innocent-is-not-getting-bail-convicted-sasikala-gets-parole

निर्दोषों को नहीं मिल रही है जमानत, दोषी शशिकला को मिल गई पैरोल

अक्टूबर 7,2017
🚩आय से अधिक संपत्ति के मामले में अदालत का फैसला आने में 19 साल का वक्त लगा, 19 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने वी .के. शशिकला को दोषी करार दिया और चार साल की सजा सुनाई है ।
🚩कर्नाटक जेल में बंद शशिकला को अपने बीमार पति से मिलने के लिए शुक्रवार को पांच दिन का पैरोल मिल गया है।
Innocent is not getting bail, convicted Sasikala gets parole

 

🚩पर जनता सवाल कर रही है कि ओडिसा के ओझर जेल में दारा सिंह(बजरंगदल) पिछले 18 सालों से सजा काट रहे हैं  जिन्हे अपने परिजनों से मिलने के लिए एक भी पैरोल नहीं मिली है और वहीं दूसरी तरफ वो शशिकला हैं  जिन्हें जेल में अभी 6 महीने हुए हैं उसको पैरोल दे दी गयी।
🚩दूसरा मामला हिन्दू संत आसारामजी बापू का है वे चार साल से अधिक समय से जोधपुर जेल में बंद हैं, उन पर अभी तक एक भी #आरोप #सिद्ध #नहीं #हुआ है, केवल #ट्रायल चल रहा है , उनकी उम्र 81 वर्ष है , उनका स्वास्थ्य भी काफी खराब रहता है लेकिन उनको इलाज कराने के लिए कुछ दिन के लिए भी #जमानत #नहीं मिल रही है, जबकि भारत के कानून के अनुसार जब तक दोष सिद्ध नहीं होता है तब तक उनको जमानत मिलती है लेकिन उनको जमानत नहीं मिल रही है ऐसी दोहरी नीति क्यों ?
🚩जबकि बापू #आसारामजी को #फंसाने के कई #सबूत भी मिले हैं और लड़की की #मेडिकल रिपोर्ट में एक खरोंच भी  नहीं पाई गई, मेडिकल में भी #क्लीन चिट मिल चुकी है, डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने केस पढ़कर बताया कि लड़की के #कॉल डिटल्स से पता चला कि जिस समय छेड़छाड़ी का आरोप लगाया है उस समय तो वहाँ थी ही नहीं, वो अपने मित्र से बात कर रही थी और बापू आसारामजी भी दूसरे कार्यक्रम में थे तो केस बनता ही नहीं है ।
🚩डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी  ने तो यहाँ तक कह दिया है कि मैंने तो #आशाराम बापू के जेल जाने से पहले ही  उनको बता दिया था कि आप जो #हिन्दू #धर्मपरिवर्तन कर चुके लाखों हिंदुओं की घर वापसी करवा रहे हो और धर्मपरिवर्तन पर #रोक #लगाई है इससे #वेटिकन सिटी बहुत नाराज है , #सोनिया गांधी से मिलकर आपको #जेल भेजने का #प्लान बना रहे  हैं ।
🚩और आखिर यही हुआ झूठा केस दर्ज करवाकर #मीडिया द्वारा #बदनाम करवाकर जेल भिजवाया गया ।
🚩#दारा सिंह(बजरंगदल) ने भी #धर्मपरिवर्तन का खूब #विरोध किया था वे ईसाई #मिशनरियों को धर्मपरिवर्तन करने नहीं दे रहे थे उसके फल स्वरूप जेल जाना पड़ा ।
🚩शशिकला जेल में लक्जिरियस जिंदगी जी रही हैं उसके कई खुलासे भी हुए हैं लेकिन इन हिन्दू समर्थकों को जेल में भी कोई विशेष सुविधा नहीं मिल रही है न ही पैरोल या जमानत ही दी जा  रही है ।
🚩आखिर ये किस तरह की दोहरी नीति है, जहां #भ्रष्टाचारी नेता की पैरोल की मांग उचित समझी जाती है और हिन्दू समर्थकों व हिंदुत्व के हक की लड़ाई लड़ने वालों को कानून द्वारा प्राप्त अधिकारों से भी वंचित रखा जाता है।
🚩#संजय दत्त को भी #दोषी सिद्ध होने पर भी बार-बार पैरोल पर छोड़ा जाता था, #लालूप्रसाद यादव भी बाहर घूम रहे हैं, पत्रकार तरुण #तेजपाल पर #आरोप #सिद्ध होने पर भी बाहर हैं, 9000 करोड़ लेकर भाग जाने वाला विजय माल्या को गिरफ्तार करने के बाद 3 घण्टे में जमानत मिल जाती है इससे सिद्ध होता है कि #नेता, #अभिनेता, #पत्रकार और #अमीरों को तुरंत #जमानत हासिल हो सकती है लेकिन हिंदुत्वनिष्ठों को न जमानत मिलती है  न ही कोई विशेष सुविधा ।
🚩सालों से हम देख रहे हैं कि एक के बाद एक #हिंदुत्वनिष्ठों को #टारगेट किया जा रहा है और हिन्दू मूक दर्शक बन तमाशा देख रहा हैलल
। पर अगर ऐसे ही चलता रहा तो एक समय ऐसा आएगा जब हिंदुओं के पक्ष में बोलने वाला कोई नहीं रहेगा ।
🚩अभी भी समय है चेत सकें तो चेत !!
एक कवि ने लिखा है :-
आज उठ रही हर ऊँगली #न्याय व्यवस्था पर,
जहाँ #भ्रष्टाचार का बोलबाला है,
निर्दोष सालों से बैठे जेल में न्याय की आस लगाये
और दोषी पा रहे पैरोल व बेल, वाह री न्याय व्यवस्था,अजब तेरा खेल !!
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हिन्दू राष्ट्र, असम, कश्मीर, hindus outraged,

