेकिंग न्यूज आई,सब चैनलों पर एक ही न्यूज थी कि बाबा को सजा 10 साल की..
यानी कोई भी सब्र नहीं करना चाहता की फैक्ट लाया जाए।
हम भी इसमें शामिल हैं हम भी जब मौके पर जाते हैं देखते हैं कि चेन मिसिंग हो गई ये भी पूछने की कोशिश नहीं करते भई चेन सोने की थी, असली थी, नकली थी, हम ये भी कोशिश नहीं करते कि दो लाशें  पानी में बह रही है, किसकी है औरत की है,हम फटाफट कोशिश करते हैं आपस में कोई जल्दी से जल्दी खबर को ब्रेक करने की, हमारे अंदर इतनी जल्दी होती है या होड़ होती है कि फटाफट खबर को ब्रेक कर दिया जाए उसके फैक्ट्स बाद में आते रहते हैं तो हम बाद में कॉमेंट्स में या उस पोस्ट में एडिट करके लिखते हैं। ये आज की विडंबना है। असलियत यही है,हकीकत यही है कि मीडिया की वो भूमिका सामने नहीं आ रही जिस भूमिका की लोग हमसे उम्मीद करते हैं।
 मैं उसमें शामिल हूँ और सबसे बड़ा कटाक्ष भी मैं आज खुद पर कर रहा हूँ, मैं किसी दूसरे पर उंगली नहीं उठा रहा, अगर कुछ साथियों को लगे कि ये मीडिया पर उंगली उठा रहा है या ये अपने आप को साफ चरित्र का पत्रकार बताने में लगा हुआ है तो दोस्तों ऐसा कतई नहीं है।
आप भी अपने अंदर झांकिए, मैंने तो झांका ही है और मुझे ये लगता है कि मीडिया उतना निष्पक्ष उतना साफ इतना बेदाग नहीं है।
हम कोठे पर एक वेश्या की तरह हैं,  हम पूंजीवादी लोगों की रखेल की तरह हैं और इसलिए आज हम पर सबसे बड़े सवाल उठ रहे हैं क्योंकि हमने खुद को मंडी के रूप में तब्दील कर लिया है। किसी की कीमत इतनी किसी की कीमत इतनी।
दोस्तों मीडिया को मंडी होने से बचाइए, हमारा साथ दीजिए इस खबर को दूर-दूर तक पहुंचाइए अगर आप इस खबर को दूर-दूर तक पहुंचाने में सफल रहे, कामयाब रहे तो शायद कारगिल पर में जो जा करके जो सियाचिन में जाकर के अपने देश भक्ति की भावना दिखाते हैं टेलीविजन चैनलों पर छाती ठोक करके अपने आप को राष्ट्रभक्त बताते हैं और कोई ईमानदार बताते हैं ।
कोई सरकार की बखिया उधेड़ रहा है तो कोई सरकार को पॉलिश करने में लगा हुआ है। दोनों ही तरह के लोग हमारे सामने हैं । आपको ही तय करना है कि हमें किसे देखना है किसे नहीं देखना।
मुझे लगता है कहीं मीडिया हाउसेस जो है वो सरकार को चमकाने में लगे हुए हैं और कई मीडिया हाउसेस ऐसे हैं जो बिन देखे ही बिना कोई प्रमाण के सरकार के बखिया उधेड़ने पर लगे हुए हैं। यानी कुछ मीडिया हाउसेस सरकार का समर्थन जुटाने में और कुछ मीडिया हाउसेस यह दिखाने में कि हम सरकार से पावरफुल है।
दोस्तो ऐसा मत कीजिए आप अपने देश के बारे में सोचिए जो सही है उसे सही दिखाइए जो गलत है उसे गलत दिखाइए क्योंकि अगर मीडिया नहीं बचेगा तो मैं यकीन के साथ कह सकता हूँ लोकतंत्र में कुछ नहीं बचेगा।
हम किसी के पांव की जूती ना बने ,हम किसी पूंजीवादी की रखेल ना बने, हम किसी कोठे की वेश्या ना बने और हम पूंजीवादी चौखट पर घुटने ना टेके, माथा ना रगड़े ।
 ये सवाल हमारे सामने है और इसका हल भी हमें ही खोजना है। मेरा आपसे फिर अनुरोध है इस खबर को हो सके तो ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिए ।
 – पत्रकार देवेंद्र गांधी
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India and Hindus are victims of Jihadi terror for a thousand years: DG Banjara

एक हजार साल से भारत और हिन्दू जिहादी आतंक का शिकार हैं : डीजी बंजारा

अक्टूबर 3, 2017

भारत देश ऋषि-मुनियों का देश है, भारतीय संस्कृति सनातन संस्कृति है और यहाँ बसने वाला हर इंसान हिन्दू ही है, #भारत देश #सोने की #चिड़िया था, विदेशी #जिहादी #आक्रमणकारियों की भारत को लूटने और #भारतीय संस्कृति #मिटाने की हमेशा #साजिश रही है वो आज से नहीं है बल्कि हजार साल से चल रही है ।
पहले लुटेरे #मुगल आये जिन्होंने भारत में 700 साल  राज करके भारत को लूटा, जबरन #धर्मपरिवर्तन करवाया, महिलाओं का #बलात्कर किया, बड़ों व बच्चों का #कत्ल किया, #मन्दिर #तोड़ दिये और मस्जिदें बनाई ।
India and Hindus are victims of Jihadi terror for a thousand years: DG Banjara
बाद में #अंग्रेज आये उन्होंने भी 200 साल तक भारत को लूटा और भारतवासियों पर #अत्याचार किया ये सब होते हुए भी खुशी की बात ये है कि इतना अत्याचार होते हुए भी भारत की संस्कृति मिट नही पाई आज भी भारत में प्राचीन गौरवशाली संस्कृति बची हुई है ।
दुःख की यह बात है कि हजार साल अत्याचार सहने के बाद भी हिन्दू जाति-पाति में बंटा है और #बिकाऊ #मीडिया की बात को सच मानकर कर #भारतीय #संस्कृति के आधार स्तंभ #हिन्दू साधु-संतों के खिलाफ #झूठी खबरों को सच मानकर अपने धर्मगुरुओं की ही खिल्ली उड़ाता है और अपने को आधुनिक समझ रहा है ।
वर्तमान में जिहादी आतंकवाद जेल रहा । भारत को लेकर गुजरात के जांबाज पूर्व आईपीएस पुलिस अधिकारी डीजी वंजारा जी ने ट्वीट किया कि

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( भारत में ये जिहादी आतंकवाद कोई आज की समस्या नहीं है, ये हजारों साल पुरानी समस्या है )

