दस साल बाद सामने आया ‘समझौता ब्लास्ट’ का सच

🚩 दस साल बाद सामने आया ‘समझौता ब्लास्ट’ का सच, पाकिस्तानी को बचाया, हिंदुस्तानी को फंसाया
जून, 22, 2017
p chidambaram samjhauta express blast
🚩नई
दिल्ली: #समझौता ब्लास्ट केस में एक बड़ा खुलासा हुआ है। समझौता ब्लास्ट
केस को बहाना बनाकर हिन्दू #आतंकवाद का जुमला इजाद किया गया। पाकिस्तानियों
को बचाने के लिए और हिन्दुस्तानियों को फंसाने के लिए 2007 में हुए
#समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट का इस्तेमाल किया गया। इस केस में पाकिस्तानी
#आतंकवादी पकड़ा गया था, उसने अपना गुनाह भी कबूल किया था लेकिन महज 14
दिनों में उसे चुपचाप छोड़ दिया। इसके बाद इस केस में #स्वामी असीमानंद जी
को  फंसाया गया ताकि भगवा आतंकवाद या हिन्दू आतंकवाद को अमली जामा पहनाया
जा सके।
🚩#समझौता केस के जांच अधिकारी का खुलासा :
🚩हादसा
10 साल पुराना है लेकिन ये खुलासा सिर्फ बारह दिन पहले हुआ, जब जांच
अधिकारी ने अदालत में अपना बयान दर्ज करवाया। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि
पाकिस्तानी #आतंकवादी को छोड़ने का आदेश देने वाला कौन था?
🚩किसने पाकिस्तानी आतंकवादी को छोड़ने के लिए कहा, वो कौन है जिसके दिमाग में भगवा आतंकवाद का खतरनाक आइडिया आया…
🚩18
फरवरी 2007 को #समझौता एक्सप्रैस में ब्लास्ट हुआ था इसमें 68 लोग मारे
गए। दस साल से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन अबतक आखिरी फैसला नहीं आया है। इस
केस में दो पाकिस्तानी संदिग्ध पकड़े गए, इनमें से एक ने गुनाह कबूल किया
लेकिन पुलिस ने सिर्फ 14 दिन में जांच पूरी करके उसे बेगुनाह करार दिया।
अदालत में पाकिस्तानी संदिग्ध को केस से बरी करने की अपील की गई और अदालत
ने पुलिस की बात पर यकीन किया और पाकिस्तानी संदिग्ध आजाद हो गया। फिर कहां
गया ये किसी को नहीं मालूम….क्या ये सब इत्तेफाक था या फिर एक बड़ी
राजनीतिक साजिश थी?
🚩इस
केस से जुड़े #डॉक्युमेंट्स सामने आए हैं जिसे देखने के बाद कोई भी सोचने
पर मजबूर हो जाये कि उस समय की सरकार को #2 पाकिस्तानी संदिग्ध को छोड़ने
की इतनी जल्दी क्यों थी ?
फिर अचानक इस केस में हिन्दू आतंकवाद कैसे आ गया?
🚩इस
केस के पहले इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर थे इंस्पेक्टर गुरदीप सिंह जो कि अब
रिटायर हो चुके हैं। गुरदीप सिंह ने 9 जून को कोर्ट में अपना बयान रिकॉर्ड
करवाया है।
🚩इस
बयान में इंस्पेक्टर #गुरदीप ने कहा है, ‘ये सही है कि समझौता ब्लॉस्ट में
पाकिस्तानी अजमत अली को गिरफ्तार किया गया था। वो बिना पासपोर्ट के, बिना
लीगल ट्रैवल डाक्यूमेंटस के भारत आया था। दिल्ली, मुंबई समेत देश के कई
शहरों में घूमा था। मैंने अपने सीनियर अधिकारियों, सुपिरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस
#भारती अरोड़ा और डीआईजी के निर्देश के मुताबिक #अजमत अली को कोर्ट से बरी
करवाया।
🚩इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर ने कोर्ट को जो बयान दिया वो काफी हैरान करने वाला है
‘ऊपर से आदेश आया, पाकिस्तानी संदिग्ध छोड़ा गया’
पुलिस
अधिकारी ऐसा तभी करते हैं जब उन पर ऊपर से दवाब आता है। आखिर इतने सीनियर
अधिकारियों को पाकिस्तानी संदिग्ध को छोड़ने के लिए किसने दबाव बनाया?
एक ब्लास्ट केस में सिर्फ 14 दिन में पुलिस ने ये कैसे तय कर लिया कि आरोपी बेगुनाह है और उसे छोड़ देना चाहिए?
🚩#अजमत अली है कौन?
🚩कोर्ट
में जमा डॉक्युमेंट्स के मुताबिक अजमत अली पाकिस्तानी नागरिक था। उसे भारत
में अटारी बॉर्डर के पास से GRP ने अरेस्ट किया था। उसके पास न तो
पासपोर्ट था, न वीजा था और ना ही कोई लीगल डॉक्यूमेंट। इस शख्स ने पूछताछ
में कबूल किया कि वो पाकिस्तानी है और उसके पिता का नाम मेहम्मद शरीफ है।
उसने अपने घर का पता बताया था- हाउस नंबर 24, गली नंबर 51, हमाम स्ट्रीट
जिला लाहौर, पाकिस्तान।
🚩सबसे
बड़ी बात ये है कि ब्लास्ट के बाद दो प्रत्यक्षदर्शियों ने बम रखने वाले
का जो हुलिया बताया था वो #अजमत अली से मिलता जुलता था। प्रत्यक्षदर्शी के
बताने पर स्केच तैयार किए गए थे, और उस स्केच के आधार पर ही अजमत अली और
#मोहम्मद उस्मान को इस केस में आरोपी बनाया गया था। #इंस्पेक्टर गुरदीप ने
भी 12 दिन पहले कोर्ट को जो बयान दिया था उसमें कहा है कि ट्रेन में सफर कर
रहीं शौकत अली और रुखसाना के बताए हुलिए के आधार पर दोनों आरोपियों के
स्केच बनाए गए थे।
🚩समझौता
ब्लास्ट 18 फरवरी 2007 को हुआ था। पुलिस ने $अजमत अली को एक मार्च 2007 को
अटारी बॉर्डर के पास से बिना लीगल डॉक्युमेंट्स के गिरफ्तार किया था। उस
वक्त वो पाकिस्तान वापस लौटने की कोशिश कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद अजमत
अली को अमृतसर की सेंट्रल जेल में भेजा गया। वहीं से समझौता ब्लास्ट की
जांच टीम को बताया गया था कि समझौता ब्लास्ट के जिन संदिग्धों के उन्होंने
स्केच जारी किए हैं उनमें से एक का चेहरा अजमत अली से मिलता है। इसके बाद
लोकल पुलिस ने अजमत अली को कोर्ट में समझौता पुलिस की जांच टीम को हैंडओवर
कर दिया।
🚩जांच
टीम ने 6 मार्च 2007 को कोर्ट से अजमत अली की 14 दिन की रिमांड मांगी। जो
ऐप्लिकेशन पुलिस ने कोर्ट में जमा की थी, इस एप्लिकेशन में जांच अधिकारी ने
साफ साफ लिखा है कि समझौता ब्लास्ट मामले में गवाहों की याददाश्त के
मुताबिक संदिग्धों के स्केचेज बनाकर टीवी और अखबारों को जारी किए गए थे।
#अटारी जीआरपी ने इस स्केच से मिलते जुलते संदिग्ध अजमत अली को गिरफ्तार
किया। इसने पूछताछ में बताया कि वो तीन नवंबर 2006 को #बिना पासपोर्ट और
वीजा के भारत आया था। इसी आधार पर कोर्ट ने अजमत अली को 14 दिन की पुलिस
रिमांड में भेज दिया था।
🚩अबतक
की कहानी साफ है समझौता ट्रेन में ब्लास्ट हुआ, इस ब्लास्ट के दो
आईविटनेसेज ने ट्रेन में बम रखने वालों का हुलिया बताया, उसके आधार पर दो
लोगों के स्केच बने, उन्हें अटारी रेलवे पुलिस ने गिरफ्तार किया और फिर
पूछताछ करने के बाद समझौता ब्लास्ट की जांच कर रही टीम को सौंप दिया। इस
टीम ने भी उसका चेहरा स्केच से मिला कर देखा, चेहरा मिलता जुलता दिखा, तो
उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया। कोर्ट ने इसे 14 दिन की पुलिस
रिमांड में भेज दिया। 14 दिन की पुलिस #रिमांड में पूछताछ हुई।
🚩पूछताछ
और जांच के बाद उम्मीद थी कि कुछ कंक्रीट निकल कर सामने आएगा लेकिन 14 दिन
बाद, 20 मार्च को जब पुलिस ने दोबारा अजमत अली को कोर्ट में पेश किया तब