भारतीय राज्य कश्मीर और असम में हिन्दुओं का बुरा हाल, अस्तित्व भी भारी संकट में

सितम्बर 30, 2017
पूरे विश्व में अब मात्र 13.95 प्रतिशत हिन्दू ही बचे हैं ! नेपाल कभी एक हिन्दू राष्ट्र हुआ करता था परंतु वामपंथ के वर्चस्व के बाद अब वह भी धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। कई चरमपंथी देश से हिन्दुओं को भगाया जा रहा है, परंतु कोई ध्यान नहीं देता। हिन्दू अपने एक ऐसे देश में रहते हैं, जहाँ के कई हिस्सों से ही उन्हें बेदखल किए जाने का क्रम जारी है, साथ ही उन्हीं के उप-संप्रदायों को गैर-हिन्दू घोषित कर उन्हें आपस में बांटे जाने का षडयंत्र भी जारी है !
The bad situation of Hindus in Indian state, Kashmir and Assam, survival too
अब भारत में भी हिन्दू जाति कई क्षेत्रों में अपना अस्तित्व बचाने में लगी हुई है। इसके कई कारण हैं। इस सच से हिन्दू सदियों से ही मुंह चुराता रहा है जिसके परिणाम समय-समय पर देखने भी मिलते रहे हैं। इस समस्या के प्रति शुतुर्गमुर्ग बनी भारत की राजनीति निश्‍चित ही हिन्दुओं के लिए पिछले 100 वर्षो में घातक सिद्ध हुई है और अब भी यह घातक ही सिद्ध हो रही है। पिछले 70 वर्षो में हिन्दू अपने ही देश भारत के 8 राज्यों में अल्पसंख्‍यक हो चला है। आईए जानते हैं कि, भारतीय राज्यों में हिन्दुओं की क्या स्थिति है . . .
जनसंख्या : भारत में पंथ पर आधारित जनगणना 2001 के आंकडों के अनुसार, देश की कुल जनसंख्या में 80.5 प्रतिशत हिन्दू, 13.4 प्रतिशत मुसलमान, 2.3 प्रतिशत ईसाई हैं जबकि पिछली जनगणना में हिन्दू 82 प्रतिशत, मुसलमान 12.1 प्रतिशत और 2.3 प्रतिशत ईसाई थे। 2011 की जनगणना के अनुसार, देश की कुल जनसंख्या में मुसलमानों का हिस्सा 2001 में 13.4 प्रतिशत से बढकर 14.2 प्रतिशत हो गया है।
1999 से 2001 के दशक की 29 प्रतिशत वृद्धि दर की तुलना 2001-2011 के बीच मुस्लिमों की जनसंख्या वृद्धि दर घटकर 24 प्रतिशत अवश्य हुई किंतु यह अब भी राष्ट्रीय औसत 18 प्रतिशत से अधिक है। देश के जिन राज्यों में मुसलमानों की जनसंख्या सबसे अधिक है, उनमें क्रमश: जम्मू-कश्मीर (68.3 प्रतिशत) और असम (34.2 प्रतिशत) के बाद प. बंगाल (27.01 प्रतिशत) तीसरे स्थान पर आता है जबकि केरल (26.6 प्रतिशत) चौथे स्थान पर है।
कश्मीर में हिन्दू :
जब हम कश्मीर की बात करते हैं तो उसमें एक कश्मीर वह भी है, जो पाकिस्तान के कब्जे में है और दूसरा वह, जो भारत का एक राज्य है। इसमें जम्मू और लद्दाख अलग से हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को मिलाकर एक राज्य गठित होता है। यह संपूर्ण क्षेत्र स्वांतंत्रता के पहले महाराजा हरिसिंह के शासन के अंतर्गत आता था।
2011 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू और कश्मीर की कुल जनसंख्या 125.41 लाख थी। उसमें 85.67 लाख मुस्लिम थे यानी कुल जनसंख्या के 68.31 प्रतिशत, जैसे कि,1961 में थे, वहीं 2011 में हिन्दुओं की जनसंख्या 35.66 लाख तक पहुंच गई। कुल जनसंख्या का 28.43 प्रतिशत ! इन आंकडों में कश्मीर में हिन्दुओं की जनसंख्‍या घटी जबकि जम्मू में बढी होना जाहिर नहीं हुआ ! अगर पुराने आंकडों की बात करें तो 1941 में संपूर्ण जम्मू और कश्मीर में मुस्लिम जनसंख्या 72.41 प्रतिशत और हिन्दुओं की जनसंख्या 25.01 प्रतिशत थी।
1989 के बाद कश्मीर घाटी में हिन्दुओं के साथ हुए नरसंहार से कश्मीरी पंडित और सिख भी वहां से पलायन कर गए। कश्मीर में वर्ष 1990 में हथियारबंद आंदोलन शुरू होने के बाद से अब तक लाखों कश्मीरी पंडित अपना घर-बार छोडकर चले गए। उस समय हुए नरसंहार में हजारों पंडितों का कत्लेआम हुआ था। बडी संख्या में महिलाओं और लडकियों के साथ बलात्कार हुए थे।
कश्मीर में हिन्दुओं पर हमलों का सिलसिला 1989 में जिहाद के लिए गठित जमात-ए-इस्लामी ने शुरू किया था जिसने कश्मीर में इस्लामिक ड्रेस कोड लागू कर दिया। आतंकी संघटन का नारा था- ‘हम सब एक, तुम भागो या मरो !’ इसके बाद कश्मीरी पंडितों ने घाटी छोड दी। करोडों के मालिक कश्मीरी पंडित अपनी पुश्तैनी जमीन-जायदाद छोडकर शरणार्थी शिविरों में रहने को मजबूर हो गए। हिंसा के प्रारंभिक दौर में 300 से अधिक हिन्दू महिलाओं और पुरुषों की हत्या हुई थी !
घाटी में कश्मीरी पंडितों के बुरे दिनों की शुरुआत 14 सितंबर 1989 से हुई थी। कश्मीर में आतंकवाद के चलते लगभग 7 लाख से अधिक कश्मीरी पंडित विस्थापित हो गए और वे जम्मू सहित देश के अन्य हिस्सों में जाकर रहने लगे। कभी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के एक क्षेत्र में हिन्दुओं और शियाओं की तादाद बहुत होती थी परंतु वर्तमान में वहां हिन्दू तो एक भी नहीं बचा और शिया समय-समय पर पलायन करके भारत में आते रहे जिनके आने का क्रम अभी भी जारी है !
विस्थापित कश्मीरी पंडितों का एक संघटन है ‘पनुन कश्मीर’ ! इसकी स्थापना सन 1990 के दिसंबर माह में की गई थी। इस संघटन की मांग है कि, कश्मीर के हिन्दुओं के लिए कश्मीर घाटी में अलग राज्य का निर्माण किया जाए। पनुन कश्मीर, कश्मीर का वह हिस्सा है, जहां घनीभूत रूप से कश्मीरी पंडित रहते थे। परंतु 1989 से 1995 के बीच नरसंहार का एक ऐसा दौर चला कि, पंडितों को कश्मीर से पलायन होने पर मजबूर होना पडा !
आंकडों के अनुसार, इस नरसंहार में 6,000 कश्मीरी पंडितों को मारा गया। 7,50,000 पंडितों को पलायन के लिए मजबूर किया गया। 1,500 मंदिर नष्ट कर दिए गए। कश्मीरी पंडितों के 600 गांवों को इस्लामी नाम दिया गया। केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों के अब केवल 808 परिवार रह रहे हैं तथा उनके 59,442 पंजीकृत प्रवासी परिवार घाटी के बाहर रह रहे हैं। कश्मीरी पंडितों के घाटी से पलायन से पहले से पहले वहां उनके 430 मंदिर थे। अब इनमें से मात्र 260 सुरक्षित बचे हैं जिनमें से 170 मंदिर क्षतिग्रस्त हैं !
असम में हिन्दू :
असम कभी 100 प्रतिशत हिन्दू बहुल राज्य हुआ करता था ! हिंदू शैव और शाक्तों के अलावा यहां हिन्दुओं की कई जनजाति समूह भी थे। यहा वैष्णव संतों की भी लंबी परंपरा रही है। बौद्ध काल में जहां यहां पर बौद्ध, मुस्लिम काल में लोग मुस्लिम बने वहीं अंग्रेज काल में यहां के गरीब तबके के लोगों को हिंदू से ईसाई बनाने की प्रक्रिया जारी रही !
2001 की जनगणना के अनुसार, अब यहां हिन्दुओं की संख्या 1,72,96,455, मुसलमानों की 82,40,611, ईसाई की 9,86,589, और सिखों की 22,519, बौद्धों की 51,029, जैनियों की 23,957 और 22,999 अन्य धार्मिक समुदायों से संबंधित थे। असम में मुस्लिम जनसंख्या 2001 में 30.9 प्रतिशत थी जबकि 2011 में बढकर वह 34.2 प्रतिशत हो गई। इसमें बाहरी मुस्लिमों की संख्‍या भी बताई जाती है।
