देवेंद्र गांधी, Devendra Gandhi

भारत का मीडिया बन गया है वेश्या का कोठा : पत्रकार देवेंद्र गांधी

अक्टूबर 5, 2017
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है पत्रकार देवेंद्र गांधी का उसमें उन्होंने मीडिया को पूरा नंगा कर दिया है ।
उन्होंने बताया – मीडिया का फंडिग कहाँ से आता है और कौन उसको हैंडल करता है, मीडिया में जो खबरें दिखाई जाती है वे कितनी सच होती है, उन्होंने मीडिया को वेश्या का कोठा बताया ।
India’s media has become prostitutes: journalist Devendra Gandhi

 

आइये जानते है क्या कहा देवेंद्र गांधी ने…
उन्होंने कहा कि नमस्कार दोस्तों मैं हूं देवेंद्र गांधी।
 #देवेंद्र गांधी एक नाम है आपके लिए, लेकिन मैं मीडिया से जुड़ा हुआ हूं।
मीडिया की क्या हैसियत है आज की तारीख में , मीडिया का क्या रुतबा है आज की तारीख में , मीडिया को लोग किस तरह से किस नजरिए से देखते हैं आज की तारीख
इस पर बात करूंगा और साथ ही साथ आपको ये भी बताऊंगा कि देश के बड़े-बड़े मीडिया हाउसेस कहां से चल रहे हैं ?
कौन उन्हें चला रहा है और कौन उनका मालिक हैं ?
आप और हम अक्सर ये सोचते होंगे कि मीडिया निष्पक्ष है, मीडिया दबाव में काम नहीं करता लेकिन अगर आप आंकड़े देखेंगे और मीडिया चैनल्स के मालिकों की लिस्ट देखेंगे तो आपको थोड़ा-थोड़ा लगने लगेगा कि मीडिया उतना निष्पक्ष नहीं रहा,मीडिया उतना स्वतंत्र नहीं रहा जितना कि हम सोचते हैं या जितने की हम कामना करते हैं।
यूं तो मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन आज की तारीख में मुझे लगता है कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ तो कतई नहीं है।
लोकतंत्र का चौथा स्तंभ पूरी तरह से या तो ढेर हो चुका है, जर्जर हो चुका है या तो ढेर होने के कगार पर है ।
अगर आज हमने खुद को नहीं संभाला, हमको मतलब मीडिया ने खुद को नहीं संभाला तो ये पिल्लर एक दिन पूरी तरह से धराशाई हो जाएगा और इसका इल्जाम भी मीडिया के सिर ही आएगा, क्योंकि हम खुद इसके लिए जिम्मेदार हैं और हमें इसकी जिम्मेदारी लेनी भी होगी ।
आज मैं आपको यह बताना चाहूंगा कि मीडिया के कौन-कौन से हाउसेस प्रमुख हाउस इस देश में चल रहे हैं,
लेकिन इससे पहले मैं 2 बड़े सवाल उठाता हूं, क्या मीडिया इस समय मंडी बन चुका है ?
क्या #मीडिया #पूंजीवादी व्यवस्था की रखेल हो चुका है ?
क्या #मीडिया कोठे की #वेश्या बन चुका है?
 ये सवाल बड़े गंभीर हैं क्योंकि मैं खुद मीडिया से जुड़ा हुआ हूँ इसलिए ये सवाल और भी गंभीर हो जाते हैं, क्योंकि यह सवाल मैं किसी और पर नहीं उठा रहा यह सवाल मैं अपने आप पर ही उठा रहा हूँ एक तरह से।
मैं उतना बड़ा पत्रकार नहीं हूँ कि टेलीविजन चैनल पर खड़ा होकर के इन सब बातों को बोलूं ।
 कोई बोलेगा भी नहीं क्योंकि जब मैं आपको लिस्ट बताऊंगा कि चैनलों के मालिक कौन है तो आप भी सोच कर हैरान रहेंगे कि बड़े-बड़े पत्रकारों के नाम टेलीविजन चैनल पर देखते हैं और सोचते हैं कि शायद इन चैनलों की टेलीविजन चैनलों के मालिक भी यही होंगे और यह पत्रकार ही खबरें तय करते होंगे, नहीं ऐसा नही है पत्रकार कभी भी कतई खबरें तय नहीं करते। यह पूरा प्रोसेस होता है, प्रबंधन खबरों को तय करता है कौन सी खबर दिखाई जानी है , कौन सी खबर नहीं दिखाई जानी ।
TRP का तो मामला है ही कि #TRP की अंधी दौड़ चल रही है। इसके अलावा भी और भी बहुत सारे दबाव होते हैं कभी सत्ता पक्ष का तो कभी विपक्ष का और इस समय जो मीडिया की भूमिका है वह इस तरह से है जिस तरह से एक पूंजीवादी आदमी की कोई दूसरी रखेल हो।