उम्मीद थी कि पुलिस दोबारा उसका रिमांड मांगेगी, लेकिन हुआ उल्टा। पुलिस ने
कोर्ट को बताया कि उनकी जांच पूरी हो गयी है, #अजमत अली के खिलाफ कोई ठोस
#सबूत नहीं मिले हैं, इसलिए उसे इस केस से #डिस्चार्ज कर दिया जाए। कोर्ट
ने पुलिस की दलील पर भरोसा किया और कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा कि अजमत
अली की रिहाई की अर्जी पुलिस ने ये कहते हुए दी है कि मौजूदा केस की जांच
में इसकी कोई जरूरत नहीं है। जब जांच टीम ने ही ये कह दिया तो कोर्ट ने
अजमत अली को रिहा कर दिया।
🚩करनाल
में इंडिया टीवी रिपोर्टर #चंदर किशोर को गुरदीप सिंह ने बताया कि शुरुआती
जांच के बाद ही अजमत को छोड़ दिया गया था। उन बड़े अफसरों के बारे में भी
बताया जो इस टीम का हिस्सा थे जिन्होंने इस केस की जांच की और पाकिस्तानी
नागरिक को छोड़ा ।
🚩अब
यहां एक बड़ा सवाल तो यह है कि इतने सारे शहरों में पुलिस ने जांच सिर्फ
14 दिन में कैसे पूरी कर ली। अजमत अली का न तो नार्को टेस्ट हुआ, न ही
पोलीग्राफी टेस्ट किया गया। सिर्फ 14 दिन की पूछताछ के बाद पुलिस ने ये मान
लिया कि समझौता ब्लास्ट में अजमत अली का हाथ नहीं है…ये शक को पैदा करता
है।
🚩अजमत
अली को छोड़ देना तो एक बड़ा ट्विस्ट था लेकिन इससे भी बड़ा ट्विस्ट इस
केस की शुरुआती जांच में आया था। शुरुआत में उस वक्त की #कांग्रेस सरकार ने
कहा था कि #समझौता ब्लास्ट के पीछे #लश्कर-ए-तैयबा का हाथ है लेकिन जांच
बढ़ने के कुछ ही दिन बाद इस केस में भगवा आतंकवाद का नाम आया।
🚩इस केस में शुरुआत में जांच में जल्दी-जल्दी ट्विस्ट आए इसपर हमारे कुछ सवाल हैं…
🚩क्या
एक पाकिस्तानी नागरिक जो बम धमाके का आरोपी हो उसे इतनी आसानी से छोड़ा जा
सकता है? अक्सर छोटे क्राइम में भी पकड़े गए पाकिस्तानी नागरिक की जांच
में भी ऐसी जल्दीबाजी नहीं होती उससे पूछताछ होती है, उसकी बातों को
वैरीफाई किया जाता है लेकिन समझौता ब्लास्ट के केस में अजमत अली को तुरंत
छोड़ दिया गया।
🚩आखिर
सरकार की तरफ से अजमत को छोड़ने की ऐसी जल्दबाजी क्यों की गयी? क्या पुलिस
को अजमत अली का नार्को या पोलीग्राफी टेस्ट करके सच निकलवाने की कोशिश
नहीं करनी चाहिए थी? पहले जब इंटेलिजेंस और जांच एजेंसियों ने इस धमाके को
लश्कर का मॉड्यूल बताया तो फिर एकाएक इसे हिंदू टेरर का नाम कैसे दिया गया?
🚩हम
आपको बताते है कि हिंदू टेरर का नाम कैसे आया, इसका जवाब भी पुलिस
अधिकारियों की एक मीटिंग की नोटिंग में मिला। 21 जुलाई 2010 को बंद कमरे
में कुछ अधिकारियों की मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में ये तय हुआ था कि
हरियाणा पुलिस द्वारा समझौता एक्सप्रैस ब्लास्ट की जांच किसी नतीजे पर नहीं
पहुंच पा रही है इसलिए इसे नेशनल इनवेस्टिगेटिव एजेंसी को सौंप देना
चाहिए। इसी मीटिंग में ये बात भी हुई थी कि इस केस की जांच हिंदू ग्रुप के
इन्वॉल्वमेंट पर भी होना चाहिए। नोटिंग में लिखा है कि एसएस (आईएस) को याद
होगा, उनके चेंबर में इस बात पर डिस्कशन हुआ था, कि इसकी जांच हिंदू ग्रुप
के ब्लास्ट में शामिल होने की संभावना पर भी होनी चाहिए।
🚩पुलिस की नोटिंग से सवाल ये उठता है कि  किसके कहने पर हिंदू टेरर ग्रुप का नाम इस धमाके से जोड़ने का आइडिया आया?
बंद
कमरे में वो कौन-कौन ऑफिसर थे जिन्होंने इस धमाके को हिन्दू टेरर का एंगल
देने की कोशिश की? इन अफसरों के नाम सामने आना जरूरी हैं, उनसे पूछताछ
होगी, तभी पता चलेगा कि उनपर किसका दबाव था?
🚩बीजेपी
नेता #सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि ये देश के साथ विश्वासघात है।
उन्होंने कहा कि सिर्फ #हिंदू आतंकवाद का नाम देने के लिए ये पूरी #साजिश
रची गयी थी।
🚩आपको
बता दें कि तत्कालीन #गृह मंत्री #सुशील कुमार शिंदे ने AICC की मीटिंग
में भगवा #आतंकवाद की बात करके सबको चौंका दिया था बाद में #पी चिदंबरम ने
और #दिग्विजय सिंह ने बार-बार बीजेपी को बैकफुट पर लाने के लिए इस जुमले का
इस्तेमाल किया।
🚩समझौता
ब्लास्ट के केस में जिस तरह से पहले लश्कर ए तैयबा का नाम आया फिर उस वक्त
की सरकार ने पाकिस्तानियों को छोड़ दिया और स्वामी असीमानंद को आरोपी
बनाकर इस केस को पूरी तरह से पलट दिया….इसके पीछे एक सोची समझी साजिश थी।
🚩अब
ये साफ है कि भगवा आतंकवाद का जुमला क्वाइन करने के लिए, हिन्दू आतंकवाद
का हब्बा खड़ा करने के लिए इस केस में पाकिस्तानियों को बचाया गया और
हिन्दुस्तानियों को फंसाया गया।
🚩अब सवाल सिर्फ इतना है कि इस साजिश के पीछे किसका शातिर दिमाग था ??
क्या पी चिदंबरम, दिग्विजय सिंह या सुशील कुमार शिन्दे में से कोई इस साजिश में शामिल था…..ये सच बाहर आना जरूरी है।
🚩स्त्रोत्र:इंडिया टीवी
🚩आपको
बता दें कि जॉइंट #इंटेलीजेंसी कमेटी के पूर्व प्रमुख और पूर्व
उपराष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. एस.डी. प्रधान ने देश में भगवा आतंक की
थ्योरी को लेकर कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं।
🚩उन्होंने
भी स्पष्ट बताया है कि समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट, मालेगाँव ब्लास्ट,
#इशरतजहाँ मामला का पहले से ही हमें पता था और अमेरिकन खुफिया विभाग ने भी
बताया था कि ये सब घटनाएं होने वाली थी और ये पाकिस्तान करवा रहा है और
हमने तात्कालीन #गृहमंत्री पी.चिदंबरम को बताया भी था लेकिन उन्होंने
राजनैतिक फायदे के लिए भगवा #आतंकवाद सिद्ध करने के लिए #डी.जी.वंजारा,
साध्वी प्रज्ञा, स्वामी #असीमानन्द, #शंकराचार्य अमृतानन्दजी, कर्नल
पुरोहित और बाद में दूसरे फर्जी केस बनाकर  हिन्दू संत आसारामजी बापू और
उनके बेटे को जेल भेजा गया था ।
 🚩जब
साध्वी प्रज्ञा जमानत पर बाहर आई तो कहा कि कांग्रेस के तात्कालीन
गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने भगवा आतंकवाद की परिभाषा गढ़ी थी और मुझे फंसाने
की साजिश की थी लेकिन कोर्ट में इतना तो साबित हो गया कि कोई भगवा आतंकवाद
नहीं होता ।
🚩आज
भी #कांग्रेस सरकार द्वारा रचे गए #षडयंत्र के तहत कई #हिन्दू साधु-संत
जेल में बंद है लेकिन अब #हिंदुत्ववादी कहलाने वाली #BJP सरकार कैसे
हिंदुओं के माप-दण्ड पर खरी उतरती है , ये देखना है ।
🚩कब #निर्दोष संतों की जल्द से जल्द सह-सम्मान रिहाई करवाती है उसी पर सभी #हिंदुओं की निगाहें टिकी है ।
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बड़ा खुलासा : रेप केस में गायत्री प्रजापति को जमानत देने के लिए हुई थी 10 करोड़ की डील

