5 से 10 साल की 30 बच्चियों का पादरी ने किया बलात्कार, चर्च ने कहा कोई बात नहीं, दी माफी*

🚩 *5 से 10 साल की 30 बच्चियों का पादरी ने किया बलात्कार, चर्च ने कहा कोई बात नहीं, दी माफी*
🚩15 मई 2017
🚩कैथलिक
चर्च की दया, शांति और कल्याण की असलियत दुनिया के सामने उजागर हो ही गयी
है । मानवता और कल्याण के नाम पर क्रूरता की पोल खुल चुकी है । चर्च
कुकर्मो की  पाठशाला व सेक्स स्कैंडल का अड्डा बन गया है । पोप बेनेडिकट
सोलहवें ने पादरियों द्वारा किये गए इस कुकृत्य के लिए माफी भी माँगी थी ।
RAPE BY CATHOLIC PASTOR
🚩चर्च
के पादरी महिलाओं का एवं बच्चे-बच्चियों का बलात्कार करते हुए पकड़े गए ।
भले वेटिंकन सिटी के प्रभाव से उन पर सरकार या कानूनी कार्यवाही नहीं होती
हो लेकिन अब पब्लिक जान चुकी है कि धर्म की आड़ में कई ईसाई पादरी कुकर्म
करते हैं ।
 🚩#चर्च की आड़ में चल रहे #यौन #शोषण के हजारों मामले सामने आ चुके हैं ।
🚩ऐसे ही वेटिकन सिटी का एक मामला सामने आया है…
🚩रोम
के वेटिकन सिटी चर्च ने एक कैथोलिक पादरी को 5 से 10 वर्ष आयु की 30
बच्चियों का बलात्कार करने के मामले में माफी दे दी है। हालांकि, आरोपी
पादरी जोस गार्सिया अताल्फो एचआईवी पीड़ित है और वह इस बात को जानता है।
बावजूद इसके उसके विरुद्ध किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई। पादरी ने भी सभी
बच्चियों से बलात्कार की बात कबूल की है । इन पीड़ित बच्चियों में से एक
बच्ची की मां ने जब इस मामले में कार्रवाई के लिए वेटिकन सिटी के पोप को खत
लिखकर मिलने की इच्छा जताई तो पोप ने इससे इनकार कर दिया और पोप ने कह
दिया, “मैटर इज क्लोज्ड।”
🚩आरोपी
पादरी अताल्फो ने इस बात को स्वीकार किया है कि, उसने दक्षिणी मैक्सिको के
ओक्साका की दो दर्जन से ज्यादा लड़कियों का बलात्कार किया है। ओक्साका की
अधिकांश जनसंख्या मूल निवासी यानी स्थानीय है। परंतु प्रशासन पर चर्च की
मजबूत पकड़ के कारण से पादरी पर किसी तरह का आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा
सका।
🚩यह
वृत्त सबसे पहले वहां की एक स्थानीय वेबसाइट ‘अर्जेन्ट 24 डॉट कॉम’ ने
स्पेनिश भाषा में प्रकाशित किया।  इस वेबसाइट ने लिखा कि 30 पीड़ित
बच्चियों में से केवल दो ही पादरी को निर्दोष ठहराने वाले फैसले को गलत
साबित करने के लिए आगे आई हैं। इन्हीं में से एक बच्ची की मां ने रोम के
पोप से मामले में हस्तक्षेप की गुहार लगाई परंतु वहां से भी उसे निराशा हाथ
लगी है। बाद में ब्रिटेन से प्रकाशित समाचारपत्र ‘द सन’ ने ‘अर्जेन्ट 24
डॉट कॉम’ के हवाले से यह वृत्त प्रकाशित किया ।
🚩आपको
बता दें कि अभी हाल ही में #आस्ट्रेलिया की #कैथोलिक चर्च ने सेक्शुअल
अब्यूज के मामले में करीब 21 करोड़ 20 लाख 90 हजार #अमेरिकी डॉलर (1426
करोड़ रुपए) का हर्जाना दिया है।
🚩पिछले
35 साल के दौरान #सेक्शुअल अब्यूज का शिकार हुए हजारों बच्चों को मुआवजे,
इलाज और अन्य खर्च के तौर पर ये रकम दी गई है। संस्थागत उत्पीड़न को लेकर
हुई जांच की जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
🚩रिपोर्ट
के मुताबिक, साल 1980 से 2015 के बीच हुए 4445 #बाल #यौन_उत्पीड़न के
दावों में से 3066 मामलों में मुआवजे और अन्य भुगतान किए गए।
 🚩सन् 2002 में #आयरलैंड के #पादरियों के यौन-शोषण के अपराधों के कारण 12 करोड़ 80 लाख डॉलर का दंड चुकाना पड़ा ।
🚩मई
2009 में प्रकाशित #रॉयन #रिपोर्ट के अनुसार 30,000 बच्चों का इन संस्थाओं
में ईसाई ननों और पादरियों द्वारा प्रताड़ित और उनका शोषण किया जाता रहा ।
🚩गांधीजी कहते हैं…..
“हमें
गोमांस भक्षण और शराब  पीने की छूट देने वाला ईसाई धर्म नहीं चाहिए। धर्म
परिवर्तन वह जहर है जो सत्य और व्यक्ति की जड़ों को खोखला कर देता है।
मिशनरियों के प्रभाव से हिन्दू परिवार का विदेशी भाषा, वेशभूषा,रीति रिवाज
के द्वारा विघटन हुआ है। यदि मुझे कानून बनाने का अधिकार होता तो मैं धर्म
परिवर्तन बंद करवा देता। इसे तो मिशनरियों ने व्यापार बना लिया है पर धर्म
आत्मा की उन्नति का विषय है। इसे रोटी, कपड़ा या दवाई के बदले में बेचा या
बदला नहीं जा सकता।”
🚩फिलॉसफर
नित्शे ने कहा था कि मैं ईसाई धर्म को एक अभिशाप मानता हूँ, उसमें आंतरिक
विकृति की पराकाष्ठा है । वह द्वेषभाव से भरपूर वृत्ति है । इस भयंकर विष
का कोई मारण नहीं । #ईसाईत गुलाम, क्षुद्र और चांडाल का पंथ है ।
🚩ऐसे
#कुकर्म करने वाले चर्च के #पादरी हिंदुओं को प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन
करवाते है जो खुद पतित हैं वो दूसरों को क्या सन्मार्ग पर लेकर जायेगे..??
🚩इनके
मार्ग ( #धर्मपरिवर्तन ) में जो आड़े आते हैं उनको मीडिया द्वारा बदनाम
करवा दिया जाता है । जिससे समाज सच्चाई से अनभिज्ञ रहें ।
🚩अतः #हिन्दू सावधान रहें,विदेशी प्रभाव से चलने वाली #मीडिया से और #ईसाई_पादरियों से ।
🚩अपने धर्म में मरना भी श्रेष्ठ है दूसरों का धर्म भयावह है ।
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फिल्मकारों को गाने, डायलॉग लिखने से पहले अपनी बहन और मां के बारे में सोचना चाहिए : डीसीपी लक्ष्मी