आपको बता दें कि यह वही जांबाज #डीजी वंजारा हैं जिन्होंने वर्तमान में प्रधानमंत्री #नरेन्द्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब #आतंकवादियों से #जान #बचाई थी अगर डीजी वंजारा सतर्क नही होते और आतंकवादियों का इनकाउंटर नही करते तो आज इस देश को ऐसे प्रधानमंत्री नही मिलते ।
गुजरात में जब जिहादियों ने आतंक मचाया था, गुजरात में हररोज #हिन्दू-मुस्लिम के #दंगे होते थे, मुस्लिम लतीफ जैसे डॉन बढ़ गये थे हिन्दुओं का जीना मुश्किल हो गया था तब इस वीर जांबाज डीजी वंजारा ने 21 से भी अधिक इन जिहादी आतंकवादियों को इनकाउंटर करके ठिकाने लगा दिया था, गुजरात में आज जितनी शांति है वह श्रेय इन जांबाज पुलिस अधिकारी #डीजी वंजारा जी को ही जाता है ।
गौरतलब है कि #जिहादियों को #रोकने के कारण तत्कालीन #कांग्रेस सरकार ने देशभक्त #वंजारा जी को #षडयंत्र के तहत #फंसाया और नौ साल तक बिना सबूत जेल में रखा।
गुजरात में अभी चुनाव आने वाला है, गुजरात की करोड़ों जनता की निगाहें इन वीर जांबाज डीजी वंजारा जी पर टिकी हैं कि अगले #मुख्यमंत्री #डीजी वंजारा बने यही #अभिलाषा कर रहे हैं क्योंकि वंजारा जी सच्चे देशभक्त हैं, जो जनता और देशहित करने में पीछे कभी नही हटते ।
हजारों सालों से हिन्दुओं के साथ अन्याय हुआ है, आक्रमणकारियों ने भारत का नाश किया है और अब जरुरत है कि हिन्दू एकजुट हों ।
 इतिहास की गलतियों से सीखें और हिन्दू संस्कृति पर हो रहे कुठाराघात को समझें ।
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Media-christian conversion,

र्इसार्इ कट्टरपंथियों ने राष्ट्रध्वज तथा हिन्दू देवता की प्रतिमा जलार्इ, मीडिया ने साधी चुप्पी

अक्टूबर 2, 2017
मिजोरम के लुन्ग्लेर्इ जिले में 21 सितंबर को र्इसार्इ पंथ के कुछ कार्यकर्ताआें द्वारा हिन्दू देवता की प्रतिमा तथा राष्ट्रध्वज जलाने की घटना सामने आर्इ है । उस समय इन कार्यकर्ताआें ने यह भी कहा कि, उन्हें भारत में नहीं रहना है, वे भारत से स्वतंत्रता चाहते हैं । इस घटना से यह तथ्य सामने आया है कि, मिजोरम में अलगाववादी कट्टरपंथियों की ताकत बढ़ रही है ।
प्रारंभ में पुलिस ने इस घटना को दबाकर रखने का प्रयास किया था क्योंकि उन्हें राज्य की शांति में बाधा नहीं डालनी थी, परंतु सोशल मीडिया के माध्यम से जब ये वीडियो सामने आया, तब पुलिस ने अपराधियों की खोज करना प्रारंभ किया । मिजोरम में 87 प्रतिशत लोग र्इसार्इ पंथ के हैं तथा हिन्दू वहां अल्पसंख्यंक हैं । पहले हिन्दू बहुसंख्यक थे पर ईसाईयों ने हिन्दुओं का धर्मांतरण करके ईसाई बना दिया ।
Christian fundamentalists burnt incense of national flag and Hindu deity,The media is silent
यह पढ़कर कुछ सूत्र ध्यान में आते है :
1.कई भोले देशवासी प्रश्न करते हैं कि धर्मपरिवर्तन करने से कोई नुकसान नही होगा लेकिन देश में अल्पसंख्यंक होनेवाले हिन्दू जब बहुसंख्यंक हो जाते हैं, तो उसका परिणाम क्या हो सकता है..??
यह दर्शानेवाला यह आैर एक उदाहरण है ।
 इसी प्रकार आज हिन्दूआें की स्थिति कश्मीर के बाद कर्इ राज्य तथा राज्यों के कुछ जिलों में हो रही है ।
2. भारत में हिन्दूआें पर तथा उनके श्रद्धास्थानों पर धर्मांध जिहादी आक्रमण कर ही रहे हैं,अब उनके साथ धर्मांध र्इसार्इ भी हिन्दूआें के विरूद्ध हिंसापर उतर आए हैं, ऐसा इस घटना से प्रतीत होता है । यह स्थिति रोकने हेतु हिन्दुआें का प्रभावी संगठन होना यही समय की मांग है ।
हिन्दुओं भविष्य में जीवित रहने तथा धर्म एवं राष्ट्र की रक्षा करने हेतु संगठित होकर हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करें ।
3. भारत में इससे पूर्व भी र्इसार्इयों ने हिन्दूआें पर भयंकर अत्याचार किए हैं, जिसका उदाहरण है ‘गोवा इन्क्विजिशन’ । आज भी कर्इ जगह वे हिन्दूआें को प्रलोभन दिखाकर या अन्य मार्गों से धर्मान्तरित कर रहे हैं । गोवा में तो मिशनरियों ने उनका विरोध करने वाले हिन्दू कार्यकर्ताआें पर झूठे आरोप भी लगाए थे तथा कुछ कार्यकर्ताआें पर आक्रमण भी किया था ।
क्या यही है र्इसार्इयों की मानवता ?
 क्या यही है उनका प्रेम ?
4. मिजोरम में आज ये र्इसार्इ हिन्दू देवता की प्रतिमा जला रहे हैं, राष्ट्रध्वज जला रहे हैं तथा भारत से स्वतंत्रता चाहते हैं । पुलिस भी उनपर कड़ी कार्यवाही करने की बजाए इस घटना को दबाने का प्रयास कर रही है । इसलिए इन धर्मांध र्इसार्इ तत्त्वों पर तथा निष्क्रिय पुलिस पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए ।
5. इतनी बडी घटना होने पर भी सेक्युलर मीडिया आैर कार्यकर्ता चुप क्यों है ?
 केवल मुस्लिम या र्इसार्इयों के विरूद्ध कुछ होता है तभी ‘भारत में असहिष्णुता बढ चुकी है’ ऐसा साक्षात्कार इन्हें होता है ?
क्या ऐसी दोगली मीडिया का संपूर्ण बहिष्कार करना चाहिए !!
आप क्या कर सकते हैं..???
1. देशद्रोही मांग करनेवाले मिजोरम के र्इसार्इ कार्यकर्ताआें के विरूद्ध तुरंत कड़ी कार्यवाही हो, यह मांग मिजोरम सरकार तथा केंद्र सरकार से आप कर सकते हैं । इसमें आप इमेल, सोशल मीडिया तथा अन्य मार्गों का उपयोग भी कर सकते है ।
2. अपने शहर / गांव में यदि कोर्इ मिशनरी संस्था हिन्दुआें को लालच देकर उन्हें धर्म-परिवर्तन करने के लिए कह रही हो, तो उसकी शिकायत तुरंत पुलिस में करें ।
3. अपने क्षेत्र में सभी हिंदुओं को र्इसार्इयों द्वारा हो रहे धर्मांतरण के विषय में जागृत करें ।
4. साथ ही कोर्इ भी हिन्दू धर्मांतरण की बलि ना चढें, इसके लिए प्रत्येक हिन्दू धर्मशिक्षा लें । इस विषय में विस्तृत लेख आप यहां पढ सकते हैं आैर उसे अपने मित्र-परिवार को शेयर भी कर सकते हैं : https://www.hindujagruti.org
5. हिन्दू जनजागृति समिति की आेर से धर्म परिवर्तन के विषय में जागृति करने हेतु कुछ ग्रंथ प्रकाशित किए गए है । आप स्वयं इन्हें खरीद सकते है तथा अन्यों को भी यह ग्रंथ पढने हेतु बता सकते है ।
हिन्दू राष्ट्र, असम, कश्मीर, hindus outraged,