असम में 27 जिले हैं जिसमें से असम के बारपेटा, करीमगंज, मोरीगांव, बोंगईगांव, नागांव, ढुबरी, हैलाकंडी, गोलपारा और डारंग 9 मुस्लिम बहुल जनसंख्यावाले जिले हैं, जहां आतंक का राज कायम है ! यहां बांग्लादेशी मुस्लिमों की घुसपैठ के चलते राज्य के कई क्षेत्रों में स्थानीय लोगों की जनसंख्या का संतुलन बिगड गया है। राज्‍य में असमी बोलनेवाले लोगों की संख्‍या कम हुई है। 2001 में 48.8 प्रतिशत लोग असमी बोलते थे जबकि अब इनकी संख्‍या घटकर अब 47 प्रतिशत रह गई है !
1971 के खूनी संघर्ष में पूर्वी बंगाल (बांग्लादेश) के लाखों मुसलमानों को पडोसी देश भारत के पश्‍चिम बंगाल, पूर्वोत्तर राज्य (असम आदि) में और दूसरी और म्यांमार (बर्मा में) शरण लेनी पडी ! युद्ध शरणार्थी शिविरों में रहनेवाले मुसलमानों को सरकार की लापरवाही के चलते उनके देश भेजने का कोई उपाय नहीं किया गया। इसके चलते इन लोगों ने यहीं पर अपने पक्के घर बनाना शुरू कर दिए और फिर धीरे-धीरे पिछले चार दशक से जारी घुसपैठ के दौरान सभी बांग्लादेशियों ने मिलकर भूमि और जंगलों पर अपना अधिकार जताना शुरू कर दिया !
धीरे-धीरे बांग्लादेशी मुसलमानों सहित स्थानीय मुसलमानों ने (बीटीएडी में) बोडो हिन्दुओं की खेती की 73 प्रतिशत जमीन पर कब्जा कर लिया अब बोडो के पास केवल 27 प्रतिशत जमीन है ! सरकार ने वोट की राजनीति के चलते कभी भी इस सामाजिक बदलाव पर ध्यान नहीं दिया जिसके चलते बोडो समुदाय के लोगों में असंतोष पनपा और फिर उन्होंने हथियार उठाना शुरू कर दिए। यह टकराव का सबसे बडा कारण है !
25 मार्च 1971 के बाद से लगातार अब तक असम में बांग्लादेशी हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही वर्गों का आना लगा रहा। असम ने पहले से ही 1951 से 1971 तक कई बांग्लादेशियों को शरण दी थी परंतु 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान और उसके बाद बांग्लादेश के गठन के बाद से लगातार पश्‍चिम बंगाल और असम में बांग्लादेशी मुस्लिम और हिन्दू शरणार्थियों की समस्या जस की तस बनी हुई है !
असम के लोग अब अपनी ही धरती पर शरणार्थी बन गए हैं। असम के इन लोगों में जहां हिन्दू जनजाति समूह के बोडो, खासी, दिमासा अपना अस्तित्व बचाने के लिए लड रहे हैं वहीं अन्य स्थानीय असमी भी अब संकट में आ गए हैं और यह सब हुआ है भारत की वोट की राजनीति के चलते ! यहां माओवादी भी सक्रिय है जिनका संबंध मणिपुर और अरुणाचल के उग्रवादियों के साथ है। उन्हें नेपाल और बांग्लादेश के साथ ही भारतीय वामपंथ से सहयोग मिलता रहता है !
आधुनिक युग में यहां पर चाय के बाग में काम करनेवाले बंगाल, बिहार, उडीसा तथा अन्य प्रांतों से आए हुए कुलियों की संख्या प्रमुख हो गई जिसके चलते असम के जनजाती और आम असमी के लोगों के जहां रोजगार छूट गए वहीं वे अपने ही क्षेत्र में हाशिए पर चले गए। इसी के चलते राज्य में असंतोष शुरू हुआ और कई छोटे-छोटे उग्रवादी समूह बनें। इन उग्रवाद समूहों को कई दुश्मन देशों से सहयोग मिलता है ! वोट की राजनीति के चलते कांग्रेस और सीपीएम ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को असम, उत्तर पूर्वांचल और भारत के अन्य राज्यों में बसने दिया। बांग्लादेश से घुसपैठ कर यहां आकर बसे मुसलमानों को कभी यहां से निकाला नहीं गया और उनके राशन कार्ड, वोटर कार्ड और अब आधार कार्ड भी बन गए ! दशकों से जारी इस घुसपैठ के चलते आज इनकी जनसंख्या असम में ही 1 करोड के आसपास है, जबकि पूरे भारत में ये यह फैलकर लगभग साढे तीन करोड के पार हो गए हैं ! यह भारतीय मुसलमानों में इस तरह घुलमिल गए हैं कि, अब इनकी पहचान भी मुश्किल होती है !
असम का एक बडा जनसंख्या वर्ग राज्य में अवैध मुस्लिम बांग्लादेशी घुसपैठियों का है जो अनुमान से कहीं अधिक है और जो बांग्ला बोलता है। राज्य के अत्यधिक हिंसा प्रभावित जिलों कोकराझार व चिरांग में बडी संख्या में ये अवैध मुस्लिम बांग्लादेशी घुसपैठी परिवार रहते हैं जिन्होंने स्थिति को बुरी तरह से बिगाड़ दिया है !
बांग्लादेशी घुसपैठिएं असम में भारत की हिन्दू अनुसूचित जाति एवं अन्य हिन्दुओं के खेत, घर और गांवों पर कब्जा करके हिन्दुओं को भगाने में लगे हुए हैं। कारबी, आंगलौंग, खासी, जयंतिया, बोडो, दिमासा एवं 50 से ज्यादा जनजाति के खेत, घर और जीवन पर निरंतर हमलों से खतरा बढता ही गया जिस पर अभी तक ध्यान नहीं दिया गया। घुसपैठियों को स्थानीय सहयोग और राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है !
शिविर :
असम में जातीय हिंसा प्रभावित जिलों में बनाए गए 300 से ज्यादा राहत शिविरों में चार लाख शरणार्थियों की जिंदगी बदतर हो गई है ! कोकराझार के बाहर जहां बोडो हिन्दुओं के शिविर हैं वहीं धुबरी के बाहर बांग्लादेशी मुस्लिमों के शिविर है। कोकराझार, धुबरी, बोडो टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेटिव डिस्ट्रिक (बीटीएडी) और आसपास के क्षेत्रों में फैली हिंसा के कारण से अपने घर छोडकर राहत शिविरों में पहुंचे लोग यहां भी भयभीत हैं शिविरों में शरणार्थियों की जिंदगी बद से बदतर हो गई है। शिविरों में क्षमता से ज्यादा लोगों के होने से पूरी व्यवस्था नाकाम साबित हो रही हैं। दूसरी ओर लोगों के रोजगार और धंधे बंद होने के कारण वह पूरी तरह से सरकार पर निर्भर हो गए हैं !
कहां कितने बांग्लादेशी :
2001 की आयबी की एक खु‍फिया रिपोर्ट के अनुसार, लगभग डेढ करोड से अधिक बांग्लादेशी अवैध रूप से रह रहे हैं जिसमें से 80 लाख पश्चिम बंगाल में और 50 लाख के लगभग असम में, बिहार के किसनगंज, साहेबगंज, कटियार और पूर्णिया जिलों में भी लगभग 4.5, देहली में 13 लाख, त्रिपुरा में 3.75 लाख और इसके अलावा नागालैंड व मिजोरम भी बांग्लादेशी घुसपैठियों के किए शरणस्थली बने हुए हैं !
खुद को कहते हैं भारतीय :
1999 में नागालैंड में अवैध घुसपैठियों की संख्या जहाँ 20 हजार थी वहीं अब यह बढकर 80 हजार के पार हो गई है ! असम के 27 जिलों में से 8 में बांग्लादेशी मुसलमान बहुसंख्यक बन चुके हैं ! सर्चिंग के चलते अब बांग्लादेशी घुसपैठिए उक्त जगहों के अलावा भारत के उन राज्यों में भी रहने लगे हैं जो अपेक्षाकृत शांत और संदेह रहित है जैसे मध्यप्रदेश के भोपाल, इंदौर, गुजरात के बडौदा, अहमदाबाद, राजस्थान के जयपुर और उदयपुर, उडीसा, अंध्राप्रदेश आदि।
देश के अन्य राज्यों में मुस्लिमों के बीच छुप गए बांग्लादेशी अब खुद को पश्चिम बंगाल का कहते हैं !
स्त्रोत : वेब विश्व
conspiracy-to-divide-hindus-among-themselves

