प्रेस विज्ञप्ति : निर्दोष संत आसारामजी बापू जेल में, दोषी ईसाई पोप बाहर कैसे ?

Press Release: In innocent Asaram Bapu jail,
how guilty Christian Pope out?
🚩संत आसारामजी बापू के सजा के निर्णय से आहत होकर हिन्दू संगठनो कि दिनांक 2 मई 2018 को हिन्दू महासभा भवन दिल्ली में बैठक हुई।
🚩बैठक को संबोधित करते हुए अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चंद्र प्रकाश कौशिकजी ने कहा कि संत आसारामजी बापू कि गिरफ्तारी और सजा इस बात का प्रमाण है कि न्यायालय कि हिन्दू धर्म विरोधी कार्यप्रणाली में कोई कमी नही आई है। संत आसारामजी बापू के पूरे परिवार को पूरी संस्था को प्रताड़ित किया जा रहा है। संत आसारामजी बापू कि गिरफ्तारी और सजा इस बात का प्रमाण है कि 15 अगस्त सन 1947 को भारत कि जनता ने लिखित रूप से ईसाई अंग्रेजो कि गुलामी को स्वीकार कर लिया है। यह हिन्दुओं के लिए चेतावनी है कि यदि भारत की जनता स्वाभिमान और न्याय के साथ  जीना चाहती है तो उसे सन 1857 की स्वतंत्रता की अधूरी लड़ाई को पूरी लड़नी होगी। देश का प्रबुद्ध नागरिक इस अन्याय पूर्ण फैसले पर सवाल जरूर उठाएगा यह उसका संवैधानिक अधिकार और कर्तव्य है। यह बात फैसले कि सुनवाई में स्पष्ट है कि न्यायाधीश महोदय ने संत आसारामजी बापू के वकीलों द्वारा प्रस्तुत लड़की के बालिग होने के प्रमाण पत्रों को संज्ञान में नही लिया। लड़की कि मेडिकल रिपोर्ट में बलात्कार और छेड़खानी के निशान नही पाए गए। स्पष्ट है कि संत आसारामजी बापू के केस में बलात्कार हुआ ही नही है। जो राजनेता बापूजी के चरणों में लोटपोट होते थे वो हिंदुओ कि पीठ में छुरा घोपने वाले साबित हुए, वे इस अत्याचार पर चुप है। सरकार ने पहले भी कई बड़े केसों की फाइलें बन्द की है, जेल में सजा काट रहे आतंकवादियों को छोड़ा है, मुकदमें वापस लिए हैं, सरकार चाहे तो सब कुछ कर सकती है। जिन्होंने श्री रामजी से कपट किया वो संत आसारामजी से क्या निभाएँगे?
🚩हिन्दू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विष्णु गुप्ता ने कहा बापू आसारामजी कि लीगल टीम को न्यायाधीश के विरुद्ध अपील में जाना चाहिए। हिन्दू सेना न्यायाधीश पर कार्यवाही कि मांग करेगी, सरकार को चेतावनी देगी। राष्ट्र व्यापी आंदोलन करेगी। जो अवसरवादी राजनेता है, तथाकथित हिन्दू संगठन हैं, साधु-संत हैं, हिंदूवादी होने का दावा करते हैं, वे बेनकाब हो चुके हैं । कांग्रेस के पप्पू को इस जन्म में यदि प्रधानमंत्री बनना है तो अधर्मी गुरु ईसाई पोप की शरण छोड़कर अहमद पटेल और सोनिया गांधी के साथ बापूजी के आश्रम में सेवा खोजने के लिए जाना चाहिए और अपने पापों का प्रायश्चित करना चाहिये। संत आसारामजी बापू जोधपुर जेल में तो  ईसाई पोप जेल से बाहर कैसे? चर्च के अनाथ आश्रम के 235 शारीरिक मानसिक अपंग बच्चों से 20 वर्ष तक यौन शोषण करने के मामले में ईसाई पोप दोषी पाए गए, सन 2010 से  उनकी गिरफ्तारी कि मांग हो रही है।सन 2008 से उड़ीसा के स्वामी लक्ष्मणानंद के हत्यारे ईसाई पोप कि गिरफ्तारी कि मांग हिन्दू संगठन कर रहे हैं ।
🚩श्री मानिक भाईजी अध्यक्ष धर्म रक्षा दल ने कहा छद्म युद्ध के द्वारा हिंदुओं को समाप्त किया जा रहा है उनका शोषण किया जा रहा है। भारत में खुले आम हिन्दू देवी -देवताओं का अपमान हो रहा है ,गौ मांस खाने की खुली घोषणा हो रही है। संविधान का खुला उल्लंघन करके हिंदुओ कि जेब काटी जा रही है। संत आसारामजी बापू इस दैवी -दानवी युद्ध में निर्णायक बिंदु बन गए हैं क्योंकि पूरे विश्व में उनके करोड़ो अनुयायी हैं ।
🚩दारा सेना अध्यक्ष श्री मुकेश जैन ने कहा कि भारत में न्यायालय, राजनेता, प्रचार तंत्र ईसाई मिशनरी के खरीदी गुलाम है। जब चर्च के नक्सली ईसाई आंतकवादी देशद्रोही टीम अन्ना -केजरीवाल कि धुन पर भारत कि जनता आँख बन्द करके नाच रही थी जब देशद्रोही टीम अन्ना-केजरीवाल भारत का तख्ता पलट करके भारत को लीबिया, सीरिया, मिश्र की तरह कब्रिस्तान, खंडहर बनाने के लिए आंदोलन कर रहे थे तब इन देशद्रोही ताकतों को हमने कुचल दिया था। देशद्रोही बिकाऊ मीडिया टीम अन्ना केजरीवाल को भगवान बना रहा था। ईसाई दानवाधिकार आयोग और इसके बिकाऊ भ्रष्ट न्यायाधीशों को हमने कई बार इनकी औकात दिखाई है, सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसले बदलवाए है। अधर्मी ईसाई पोप धर्मान्तरण का धंधा  कर रहे हैं और भारत में कई तरह के आतंकवाद नाम बदल कर चला रहे हैं, सैनिक पुलिस जवानों की आये दिन हत्या करवा रहे हैं ।
🚩चर्च से कई राजनीतिक दल,पक्ष ,विपक्ष कई हिन्दू संगठन,कई साधु संत भारत की हिन्दू जनता को भ्रमित करने के लिए चलाए जा रहे हैं,असली मुद्दे ही गायब हैं। ये दलित,मुस्लिम मुद्दे बना कर दंगे भड़का रहे हैं ।धर्मान्तरण के विरुद्ध संत आसारामजी बापू उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती रहे हैं, इसलिये उनको झूठे आरोप में फंसाया गया है। बापूजी के आश्रम से  प्रकाशित ब्रह्मचर्य महिमा पुस्तक, दिव्य प्रेरणा प्रकाश पुस्तक को विश्व कि सभी शिक्षा संस्थाओ में अनिवार्य रूप से लागू किया जाये । इसकी मांग हमने संयुक्त राष्ट्र संघ से कई बार की है जिससे बच्चों को ईसाई पादरियों के यौन शोषण से बचाया जा सके ,युवा पीढ़ी को बर्बाद होने से बचाया जा सके। इस बैठक में यूनाइटेड हिन्दू फ्रंट एवम अन्य हिन्दू  संगठन शामिल हुए।

*प्रेषक:*  दीपक वर्मा
(गाज़ियाबाद) जिला अध्यक्ष
धर्म रक्षा दल      09971955430
*कार्यालय पता:*  दीपक वर्मा
(वर्मा इंटर प्राइजेज) रामानुज दयाल मार्केट, opp. मोहन प्लाज़ा गाज़ियाबाद
*जिला:* गाज़ियाबाद (उ.प्र.)