मैं आपको बताऊंगा दोस्तों कि मीडिया में आज कौन-कौन से प्रमुख चैनल है व इसके मालिकाना हक किस-किस के पास हैं।
सबसे पहले मैं आपको बताता हूँ आज तक टेलीविजन चैनल के बारे में, ये #इंडिया न्यूज ग्रुप चैनल है जिसके संचालनकर्ता धर्ता जो है वो #अरुण पूरी जी हैं, अरुण पूरी वैसे पेशे से पत्रकार ही हैं।
दूसरा बड़ा चैनल है देश में #ABP न्यूज कुछ समय पहले तक ABP News उसका नाम स्टार न्यूज हुआ करता था तब इसमें ज्यादा हिस्सेदारी थी स्टार न्यूज की, इसका नाम जो है स्टार न्यूज होता था। अरसे बाद कुछ समय पहले ही इस चैनल का नाम एबीपी न्यूज हो गया क्योंकि ABP अनंत बाजार पत्रिका ने इसका मेजर शेयर स्टॉक था, इसने अपने पास रख लिया।  इस चैनल को चलाती है #अभिजीत सरकार जो कि पश्चिम बंगाल की पुष्ट भूमि से आते हैं जो टेलीविजन से भी जुड़े रहे है।
तीसरा बड़ा चैनल है देश का #India TV, India TV की स्थापना 20 मई 2004 को हुई थी और जिसको होस्ट करते हैं आज की तारीख में #रजत शर्मा, #ऋतु धवन को तो आप जानते ही हैं , ये भी पेशे से पत्रकार हैं ।
एक चैनल और है News24,
 News24 के जो मालिक है उनके बारे में दिलचस्प जानकारी देता हूँ, केंद्रीय मंत्री जो है श्री रवि शंकर प्रसाद जी उनकी बहन है #अनुराधा प्रसाद और #राजीव शुक्ला जो #कांग्रेस के नेता हैं ये दोनों मिलकर के इस चैनल को चलाते हैं ।
क्रिकेट एसोसिएशन से भी, बीसीसीआई से भी जुड़े रहे राजीव शुक्ला जी।
 वैसे राजीव शुक्ला जी की पहचान एक पत्रकार के तौर से शुरुआत होती है लेकिन वो कब इतने बड़े ग्रुप के मालिक बन जाते हैं ये अपने आप में एक सवाल है।
तीसरा बड़ा घराना है जो है ZeeNews,
# ZeeNews के जो मालिक है डॉक्टर सुभाष चंद्रा एस्सेल ग्रुप ही Zee News चैनल को चलाता है Zee News के अलावा और भी Zee हिंदुस्तान व और भी कई सारे चैनल है जो एस्सल ग्रुप की तरफ से चलाए जाते हैं और जिनके मालिक है #डॉक्टर सुभाष चंद्रा।
डॉक्टर सुभाष चंद्रा इन दिनों राज्यसभा के मेंबर हैं, सभी जानते हैं कि #हरियाणा से #राज्यसभा मेंबर चुने गए थे वो और भाजपा ने उन्हें समर्थन दिया था।
वैसे वो निर्दलीय तौर पर राज्यसभा के सदस्य चुने गए थे और ये जो Zee ग्रुप है वो उनका उनके मालिकाना हक वाली कंपनी है।
तीसरी बड़ी कंपनी है #इंडिया न्यूज। इंडिया न्यूज जो है वो है विनोद शर्मा, यानी #मनु शर्मा के जो पिताजी है विनोद शर्मा, हरियाणा के मंत्री भी रहे केंद्र में भी वो मंत्री रहे, कार्तिक शर्मा जो विनोद शर्मा जी का बेटा हे वो इस न्यूज चैनल को चलाता है।
और एक न्यूज चैनल है हमारे देश में न्यूज 18 इस न्यूज चैनल पर जो दबदबा है जो रुतबा है या इस न्यूज का जो मालिकाना हक है वो है रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास। आप चैनल खोलिएगा जब आप टेलीविजन खोलते हैं तो सबसे पहले न्यूज इंडिया TV फिर न्यूज 18 फिर ABP News फिर इस तरह से आप चैनलों की रिमोट पर हाथ रखते रखते चैनल आगे बढ़ते जाते हैं। तो ये जो चैनल है ये कार्तिक शर्मा इसको चला रहे हैं ।
इसके अलावा एक  चैनल और है NDTV इंडिया।  #NDTV इंडिया की स्थापना 1988 में हुई थी जो कि मैंने नेट से चेक किया है और इसको चलाने वाले हैं #प्रणव राय और उसकी पत्नी #राधिका राय और चेयर पर्सन और उनके मालिक का नाम दिया है विधान सिंह जो कि NDTV इंडिया के बारे में बताया जा रहा है।
आज सवाल यह है कि क्या ये चैनल निष्पक्ष है ??
