प्रेस विज्ञप्ति : निर्दोष संत आसारामजी बापू जेल में, दोषी ईसाई पोप बाहर कैसे ?

Press Release: In innocent Asaram Bapu jail,
how guilty Christian Pope out?
🚩संत आसारामजी बापू के सजा के निर्णय से आहत होकर हिन्दू संगठनो कि दिनांक 2 मई 2018 को हिन्दू महासभा भवन दिल्ली में बैठक हुई।
🚩बैठक को संबोधित करते हुए अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चंद्र प्रकाश कौशिकजी ने कहा कि संत आसारामजी बापू कि गिरफ्तारी और सजा इस बात का प्रमाण है कि न्यायालय कि हिन्दू धर्म विरोधी कार्यप्रणाली में कोई कमी नही आई है। संत आसारामजी बापू के पूरे परिवार को पूरी संस्था को प्रताड़ित किया जा रहा है। संत आसारामजी बापू कि गिरफ्तारी और सजा इस बात का प्रमाण है कि 15 अगस्त सन 1947 को भारत कि जनता ने लिखित रूप से ईसाई अंग्रेजो कि गुलामी को स्वीकार कर लिया है। यह हिन्दुओं के लिए चेतावनी है कि यदि भारत की जनता स्वाभिमान और न्याय के साथ  जीना चाहती है तो उसे सन 1857 की स्वतंत्रता की अधूरी लड़ाई को पूरी लड़नी होगी। देश का प्रबुद्ध नागरिक इस अन्याय पूर्ण फैसले पर सवाल जरूर उठाएगा यह उसका संवैधानिक अधिकार और कर्तव्य है। यह बात फैसले कि सुनवाई में स्पष्ट है कि न्यायाधीश महोदय ने संत आसारामजी बापू के वकीलों द्वारा प्रस्तुत लड़की के बालिग होने के प्रमाण पत्रों को संज्ञान में नही लिया। लड़की कि मेडिकल रिपोर्ट में बलात्कार और छेड़खानी के निशान नही पाए गए। स्पष्ट है कि संत आसारामजी बापू के केस में बलात्कार हुआ ही नही है। जो राजनेता बापूजी के चरणों में लोटपोट होते थे वो हिंदुओ कि पीठ में छुरा घोपने वाले साबित हुए, वे इस अत्याचार पर चुप है। सरकार ने पहले भी कई बड़े केसों की फाइलें बन्द की है, जेल में सजा काट रहे आतंकवादियों को छोड़ा है, मुकदमें वापस लिए हैं, सरकार चाहे तो सब कुछ कर सकती है। जिन्होंने श्री रामजी से कपट किया वो संत आसारामजी से क्या निभाएँगे?
🚩हिन्दू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विष्णु गुप्ता ने कहा बापू आसारामजी कि लीगल टीम को न्यायाधीश के विरुद्ध अपील में जाना चाहिए। हिन्दू सेना न्यायाधीश पर कार्यवाही कि मांग करेगी, सरकार को चेतावनी देगी। राष्ट्र व्यापी आंदोलन करेगी। जो अवसरवादी राजनेता है, तथाकथित हिन्दू संगठन हैं, साधु-संत हैं, हिंदूवादी होने का दावा करते हैं, वे बेनकाब हो चुके हैं । कांग्रेस के पप्पू को इस जन्म में यदि प्रधानमंत्री बनना है तो अधर्मी गुरु ईसाई पोप की शरण छोड़कर अहमद पटेल और सोनिया गांधी के साथ बापूजी के आश्रम में सेवा खोजने के लिए जाना चाहिए और अपने पापों का प्रायश्चित करना चाहिये। संत आसारामजी बापू जोधपुर जेल में तो  ईसाई पोप जेल से बाहर कैसे? चर्च के अनाथ आश्रम के 235 शारीरिक मानसिक अपंग बच्चों से 20 वर्ष तक यौन शोषण करने के मामले में ईसाई पोप दोषी पाए गए, सन 2010 से  उनकी गिरफ्तारी कि मांग हो रही है।सन 2008 से उड़ीसा के स्वामी लक्ष्मणानंद के हत्यारे ईसाई पोप कि गिरफ्तारी कि मांग हिन्दू संगठन कर रहे हैं ।
🚩श्री मानिक भाईजी अध्यक्ष धर्म रक्षा दल ने कहा छद्म युद्ध के द्वारा हिंदुओं को समाप्त किया जा रहा है उनका शोषण किया जा रहा है। भारत में खुले आम हिन्दू देवी -देवताओं का अपमान हो रहा है ,गौ मांस खाने की खुली घोषणा हो रही है। संविधान का खुला उल्लंघन करके हिंदुओ कि जेब काटी जा रही है। संत आसारामजी बापू इस दैवी -दानवी युद्ध में निर्णायक बिंदु बन गए हैं क्योंकि पूरे विश्व में उनके करोड़ो अनुयायी हैं ।
🚩दारा सेना अध्यक्ष श्री मुकेश जैन ने कहा कि भारत में न्यायालय, राजनेता, प्रचार तंत्र ईसाई मिशनरी के खरीदी गुलाम है। जब चर्च के नक्सली ईसाई आंतकवादी देशद्रोही टीम अन्ना -केजरीवाल कि धुन पर भारत कि जनता आँख बन्द करके नाच रही थी जब देशद्रोही टीम अन्ना-केजरीवाल भारत का तख्ता पलट करके भारत को लीबिया, सीरिया, मिश्र की तरह कब्रिस्तान, खंडहर बनाने के लिए आंदोलन कर रहे थे तब इन देशद्रोही ताकतों को हमने कुचल दिया था। देशद्रोही बिकाऊ मीडिया टीम अन्ना केजरीवाल को भगवान बना रहा था। ईसाई दानवाधिकार आयोग और इसके बिकाऊ भ्रष्ट न्यायाधीशों को हमने कई बार इनकी औकात दिखाई है, सर्वोच्च न्यायालय के कई फैसले बदलवाए है। अधर्मी ईसाई पोप धर्मान्तरण का धंधा  कर रहे हैं और भारत में कई तरह के आतंकवाद नाम बदल कर चला रहे हैं, सैनिक पुलिस जवानों की आये दिन हत्या करवा रहे हैं ।
🚩चर्च से कई राजनीतिक दल,पक्ष ,विपक्ष कई हिन्दू संगठन,कई साधु संत भारत की हिन्दू जनता को भ्रमित करने के लिए चलाए जा रहे हैं,असली मुद्दे ही गायब हैं। ये दलित,मुस्लिम मुद्दे बना कर दंगे भड़का रहे हैं ।धर्मान्तरण के विरुद्ध संत आसारामजी बापू उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती रहे हैं, इसलिये उनको झूठे आरोप में फंसाया गया है। बापूजी के आश्रम से  प्रकाशित ब्रह्मचर्य महिमा पुस्तक, दिव्य प्रेरणा प्रकाश पुस्तक को विश्व कि सभी शिक्षा संस्थाओ में अनिवार्य रूप से लागू किया जाये । इसकी मांग हमने संयुक्त राष्ट्र संघ से कई बार की है जिससे बच्चों को ईसाई पादरियों के यौन शोषण से बचाया जा सके ,युवा पीढ़ी को बर्बाद होने से बचाया जा सके। इस बैठक में यूनाइटेड हिन्दू फ्रंट एवम अन्य हिन्दू  संगठन शामिल हुए।

*प्रेषक:*  दीपक वर्मा
(गाज़ियाबाद) जिला अध्यक्ष
धर्म रक्षा दल      09971955430
*कार्यालय पता:*  दीपक वर्मा
(वर्मा इंटर प्राइजेज) रामानुज दयाल मार्केट, opp. मोहन प्लाज़ा गाज़ियाबाद
*जिला:* गाज़ियाबाद (उ.प्र.)