फिल्मकारों को गाने, डायलॉग लिखने से पहले अपनी बहन और मां के बारे में सोचना चाहिए : डीसीपी लक्ष्मी
14 मई  2017
DCP Lakshmi
भारतीय
#फिल्मों में बढ़ती हिंसा और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध का मुद्दा
निरंतर समाज में उठता रहा है। कई बार ऐसी बातें सामने आयी जिसमें कहा गया
है कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध में कहीं न कहीं इस तरह की फिल्में खास
रोल निभाती हैं।
 #तमिलनाडु की तीन महिला पुलिस #अधिकारियों ने इस मुद्दे को उठाया है। इन
महिला आयपीएस अधिकारियों ने वीडियो के जरिए भारतीय फिल्मकारों से फिल्मों
में हिंसात्मक दृश्य से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि महिलाओं के
खिलाफ हिंसा और दुर्व्यवहार को स्क्रीन पर नहीं दिखाएं।
फिल्मों
में महिलाओं के साथ #हिंसात्मक दृश्य को लेकर खास अपील तमिलनाडु के
कोयंबटूर की डीसीपी एस. लक्ष्मी (लॉ एंड ऑर्डर), एसपी राम्या भारती
(कोयंबटूर) और तिरूपुर शहर कीडीसीपी दिशा मित्तल (लॉ एंड ऑर्डर) ने वीडियो
के जरिए फिल्मकारों से खास अपील जारी की है।
उन्होंने
कहा कि जिस तरह से #फिल्म में महिलाओं को लेकर हिंसात्मक दृश्य दिखाए जाते
हैं इसका लोगों पर असर होता है। फिर सामान्य जीवन में भी महिलाओं को ऐसी
घटनाओं से गुजरना पड़ जाता है। ऐसी स्थिति सामने नहीं आए इसके लिए जरूरी है
कि फिल्मों में ऐसे दृश्यों से बचा जाए।
अधिकारियों ने फिल्म के #एक्टर्स को भी इस मामले में समझाने की कोशिश की है।
कोयंबटूर
की डीसीपी एस. लक्ष्मी (#लॉ एंड ऑर्डर) ने कहा कि, हमारे देश में महिलाओं
का खास सम्मान है। यही वजह है कि इसे भारत माता कहकर बुलाया जाता है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से फिल्मों में महिलाओं के खिलाफ #हिंसात्मक दृश्य
दिखाए जाते हैं ये ठीक नहीं है।
-#महिला
विरोधी दृश्यों से महिलाओं पर #अत्याचार बढ़े हैं। लोग फिल्म देखकर वैसा
ही करने की कोशिश करते हैं। फिल्म बेहद सशक्त माध्यम है ऐसे में इसका बेहद
गंभीरता से इस्तेमाल होना चाहिए। जिससे लोगों में अच्छा संदेश जाए।
उन्होंने कहा कि जो भी गाने या #डायलॉग लिखते हैं उन्हें पहले अपनी बहन और
मां के बारे में सोचना चाहिए। उनके बारे में सोचकर ही शब्दों का चयन होना
चाहिए।
वहीं
#डीसीपी दिशा #मित्तल ने कहा कि फिल्मों के साथ-साथ टीवी पर आनेवाले
कार्यक्रम, विज्ञापन, गाने सभी हम पर काफी असर डालते हैं। ऐसे में इनका सही
इस्तेमाल बेहद जरूरी है।
 #एसपी #राम्या भारती ने कहा कि फिल्म के #डायलॉग, गाने सभी का अपना असर
होता है। लोगों में कहीं इनका गलत असर नहीं जाए इससे बचने के लिए जरूरी है
कि फिल्मकार इसको लेकर गंभीर बने। इसमें सुधार के जरिए महिलाओं के खिलाफ
हिंसा को कम किया जा सकता है।
आपको
बता दें कि कुछ दिन पहले केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी
ने भी देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ रही हिंसा के लिए बॉलीवुड और क्षेत्रीय
सिनेमा को जिम्मेदार ठहराया है।
मेनका
गांधी ने कहा कि बॉलीवुड में महिलाओं से जुड़े अशोभनीय दृश्यों के कारण
देश में हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं और #महिलाओं के साथ छेड़छाडी होती है ।
‘फिल्मों में रोमांस की शुरुआत छेड़छाड़ से होती है। लगभग सभी फिल्मों में
छेड़छाड़ को बढ़ावा दिया जाता है।
#मेनका #गांधी ने #फिल्मकारों और विज्ञान बनाने वालों से अपील की कि वे महिलाओं की अच्छी छवि को दिखाएं।
भला
जिस देश में जहां, नर में राम और नारी में सीता देखने की संस्कृति रही हो,
नदियों को भी माता कहकर पुकारा जाता हो, भगवान के विभिन्न अवतारों,
ऋषि-मुनियों, #योगियों-तपस्वियों आदि की क्रीड़ा व कर्म-स्थली रही हो, महिला
सशक्तिकरण के लिए दिन-रात एक कर दिया गया हो, उसके बाद भी महिलाओं पर हो
रहे अत्याचार के जिम्मेदार गन्दी फिल्में और ज्ञापन है ।
जानिए भारत को बॉलीवुड ने दिया क्या है ?
1. #बलात्कार गैंग रेप करने के तरीके।
2. विवाह किये बिना लड़का लड़की का शारीरिक सम्बन्ध बनाना।
3. #विवाह के दौरान लड़की को मंडप से भगाना ।
4. चोरी #डकैती करने के तरीके।
5. भारतीय संस्कारों का उपहास उठाना।
6. लड़कियों को छोटे कपड़े पहने की सीख दे उसे फैशन का नाम देना।
7. दारू #सिगरेट चरस गांजा कैसे पिया और लाया जाये।
8. #गुंडागर्दी कर के हफ्ता वसूली करना।
9. भगवान का मजाक बनाना और अपमानित करना।
10. पूजा पाठ यज्ञ करना पाखण्ड है व नमाज पढ़ना ईश्वर की सच्ची पूजा है।
11. भारतीयों को #अंग्रेज बनाना।
12. भारतीय #संस्कृति को #मूर्खता पूर्ण बताना और पश्चिमी संस्कृति को श्रेष्ठ बताना।
13. माँ बाप को वृध्दाश्रम छोड़ के आना।
14. #गाय पालन को मजाक दिखाना और कुत्तों को उनसे श्रेष्ठ बताना और पालना सिखाना।
15. रोटी हरी सब्जी खाना गलत बल्कि रेस्टोरेंट में पिज्जा बर्गर #कोल्ड_ड्रिंक और नॉन वेज खाना श्रेष्ठ है।
16.
#पंडितों को जोकर के रूप में दिखाना, चोटी रखना या यज्ञोपवीत पहनना
मूर्खता है मगर बालों के अजीबों गरीब स्टाइल (गजनी) रखना व क्रॉस पहनना
श्रेष्ठ है उससे आप सभ्य लगते हैं ।
17. शुद्ध हिन्दी या संस्कृत बोलना हास्य वाली बात है और उर्दू या अंग्रेजी बोलना सभ्य पढ़ा-लिखा और अमीरी वाली बात।
18.हिन्दू देवी-देवताओं और हिन्दू साधू-संतों का अपमान करने और अल्लाह और मोलवियों की बढ़ाई करना ।
हमारे
देश की युवा पीढ़ी बॉलीवुड को और उसके अभिनेता और #अभिनेत्रियों का अपना
आदर्श मानती है…..भोले हिन्दू फिल्म देखने के बाद गले में क्रोस मुल्ले
जैसी छोटी सी दाड़ी रख कर
 खुद को मॉडर्न समझते हैं
हिन्दू युथ के रगोें में धीमा जहर भरा जा रहा है।
फिल्म जेहाद
अगर यही बॉलीवुड देश की संस्कृति सभ्यता दिखाए ..
तो सत्य मानिये हमारी #युवा पीढ़ी अपने रास्ते से कभी नही भटकेगी ।
अधिकतर फिल्मों में #हिन्दू नास्तिक मिलेगा या धर्म का उपहास करता हुआ कोई कारनामा दिखेगा ।
फिल्मों
में #हिन्दूधर्म के देवी-देवताओं का अपमान करना, #साधू-संतों का मजाक
उड़ना, मंदिरों में जाना अंधश्रद्धा बताना, स्त्री को भोग्या दिखाना आदि आदि
एक सोची समझी साजिश है।
 #बॉलीवुड द्वारा देशवासियों को मीठा जहर दिया जा रहा है जिससे भारतीय संस्कृति को तोड़ने का काम किया जा रहा है ।
देश को फिर से गुलामी की जंजीरों में जकड़ने की साजिश राष्ट्रविरोधी ताकतों द्वारा देश के अंदर ही चल रही है।
अतः हर #हिन्दुस्तानी इस मीठे जहर से सावधान रहें ।
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करोड़ो जनता पर हो रहे अन्याय को रोकने हेतु पत्र