Conspiracy to divide Hindus among themselves, Hindus are also becoming victims

सितम्बर 16,2017
🚩यूट्यूब पर शनिवार #आचार्य #जितेंद्र महाराज ने एक वीडियो अपलोड किया है, उसमें उन्होंने बताया है कि कैसे #हिन्दुओं को #आपस में #लड़ा रहे हैं।
🚩आइये जाने क्या कहते हैं जितेंद्र महाराज…
🚩जितेंद्र महाराज ने कहा कि वंदे मातरम.. प्यारे भारतीयों… कुछ दिन पहले से मीडिया में एक प्रोपेगंडा खड़ा किया जा रहा है, कि भारत में 14 साधु फर्जी हैं और बाकी के तो असली हैं और उसके अलावा ये वो फलाना ढिमका..
🚩तो मैं इस विषय पर कहना चाहता हूँ कि ये पूरा का पूरा एक #विदेशी षड़यंत्र है और #पॉलिटिकल एजेंडा है, जिसके द्वारा हमारे सनातन धर्म के संतों को , कर्णधारों को आपस में लड़ा दिया जाए और फिर जिनको भी पॉलिटिक्स की रोटी सेंकना है वो इस पर आराम से रोटी सकेंगे और हिंदू धर्म का बंटवारा होगा।
🚩अब हो क्या रहा है , कि जिस #संत ने #पूरे जीवन भर #कार्य किए #देश के लिए , #धर्म के लिए , धर्म रक्षा के लिए , #राष्ट्र रक्षा के लिए , राष्ट्र की सुरक्षा के लिए , #अंतरिम सुरक्षा के लिए जिन्होंने काफी सारे कार्य किए ,  जिन्होंने इस देश को काटने के लिए आए #ईसाइयों के #कन्वर्शन  के अभियान को एक तरीके से बांध बन करके रोक दिया , ऐसे संत को अगर फर्जी कहेंगे और मदर टेरेसा को संत कहेंगे तो ये तो हमारे लिए बड़ा दुखदाई है।
🚩इस देश की एक हिंदुओं की धर्म से काटने वाली जो #विषबेला थी वो #मदर टेरेसा जिसे #वेटिकन ने संत घोषित किया और भारत में मिठाइयां बंटी और भारत के प्रधानमंत्री को भी मजबूरन यह कहना पड़ा कि मदर टेरेसा संत थी, उन्होंने मानवता का कार्य किया।  तो इसी मदर टेरेसा जिसने हिंदुत्व को काटने का कार्य किया । भारत में इस विषबेल ने बहुत बड़ा विशाल रूप ले लिया , ऐसे विषबेल को ऐसी दुष्ट दुरात्मा को हमको कहना चाहिए कि यह फर्जी है ,  हमको पॉल दिनाकरन को कहना चाहिए यह फर्जी है ,  हमको ऐसे मौलाना जो इस राष्ट्र की रक्षा के लिए खतरा बन बैठे हैं , उनको कहना चाहिए कि यह फर्जी है।  हमें आपस में नहीं लड़ना झगड़ना चाहिए। जिन्होंने #तुलसी  दिवस मनवाया , जिन्होंने #मातृ पितृ पूजन दिवस बनाया , जिन्होंने #युवाधन सुरक्षा पुस्तक निकाला. ..  ऐसे #पूजनीय के बारे में अपना #टिप्पणी भी नहीं करना चाहिए और आपस में लड़ करके इस देश का धर्म,पतन के गर्त में चला जाएगा।
🚩आपको मालूम है,मैं जानकारी दे देना चाहता हूँ कि जॉयन नाम के एक डायरेक्टर ने अपनी फिल्म “गॉड इस कैप्थ” के अंदर हनुमान जी को “गे” बताया.. जो धर्म के सबसे बलवान भगवान कहे जाते हैं उन महान , उन तेजस्वी परम प्रतापी भगवान हनुमान जी के बारे में वह डायरेक्टर ने फिल्म बना दी और वह फिल्म भारत में YouTube पर चल रही है और वह डायरेक्ट जिंदा घूम रहा है ,  उसकी हीरोइन उसके हीरो यहां पर सड़कों पर जिन्देें घूम रहे हैं और 100 करोड़ हिंदुओं को चिड़ा रहे हैं उनके मुंह पर थूक रहे हैं कि देखो तुम्हारे हनुमान जी , उनको हमने “गे” (समलैंगिक) बता दिया तुमने क्या कर लिया ?
🚩हमारा खून नहीं खौला..हमें जानकारी तक नहीं है.. हमारे पास संतों के लफड़े में,आपस में लड़ने झगड़ने से मन में ईर्ष्या-द्वेष सबके लिए टाइम है, लेकिन हमारे आराध्य भगवान केसरी नंदन , अंजनी पुत्र , पवन पुत्र #हनुमान जी महाराज को जॉयन ने “गे”  बताकर #फिल्म रिलीज कर दी,हम उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाए। #PK जैसी #फिल्म आकर के हमारे संतो का #मजाक उड़ा करके चली गई , “ओह माय गॉड” आ करके हिंदू धर्म को अपमानित कर गई कि , सारा पाखंड अंधविश्वास हिंदू धर्म में है ।
🚩इसलिए हमें आपस में नहीं लड़ना है और हम हर समय , हर श्वास  संतो के सम्मान की , देश के अभिमान की स्वाभिमान की रक्षा के लिए खड़े रहेंगे , चाहे इस क्रांति में हमारे प्राण क्यों न चले जाए लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे,  तो सभी लोगों से विनम्र निवेदन है कि सभी संत जनों से सभी पूजनीय से कि आपस में मतभेद मत करिए। एक दूसरे के पुतले जलेंगे , दुनिया हँसेगी .. जग हँसेगा.. जग वही चाहता है कि आप लोग आपस में लड़े दुनिया देखे और हँसे और क्रिश्चियनिटी और कट्टर मुस्लिम वाले लोग वो इस देश में अपना काम करते जाएं और वोट बैंक स्थापित हो ।
🚩आज देश की समस्या #रोहिंग्या है फर्जी संतो के बारे में यह लिस्ट विस्ट जारी करने की जो बातें करी और #फर्जीकरार करने की जो #कोशिश की वो सब बहुत गलत #धृणात्मक कृत्य है , इसको नहीं होना चाहिए। जो फर्जी रहेगा उसको भगवान दंड देगा ना..ईश्वर सर्वोपरि है , धर्मसत्ता राष्ट्र रक्षा के लिए कार्य करने के लिए आतुर रहे। हनुमान जी महाराज की जिसने पिक्चर बनाई है उसका  मस्तक चौराहे पर पड़ा होना चाहिए तब हमारा धर्म सत्ता का इस देश के अंदर कुछ महत्व रहेगा और संतो के बारे में कोई भी टिप्पणी नहीं करना चाहिए।
🚩वो #संत महान है #जिन्होंने #लाखों-लाखों लोगों के #हृदय में #सनातन का भाव #जगा दिया ऐसे संतो के बारे में कुछ नहीं कहना चाहिए।
🚩भारत माता की जय ..वंदे मातरम जय हिंदू राष्ट्र।
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indonesia & india the-limits-of-atrocities-hindus-are-ending-in-indonesia-bangladesh-and-pakistan