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मीडिया वालों के लिए अलग कानून है? पॉक्सो एक्ट के बावजूद गिरफ्तारी क्यों नहीं ?

20 Apr 2018
🚩 हरियाणा गुरुग्राम की एक छोटी बच्ची का वीडियो एडिट कर, उसे अश्लीलता वाला वीडियो बनाकर इंडिया न्यूज़ के चीफ एडिटर दीपक चौरसिया ने दिखाया, बच्ची के माता-पिता आक्रोशित होकर गुरुग्राम में केस दर्ज करने गए लेकिन पुलिस ने एफआईआर लिखने से मना कर दिया क्योंकि आरोपी दबंग एवं मीडिया से जुड़ा है, बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से एफआईआर दर्ज की गई, उसके बाद भी बच्ची का बयान नही करवाया जा रहा था, दो साल तक पुलिस ने उसके माता-पिता को घुमाया, दो साल के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस ने 164 के तहत बयान दर्ज करवाये।
Have different laws for media persons? hy not arrest the Poxo Act?
🚩 दीपक चौरसिया पर पॉक्सो की धारा लगी हुई है जिसमें तुरन्त गिरफ्तारी का प्रावधान है और जमानत भी मिलना मुश्किल है लेकिन चौरसिया पर शायद कोई कानून लागू नहीं होता । पॉक्सो एक्ट लगने के बावजूद आज तक चौरसिया बाहर मजे से घूम रहा है और इसी एक्ट के तहत हिन्दू सनन्त बापू आसारामजी सालों से जेल में हैं ।
कानून के इस दोगलेपन के कारण जनता में एवं हिन्दू सगठनों में भारी रोष है ।
🚩 जनता व हिन्दू संग़ठनो का कहना है कि क्या कानून सबके लिए एक समान नही है? किसी आम इंसान या कोई हिन्दूनिष्ठ पर केस दर्ज होता है तो आधी रात को गिरफ्तार किया जाता है लेकिन मीडिया से जुड़ा आरोपी है तो उसको गिरफ्तार नही किया जा रहा है ये कैसा दोगलापन है?
🚩 पुलिस प्रशासन द्वारा कार्यवाही नहीं किए जाने के कारण हिन्दू संगठन एवं जनता अपना आक्रोश प्रकट करने एवं आरोपियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग को लेकर महिला थाना गुरुग्राम पहुँची।
🚩 पुलिस थाना पहुंचे संगठनों एवं मीडिया ने इंडिया न्यूज के पदाधिकारियो को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की, साथ ही संगठनों द्वारा पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए गये।
🚩 संगठनों ने कहा कि भारतीय संविधान सबके लिए एक समान है जबकि गुरुग्राम महिला थाना पुलिस पक्षपात कर रही है।साथ ही प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि आरोपी व्यक्ति TV चैनल पर लगातार हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा रहा है और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। जिससे आरोपी खुलेआम बाहर घूम रहा है और पुलिस निष्क्रिय बनी बैठी है।जिसके कारण आरोपियों के हौंसले बुलन्द हैं।आरोपी खुद को संविधान से ऊपर समझ रहे हैं।जिनकी गिरफ्तारी अविलम्ब की जानी चाहिये।
🚩 ट्विटर  पर भी दीपक चौरसिया की गिरफ्तारी को लेकर मांग तेज हुई
🚩 शुक्रवार को ट्वीटर पर इंडिया न्यूज के चीफ एडिटर को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर हजारों यूजर  Deepak Chaurasia पर ट्वीट कर रहे हैं । जो ट्रेंड भारत मे टॉप ट्रेंड में दिख रहा था ।
🚩 आइये आपको बताते है दीपक चौरसिया के खिलाफ यूज़र्स क्या कह रहे हैं….
🚩 1. गार्गी पटेल लिखती है कि आखिर क्यों Deepak Chaurasia नहीं हो रहा है हाजिर ! क्या ये कोर्ट का माखौल नहीं ?? #ArrestCHORasia
🚩 2. नरसिंह प्रजापत ने लिखा कि दिल्ली पुलिस को हर हाल मे Deepak Chaurasia को गिरफ्तार करना होगा क्योंकि वो अब समाज का कैंसर बन चूका है #ArrestCHORasia
🚩 3. प्रेम चौधरी ने लिखा कि हिन्दू सेना, श्री राम सेना, हिन्दू जन जाग्रति मंच, सनातन संस्था, अखिल भारतीय हिन्दू महासभा की माँग #ArrestCHORasia
🚩 4. मेघा अग्रवाल लिखती है कि Deepak Chaurasia पहले से छोटी दामिनी केस में प्रमुख अभियुक्त है अबतक उसके गैंग की गिरफ्तारी क्यों नहीं ? #ArrestCHORasia
🚩 5. संदीप मौर्या लिखता है कि हिंदू संतों के बारे मे झूठी व फर्जी न्यूज बताना यह साबित करता है की Deepak Chaurasia एक भ्रष्ट पत्रकार हैं! #ArrestCHORasia
🚩 6. जया असनानी लिखती है कि Deepak Chaurasia पर POCSO के तहत FIR दर्ज!!
 अभी तक गिरफ्तारी क्यों नही हुई? #ArrestCHORasia
🚩 इस तरीके से हजारों लोग ट्वीट के जरिये दीपक चौरसिया की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे ।
🚩 ट्वीटर पर इस तरीके से कई बार दीपक चौरसिया की गिरफ्तारी की मांग की गई है ।
🚩 गुरुग्राम में आये सभी हिन्दू सगठनों एवं जनता का कहना है कि हिन्दू संतों को आधी रात में बिना सबूत गिरफ्तारी करने वाली पुलिस सबूत होते हुए, कोर्ट का आदेश होते हुए भी मीडिया के मालिकों को गिरफ्तार क्यों नहीं कर रही है ??
🚩 जनता को है इंतजार उस दिन का जिस दिन कानून सबके साथ समानता का व्यवहार करेगा !!
🚩 अब देखना है कि झूठी खबरें दिखाने वाले मीडिया के अधिकारियों की गिरफ्तारी का कोर्ट आदेश मानकर सरकार प्रशासन को आदेश देती है कि नही ???