करोड़ो जनता पर हो रहे अन्याय को रोकने हेतु पत्र
13 मई 2017
जन
जागरण मंच एवं हिन्दू मुस्लिम एकता मंच ने 8 मई को जंतर-मंतर पर विशाल
सत्याग्रह किया एवं बाद में उनके द्वारा सभी देशों के सभी पंथों के
प्रसिद्ध धर्मगुरुओं, संतों ,महात्माओं , गणमान्य  व्यक्तियों एवं  भारत
में स्थित सभी देशों के राजदूतों को एक पत्र जारी कर प्रेषित किया जा रहा
है  I
इस पत्र को UNO कार्यालय, मानवाधिकार आयोग, भारत के राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री को ज्ञापन दिया जा रहा है I
विषय –विश्व मानवता के प्रतिनिधि संतों और करोड़ो जनता पर हो रहे अन्याय को रोकने हेतु पत्र
आदरणीय
महोदय जी,

अंतर्राष्ट्रीय
षड़यंत्र और स्वार्थी धर्म विमुख राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण आज विश्व
मानवता के कल्याण में रात दिन लगे हुए विशेष वर्ग के लोगों के साथ अन्याय
हो रहा है । भारत के विश्व प्रसिद्ध संत के मामले में,आज इस सबसे बड़े
एतिहासिक अन्याय के विरोध में 3 -4 वर्षों से करोड़ो जनता न्याय के लिए धरने
प्रदर्शन रैलियाँ आयोजित कर रही है। यह मानव सभ्यता के पतन और विनाश का
सूचक है । भारत के ये विश्व प्रसिद्ध मार्गदर्शक  संत विश्व कल्याण विश्व
बंधुत्व के सिद्धांतों के सबसे बड़े प्रचारक है उनके करोड़ो अनुयायी है।

पिछले
10 -15 वर्षो में संयुक्त राष्ट्र संघ UNO अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
को वैश्विक समस्याओं पर गंभीर आलोचनाओं का शिकार होना, सम्पूर्ण मानवता के
हित में निष्पक्षता के साथ कार्य नहीं करने के कारण और अनेक गंभीर वैश्विक
समस्याओं में विफलता के कारण और अनावश्यक आर्थिक खर्च के कारण अनेक देशों
में हिंसक प्रदर्शन जनता द्वारा किये गए हैं ।
पिछले
17 वर्षों से युवाओं की आत्महत्या विश्व की सबसे बड़ी समस्या बन गयी है ।
इंटरपोल रिपोर्ट सन् 2008 के अनुसार विकसित देशों में भारत की अपेक्षा
प्रति एक लाख जनसंख्या पर पुलिस हजार गुना और अपराध लाख गुना अधिक है ।
आत्मघाती हमलों में पाकिस्तान व इराक सबसे आगे है ।
दो
अंतर्राष्ट्रीय महाशक्तियों के वर्चस्व में पिछले 7 -8 वर्षों में लीबिया
,सीरिया ,मिश्र देशों में लाखों निर्दोष मासूम जनता मार दी गयी है,लाखों
जनता शिविरों में नारकीय जीवन जी रही है ,बड़े –बड़े शहर कब्रिस्तान खण्डर बन
गए हैं ।
वैदिक
ज्ञान अनुसार धर्मनिष्ठ मनुष्य सद्गति पाते हैं, शान्ति को प्राप्त होते
हैं किन्तु धर्मविमुख मनुष्य लम्बी आयु वाले भूत, प्रेत, पिशाच, डाकिनी,
शाकिनी बन कर भूख प्यास से तड़पने पर मजबूर होते हैं वे वातावरण में अशान्ति
बढ़ाते हैं ,उन्हें केवल मल – मूत्र पान करने का अधिकार होता है वे अगला
जन्म लेने के लिए लाचार है । संतुलन के लिए विज्ञानमयी प्रकृति का
न्यायकारी नियम है ।
भारत
में पिछले 7-8 वर्षो में इन्ही अंतर्राष्ट्रीय षड़यंत्रकारी शक्तियों को
विफल करके देशभक्त हिन्दू संगठनों ने देशद्रोहियों को अच्छा सबक सिखाया ।
भ्रष्टाचार,सामाजिक क्रान्ति के नाम पर धर्म विमुख इन देशद्रोहियों की धुन पर पूरे भारत की जनता आँख बंद करके नाच रही थी।
कुछ
अंतर्राष्ट्रीय राजनेता ,हिन्दू जनता और भारत के मामले में दोहरे  मापदंड
अपना कर सम्पूर्ण मानवता का विनाश करने के लिए तत्पर है । संतो की शरण में
भारत में अनगिणत शासक हो गए जिनके अखण्ड राज्य में युगों- युगों तक देवता
दुःख और अधर्म खोज नहीं पाए ,निराश होकर लौट गए ।
पिछले
3-4 वर्षों में राजनीति के प्रभाव में संत आशारामजी बापू के सत्संग के
अभाव  में भारत की राजधानी दिल्ली में बलात्कार तीन गुना बढ़ गए और छेड़खानी
की घटनाए छह गुना बढ़ गयी है ।
संयुक्त
राष्ट्र संघ UNO ,Unicef की सन् 2004 की रिपोर्ट के अनुसार विकसित
राष्ट्रों के किशोर और किशोरियाँ मानसिक रोगों और यौन रोगों से ग्रस्त हैं
उनके सुधार कार्यक्रमों और अस्पतालों पर सरकार बहुत बड़ा बजट करोड़ो अरबों
रुपयाँ खर्च करती है । विकसित राष्ट्र आर्थिक संकट से ग्रस्त है समस्याएं
और विकराल हो रही है ।
संत
आशारामजी बापू की प्रेरणा से अनेक संस्थाएं इन  समस्याओं से निपटने वाली
बड़ी संस्था के रूप में उपयोगी सिद्ध हो रही हैं,ये बिना चन्दा मांगे बिना
गुरु दक्षिणा लिए सामाजिक कार्य कर रहे हैं । सम्पूर्ण मानवता के कल्याण और
विश्व बंधुत्व के दैवी कार्यो को
www.mppd.org पर देख सकते हैं ।
संत
पशुता और मनुष्यता में अंतर सिखाते हैं । ज्ञान और अज्ञान में अंतर सिखाते
हैं । मनुष्य जीवन का एकमात्र लक्ष्य ईश्वर प्राप्ति है । इस हेतु सेवा
कार्य करवाते हैं । इनके करोड़ो अनुयायी गरीब आदिवासी क्षेत्रों में भण्डारे
करते हैं । व्यापक रूप से व्यसन मुक्ति अभियान ,गर्भ पात विरोधी अभियान
,नि:शुल्क चिकित्सा शिविर ,बाढ़ ,भूकम्प आपदा शिविर आदि आयोजित करते है ।
मानव
सभ्यता को बचाने हेतु संयुक्त राष्ट्र संघ अपने सभी उपक्रमों में शिक्षा
कार्यक्रमों में संत श्री आशारामजी बापू आश्रम से प्रकाशित Bal Sanskar बाल
संस्कार पुस्तकों को एवम दिव्य प्रेरणा प्रकाश divine inspiration,the
secret of eternal energy पुस्तकें लागू करने की कृपा करें ।
संत
आशारामजी बापू को सुरक्षा प्रदान कर उनके सत्संग आयोजन की बाधाओं को दूर
करें । स्वयं संज्ञान लेकर सक्षम अधिकारी इस हेतु शीघ्रातिशीघ्र कार्यवाही
करेंगे ऐसी हमें अपेक्षा है।
कई बुद्धिजीवी ,वैज्ञानिक ,डाक्टर ,ओरा विशेषज्ञ संत आशारामजी बापू के दैवी कार्यो से आश्चर्यचकित हैं। करोड़ो लोगो के अनुभव है ।
संत
आशारामजी बापू के करोड़ों करोड़ों अनुयायी संत  आशारामजी बापू की सुरक्षा और
उनके सत्संग कार्यक्रम की मांग कर रहे हैं,जेल से उनकी सम्मानपूर्वक रिहाई
की मांग कर रहे हैं ।
संत
आशारामजी बापू निर्दोष हैं उन्हें राजनीतिक षड़यंत्र करके फँसाया गया है ।
विश्व प्रसिद्ध संत आशारामजी बापू 3 वर्ष 6 माह से भारत की जोधपुर जेल में
बंद है । उन पर नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार का आरोप लगा है । पीड़ित लड़की
की मेडिकल रिपोर्ट में लड़की कुवांरी पाई गयी है ,खरोच या छेड़खानी के कोई
निशान शरीर पर नहीं पाए गए हैं। संत आशारामजी बापू की उम्र 81 वर्ष की है ,
जमानत उनका अधिकार है लेकिन उन्हें उनके अधिकारों से वंचित किया गया है ।
संत
आशारामजी बापू पर पोक्सो धारा लगाई गयी है जबकि पीड़ित पक्ष की लड़की की
उम्र प्राथमिक विद्यालय के अनुसार बालिग है । पीड़ित लड़की की मेडिकल रिपोर्ट
,विद्यालय की जन्म तिथि प्रतिलिपि संलग्न है ।
धन्यवाद।
आपका आभारी, बम बम ठाकुर ,
दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष, जन जागरण मंच एवं हिन्दू मुस्लिम एकता मंच
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क्रांतिकारी बालकृष्ण चाफ़ेकर बलिदान दिवस 12 मई