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मीडिया ट्रायल न्यायधीशों को प्रभावित करने कि एक बड़ी प्रवृत्ति – दिल्ली उच्च न्यायालय

🚩मीडिया ट्रायल इतना खतरनाक है कि किसी भी अच्छे व्यक्ति कि छवि को खराब कर दे और बुरे व्यक्ति को महान बना दे। भारत में आज यही सब चल रहा है । इसके लिए न्यायलय ने भी चिंता जताई है।
🚩दिल्ली उच्च न्यायलय ने कहा है : ‘‘मीडिया में दिखायी गयी खबरें न्यायधीश के फैसलों पर असर डालती हैं । खबरों से न्यायधीश पर दबाव बनता है और फैसलों का रुख भी बदल जाता है। पहले मीडिया अदालत में विचाराधीन मामलों में नैतिक जिम्मेदारियों को समझते हुए खबरें नहीं दिखाता था लेकिन अब नैतिकता को हवा में उड़ा दिया है।
🚩मीडिया ट्रायल के जरिये दबाव बनाना न्यायधीशों को प्रभावित करने की प्रवृत्ति है। जाने-अनजाने में एक दबाव बनता है और इसका असर आरोपियों और दोषियों की सजा पर पड़ता है ।’’
A big tendency to influence media trial judges – Delhi High Court
🚩सर्वोच्च न्यायलय के पूर्व न्यायधीश न्यायमूर्ति के एस. राधाकृष्णन् का मानना है : ‘‘मीडिया ट्रायल अच्छा नहीं है क्योंकि कई बार इससे दृढ़ सार्वजनिक राय कायम हो जाती है जो न्यायपालिका को प्रभावित करती है । मीडिया ट्रायल के कारण कई बार आरोपी कि निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो पाती ।’’
🚩न्यायधीशों की बात सही है अभी हाल कि तीन ताजा उदाहरण देते है।
🚩पहला कठुआ में जनवरी की घटना का तूल पकड़ता है अप्रैल में! और एक हिन्दू को पकड़ा जाता है जबकि रिपोर्ट में स्पष्ट आया है कि रेप हुआ ही नही लेकिन मीडिया ट्रायल के कारण एक हिंदू युवक को जेल जाना पड़ा और मंदिर को बदनाम किया गया ।
🚩दूसरा मामला सलमान खान है अभी हाल ही में जोधपुर सेशन कोर्ट ने 5 साल की सजा सुनाई लेकिन जैसे ही मीडिया ने सलमान खान के फेवर में खबरें दिखानी शुरू किया तो दो दिन में ही जमानत मिल गई ।
🚩तीसरा मामला है हिन्दू संत आसारामजी बापू का जब भी उनकी जमानत अर्जी लगती है तो मीडिया उनके खिलाफ खबरे चलाना शुरू कर देती जिससे उनको जमानत नही मिल पाती और निर्णय सुनाने पहले ही उनके खिलाफ खबरें दिखाना शुरू किया जिससे उनको उम्रकैद की सजा दी गई जबकि गवाहों और सबूतों के आधार पर केस बनता ही नही है और मीडिया जिसको रेप (बलात्कार) शब्द उपयोग कर रही है वास्तविकता में उनके ऊपर रेप का कोई आरोप ही नही है केवल छेड़छाड़ी के ही आरोप है, उसमे ही उनको उम्रकैद कि सजा दे दी तो कही न कही मीडिया ट्रायल का ही प्रभाव है ।
🚩पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता रविशेखर सिंह बताते हैं : ‘‘कई देशों में मीडिया ट्रायल के खिलाफ बड़े सख्त कानून बनाये गये हैं। इंग्लैंड में कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट एक्ट 1981 की धारा 1 से 7 में मीडिया ट्रायल के बारे में सख्त निर्देश दिये गये हैं । कई बार इस कानून के तहत बड़े अखबारों पर मुकदमा भी चलाये गये हैं । धारा 2(2) के तहत प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ऐसा कोई समाचार प्रकाशित नहीं कर सकता जिसके कारण ट्रायल की निष्पक्षता पर गम्भीर खतरा उत्पन्न होता हो । जिस तरह भारत में मीडिया ट्रायल के द्वारा केस को गलत दिशा में मोड़ने का प्रचलन हो रहा है, ऐसे में अन्य देशों की तरह भारत में भी मीडिया ट्रायल पर सख्त कानून बनाना बहुत ही आवश्यक हो गया है।’’
🚩विश्व हिन्दू परिषद के मुख्य संरक्षक व पूर्व अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वर्गीय श्री अशोक सिंहलजी कहते हैं : ‘‘मीडिया ट्रायल के पीछे कौन है ? हिन्दू धर्म व संस्कृति को नष्ट करने के लिए मीडिया ट्रायल पश्चिम का बड़ा भारी षड़्यंत्र है हमारे देश के भीतर ! मीडिया का उपयोग कर रहे हैं विदेश के लोग ! उसके लिए भारी मात्रा में फंड्स देते हैं, जिससे हिन्दू धर्म के खिलाफ देश के भीतर वातावरण पैदा हो ।’’
🚩मीडिया विश्लेषक उत्पल कलाल कहते हैं: ‘‘यह बात सच है कि संतों, राष्ट्रहित में लगी हस्तियों पर झूठे आरोप लगाकर मीडिया ट्रायल द्वारा देशवासियों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है । जनता पर अपनी बात को थोपना, सही को गलत, गलत को सही दिखाना – क्या इससे प्रजातंत्र को मजबूती मिलेगी । मीडिया के ऐसी रिपोर्टिंग पर सरकार, न्यायपालिका और जनता द्वारा लगाम कसी जानी चाहिए ।
🚩राजस्थान उच्च न्यायलय के मुख्य न्यायधीश सुनील अम्बवानी ने बताया था कि जब तक लोगों की मान्यता नहीं बनी है तब तक वह न्यायधीश किसी से नहीं डरता है । लेकिन मीडिया कई मामलों में पहले ही सही-गलत की राय बना चुका होता है । इससे न्यायधीश पर दबाव बन जाता है कि एक व्यक्ति जो जनता कि नजर में दोषी है, उसको अब दोषी ठहराने की जरूरत है । न्यायधीश भी मानव है । वह भी इनसे प्रभावित होता है ।
🚩कई न्यायविद् एवं प्रसिद्ध हस्तियाँ भी मीडिया ट्रायल को न्याय व्यवस्था के लिए बाधक मानती हैं । एक याचिका कि सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायलय के न्यायधीश न्यायमूर्ति कुरीयन जोसेफ ने कहा है : ‘‘दंड विधान संहिता की धारा 161 और 164 के तहत दर्ज आरोपी के बयान भी मीडिया को जारी कर दिये जाते हैं। अदालत में मुकदमा चलता है, उधर समान्तर मीडिया ट्रायल भी चलता रहता है।’’ सर्वोच्च न्यायलय ने कहा है : ‘‘मीडिया का रोल अहम है और उससे उम्मीद कि जाती है कि वह इस तरह अपना काम करे कि किसी भी केस कि छानबीन प्रभावित न हो । जब मामला अदालत में हो, तब मीडिया को संयम रखना चाहिए । उसे न्यायिक प्रक्रिया में दखल देने से बचना चाहिए।’’
🚩उच्चतम न्यायलय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर कहते हैं : ‘‘मीडिया ट्रायल काफी चिंता का विषय है । यह नहीं होना चाहिए। इससे अभियुक्त के खिलाफ पूर्वाग्रह से ग्रसित होने की धारणा बनती है । फैसला अदालतों में ही होना चाहिए ।’’
🚩अब मीडिया पर लगाम लगाना जरूरी है नही तो एक के बाद एक इसके शिकार होते रहेंगे ।
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जानिए आसाराम बापू को जेल भेजना क्यों जरूरी था?