अत्याचार की हदें हुई पार: इंडोनेशिया, बांग्लादेश व पाकिस्तान में तेजी से खत्म हो रहे हैं हिन्दू |

सितम्बर 8, 2017
 भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहंगिया को देशवासियों की सुरक्षा को देखते हुए वापस भेजने का फैसला लिया गया तो मानवाधिकारी केन्द्र के इस फैसले को अत्याचार कह कर विरोध कर रहे हैं और कुछ वकील तो सरकार के फैसले के खिलाफ अदालत में बिना सोचे समझे याचिका भी दायर कर रहे हैं । शायद ये बुद्धिजीवी इंडोनेशिया, बांग्लादेश और पाकिस्तान की घटनाओं से वाकिफ नहीं हैं । भारत की तरह इंडोनेशिया भी हिन्दू राष्ट्र हुआ करता था लेकिन अब वहाँ हिन्दुओं की तादाद न के बराबर रह गयी है। वजह है अवैध तरीके से वहाँ बसे लोग जिन्होंने अपनी तादाद बढ़ाने के लिए हिंदुत्ववादियों को मारना शुरू कर दिया और अगर बात करें खुद भारत की तो जहां-जहां से भारत की सीमा बांग्लादेश से लगती है अब वहां जातीय गणित गड़बड़ा रहा है। वहाँ हिन्दू अल्पसंख्‍यक और मुसलमान बहुसंख्‍यक हो गये हैं । बांग्लादेश की ओर से घुसपैठ जारी है जिसके चलते असम में हालात बिगड़ रहे हैं ।
Extinction of Hindus In Indonesia
आपको बता दें कि जब पाकिस्तान का जबरन हिस्सा बन गए बंगालियों ने विद्रोह छेड़ दिया तो इसे कुचलने के लिए पश्‍चिमी पाकिस्तान ने अपनी पूरी ताकत लगाते हुए हिन्दुओं को चुन-चुनकर मारना शुरू कर दिया। जिसमें लाखों बंगालियों की मौत हुई। हजारों बंगाली औरतों का बलात्कार हुआ।
 आकड़ो के अनुसार लगभग 30 लाख से ज्यादा हिन्दुओं का युद्ध की आड़ में कत्ल कर दिया गया। 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ 9 महीने तक चले बांग्लादेश के स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान हिन्दुओं पर अत्याचार, बलात्कार और नरसंहार के आरोपों में दिलावर को दोषी पाया गया तो भारतीय सेना ने अपना खून बहाकर सन् 1971 में बांग्लादेश को पाकिस्तान के कब्जे से आजाद कराया । इस खूनी संघर्ष में पूर्वी बंगाल (बांग्लादेश) के लगभग 1 करोड़ मुसलमान भारत के पश्‍चिम बंगाल, पूर्वोत्तर राज्य में आ गये । जिनकी  संख्‍या 1 करोड़ से बढ़कर 3.50 करोड़ के आसपास हो गई है।
 जहां-जहां से भारत की सीमा बांग्लादेश से लगती है वहाँ हिन्दू अल्पसंख्‍यक और मुसलमान बहुसंख्‍यक हो गये हैं ।
आपको बता दें कि 2011 में बांग्लादेशी सरकार द्वारा जारी किए गए धार्मिक जनगणना के डाटा अनुसार इस समय बांग्लादेश में हिन्दुओं की संख्या महज 8.6 प्रतिशत रह गई है। बांग्लादेश में हिन्दुओं पर कई उत्पीड़न के मामले भी सामने आये हैं जिसमें हिन्दुओं की संपत्ति को लूटा गया, घरों को जला दिया गया तथा मंदिरों को आग के हवाले कर दिया गया ।
वही इंडोनेशिया में बाली द्वीप प्रांत पर ही हिन्दू बचे हैं। कभी हिन्दू राष्ट्र रहे इंडोनेशिया में आज भी हिन्दू काल के कई प्रचीन और विशालकाय मंदिर मौजूद हैं जो उस देश की पहचान हैं। वहाँ के मुस्लिमों को कभी हिन्दुओं से तकलीफ नहीं रही है क्यूंकि वे जानते हैं कि उनके पूर्वज हिन्दू थे लेकिन पिछले कुछ वर्षों में वहां बाहरी लोगों ने आकर कट्टरवाद को बढ़ावा दिया है। वर्तमान में यहां पर अल कायदा और आईस के सक्रिय होने से देश की सरकार‍ चिंता में है और वहाँ के हिन्दू नागरिकों पर भी खतरा मंडरा रहा है ।
पाकिस्तान में गैर-मुस्लिमों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार हो रहा है। #स्कूलों में #इस्लाम की #शिक्षा दी जाती है। गैर-मुस्लिमों, खासकर हिंदुओं के साथ असहिष्णु व्यवहार किया जाता है।  #हिंदू युवतियों और महिलाओं के साथ #दुष्कर्म, #अपहरण की घटनाएं आम हैं। उन्हें #इस्लामिक मदरसों में रखकर जबरन #धर्मतांरण का दबाव डाला जाता है। गरीब हिंदू तबका बंधुआ मजदूर की तरह जीने को मजबूर है। हिंसक हमले भी किये जाते है । अभी कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान के थार जिले में एक नाबालिग हिन्दू लड़की का कथित तौर पर अपहरण करके उसको धर्मान्तरित करा दिया गया।
अब जानिए भारत क्यों रोहिंग्याओं को वापस भेजना चाहता है…
केंद्रीय गृहराज्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि UNHCR का पेपर होने के बावजूद रोहिंग्या शरणार्थियों को भारत में नहीं रहने दिया जा सकता। भारत रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस भेजने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है। इसके पीछे के कुछ कारण ये हैं…
भारत में 40,000 रोहिंग्या शरणार्थी जम्मू, हैदराबाद, देहली-एनसीआर, हरियाणा, यूपी और राजस्थान में शरण लिए हुए हैं। इनमें 17,000 के पास UNHCR के कागजात हैं।
1. शरणार्थियों के आतंकी संगठनों से संबंध है !
2. रोहिंग्या शरणार्थी न केवल भारतीय नागरिकों के अधिकार पर अतिक्रमण कर रहे हैं अपितु सुरक्षा के लिए भी चुनौती हैं !
3. रोहिंग्या शरणार्थियों के कारण सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक समस्याएं खड़ी हो सकती हैं !
4. इसके पीछे की एक सोच यह भी है कि, भारत के जनसांख्यिकीय स्वरूप सुरक्षित रखा जाए !
मुद्दे की बात यह है कि जिस तरह से घुसपेठियों ने देश में आकर देश की जनता को मजहब के नाम पर और खुद की संख्या ज्यादा करने के लिए मारना शरू किया है उससे देश में आतंक फैल सकता है जिससे खून खराबे हो सकते हैं जो कि किसी भी देश के लिए सही बात नहीं है । इसलिए इस पर काबू पाना अनिवार्य बन गया है। जिसपर केंद्र ने फैसला भी लिया लेकिन कुछ बुद्धिजीव इस बात को समझ नहीं रहे हैं ।
controversial-statement-of-sanjay-raut

संजय राउत ने बोला संत मुक्त भारत होना चाहिए, जनता बोली संत नही नेता मुक्त होना चाहिए