क्रांतिकारी बालकृष्ण चापेकर बलिदान दिवस 12 मई
 आज समाज का दुर्भाग्य है कि हमारी दिव्य संस्कृति का हंसी-मजाक उड़ाने वाले #अभिनेताओं और #अभिनेत्रियों
का
बर्थडे तो याद रहता है पर देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का #बलिदान
देने वाले वीर क्रन्तिकारियों की जयंती और बलिदान दिवस का पता तक नहीं होता
दामोदर, बालकृष्ण और वासुदेव चापेकर
अगर
वे देश को #गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिये अपने प्राणों की बलि
नही देते तो आज हम घरों में चैन से नही बैठे होते,आज भी हम गुलाम ही होते ।
आइये जानते है वीर बहादुर बालकृष्ण चापेकर और उनके भाइयों के जीवनकाल का इतिहास…
 #चापेकर बंधु #दामोदर हरि चापेकर, #बालकृष्ण हरि चापेकर तथा वासुदेव हरि
चापेकर को संयुक्त रूप से कहा जाता हैं। ये तीनों भाई #लोकमान्य बाल गंगाधर
तिलक के सम्पर्क में थे। तीनों भाई तिलक जी को गुरुवत्‌ सम्मान देते थे।
पुणे के तत्कालीन जिलाधिकारी #वाल्टर #चार्ल्स रैण्ड ने प्लेग समिति के
प्रमुख के रूप में पुणे में भारतीयों पर बहुत अत्याचार किए। इसकी बालगंगाधर
तिलक एवं आगरकर जी ने भारी आलोचना की जिससे उन्हें जेल में डाल दिया गया।
दामोदर हरि चाफेकर ने 22 जून 1897 को रैंड को गोली मारकर हत्या कर दी।
परिचय
चाफेकर
बंधु महाराष्ट्र के पुणे के पास चिंचवड़ नामक गाँव के निवासी थे। 22 जून
1897 को रैंड को मौत के घाट उतार कर भारत की आजादी की लड़ाई में प्रथम
क्रांतिकारी धमाका करने वाले वीर दामोदर पंत चाफेकर का जन्म 24 जून 1869 को
पुणे के ग्राम चिंचवड़ में प्रसिद्ध कीर्तनकार हरिपंत चाफेकर के ज्येष्ठ
पुत्र के रूप में हुआ था। उनके दो छोटे भाई क्रमशः बालकृष्ण चाफेकर एवं
वसुदेव चाफेकर थे। बचपन से ही सैनिक बनने की इच्छा दामोदर पंत के मन में
थी, विरासत में कीर्तनकार का यश-ज्ञान मिला ही था। महर्षि पटवर्धन एवं
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक उनके आदर्श थे।
तिलक
जी की प्रेरणा से उन्होंने युवकों का एक संगठन व्यायाम मंडल तैयार किया।
ब्रितानिया हुकूमत के प्रति उनके मन में बाल्यकाल से ही तिरस्कार का भाव
था। दामोदर पंत ने ही बंबई में रानी विक्टोरिया के पुतले पर तारकोल पोत कर,
गले में जूतों की माला पहना कर अपना रोष प्रकट किया था। 1894 से चाफेकर
बंधुओं ने पूणे में प्रति वर्ष शिवाजी एवं गणपति समारोह का आयोजन प्रारंभ
कर दिया था। इन समारोहों में चाफेकर बंधु शिवाजी श्लोक एवं गणपति श्लोक का
पाठ करते थे।
शिवाजी
श्लोक के अनुसार – भांड की तरह शिवाजी की कहानी दोहराने मात्र से
स्वाधीनता प्राप्त नहीं की जा सकती । आवश्यकता इस बात की है कि शिवाजी और
बाजी की तरह तेजी के साथ काम किए जाएं । आज हर भले आदमी को तलवार और ढाल
पकड़नी चाहिए, यह जानते हुए कि हमें राष्ट्रीय संग्राम में जीवन का जोखिम
उठाना होगा ।  हम धरती पर उन दुश्मनों का खून बहा देंगे, जो हमारे धर्म का
विनाश कर रहे हैं। हम तो मारकर मर जाएंगे, लेकिन तुम औरतों की तरह सिर्फ
कहानियां सुनते रहोगे ।
गणपति श्लोक में धर्म और गाय
की रक्षा के लिए कहा गया कि- उफ! ये अंग्रेज कसाइयों की तरह गाय और बछड़ों
को मार रहे हैं, उन्हें इस संकट से मुक्त कराओ। मरो, लेकिन अंग्रेजों को
मारकर। नपुंसक होकर धरती पर बोझ न बनो। इस देश को हिंदुस्तान कहा जाता है,
अंग्रेज भला किस तरह यहां राज कर सकते हैं ???
कार्य
सन्‌
1897 में पुणे नगर प्लेग जैसी भयंकर बीमारी से पीड़ित था। इस रोग की
भयावहता से भारतीय जनमानस अंजान था। ब्रितानिया हुकूमत ने पहले तो प्लेग
फैलने की परवाह नहीं की, बाद में प्लेग के निवारण के नाम पर अधिकारियों को
विशेष अधिकार सौंप दिए। पुणे में डब्ल्यू सी रैंड ने जनता पर जुल्म ढाना
शुरू कर दिया । प्लेग निवारण के नाम पर घर से पुरुषों की बेदखली, स्त्रियों
से बलात्कार और घर के सामानों की चोरी जैसे काम गोरे सिपाहियों ने जमकर
किए। जो जनता के लिए रैंड प्लेग से भी भयावह हो गये ।
 वाल्टर
चार्ल्स रैण्ड तथा आयर्स्ट-ये दोनों अंग्रेज अधिकारी जूते पहनकर ही
हिन्दुआें के पूजाघरों में घुस जाते थे। प्लेग पीड़ितों की सहायता की जगह
लोगों को प्रताड़ित करना ही अपना अधिकार समझते थे।
इसी
अत्याचार-अन्याय के सन्दर्भ में एक दिन तिलक जी ने चाफेकर बन्धुओं से कहा,
“शिवाजी ने अपने समय में अत्याचार का विरोध किया था, किन्तु इस समय
अंग्रेजों के अत्याचार के विरोध में तुम लोग क्या कर रहे हो?’ तिलक जी की
हृदय भेदी वाणी व रैंडशाही की चपेट में आए भारतीयों के बहते आंसुओं, कलांत
चेहरों ने चाफेकर बंधुओं को विचलित कर दिया।
इसके बाद इन तीनों भाइयों ने क्रान्ति का मार्ग अपना लिया। संकल्प लिया कि इन दोनों अंग्रेज अधिकारियों को छोड़ेंगे नहीं।
संयोगवश
वह अवसर भी आया, जब 22 जून 1897 को पुणे के “गवर्नमेन्ट हाउस’ में महारानी
विक्टोरिया की षष्ठिपूर्ति के अवसर पर राज्यारोहण की हीरक जयन्ती मनायी
जाने वाली थी। इसमें वाल्टर चार्ल्स रैण्ड और आयर्स्ट भी शामिल हुए। दामोदर
हरि चापेकर और उनके भाई बालकृष्ण हरि चापेकर भी एक दोस्त विनायक रानडे के
साथ वहां पहुंच गए और इन दोनों अंग्रेज अधिकारियों के निकलने की प्रतीक्षा
करने लगे। रात 12 बजकर 10 मिनट पर रैण्ड और आयर्स्ट निकले और अपनी-अपनी
बग्घी पर सवार होकर चल पड़े। योजना के अनुसार दामोदर हरि चापेकर रैण्ड की
बग्घी के पीछे चढ़ गया और उसे #गोली मार दी, उधर बालकृष्ण हरि चापेकर ने भी
आर्यस्ट पर गोली चला दी। आयर्स्ट तो तुरन्त मर गया, किन्तु रैण्ड तीन दिन
बाद अस्पताल में चल बसा। पुणे की उत्पीड़ित जनता चाफेकर-बन्धुओं की
जय-जयकार कर उठी।
इस
तरह चाफेकर बंधुओं ने जनइच्छा को अपने पौरुष एवं साहस से पूरा करके भय और
आतंक की बदौलत शासन कर रहे अंग्रेजों के दिलोदिमाग में खौफ भर दिया।
गुप्तचर
अधीक्षक ब्रुइन ने घोषणा की कि इन फरार लोगों को गिरफ्तार कराने वाले को
20 हजार रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा। चाफेकर बन्धुओं के क्लब में ही दो
द्रविड़ बन्धु थे- गणेश शंकर द्रविड़ और रामचन्द्र द्रविड़। इन दोनों ने
पुरस्कार के लोभ में आकर अधीक्षक ब्रुइन को चाफेकर बन्धुओं का सुराग दे
दिया। इसके बाद दामोदर हरि चापेकर पकड़ लिए गए, पर बालकृष्ण हरि चापेकर
पुलिस के हाथ न लगे। सत्र न्यायाधीश ने दामोदर हरि चापेकर को फांसी की सजा
दी और उन्होंने मन्द मुस्कान के साथ यह सजा स्वीकार करली ।
कारागृह
में तिलक जी ने उनसे भेंट की और उन्हें “गीता’ प्रदान की। 18 अप्रैल 1898
को प्रात: वही “गीता’ पढ़ते हुए दामोदर हरि चाफेकर फांसीघर पहुंचे और फांसी
के तख्ते पर लटक गए। उस क्षण भी वह “गीता’ उनके हाथों में थी। इनका जन्म
25 जून 1869 को पुणे जिले के चिन्यकड़ नामक स्थान पर हुआ था।
ब्रितानिया
हुकूमत इनके पीछे पड़ गई थी । बालकृष्ण चाफेकर को जब यह पता चला कि उसको
गिरफ्तार न कर पाने से पुलिस उसके सगे-सम्बंधियों को सता रही है तो वह
स्वयं पुलिस थाने में उपस्थित हो गए।
अनन्तर
तीसरे भाई वासुदेव चापेकर ने अपने साथी #महादेव गोविन्द विनायक रानडे को
साथ लेकर उन गद्दार द्रविड़-बन्धुओं को जा घेरा और उन्हें गोली मार दी। वह 8
फरवरी 1899 की रात थी। अनन्तर वासुदेव चाफेकर को 8 मई को और बालकृष्ण
चापेकर को 12 मई 1899 को यरवदा कारागृह में फांसी दे दी गई।
 इनके साथी क्रांतिवीर महादेव गोविन्द विनायक रानडे को 10 मई 1899 को यरवदा कारागृह में ही फांसी दी गई।
तिलक
जी द्वारा प्रवर्तित “शिवाजी महोत्सव’ तथा “#गणपति-महोत्सव’ ने इन चारों
युवकों को देश के लिए कुछ कर गुजरने हेतु क्रांति-पथ का पथिक बनाया था।
उन्होंने #ब्रिटिश राज के आततायी व अत्याचारी अंग्रेज अधिकारियों को बता
दिया कि हम अंग्रेजों को अपने देश का शासक कभी नहीं स्वीकार करते और हम
तुम्हें गोली मारना अपना धर्म समझते हैं।
इस
प्रकार अपने जीवन-दान के लिए उन्होंने देश या समाज से कभी कोई प्रतिदान की
चाह नहीं रखी। वे महान #बलिदानी कभी यह कल्पना नहीं कर सकते थे कि यह देश
ऐसे #गद्दारों से भर जाएगा, जो भारतमाता की वन्दना करने से भी इनकार
करेंगे।
दामोदर
पंत चापेकर ने स्पष्ट रूप से लिखा था कि क्या किसी भी इतिहास प्रसिद्ध
व्यक्ति ने कभी नेशनल कांफ्रेस कर या भाषण देकर दुनिया को संगठित करने की
#कोशिश की है?
इसका उत्तर अवश्य ही “नहीं” में मिलेगा।
सख्त
अफसोस की बात है कि वर्तमान समय के हमारे शिक्षित लोगों में यह समझने की
भी अक्ल नहीं कि किसी भी देश की भलाई तभी होती है, जब करोड़ों गुणवान लोग
अपनी जिंदगी की परवाह न करके युद्ध क्षेत्र में मौत का सामना करते हैं ।
अन्याय के खिलाफ हरसंभव तरीके से प्रतिकार करने की शिक्षा हमें अपने इस
महान #योद्धाओं से मिलती है। चाफेकर बंधुओं द्वारा रैंड की हत्या रूपी किया
गया पहला धमाका #अंग्रेजों के प्रति उनकी गहरी नफरत का नतीजा था ।
आज
भी हम मानसिक रूप से तो अंगेजों के ही गुलाम हैं और जब तक हम खुद इन
गुलामी की जंजीरों को नहीं तोड़ेंगे तबतक हमें स्वन्तंत्रता दिलाने के लिए
अपने जीवन की परवाह न करने वाले वीर #शहीदों को सच्ची #श्रद्धांजलि नहीं
मिलेगी !!
इस
देश को तोड़ने,हमारी #संस्कृति की जडें खोखली करने कभी मुगल तो कभी अंग्रेज
आये और अब मिशनरियां लगी हैं हमें फिर से गुलामी की जंजीरें पहनाने में ।
अब समय आ चुका है कि जब #हिंदुओं को आपसी मनमुटाव भूलकर एक हो जाना चाहिए
नहीं तो फिर से गुलामी का जीवन जीने के लिए तैयार रहें ।
जागो हिन्दू !!!
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बांग्लादेश प्रधानमंत्री का खुलासा : मक्का में हिन्दू मंत्रों के उच्चारण की आती है ध्वनि