🚩 #हिन्दू संगठन #संस्कृति रक्षक #संघ द्वारा समय-समय पर कई किताबें #प्रकाशित की गई हैं, उसमें एक #किताब है जिसका नाम है “#आसारामजी बापू खतरा या साजिश”  उस #किताब में एक #टाइटल लिखा है कि #संत #आसारामजी को जेल भेजना बहुत जरूरी था !!!
🚩#किताब में लिखा है कि खइचठ रिपोर्ट के अनुसार ‘भारत में किसी भी #गरीब को #ईसाई बनाने का #खर्च #दुनिया के किसी विकसित #देश के मुकाबले 700 गुणा सस्ता है । #भारत पोप के लिए सबसे सस्ता बाजार है । हिन्दू #संत #आसाराम बापू के #सत्संग व बढ़ते #सेवाकार्यों से यह बाजार महँगा होता जा रहा था । #धर्मान्तरण में #तेजी लाने के लिए हिन्दू #संत आसाराम बापू को #जेल भेजकर उनका #प्रभाव #कम करना बहुत #जरूरी #हो गया था ।
🚩#चाकू, छुरा व गोलियों से भून दिया :
🚩#बापू के कई विरोधियों में से सात को गोलियों से भून दिया गया जिसमें तीन मरे, चार बच गये तथा दूसरे एक के ऊपर तेजाब से व दो के ऊपर चाकू से हमला किया गया।
🚩मरने/मारने वाली #षड्यंत्रकारियों की #टीम का एक सदस्य भोलानंद गुप्ता जो पुलिस के हाथों लगा, उसने #सच्चाई बता दी कि हमारी #टीम के लोगों का यह कहना था कि ‘#देखो गुप्ता जी आप फंसते हो या हम में से कोई भी अगर पकड़ा गया तो हम एक दूसरे को गोली मार देंगे या चाकू से वार कर देंगे, ऐसा कुछ हम करवा देंगे जिससे केस पूरा #बापू पर आ जाएँ ।
🚩होता भी ऐसा ही रहा । हर सम्भव प्रयास #मीडिया द्वारा #बापू को दोषी बनाने का किया गया तथा #आश्रम वालों पर भी केस किये गए ।
🚩#संत #आसारामजी का खतरनाक #मिशन #धर्मान्तरण को #रोकना !!
🚩#संत #आसारामजी #बापू के वक्ताओं द्वारा प्रतिवर्ष #हजारों #सत्संग कार्यक्रम, 1200 #भजन मंडली, प्रति माह 17 लाख #ऋषि प्रसाद व 3 लाख #लोक कल्याण पत्रिका का प्रकाशन तथा प्रति #वर्ष 4,000 #संकीर्तन यात्रायें निकाली जाती हैं । बच्चों को सुसंस्कारी बनाने के लिए 17000 बाल संस्कार खोले, कत्लखाने जाती गाये बचाकर अनेक गौशालायें खोली, वैदिक पद्धति के अनुसार अनेक गुरुकुल खोले,  उनके सैकडों #आश्रमों में #आयुर्वेदिक, #होमियोपैथिक, #एक्युप्रेशर आदि की #चिकित्सा की जाती है तथा #गाँव-गाँव में #गरीबों आदिवासियों में #निःशुल्क #चिकित्सा-शिविर आयोजित होते हैं तथा कई चल-चिकित्सालय चलते हैं ।
🚩#उड़ीसा, #गुजरात, #मध्य प्रदेश,#छत्तीसगढ, #महाराष्ट्र आदि #राज्यों के सबसे #गरीब इलाकों में गरीबों, #अनाश्रितों एवं विधवाओं के लिए #बापू के #आश्रम द्वारा राशन कार्ड दिये गये हैं । जिससे उन्हें हर माह #अनाज व जीवन उपयोगी वस्तुओं की निःशुल्क सामग्री मिलती है ।
🚩#संत #आसारामजी की ‘#भजन करो #भोजन करो व #रोजी पाओ” #योजना के तहत जिनकी आय कम है अथवा खाली बैठे वृद्धों व परिवारजनों के लिए सुबह से शाम तक #भगवन्नाम जप, #सत्संग, #कीर्तन करवाकर #भोजन व रोजी ( 50 से 80 रुपया प्रतिदिन) दी जाती है । #संत #आसारामजी #बापू ऐसी अनेकों योजनायें चलाकर #ईसाई धर्मान्तरण को रोकते हैं ।
🚩 #विदेशी कम्पनियों को उखाड फेंकना !!
🚩अगर #बापू आसारामजी के #चार #करोड़ #शिष्य व अनुयायी 50 सालों तक शराब व सिगरेट नहीं पीते हैं तो 37 लाख 64,000 करोड़ रुपयों का #शराब कम्पनियों को #घाटा, 22 लाख 72,000 करोड़ रुपयों का #सिगरेट कंपनियों को #घाटा होता है ।
🚩‘#वेलेन्टाइन डे से जुड़े सप्ताह के दौरान #चॉकलेट, फूल, ग्रीटिंग आदि विभिन्न उपहारों की बिक्री के कारोबार में भी #करोड़ों रुपयों का #नुकसान होता है । ऐसे ही #गुटका, #ब्लू #फिल्म, #अश्लील सामान आदि बनाने वाली #कम्पनियों का भी यही हाल है । यदि इन सभी आंकडों को जोड़ा जाय तो #कई सौ लाख करोड़ रुपये हो जाते है। उनके इतने बडे नुकसान की वजह सिर्फ हिन्दू #संत #आसारामजी हैं ।
🚩 #पाश्चात्य #संस्कृति को रोकना !!
नये #त्यौहार बनाना !!