भारतीय राज्य कश्मीर और असम में हिन्दुओं का बुरा हाल, अस्तित्व भी भारी संकट में

सितम्बर 30, 2017
पूरे विश्व में अब मात्र 13.95 प्रतिशत हिन्दू ही बचे हैं ! नेपाल कभी एक हिन्दू राष्ट्र हुआ करता था परंतु वामपंथ के वर्चस्व के बाद अब वह भी धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। कई चरमपंथी देश से हिन्दुओं को भगाया जा रहा है, परंतु कोई ध्यान नहीं देता। हिन्दू अपने एक ऐसे देश में रहते हैं, जहाँ के कई हिस्सों से ही उन्हें बेदखल किए जाने का क्रम जारी है, साथ ही उन्हीं के उप-संप्रदायों को गैर-हिन्दू घोषित कर उन्हें आपस में बांटे जाने का षडयंत्र भी जारी है !
The bad situation of Hindus in Indian state, Kashmir and Assam, survival too
अब भारत में भी हिन्दू जाति कई क्षेत्रों में अपना अस्तित्व बचाने में लगी हुई है। इसके कई कारण हैं। इस सच से हिन्दू सदियों से ही मुंह चुराता रहा है जिसके परिणाम समय-समय पर देखने भी मिलते रहे हैं। इस समस्या के प्रति शुतुर्गमुर्ग बनी भारत की राजनीति निश्‍चित ही हिन्दुओं के लिए पिछले 100 वर्षो में घातक सिद्ध हुई है और अब भी यह घातक ही सिद्ध हो रही है। पिछले 70 वर्षो में हिन्दू अपने ही देश भारत के 8 राज्यों में अल्पसंख्‍यक हो चला है। आईए जानते हैं कि, भारतीय राज्यों में हिन्दुओं की क्या स्थिति है . . .
जनसंख्या : भारत में पंथ पर आधारित जनगणना 2001 के आंकडों के अनुसार, देश की कुल जनसंख्या में 80.5 प्रतिशत हिन्दू, 13.4 प्रतिशत मुसलमान, 2.3 प्रतिशत ईसाई हैं जबकि पिछली जनगणना में हिन्दू 82 प्रतिशत, मुसलमान 12.1 प्रतिशत और 2.3 प्रतिशत ईसाई थे। 2011 की जनगणना के अनुसार, देश की कुल जनसंख्या में मुसलमानों का हिस्सा 2001 में 13.4 प्रतिशत से बढकर 14.2 प्रतिशत हो गया है।
1999 से 2001 के दशक की 29 प्रतिशत वृद्धि दर की तुलना 2001-2011 के बीच मुस्लिमों की जनसंख्या वृद्धि दर घटकर 24 प्रतिशत अवश्य हुई किंतु यह अब भी राष्ट्रीय औसत 18 प्रतिशत से अधिक है। देश के जिन राज्यों में मुसलमानों की जनसंख्या सबसे अधिक है, उनमें क्रमश: जम्मू-कश्मीर (68.3 प्रतिशत) और असम (34.2 प्रतिशत) के बाद प. बंगाल (27.01 प्रतिशत) तीसरे स्थान पर आता है जबकि केरल (26.6 प्रतिशत) चौथे स्थान पर है।
कश्मीर में हिन्दू :
जब हम कश्मीर की बात करते हैं तो उसमें एक कश्मीर वह भी है, जो पाकिस्तान के कब्जे में है और दूसरा वह, जो भारत का एक राज्य है। इसमें जम्मू और लद्दाख अलग से हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को मिलाकर एक राज्य गठित होता है। यह संपूर्ण क्षेत्र स्वांतंत्रता के पहले महाराजा हरिसिंह के शासन के अंतर्गत आता था।
2011 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू और कश्मीर की कुल जनसंख्या 125.41 लाख थी। उसमें 85.67 लाख मुस्लिम थे यानी कुल जनसंख्या के 68.31 प्रतिशत, जैसे कि,1961 में थे, वहीं 2011 में हिन्दुओं की जनसंख्या 35.66 लाख तक पहुंच गई। कुल जनसंख्या का 28.43 प्रतिशत ! इन आंकडों में कश्मीर में हिन्दुओं की जनसंख्‍या घटी जबकि जम्मू में बढी होना जाहिर नहीं हुआ ! अगर पुराने आंकडों की बात करें तो 1941 में संपूर्ण जम्मू और कश्मीर में मुस्लिम जनसंख्या 72.41 प्रतिशत और हिन्दुओं की जनसंख्या 25.01 प्रतिशत थी।
1989 के बाद कश्मीर घाटी में हिन्दुओं के साथ हुए नरसंहार से कश्मीरी पंडित और सिख भी वहां से पलायन कर गए। कश्मीर में वर्ष 1990 में हथियारबंद आंदोलन शुरू होने के बाद से अब तक लाखों कश्मीरी पंडित अपना घर-बार छोडकर चले गए। उस समय हुए नरसंहार में हजारों पंडितों का कत्लेआम हुआ था। बडी संख्या में महिलाओं और लडकियों के साथ बलात्कार हुए थे।
कश्मीर में हिन्दुओं पर हमलों का सिलसिला 1989 में जिहाद के लिए गठित जमात-ए-इस्लामी ने शुरू किया था जिसने कश्मीर में इस्लामिक ड्रेस कोड लागू कर दिया। आतंकी संघटन का नारा था- ‘हम सब एक, तुम भागो या मरो !’ इसके बाद कश्मीरी पंडितों ने घाटी छोड दी। करोडों के मालिक कश्मीरी पंडित अपनी पुश्तैनी जमीन-जायदाद छोडकर शरणार्थी शिविरों में रहने को मजबूर हो गए। हिंसा के प्रारंभिक दौर में 300 से अधिक हिन्दू महिलाओं और पुरुषों की हत्या हुई थी !
घाटी में कश्मीरी पंडितों के बुरे दिनों की शुरुआत 14 सितंबर 1989 से हुई थी। कश्मीर में आतंकवाद के चलते लगभग 7 लाख से अधिक कश्मीरी पंडित विस्थापित हो गए और वे जम्मू सहित देश के अन्य हिस्सों में जाकर रहने लगे। कभी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के एक क्षेत्र में हिन्दुओं और शियाओं की तादाद बहुत होती थी परंतु वर्तमान में वहां हिन्दू तो एक भी नहीं बचा और शिया समय-समय पर पलायन करके भारत में आते रहे जिनके आने का क्रम अभी भी जारी है !
विस्थापित कश्मीरी पंडितों का एक संघटन है ‘पनुन कश्मीर’ ! इसकी स्थापना सन 1990 के दिसंबर माह में की गई थी। इस संघटन की मांग है कि, कश्मीर के हिन्दुओं के लिए कश्मीर घाटी में अलग राज्य का निर्माण किया जाए। पनुन कश्मीर, कश्मीर का वह हिस्सा है, जहां घनीभूत रूप से कश्मीरी पंडित रहते थे। परंतु 1989 से 1995 के बीच नरसंहार का एक ऐसा दौर चला कि, पंडितों को कश्मीर से पलायन होने पर मजबूर होना पडा !
आंकडों के अनुसार, इस नरसंहार में 6,000 कश्मीरी पंडितों को मारा गया। 7,50,000 पंडितों को पलायन के लिए मजबूर किया गया। 1,500 मंदिर नष्ट कर दिए गए। कश्मीरी पंडितों के 600 गांवों को इस्लामी नाम दिया गया। केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों के अब केवल 808 परिवार रह रहे हैं तथा उनके 59,442 पंजीकृत प्रवासी परिवार घाटी के बाहर रह रहे हैं। कश्मीरी पंडितों के घाटी से पलायन से पहले से पहले वहां उनके 430 मंदिर थे। अब इनमें से मात्र 260 सुरक्षित बचे हैं जिनमें से 170 मंदिर क्षतिग्रस्त हैं !
असम में हिन्दू :
असम कभी 100 प्रतिशत हिन्दू बहुल राज्य हुआ करता था ! हिंदू शैव और शाक्तों के अलावा यहां हिन्दुओं की कई जनजाति समूह भी थे। यहा वैष्णव संतों की भी लंबी परंपरा रही है। बौद्ध काल में जहां यहां पर बौद्ध, मुस्लिम काल में लोग मुस्लिम बने वहीं अंग्रेज काल में यहां के गरीब तबके के लोगों को हिंदू से ईसाई बनाने की प्रक्रिया जारी रही !
2001 की जनगणना के अनुसार, अब यहां हिन्दुओं की संख्या 1,72,96,455, मुसलमानों की 82,40,611, ईसाई की 9,86,589, और सिखों की 22,519, बौद्धों की 51,029, जैनियों की 23,957 और 22,999 अन्य धार्मिक समुदायों से संबंधित थे। असम में मुस्लिम जनसंख्या 2001 में 30.9 प्रतिशत थी जबकि 2011 में बढकर वह 34.2 प्रतिशत हो गई। इसमें बाहरी मुस्लिमों की संख्‍या भी बताई जाती है।