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हिन्दुओं की आपसी फुट ही हिन्दुओं को कर देगी खत्म…

🚩देश मे 2014 लोकसभा के समय भारत की कुल मतदाता की संख्या 81करोड़ 40 लाख थी । 17 करोड़ यानि वोटिंग के 31 प्रतिशत मतदाता उसमें अधिकांश हिन्दुओं का वोट हासिल कर भाजपा बहुमत में आयी । वही भाजपा के विरुद्ध 69 प्रतिशत लोग ने वोट किया । उनमें एकजुटता नहीं थी इसी कारण विरोध में इतना मतदान होने पर भी भाजपा की सरकार बनी । उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के बाद मुस्लिम समुदाय के नेताओं का मानना है कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ऐतिहासिक सफलता की वजह तमाम हिन्दू जातियों का एक साथ आकर हिन्दू वोट के रूप में परिवर्तित हो जाना रहा, जिसने मुस्लिम मतों के बंटने को अर्थहीन बना दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की झोली में जबरदस्त सफलता डाल दी । हाल ही के चुनाव में विपक्ष द्वारा एकजुट होने पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है ।  अब हिंदुत्व वादियों को ऐसा लग रहा है कि भाजपा अपने मूल हिन्दुत्व को छोड़कर सेक्युलर बनने की राह पर चलने लगा है यही कारण है कि हिन्दुत्व वादी लोगों को किनारा किया जा रहा है । इसके कई उदाहरण है लेकिन ताजा उदाहरण है विश्व हिन्दु परिषद के प्रवीण तोगड़िया । 52 साल बाद चुनाव कराकर उन्हें पद से बेदखल कर दिया गया ।
Hindus will ruin Hindus only
🚩इस बारे में प्रवीण तोगड़िया ने एक प्रेस नोट रिलीज किया है उसमें उन्होंने बताया कि  –  विश्व हिन्दू परिषद के जबरन थोपे गए चुनावो में मतदार सूचि में गड़बड़ी और सरकारी दबाव तंत्र के विरोध में आवाज़ उठाने के बाद आज डॉक्टर प्रवीण तोगड़िया और श्री राघव रेड्डी जी ने अपनी हिंदुत्व की प्रतिबद्धता का पुनरउच्चरण किया। डॉ तोगड़िया ने कहा “पद, प्रतिष्ठा, संपत्ति, सत्ता और स्वार्थ के लिए 10 वर्ष की आयु से और फिर पिछले 4 दशकों  से नहीं निकला था मैं हिंदुत्व के लिए हिंदुओं का सम्मान, सुरक्षा, प्रतिष्ठा पुनःस्थापित करने के लिए घर, करोड़ो की केंसर सर्जरी की मेडिकल प्रेक्टिक्स छोड़कर निकला था। पहले संघ में और हिन्दू सम्मान और सुरक्षा की पुनःस्थापना का ही उद्देश्य 1964 में विहिप ने स्थापना के समय घोषित किया तो बाद में विहिप में कार्य करने गया।
🚩पिछले 3 दशकों से संगठन के अनेकों कर्यो में सम्मिलित होकर, नेतृत्व करके संगठन को आगे बढ़ाया। आज विहिप बजरंग दल दुर्गा वाहिनी के करोड़ो कार्यकर्ता और लाखों समर्थक हम सभी की विचारधारा के प्रति निष्ठा और अथक मेहनत से ही है। उसी विहिप को हिन्दू हितों के लिए नहीं लेकिन सरकारी हितों के लिए दबाव में इस तरह टूटते देखना, विचारधारा की बली चढ़ाकर हजारों हिंदुओं की लाशों पर सत्ता पाए व्यक्तियों के आगे संगठन के कुछ लोगो ने नतमस्तक होना यह देखना भी बहुत दुखदायी है। मुझे विश्वास है कि देश विदेश के हिंदु यह अच्छी तरह अब समझ चुके है। मैं और हमारी विहिप, बजरंग दल, दुर्गा वाहिनी के मेरे करोड़ो हिन्दू साथी अब मेरे साथ ‘हिन्दू ही आगे’ ‘हिन्दू फर्स्ट’  का झंडा लेकर लोकतांत्रिक रीति से हिंदुओं को सुरक्षा और सम्मान देने के कार्य में जुड़ जाएंगे। कलयुग में कुछ लोगो ने स्वार्थ में विचारधारा की बलि चढ़ाई तो भी हम हमारे संस्कार नहीं छोड़ सकते। इसलिए, विश्व हिन्दू परिषद की नई टीम को शुभकामनाएं। अब हम से और आक्रोशित करोड़ो हिंदुओं से सौहार्द बनाकर रखने का काम उनका है। अब समय आया गया है कि हम सभी हिन्दू साथी मिलकर हिंदुओं को दिए वचनों की पूर्ति में तन, मन और धन से लग जाए। विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, दुर्गा वाहिनी, मातृ शक्ति के करोड़ो कार्यकर्ताओं को मैं हृदय से शतशः ऋणी हूँ।उन्होंने बहुत कठिन समय में अबाधित हिंदुत्व निष्ठा से मेरे साथ अथक खड़े रहने का महान कार्य किया है। अयोध्या में भगवान श्री रामजी का भव्य मंदिर, गौवंश हत्या बंदी का राष्ट्रीय कानून, कश्मीर से धारा 370 और 36-A हटाना, काश्मीरी पंडितों का काश्मीर में सुरक्षित पुनर्वशन, बांग्लादेश और रोहिंग्या मुसलमान घुसपैठियों को देश से बाहर करना आदि अनेको मुद्दों पर कार्यकर्ता और हिन्दू साथी हिंदुओं के साथ डटकर कार्य करते रहेंगे ऐसा मुझे विश्वास है। साथ में ही भारत के हिंदुओं के लिए रामराज्य की स्थापना जिसमें किसानों की कर्जमुक्ति, सस्ती गुणवक्ता युक्त शिक्षा, सभी के लिए उत्तम स्वास्थ्य सेवा आदि सभी पर कार्यकर्ता निष्ठा से जुट जाएंगे। सभी हिंदुओं से निवेदन है अब ‘सुरक्षित हिन्दू’ ‘ समृद्ध हिन्दू’ की ओर बढ़े।
🚩“बहुत जल्द हम एक महत्व की और हिंदुओं द्वारा बार बार मुझसे कही गई घोषणा करेंगे। तैयार रहें सभी हिन्दू। – प्रवीण तोगड़िया
🚩अब बड़ी चिंता की बात है अगर हिन्दू एक नहीं हुआ तो आने वाले समय में हिन्दू, हिंदुत्व और हिंदुस्तान नहीं बचेगा। आज भी बिना सबूत सालों से हिंदुनिष्ठ जेल में है उनको ससम्मान रिहा करना चाहिए जैसे कि हिन्दू संत आशाराम बापू, धनंजय देसाई आदि आदि हिन्दू संस्कृति के लिए कार्य करने वालो को बाहर करना चाहिए ।
🚩आज हम आपसे में लड़ते रहेंगे तो हमे कोई भी बचाने नही आएगा जिस सरकार को हिन्दूओं ने तन-मन-धन से कार्य करके लाने का प्रयास किया उनको अगर हटा दिया जायेगा या जेल से मुक्त नही किया जायेगा तो आगे का भविष्य सरकार के लिये भी खतरा बन सकता है इसलिए आपसी मत-भेद भूलकर एक हो जाना चाहिए ।
🚩सनातन धर्म को बचाना है तो हिंदुओं को एकजुट होना पड़ेगा। क्योंकि सनातन धर्म को तोड़ने के लिए देश में अनेको साजिशे चल रही है। समय रहते अगर हिन्दू सचेत नहीं होते हैं, तो पाकिस्तान में जो हाल हिंदुओं की है वही हाल 25 साल बाद भारत में भी हो जाएगा। हिंदुओं की ताकत खुद हिन्दू भाइयों को नहीं पता हैं। जिस दिन हिन्दू क्षणिक लोभ को छोड़कर एकजुट हो जायेगा सारा जगत उनकी कदमों में होगा।
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आप भी जानिए सेक्युलरिज्म क्या है ? और कितनी हानि कर रहे है हिन्दू खुद ही…

You also know what is secularism? And how
much harm is doing to Hindus themselves
🚩भारतीय इतिहास गौरवशाली रहा है लेकिन इसमें एक बड़ी भारी गलती रही है कि कुछ हिन्दू सेक्युलर बने हुए थे जिसके कारण आज हिन्दू धर्म का पतन हुआ है । प्राचीन इतिहास पढ़ लो हिन्दू राजा पूरे पूथ्वी के सम्राट थे लेकिन कुछ सेक्यूलर बन गए जिसके कारण सिमित कर आज पूरी दुनिया मे हिन्दुओं का दो ही देश बचा है एक भारत और दूसरा नेपाल लेकिन उसमें भी हिन्दू इतने सेकुलर बन गये है कि बोलते है सर्वधर्म समान है इसके कारण आज ईसाई लोग दिन रात धर्मांतरण करवा रहे है और इस्लाम धर्म के लोग ज्यादा बच्चे पैदा करके व लव जिहाद और जबरजस्ती धर्मांतरण करवाकर हिन्दुओं को खत्म करें जा रहे है अगर हिन्दू अभी भी सेक्यूलर बना रहा तो अपने आप को मिटा ही देगा ।
*आपको एक सरल भाषा में सेक्यूलर की छोटी कहानी बताते है*
🚩एक मुस्लिम बच्चे ने अपनी माँ से पूछा “अम्मी, ये सेक्युलरिज्म (धर्म निरपेक्षता) क्या होता है?”