अगस्त 5, 2017
मीडिया में अभी हिन्दू साधु-संतों के खिलाफ खूब जहर उगला जा रहा है जैसे कि सबसे बड़े अपराधी साधु-संत ही हैं लेकिन अगर हिन्दू थोड़ा भी विचार करेगा तो पता चलेगा कि यह केवल विदेशी ताकतों द्वारा बदनाम करने का एक षड़यंत्र है जिसमें कई राजनैतिक पार्टियां भी शामिल हैं ।
भारत भूमि ऋषि-मुनियों, साधु-संतों की भूमि रही है और विदेशी ताकतें समझ रही हैं कि अगर भारतवासियों की नाभि में छेद करो तो तुरतं काम हो जायेगा, अधिकतर भारतवासियों की आस्था किसी न किसी साधु-संत में होती है क्योंकि वहीं हमें भारतीय संस्कृति का ज्ञान देते हैं और हमें अच्छे रास्ते चलने की प्रेरणा देते हैं जिससे विदेशी कंपनियों का प्रोडक्ट बिकता नही है और ईसाई मिशनरियां एवं मौलवी आसानी से धर्मान्तरण करवा नही पाते है इसलिए हिन्दू साधु-संतों को मीडिया द्वारा बदनाम करवाते है।

जैसा कि हमनें पहले भी बताया है कि अधिकतर मीडिया के मालिक विदेश के हैं, फिर सेक्युलर नेता भी टीआरपी के लिए उनके खिलाफ बयान बाजी करने लगते हैं ।

controversial stament of sanjay raut

 

ऐसे ही शिवसेना के सामना अखबार में सांसद संजय राउत का लेख आया था कि भारत साधु-संत,महाराज मुक्त होना चाहिए जिसकी सोशल मीडिया पर लोगो ने कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि…

भारत साधु-संतों की भूमि है, तुम्हारे जैसे भ्रष्ट नेताओं से मुक्त भारत होना चाहिए तभी भारत विकास कर पायेगा, नेता भारत की संपत्ति हड़प लेते हैं और दोष संतो को देते हैं, आगे बोला कि हिम्मत है तो मौलवी या पादरी मुक्त भारत बोलकर दिखाओ ।

संजय राउत ने पहली बार टिप्पणी नही की है उससे पहले भी की थी तो जैन मुनि आचार्य सूर्य सागर ने चेतावनी भी दी थी उनको ।
आइये जानते है क्या कहा था आचार्य जी ने…
तंबाकू गुटखा सेवन करके कैमरे के सामने आकर बड़बड़ाहट और अपनी खुजली से अपनी जुबान को शांत करने वाला संजय राउत मैं तुझे इतनी बात कहना चाहता हूँ कि तूने किस आधार से एक जैन मुनि को जोकर कहा ?
जोकर तो तुम ही नजर आते हो ।
हम लोग आप जैसे छिछोरे लोगों की बातों को सुनकर के चुपचाप से बैठ जाए ऐसे नहीं हैं, तुम्हें निष्काषित करने के लिए सामर्थ्य हम रखते हैं ।
बौखलाहट नजर आ रही है। पिछली बार नगर पालिका के चुनावों में आप लोग हार गए और आगे भी तुम लोगों का नामोनिशान मिट जाने वाला है, शवसेना होने वाली है, तुम्हारी शिवसेना नही रहेगी।
तुमने कहा, साधु होकर ये साधु तो मुझे साधु नजर नहीं आता,
तेरे लाइसेंस और तेरे प्रमाणिक करने से साधु साधु हो जाएगा?
मुझे तो तेरे में ही कोई गुण नजर नहीं आता है,पूरे के पूरे अवगुण भरे नजर आते हैं,कौनसा ऐसा धर्म का कार्य आज तक आपकी शिवसेना के द्वारा हुआ है ? जालीदार टोपी पहन करके धर्म का प्रचार नहीं होता, कट्टरता होनी आवश्यक होती है।
जैसे छत्रपति शिवाजी महाराज ने सभी संप्रदायों को साथ ले करकेे हिंदुस्तान की, भारत की,महाराष्ट्र की नींव रखी वह नींव आप नहीं रख पा रहे हो।
आपके बालासाहेब जब स्वर्ग से देखते होंगे ना आप की लीलाओं को तो बड़े दुखी हो रहे होंगे और लालायित हो रहे होंगे कि कब मैं धरती पर जाकर के तुम जैसे को दो चांटे और दो लप्पड़ मारु, और वह समय आएगा।
तुमने कहा कि साधुओं को राजनीति नहीं करनी चाहिए, जरा शास्त्रों को, हमारी पूर्व परंपराओं को सही ढंग से पढ़ो लेकिन तुम्हारे संस्कार ही नहीं,तुम क्या पढ़ोगे? बस तुम्हें बेफिजूल बकबक करके हाईलाइट होना है, तुम्हें कोई जानता ही नहीं उल्टा तुम लोग कुप्रख्यात हो रहे हो, सुप्रख्यात नहीं हो रहे हो।
साधुओं ने ही इस देश को बचाया है इस भारत भूमि को बचाया है,आचार्य चाणक्य ने बचाया है,सम्राट पृथ्वीराज चौहान के गुरु भी एक सन्यासी थे उन्होंने इस संसार को बचाया है । आदित्यनाथ योगी नाम तो सुना है ना? उनके नाम से भी आपको बहुत खट्टापन महसूस होता है वह तो एक सन्यासी हैं। मंदिर की घंटी बजाते हुए आज उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े तख्ते पर वो विराजमान हो गए। नीति और न्याय का साथ देकर , नीति न्याय का साथ लेकर के योगी आदित्यनाथ योगी उत्तर प्रदेश के CM बने हैं।
शब्दों को सही सलामत ढंग से इस्तेमाल करने की जो क्षमता है उसे अपने ह्रदय में पहले स्थापित तो करो बाद में नेता बनो गुटखा खाकर के कोई नेता नहीं बनता तुम जैसे चरित्रहीन नेताओं के कारण पूरी शिवसेना पूरा नेता समाज बदनाम हो रहा है।
उद्धव ठाकरे जी,मैं आपसे एक अपील करना चाहता हूँ कि इस संजय राउत के खिलाफ आप कुछ ना कुछ एक्शन लें, वरना एक्शन लेने के लिए कुछ-न-कुछ तो मसले सामने आएंगे एक्शन परमात्मा भी लेगा और परमात्मा के दूत भी लेंगे।
जाकिर नायक का तो कुछ नहीं उखाड़ पाए तुम लोग और तुम हमारे  साधुओं की भाषा शैली पर जाते हो अरे वर्तमान की स्थिति यही है कि हमें इस आधार से बोलना पड़ता है जब तुम हमें नहीं छोड़ेंगे तो हम क्यों छोड़ेंगे ?
तुम हमें मत छेड़ो,हम तुम्हे नहीं छेड़ेंगे , तुम हमें छेड़ोगे तो हम तुम्हे छोड़ेंगे नहीं।
आपको बता दें कि अभी सोशल मीडिया पर संजय राउत के खिलाफ खूब आक्रोश है, जनता उनके खिलाफ खूब प्रतिक्रिया दे रही है।
“जिस देश में संत फकीरों का होता आदर सम्मान है,
जहाँ मात-पिता और गुरुओं की सेवा करता इंसान है,
वो देश हमारा भारत है,उस देश की धरती को नमन!!”
जय हिन्द !!
conspiracy against hinduism

बाबा राम रहीम के जेल जाने के पीछे साजिश का एक ये भी हिस्सा था क्या ?