बड़ा खुलासा : रेप केस में गायत्री प्रजापति को जमानत देने के लिए हुई थी 10 करोड़ की डील
जून,19,2017
उत्तर
प्रदेश #समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री #गायत्री प्रजापति को रेप के एक
मामले में मिली जमानत साजिश रचकर दी गई थी, जिसमें एक वरिष्ठ जज भी शामिल
थे। #प्रजापति को #जमानत देने के लिए #10 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ था।
यह चौंकाने वाला खुलासा #इलाहाबाद हाई कोर्ट की एक जांच में हुआ है।
gayatri-prasad-prajapati
#इलाहाबाद
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस #दिलीप बी भोसले ने प्रजापति को जमानत मिलने की
जांच के आदेश दिए थे। इस जांच में संवेदनशील मामलों की सुनवाई करने वाली
अदालतों में जजों की पोस्टिंग में हाई लेवल करप्शन की बात सामने आई है। इस
तरह की अदालतें रेप और हत्या जैसे जघन्य अपराधों के मामलों की सुनाई करती
हैं।
अपनी
रिपोर्ट में जस्टिस भोसले ने कहा कि अतिरिक्त जिला और सेशन जज #ओपी मिश्रा
को 7 अप्रैल को उनके रिटायर होने से ठीक तीन सप्ताह पहले ही पोक्सो
(प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस) जज के रूप में तैनात किया
गया था। जज #ओपी मिश्रा ने ही #गायत्री प्रजापति को 25 अप्रैल को रेप के
मामले में जमानत दी थी। ओपी मिश्रा की नियुक्ति नियमों की अनदेखी करते हुए
और अपने काम को बीते एक साल से ‘उचित रूप से करने वाले’ एक जज को हटाकर हुई
थी।
#इंटेलिजेंस
ब्यूरो ने जज की पोक्सो पोस्टिंग में घूसखोरी की बात कही है। रिपोर्ट के
मुताबिक गायत्री प्रजापति को #10 करोड़ रुपये के ऐवज में जमानत दी गई थी।
इस रकम से पांच करोड़ रुपये उन तीन वकीलों को दिए गए जो मामले में बिचौलिए
की भूमिका निभा रहे थे बाकि के पांच करोड़ रुपये पोक्सो जज (ओपी मिश्रा) और
उनकी पोस्टिंग संवेदनशील मामलों की सुनवाई करने वाली कोर्ट में करने वाले
जिला जज राजेंद्र सिंह को दिए गए थे।
अपनी
गोपनीय रिपोर्ट में जस्टिस #भोसले ने कहा, ’18 जुलाई 2016 को पोक्सो जज के
रूप में #लक्ष्मी कांत राठौर की तैनाती की गई थी और वह बेहतरीन काम कर रहे
थे। उन्हें अचानक से हटाने और उनके स्थान 7 अप्रैल 2017 को ओपी मिश्रा की
पॉक्सो जज के रूप में तैनाती के पीछे कोई औचित्य या उपयुक्त कारण नहीं था।
मिश्रा की तैनाती तब की गई जब उनके रिटायर होने में मुश्किल से तीन सप्ताह
का समय था।’
#गायत्री
प्रजापित के खिलाफ रेप के एक मामले में #सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद
उत्तर प्रदेश पुलिस ने 17 फरवरी को #एफआईआर दर्ज की थी। उन्हें 15 मार्च को
गिरफ्तार कर लिया गया था। 24 अप्रैल को उन्होंने जज ओपी मिश्रा की अदालत
में जमानत की अर्जी दी और उन्हें मामले की जांच जारी रहने के बावजूद #जमानत
दे दी गई।
#आईबी
ने अपनी एक रिपोर्ट में ओपी मिश्रा की पोक्सो कोर्ट में #पोस्टिंग में
#भ्रष्टाचार की बात कही है। इस रिपोर्ट के बाद उत्तर प्रदेश में
न्यायपालिका में ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
आईबी की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘ओपी मिश्रा की ईमानदारी संदेह के घेरे में है
और उनकी छवि भी अच्छी नहीं है।’
इस
जांच में सामने आया है कि कैसे बार असोसिएशन के पदाधिकारी तीन वकीलों ने
मिश्रा की पोक्सो कोर्ट में तैनाती की डील फिक्स कराई। प्रजापति को जमानत
मिलने के तीन-चार सप्ताह पहले मिश्रा के चैंबर में जिला जज और तीनों वकीलों
के बीच कई बार बैठकें हुई। इनके बीच आखिरी बैठक 24 अप्रैल को हुई और इसी
दिन प्रजापति ने मिश्रा की कोर्ट में जमानत अर्जी दी थी।
पाठक समझ गये होंगे कि कानून तो अँधा है पर #भ्रष्ट जज उसका फायदा उठाते हैं तो कैसे मिल सकता है निर्दोषों को न्याय..???
आपने
देखा था कि जिला अदालत में #अपराध सिद्ध होने पर भी #सलमान खान को 2 घण्टे
में ही #जमानत मिल गई थी, #संजय दत्त सजा होने के बाद भी पैरोल पर बाहर
मजे से घूम रहा था जबकि कई #निर्दोष बिना अपराध सिद्ध हुए कई सालों से #जेल
में बंद हैं ।
#न्यायालय में #भ्रष्टाचार के कारण ही आज भी बड़े-बड़े #अपराधी बाहर घूम रहे हैं और निर्दोष जेल में बंद हैं।
आपको
बता दें कि ये कोई पहला मामला नही है जो रिश्वत लेते जज पकड़ा गया हो
#आंध्र प्रदेश में भी एक #कोर्ट का #न्यायधीश 2012 में जनार्दन रेड्डी को
जमानत देने के लिए #100 करोड़ की #रिश्व्त लेते पकड़ा गया था ।
हिमाचल प्रदेश के सुंदरनगर #न्यायालय में कार्यरत सीनियर जज भी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गये थे  ।
ऐसे
ही हाल ही में #सीबीआई ने दिल्ली तीस हजारी कोर्ट में सीनियर सिविल #महिला
जज रचना तिवारी के घर पर छापेमारी की थी जहाँ करीब 94 लाख #रुपये #कैश
मिले थे ।
महिला
जज रचना तिवारी ने अपनी #कोर्ट में लगे एक सिविल केस में विवादित
#प्रॉपर्टी मामले में शिकायतकर्ता से उसके पक्ष में फैसले के लिए 20 लाख
रुपये की रिश्वत माँगी थी । महिला जज को सीबीआई ने जेल भेजा था ।
ये
तो दो-तीन जज रिश्वत लेते पकड़े गए इसलिये उनको गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन
ऐसे मामले तो कई हैं । देश के जजों में रिश्वतखोरी और #भ्रष्टाचार इतना बढ़
गया है कि अपराधियों को सजा और निर्दोषों को न्याय मिलना ही मुश्किल हो
गया है ।
इसकी पुष्टि भी कई जज कर चुके हैं :
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश काटजू ने कहा था कि #भारतीय न्याय प्रणाली में 50% जज भ्रष्ट है ।
सुप्रीम
कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश संतोष हेगड़े भी सवाल उठा चुके है कि ‘धनी और
प्रभावशाली’ तुरंत जमानत हासिल कर सकते हैं । #गरीबों के लिए कोई न्याय की
व्यवस्था नही है ।
कर्नाटक
हाईकोर्ट के पूर्व वरिष्ठ #न्यायाधीश जस्टिस के एल मंजूनाथ ने कहा कि यहाँ
सत्यनिष्ठा और ईमानदारी के लिए कोई स्थान नहीं है और इस देश में न्याय के
लिए कोई जगह नहीं ।
इसलिये आज न्याय प्रणाली से देश की जनता का भरोसा उठ गया है ।
देश में 2.78 लाख विचाराधीन कैदी है । इनमें से कई ऐसे हैं जो उस अपराध के लिए मुकर्रर सजा से ज्यादा समय जेलों में बिता चुके हैं ।
देश भर की जिला न्यायालयों में 2.8 करोड़ मामले लंबित हैं ।
आरोप साबित होने पर भी कई बड़ी हस्तियाँ बाहर घूम रही हैं और अभी तक जिन पर आरोप साबित नही हुआ है वो जेल में है ।
क्योंकि या तो न्याय पाने वाले गरीब है या तो कट्टर हिंदुत्ववादी हैं इसलिए उनको न्याय नही मिल पा रहा है ।
लालू,
तरुण तेजपाल, विजय माल्या, कन्हैया, बाबू लाल नागर आदि कई हैं जिनके
विरुद्ध पुख्ता सबूत होने पर भी आज बड़े मजे से बाहर घूम रहे हैं ।
लेकिन
9 साल से शंकराचार्य अमृतानन्द जी , हिन्दू संत #आसारामजी #बापू, 4 साल
से, कर्नल पुरोहित 7 साल से, श्री नारायण साई 3.5 साल से और 3 साल से धनंजय
देसाई आदि #बिना सबूत जेल में  हैं । इन सब पर अभी तक एक भी आरोप सिद्ध
नही होते हुए भी वो आज जेल के अंदर हैं ।
आखिर इनका ऐसा क्या अपराध है कि आतंकवादी के साथ भी उदारता का व्यवहार करने वाला हमारा न्यायालय इनको जमानत तक नही दे रहा है??
क्या ये हिन्दू संत है इसलिए..???
या इन्होंने रिश्वत नही दी इसलिए..???
या इन्होंने धर्मान्तरण पर रोक लगाई इसलिए..???
या इन्होंने पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया इसलिए..???
या फिर इन्होंने विदेशी कंपनियों से लोहा लिया इसलिए…???
या इन्होंने हिन्दू संस्कृति के प्रति जनता में जागृति लायी इसलिए..???
आखिर क्या कारण है हिन्दू संतों को जमानत तक न देने का..???
जनता
के मन में ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं इसलिए #न्याय प्रणाली को #भ्रष्ट मुक्त
होकर निर्णय लेना होगा जिससे #निर्दोष बेवजह सजा भुगतने को मजबूर न हो ।
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इस्लामिक धर्मगुरुओं ने कहा :”हिन्दू संत बापू आसारामजी पर हो रहा अन्याय, समस्त इंसानियत पर कहर है”