🚩बुर्के में लिपटी महिला ने अपने बेटे को बताया, “बेटे, सेक्युलरिज्म इस देश का वह सिस्टम है जिसमें हिन्दू करदाता जी तोड़ मेहनत कर सरकार को इतना टैक्स चुकाता है जिससे कि हम जैसे अल्पसंख्यकों को फ्री आवास, मदरसों में फ्री शिक्षा, फ्री मेडिकल ट्रीटमेंट आदि सुविधाएँ मिलती रहें!
मंदिरों की हुंडियों का धन हमारे लिए प्रयोग किया जा सके किन्तु मस्जिदों में क्या हो रहा है, उस तरफ कोई आँख उठाकर देखने की भी हिम्मत ना कर सके! हमें कानून का संरक्षण तो मिले किन्तु कोई कानून हम पर लागू नहीं हो! इस प्रकार के जन्नतनुमा माहौल को ही सेक्युलरिज्म कहते हैं!!!”
🚩बच्चा : “लेकिन अम्मी, इससे हिन्दू करदाता नाराज नहीं होते?” बच्चे ने पूछा।
🚩“होते हैं बेटा, किन्तु उनके गुस्से को कुंद करने के लिए हम उनको साम्प्रदायिक बताना शुरू कर देते हैं, ताकि उनको शर्मिंदगी महसूस हो! इस तरह कुछेक अड़ियल हिंदुओं को छोड़कर, बाक़ी सभी हिन्दू इस सेक्यूलरता नाम के जहर को प्रसाद समझ कर ना केवल ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार कर लेते हैं बल्कि उन्हें अपने आपको सेक्युलर कहलवाने में गर्व भी महसूस होता है, तथा वह अपने आपको सेक्युलर सिद्ध करने के प्रयास में हमारे सब कर्मों का आँख मूंदकर समर्थन करते हैं!”
🚩बच्चे ने कहा : इसका मतलब हिन्दू तो बहुत अच्छे हैं!
🚩बुर्के वाली महिला ने कहा, अच्छे नहीं बेवकूफ हैं, जो अपना हक छोड़कर हमारे बोझ को उठाते हैं!
🚩बच्चे ने अपनी समझ से कहा, लेकिन मम्मी हमें अल्पसंख्यक कहते हैं, सुनने में अच्छा नहीं लगता!
🚩महिला ने कहा, तू चिंता मत कर बेटे, इसी सेक्युलरिज्म की बदौलत हम बहूसंख्यक हो जाएँगे, हमारे लिए कोई रोकटोक नहीं, जितना भी पैदा करो, और एक दिन हिन्दुस्तान में ही नहीं, पूरी दुनिया में राज करेंगे! मैंने तेरे 31 भाई बहन यूँ ही थोड़े न पैदा किए हैं!!!
🚩बच्चे ने कहा, हाँ मम्मी मैं समझ गया, जब हिन्दू बोझ उठाते हैं तो पैदा करने में क्या दिक्कत है!!!
🚩हिन्दुओं के सेक्यूलरता के कारण आज अपने धर्म पर ही कुल्हाड़ी मार रहा है आप देख लो कितना नुकसान कर रहा है, पूरी दुनिया मे सिमट कर अब थोड़े ही बचे है, सेकुलर दिखाने के कारण आज ईसाई तेजी से धर्मांतरण करवा रहे है , मुस्लिम ज्यादा बच्चे पैदा करके और लव जिहाद द्वारा अपनी संख्या बढ़ा रहे है, मंदिरों के पैसे चर्चो एवं मस्जिदों में उपयोग किये जा रहे है और हिन्दू कुछ बोल भी नही सकते कुछ बोलने जाए तो हिन्दू विरोधी मीडिया उनके पीछे पड़ जायेगी जिसके कारण हिन्दू चुप रहते है लेकिन अभी भी हिन्दू सेक्यूलर बन रहे और अपने धर्म के प्रति कट्टर नही बने, एक नही हुए, 4 बच्चे पैदा नही हुए और इन षडयंत्र का विरोध नही किया तो कश्मीर पंडितों की तरह देश के हिन्दुओं का भी हाल हो सकता है ।
🚩सभी हिन्दू कम से कम चार बच्चे तो जरूर पैदा करें एवं उनको सनातन हिन्दू धर्म की शिक्षा जरूर दे और आपके आसपास कोई भी हिन्दू पीड़ित, दुःखी, गरीब हो तो उसकी सहायता जरूर करें जातिवाद छोड़कर एक हो जाये और सेक्यूलरता छोड़ दे जिससे अपने धर्म की रक्षा कर पावोगे ओर धर्म बचेगा तभी हिन्दू बच पायेगा।
🚩धर्मोरक्षति रक्षितः । ‘जो अपने धर्म की रक्षा करता है वह स्वम् रक्षित रहता है ।
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फेक न्यूज़ पर पत्रकारों की मान्यता रद्द की बात आते ही मीडिया व सेक्यूलर तिलमिला उठे

3 Apr 2018
🚩इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया ने आज स्वतंत्रता के नाम पर पैसे और टीआरपी के लिए कई बार झूठ परोसना चालू कर दिया है, कहीं की घटना कहीं पर दिखाने लगे हैं । किसी भी न्यूज को अपने फायदे के अनुसार तोड़-मरोड़ कर दिखाते हैं । आज तो डिजिटल युग है उसमें कुछ भी छेड़छाड़ करके दिखाया जाता है , मीडिया आज उसका भरपूर उपयोग कर रही है । उसमें भी कोई हिंदुत्व का मुद्दा हो या कोई हिंदुत्वनिष्ठ हो तो उसके खिलाफ तो झूठी कहानियाँ जमकर दिखाते हैं ।
Media and Secular Tales came in the wake
of the dissolution of journalists on Fake News
🚩झूठी खबरे दिखाने वाले पत्रकारों की मान्यता रद्द करने की गाइडलाइंस जारी करते ही हल्ला बोल शुरू हो गया, सबको पता है कि जब चोर पकड़ने वाला हो उससे पहले ज्यादा ही शोर मचता है ऐसे अभी जो शोर हो रहा है ऐसे ही हो रहा है जब पत्रकारों में सच्चाई है उनको तो किसी बात का डर ही नही होना चाहिए ।
🚩सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सोमवार को पत्रकारों की मान्यता का संशोधित गाइडलाइन जारी किया। इसमें ‘Fake newa’ से निपटने के लिए कई नए प्रावधानों को शामिल किया गया है। इसमें पत्रकारों की मान्यता खत्म करने जैसे कड़े प्रावधान भी शामिल हैं ।
🚩सरकार की गाइडलाइन मंत्रालय द्वारा जारी बयान मुताबिक अब Fake news  के बारे में किसी तरह की शिकायत मिलने पर यदि वह प्रिंट मीडिया का हुआ तो उसे प्रेस कौंसिल ऑफ इंडिया (PCI) और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का हुआ तो न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (NBA) को भेजा जाएगा। ये संस्थाएं यह तय करेंगी कि न्यूज Fake है या नहीं.’ यह सुनिश्चित करने के लिए कि ऐसी शिकायत मिलने पर किसी पत्रकार को ज्यादा परेशानी न हो, शिकायत की प्रक्रिया को दोनों एजेंसियों के द्वारा 15 दिन के भीतर निपटाने की व्यवस्था होगी।
🚩इस बारे में खुद सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने ट्वीट पर एक प्रतिक्रिया में कहा है, ‘यह बताना उचित होगा कि Fake news के मामले पीसीआई और एनबीए के द्वारा तय किए जाएंगे, दोनों एजेंसियां भारत सरकार के द्वारा रेगुलेट या ऑपरेट नहीं की जाती हैं।’ 