असम में 27 जिले हैं जिसमें से असम के बारपेटा, करीमगंज, मोरीगांव, बोंगईगांव, नागांव, ढुबरी, हैलाकंडी, गोलपारा और डारंग 9 मुस्लिम बहुल जनसंख्यावाले जिले हैं, जहां आतंक का राज कायम है ! यहां बांग्लादेशी मुस्लिमों की घुसपैठ के चलते राज्य के कई क्षेत्रों में स्थानीय लोगों की जनसंख्या का संतुलन बिगड गया है। राज्‍य में असमी बोलनेवाले लोगों की संख्‍या कम हुई है। 2001 में 48.8 प्रतिशत लोग असमी बोलते थे जबकि अब इनकी संख्‍या घटकर अब 47 प्रतिशत रह गई है !
1971 के खूनी संघर्ष में पूर्वी बंगाल (बांग्लादेश) के लाखों मुसलमानों को पडोसी देश भारत के पश्‍चिम बंगाल, पूर्वोत्तर राज्य (असम आदि) में और दूसरी और म्यांमार (बर्मा में) शरण लेनी पडी ! युद्ध शरणार्थी शिविरों में रहनेवाले मुसलमानों को सरकार की लापरवाही के चलते उनके देश भेजने का कोई उपाय नहीं किया गया। इसके चलते इन लोगों ने यहीं पर अपने पक्के घर बनाना शुरू कर दिए और फिर धीरे-धीरे पिछले चार दशक से जारी घुसपैठ के दौरान सभी बांग्लादेशियों ने मिलकर भूमि और जंगलों पर अपना अधिकार जताना शुरू कर दिया !
धीरे-धीरे बांग्लादेशी मुसलमानों सहित स्थानीय मुसलमानों ने (बीटीएडी में) बोडो हिन्दुओं की खेती की 73 प्रतिशत जमीन पर कब्जा कर लिया अब बोडो के पास केवल 27 प्रतिशत जमीन है ! सरकार ने वोट की राजनीति के चलते कभी भी इस सामाजिक बदलाव पर ध्यान नहीं दिया जिसके चलते बोडो समुदाय के लोगों में असंतोष पनपा और फिर उन्होंने हथियार उठाना शुरू कर दिए। यह टकराव का सबसे बडा कारण है !
25 मार्च 1971 के बाद से लगातार अब तक असम में बांग्लादेशी हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही वर्गों का आना लगा रहा। असम ने पहले से ही 1951 से 1971 तक कई बांग्लादेशियों को शरण दी थी परंतु 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान और उसके बाद बांग्लादेश के गठन के बाद से लगातार पश्‍चिम बंगाल और असम में बांग्लादेशी मुस्लिम और हिन्दू शरणार्थियों की समस्या जस की तस बनी हुई है !
असम के लोग अब अपनी ही धरती पर शरणार्थी बन गए हैं। असम के इन लोगों में जहां हिन्दू जनजाति समूह के बोडो, खासी, दिमासा अपना अस्तित्व बचाने के लिए लड रहे हैं वहीं अन्य स्थानीय असमी भी अब संकट में आ गए हैं और यह सब हुआ है भारत की वोट की राजनीति के चलते ! यहां माओवादी भी सक्रिय है जिनका संबंध मणिपुर और अरुणाचल के उग्रवादियों के साथ है। उन्हें नेपाल और बांग्लादेश के साथ ही भारतीय वामपंथ से सहयोग मिलता रहता है !
आधुनिक युग में यहां पर चाय के बाग में काम करनेवाले बंगाल, बिहार, उडीसा तथा अन्य प्रांतों से आए हुए कुलियों की संख्या प्रमुख हो गई जिसके चलते असम के जनजाती और आम असमी के लोगों के जहां रोजगार छूट गए वहीं वे अपने ही क्षेत्र में हाशिए पर चले गए। इसी के चलते राज्य में असंतोष शुरू हुआ और कई छोटे-छोटे उग्रवादी समूह बनें। इन उग्रवाद समूहों को कई दुश्मन देशों से सहयोग मिलता है ! वोट की राजनीति के चलते कांग्रेस और सीपीएम ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को असम, उत्तर पूर्वांचल और भारत के अन्य राज्यों में बसने दिया। बांग्लादेश से घुसपैठ कर यहां आकर बसे मुसलमानों को कभी यहां से निकाला नहीं गया और उनके राशन कार्ड, वोटर कार्ड और अब आधार कार्ड भी बन गए ! दशकों से जारी इस घुसपैठ के चलते आज इनकी जनसंख्या असम में ही 1 करोड के आसपास है, जबकि पूरे भारत में ये यह फैलकर लगभग साढे तीन करोड के पार हो गए हैं ! यह भारतीय मुसलमानों में इस तरह घुलमिल गए हैं कि, अब इनकी पहचान भी मुश्किल होती है !
असम का एक बडा जनसंख्या वर्ग राज्य में अवैध मुस्लिम बांग्लादेशी घुसपैठियों का है जो अनुमान से कहीं अधिक है और जो बांग्ला बोलता है। राज्य के अत्यधिक हिंसा प्रभावित जिलों कोकराझार व चिरांग में बडी संख्या में ये अवैध मुस्लिम बांग्लादेशी घुसपैठी परिवार रहते हैं जिन्होंने स्थिति को बुरी तरह से बिगाड़ दिया है !
बांग्लादेशी घुसपैठिएं असम में भारत की हिन्दू अनुसूचित जाति एवं अन्य हिन्दुओं के खेत, घर और गांवों पर कब्जा करके हिन्दुओं को भगाने में लगे हुए हैं। कारबी, आंगलौंग, खासी, जयंतिया, बोडो, दिमासा एवं 50 से ज्यादा जनजाति के खेत, घर और जीवन पर निरंतर हमलों से खतरा बढता ही गया जिस पर अभी तक ध्यान नहीं दिया गया। घुसपैठियों को स्थानीय सहयोग और राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है !
शिविर :
असम में जातीय हिंसा प्रभावित जिलों में बनाए गए 300 से ज्यादा राहत शिविरों में चार लाख शरणार्थियों की जिंदगी बदतर हो गई है ! कोकराझार के बाहर जहां बोडो हिन्दुओं के शिविर हैं वहीं धुबरी के बाहर बांग्लादेशी मुस्लिमों के शिविर है। कोकराझार, धुबरी, बोडो टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेटिव डिस्ट्रिक (बीटीएडी) और आसपास के क्षेत्रों में फैली हिंसा के कारण से अपने घर छोडकर राहत शिविरों में पहुंचे लोग यहां भी भयभीत हैं शिविरों में शरणार्थियों की जिंदगी बद से बदतर हो गई है। शिविरों में क्षमता से ज्यादा लोगों के होने से पूरी व्यवस्था नाकाम साबित हो रही हैं। दूसरी ओर लोगों के रोजगार और धंधे बंद होने के कारण वह पूरी तरह से सरकार पर निर्भर हो गए हैं !
कहां कितने बांग्लादेशी :
2001 की आयबी की एक खु‍फिया रिपोर्ट के अनुसार, लगभग डेढ करोड से अधिक बांग्लादेशी अवैध रूप से रह रहे हैं जिसमें से 80 लाख पश्चिम बंगाल में और 50 लाख के लगभग असम में, बिहार के किसनगंज, साहेबगंज, कटियार और पूर्णिया जिलों में भी लगभग 4.5, देहली में 13 लाख, त्रिपुरा में 3.75 लाख और इसके अलावा नागालैंड व मिजोरम भी बांग्लादेशी घुसपैठियों के किए शरणस्थली बने हुए हैं !
खुद को कहते हैं भारतीय :
1999 में नागालैंड में अवैध घुसपैठियों की संख्या जहाँ 20 हजार थी वहीं अब यह बढकर 80 हजार के पार हो गई है ! असम के 27 जिलों में से 8 में बांग्लादेशी मुसलमान बहुसंख्यक बन चुके हैं ! सर्चिंग के चलते अब बांग्लादेशी घुसपैठिए उक्त जगहों के अलावा भारत के उन राज्यों में भी रहने लगे हैं जो अपेक्षाकृत शांत और संदेह रहित है जैसे मध्यप्रदेश के भोपाल, इंदौर, गुजरात के बडौदा, अहमदाबाद, राजस्थान के जयपुर और उदयपुर, उडीसा, अंध्राप्रदेश आदि।
देश के अन्य राज्यों में मुस्लिमों के बीच छुप गए बांग्लादेशी अब खुद को पश्चिम बंगाल का कहते हैं !
स्त्रोत : वेब विश्व
santon ke khilaaf shadyantra