इस्लामिक धर्मगुरुओं ने कहा :”हिन्दू संत बापू आसारामजी पर हो रहा अन्याय, समस्त इंसानियत पर कहर है”
23 मई 2017
#जोधपुर जेल में हिन्दू संत बापू आसारामजी बिना सबूत 4 साल से बंद हैं ।
जबसे बापू आसारामजी अंदर गए हैं तबसे लेकर कट्टर हिन्दू संगठन हिन्दू
महासभा, हिन्दू जन जागृति समिति आदि आदि ने खूब समर्थन किया लेकिन बड़े-बड़े
हिन्दू संगठनों ने चुप्पी साध ली है ।
Add caption
जब
बापू #आसारामजी बाहर थे तब अटल बिहारी से लेकर प्रधान मंत्री
#नरेंद्र_मोदी तक आशीर्वाद लेने आते रहे हैं लेकिन जैसे ही वे
#अंतर्राष्ट्रीय #षड्यंत्र के शिकार हुए तो सबने चुप्पी साध ली ।
लेकिन अब बड़े-बड़े #मुस्लिम #धर्मगुरु उनकी रिहाई के लिए आगे आ रहे हैं ।
 #हिंदू_मुस्लिम_एकता_मंच के द्वारा हिन्दू संत बापू आसारामजी की शीघ्र
रिहाई और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए 8 मई को जंतर-मंतर पर सत्याग्रह
किया गया और 20 मई 2017 को  प्रेस क्लब नई दिल्ली में प्रेस वार्ता का
आयोजन किया गया l
उसमें
उन्होंने कहा कि #भारतीय #संस्कृति को समाप्त करने के षड्यंत्रों को हमें
समझना होगा और  जयचंद एवं मीर जाफर जैसे लोगों से सावधान रहना होगा l पिछले
कई वर्षों से #प्रतिष्ठित धर्मगुरुओं पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें जेल में
डाला जा रहा है ।
#शंकराचार्य
#जयेंद्र सरस्वती ,स्वामी #नित्यानंद, जगतगुरु #कृपालुजी महाराज, राघेश्वर
भारती, आदि अनेक धर्मगुरुओं को साजिश का शिकार बनाया गया है । भारतीय
संस्कृति की रक्षा कर , राष्ट्र में अमन शांति भाईचारा बनाए रखने  वाले ,
कुछ संत और फकीर अनेक कष्टों को सहते हुए सम्पूर्ण जीवन समाज सेवा में लगा
रहे हैं l इसी तरह विश्व प्रसिद्ध संत #आसाराम जी बापू का मसला #इंसानियत
का आज सबसे बड़ा मसला बन गया है।
#कार्यक्रम
के मुख्य अतिथि #सलीम_कासमी जी ने  कहा,” संत आसाराम जी  बापू के मामले
में न्यायिक समानता के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है  । आज के दौर में यह
#अन्याय का सबसे बड़ा मिसाल बन गया है ।  संत आसाराम जी बापू के मामले में
मेरी कई बड़े मुस्लिम संगठनों , बड़े-बड़े मुस्लिम धर्मगुरुओं से बात हुई
हैं ।   संत आसाराम जी बापू का अपमान समस्त इंसानियत  पर कहर हैं । हमें
अपने #मुल्क की फिक्र है, इसलिए हमने 8 मई को दिल्ली में #सत्याग्रह करके
सरकार से संत आसाराम जी बापू की रिहाई की मांग उठाई थी । संत आसाराम जी
बापू की रिहाई के लिए हम राष्ट्र जागृति #कार्यक्रम जारी रखेंगे ।
#अलीगढ़ से आए हुए #मुफ्ती डॉक्टर जाहिद #अली खान साहब ने कहा-  हिंदू
मुस्लिम धर्मगुरुओं के खिलाफ साजिश को अंजाम देने वाली ताकतों का विरोध
करते हैं,और हिंदू मुस्लिम भाईचारे को कायम रखने के लिए हम अपनी जान की
बाजी लगा देंगे । संत आसाराम जी बापू का मामला करोड़ों लोगों की भावनाओं से
जुड़ा है । इसके लिए इंसानियत का सम्मान करने वाली सभी ताकतों को हम एकजुट
करेंगे।
रायपुर
से आए हुए गौ कथा वाचक #मोहम्मद फैज खान ने कहा कि हिंदुस्तान की आन बान
और शान हमारे संत और फकीर हैं। पूरी दुनिया में पूरी मानवता के कल्याण के
लिए संत आसाराम जी बापू ने, अतुलनीय कार्य किये हैं।
नारी
रक्षा संगठन की सामाजिक कार्यकर्ता पूर्व #लेफ्टिनेंट इंडियन नेवी #रुपाली
दुबे ने कहा ,”भारत की राजधानी दिल्ली में पूज्य संत आसाराम जी बापू की
गिरफ्तारी के बाद बापू जी के  सत्संग के अभाव के कारण दिल्ली में #बलात्कार
के मामलें 3 गुना बढ़ गए हैं छेड़खानी  की घटनाएं 6 गुना बढ़ गई हैं । जब
देश की राजधानी का यह हाल है तो पूरे देश का क्या हाल होगा?
ऐसे संतों की रिहाई के लिए मानव अधिकार आयोग और वैश्विक नेतृत्व को सामने आना होगा ।
हिन्दू #मुस्लिम एकता मंच के राष्ट्रीय  #महासचिव #एडवोकेट शीराज #कुरेशी जी ने कहा”,
संत
आसाराम जी बापू वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांतों का प्रचार कर रहे हैं I
उनके #सत्संग से मत, पंथ , जाति ,संप्रदाय की संकीर्णता को मिटाकर प्रत्येक
व्यक्ति के जीवन को ऊंचा उठाने का ज्ञान मिलता है I
तनावपूर्ण
माहौल यहां तक कि गुजरात दंगों के कर्फ्यू में भी बापूजी का सत्संग
सफलतापूर्वक आयोजित होते रहे है I पूज्य बापू जी अपने सत्संग में  हिन्दू
मुस्लिम सभी लोगों को भाईचारे से रहना सिखाया है।
 #स्वामी #विवेकानंद के #वर्ल्ड रिलीजियस पार्लियामेंट के संबोधन के ठीक
100 वर्षों बाद संत आसाराम जी बापू ने वर्ल्ड रिलीजियस पार्लियामेंट में
भारत का प्रतिनिधित्व किया I भारत #पाकिस्तान के तनाव के माहौल में भी
बापूजी का पाकिस्तान में  सफलतापूर्वक सत्संग आयोजन हुआI
इस
समय राष्ट्र को  संत आसारामजी बापू जैसे संतों के सत्संग की अत्यंत
आवश्यकता है, हम सब उनके ऋणी हैं I इसीलिए हमारा राष्ट्रीय दायित्व एवं
हमारा नैतिक कर्तव्य है कि हम संत आसाराम जी बापू के सत्संग आयोजन की
बाधाओं को शीघ्र अति शीघ्र दूर करें I
इस बाबत हम अपनी वेदना  सरकार और जनता के सामने प्रकट कर रहे हैं I
गौरतलब
है कि शिकायतकर्ता लड़की की मेडिकल रिपोर्ट में उसका कौमार्य सुरक्षित
पाया गया है और उसके शरीर पर छेड़खानी के कोई निशान नहीं पाए गए हैं I पहले
भी कई संत वर्षो बाद निर्दोष साबित हुए है I
एडवोकेट
#विजय साहनी जी ने बताया कि संत आसाराम जी बापू की गिरफ्तारी के दस -बारह
दिन पहले से हम आज तक दिल्ली जंतर मंतर पर धरने पर बैठे हैं । संत
आशारामजी बापू की रिहाई के लिए हमने सरकार को लाखों लोगों के हस्ताक्षर
सहित  ज्ञापन  दिया है I
अब
देखते हैं कि #हिन्दूवादी कहलाने वाली #सरकार इन मुस्लिम धर्मगुरुओं की
बात पर कितना ध्यान देती है और बिना सबूत 4 साल से जेल में बंद बापू
आसारामजी को कब रिहा करती है ???
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फिल्मकारों को गाने, डायलॉग लिखने से पहले अपनी बहन और मां के बारे में सोचना चाहिए : डीसीपी लक्ष्मी