🚩 #संत #आसारामजी ने सन् 2006 से 14 फरवरी को ‘#वेलेन्टाइन डे की #जगह ‘#मातृ-पितृ पूजन दिवस #मनाना शुरु करवाया । इसका ऐसा प्रचार हुआ कि मानो ‘#वेलेन्टाइन डे को #उखाड़ने का ताँडव शुरु हो गया हो । #मलेशिया, #ईरान, #सउदी अरब, #इंडोनेशिया,#जापान, आदि #देशों ने #वेलेन्टाइन डे पर #प्रतिबंध लगा दिया। ‘#मातृ-पितृ पूजन दिवस #विश्वव्यापी हो गया है जिससे #ईसाई जगत में बहुत बड़ी खलबली मच गई ।
🚩इस #बाबा ने #जेल में रहते हुए भी 25 दिसम्बर को ‘#क्रिसमस डे की #जगह‘#तुलसी पूजन दिवस के नये #त्यौहार का प्रचार प्रसार अपने #शिष्यों से करवाया । #धर्मान्तरण करने वाला #ईसाई जगत #बाबा के जेल में जाने के बाद भी परेशान है ।
🚩इन सभी को लेकर #बापू #आसारामजी को #जेल भेजना जरूरी था, #नही तो #ईसाई मिशनरियों का #हिन्दुओं का धर्मान्तरण करवाना #मुश्किल हो जाता और #विदेशी कम्पनियाँ #ठप हो जाती ।
🚩#अब तो आप #समझ ही गये होंगे कि #भारत #विरोधियों द्वारा #संत #आसारामजी बापू को #जेल भेजना कितना जरूरी था ।
🚩 लेकिन ये भी बता दें कि #हिन्दू समाज जो सोया है और #विदेशी ताकतों के खिलाफ आवाज नही उठा रहा है तो एक के बाद एक #संत जेल में भेजे जायेगे और #बाद में हम सभी को #पछतावा ही हाथ लगने वाला है ।
🚩क्योंकि #हिन्दू संस्कृति ही नही बचेगी तो फिर #हिंदुओं का विनाश तो सुनिश्चित है इसलिए अभी भी समय है ।
🚩समय पर चेत जावो और #हिन्दू संतों पर हो रहे #कुठाराघात के #खिलाफ एक होकर #आवाज बुलंद करो ।
🚩 { आसारामजी बापू खतरा या साजिश किताब से }
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संत जेवियर्स के रक्त रंजित इतिहास को बहुत कम लोग जानते है, जानकर करेंगे नफरत

🚩 *संत जेवियर्स के रक्त रंजित इतिहास को बहुत कम लोग जानते है, जानकर करेंगे नफरत*
🚩इतिहास की एक अनजानी पर हृदय द्रावक घटना है 500 साल पहले गोवा में कुमुद राजा का शासन चलता था। राजा कुमुद को जबरजस्ती से हटा कर पोर्तुगीज ने गोवा को अपने कब्जे में कर दिया।
Very few people know the history of St. Xavier’s
blood-stained history, will hate knowing
🚩पुर्तगल सेना के साथ केथलिक पादरी भी धर्मान्तरण करने के लिए बड़ी संख्या में हमला किया। हर गाँव में लोगो को धमकी और जबरन ईसाई बनाते पादरी गोवा के पूरे शहर पर कब्जा किया। जो लोग चलने के लिए तैयार नहीं होते उनको क्रूरता से मार दिया जाता।
🚩जैनधर्मी राजा कुमुद और गोवा के सारे 22 हजार जैनों को भी धर्म परिवर्तन करने के लिए ईसाई ने धमकी दे दी कि 6 महीनों में जैन धर्म छोड़ कर ईसाई धर्म स्वीकार कर दो अथवा मरने के लिए तैयार हो जाओ राजा कुमुद और भी जैन मरने के लिए तैयार थे परंतु धर्म परिवर्तन के लिए हरगिज राजी नहीं थे।
🚩छः महीने के दौरान ईसाई जेवियर्स ने जैनों का धर्म परिवर्तन करने के लिए साम-दाम, दंड-भेद जैसे सभी प्रयत्न कर देखे । तब एक जैन ईसाई बनने के लिए तैयार नहीं हुआ। तब क्रूर जेवियर्स पोर्तुगीझ लश्कर को सभी का कत्ल करने के लिए सूचन किया। एक बड़े मैदान में राजा कुमुद और जसिं धर्मी श्रोताओं, बालक-बालिकाओं को बांध कर खड़ा कर दिया गया। एक के बाद एक को निर्दयता से कत्ल करना शुरू किया। ईसाई  जेवियर्स हस्ते मुख से संहरलीला देख रहा था। ईसाई बनने के लिए तैयार न होनेवालों के ये हाल होंगे। यह संदेश जगत को देने की इच्छा थी। बदले की प्रवृति को वेग देने के लिए ऐसी क्रूर हिंसा की होली जलाई थी।
🚩केथलिक ईसाई धर्म के मुख्य पॉप पोल ने ईसाई पादरी जेवियर्स के बदले के कार्य की प्रसंशा की और उसके लिए उसने बहाई हुई खून की नदियों के समाचार मिलते पॉप की खुशी का अंत नहीं रहा। जेवियर्स को विविध इलाक़ा देकर सम्मान किया। जेवियर्स ने सेंट जेवियर्स के नाम से घोषित किया और भारत में शुरू हुई अंग्रेजी स्कूसंत जेवियर्स के रक्त रंजित इतिहास को बहुत कम लोग जानते है, जानकर करेंगे नफरतल और कॉलेजों की श्रेणी में सेंट जेवियर्स का नाम जोड़ने में आया। आज भारत में सबसे बड़ा स्कूल नेटवर्क में सेंट जेवियर्स है।
🚩हजारों जैनों और हिंदुओं के खून से पूर्ण एक क्रूर ईसाई पादरी के नाम से चल रही स्कूल में लोग तत्परता से डोनेशन की बड़ी रकम दे कर अपने बच्चों को पढ़ने के लिए भेज रहें है। कैसे करुणता है। और जेवियर्स कि बदले की वृत्ति  को पूर्ण समर्थन दे रहे पाटुगिझो को पॉप ने पूरे एशिया खंड के बदले की वृत्ति के सारे हक दे दिए। धर्म परिवर्तन प्राण की बलि देकर भी नहीं करने वाले गोवा के राजा कुमुद और बाईस हजार धर्मनिष्ठ जैनों का ये इतिहास जानने के बाद हम इससे बोध पाठ लेने जैसा है। आज की रहन-सहन में पश्चिमीकरण ईसाईकरण का प्रभाव बढ़ रहा है। भारत की तिथि-मास भूलते जा रहें है। अंग्रेजी तारीख पर ही व्यवहार बढ़ रहा है। भारतीय पहेरवेश घटता जा रहा है ।पश्चिमीकरण की दीमक हमें अंदर से कमज़ोर कर रही है। धर्म और संस्कृति रक्षा के लिए फनाहगिरी संभाले । स्त्रोत : ह्रदय परिवर्तन  दिसम्बर 2017
🚩ईसाई धर्म तो ऊपर से देखने पर एक सभ्य, सुशिक्षित एवं शांतिप्रिय समाज लगता हैं।  जिसका उद्देश्य ईसा मसीह की शिक्षाओं का प्रचार प्रसार एवं निर्धनों व दीनों की सेवा-सहायता करना हैं। इस मान्यता का कारण ईसाई समाज द्वारा बनाई गई छवि है।
🚩भारत में तो ईसाई मिशनरियां खुल्लेआम धर्मान्तरण करवा रही है, हिन्दू देवी-देवताओं को गालियां बोल रही है, हिन्दू साधु-संतों को जेल में भिजवा रही है, कान्वेंट स्कूलों में भारत माता की जय बोलने से मना कर रही है, मेहंदी नही लगाने देती, हिन्दू त्यौहार मनाने को मना करती है, यहाँ तक कि हिन्दू त्यौहारों पर भी छुट्टियां नही दी जाती हैं और भारत माता की जय बोलने और हिन्दू त्यौहार मनाने पर उनको स्कूल से बाहर किया जाता है फिर भी सरकार उनपर कोई कार्यवाही नही करती है ।
🚩मीडिया में भी ईसाई मिशनरियों का भारी फंडिग रहता है इसलिए मीडिया चर्च के पादरी कितने भी दुष्कर्म करें, उनके खिलाफ नही दिखाती जबकि कोई हिन्दू साधु-संत पर झूठा आरोप भी लग जाता है तो उसपर 24 घण्टे खबरें चलाती है।
🚩भारत मे हिन्दुओं के खिलाफ इतना अत्याचार ईसाई मिशनरियां द्वारा हो रहा फिर भी कोई हिन्दू कुछ बोल नही रहा है और ये मिशनरियां ट्रंप के सामने घुटने टेकने लगी हैं की उनपर ही अत्याचार हो रहा है।
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innocent-is-not-getting-bail-convicted-sasikala-gets-parole

निर्दोषों को नहीं मिल रही है जमानत, दोषी शशिकला को मिल गई पैरोल

अक्टूबर 7,2017
🚩आय से अधिक संपत्ति के मामले में अदालत का फैसला आने में 19 साल का वक्त लगा, 19 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने वी .के. शशिकला को दोषी करार दिया और चार साल की सजा सुनाई है ।
🚩कर्नाटक जेल में बंद शशिकला को अपने बीमार पति से मिलने के लिए शुक्रवार को पांच दिन का पैरोल मिल गया है।
Innocent is not getting bail, convicted Sasikala gets parole

 

🚩पर जनता सवाल कर रही है कि ओडिसा के ओझर जेल में दारा सिंह(बजरंगदल) पिछले 18 सालों से सजा काट रहे हैं  जिन्हे अपने परिजनों से मिलने के लिए एक भी पैरोल नहीं मिली है और वहीं दूसरी तरफ वो शशिकला हैं  जिन्हें जेल में अभी 6 महीने हुए हैं उसको पैरोल दे दी गयी।
🚩दूसरा मामला हिन्दू संत आसारामजी बापू का है वे चार साल से अधिक समय से जोधपुर जेल में बंद हैं, उन पर अभी तक एक भी #आरोप #सिद्ध #नहीं #हुआ है, केवल #ट्रायल चल रहा है , उनकी उम्र 81 वर्ष है , उनका स्वास्थ्य भी काफी खराब रहता है लेकिन उनको इलाज कराने के लिए कुछ दिन के लिए भी #जमानत #नहीं मिल रही है, जबकि भारत के कानून के अनुसार जब तक दोष सिद्ध नहीं होता है तब तक उनको जमानत मिलती है लेकिन उनको जमानत नहीं मिल रही है ऐसी दोहरी नीति क्यों ?