सितम्बर 3, 2017
बाबा राम रहीम को सजा होने के बाद जेल भेजा गया है, पर उसके बाद जैसे ही वे जेल पहुंच गये कि ईसाई मिशनरियां सक्रिय हो गई हैं और मीडिया में उनकी खुद बदनामी भी की जा रही है और सोशल साइट पर भी तरह-तरह के वीडियो, न्यूज, जोक्स आदि उनके खिलाफ भेजे जा रहे हैं । उन वीडियो को केवल टाइटल देखकर जब लोग देखते है तो  उनमें कोई भी तथ्य सामने नहीं आते हैं ।

anti hindu media conspiracy

 

आपको बता देते हैं कि पंजाब में जिन गरीब इलाकों में बाबा राम रहीम सहायता देते थे, उस इलाकों में ईसाई मिशनरियां मौके का ‘फायदा’ उठाने के लिए सक्रिय हो गई हैं। उन्‍होंने डेरा अनुयायियों पर डोरे डालने शुरू कर दिए हैं और उन्हें धर्म परिर्वतन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके तहत डेरा से जुड़े क्षेत्रों में घर-घर जाकर ईसाई धर्म की महिमा के साहित्य बांट रहे हैं।
डबवाली के आसपास लगते पंजाब के मंडी किलियांवाली व अन्य क्षेत्रों में मिशनरीज की सक्रियता ज्यादा देखी गई। यह डेरे के प्रभाव का क्षेत्र माना जाता रहा है। बाबा राम रहीम के जेल जाने के बाद उनके अनुयायियों को साफ्ट टारगेट माना जा रहा है। खासकर ऐसे डेरा प्रेमियों पर दवाब बनाया जा रहा है, जो शहर से कटी हुई बस्तियों में रहते हैं। ऐसे मामले सामने आने के बाद हिंदू संगठनों ने भी सक्रियता बढ़ा दी है।
आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने पुष्टि की है कि कुछ लोग डेरा प्रेमियों की भावनाओं से खेलते हुए उनका धर्म परिवर्तन करवाने का प्रयास कर रहे हैं। मंडी किलियांवाली स्थित जलघर क्षेत्र में ऐसे मामले सामने आए हैं। लोगों का कहना है कि काफी लंबे समय से कुछ लोग धर्म का प्रचार करने के नाम पर धर्म परिवर्तन करवाने के लिए जोर दे रहे हैं।
बाबा राम रहीम को बदनाम करने के लिए यह पूरी साजिश रच रहे हैं ताकि अपना धर्म परिवर्तन का खेल खेला जा सके। हालांकि जिन लोगों पर दवाब बनाया जा रहा है, वे खुलकर सामने नहीं आ रहे पर अपने सगे संबंधियों से जरूर बातचीत कर रहे हैं।
आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि माहौल को गर्म देखते हुए कुछ लोग पिछले एक हफ्ते से लगातार डेरा प्रेमियों के घरों में चक्कर लगा रहे हैं। विशेष धर्म के लोग लालच दे रहे हैं। प्रत्येक दूसरे दिन वे घरों में पहुंचकर धर्म परिवर्तन के लिए जोर दे रहे हैं। जिससे लगता है कि धर्मान्तरण वाले भी साजिश में शामिल हो,
  कुछ लोगो का ऐसा भी कहना है कि उनका प्रभाव बढ़ता जा रहा था जिसको रोकने के लिए वोट बैंक के खातिर सरकार और बडे हिन्दू संगठन ने आपसी मेलजोल करके साजिश करके जेल भेजा है।
कारण जो भी हो फिलहाल कोर्ट ने सजा सुना दी है लेकिन आप समझ गये होंगे कि ईसाई मिशनरियां किस तरीके से सक्रिय है और हिन्दुओं का धर्मान्तरण कराने में जुटी है ।
एक बात सोचने वाली है कि मीडिया वाले और कुछ सोशल साइट पर उनका खूब दुष्प्रचार किया जा रहा है लेकिन उनकी अच्छाई एक भी नही दिखाई जा रही है, बाबा के विरोधी को न्यूज चैनल बैठाकर बहस करते है पर उनके समर्थक को नही बुलाते हैं ।
जबकि कितने ईसाई पादरियों को सजा हो चुकी है कई पादरियों को तो कई बच्चों-बच्चियों के साथ बलात्कार करने पर आजीवन सजा हो चुकी है लेकिन न उनकी कोई न्यूज आती है और नही सोशल साइट पर कुछ आता है, ऐसे मुस्लिम धर्मगुरु भी दुष्कर्म करने पर जेल गये है पर उनपर भी कोई  न्यूज नही आती है ऐसा क्यो???
इससे पता चलता है कि यह विदेशी ताकतें षडयंत्र कर रही हैं कि पहले आरोप लगवाओ फिर मीडिया द्वारा खूब बदनाम करवाओ और जेल जाने के बाद उनके अनुयायियों का ये बताकर कि आपके बाबा तो ढोंगी हैं, दुष्कर्मी हैं,हमारे यीशु भगवान ही महान हैं ऐसा बोलकर आसानी से धर्मपरिवर्तन करा दो ।
कोर्ट को जो निर्णय लेना था ले लिया, बाबा को जेल भेज भी दिया अब उनके पास हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट बाकि है, हो सकता है कि ऊपर की कोर्ट उनको निर्दोष बरी भी कर दे लेकिन अभी फिलहाल मीडिया का काम केवल इतना ही था कि खबर बता दे कि उनको जेल हो गई है लेकिन ऐसा नही करके दिन रात उनके खिलाफ उनके विरोधियों को डिबेट में बैठाकर, झूठी कहानियां बनाकर लोगों को परोसी जा रही है ये कहाँ तक उचित है?
और यदि आपको ऐसा दिखाना ही है तो सबके लिए दिखाओ, अन्य धर्म के धर्मगुरुओं को जेल हो जाती है तब ऐसे कहानियां क्यों नहीं बनती ?
डिबेट क्यों नहीं होती ?
जब सलमान खान को सजा हो गई थी तब मीडिया आँसू बहा रही थी कि उन्होंने इतना अच्छा काम किया और उनके समर्थक रो रहे हैं, आदि आदि पोजेटिव दिखा रहे थे जिससे कोर्ट भी दबाव में आ जाती है और जमानत देने को मजबूर हो जाती है, जबकि हिन्दू संतों पर आरोप लगते ही खूब झूठी कहानियां बनाई जाती है ।
अब पाठक समझ गये होंगे कि हिन्दू संतो के खिलाफ जो मीडिया ट्रायल चलता है यह पूरी साजिश है क्योंकि अधिकतर मीडिया के मालिक विदेश में बैठे हैं और वहीं से हिन्दू धर्म को बदनाम करने के लिए फंडिग होती है और हिन्दू भी बिकाऊ मीडिया में आकर अपने धर्मगुरुओं के खिलाफ बोलने लगे जाते है। अतः षड्यंत्र को समझे और उसका डटकर विरोध करें ।
rape by pastor

हिन्दू संतों पर कोलाहल करने वाली मीडिया पादरियों के बलात्कार करने पर चुप क्यों ??