फिल्मकारों को गाने, डायलॉग लिखने से पहले अपनी बहन और मां के बारे में सोचना चाहिए : डीसीपी लक्ष्मी
14 मई  2017
DCP Lakshmi
भारतीय
#फिल्मों में बढ़ती हिंसा और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध का मुद्दा
निरंतर समाज में उठता रहा है। कई बार ऐसी बातें सामने आयी जिसमें कहा गया
है कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध में कहीं न कहीं इस तरह की फिल्में खास
रोल निभाती हैं।
 #तमिलनाडु की तीन महिला पुलिस #अधिकारियों ने इस मुद्दे को उठाया है। इन
महिला आयपीएस अधिकारियों ने वीडियो के जरिए भारतीय फिल्मकारों से फिल्मों
में हिंसात्मक दृश्य से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि महिलाओं के
खिलाफ हिंसा और दुर्व्यवहार को स्क्रीन पर नहीं दिखाएं।
फिल्मों
में महिलाओं के साथ #हिंसात्मक दृश्य को लेकर खास अपील तमिलनाडु के
कोयंबटूर की डीसीपी एस. लक्ष्मी (लॉ एंड ऑर्डर), एसपी राम्या भारती
(कोयंबटूर) और तिरूपुर शहर कीडीसीपी दिशा मित्तल (लॉ एंड ऑर्डर) ने वीडियो
के जरिए फिल्मकारों से खास अपील जारी की है।
उन्होंने
कहा कि जिस तरह से #फिल्म में महिलाओं को लेकर हिंसात्मक दृश्य दिखाए जाते
हैं इसका लोगों पर असर होता है। फिर सामान्य जीवन में भी महिलाओं को ऐसी
घटनाओं से गुजरना पड़ जाता है। ऐसी स्थिति सामने नहीं आए इसके लिए जरूरी है
कि फिल्मों में ऐसे दृश्यों से बचा जाए।
अधिकारियों ने फिल्म के #एक्टर्स को भी इस मामले में समझाने की कोशिश की है।
कोयंबटूर
की डीसीपी एस. लक्ष्मी (#लॉ एंड ऑर्डर) ने कहा कि, हमारे देश में महिलाओं
का खास सम्मान है। यही वजह है कि इसे भारत माता कहकर बुलाया जाता है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से फिल्मों में महिलाओं के खिलाफ #हिंसात्मक दृश्य
दिखाए जाते हैं ये ठीक नहीं है।
-#महिला
विरोधी दृश्यों से महिलाओं पर #अत्याचार बढ़े हैं। लोग फिल्म देखकर वैसा
ही करने की कोशिश करते हैं। फिल्म बेहद सशक्त माध्यम है ऐसे में इसका बेहद
गंभीरता से इस्तेमाल होना चाहिए। जिससे लोगों में अच्छा संदेश जाए।
उन्होंने कहा कि जो भी गाने या #डायलॉग लिखते हैं उन्हें पहले अपनी बहन और
मां के बारे में सोचना चाहिए। उनके बारे में सोचकर ही शब्दों का चयन होना
चाहिए।
वहीं
#डीसीपी दिशा #मित्तल ने कहा कि फिल्मों के साथ-साथ टीवी पर आनेवाले
कार्यक्रम, विज्ञापन, गाने सभी हम पर काफी असर डालते हैं। ऐसे में इनका सही
इस्तेमाल बेहद जरूरी है।
 #एसपी #राम्या भारती ने कहा कि फिल्म के #डायलॉग, गाने सभी का अपना असर
होता है। लोगों में कहीं इनका गलत असर नहीं जाए इससे बचने के लिए जरूरी है
कि फिल्मकार इसको लेकर गंभीर बने। इसमें सुधार के जरिए महिलाओं के खिलाफ
हिंसा को कम किया जा सकता है।
आपको
बता दें कि कुछ दिन पहले केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी
ने भी देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ रही हिंसा के लिए बॉलीवुड और क्षेत्रीय
सिनेमा को जिम्मेदार ठहराया है।
मेनका
गांधी ने कहा कि बॉलीवुड में महिलाओं से जुड़े अशोभनीय दृश्यों के कारण
देश में हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं और #महिलाओं के साथ छेड़छाडी होती है ।
‘फिल्मों में रोमांस की शुरुआत छेड़छाड़ से होती है। लगभग सभी फिल्मों में
छेड़छाड़ को बढ़ावा दिया जाता है।
#मेनका #गांधी ने #फिल्मकारों और विज्ञान बनाने वालों से अपील की कि वे महिलाओं की अच्छी छवि को दिखाएं।
भला
जिस देश में जहां, नर में राम और नारी में सीता देखने की संस्कृति रही हो,
नदियों को भी माता कहकर पुकारा जाता हो, भगवान के विभिन्न अवतारों,
ऋषि-मुनियों, #योगियों-तपस्वियों आदि की क्रीड़ा व कर्म-स्थली रही हो, महिला
सशक्तिकरण के लिए दिन-रात एक कर दिया गया हो, उसके बाद भी महिलाओं पर हो
रहे अत्याचार के जिम्मेदार गन्दी फिल्में और ज्ञापन है ।
जानिए भारत को बॉलीवुड ने दिया क्या है ?
1. #बलात्कार गैंग रेप करने के तरीके।
2. विवाह किये बिना लड़का लड़की का शारीरिक सम्बन्ध बनाना।
3. #विवाह के दौरान लड़की को मंडप से भगाना ।
4. चोरी #डकैती करने के तरीके।
5. भारतीय संस्कारों का उपहास उठाना।
6. लड़कियों को छोटे कपड़े पहने की सीख दे उसे फैशन का नाम देना।
7. दारू #सिगरेट चरस गांजा कैसे पिया और लाया जाये।
8. #गुंडागर्दी कर के हफ्ता वसूली करना।
9. भगवान का मजाक बनाना और अपमानित करना।
10. पूजा पाठ यज्ञ करना पाखण्ड है व नमाज पढ़ना ईश्वर की सच्ची पूजा है।
11. भारतीयों को #अंग्रेज बनाना।
12. भारतीय #संस्कृति को #मूर्खता पूर्ण बताना और पश्चिमी संस्कृति को श्रेष्ठ बताना।
13. माँ बाप को वृध्दाश्रम छोड़ के आना।
14. #गाय पालन को मजाक दिखाना और कुत्तों को उनसे श्रेष्ठ बताना और पालना सिखाना।
15. रोटी हरी सब्जी खाना गलत बल्कि रेस्टोरेंट में पिज्जा बर्गर #कोल्ड_ड्रिंक और नॉन वेज खाना श्रेष्ठ है।
16.
#पंडितों को जोकर के रूप में दिखाना, चोटी रखना या यज्ञोपवीत पहनना
मूर्खता है मगर बालों के अजीबों गरीब स्टाइल (गजनी) रखना व क्रॉस पहनना
श्रेष्ठ है उससे आप सभ्य लगते हैं ।
17. शुद्ध हिन्दी या संस्कृत बोलना हास्य वाली बात है और उर्दू या अंग्रेजी बोलना सभ्य पढ़ा-लिखा और अमीरी वाली बात।
18.हिन्दू देवी-देवताओं और हिन्दू साधू-संतों का अपमान करने और अल्लाह और मोलवियों की बढ़ाई करना ।
हमारे
देश की युवा पीढ़ी बॉलीवुड को और उसके अभिनेता और #अभिनेत्रियों का अपना
आदर्श मानती है…..भोले हिन्दू फिल्म देखने के बाद गले में क्रोस मुल्ले
जैसी छोटी सी दाड़ी रख कर
 खुद को मॉडर्न समझते हैं
हिन्दू युथ के रगोें में धीमा जहर भरा जा रहा है।
फिल्म जेहाद
अगर यही बॉलीवुड देश की संस्कृति सभ्यता दिखाए ..
तो सत्य मानिये हमारी #युवा पीढ़ी अपने रास्ते से कभी नही भटकेगी ।
अधिकतर फिल्मों में #हिन्दू नास्तिक मिलेगा या धर्म का उपहास करता हुआ कोई कारनामा दिखेगा ।
फिल्मों
में #हिन्दूधर्म के देवी-देवताओं का अपमान करना, #साधू-संतों का मजाक
उड़ना, मंदिरों में जाना अंधश्रद्धा बताना, स्त्री को भोग्या दिखाना आदि आदि
एक सोची समझी साजिश है।
 #बॉलीवुड द्वारा देशवासियों को मीठा जहर दिया जा रहा है जिससे भारतीय संस्कृति को तोड़ने का काम किया जा रहा है ।
देश को फिर से गुलामी की जंजीरों में जकड़ने की साजिश राष्ट्रविरोधी ताकतों द्वारा देश के अंदर ही चल रही है।
अतः हर #हिन्दुस्तानी इस मीठे जहर से सावधान रहें ।
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क्रांतिकारी बालकृष्ण चाफ़ेकर बलिदान दिवस 12 मई