🚩जबकि बापू #आसारामजी को #फंसाने के कई #सबूत भी मिले हैं और लड़की की #मेडिकल रिपोर्ट में एक खरोंच भी  नहीं पाई गई, मेडिकल में भी #क्लीन चिट मिल चुकी है, डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने केस पढ़कर बताया कि लड़की के #कॉल डिटल्स से पता चला कि जिस समय छेड़छाड़ी का आरोप लगाया है उस समय तो वहाँ थी ही नहीं, वो अपने मित्र से बात कर रही थी और बापू आसारामजी भी दूसरे कार्यक्रम में थे तो केस बनता ही नहीं है ।
🚩डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी  ने तो यहाँ तक कह दिया है कि मैंने तो #आशाराम बापू के जेल जाने से पहले ही  उनको बता दिया था कि आप जो #हिन्दू #धर्मपरिवर्तन कर चुके लाखों हिंदुओं की घर वापसी करवा रहे हो और धर्मपरिवर्तन पर #रोक #लगाई है इससे #वेटिकन सिटी बहुत नाराज है , #सोनिया गांधी से मिलकर आपको #जेल भेजने का #प्लान बना रहे  हैं ।
🚩और आखिर यही हुआ झूठा केस दर्ज करवाकर #मीडिया द्वारा #बदनाम करवाकर जेल भिजवाया गया ।
🚩#दारा सिंह(बजरंगदल) ने भी #धर्मपरिवर्तन का खूब #विरोध किया था वे ईसाई #मिशनरियों को धर्मपरिवर्तन करने नहीं दे रहे थे उसके फल स्वरूप जेल जाना पड़ा ।
🚩शशिकला जेल में लक्जिरियस जिंदगी जी रही हैं उसके कई खुलासे भी हुए हैं लेकिन इन हिन्दू समर्थकों को जेल में भी कोई विशेष सुविधा नहीं मिल रही है न ही पैरोल या जमानत ही दी जा  रही है ।
🚩आखिर ये किस तरह की दोहरी नीति है, जहां #भ्रष्टाचारी नेता की पैरोल की मांग उचित समझी जाती है और हिन्दू समर्थकों व हिंदुत्व के हक की लड़ाई लड़ने वालों को कानून द्वारा प्राप्त अधिकारों से भी वंचित रखा जाता है।
🚩#संजय दत्त को भी #दोषी सिद्ध होने पर भी बार-बार पैरोल पर छोड़ा जाता था, #लालूप्रसाद यादव भी बाहर घूम रहे हैं, पत्रकार तरुण #तेजपाल पर #आरोप #सिद्ध होने पर भी बाहर हैं, 9000 करोड़ लेकर भाग जाने वाला विजय माल्या को गिरफ्तार करने के बाद 3 घण्टे में जमानत मिल जाती है इससे सिद्ध होता है कि #नेता, #अभिनेता, #पत्रकार और #अमीरों को तुरंत #जमानत हासिल हो सकती है लेकिन हिंदुत्वनिष्ठों को न जमानत मिलती है  न ही कोई विशेष सुविधा ।
🚩सालों से हम देख रहे हैं कि एक के बाद एक #हिंदुत्वनिष्ठों को #टारगेट किया जा रहा है और हिन्दू मूक दर्शक बन तमाशा देख रहा हैलल
। पर अगर ऐसे ही चलता रहा तो एक समय ऐसा आएगा जब हिंदुओं के पक्ष में बोलने वाला कोई नहीं रहेगा ।
🚩अभी भी समय है चेत सकें तो चेत !!
एक कवि ने लिखा है :-
आज उठ रही हर ऊँगली #न्याय व्यवस्था पर,
जहाँ #भ्रष्टाचार का बोलबाला है,
निर्दोष सालों से बैठे जेल में न्याय की आस लगाये
और दोषी पा रहे पैरोल व बेल, वाह री न्याय व्यवस्था,अजब तेरा खेल !!
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हिन्दू राष्ट्र, असम, कश्मीर, hindus outraged,

भारतीय राज्य कश्मीर और असम में हिन्दुओं का बुरा हाल, अस्तित्व भी भारी संकट में

सितम्बर 30, 2017
पूरे विश्व में अब मात्र 13.95 प्रतिशत हिन्दू ही बचे हैं ! नेपाल कभी एक हिन्दू राष्ट्र हुआ करता था परंतु वामपंथ के वर्चस्व के बाद अब वह भी धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। कई चरमपंथी देश से हिन्दुओं को भगाया जा रहा है, परंतु कोई ध्यान नहीं देता। हिन्दू अपने एक ऐसे देश में रहते हैं, जहाँ के कई हिस्सों से ही उन्हें बेदखल किए जाने का क्रम जारी है, साथ ही उन्हीं के उप-संप्रदायों को गैर-हिन्दू घोषित कर उन्हें आपस में बांटे जाने का षडयंत्र भी जारी है !
The bad situation of Hindus in Indian state, Kashmir and Assam, survival too
अब भारत में भी हिन्दू जाति कई क्षेत्रों में अपना अस्तित्व बचाने में लगी हुई है। इसके कई कारण हैं। इस सच से हिन्दू सदियों से ही मुंह चुराता रहा है जिसके परिणाम समय-समय पर देखने भी मिलते रहे हैं। इस समस्या के प्रति शुतुर्गमुर्ग बनी भारत की राजनीति निश्‍चित ही हिन्दुओं के लिए पिछले 100 वर्षो में घातक सिद्ध हुई है और अब भी यह घातक ही सिद्ध हो रही है। पिछले 70 वर्षो में हिन्दू अपने ही देश भारत के 8 राज्यों में अल्पसंख्‍यक हो चला है। आईए जानते हैं कि, भारतीय राज्यों में हिन्दुओं की क्या स्थिति है . . .