🚩स्मृति ईरानी ने यह साफ करने की कोशिश की है कि ‘सरकार Fake news की जांच को रेगुलेट या ऑपरेट नहीं करेगी और इसके लिए जो नैतिक आचरण नियम तय किए जाएंगे, वे वही होंगे जो एनबीए और पीसीआई जैसी पत्रकारों की संस्थाओं के हैं।’ 
🚩वरिष्ठ पत्रकार सुहासिनी हैदर ट्वीट करती हैं, ‘ सरकार के आज के आदेश के मुताबिक सजा सिर्फ उन्हें मिलेगी जो मान्यता प्राप्त हैं। उन्हें सिर्फ शिकायत के आधार पर ही दंड दे दिया जाएगा, अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा नहीं की जाएगी। मुझे नहीं लगता कि यह उचित है Mam’. इस पर सफाई देते हुए स्मृति ईरानी ने कहा, ‘कमिटी में वरिष्ठ अधिकारी, पीसीआई, एनबीए और आईबीएफ के प्रतिनिधि होंगे। जब तक कोई रेगुलेशन नहीं आ जाता, न्यूज पोर्टल्स के लिए नियम लागू नहीं किए जा सकते।’ 
🚩सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के बयान में कहा गया है, ‘यदि एजेंसियां (PCI या NBA) इस बात की पुष्ट‍ि कर देती हैं प्रकाशि‍त या प्रसारित समाचार Fake यानी फर्जी था, तो ऐसे Fake न्यूज को तैयार या प्रसारित करने के लिए जिम्मेदार पत्रकारों की मान्यता पहली गलती पर छह माह के लिए निलंबित कर दी जाएगी। दूसरी गलती पर एक साल के लिए निलंबित और तीसरी गलती पर स्थायी रूप से ऐसे पत्रकारों की मान्यता खत्म कर दी जाएगी।’ 
🚩इसको लेकर मीडिया जगत में विरोध के सुर भी शुरू हो गए हैं। इस मामले में राजनीति भी शुरू हो गई है। 
🚩हालांकि पीएमओ से निर्देश के बाद इन निर्देशों को वापस ले लिया गया है। असल में मौजूदा कानूनों में ही मीडियाकर्मियों द्वारा गुमराह करने वाले या झूठी खबरों पर अंकुश लगाने के पर्याप्त प्रावधान पहले से मौजूद हैं। प्रेस की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अखबारों के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) और टीवी चैनलों के लिए न्यूज ब्रॉडकास्टर्स असोसिएशन (NBA) जैसे संगठन पहले से ही मौजूद हैं ।
🚩टीआरपी और पैसे के लिए मीडिया जब झूठी खबरे दिखाती है तब कोई नही बोलता है कि झूठी खबरे क्यो दिखाई जैसे ही उनपर लगाम कसने की बात शुरू किया तब हल्ला बोल शुरू कर दिया ।
🚩आज मीडिया की भूमिका अहम है लेकिन कई बार मीडिया ब्लैकमेलिंग का धंधा बनकर रह गई है वो भी हिन्दू संस्कृति को तोड़ने के लिए तो खास । आज की अधिकतर मीडिया देश, सनातन संस्कृति तोड़ने के लिए लगी हुई है ।
🚩सुदर्शन न्यूज़ चैनल के मुख्य सुरेश चव्हाणके ने कई बार बताया है कि अधिकतर मीडिया को # ईसाई मिशनरियों की वेटिकन सिटी और मुस्लिम देश जैसी की अरब, दुबई आदि से फंडिग होती है, जिससे वे हिन्दू संस्कृति तोड़ने के लिए हिन्दुओं की आस्था स्वरूप हिन्दू साधु-संतों के प्रति भारत की जनता के मन में नफरत पैदा करने का काम करते हैं । वे हिन्दुओं के मन में ये डालने का प्रयास करते हैं कि आपके धर्मगुरु तो अपराधी हैं आप हिन्दू धर्म छोड़कर हमारे धर्म में आ जाओ । ये उनकी थ्योरी है । जबकि वे मौलवी और ईसाई पादरियों के कुकर्म नही बताते ।
🚩अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि ‘मीडिया के लोग धरती पर मानव जाति में सबसे बेईमान हैं।’ 
🚩सरकार को अब मीडिया पर लगाम लगाना जरूरी है नही तो स्वतंत्रता के नाम पर जनता को झूठ न परोसे ।
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देश में अन्नदाता किसानों की हालत बुरी, कर्ज बढ़ने के कारण कर रहे है आत्महत्या

March 25, 2018
🚩किसान मिट्‌टी से सोना उपजाते हैं। वे अपने श्रम से संसार का पेट भरते हैं। कितने भी आधुनिक विकास कर लो लेकिन जब किसान खेती ही नही करेंगे तो जनता खायेगी क्या?
🚩किसान बहुत परिश्रमी होते हैं । वे खेतों में जी-तोड़ श्रम करते हैं । वे मेहनत करके अनाज, फल और सब्जियाँ उगाते हैं । तभी हम अन्य काम कर पाते है इसलिए देश में किसान हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है ।
Farmer’s condition in the country is bad, debt is rising due to rising debt
🚩गुजरात राज्य के गाँव में रहते लगभग 58.71 लाख कुटुंब में से खेती के साथ जुड़े 39.30 लाख परिवार है। उसमें से 16.74 लाख परिवार ने खेती के लिए लोन  लिया है। गुजरात के 42.6% किसान कुटुंब कर्जग्रस्त होने के साथ देश मे 14वे नंबर पर है। ये तमाम कर्जग्रस्त कुटुम्बों का औसत प्रति व्यक्ति कर्ज 38,100 रुपये था। जब कि गुजरात में किसान कुटुंब का औसत मासिक आमदनी 7926 है। जो राष्ट्रीय स्तर पर 12वें स्थान पर है।
🚩गुजरात राज्य के ग्रामीय विस्तार में रहते 39.90 लाख जितने किसान कुटुम्ब में 16,74,300 किसान कुटुंबों ने लोन लेते 42.6% किसान कुटुम्ब कर्जग्रस्त है।
🚩किसान बीज, खाद, किट नाशक दवाइयां, ट्रेक्टर किराया, सिंचन, बिजली बिल आदि खरीदने के लिए रकम खर्च रुकावट के साथ कुटुंब की मेहनत, खेत मजदूरों का श्रम, जमीन का किराया और भागिया पद्धति के कारण अधिक खर्च होता है। इस खर्च के सामने उपज कि उचित रकम नहीं मिल पाती हैं और वो कर्जग्रस्त बन जाते है।
🚩गुजरात में कर्जग्रस्त कुटुंबों का औसत कर्ज वर्ष 2013 में 38,100 रुपये था । जिसमे 0.01  हेक्टर से भी कम जमीन के कुटुंबों का 6900 कर्ज है, जब कि 0.40 हेक्टर तक जिन कुटुंबों की जमीन है  उनका कर्ज 12,000 है। 1 हेक्टर तक कि जमीनधारक का कर्ज 25,700 । 1 से 2 हेक्टर जमीनधारक का कर्ज 21 हजार। 2 से 4 हेक्टर जमिधारक पर कर्ज 82 हजार । और  4 से 10 हेक्टर जमीन वाले लोगो पर कर्ज 1.14 लाख जितना है।
🚩आपको बता दे कि देश में सबसे ज्यादा कर्ज में डूबे किसानों आंध्रप्रदेश में 92.9% है। उसके बाद तेलेंगाना के 89.1%, तमिलनाडु के 82.5, केरल के 77.7, कर्नाटक के 77.6, राज्यस्थान के 61.8, ओड़िसा के 57.5, महाराष्ट्र के 57.3, पंजाब के 53.2, बंगाल के 51.5, उत्तरांचल के 50.8, मध्यप्रदेश के 45.7 और उत्तरप्रदेश के 43.8% के साथ गुजरात के किसान कुटुंब 42.6% के साथ 14वें नंबर पर है।