समाज को गुमराह करने वाले लोग संतों का ओज, प्रभाव, यश देखकर जलते रहते हैं

समाज को गुमराह करने वाले लोग संतों का ओज, प्रभाव, यश देखकर जलते रहते हैं
🚩इस संसार में सज्जनों, सत्पुरुषों और संतों को जितना सहन करना पड़ता है उतना दुष्टों को नहीं। ऐसा मालूम होता है कि इस संसार ने सत्य और सत्त्व को संघर्ष में लाने का मानो ठेका ले रखा है। यदि ऐसा न होता तो #मीरा बाई को #विष नही दिया जाता, #गुरु नानक देव को #जेल नही भेजा जाता, #स्वामी दयानंद सरस्वती को #जहर नही दिया जाता और #लक्ष्मणानन्द महाराज की #हत्या नही होती ।
#jUSTICE FOR ASARAM BAPUJI
🚩#स्वामी विवेकानन्द की तेजस्वी और अद्वितिय प्रतिभा के कारण कुछ लोग #ईर्ष्या से जलने लगे। कुछ दुष्टों ने उनके कमरे में एक वेश्या को भेजा। #श्री रामकृष्ण परमहंस को भी #बदनाम करने के लिए ऐसा ही #घृणित प्रयोग किया गया, किन्तु उन वेश्याओं ने तुरन्त ही बाहर निकल कर दुष्टों की बुरी तरह खबर ली और दोनों संत विकास के पथ पर आगे बढ़े। शिर्डीवाले #साँईबाबा, जिन्हें आज भी लाखों लोग नवाजते हैं, उनके हयातिकाल में उन पर भी दुष्टों ने कम जुल्म न किये। उन्हें भी अनेकानेक #षडयन्त्रों का #शिकार बनाया गया लेकिन वे निर्दोष संत निश्चिंत ही रहे।
🚩पैठण के #एकनाथ जी महाराज पर भी दुनिया वालों ने बहुत #आरोप-प्रत्यारोप गढ़े लेकिन उनकी विलक्षण मानसिकता को तनिक भी आघात न पहुँचा अपितु प्रभुभक्ति में मस्त रहने वाले इन संत ने हँसते-खेलते सब कुछ सह लिया। #संत तुकाराम महाराज को तो बाल मुंडन करवाकर गधे पर उल्टा बिठाकर जूते और चप्पल का हार पहनाकर पूरे गाँव में घुमाया, #बेइज्जती की एवं न कहने योग्य कार्य किया। #ऋषि दयानन्द के ओज-तेज को न सहने वालों ने बाईस बार उनको जहर देने का #बीभत्स कृत्य किया और अन्ततः वे नराधम इस घोर पातक कर्म में सफल तो हुए लेकिन अपनी सातों पीढ़ियों को नरकगामी बनाने वाले हुए।
🚩हरि गुरु निन्दक दादुर होई।
जन्म सहस्र पाव तन सोई।।
🚩ऐसे #दुष्ट #दुर्जनों को हजारों जन्म #मेंढक की योनि में लेने पड़ते हैं। ऋषि दयानन्द का तो आज भी आदर के साथ स्मरण किया जाता है लेकिन संतजन के वे हत्यारे व पापी निन्दक किन-किन नरकों की पीड़ा सह रहे होंगे यह तो ईश्वर ही जाने।
🚩#समाज को #गुमराह करने वाले #संतद्रोही लोग संतों का ओज, प्रभाव, यश देखकर अकारण #जलते पचते रहते हैं क्योंकि उनका स्वभाव ही ऐसा है। जिन्होंने संतों को सुधारने का ठेका ले रखा है उनके जीवन की गहराई में देखोगे तो कितनी दुष्टता भरी हुई है!अन्यथा #सुकरात, #जीसस, #ज्ञानेश्वर, #रामकृष्ण, #रमण महर्षि, #नानक और #कबीर जैसे संतों को कलंकित करने का पाप ही वे क्यों मोल लेते? ऐसे लोग उस समय में ही थे ऐसी बात नहीं, आज भी मिला करेंगे।
🚩कदाचित् इसीलिए विवेकानन्द ने कहा थाः “जो अंधकार से टकराता है वह खुद तो टकराता ही रहता है, अपने साथ वह दूसरों को भी अँधेरे कुएँ में ढकेलने का प्रयत्न करता है। उसमें जो जागता है वह बच जाता है, दूसरे सभी गड्डे में गिर पड़ते हैं।
🚩इस संसार का कोई विचित्र रवैया है, रिवाज प्रतीत होता है कि इसका अज्ञान-अँधकार मिटाने के लिए जो अपने आपको जलाकर प्रकाश देता है, संसार की आँधियाँ उस प्रकाश को बुझाने के लिए दौड़ पड़ती हैं। टीका, टिप्पणी, निन्दा, गलच चर्चाएँ और अन्यायी व्यवहार की आँधी चारों ओर से उस पर टूट पड़ती है।
🚩सत्पुरुषों की स्वस्थता ऐसी विलक्षण होती है कि इन सभी बवंडरों (चक्रवातों) का प्रभाव उन पर नहीं पड़ता। जिस प्रकार सच्चे सोने को किसी भी आग की भट्ठी का डर नहीं होता उसी प्रकार संतजन भी संसार के ऐसे कुव्यवहारों से नहीं डरते। लेकिन उन संतों के प्रशंसकों, स्वजनों, मित्रों, भक्तों और सेवकों को इन अधम व्यवहारों से बहुत दुःख होता है।
🚩#आज के युग मे सबसे अधिक #गुमराह करने का काम करी है तो वे है #मीडिया, मीडिया #कलोकल्पित #कहानियां बनाकर जनता में इस तरह की पिरोस रही है कि सज्जन लोग भी उसकी बातों में आकर संतों-महापुरुषों को गलत बोल देते है, अतः उनके भक्त दुःखी, चिंतित नही होकर समाज तक सच्चाई पहुँचाये, एक न एक दिन #सच सामने आयेगा और #झूठी खबरों की #पोल खुल जायेगी ।
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conspiracy against lord buddha