बांग्लादेश प्रधानमंत्री का खुलासा : मक्का में हिन्दू मंत्रों के उच्चारण की आती है ध्वनि
‘काबा’
अरब का प्राचीन #मन्दिर है। जो मक्का शहर में है। विक्रम की प्रथम शताब्दी
के आरम्भ में रोमक इतिहास #लेखक ‘द्यौद्रस् सलस्’ लिखता है – यहाँ इस देश
में एक मन्दिर है, जो अरबों का अत्यन्त #पूजनीय है। इस कथन से इस बात को बल
मिलता है कि काबा और भगवान शिव का कोई न कोई प्राचीन जुड़ाव जरूर है। पूरा
विश्‍व आज काबा के सच को जानने को #उत्सुक है किन्‍तु वर्तमान परिदृश्‍य
में काबा में #गैर-इस्‍लामिक या कहे कि गैर मुस्लिम का जाना प्रतिबंधित है
इस कारण काबा के अंदर क्या है और इसके पीछे के सच का खुलासा आज तक नहीं हो
पाया है।
sacred sound from kaba
दुनियाँ
में इस्लामिक #आतंक सबसे ज्यादा है । दुनियाँ का लगभग हर देश इस आतंक से
#ग्रस्त है, हर कोई इस्लामिक आतंक से लड़ रहा है। इस इस्लामिक आतंक का बस एक
#मक्सद है इस्लाम का प्रचार करना । इस्लाम के आकाओं के अनुसार इस्लाम
दुनियाँ में सबसे पुराना है ।
मुसलमान
कहते हैं कुरान परमात्मा की वाणी है जो #अनादि काल से चली आ रही है ।
लेकिन ये बात बिल्कुल आधारहीन है इसका कोई तर्क नहीं है । क्योंकि मुस्लिम
धर्म की स्थापना पैगंबर मोहम्मद ने 1400 साल पहले की थी और हमारे ग्रंथो के
अनुसार पृथ्वी पर सबसे पहले #हिन्दू धर्म (सनातन धर्म) की छाया के
सिद्धांत ही प्रतीत होते है जिसे कई देशों ने भी माना है ।
मुसलमानों
के तौर तरीके, रीति-रिवाज आदि हिन्दुओं जैसे ही हैं । हिन्दुओं से ही सीख
लेकर इन्होनें अपने हिसाब से इन्हें ढाल लिया है। जिसके सबूत कई जगहों पर
मिलते रहे हैं और कई लोगों ने इसकी #पुष्टि भी की है ।
अब
बांग्लादेश की #प्रधानमंत्री शेख हसीना ने खुद स्वीकारा है कि, सऊदी अरब
के मक्का में मुस्लिमों का जो मजहबी स्थल है, जिसे काबा के नाम से भी जानते
हैं उसमें से हिन्दू #मंत्रों की आवाज आती है । शेख हसीना ने बांग्लादेश
की एक बड़ी #न्यूज एजेंसी को दिए गए बयान में कहा कि मक्का से अलग अलग
मन्त्रों की आवाज आती है जैसे “ॐ” इत्यादि । इस बात की पुष्टि न्यूज एजेंसी
ने भी की है ।
मक्का मदीना का सच
मुसलमानों
के सबसे बड़े तीर्थ मक्का #मक्केश्वर महादेव का मंदिर था। वहाँ काले पत्थर
का विशाल #शिवलिंग था जो खंडित अवस्था में अब भी वहाँ है। हज के समय संगे
अस्वद (संग अर्थात् पत्थर, अस्वद अर्थात् अश्वेत यानी काला) कहकर मुसलमान
उसे ही #पूजते और चूमते हैं।
इस
सम्‍बन्‍ध में #प्रख्‍यात प्रसिद्ध इतिहासकार स्व. पी.एन.ओक ने अपनी
पुस्तक ‘वैदिक विश्व राष्ट्र का इतिहास’ में समझाया है कि मक्का और उस
इलाके में इस्लाम के आने से पहले #मूर्ति पूजा होती थी। हिंदू देवी-देवताओं
के मंदिर थे, गहन #रिसर्च के बाद उन्होंने यह भी दावा किया कि काबा में
भगवान शिव का #ज्योतिर्लिंग है। पैगंबर मोहम्मद ने हमला कर मक्का की
मूर्तियां #तोड़ी थी। यूनान और भारत में बहुतायत में मूर्ति पूजा की जाती
रही है, पूर्व में इन दोनों ही देशों की #सभ्यताओं का दूरस्थ इलाकों पर
प्रभाव था। ऐसे में दोनों ही इलाकों के कुछ विद्वान काबा में #मूर्ति पूजा
होने का तर्क देते हैं। हज करने वाले लोग काबा के पूर्वी कोने पर जड़े हुए
एक काले पत्थर के दर्शन को पवित्र मानते हैं जो कि हिन्‍दूओं का #पवित्र
शिवलिंग है। वास्‍तव में इस्लाम से पहले मिडल-ईस्ट में #पीगन जनजाति रहती
थी और वह हिंदू रीति-रिवाज को ही मानती थी।
एक
प्रसिद्ध मान्‍यता के अनुसार काबा में “पवित्र गंगा” है। जिसका निर्माण
#महापंडित रावण ने किया था, रावण शिव भक्त था वह शिव के साथ गंगा और
चन्द्रमा के ‍महत्व को समझता था और यह जानता था कि क‍भी #शिव को गंगा से
अलग नहीं किया जा सकता। जहाँ भी शिव होंगे, पवित्र गंगा की अवधारणा निश्चित
ही मौजूद होती है। काबा के पास भी एक पवित्र #झरना पाया जाता है, इसका
पानी भी पवित्र माना जाता है। इस्लामिक काल से पहले भी इसे पवित्र (आबे
जम-जम) ही माना जाता था। रावण की तपस्‍या से प्रसन्‍न होकर भगवान शिव ने
रावण को एक #शिवलिंग प्रदान किया जिसे लंका में स्‍थापित करने को कहा और
बाद में  जब रावण आकाश मार्ग से लंका की ओर जाता है पर रास्ते में कुछ ऐसे
हालात बनते हैं कि रावण को शिवलिंग #धरती पर ही रखना पड़ता है। वह दोबारा
शिवलिंग को उठाने की कोशिश करता है पर खूब प्रयत्न करने पर भी लिंग उस
स्थान से हिलता नहीं। #वेंकटेश पण्डित के अनुसार यह स्थान वर्तमान में सऊदी
अरब के मक्का नामक स्थान पर स्थित है। सऊदी अरब के पास ही यमन नामक राज्य
भी है जहाँ #श्री कृष्ण ने कालयवन नामक राक्षस का विनाश किया था। जिसका
जिक्र #श्रीमद्भगवत पुराण में भी आता है।
पहले
राजा भोज ने मक्का में जाकर वहां स्थित #प्रसिद्ध शिवलिंग मक्केश्वर
महादेव का पूजन किया था, इसका वर्णन भविष्य-पुराण में निम्न प्रकार है :-