जनसंख्या : भारत में पंथ पर आधारित जनगणना 2001 के आंकडों के अनुसार, देश की कुल जनसंख्या में 80.5 प्रतिशत हिन्दू, 13.4 प्रतिशत मुसलमान, 2.3 प्रतिशत ईसाई हैं जबकि पिछली जनगणना में हिन्दू 82 प्रतिशत, मुसलमान 12.1 प्रतिशत और 2.3 प्रतिशत ईसाई थे। 2011 की जनगणना के अनुसार, देश की कुल जनसंख्या में मुसलमानों का हिस्सा 2001 में 13.4 प्रतिशत से बढकर 14.2 प्रतिशत हो गया है।
1999 से 2001 के दशक की 29 प्रतिशत वृद्धि दर की तुलना 2001-2011 के बीच मुस्लिमों की जनसंख्या वृद्धि दर घटकर 24 प्रतिशत अवश्य हुई किंतु यह अब भी राष्ट्रीय औसत 18 प्रतिशत से अधिक है। देश के जिन राज्यों में मुसलमानों की जनसंख्या सबसे अधिक है, उनमें क्रमश: जम्मू-कश्मीर (68.3 प्रतिशत) और असम (34.2 प्रतिशत) के बाद प. बंगाल (27.01 प्रतिशत) तीसरे स्थान पर आता है जबकि केरल (26.6 प्रतिशत) चौथे स्थान पर है।
कश्मीर में हिन्दू :
जब हम कश्मीर की बात करते हैं तो उसमें एक कश्मीर वह भी है, जो पाकिस्तान के कब्जे में है और दूसरा वह, जो भारत का एक राज्य है। इसमें जम्मू और लद्दाख अलग से हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को मिलाकर एक राज्य गठित होता है। यह संपूर्ण क्षेत्र स्वांतंत्रता के पहले महाराजा हरिसिंह के शासन के अंतर्गत आता था।
2011 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू और कश्मीर की कुल जनसंख्या 125.41 लाख थी। उसमें 85.67 लाख मुस्लिम थे यानी कुल जनसंख्या के 68.31 प्रतिशत, जैसे कि,1961 में थे, वहीं 2011 में हिन्दुओं की जनसंख्या 35.66 लाख तक पहुंच गई। कुल जनसंख्या का 28.43 प्रतिशत ! इन आंकडों में कश्मीर में हिन्दुओं की जनसंख्‍या घटी जबकि जम्मू में बढी होना जाहिर नहीं हुआ ! अगर पुराने आंकडों की बात करें तो 1941 में संपूर्ण जम्मू और कश्मीर में मुस्लिम जनसंख्या 72.41 प्रतिशत और हिन्दुओं की जनसंख्या 25.01 प्रतिशत थी।
1989 के बाद कश्मीर घाटी में हिन्दुओं के साथ हुए नरसंहार से कश्मीरी पंडित और सिख भी वहां से पलायन कर गए। कश्मीर में वर्ष 1990 में हथियारबंद आंदोलन शुरू होने के बाद से अब तक लाखों कश्मीरी पंडित अपना घर-बार छोडकर चले गए। उस समय हुए नरसंहार में हजारों पंडितों का कत्लेआम हुआ था। बडी संख्या में महिलाओं और लडकियों के साथ बलात्कार हुए थे।
कश्मीर में हिन्दुओं पर हमलों का सिलसिला 1989 में जिहाद के लिए गठित जमात-ए-इस्लामी ने शुरू किया था जिसने कश्मीर में इस्लामिक ड्रेस कोड लागू कर दिया। आतंकी संघटन का नारा था- ‘हम सब एक, तुम भागो या मरो !’ इसके बाद कश्मीरी पंडितों ने घाटी छोड दी। करोडों के मालिक कश्मीरी पंडित अपनी पुश्तैनी जमीन-जायदाद छोडकर शरणार्थी शिविरों में रहने को मजबूर हो गए। हिंसा के प्रारंभिक दौर में 300 से अधिक हिन्दू महिलाओं और पुरुषों की हत्या हुई थी !
घाटी में कश्मीरी पंडितों के बुरे दिनों की शुरुआत 14 सितंबर 1989 से हुई थी। कश्मीर में आतंकवाद के चलते लगभग 7 लाख से अधिक कश्मीरी पंडित विस्थापित हो गए और वे जम्मू सहित देश के अन्य हिस्सों में जाकर रहने लगे। कभी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के एक क्षेत्र में हिन्दुओं और शियाओं की तादाद बहुत होती थी परंतु वर्तमान में वहां हिन्दू तो एक भी नहीं बचा और शिया समय-समय पर पलायन करके भारत में आते रहे जिनके आने का क्रम अभी भी जारी है !
विस्थापित कश्मीरी पंडितों का एक संघटन है ‘पनुन कश्मीर’ ! इसकी स्थापना सन 1990 के दिसंबर माह में की गई थी। इस संघटन की मांग है कि, कश्मीर के हिन्दुओं के लिए कश्मीर घाटी में अलग राज्य का निर्माण किया जाए। पनुन कश्मीर, कश्मीर का वह हिस्सा है, जहां घनीभूत रूप से कश्मीरी पंडित रहते थे। परंतु 1989 से 1995 के बीच नरसंहार का एक ऐसा दौर चला कि, पंडितों को कश्मीर से पलायन होने पर मजबूर होना पडा !
आंकडों के अनुसार, इस नरसंहार में 6,000 कश्मीरी पंडितों को मारा गया। 7,50,000 पंडितों को पलायन के लिए मजबूर किया गया। 1,500 मंदिर नष्ट कर दिए गए। कश्मीरी पंडितों के 600 गांवों को इस्लामी नाम दिया गया। केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, कश्मीर घाटी में कश्मीरी पंडितों के अब केवल 808 परिवार रह रहे हैं तथा उनके 59,442 पंजीकृत प्रवासी परिवार घाटी के बाहर रह रहे हैं। कश्मीरी पंडितों के घाटी से पलायन से पहले से पहले वहां उनके 430 मंदिर थे। अब इनमें से मात्र 260 सुरक्षित बचे हैं जिनमें से 170 मंदिर क्षतिग्रस्त हैं !
असम में हिन्दू :
असम कभी 100 प्रतिशत हिन्दू बहुल राज्य हुआ करता था ! हिंदू शैव और शाक्तों के अलावा यहां हिन्दुओं की कई जनजाति समूह भी थे। यहा वैष्णव संतों की भी लंबी परंपरा रही है। बौद्ध काल में जहां यहां पर बौद्ध, मुस्लिम काल में लोग मुस्लिम बने वहीं अंग्रेज काल में यहां के गरीब तबके के लोगों को हिंदू से ईसाई बनाने की प्रक्रिया जारी रही !
2001 की जनगणना के अनुसार, अब यहां हिन्दुओं की संख्या 1,72,96,455, मुसलमानों की 82,40,611, ईसाई की 9,86,589, और सिखों की 22,519, बौद्धों की 51,029, जैनियों की 23,957 और 22,999 अन्य धार्मिक समुदायों से संबंधित थे। असम में मुस्लिम जनसंख्या 2001 में 30.9 प्रतिशत थी जबकि 2011 में बढकर वह 34.2 प्रतिशत हो गई। इसमें बाहरी मुस्लिमों की संख्‍या भी बताई जाती है।
असम में 27 जिले हैं जिसमें से असम के बारपेटा, करीमगंज, मोरीगांव, बोंगईगांव, नागांव, ढुबरी, हैलाकंडी, गोलपारा और डारंग 9 मुस्लिम बहुल जनसंख्यावाले जिले हैं, जहां आतंक का राज कायम है ! यहां बांग्लादेशी मुस्लिमों की घुसपैठ के चलते राज्य के कई क्षेत्रों में स्थानीय लोगों की जनसंख्या का संतुलन बिगड गया है। राज्‍य में असमी बोलनेवाले लोगों की संख्‍या कम हुई है। 2001 में 48.8 प्रतिशत लोग असमी बोलते थे जबकि अब इनकी संख्‍या घटकर अब 47 प्रतिशत रह गई है !