भगवान बुद्ध के साथ भी यही हुआ था

अभी जिन संतों पर आरोप लग रहे हैं उनके भक्त दुःखी न हो, भगवान बुद्ध के साथ भी यही हुआ था
कपिलवस्तु के राजा #शुद्धोदन का युवराज था सिद्धार्थ! यौवन में कदम रखते ही #विवेक और #वैराग्य जाग उठा। युवान पत्नी #यशोधरा और नवजात शिशु #राहुल की मोह-ममता की रेशमी जंजीर काटकर महाभीनिष्क्रमण (गृहत्याग) किया। एकान्त अरण्य में जाकर गहन ध्यान साधना करके अपने साध्य तत्त्व को प्राप्त कर लिया।
conspiracy against lord buddha
🚩एकान्त में तपश्चर्या और ध्यान साधना से खिले हुए इस आध्यात्मिक कुसुम की मधुर सौरभ लोगों में फैलने लगी। अब #सिद्धार्थ भगवान #बुद्ध के नाम से जन-समूह में प्रसिद्ध हुए। हजारों हजारों लोग उनके उपदिष्ट मार्ग पर चलने लगे और अपनी अपनी योग्यता के मुताबिक #आध्यात्मिक यात्रा में आगे बढ़ते हुए #आत्मिक शांति प्राप्त करने लगे। असंख्य लोग बौद्ध भिक्षुक बनकर भगवान बुद्ध के सान्निध्य में रहने लगे। उनके पीछे चलने वाले अनुयायियों का एक संघ स्थापित हो गया।
 🚩चहुँ ओर नाद गूँजने लगे :
 बुद्धं शरणं गच्छामि।
धम्मं शरणं गच्छामि।
संघं शरणं गच्छामि।
🚩श्रावस्ती नगरी में भगवान बुद्ध का बहुत यश फैला। लोगों में उनकी जय-जयकार होने लगी। लोगों की भीड़-भाड़ से विरक्त होकर बुद्ध नगर से बाहर जेतवन में आम के बगीचे में रहने लगे। नगर के पिपासु जन बड़ी तादाद में वहाँ हररोज निश्चित समय पर पहुँच जाते और उपदेश-प्रवचन सुनते। बड़े-बड़े राजा महाराजा भगवान बुद्ध के सान्निध्य में आने जाने लगे।
🚩समाज में तो हर प्रकार के लोग होते हैं। अनादि काल से दैवी सम्पदा के लोग एवं #आसुरी सम्पदा के लोग हुआ करते हैं। बुद्ध का फैलता हुआ यश देखकर उनका तेजोद्वेष करने वाले लोग जलने लगे। संतों के साथ हमेशा से होता आ रहा है ऐसे उन #दुष्ट तत्त्वों ने #बुद्ध को #बदनाम करने के लिए #कुप्रचार किया। विभिन्न प्रकार की युक्ति-प्रयुक्तियाँ लड़ाकर बुद्ध के यश को हानि पहुँचे ऐसी बातें समाज में वे लोग फैलाने लगे। #उन दुष्टों ने अपने #षड्यंत्र में एक #वेश्या को #समझा-बुझाकर #शामिल कर लिया।
🚩वेश्या बन-ठनकर जेतवन में भगवान बुद्ध के निवास-स्थान वाले बगीचे में जाने लगी। धनराशि के साथ दुष्टों का हर प्रकार से सहारा एवं प्रोत्साहन उसे मिल रहा था। रात्रि को वहीं रहकर सुबह नगर में वापिस लौट आती। अपनी सखियों में भी उसने बात फैलाई।
🚩लोग उससे पूछने लगेः “अरी! आजकल तू दिखती नहीं है?कहाँ जा रही है रोज रात को?”
🚩“मैं तो रोज रात को जेतवन जाती हूँ। वे बुद्ध दिन में लोगों को उपदेश देते हैं और रात्रि के समय मेरे साथ रंगरलियाँ मनाते हैं। सारी रात वहाँ बिताकर सुबह लौटती हूँ।”
🚩वेश्या ने पूरा स्त्रीचरित्र आजमाकर #षड्यंत्र करने वालों का साथ दिया । लोगों में पहले तो हल्की कानाफूसी हुई लेकिन ज्यों-ज्यों बात फैलती गई त्यों-त्यों लोगों में जोरदार विरोध होने लगा। लोग बुद्ध के नाम पर फटकार बरसाने लगे। बुद्ध के भिक्षुक बस्ती में भिक्षा लेने जाते तो लोग उन्हें गालियाँ देने लगे। बुद्ध के संघ के लोग सेवा-प्रवृत्ति में संलग्न थे। उन लोगों के सामने भी उँगली उठाकर लोग बकवास करने लगे।
🚩बुद्ध के शिष्य जरा असावधान रहे थे। #कुप्रचार के समय साथ ही साथ सुप्रचार होता तो कुप्रचार का इतना प्रभाव नहीं होता। 
🚩शिष्य अगर निष्क्रिय रहकर सोचते रह जायें कि ‘करेगा सो भरेगा… भगवान उनका नाश करेंगे..’ तो कुप्रचार करने वालों को खुल्ला मैदान मिल जाता है।
🚩#संत के #सान्निध्य में आने वाले लोग #श्रद्धालु, #सज्जन, #सीधे सादे होते हैं, जबकि #दुष्ट प्रवृत्ति करने वाले लोग #कुटिलतापूर्वक #कुप्रचार करने में #कुशल होते हैं। फिर भी जिन संतों के पीछे सजग समाज होता है उन संतों के पीछे उठने वाले कुप्रचार के तूफान समय पाकर शांत हो जाते हैं और उनकी सत्प्रवृत्तियाँ प्रकाशमान हो उठती हैं।