“नृपश्चैवमहादेवं मरुस्थल निवासिनं !
गंगाजलैश्च संस्नाप्य पंचगव्य समन्विते :
चंद्नादीभीराम्भ्यचर्य तुष्टाव मनसा हरम !
इतिश्रुत्वा स्वयं देव: शब्दमाह नृपाय तं!
गन्तव्यम भोज राजेन महाकालेश्वर स्थले !! “
इस्लाम
नींव इस आधार पर रखी गई कि दूसरों के धर्म का #अनादर करों और उनको
#नेस्‍तानाबूत और पवित्र स्थलों को खंडित कर वहाँ मस्जिद और मकबरे का
निर्माण किया  जाए। इस काम में बाधा डालने वाले जो लोग भी सामने आये उन
लोगों को #मौत के घाट उतार दिया जाये। भले ही वे लोग मुस्लिमों को परेशान न
करते हो।
1400
साल पहले मुहम्‍मद साहब और #मुसलमानों के हमले से मक्‍का और मदीना के आस
पास का पूरा इतिहास बदल दिया गया। इस्लाम एक #तलवार पे बना धर्म था है और
रहेगा। पी.एन.ओक ने सिद्ध कर दिया है मक्केश्वर शिवलिंग ही हजे अस्वद है।
मुसलमानों के सबसे बड़े तीर्थ मक्का #मक्केश्वर महादेव का मंदिर था। वहां
काले पत्थर का विशाल शिवलिंग था जो #खंडित अवस्था में अब भी वहां है। हज के
समय संगे अस्वद (संग अर्थात पत्थर, अस्वद अर्थात अश्वेत यानी काला) कहकर
मुसलमान उसे ही #पूजते और चूमते हैं।
द्वारिका
शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य जी का मानना है कि #मक्का में मक्केश्वर
महादेव #मंदिर है। मुहम्मद साहब भी शैव थे, इसलिए वे मक्केश्वर महादेव को
मानते थे। एक बार वहां लोगों ने बुद्ध की मूर्ति लगा दी थी, वह इसके बहुत
विरोधी थे। अरब में मुहम्मद पैगम्बर से पूर्व #शिवलिंग को ‘लात’ कहा जाता
था। मक्का के कावा में जिस काले पत्थर की उपासना की जाती रही है, भविष्य
पुराण में उसका उल्लेख #मक्केश्वर के रूप में हुआ है। इस्लाम के प्रसार से
पहले #इजराइल और अन्य #यहूदियों द्वारा इसकी पूजा किए जाने के स्पष्ट
प्रमाण मिले हैं।
इराक
और सीरिया में #सुबी नाम से एक जाति थी यही #साबिईन है। इन साबिईन को अरब
के लोग #बहुदेववादी मानते थे। कहते हैं कि साबिईन अर्थात नूह की कौम। माना
जाता है कि भारतीय मूल के लोग बहुत बड़ी संख्या में यमन में आबाद थे, जहां
आज भी श्याम और हिन्द नामक किले #मौजूद हैं। विद्वानों के अनुसार सऊदी अरब
के मक्का में जो काबा है, वहां कभी प्राचीनकाल में ‘मुक्तेश्वर’ नामक एक
शिवलिंग था जिसे बाद में ‘मक्केश्‍वर’ कहा जाने लगा।
अरब के मक्का नामक स्थान पर स्थित है ‘मक्केश्वर लिंग’ (मक्केश्वर महादेव)
मक्का
के गेट पर साफ-साफ लिखा था कि #काफिरों का अंदर जाना गैर-कानूनी है। कहा
जा रहा है अब इस बोर्ड को उतार दिया गया है और लिख दिया है #नॉन-मुस्लिम्स
का अंदर जाना मना है। इसका मतलब है कि ईसाई, जैनी या बौद्ध धर्म को भी
#मानने वाले इसके अंदर नहीं जा सकते हैं।
मक्का मदीना के शिवलिंग का रहस्य क्‍या है ? इसे इस्‍लाम पंथियों द्वारा सदा से छिपाया जा रहा है।
मुसलमानों
के पैगम्‍बर मुहम्‍मद ने मदीना से मक्का के शांतिप्रिय #मूर्तिपूजकों पर
हमला किया और जबरदस्‍त नरसंहार किया। मक्‍का का मदीना का अपना अलग अस्तित्व
था किन्‍तु मुहम्‍मद साहब के हमले के बाद मक्‍का मदीना को एक साथ जोड़कर
देखा जाने लगा। जबकि मक्‍का के लोग जो कि शिव के उपासक माने जाते हैं।
मुहम्‍मद की टोली ने मक्‍का में स्‍थापित कर वहां पर स्थापित की हुई 360
में से 359 मूर्तियाँ #नष्ट कर दी और सिर्फ काला पत्थर #सुरक्षित रखा जिसको
आज भी मुस्‍लिमों द्वारा पूजा जाता है।
उसके
अलावा अल-उज्जा, अल-लात और मनात नाम की #तीन देवियों के मंदिरों को नष्ट
करने का आदेश भी मुहम्मद ने दिया और आज उन मंदिरों का नामों निशान नही है
(हिशम इब्न अल-कलबी, 25-26)। इतिहास में यह किसी हिन्दू मंदिर पर सबसे पहला
इस्लामिक आतंकवादी हमला था। उस काले पत्थर की तरफ आज भी मुस्लिम
#श्रद्धालु अपना शीश झुकाते हैं । किसी #हिंदू पूजा के दौरान बिना सिला हुआ
वस्त्र या धोती पहनते हैं, उसी तरह हज के दौरान भी बिना सिला हुआ सफेद
सूती कपड़ा ही पहना जाता है।
जिस
प्रकार हिंदुओं की मान्यता होती है कि गंगा का पानी #शुद्ध होता है ठीक
उसी प्रकार मुस्लिम भी #आबे जम-जम के पानी को पाक मानते हैं। जिस तरह हिंदू
#गंगा स्नान के बाद इसके पानी को भरकर अपने घर लाते हैं ठीक उसी प्रकार
मुस्लिम भी मक्का के #आबे जम-जम का पानी भर कर अपने घर ले जाते हैं। ये भी
एक समानता है कि गंगा को मुस्लिम भी पाक मानते हैं और इसकी अराधना किसी न
किसी रूप में जरूर करते हैं।
तो
पाठक समझ गए होंगे कि #हिन्दू धर्म ही सनातन धर्म है जो सृष्टि की
उत्पत्ति करने के समय से है और बाद में अनेक धर्म, महजब, पंथ बने है अतः
हिंदुओं को अपने #सनातन धर्म पर #गर्व करना चाहिए और उसके खिलाफ जो भी
#षड्यंत्र हो रहे है उसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
जय हिन्द!!
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जनता का फूटा गुस्सा बोले न्यायप्रणाली कर रही है पक्षपाती न्याय