🚩गुजरात राज्य के किसान कुटुंबों की औसत मासिक आवक राष्ट्रीय स्तर पर 12वें स्थान पर रुपये 7926 है। जब कि सबसे ज्यादा पंजाब में रुपये 1805, हरियाणा में 14434, जम्मू-कश्मीर में 12683, केरल में 11888, मेघालय में 11792, अरुणाचल प्रदेश में 10869, नागालैंड में 10048, मिज़ोरम में 9099, मणिपुर में 8842, कर्नाटक में 8832, हिमाचल प्रदेश में 8777, महाराष्ट्र में 7386 और राज्यस्थान में 7350 आमदनी है। राज्य में किसानों की आवक बढ़ाने के लिए सिचाई व्यवस्था के एक्सटेंशन ऑपरेशन को तात्कालिक बनाने की जरूरत है। जब कि किसानों को उनकी उपज के अनुसार कीमत मिले इसलिए स्वामीनाथ समिति द्वारा हुई भलाई अनुसार उपज के कुल खर्च में 50% रकम अधिक दी जाए तो किसान कर्ज से मुक्त हो सकते है। स्त्रोत : मेरन्यूक नेटवर्क
🚩आपको बता दे कि 1995 से  31 मार्च 2013 तक के आंकड़े बताते हैं कि अब तक 2,96 438 किसानों ने आत्महत्या की है ।
🚩असल में खेती की बढ़ती लागत और #कृषि_उत्पादों की गिरती कीमत किसानों की निराशा की सबसे बड़ी वजह रही है ।
🚩किसानों के खर्च में बहुत तेजी से बढ़ोतरी हुई है इसमें सिंचाई के लिए बनाने वाले बोरवेल के लिए भूजल स्तर में भारी गिरावट के चलते महंगे हो गए,  बोने वाले बीज महंगे हो गये , बिजली महँगी हो गई उसके बाद भी जब फसल आती है तब दाम बहुत कम हो जाते है जिससे किसानों को घाटा होता है और किसान आत्महत्या कर लेते है ।
🚩 मौसम की बारिश, ओले और तेज हवाओं ने किसानों की तैयार फसलों को बर्बाद करता हैं, उसका झटका बहुत से किसान नहीं झेल पाते हैं।
🚩#सरकार से लोन नही मिलती है लोन भी मिलती है तो बहुत कम ।
नीचे गिरते #जल स्तर के चलते वहां बोरवेल के लिए #बैंकों से कर्ज नहीं मिलते है और साहूकारों से कर्ज लेना किसानों के लिए घातक साबित होता है ।
🚩कई किसानों के #बच्चों की #शिक्षा से लेकर लड़कियों की शादियां तक अटकी हुई हैं ।
🚩फसलों की गिरती कीमतें !
🚩जब किसानों की फसलें तैयार होती है तो कीमतों में भारी गिरावट आती है इसलिए किसानों की आय बहुत कम होती है ।
🚩किसानों ने आत्महत्याएं किये इससे साफ है कि आर्थिक रूप से उनका बहुत कुछ दाँव पर लगा था, जो बर्बाद हो गया । केंद्र और राज्य सरकारों के तमाम ब्यानों में भी उसे भरोसा नहीं दिखा क्योंकि ये कभी किसान की मदद के लिए बहुत कारगर कदम नहीं उठा पाई हैं ।
🚩इस तरह की आपदा के बाद किसानों को राहत के लिए दशकों पुरानी व्यवस्था और मानदंड ही जारी हैं ।
🚩सरकार ने इस व्यवस्था को व्यवहारिक बनाने और वित्तीय राहत प्रक्रिया को तय समय सीमा में करने के लिए कदम नहीं उठाए हैं ।
🚩भले ही जनधन में करोडों खाते खुल गये हों, आधार नंबर से जुड़ने वाले #बैंक खाते लगभग पूरी आबादी को कवर करने की ओर जा रहे हों, लेकिन किसानों की मदद के लिए अभी भी बेहद पुरानी, लंबी और लाचार व्यवस्था ही जारी है ।
🚩किसानों के बढ़ते संकट का निवारण करने के लिए सरकार द्वारा किसानों का कर्ज माफ किया जाये , सिंचाई के लिए बोरवेल बनवाकर दिये जाएँ और फसल के दाम में वृद्धि हो ।
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देवेंद्र गांधी, Devendra Gandhi

भारत का मीडिया बन गया है वेश्या का कोठा : पत्रकार देवेंद्र गांधी

अक्टूबर 5, 2017
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है पत्रकार देवेंद्र गांधी का उसमें उन्होंने मीडिया को पूरा नंगा कर दिया है ।
उन्होंने बताया – मीडिया का फंडिग कहाँ से आता है और कौन उसको हैंडल करता है, मीडिया में जो खबरें दिखाई जाती है वे कितनी सच होती है, उन्होंने मीडिया को वेश्या का कोठा बताया ।
India’s media has become prostitutes: journalist Devendra Gandhi

 

आइये जानते है क्या कहा देवेंद्र गांधी ने…
उन्होंने कहा कि नमस्कार दोस्तों मैं हूं देवेंद्र गांधी।
 #देवेंद्र गांधी एक नाम है आपके लिए, लेकिन मैं मीडिया से जुड़ा हुआ हूं।
मीडिया की क्या हैसियत है आज की तारीख में , मीडिया का क्या रुतबा है आज की तारीख में , मीडिया को लोग किस तरह से किस नजरिए से देखते हैं आज की तारीख
इस पर बात करूंगा और साथ ही साथ आपको ये भी बताऊंगा कि देश के बड़े-बड़े मीडिया हाउसेस कहां से चल रहे हैं ?
कौन उन्हें चला रहा है और कौन उनका मालिक हैं ?
आप और हम अक्सर ये सोचते होंगे कि मीडिया निष्पक्ष है, मीडिया दबाव में काम नहीं करता लेकिन अगर आप आंकड़े देखेंगे और मीडिया चैनल्स के मालिकों की लिस्ट देखेंगे तो आपको थोड़ा-थोड़ा लगने लगेगा कि मीडिया उतना निष्पक्ष नहीं रहा,मीडिया उतना स्वतंत्र नहीं रहा जितना कि हम सोचते हैं या जितने की हम कामना करते हैं।
यूं तो मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन आज की तारीख में मुझे लगता है कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ तो कतई नहीं है।
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ पूरी तरह से या तो ढेर हो चुका है, जर्जर हो चुका है या तो ढेर होने के कगार पर है ।
अगर आज हमने खुद को नहीं संभाला, हमको मतलब मीडिया ने खुद को नहीं संभाला तो ये पिल्लर एक दिन पूरी तरह से धराशाई हो जाएगा और इसका इल्जाम भी मीडिया के सिर ही आएगा, क्योंकि हम खुद इसके लिए जिम्मेदार हैं और हमें इसकी जिम्मेदारी लेनी भी होगी ।
आज मैं आपको यह बताना चाहूंगा कि मीडिया के कौन-कौन से हाउसेस प्रमुख हाउस इस देश में चल रहे हैं,
लेकिन इससे पहले मैं 2 बड़े सवाल उठाता हूं, क्या मीडिया इस समय मंडी बन चुका है ?
क्या #मीडिया #पूंजीवादी व्यवस्था की रखेल हो चुका है ?
क्या #मीडिया कोठे की #वेश्या बन चुका है?