क्रांतिकारी बालकृष्ण चापेकर बलिदान दिवस 12 मई
 आज समाज का दुर्भाग्य है कि हमारी दिव्य संस्कृति का हंसी-मजाक उड़ाने वाले #अभिनेताओं और #अभिनेत्रियों
का
बर्थडे तो याद रहता है पर देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का #बलिदान
देने वाले वीर क्रन्तिकारियों की जयंती और बलिदान दिवस का पता तक नहीं होता
दामोदर, बालकृष्ण और वासुदेव चापेकर
अगर
वे देश को #गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिये अपने प्राणों की बलि
नही देते तो आज हम घरों में चैन से नही बैठे होते,आज भी हम गुलाम ही होते ।
आइये जानते है वीर बहादुर बालकृष्ण चापेकर और उनके भाइयों के जीवनकाल का इतिहास…
 #चापेकर बंधु #दामोदर हरि चापेकर, #बालकृष्ण हरि चापेकर तथा वासुदेव हरि
चापेकर को संयुक्त रूप से कहा जाता हैं। ये तीनों भाई #लोकमान्य बाल गंगाधर
तिलक के सम्पर्क में थे। तीनों भाई तिलक जी को गुरुवत्‌ सम्मान देते थे।
पुणे के तत्कालीन जिलाधिकारी #वाल्टर #चार्ल्स रैण्ड ने प्लेग समिति के
प्रमुख के रूप में पुणे में भारतीयों पर बहुत अत्याचार किए। इसकी बालगंगाधर
तिलक एवं आगरकर जी ने भारी आलोचना की जिससे उन्हें जेल में डाल दिया गया।
दामोदर हरि चाफेकर ने 22 जून 1897 को रैंड को गोली मारकर हत्या कर दी।
परिचय
चाफेकर
बंधु महाराष्ट्र के पुणे के पास चिंचवड़ नामक गाँव के निवासी थे। 22 जून
1897 को रैंड को मौत के घाट उतार कर भारत की आजादी की लड़ाई में प्रथम
क्रांतिकारी धमाका करने वाले वीर दामोदर पंत चाफेकर का जन्म 24 जून 1869 को
पुणे के ग्राम चिंचवड़ में प्रसिद्ध कीर्तनकार हरिपंत चाफेकर के ज्येष्ठ
पुत्र के रूप में हुआ था। उनके दो छोटे भाई क्रमशः बालकृष्ण चाफेकर एवं
वसुदेव चाफेकर थे। बचपन से ही सैनिक बनने की इच्छा दामोदर पंत के मन में
थी, विरासत में कीर्तनकार का यश-ज्ञान मिला ही था। महर्षि पटवर्धन एवं
लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक उनके आदर्श थे।
तिलक
जी की प्रेरणा से उन्होंने युवकों का एक संगठन व्यायाम मंडल तैयार किया।
ब्रितानिया हुकूमत के प्रति उनके मन में बाल्यकाल से ही तिरस्कार का भाव
था। दामोदर पंत ने ही बंबई में रानी विक्टोरिया के पुतले पर तारकोल पोत कर,
गले में जूतों की माला पहना कर अपना रोष प्रकट किया था। 1894 से चाफेकर
बंधुओं ने पूणे में प्रति वर्ष शिवाजी एवं गणपति समारोह का आयोजन प्रारंभ
कर दिया था। इन समारोहों में चाफेकर बंधु शिवाजी श्लोक एवं गणपति श्लोक का
पाठ करते थे।
शिवाजी
श्लोक के अनुसार – भांड की तरह शिवाजी की कहानी दोहराने मात्र से
स्वाधीनता प्राप्त नहीं की जा सकती । आवश्यकता इस बात की है कि शिवाजी और
बाजी की तरह तेजी के साथ काम किए जाएं । आज हर भले आदमी को तलवार और ढाल
पकड़नी चाहिए, यह जानते हुए कि हमें राष्ट्रीय संग्राम में जीवन का जोखिम
उठाना होगा ।  हम धरती पर उन दुश्मनों का खून बहा देंगे, जो हमारे धर्म का
विनाश कर रहे हैं। हम तो मारकर मर जाएंगे, लेकिन तुम औरतों की तरह सिर्फ
कहानियां सुनते रहोगे ।
गणपति श्लोक में धर्म और गाय
की रक्षा के लिए कहा गया कि- उफ! ये अंग्रेज कसाइयों की तरह गाय और बछड़ों
को मार रहे हैं, उन्हें इस संकट से मुक्त कराओ। मरो, लेकिन अंग्रेजों को
मारकर। नपुंसक होकर धरती पर बोझ न बनो। इस देश को हिंदुस्तान कहा जाता है,
अंग्रेज भला किस तरह यहां राज कर सकते हैं ???
कार्य
सन्‌
1897 में पुणे नगर प्लेग जैसी भयंकर बीमारी से पीड़ित था। इस रोग की
भयावहता से भारतीय जनमानस अंजान था। ब्रितानिया हुकूमत ने पहले तो प्लेग
फैलने की परवाह नहीं की, बाद में प्लेग के निवारण के नाम पर अधिकारियों को
विशेष अधिकार सौंप दिए। पुणे में डब्ल्यू सी रैंड ने जनता पर जुल्म ढाना
शुरू कर दिया । प्लेग निवारण के नाम पर घर से पुरुषों की बेदखली, स्त्रियों
से बलात्कार और घर के सामानों की चोरी जैसे काम गोरे सिपाहियों ने जमकर
किए। जो जनता के लिए रैंड प्लेग से भी भयावह हो गये ।
 वाल्टर
चार्ल्स रैण्ड तथा आयर्स्ट-ये दोनों अंग्रेज अधिकारी जूते पहनकर ही
हिन्दुआें के पूजाघरों में घुस जाते थे। प्लेग पीड़ितों की सहायता की जगह
लोगों को प्रताड़ित करना ही अपना अधिकार समझते थे।
इसी
अत्याचार-अन्याय के सन्दर्भ में एक दिन तिलक जी ने चाफेकर बन्धुओं से कहा,
“शिवाजी ने अपने समय में अत्याचार का विरोध किया था, किन्तु इस समय
अंग्रेजों के अत्याचार के विरोध में तुम लोग क्या कर रहे हो?’ तिलक जी की
हृदय भेदी वाणी व रैंडशाही की चपेट में आए भारतीयों के बहते आंसुओं, कलांत
चेहरों ने चाफेकर बंधुओं को विचलित कर दिया।
इसके बाद इन तीनों भाइयों ने क्रान्ति का मार्ग अपना लिया। संकल्प लिया कि इन दोनों अंग्रेज अधिकारियों को छोड़ेंगे नहीं।
संयोगवश
वह अवसर भी आया, जब 22 जून 1897 को पुणे के “गवर्नमेन्ट हाउस’ में महारानी
विक्टोरिया की षष्ठिपूर्ति के अवसर पर राज्यारोहण की हीरक जयन्ती मनायी
जाने वाली थी। इसमें वाल्टर चार्ल्स रैण्ड और आयर्स्ट भी शामिल हुए। दामोदर
हरि चापेकर और उनके भाई बालकृष्ण हरि चापेकर भी एक दोस्त विनायक रानडे के
साथ वहां पहुंच गए और इन दोनों अंग्रेज अधिकारियों के निकलने की प्रतीक्षा
करने लगे। रात 12 बजकर 10 मिनट पर रैण्ड और आयर्स्ट निकले और अपनी-अपनी
बग्घी पर सवार होकर चल पड़े। योजना के अनुसार दामोदर हरि चापेकर रैण्ड की
बग्घी के पीछे चढ़ गया और उसे #गोली मार दी, उधर बालकृष्ण हरि चापेकर ने भी
आर्यस्ट पर गोली चला दी। आयर्स्ट तो तुरन्त मर गया, किन्तु रैण्ड तीन दिन
बाद अस्पताल में चल बसा। पुणे की उत्पीड़ित जनता चाफेकर-बन्धुओं की
जय-जयकार कर उठी।
इस
तरह चाफेकर बंधुओं ने जनइच्छा को अपने पौरुष एवं साहस से पूरा करके भय और
आतंक की बदौलत शासन कर रहे अंग्रेजों के दिलोदिमाग में खौफ भर दिया।
गुप्तचर
अधीक्षक ब्रुइन ने घोषणा की कि इन फरार लोगों को गिरफ्तार कराने वाले को
20 हजार रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा। चाफेकर बन्धुओं के क्लब में ही दो
द्रविड़ बन्धु थे- गणेश शंकर द्रविड़ और रामचन्द्र द्रविड़। इन दोनों ने
पुरस्कार के लोभ में आकर अधीक्षक ब्रुइन को चाफेकर बन्धुओं का सुराग दे
दिया। इसके बाद दामोदर हरि चापेकर पकड़ लिए गए, पर बालकृष्ण हरि चापेकर
पुलिस के हाथ न लगे। सत्र न्यायाधीश ने दामोदर हरि चापेकर को फांसी की सजा
दी और उन्होंने मन्द मुस्कान के साथ यह सजा स्वीकार करली ।
कारागृह
में तिलक जी ने उनसे भेंट की और उन्हें “गीता’ प्रदान की। 18 अप्रैल 1898
को प्रात: वही “गीता’ पढ़ते हुए दामोदर हरि चाफेकर फांसीघर पहुंचे और फांसी
के तख्ते पर लटक गए। उस क्षण भी वह “गीता’ उनके हाथों में थी। इनका जन्म
25 जून 1869 को पुणे जिले के चिन्यकड़ नामक स्थान पर हुआ था।
ब्रितानिया
हुकूमत इनके पीछे पड़ गई थी । बालकृष्ण चाफेकर को जब यह पता चला कि उसको
गिरफ्तार न कर पाने से पुलिस उसके सगे-सम्बंधियों को सता रही है तो वह
स्वयं पुलिस थाने में उपस्थित हो गए।
अनन्तर
तीसरे भाई वासुदेव चापेकर ने अपने साथी #महादेव गोविन्द विनायक रानडे को
साथ लेकर उन गद्दार द्रविड़-बन्धुओं को जा घेरा और उन्हें गोली मार दी। वह 8
फरवरी 1899 की रात थी। अनन्तर वासुदेव चाफेकर को 8 मई को और बालकृष्ण
चापेकर को 12 मई 1899 को यरवदा कारागृह में फांसी दे दी गई।
 इनके साथी क्रांतिवीर महादेव गोविन्द विनायक रानडे को 10 मई 1899 को यरवदा कारागृह में ही फांसी दी गई।
तिलक
जी द्वारा प्रवर्तित “शिवाजी महोत्सव’ तथा “#गणपति-महोत्सव’ ने इन चारों
युवकों को देश के लिए कुछ कर गुजरने हेतु क्रांति-पथ का पथिक बनाया था।
उन्होंने #ब्रिटिश राज के आततायी व अत्याचारी अंग्रेज अधिकारियों को बता
दिया कि हम अंग्रेजों को अपने देश का शासक कभी नहीं स्वीकार करते और हम
तुम्हें गोली मारना अपना धर्म समझते हैं।
इस
प्रकार अपने जीवन-दान के लिए उन्होंने देश या समाज से कभी कोई प्रतिदान की
चाह नहीं रखी। वे महान #बलिदानी कभी यह कल्पना नहीं कर सकते थे कि यह देश
ऐसे #गद्दारों से भर जाएगा, जो भारतमाता की वन्दना करने से भी इनकार
करेंगे।
दामोदर
पंत चापेकर ने स्पष्ट रूप से लिखा था कि क्या किसी भी इतिहास प्रसिद्ध
व्यक्ति ने कभी नेशनल कांफ्रेस कर या भाषण देकर दुनिया को संगठित करने की
#कोशिश की है?
इसका उत्तर अवश्य ही “नहीं” में मिलेगा।
सख्त
अफसोस की बात है कि वर्तमान समय के हमारे शिक्षित लोगों में यह समझने की
भी अक्ल नहीं कि किसी भी देश की भलाई तभी होती है, जब करोड़ों गुणवान लोग
अपनी जिंदगी की परवाह न करके युद्ध क्षेत्र में मौत का सामना करते हैं ।
अन्याय के खिलाफ हरसंभव तरीके से प्रतिकार करने की शिक्षा हमें अपने इस
महान #योद्धाओं से मिलती है। चाफेकर बंधुओं द्वारा रैंड की हत्या रूपी किया
गया पहला धमाका #अंग्रेजों के प्रति उनकी गहरी नफरत का नतीजा था ।
आज
भी हम मानसिक रूप से तो अंगेजों के ही गुलाम हैं और जब तक हम खुद इन
गुलामी की जंजीरों को नहीं तोड़ेंगे तबतक हमें स्वन्तंत्रता दिलाने के लिए
अपने जीवन की परवाह न करने वाले वीर #शहीदों को सच्ची #श्रद्धांजलि नहीं
मिलेगी !!
इस
देश को तोड़ने,हमारी #संस्कृति की जडें खोखली करने कभी मुगल तो कभी अंग्रेज
आये और अब मिशनरियां लगी हैं हमें फिर से गुलामी की जंजीरें पहनाने में ।
अब समय आ चुका है कि जब #हिंदुओं को आपसी मनमुटाव भूलकर एक हो जाना चाहिए
नहीं तो फिर से गुलामी का जीवन जीने के लिए तैयार रहें ।
जागो हिन्दू !!!
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जनता का फूटा गुस्सा बोले न्यायप्रणाली कर रही है पक्षपाती न्याय