🚩 जनता का फूटा गुस्सा बोले न्यायप्रणाली कर रही है पक्षपाती न्याय
30 अप्रैल 2017
🚩रविवार को ट्वीटर पर #BiasedJustice हैशटैग टॉप ट्रेंड में चल रहा था जिसके द्वारा जनता का आक्रोश देखते ही बनता था ।
🚩सबकी
एक ही आवाज थी कि नेताओं, अभिनेताओं, अमीरों, पत्रकारों को अपराध साबित
होने पर भी जमानत आसानी से मिल जाती है लेकिन आज भी देशभर की जेलों में
बहुत सारे निर्दोष लोग ऐसे हैं जो बिना सबूत सालों से जेल में बन्द है
लेकिन उनको जमानत तक नही मिल पा रही है।
#BiasedJustice
🚩आइये जाने कि क्या कहना चाहते हैं ये लोग…
🚩1.पूनम राजपूत लिखती हैं कि क्या #BiasedJustice से ऐसा नहीं लगता, जैसे लोकशाही में लोकतंत्र व मानवाधिकारों का हनन हो रहा है?

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🚩2 – आशी मोंगा का कहना है कि ऐसा कानून किस काम का जो सत्ता व धन के आगे लाचार हो जाए! फिर न्याय कौन करेगा? #BiasedJustice

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🚩3.गार्गी लिखती हैं कि हीरो को छींक भी आये तो बेल; वही भयंकर बीमारी से त्रस्त संत आसारामजी बापू को अब तक जेल! #BiasedJustice

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🚩4.
सलोना लिखती हैं कि जब NIA ने कहा कि दक्षिणपंथी संगठन का मालेगांव के
धमाके में हाथ, तो कर्नल पुरोहित को बेल क्यों नहीं?? #BiasedJustice

🚩5.
प्रेम चौधरी ने शिवसेना के Sanjay Raut का बयान लेकर लिखा कि 100 गुनहगार
भले छूट जायें पर 1 बेगुनाह को सजा नही हो, फिर संत आशारामजी बापू को जेल
क्यो? #BiasedJustice

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🚩6.
किरण राजदेव का कहना है कि 9 साल से साध्वी प्रज्ञा जी को बिना सबूत सजा
दी गई, क्या उनका सम्मान, स्वास्थ्य व समय कोई लौटा पाएगा? #BiasedJustice

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🚩7.राघवेंद्र
ने लिखा कि बड़े से बड़े आपराधियों को बेल ले कर छूटते देखा है, पर दोष
सिद्ध न होने पर भी निर्दोष Asaram Bapu Ji को जेल क्यों?
#BiasedJustice

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🚩8.स्वाति लिखती हैं कि पैसे के बल पर अपराधी आजादी पा रहे!
निर्दोष हिन्दू संत झूठे आरोपों में जेल पा रहे!! #BiasedJustice

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🚩9.मोहिनी शर्मा कहती हैं कि हीरो ,नेता Fake Medical Certificate बनाकर लेते बेल,
वही बीमार संत आसाराम
जी बापू को अब तक जेल ?? #BiasedJustice

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🚩10
– अमृत प्रजापति ने लिखा कि इंसानो में तो भेदभाव हो ही रहा है, अब क्या
इंसाफ में भी भेदभाव करेगा क्या यह देश का संविधान? #BiasedJustice

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🚩11. भावेन उतरेजा लिखते हैं कि Asaram Bapu Ji को अभी तक न्याय न देकर कानून का स्पष्ट पक्षपात जनता के सामने है! #BiasedJustice

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🚩इस तरह से हजारों ट्वीट्स द्वारा जनता न्यायप्रणाली से तरह-तरह के सवाल कर रही है।
🚩क्या इसका कोई जवाब है न्याय तंत्र के पास ???
🚩गौरतलब
है कि रेप आरोपी पत्रकार तरुण तेजपाल, विजय माल्या, 950 करोड़ चारा
घोटालेबाज लालू प्रसाद यादव, , #बोफोर्स_घोटाला, कॉमनवेल्थ_गेम्स_घोटाला,
2जी_स्पेक्ट्रम_घोटाला, अनाज घोटला, कोयला घोटाला आदि आदि अरबो-खरबों के
बड़े बड़े घोटालेबाज तो आराम से बाहर घूम रहे हैं लेकिन वहीं दूसरी ओर अभीतक
एक भी आरोप सिद्ध नही हुआ है वह शंकरचार्य अमृतानन्द जी, कर्नल पुरोहित,
संत आसारामजी बापू, श्री नारायण साईं, धनंजय देसाई आदि आदि हिंदुत्वनिष्ठ
बिना सबूत सालों से जेल में हैं जबकि इन सभी हिन्दुत्वनिष्ठों को फंसाने के
सैकड़ों सबूत भी मिल चुके हैं । उसके बावजूद भी कोर्ट द्वारा इन्हें जमानत
तक नहीं दी जा रही है ।
🚩आपको
बता दें कि दो दिन पहले शुक्रवार को भी ट्वीटर पर लोगों का ऐसे ही गुस्सा
फूटा था और उन्होंने #पक्षपाती_न्यायव्यवस्था हैशटैग द्वारा हजारों ट्वीट्स
की थी ।
🚩अब देखना ये है इन हजारों-लाखों लोगों की आवाज सरकार और न्यायालय कब सुनती है ???
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अहमदाबाद में 7 वर्ष की बच्ची के साथ मदरसा के मौलवी ने किया रेप, मीडिया ने साधी चुप्पी