 ये सवाल बड़े गंभीर हैं क्योंकि मैं खुद मीडिया से जुड़ा हुआ हूँ इसलिए ये सवाल और भी गंभीर हो जाते हैं, क्योंकि यह सवाल मैं किसी और पर नहीं उठा रहा यह सवाल मैं अपने आप पर ही उठा रहा हूँ एक तरह से।
मैं उतना बड़ा पत्रकार नहीं हूँ कि टेलीविजन चैनल पर खड़ा होकर के इन सब बातों को बोलूं ।
 कोई बोलेगा भी नहीं क्योंकि जब मैं आपको लिस्ट बताऊंगा कि चैनलों के मालिक कौन है तो आप भी सोच कर हैरान रहेंगे कि बड़े-बड़े पत्रकारों के नाम टेलीविजन चैनल पर देखते हैं और सोचते हैं कि शायद इन चैनलों की टेलीविजन चैनलों के मालिक भी यही होंगे और यह पत्रकार ही खबरें तय करते होंगे, नहीं ऐसा नही है पत्रकार कभी भी कतई खबरें तय नहीं करते। यह पूरा प्रोसेस होता है, प्रबंधन खबरों को तय करता है कौन सी खबर दिखाई जानी है , कौन सी खबर नहीं दिखाई जानी ।
TRP का तो मामला है ही कि #TRP की अंधी दौड़ चल रही है। इसके अलावा भी और भी बहुत सारे दबाव होते हैं कभी सत्ता पक्ष का तो कभी विपक्ष का और इस समय जो मीडिया की भूमिका है वह इस तरह से है जिस तरह से एक पूंजीवादी आदमी की कोई दूसरी रखेल हो।
मैं आपको बताऊंगा दोस्तों कि मीडिया में आज कौन-कौन से प्रमुख चैनल है व इसके मालिकाना हक किस-किस के पास हैं।
सबसे पहले मैं आपको बताता हूँ आज तक टेलीविजन चैनल के बारे में, ये #इंडिया न्यूज ग्रुप चैनल है जिसके संचालनकर्ता धर्ता जो है वो #अरुण पूरी जी हैं, अरुण पूरी वैसे पेशे से पत्रकार ही हैं।
दूसरा बड़ा चैनल है देश में #ABP न्यूज कुछ समय पहले तक ABP News उसका नाम स्टार न्यूज हुआ करता था तब इसमें ज्यादा हिस्सेदारी थी स्टार न्यूज की, इसका नाम जो है स्टार न्यूज होता था। अरसे बाद कुछ समय पहले ही इस चैनल का नाम एबीपी न्यूज हो गया क्योंकि ABP अनंत बाजार पत्रिका ने इसका मेजर शेयर स्टॉक था, इसने अपने पास रख लिया।  इस चैनल को चलाती है #अभिजीत सरकार जो कि पश्चिम बंगाल की पुष्ट भूमि से आते हैं जो टेलीविजन से भी जुड़े रहे है।
तीसरा बड़ा चैनल है देश का #India TV, India TV की स्थापना 20 मई 2004 को हुई थी और जिसको होस्ट करते हैं आज की तारीख में #रजत शर्मा, #ऋतु धवन को तो आप जानते ही हैं , ये भी पेशे से पत्रकार हैं ।
एक चैनल और है News24,
 News24 के जो मालिक है उनके बारे में दिलचस्प जानकारी देता हूँ, केंद्रीय मंत्री जो है श्री रवि शंकर प्रसाद जी उनकी बहन है #अनुराधा प्रसाद और #राजीव शुक्ला जो #कांग्रेस के नेता हैं ये दोनों मिलकर के इस चैनल को चलाते हैं ।
क्रिकेट एसोसिएशन से भी, बीसीसीआई से भी जुड़े रहे राजीव शुक्ला जी।
 वैसे राजीव शुक्ला जी की पहचान एक पत्रकार के तौर से शुरुआत होती है लेकिन वो कब इतने बड़े ग्रुप के मालिक बन जाते हैं ये अपने आप में एक सवाल है।
तीसरा बड़ा घराना है जो है ZeeNews,
# ZeeNews के जो मालिक है डॉक्टर सुभाष चंद्रा एस्सेल ग्रुप ही Zee News चैनल को चलाता है Zee News के अलावा और भी Zee हिंदुस्तान व और भी कई सारे चैनल है जो एस्सल ग्रुप की तरफ से चलाए जाते हैं और जिनके मालिक है #डॉक्टर सुभाष चंद्रा।
डॉक्टर सुभाष चंद्रा इन दिनों राज्यसभा के मेंबर हैं, सभी जानते हैं कि #हरियाणा से #राज्यसभा मेंबर चुने गए थे वो और भाजपा ने उन्हें समर्थन दिया था।
वैसे वो निर्दलीय तौर पर राज्यसभा के सदस्य चुने गए थे और ये जो Zee ग्रुप है वो उनका उनके मालिकाना हक वाली कंपनी है।
तीसरी बड़ी कंपनी है #इंडिया न्यूज। इंडिया न्यूज जो है वो है विनोद शर्मा, यानी #मनु शर्मा के जो पिताजी है विनोद शर्मा, हरियाणा के मंत्री भी रहे केंद्र में भी वो मंत्री रहे, कार्तिक शर्मा जो विनोद शर्मा जी का बेटा हे वो इस न्यूज चैनल को चलाता है।
और एक न्यूज चैनल है हमारे देश में न्यूज 18 इस न्यूज चैनल पर जो दबदबा है जो रुतबा है या इस न्यूज का जो मालिकाना हक है वो है रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास। आप चैनल खोलिएगा जब आप टेलीविजन खोलते हैं तो सबसे पहले न्यूज इंडिया TV फिर न्यूज 18 फिर ABP News फिर इस तरह से आप चैनलों की रिमोट पर हाथ रखते रखते चैनल आगे बढ़ते जाते हैं। तो ये जो चैनल है ये कार्तिक शर्मा इसको चला रहे हैं ।
इसके अलावा एक  चैनल और है NDTV इंडिया।  #NDTV इंडिया की स्थापना 1988 में हुई थी जो कि मैंने नेट से चेक किया है और इसको चलाने वाले हैं #प्रणव राय और उसकी पत्नी #राधिका राय और चेयर पर्सन और उनके मालिक का नाम दिया है विधान सिंह जो कि NDTV इंडिया के बारे में बताया जा रहा है।
आज सवाल यह है कि क्या ये चैनल निष्पक्ष है ??
 बड़ा सवाल आपके सामने ये भी उठता होगा कि जब आप टेलीविजन पर रिमोट पर हाथ दबाते होंगे न्यूज चैनल की तरफ तो जब भी आप टेलीविजन खोलते हैं तो आपके मन में ये बड़ा सवाल उठता होगा, क्या ये चैनल वही दिखा रहा है जो आप देखना चाहते हैं ?
 या चैनल अपना एजेंडा चला रहे हैं, ये सवाल क्यों उठ रहे हैं ?
ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि जो कुछ आप देखना चाहते हैं वो ये चैनल दिखाना नहीं चाहते। अगर ऐसा होता तो आपके मन में ये शंका ये सवाल कतई नहीं उठते। इसलिए आज सोशल मीडिया पर सबसे बड़ा जो सवाल है वो मीडिया पर ही उठ रहा है ।
मैं रोज देखता हूँ आप भी देखते होंगे कि मीडिया रोज ये दिखाता है कि वायरल सच।  इसका वायरल सच क्या है किसका वायरल सच क्या है। लेकिन मीडिया कभी ये दिखाने की कोशिश नहीं करता कि उनका (मीडिया का) अपना वायरल सच क्या है।
आज #मीडिया को #चोर , #भ्रष्ट #बेईमान न जाने किन किन तरीकों से नवाजा जा रहा है और जब मैं  इन चीजों को देखता हूँ तो कई बार व्यथित भी हो जाता हूँ, दुखी भी होता हूँ क्योंकि मैं भी मीडिया से जुड़ा हुआ हूं और ये पीड़ा सहनी पड़ती है कि जब लोग कहते हैं कि मीडिया #बिकाऊ है । मीडिया बिक गया है और  ये सवाल मीडिया को सोचना चाहिए।
 क्या उनके सामने यह तस्वीर नहीं जाती की उनके बारे में क्या कहा जा रहा है ? और आज देश में जो हालात है मीडिया को लेकर । ये बातें क्यों होती है ? क्योंकि मीडिया में बहुत सारे पूंजीवादी व्यवस्था के हाथों खेल रहे हैं, वो जो ग्रुप है वो जो प्रबंधन है ,वो तय करता है कि आप कौन सी खबर दिखाएंगे कौन सी खबर नहीं दिखाएंगे।
ये आज से नहीं है , ये काफी समय से ऐसा होता आ रहा है, चला आ रहा है कि आज कौन सी खबर कौन तय करेगा।
 हम पत्रकार है, मैं बड़ी सच्चाई के साथ बड़ी ईमानदारी के साथ यह कहना चाहता हूँ कि पत्रकार के पास ये अधिकार नहीं है कि क्या खबर चलाई जाए, क्या खबर दिखाई जाए ??
 शुक्र है मार्क जुकरबर्ग का जिसने हमें facebook पर एक मंच दे दिया , इसलिए हम कुछ भी बताते हैं , कोई भी वीडियो अपलोड करते हैं , कुछ भी लाइव चला देते हैं। ये स्वतंत्रता थोड़ी बची है जबकि मीडिया की जो स्वतंत्रता टेलीविजन चैनल हो या अखबार हो उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं और यह सवाल हमने खुद ही अपने ऊपर खड़े किए हैं क्योंकि हम उतने निष्पक्ष नहीं है जितने कि लोग सोचते हैं।
लोगों को लगता है कि हमारे सामने महंगाई का मुद्दा उठाया जाएगा लेकिन हम नहीं उठाते। हम क्या मुद्दे उठाते हैं, तीन तलाक ट्रिपल तलाक पर रहता है। तीन चार मौलानाओं को बुला लिया जाता है इधर से बीजेपी के एक लीडर को उधर से कांग्रेस के एक लीडर को इधर से सीपीआई के एक लीडर को उधर से आम आदमी पार्टी के लीडर को यानी व्यवस्था को इस तरह से कर दिया जाता है कि तमाम व्यवस्था को सिर्फ यह पांच सात दस लोग ही चलाने वाले हैं। आम लोगों से इस बारे में कोई राय नहीं ली जाती कोई मशवरा नहीं किया जाता इसलिए भी मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं।
आज कल इन दिनों हिंदू मुसलमान का एक बड़ा फसाद दिखाया जा रहा है और रोहिंग्या मुसलमानों को ले करके भी TRP और अभी थोड़े दिन पहले बाबा राम रहीम का जो प्रकरण हुआ गुरमीत राम रहीम का, उसको लेकर के तो मीडिया की भूख मिट ही नहीं रही। TRP की भूख इस तरह से हासिल है कि जो काम हुआ ही नहीं उसको एकदम से फ़्लैश किया।
 यानी आप देखिए इतनी जल्दी थी मीडिया चैनलों को फैसले को लेकर कि मीडिया चैनलों ने अपने आप ही सजा सुना दी 10 साल की। जज ने सजा सुनाई 10+10 की लेकिन मीडिया में ब्रेकिंग न्यूज आई,सब चैनलों पर एक ही न्यूज थी कि बाबा को सजा 10 साल की..
यानी कोई भी सब्र नहीं करना चाहता की फैक्ट लाया जाए।
हम भी इसमें शामिल हैं हम भी जब मौके पर जाते हैं देखते हैं कि चेन मिसिंग हो गई ये भी पूछने की कोशिश नहीं करते भई चेन सोने की थी, असली थी, नकली थी, हम ये भी कोशिश नहीं करते कि दो लाशें  पानी में बह रही है, किसकी है औरत की है,हम फटाफट कोशिश करते हैं आपस में कोई जल्दी से जल्दी खबर को ब्रेक करने की, हमारे अंदर इतनी जल्दी होती है या होड़ होती है कि फटाफट खबर को ब्रेक कर दिया जाए उसके फैक्ट्स बाद में आते रहते हैं तो हम बाद में कॉमेंट्स में या उस पोस्ट में एडिट करके लिखते हैं। ये आज की विडंबना है। असलियत यही है,हकीकत यही है कि मीडिया की वो भूमिका सामने नहीं आ रही जिस भूमिका की लोग हमसे उम्मीद करते हैं।
 मैं उसमें शामिल हूँ और सबसे बड़ा कटाक्ष भी मैं आज खुद पर कर रहा हूँ, मैं किसी दूसरे पर उंगली नहीं उठा रहा, अगर कुछ साथियों को लगे कि ये मीडिया पर उंगली उठा रहा है या ये अपने आप को साफ चरित्र का पत्रकार बताने में लगा हुआ है तो दोस्तों ऐसा कतई नहीं है।
आप भी अपने अंदर झांकिए, मैंने तो झांका ही है और मुझे ये लगता है कि मीडिया उतना निष्पक्ष उतना साफ इतना बेदाग नहीं है।
हम कोठे पर एक वेश्या की तरह हैं,  हम पूंजीवादी लोगों की रखेल की तरह हैं और इसलिए आज हम पर सबसे बड़े सवाल उठ रहे हैं क्योंकि हमने खुद को मंडी के रूप में तब्दील कर लिया है। किसी की कीमत इतनी किसी की कीमत इतनी।
दोस्तों मीडिया को मंडी होने से बचाइए, हमारा साथ दीजिए इस खबर को दूर-दूर तक पहुंचाइए अगर आप इस खबर को दूर-दूर तक पहुंचाने में सफल रहे, कामयाब रहे तो शायद कारगिल पर में जो जा करके जो सियाचिन में जाकर के अपने देश भक्ति की भावना दिखाते हैं टेलीविजन चैनलों पर छाती ठोक करके अपने आप को राष्ट्रभक्त बताते हैं और कोई ईमानदार बताते हैं ।
कोई सरकार की बखिया उधेड़ रहा है तो कोई सरकार को पॉलिश करने में लगा हुआ है। दोनों ही तरह के लोग हमारे सामने हैं । आपको ही तय करना है कि हमें किसे देखना है किसे नहीं देखना।
मुझे लगता है कहीं मीडिया हाउसेस जो है वो सरकार को चमकाने में लगे हुए हैं और कई मीडिया हाउसेस ऐसे हैं जो बिन देखे ही बिना कोई प्रमाण के सरकार के बखिया उधेड़ने पर लगे हुए हैं। यानी कुछ मीडिया हाउसेस सरकार का समर्थन जुटाने में और कुछ मीडिया हाउसेस यह दिखाने में कि हम सरकार से पावरफुल है।
दोस्तो ऐसा मत कीजिए आप अपने देश के बारे में सोचिए जो सही है उसे सही दिखाइए जो गलत है उसे गलत दिखाइए क्योंकि अगर मीडिया नहीं बचेगा तो मैं यकीन के साथ कह सकता हूँ लोकतंत्र में कुछ नहीं बचेगा।
हम किसी के पांव की जूती ना बने ,हम किसी पूंजीवादी की रखेल ना बने, हम किसी कोठे की वेश्या ना बने और हम पूंजीवादी चौखट पर घुटने ना टेके, माथा ना रगड़े ।
 ये सवाल हमारे सामने है और इसका हल भी हमें ही खोजना है। मेरा आपसे फिर अनुरोध है इस खबर को हो सके तो ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिए ।
 – पत्रकार देवेंद्र गांधी
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