🚩 जनता का फूटा गुस्सा बोले न्यायप्रणाली कर रही है पक्षपाती न्याय
30 अप्रैल 2017
🚩रविवार को ट्वीटर पर #BiasedJustice हैशटैग टॉप ट्रेंड में चल रहा था जिसके द्वारा जनता का आक्रोश देखते ही बनता था ।
🚩सबकी
एक ही आवाज थी कि नेताओं, अभिनेताओं, अमीरों, पत्रकारों को अपराध साबित
होने पर भी जमानत आसानी से मिल जाती है लेकिन आज भी देशभर की जेलों में
बहुत सारे निर्दोष लोग ऐसे हैं जो बिना सबूत सालों से जेल में बन्द है
लेकिन उनको जमानत तक नही मिल पा रही है।
#BiasedJustice
🚩आइये जाने कि क्या कहना चाहते हैं ये लोग…
🚩1.पूनम राजपूत लिखती हैं कि क्या #BiasedJustice से ऐसा नहीं लगता, जैसे लोकशाही में लोकतंत्र व मानवाधिकारों का हनन हो रहा है?

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🚩2 – आशी मोंगा का कहना है कि ऐसा कानून किस काम का जो सत्ता व धन के आगे लाचार हो जाए! फिर न्याय कौन करेगा? #BiasedJustice

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🚩3.गार्गी लिखती हैं कि हीरो को छींक भी आये तो बेल; वही भयंकर बीमारी से त्रस्त संत आसारामजी बापू को अब तक जेल! #BiasedJustice

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🚩4.
सलोना लिखती हैं कि जब NIA ने कहा कि दक्षिणपंथी संगठन का मालेगांव के
धमाके में हाथ, तो कर्नल पुरोहित को बेल क्यों नहीं?? #BiasedJustice

🚩5.
प्रेम चौधरी ने शिवसेना के Sanjay Raut का बयान लेकर लिखा कि 100 गुनहगार
भले छूट जायें पर 1 बेगुनाह को सजा नही हो, फिर संत आशारामजी बापू को जेल
क्यो? #BiasedJustice

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🚩6.
किरण राजदेव का कहना है कि 9 साल से साध्वी प्रज्ञा जी को बिना सबूत सजा
दी गई, क्या उनका सम्मान, स्वास्थ्य व समय कोई लौटा पाएगा? #BiasedJustice

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🚩7.राघवेंद्र
ने लिखा कि बड़े से बड़े आपराधियों को बेल ले कर छूटते देखा है, पर दोष
सिद्ध न होने पर भी निर्दोष Asaram Bapu Ji को जेल क्यों?
#BiasedJustice

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🚩8.स्वाति लिखती हैं कि पैसे के बल पर अपराधी आजादी पा रहे!
निर्दोष हिन्दू संत झूठे आरोपों में जेल पा रहे!! #BiasedJustice

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🚩9.मोहिनी शर्मा कहती हैं कि हीरो ,नेता Fake Medical Certificate बनाकर लेते बेल,
वही बीमार संत आसाराम
जी बापू को अब तक जेल ?? #BiasedJustice

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🚩10
– अमृत प्रजापति ने लिखा कि इंसानो में तो भेदभाव हो ही रहा है, अब क्या
इंसाफ में भी भेदभाव करेगा क्या यह देश का संविधान? #BiasedJustice

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🚩11. भावेन उतरेजा लिखते हैं कि Asaram Bapu Ji को अभी तक न्याय न देकर कानून का स्पष्ट पक्षपात जनता के सामने है! #BiasedJustice