🚩 *हिन्दू संतों पर कोलाहल करने वाली मीडिया पादरियों के बलात्कार करने पर चुप क्यों ??*
सितम्बर 1, 2017
🚩हाल ही में केरल कोट्टियूर में सेंट #सेबास्टियन चर्च के #कैथोलिक पादरी 48 वर्षीय फादर रोबिन उर्फ मैथ्यू वडकनचेरिल को 16 वर्षीय #नाबालिक से बलात्कार के आरोप में तब गिरफ्तार किया गया, जब वह #विदेश भागने की फिराक में था । मामला गत वर्ष मई का है । किन्तु इसका खुलासा तब हुआ, जब इस 16 वर्षीय अविवाहिक लड़की ने कोथुपरमवा के एक निजी #अस्पताल में #शिशु को जन्म दिया ।
Minor raped by pastor Media is silent
🚩इस मामले में उस तरह का हंगामा, समाचार पत्रों के मुख्यपृष्ठों पर सुर्खियां और न्यूज #चैनलों पर लंबी बहस नहीं दिखी, जो हिन्दू संतों पर लगे #यौन -उत्पीड़न के आरोप के बाद नजर आती है ।
🚩क्या किसी जघन्य अपराध के आरोपी पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए ?
🚩यदि उसका उत्तर ‘हाँ’ में है, तो इस मामले में मीडिया की चुप्पी का कारण क्या है ?
🚩कोट्टियूर में चर्च से संबधित इस तरह का मामला देश में नया नहीं है । बीते कई वर्षो से भारत में विभिन्न कैथोलिक अधिष्ठान, चाहे वह चर्च हो या फिर कॉन्वेंट स्कूल, कई बार इस घृणित अपराध से कलंकित हो चुके हैं।  किन्तु इसके विरोध में मीडिया, स्वघोषित #सेक्युलर-उदारवादी जमात और स्वयंसेवी संस्थाओं ने मुँह तक नहीं खोला ।
🚩कोट्टियूर की घटना से पूर्व, केरल के ही #एर्नाकुलम में एक नाबालिक लड़की से बलात्कार के आरोपी 41 वर्षीय #पादरी एडविन को एक साथ दो-दो बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी ।
🚩कोच्चि में एक #कॉन्वेंट स्कूल के #प्रिंसिपल फादर कुरियाकोस को #पुलिस ने एक लड़के से कुकर्म के आरोप में गिरफ्तार किया था ।
🚩2014 में केरल के ही #त्रिचूर में #सेंटपॉल #चर्च के पादरी पर 9 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने अपना शिकंजा कसा था ।
🚩फरवरी-अप्रैल 2014 में ही केरल में तीन कैथोलिक पादरी बच्चों से #बलात्कार के मामले में कानून की पकड़ में आए थे ।
🚩वर्ष 2016 में #प.बंगाल में भी एक पादरी पर महिला से दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगा था ।
🚩छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में नवी कक्षा की नाबालिग छात्रा के साथ शाम 6 बजे प्रार्थना कराने बहाने अंदर ले गया और बलात्कार किया ।
🚩श्री नगर के 32 वर्षीय बीजूमन #के. एल. पादरी #शादी के बहाने #19 वर्षीय एक #लड़की को पेय पदार्थ में #नशीली #चीजें मिलाकर पिलाने के बाद उससे #बलात्कार करता था ।
🚩हाल ही में आस्ट्रेलिया की कैथोलिक चर्च ने #ईसाई पादरियों के #3066 बच्चों के #यौन-शोषण करने के मामले में #करीब 21 करोड़ 20 लाख 90 हजार अमेरिकी डॉलर (1426 करोड़ रुपए) का हर्जाना दिया है।
🚩सन् 2002 में आयरलैंड को अपने #पादरियों के #यौन-शोषण के #अपराधों के कारण #12 करोड़ 80 लाख डॉलर का दंड चुकाना पड़ा था ।
🚩यह तो कुछ ही नमूने हैं जो धर्म के ठेकेदार ईसाई पादरी के काले कुकर्मों को उजागर करते हैं पर लगभग कई ईसाई चर्चो में ये काम चल रहा है, लेकिन मीडिया इसको नही बतायेगी क्योंकि मीडिया अधिकतर विदेशी फंड से चलने वाली है, #मीडिया केवल #हिन्दू धर्म में ही बुराई दिखाएगी, #हिन्दू संतों पर #श्रद्धा करने पर #अंधश्रद्धा #बतायेगी ।
🚩क्या यह एक षड्यंत्र नही है?
🚩अभी हाल ही में बाबा राम रहीम पर आरोप सिद्ध होने पर उनके खिलाफ कई मनगढंत कहानियां बनाकर परोसी जा रही है कि उनके जैसा कोई दुनिया में अपराधी ही न हो, जबकि अभी उनके पास हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता बाकी है कई बार ऐसा हुआ है कि नीचली अदालत ने दोषी करार दिया और ऊपरी कोर्ट ने निर्दोष बरी किया हो । कोर्ट ने अपना डिसीजन दिया लेकिन बिना तथ्य की झूठी खबरें जनता में परोस रही है वो कहां तक उचित है?
🚩बाबा कोर्ट में रोये , अपनी गाड़ी में और जेल में अपनी बेटी के साथ दुष्कर्म किया, गुफा में दुष्कर्म होते है, ये सब #झूठी #कहानियां बनाना कहाँ तक उचित है?
🚩कल यही मीडिया बाबा राम रहीम की फिल्म प्रमोट कर रही थी, उनका प्रचार कर रही थी अचानक क्या हुआ कि उनके खिलाफ अभियान चल पड़ा?
 क्या यह एक बड़ा षडयंत्र नही है?
🚩इस बारे में प्रखर राष्ट्रवादी चैनल सुदर्शन न्यूज के मालिक श्री सुरेश चव्हाणके ने बताया कि अधिकतर मीडिया को #ईसाई मिशनरियों की #वेटिकन सिटी और #अरब देश से #फंडिग होती है, जिससे वे #हिन्दू संस्कृति को #तोड़ने और #हिन्दू साधु-संतों के प्रति भारत की #जनता के मन में #नफरत #पैदा करने का #काम करते हैं । वे #हिन्दुओं के #मन में ये डालने का प्रयास करते हैं कि आपके #धर्मगुरु तो अपराधी हैं आप #हिन्दू धर्म #छोड़कर #हमारे #धर्म मे आ #जाओ । ये उनकी थ्योरी है ।
🚩अब आपके मन में प्रश्न होता होगा कि उनको इससे क्या फायदा होगा?
🚩आपको बता दें कि भारतीय #मीडिया को हिन्दू संतों को बदनाम करने के लिए और #पादरियों के #दुष्कर्म छुपाने के लिए पैसा मिलता है ।
अगर हिन्दू साधु-संतों के प्रति देशवासियों की आस्था बनी रही तो भारत में धर्मांतरण का कार्य आसानी से नहीं होगा।
🚩अब सवाल है कि धर्मांतरण करवाने से उनको क्या फायदा मिलेगा..??
🚩भारतीय #संस्कृति वो उत्तम और पवित्र संस्कृति है जो हमें कम सुविधाओं में भी सुखी स्वस्थ और सम्मानित जीवन जीने की शैली देती है । पश्चिम संस्कृति में भोग की प्रधानता है जबकि भारतीय संस्कृति में योग की प्रधानता है । ये वो #संस्कृति है जो मानव को #महेश्वर तक की यात्रा कराने में सक्षम है और दूसरी ओर पाश्चात्य संस्कृति बाहरी चकाचौंध वाले जीवन को ही सर्वस्व समझती है।
🚩अब अगर भारत पर राज्य करना है तो सबसे पहले भारतवासियों का नैतिक व चारित्रिक पतन कराना होगा व इनके आस्था के केंद्र साधु-संतों को तोड़ना होगा ।
🚩यही काम #मीडिया द्वारा #मिशनरियाँ करा रही हैं हिन्दू #साधु संतों के प्रति समाज के मन में #नफरत पैदा करके ।
🚩अतः हिन्दू सावधान रहें!
बिकाऊ मीडिया और सेकुलर लोगो से,नहीं तो फिर से हिंदुस्तान गुलामी की जंजीरों में जकड़ा जाएगा ।
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