1971 के खूनी संघर्ष में पूर्वी बंगाल (बांग्लादेश) के लाखों मुसलमानों को पडोसी देश भारत के पश्‍चिम बंगाल, पूर्वोत्तर राज्य (असम आदि) में और दूसरी और म्यांमार (बर्मा में) शरण लेनी पडी ! युद्ध शरणार्थी शिविरों में रहनेवाले मुसलमानों को सरकार की लापरवाही के चलते उनके देश भेजने का कोई उपाय नहीं किया गया। इसके चलते इन लोगों ने यहीं पर अपने पक्के घर बनाना शुरू कर दिए और फिर धीरे-धीरे पिछले चार दशक से जारी घुसपैठ के दौरान सभी बांग्लादेशियों ने मिलकर भूमि और जंगलों पर अपना अधिकार जताना शुरू कर दिया !
धीरे-धीरे बांग्लादेशी मुसलमानों सहित स्थानीय मुसलमानों ने (बीटीएडी में) बोडो हिन्दुओं की खेती की 73 प्रतिशत जमीन पर कब्जा कर लिया अब बोडो के पास केवल 27 प्रतिशत जमीन है ! सरकार ने वोट की राजनीति के चलते कभी भी इस सामाजिक बदलाव पर ध्यान नहीं दिया जिसके चलते बोडो समुदाय के लोगों में असंतोष पनपा और फिर उन्होंने हथियार उठाना शुरू कर दिए। यह टकराव का सबसे बडा कारण है !
25 मार्च 1971 के बाद से लगातार अब तक असम में बांग्लादेशी हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही वर्गों का आना लगा रहा। असम ने पहले से ही 1951 से 1971 तक कई बांग्लादेशियों को शरण दी थी परंतु 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान और उसके बाद बांग्लादेश के गठन के बाद से लगातार पश्‍चिम बंगाल और असम में बांग्लादेशी मुस्लिम और हिन्दू शरणार्थियों की समस्या जस की तस बनी हुई है !
असम के लोग अब अपनी ही धरती पर शरणार्थी बन गए हैं। असम के इन लोगों में जहां हिन्दू जनजाति समूह के बोडो, खासी, दिमासा अपना अस्तित्व बचाने के लिए लड रहे हैं वहीं अन्य स्थानीय असमी भी अब संकट में आ गए हैं और यह सब हुआ है भारत की वोट की राजनीति के चलते ! यहां माओवादी भी सक्रिय है जिनका संबंध मणिपुर और अरुणाचल के उग्रवादियों के साथ है। उन्हें नेपाल और बांग्लादेश के साथ ही भारतीय वामपंथ से सहयोग मिलता रहता है !
आधुनिक युग में यहां पर चाय के बाग में काम करनेवाले बंगाल, बिहार, उडीसा तथा अन्य प्रांतों से आए हुए कुलियों की संख्या प्रमुख हो गई जिसके चलते असम के जनजाती और आम असमी के लोगों के जहां रोजगार छूट गए वहीं वे अपने ही क्षेत्र में हाशिए पर चले गए। इसी के चलते राज्य में असंतोष शुरू हुआ और कई छोटे-छोटे उग्रवादी समूह बनें। इन उग्रवाद समूहों को कई दुश्मन देशों से सहयोग मिलता है ! वोट की राजनीति के चलते कांग्रेस और सीपीएम ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को असम, उत्तर पूर्वांचल और भारत के अन्य राज्यों में बसने दिया। बांग्लादेश से घुसपैठ कर यहां आकर बसे मुसलमानों को कभी यहां से निकाला नहीं गया और उनके राशन कार्ड, वोटर कार्ड और अब आधार कार्ड भी बन गए ! दशकों से जारी इस घुसपैठ के चलते आज इनकी जनसंख्या असम में ही 1 करोड के आसपास है, जबकि पूरे भारत में ये यह फैलकर लगभग साढे तीन करोड के पार हो गए हैं ! यह भारतीय मुसलमानों में इस तरह घुलमिल गए हैं कि, अब इनकी पहचान भी मुश्किल होती है !
असम का एक बडा जनसंख्या वर्ग राज्य में अवैध मुस्लिम बांग्लादेशी घुसपैठियों का है जो अनुमान से कहीं अधिक है और जो बांग्ला बोलता है। राज्य के अत्यधिक हिंसा प्रभावित जिलों कोकराझार व चिरांग में बडी संख्या में ये अवैध मुस्लिम बांग्लादेशी घुसपैठी परिवार रहते हैं जिन्होंने स्थिति को बुरी तरह से बिगाड़ दिया है !
बांग्लादेशी घुसपैठिएं असम में भारत की हिन्दू अनुसूचित जाति एवं अन्य हिन्दुओं के खेत, घर और गांवों पर कब्जा करके हिन्दुओं को भगाने में लगे हुए हैं। कारबी, आंगलौंग, खासी, जयंतिया, बोडो, दिमासा एवं 50 से ज्यादा जनजाति के खेत, घर और जीवन पर निरंतर हमलों से खतरा बढता ही गया जिस पर अभी तक ध्यान नहीं दिया गया। घुसपैठियों को स्थानीय सहयोग और राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है !
शिविर :
असम में जातीय हिंसा प्रभावित जिलों में बनाए गए 300 से ज्यादा राहत शिविरों में चार लाख शरणार्थियों की जिंदगी बदतर हो गई है ! कोकराझार के बाहर जहां बोडो हिन्दुओं के शिविर हैं वहीं धुबरी के बाहर बांग्लादेशी मुस्लिमों के शिविर है। कोकराझार, धुबरी, बोडो टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेटिव डिस्ट्रिक (बीटीएडी) और आसपास के क्षेत्रों में फैली हिंसा के कारण से अपने घर छोडकर राहत शिविरों में पहुंचे लोग यहां भी भयभीत हैं शिविरों में शरणार्थियों की जिंदगी बद से बदतर हो गई है। शिविरों में क्षमता से ज्यादा लोगों के होने से पूरी व्यवस्था नाकाम साबित हो रही हैं। दूसरी ओर लोगों के रोजगार और धंधे बंद होने के कारण वह पूरी तरह से सरकार पर निर्भर हो गए हैं !
कहां कितने बांग्लादेशी :
2001 की आयबी की एक खु‍फिया रिपोर्ट के अनुसार, लगभग डेढ करोड से अधिक बांग्लादेशी अवैध रूप से रह रहे हैं जिसमें से 80 लाख पश्चिम बंगाल में और 50 लाख के लगभग असम में, बिहार के किसनगंज, साहेबगंज, कटियार और पूर्णिया जिलों में भी लगभग 4.5, देहली में 13 लाख, त्रिपुरा में 3.75 लाख और इसके अलावा नागालैंड व मिजोरम भी बांग्लादेशी घुसपैठियों के किए शरणस्थली बने हुए हैं !
खुद को कहते हैं भारतीय :
1999 में नागालैंड में अवैध घुसपैठियों की संख्या जहाँ 20 हजार थी वहीं अब यह बढकर 80 हजार के पार हो गई है ! असम के 27 जिलों में से 8 में बांग्लादेशी मुसलमान बहुसंख्यक बन चुके हैं ! सर्चिंग के चलते अब बांग्लादेशी घुसपैठिए उक्त जगहों के अलावा भारत के उन राज्यों में भी रहने लगे हैं जो अपेक्षाकृत शांत और संदेह रहित है जैसे मध्यप्रदेश के भोपाल, इंदौर, गुजरात के बडौदा, अहमदाबाद, राजस्थान के जयपुर और उदयपुर, उडीसा, अंध्राप्रदेश आदि।
देश के अन्य राज्यों में मुस्लिमों के बीच छुप गए बांग्लादेशी अब खुद को पश्चिम बंगाल का कहते हैं !