🚩कुप्रचार ने इतना जोर पकड़ा कि बुद्ध के निकटवर्ती लोगों ने ‘त्राहिमाम्’ पुकार लिया। वे समझ गये कि यह व्यवस्थित आयोजन पूर्वक षड्यंत्र किया गया है। बुद्ध स्वयं तो पारमार्थिक सत्य में जागे हुए थे। वे बोलतेः “सब ठीक है, चलने दो। व्यवहारिक सत्य में वाहवाही देख ली। अब निन्दा भी देख लें। क्या फर्क पड़ता है?”
🚩शिष्य कहने लगेः “भन्ते! अब सहा नहीं जाता। संघ के निकटवर्ती भक्त भी अफवाहों के शिकार हो रहे हैं। समाज के लोग अफवाहों की बातों को सत्य मानने लग गये हैं।”
🚩बुद्धः “धैर्य रखो। हम पारमार्थिक सत्य में विश्रांति पाते हैं। यह #विरोध की #आँधी चली है तो शांत भी हो जाएगी। समय पाकर सत्य ही बाहर आयेगा। आखिर में लोग हमें जानेंगे और मानेंगे।”
 🚩कुछ लोगों ने अगवानी का झण्डा उठाया और राज्यसत्ता के समक्ष जोर-शोर से माँग की कि बुद्ध की जाँच करवाई जाये। लोग बातें कर रहे हैं और वेश्या भी कहती है कि बुद्ध रात्रि को मेरे साथ होते हैं और दिन में सत्संग करते हैं।
🚩बुद्ध के बारे में जाँच करने के लिए राजा ने अपने आदमियों को फरमान दिया। अब षड्यंत्र करनेवालों ने सोचा कि इस जाँच करने वाले पंच में अगर सच्चा आदमी आ जाएगा तो #अफवाहों का सीना चीरकर सत्य बाहर आ जाएगा। अतः उन्होंने अपने #षड्यंत्र को आखिरी पराकाष्ठा पर पहुँचाया। अब ऐसे ठोस सबूत खड़ा करना चाहिए कि बुद्ध की प्रतिभा का अस्त हो जाये।
🚩उन्होंने वेश्या को दारु पिलाकर जेतवन भेज दिया। पीछे से गुण्डों की टोली वहाँ गई। वेश्या के साथ बलात्कार आदि सब दुष्ट कृत्य करके उसका गला घोंट दिया और लाश को बुद्ध के बगीचे में गाड़कर पलायन हो गये।
🚩लोगों ने #राज्यसत्ता के द्वार खटखटाये थे लेकिन सत्तावाले भी कुछ #लोग दुष्टों के साथ #जुड़े हुए थे। ऐसा थोड़े ही है कि सत्ता में बैठे हुए सब लोग दूध में धोये हुए व्यक्ति होते हैं।
🚩राजा के अधिकारियों के द्वारा जाँच करने पर वेश्या की लाश हाथ लगी। अब दुष्टों ने जोर-शोर से चिल्लाना शुरु कर दिया।
🚩“देखो, हम पहले ही कह रहे थे। वेश्या भी बोल रही थी लेकिन तुम भगतड़े लोग मानते ही नहीं थे। अब देख लिया न? बुद्ध ने सही बात खुल जाने के भय से वेश्या को मरवाकर बगीचे में गड़वा दिया। न रहेगा बाँस, न बजेगी बाँसुरी। लेकिन सत्य कहाँ तक छिप सकता है? मुद्दामाल हाथ लग गया। इस ठोस सबूत से बुद्ध की असलियत सिद्ध हो गई। सत्य बाहर आ गया।”
🚩लेकिन उन मूर्खों का पता नहीं कि तुम्हारा बनाया हुआ कल्पित सत्य बाहर आया, वास्तविक सत्य तो आज ढाई हजार वर्ष के बाद भी वैसा ही चमक रहा है। आज बुद्ध भगवान को लाखों लोग जानते हैं, आदरपूर्वक मानते हैं। उनका तेजोद्वेष करने वाले दुष्ट लोग कौन-से नरकों में जलते होंगे क्या पता!
🚩अभी जिन #संतों के ऊपर #आरोप लग रहे है उनके भक्त अगर सच्चाई किसी को बताने जाएंगे तो #दुष्ट प्रकृति के लोग तो बोलेंगे ही लेकिन जो #हिंदूवादी और #राष्ट्रवादी कहलाने वाले लोग है वे भी यही बोलेंगे की कि बुद्ध तो भगवान थे, आजकल के संत ऐसे ही है, उनको इतने पैसे की क्या जरूत है? लड़कियों से क्यों मिलते हैं..??? ऐसे कपड़े क्यों पहनते हैं..??? आदि आदि
 🚩पर उनको पता नही है कि पहले ऋषि मुनियों के पास इतनी सम्पत्ति होती थी कि राजकोष में धन कम पड़ जाता था तो ऋषि मुनियों से लोन लिया जाता था और रही कपड़े की बात तो कई भक्तों की भावना होती है तो पहन लेते हैं और लड़कियां दुःखी होती हैं तो उनके मां-बाप लेकर आते हैं तो कोई दुःख होता है तो मिल लेते हैं,उनके घर थोड़े ही बुलाने जाते हैं और भी कई तर्क वितर्क करेगे लेकिन आप सब दुःखी नहीं होना, सबके बस की बात नही है कि महापुरुषों को पहचान पाये, आप अपने गुरूदेव का #प्रचार #प्रसार करते रहें,एक दिन ऐसा आएगा कि निंदा करने वाले भी आपके पास आयेंगे और बोलेंगे कि मुझे भी अपने गुरु के पास ले चलो ।
🚩जय हिन्द
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कवि: हिन्दू संस्कृति को दुश्मनों के हाथों से बचाना ही होगा