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🚩इस तरह से हजारों ट्वीट्स द्वारा जनता न्यायप्रणाली से तरह-तरह के सवाल कर रही है।
🚩क्या इसका कोई जवाब है न्याय तंत्र के पास ???
🚩गौरतलब
है कि रेप आरोपी पत्रकार तरुण तेजपाल, विजय माल्या, 950 करोड़ चारा
घोटालेबाज लालू प्रसाद यादव, , #बोफोर्स_घोटाला, कॉमनवेल्थ_गेम्स_घोटाला,
2जी_स्पेक्ट्रम_घोटाला, अनाज घोटला, कोयला घोटाला आदि आदि अरबो-खरबों के
बड़े बड़े घोटालेबाज तो आराम से बाहर घूम रहे हैं लेकिन वहीं दूसरी ओर अभीतक
एक भी आरोप सिद्ध नही हुआ है वह शंकरचार्य अमृतानन्द जी, कर्नल पुरोहित,
संत आसारामजी बापू, श्री नारायण साईं, धनंजय देसाई आदि आदि हिंदुत्वनिष्ठ
बिना सबूत सालों से जेल में हैं जबकि इन सभी हिन्दुत्वनिष्ठों को फंसाने के
सैकड़ों सबूत भी मिल चुके हैं । उसके बावजूद भी कोर्ट द्वारा इन्हें जमानत
तक नहीं दी जा रही है ।
🚩आपको
बता दें कि दो दिन पहले शुक्रवार को भी ट्वीटर पर लोगों का ऐसे ही गुस्सा
फूटा था और उन्होंने #पक्षपाती_न्यायव्यवस्था हैशटैग द्वारा हजारों ट्वीट्स
की थी ।
🚩अब देखना ये है इन हजारों-लाखों लोगों की आवाज सरकार और न्यायालय कब सुनती है ???
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उच्च न्यायालय आदेश देने के पश्चात भी मस्जिद पर प्रसारित किए जानेवाले अवैध भोंपूओं पर कार्रवाई नहीं !!

क्या मस्जिदों पर दिन में पांच बार बजने वाले भोंपू देश के अधिनियमों से भी श्रेष्ठ हैं ?
मुम्बई
के उच्च #न्यायालय ने ध्वनिप्रदूषण करनेवाले अवैध भोंपूओं के विरोध में
स्पष्ट आदेश देने के पश्चात भी विश्व में श्रेष्ठ कहलाने वाली मुंबई की
#पुलिस यंत्रणा ने किसी भी मस्जिद पर प्रसारित किए जानेवाले अवैध भोंपूओं
पर कार्रवाई नहीं की है ।
Add caption
इस
संदर्भ में सूचना अधिकार के अंतर्गत प्रश्न पूछने के पश्चात कुर्ला,
#मुंबई पुलिस अधिकारियों ने 28 जनवरी 2017 को इस अर्जी का लिखित स्वरूप में
उत्तर दिया है। उसमें यह प्रस्तुत किया गया है कि, ‘कायदा-सुव्यवस्था का
प्रश्न निर्माण होने की संभावना होने के कारण (अवैध भोंपूओं पर)कार्रवाई
नहीं की गई है !’ इस का अर्थ यह होता है कि, क्या न्यायालय के आदेश देने के
पश्चात भी अवैध #भोंपूओं पर कार्यवाई करने से पुलिस डरती हैं ?
वर्ष
के 365 दिन #ध्वनिप्रदूषण करने वाले मस्जिदों के भोंपूओं की ओर अनदेखा
करने वाली यही पुलिस गणेशोत्सव तथा नवरात्रोत्सव में हिन्दुओं के त्यौहारों
के समय लाठी के बल पर हिन्दुओं पर त्वरित याचिका प्रविष्ट करती है।
क्या
पुलिस को यह बात स्वीकार है कि, मा. उच्च न्यायालय का आदेश तथा भारत के
अधिनियम की अपेक्षा #मस्जिदों पर से बजनेवाले अवैध भोंपू अधिक श्रेष्ठ है ?
अतः ‘मस्जिदों पर भोंपूओं द्वारा प्रसारित की जाने वाली तथा जनता की नींद
उड़ाने वाली ‘अजान’ एक #गुंडागर्दी ही है’ ।
यह
सुविख्यात प्रसिध्द #गायक #सोनू_निगम द्वारा व्यक्त की गई भावना वास्तविक
ही है । देश के करोड़ो #हिन्दू नागरिकों की सहनशीलता का अंत शासन अधिक समय
तक न देखे’, ऐसी प्रतिक्रिया हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा प्रसारित किए गए
प्रसिद्ध पत्रक में कही गई है।
प्रसिद्ध
पत्रक में हिन्दू जनजागृति समिति ने यह आवाहन किया है कि, ‘ #तीन तलाक’ के
संदर्भ में इस्लाम की स्थापना से शरीयत में होने के कारण उसमें परिवर्तन
करने के लिए विरोध करनेवाले मुल्ला मौलावीं को सरकार यह प्रश्न पूछें कि,
यदि #इस्लाम की स्थापना के समय ये भोंपुं अस्तित्व में ही नहीं थे, तो उसका
आग्रह क्यों किया जाता है ? #मुल्लाओं के मतानुसार इस्लाम यदि अन्य धर्मों
के प्रति संवेदना व्यक्त करनेवाला पंथ है, तो देश के अधिनियम की ओर अनदेखा
कर रुग्ण, वृद्ध तथा सर्वसाधारण जनता को कष्ट देनेवाले भोंपुओं द्वारा
अजान किस लिए दी जाती है ? इससे पूर्व सत्ता में होने वाले कांग्रेस सरकार
ने मस्जिदों पर भोंपुओं द्वारा अजान प्रसारित करने के लिए अनुमती देकर यह
समस्या का निर्माण किया है !
अब
देश में तथा राज्य मे शासन परिवर्तित हुआ है। अतः नए #भाजपा सरकार ने इस
लांगूलचालन पर प्रतिबंध डालना चाहिए। यदि चीन की साम्यवादी सरकार इस संदर्भ
में कडी भूमिका अपनाती है, तो भाजपा सरकार ने भी अवैध रूप से की जानेवाली
यह गुंडागर्दी को प्रतिबंधित करना चाहिए !’ स्त्रोत : दैनिक सनातन प्रभात
आपको
बता दे कि चीन ने पहले मस्जिदों पर से #लाऊड_स्पीकर हटा दिया गया था बाद
में नमाज पढ़ने और रोजा रखने पर प्रतिबंध लगाया।  अब #दाढ़ी रखने और
महिलाओँ के नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह नियम न मानने वालो पर
देशद्रोह का केस चलाया जाता है ।
बता
दे की मुस्लिम बाहुल देश इसरायल में लाऊड स्पीकर पर बेन लग रही है और यहाँ
#न्यायालय के आदेश होने के बाद भी सरकार रोक नही लगा रही है?
हिंदुओं
के लिये तुरन्त कार्यवाही करने वाली #सरकार मुसलमानों द्वारा रास्ते में
नमाज पढ़ने पर कई इलाकों में ट्रैफिक जाम होने की समस्या से आम जनता की
परेशानी को देखते हुए भी उस पर रोक नही लगा रही, बड़ा आश्चर्य है ।
आपको
बता दें कि फ्रांस के #पेरिस में #ISI के हमले के बाद फ्रांस में कई
मस्जिदों को ताला लगा दिया था और कई मस्जिदों तोड़ दी गई थी ।
 इन
मस्जिदों में #धार्मिक विचारों के प्रचार के नाम पर कट्टरवादी(देश
विरोधी)#शिक्षा दी जाती है। कई मस्जिदों पर छापे के दौरान जेहादी #दस्तावेज
बरामद किए गए है। जेहादी प्रचार सामग्री मिली ।
फ़्रांस
ने तो समझ लिया कि देश को तोड़ने के लिये विदेशी फण्ड से चलने वाली
मस्जिदों में आतंकवादी बनने की ट्रेंनिग दी जाती है और देश विरोधी बातें
सिखाई जाती है ।
 #देश
में #हिंदुओं पर #मुस्लिमों के बढ़ते आतंक की हालत देखकर #भारत_सरकार को
फ्रांस चीन, इजरायल से सीख लेनी चाहिए और मुस्लिमों की बढ़ती संख्या पर
नियंत्रण करना चाहिये ।
आज लव जिहाद के लिए विदेश से पैसा आता है और #ISIS में जो मुस्लिम #युवक- #युवतियाँ भर्ती होने जाते है उस पर रोक लगनी चाहिए ।
देश
को बाहरी #आतंकवादियो से इतना खतरा नही जितना इन जिहादियों से है इसलिए
सरकार को जाँच करवानी चाहिए कि विदेशी फंड से जितनी भी मस्जिदें चल रही है
उसमें जो देश विरोधी बातें सिखाई जाती है ऐसे  मदरसों और मस्जिदों को बंद
कर देना चाहिए जिससे देश सुरक्षित रहें और सुख शांति बनी रहें ।
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