स्त्रोत : वेब विश्व
conspiracy-to-divide-hindus-among-themselves

Conspiracy to divide Hindus among themselves, Hindus are also becoming victims

सितम्बर 16,2017
🚩यूट्यूब पर शनिवार #आचार्य #जितेंद्र महाराज ने एक वीडियो अपलोड किया है, उसमें उन्होंने बताया है कि कैसे #हिन्दुओं को #आपस में #लड़ा रहे हैं।
🚩आइये जाने क्या कहते हैं जितेंद्र महाराज…
🚩जितेंद्र महाराज ने कहा कि वंदे मातरम.. प्यारे भारतीयों… कुछ दिन पहले से मीडिया में एक प्रोपेगंडा खड़ा किया जा रहा है, कि भारत में 14 साधु फर्जी हैं और बाकी के तो असली हैं और उसके अलावा ये वो फलाना ढिमका..
🚩तो मैं इस विषय पर कहना चाहता हूँ कि ये पूरा का पूरा एक #विदेशी षड़यंत्र है और #पॉलिटिकल एजेंडा है, जिसके द्वारा हमारे सनातन धर्म के संतों को , कर्णधारों को आपस में लड़ा दिया जाए और फिर जिनको भी पॉलिटिक्स की रोटी सेंकना है वो इस पर आराम से रोटी सकेंगे और हिंदू धर्म का बंटवारा होगा।
🚩अब हो क्या रहा है , कि जिस #संत ने #पूरे जीवन भर #कार्य किए #देश के लिए , #धर्म के लिए , धर्म रक्षा के लिए , #राष्ट्र रक्षा के लिए , राष्ट्र की सुरक्षा के लिए , #अंतरिम सुरक्षा के लिए जिन्होंने काफी सारे कार्य किए ,  जिन्होंने इस देश को काटने के लिए आए #ईसाइयों के #कन्वर्शन  के अभियान को एक तरीके से बांध बन करके रोक दिया , ऐसे संत को अगर फर्जी कहेंगे और मदर टेरेसा को संत कहेंगे तो ये तो हमारे लिए बड़ा दुखदाई है।
🚩इस देश की एक हिंदुओं की धर्म से काटने वाली जो #विषबेला थी वो #मदर टेरेसा जिसे #वेटिकन ने संत घोषित किया और भारत में मिठाइयां बंटी और भारत के प्रधानमंत्री को भी मजबूरन यह कहना पड़ा कि मदर टेरेसा संत थी, उन्होंने मानवता का कार्य किया।  तो इसी मदर टेरेसा जिसने हिंदुत्व को काटने का कार्य किया । भारत में इस विषबेल ने बहुत बड़ा विशाल रूप ले लिया , ऐसे विषबेल को ऐसी दुष्ट दुरात्मा को हमको कहना चाहिए कि यह फर्जी है ,  हमको पॉल दिनाकरन को कहना चाहिए यह फर्जी है ,  हमको ऐसे मौलाना जो इस राष्ट्र की रक्षा के लिए खतरा बन बैठे हैं , उनको कहना चाहिए कि यह फर्जी है।  हमें आपस में नहीं लड़ना झगड़ना चाहिए। जिन्होंने #तुलसी  दिवस मनवाया , जिन्होंने #मातृ पितृ पूजन दिवस बनाया , जिन्होंने #युवाधन सुरक्षा पुस्तक निकाला. ..  ऐसे #पूजनीय के बारे में अपना #टिप्पणी भी नहीं करना चाहिए और आपस में लड़ करके इस देश का धर्म,पतन के गर्त में चला जाएगा।
🚩आपको मालूम है,मैं जानकारी दे देना चाहता हूँ कि जॉयन नाम के एक डायरेक्टर ने अपनी फिल्म “गॉड इस कैप्थ” के अंदर हनुमान जी को “गे” बताया.. जो धर्म के सबसे बलवान भगवान कहे जाते हैं उन महान , उन तेजस्वी परम प्रतापी भगवान हनुमान जी के बारे में वह डायरेक्टर ने फिल्म बना दी और वह फिल्म भारत में YouTube पर चल रही है और वह डायरेक्ट जिंदा घूम रहा है ,  उसकी हीरोइन उसके हीरो यहां पर सड़कों पर जिन्देें घूम रहे हैं और 100 करोड़ हिंदुओं को चिड़ा रहे हैं उनके मुंह पर थूक रहे हैं कि देखो तुम्हारे हनुमान जी , उनको हमने “गे” (समलैंगिक) बता दिया तुमने क्या कर लिया ?
🚩हमारा खून नहीं खौला..हमें जानकारी तक नहीं है.. हमारे पास संतों के लफड़े में,आपस में लड़ने झगड़ने से मन में ईर्ष्या-द्वेष सबके लिए टाइम है, लेकिन हमारे आराध्य भगवान केसरी नंदन , अंजनी पुत्र , पवन पुत्र #हनुमान जी महाराज को जॉयन ने “गे”  बताकर #फिल्म रिलीज कर दी,हम उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाए। #PK जैसी #फिल्म आकर के हमारे संतो का #मजाक उड़ा करके चली गई , “ओह माय गॉड” आ करके हिंदू धर्म को अपमानित कर गई कि , सारा पाखंड अंधविश्वास हिंदू धर्म में है ।
🚩इसलिए हमें आपस में नहीं लड़ना है और हम हर समय , हर श्वास  संतो के सम्मान की , देश के अभिमान की स्वाभिमान की रक्षा के लिए खड़े रहेंगे , चाहे इस क्रांति में हमारे प्राण क्यों न चले जाए लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे,  तो सभी लोगों से विनम्र निवेदन है कि सभी संत जनों से सभी पूजनीय से कि आपस में मतभेद मत करिए। एक दूसरे के पुतले जलेंगे , दुनिया हँसेगी .. जग हँसेगा.. जग वही चाहता है कि आप लोग आपस में लड़े दुनिया देखे और हँसे और क्रिश्चियनिटी और कट्टर मुस्लिम वाले लोग वो इस देश में अपना काम करते जाएं और वोट बैंक स्थापित हो ।
🚩आज देश की समस्या #रोहिंग्या है फर्जी संतो के बारे में यह लिस्ट विस्ट जारी करने की जो बातें करी और #फर्जीकरार करने की जो #कोशिश की वो सब बहुत गलत #धृणात्मक कृत्य है , इसको नहीं होना चाहिए। जो फर्जी रहेगा उसको भगवान दंड देगा ना..ईश्वर सर्वोपरि है , धर्मसत्ता राष्ट्र रक्षा के लिए कार्य करने के लिए आतुर रहे। हनुमान जी महाराज की जिसने पिक्चर बनाई है उसका  मस्तक चौराहे पर पड़ा होना चाहिए तब हमारा धर्म सत्ता का इस देश के अंदर कुछ महत्व रहेगा और संतो के बारे में कोई भी टिप्पणी नहीं करना चाहिए।
🚩वो #संत महान है #जिन्होंने #लाखों-लाखों लोगों के #हृदय में #सनातन का भाव #जगा दिया ऐसे संतो के बारे में कुछ नहीं कहना चाहिए।
🚩भारत माता की जय ..वंदे मातरम जय हिंदू राष्ट्र।
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