अहमदाबाद में 7 वर्ष की बच्ची के साथ मदरसा के मौलवी ने किया रेप, मीडिया ने साधी चुप्पी
प्रिंट
मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो, किसी हिन्दू साधु-संत के ऊपर आरोप
लगते ही उनके खिलाफ मीडिया ट्रायल चालू कर देती है जैसे कि उनके ऊपर आरोप
सिद्ध ही हो चुका हो ।
rape by maulvi
लेकिन
वहीं दूसरी ओर इस्लाम धर्म के मौलवियों या ईसाई धर्म के पादरियों पर जब
आरोप लगता है तो मीडिया कहीं पर भी कोई खबर प्रसारित नही करती ।
गुजरात
अहमदाबाद ईसनपुर इलाके में 27 अप्रैल 2017 (गुरुवार) को मदरसे में गरीब
परिवार की नाबालिग सात वर्षीय बच्ची सुबह पढ़ने गई थी, उस समय 27 वर्षीय
मौलवी #महम्मद मुज्जफर हुसैन शेख बच्ची के पास आया और उसको #मदरसे के पास
#बाथरूम में लेकर गया, वहाँ उसने बच्ची के साथ जबरदस्ती #बलात्कार किया,
#बच्ची ने जोर-जोर से चिल्लाना चालू किया, लोग बाथरूम के पास आ गए, #मौलवी
वहाँ से भाग गया।
बच्ची के
माता-पिता भी #मदरसे में आ पहुँचे, बच्ची के माता-पिता ने #ईसनपुर पुलिस
स्टेशन में एफ.आई.आर. लिखवाई, पुलिस ने मौलवी महम्मद हुसैन को गिरफ्तार कर
लिया, अब आगे की कार्यवाही चल रही है ।
इतनी
बड़ी घटना है लेकिन किसी भी #मीडिया में ये खबर नहीं चल रही है । लेकिन अगर
मौलवी की जगह कोई हिन्दू धर्म के गुरु होते और उनके ऊपर कोई #झूठा आरोप भी
लगा दे तो भी मीडिया दिन रात दिखाती, डिबेट बैठाती और बताती कि हिन्दू
धर्म के सभी साधु-संत खराब हैं ।
अब आपके मन में प्रश्न उठता होगा कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?
हम
आपको बताते हैं कि $हिन्दू धर्म सनातन धर्म है । उसको मिटाने के लिए
सदियों से दुष्ट प्रकृति के आसुरी स्वभाव के लोग पीछे पड़े हैं जैसे कि
भगवान श्री रामजी के समय रावण, कुंभकर्ण आदि, भगवान श्री कृष्ण के समय कंस,
कौरव आदि, छत्रपति #शिवाजी के समय मुगल और वर्तमान में ईसाई मिशनरियां और
मुस्लिम धर्मान्तरण वाले,विदेशी कम्पनियां और आतंकवादी आदि आदि ।
हिन्दू
धर्म जो #सनातन धर्म है, भारत की दिव्य संस्कृति है, उसको नष्ट करने के
लिए, पाश्चात्य संस्कृति हमारे ऊपर थोपने के लिए विदेशी लोग पुरजोश प्रयास
कर रहे हैं ।
हम
आपको बता दें कि मुस्लिम धर्म की स्थापना हुए 1400 साल हुए हैं और ईसाई
धर्म की स्थापना हुए 2017 साल हुए हैं, लेकिन हिन्दू धर्म तो सनातन धर्म है
। जबसे पृथ्वी की उत्पत्ति हुई है तबसे ही सनातन हिन्दू धर्म है । उस पर
जब विदेशी लोग कुठाराघात करते हैं, उसे बचाने के लिए हिन्दू धर्म के
साधु-संत आगे आते हैं ।  इसलिए #विदेशी लोग मीडिया को हिन्दू साधु-संतों को
बदनाम करने के लिए फन्ड देते हैं।
अब
सवाल उठता है कि आखिर वो हिन्दू साधु-संतों को बदनाम करने के लिए इतना
पैसा कहाँ से लाते होंगे और उससे उनको क्या फायदा होता होगा?
हम
आपको बता देते हैं कि भारतीय संस्कृति प्राचीन संस्कृति है और उसमें सभी
कार्य धर्म अनुसार किये जाते हैं ।  उसमें #दारू पीना, व्यसन करना, मांस
खाना, अर्धनग्न कपड़े पहनना, फैशन करना, #बॉय फ्रेंड- गर्ल्स फ्रेंड बनाना,
हत्या करना आदि हिन्दू संस्कृति में नहीं है ।
लेकिन
पश्चात संस्कृति में ये सब है और वे सब भारत पर थोपना चाहते  हैं । लेकिन
भारत में साधु-संत गाँव-गाँव, नगर-नगर जाकर लोगों  में जागृति लाते हैं,
हिन्दू संस्कृति की महिमा बताते हैं और #भारतवासियों को #पाश्चात्य
संस्कृति को अपनाने से होने वाली हानियों से अवगत करवाते हैं तो भारत के
लोग दारू, बीड़ी, सिगरेट, चरस, #अफीम, चाय आदि व्यसन छोड़ देते हैं, स्वस्थ
रहने के लिए घरेलू उपाय बताने पर #एलोपैथिक दवाइयां खरीदना बन्द कर देते
हैं, #सिनेमा में जाना, #सेक्सवर्धक सामग्री लेना बंद कर देते हैं, मांस
खाना बंद कर देते हैं, टूथपेस्ट, पफ, #पाऊडर आदि का उपयोग बंद कर देते हैं
 कहने का सार ये है कि
भारत की करोड़ो की जनता में साधु-संतो के कारण अपने धर्म के प्रति जागृति
आती है जिससे वे विदेशी सामान लेना बंद कर देते हैं और #हिन्दू #ईसाई या
#मुस्लिम धर्म में परिवर्तित होने से बच जाते हैं जिससे उनको #अरबों-खबरों
रूपयों का नुकसान होता है जिससे वे कुछ हजार करोड़ रुपये साधु-संतों और
हिन्दू कार्यकर्ताओं को बदनाम करने में लगा देते हैं जिससे लोगों का उनके
प्रति #श्रद्धाभाव नष्ट हो जाये और हिन्दू धर्म के प्रति जनता को विश्वास
कम होता जाए और पाश्चात्य संस्कृति के तरफ #आकर्षित होते जाएं और उनकी
विदेशी कंपनियों के सामान खरीदें और धर्मान्तरणवालों की भी दुकानें चलती
रहें । इसलिए वे मीडिया को फंडिग करके साधु-संतों को बदनाम करवाते हैं।
अब
हमारे पाठक समझ ही गए होंगे कि भारत में किस प्रकार का एक सुनियोजित
#षड्यंत्र चल रहा है और हमारी #संस्कृति को नष्ट करने के लिए राष्ट्रविरोधी
ताकतें काम कर रही हैं ।
आपने
देखा होगा कि जब #साध्वी प्रज्ञा और स्वामी #असीमानंद के ऊपर आरोप लगे थे
तब मीडिया ने उनके लिए कितनी खबरें चलाई थी लेकिन जैसे ही वे #निर्दोष छूटे
तो एक भी खबर नहीं दिखाई ।
“यह है मीडिया का हिन्दू #साधु-संतों के विरोधी रवैया।”
विदेशी
फंडिग से चलने वाली मीडिया किसी भी हिन्दू साधु-संत या कार्यकर्ताओं को
बदनाम करती है तो #हिंदुस्तानी #सावधान हो जाएँ और ऐसे चैनल्स को ब्लॉक कर
दें, केवल राष्ट्र हितैषी चैनल को ही देखें।
जय हिंद!!
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