अगस्त 23, 2017
धर्मान्तरण,
लव जिहाद, मीडिया और पाश्चात्य संस्कृति द्वारा हिन्दू संस्कृति एवं
हिन्दू धर्म रक्षक संतों पर हो रहे कुठाराघात को लेकर एक कवि ने बहुत ही
सुंदर कविता बनाई है ।
आइये पढ़ते है क्या लिखा है कवि ने…

हिन्दू संस्कृति को दुश्मनों के हाथों से बचाना ही होगा।
हिन्दुत्व की पताका को परचम पर लहराना ही होगा॥
हिन्दू संस्कृति को दुश्मनों के हाथों से बचाना ही होगा।

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बचाना ही होगा……

अत्याचार हो रहे निर्दोष संतों पर अपने ही देश में,
मानवता को शर्मसार कर रहे दुष्ट सज्जन के भेष में,
औकात क्या है इन दुष्टों की, अब इनको दिखाना ही होगा।
हिन्दू संस्कृति को दुश्मनों के हाथों से बचाना ही होगा।
बचाना ही होगा……
धर्मांतरण का चल रहा गौरख धंधा ईसाई मिशनरियों के दम पर,
पैसे, बल व शक्ति का दुरूपयोग कर रहे इस कुकर्म पर,
बन भगतसिंह, आजाद इन गौरों को भगाना ही होगा
हिन्दू संस्कृति को दुश्मनों के हाथों से बचाना ही होगा।
बचाना ही होगा……
लव जिहाद के नाम से फिर मुल्लों ने वार किया,
अपना नाम बदलकर बहनों की अस्मिता पर प्रहार किया,
द्रोपदी की लुटती अस्मिता को कृष्ण बन बचाना ही होगा,
हिन्दू संस्कृति को दुश्मनों के हाथों से बचाना ही होगा।
बचाना ही होगा……
हिन्दू धर्म की मान्यताओं का खूब मीडिया ने मजाक उड़ाया,
दूसरे धर्म की कुमान्यताओं को छुपाकर सिर पर बैठाया,
कमजोर नहीं है हिन्दुत्व ये मीडिया को दिखाना ही होगा,
हिन्दू संस्कृति को दुश्मनों के हाथों से बचाना ही होगा।
बचाना ही होगा……
पाश्चात्य संस्कृति की तरफ लोगों का रूझान बढ़ा,
हिन्दू संस्कृति भूल रहे धार्मिक मान्यताओं का अपमान बढ़ा,
बन विवेकानन्द, आशारामजी बापू विश्व को चेताना ही होगा,
हिन्दू संस्कृति को दुश्मनों के हाथों से बचाना ही होगा।
बचाना ही होगा……
कवि ने सच ही लिखा है कि हिन्दू संस्कृति को दुश्मनों के हाथों से बचाना ही होगा क्योंकि हिन्दू संस्कृति नही बचेगी तो दुनिया में से मानवता ही खत्म हो जाएगी ।
हिन्दू संस्कृति ही ऐसी है जिसने “वसुधैव कुटुम्बकम” के वाक्य को चरितार्थ कर दिखाया है और सर्वे भवन्तु सुखिनः की भावना रखती है ।
ईसाई चाहते कि ईसायत बढ़े, मुसलमान चाहते है मुस्लिम धर्म बढ़े, पारसी चाहते है कि पारसी धर्म का प्रचार, प्रसार हो ।
लेकिन हिन्दू धर्म ही एक ऐसा धर्म है जो चाहता है कि प्राणिमात्र का कल्याण हो, विश्व का मंगल हो ऐसी भावना किसी मत, पंथ या मजहब में नहीं देखने को मिलेगी ।
हिन्दू धर्म पुरातन नहीं सनातन है मुस्लिम मजहब को 1450 साल हुए, ईसाई पंथ को 2017 साल हुए बाकि जो भी धर्म हैं कुछ साल पहले ही बनाये गए हैं लेकिन सनातन (हिन्दू) धर्म जबसे सृष्टि की उत्पति हुई तब से है ।
दूसरे धर्म जैसे कि मुस्लिम धर्म की मोहम्मद पैंगबर ने स्थापना की, ईसाई धर्म की यीशु ने स्थापना की लेकिन हिन्दू धर्म की स्थापना किसी ने नही की ।
हिन्दू धर्म में कई भगवानों के अवतार हो गये लेकिन स्थापना नही की इसलिए हिन्दू धर्म ही सबसे प्राचीन और उत्तम है उसको तोड़ने के लिए दुष्ट प्रकृति के लोग लगे हुए हैं लेकिन सनातन धर्म न कभी मिटा है न कभी मिटेगा ।
लेकिन फिर भी आज सभी हिंदुओं का कर्तव्य है कि जिस धर्म में अपना जन्म हुआ उस पर हो रहे कुठाराघात को रोके ।
जैसे अधर्म बढ़ गया तो श्री कृष्ण ने भी युद्ध किया था तो हिन्दुओं को भी दुष्ट लोगों का नाश कर धर्म की रक्षा करने के लिए आगे आना होगा ।