 बड़ा सवाल आपके सामने ये भी उठता होगा कि जब आप टेलीविजन पर रिमोट पर हाथ दबाते होंगे न्यूज चैनल की तरफ तो जब भी आप टेलीविजन खोलते हैं तो आपके मन में ये बड़ा सवाल उठता होगा, क्या ये चैनल वही दिखा रहा है जो आप देखना चाहते हैं ?
 या चैनल अपना एजेंडा चला रहे हैं, ये सवाल क्यों उठ रहे हैं ?
ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि जो कुछ आप देखना चाहते हैं वो ये चैनल दिखाना नहीं चाहते। अगर ऐसा होता तो आपके मन में ये शंका ये सवाल कतई नहीं उठते। इसलिए आज सोशल मीडिया पर सबसे बड़ा जो सवाल है वो मीडिया पर ही उठ रहा है ।
मैं रोज देखता हूँ आप भी देखते होंगे कि मीडिया रोज ये दिखाता है कि वायरल सच।  इसका वायरल सच क्या है किसका वायरल सच क्या है। लेकिन मीडिया कभी ये दिखाने की कोशिश नहीं करता कि उनका (मीडिया का) अपना वायरल सच क्या है।
आज #मीडिया को #चोर , #भ्रष्ट #बेईमान न जाने किन किन तरीकों से नवाजा जा रहा है और जब मैं  इन चीजों को देखता हूँ तो कई बार व्यथित भी हो जाता हूँ, दुखी भी होता हूँ क्योंकि मैं भी मीडिया से जुड़ा हुआ हूं और ये पीड़ा सहनी पड़ती है कि जब लोग कहते हैं कि मीडिया #बिकाऊ है । मीडिया बिक गया है और  ये सवाल मीडिया को सोचना चाहिए।
 क्या उनके सामने यह तस्वीर नहीं जाती की उनके बारे में क्या कहा जा रहा है ? और आज देश में जो हालात है मीडिया को लेकर । ये बातें क्यों होती है ? क्योंकि मीडिया में बहुत सारे पूंजीवादी व्यवस्था के हाथों खेल रहे हैं, वो जो ग्रुप है वो जो प्रबंधन है ,वो तय करता है कि आप कौन सी खबर दिखाएंगे कौन सी खबर नहीं दिखाएंगे।
ये आज से नहीं है , ये काफी समय से ऐसा होता आ रहा है, चला आ रहा है कि आज कौन सी खबर कौन तय करेगा।
 हम पत्रकार है, मैं बड़ी सच्चाई के साथ बड़ी ईमानदारी के साथ यह कहना चाहता हूँ कि पत्रकार के पास ये अधिकार नहीं है कि क्या खबर चलाई जाए, क्या खबर दिखाई जाए ??
 शुक्र है मार्क जुकरबर्ग का जिसने हमें facebook पर एक मंच दे दिया , इसलिए हम कुछ भी बताते हैं , कोई भी वीडियो अपलोड करते हैं , कुछ भी लाइव चला देते हैं। ये स्वतंत्रता थोड़ी बची है जबकि मीडिया की जो स्वतंत्रता टेलीविजन चैनल हो या अखबार हो उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं और यह सवाल हमने खुद ही अपने ऊपर खड़े किए हैं क्योंकि हम उतने निष्पक्ष नहीं है जितने कि लोग सोचते हैं।
लोगों को लगता है कि हमारे सामने महंगाई का मुद्दा उठाया जाएगा लेकिन हम नहीं उठाते। हम क्या मुद्दे उठाते हैं, तीन तलाक ट्रिपल तलाक पर रहता है। तीन चार मौलानाओं को बुला लिया जाता है इधर से बीजेपी के एक लीडर को उधर से कांग्रेस के एक लीडर को इधर से सीपीआई के एक लीडर को उधर से आम आदमी पार्टी के लीडर को यानी व्यवस्था को इस तरह से कर दिया जाता है कि तमाम व्यवस्था को सिर्फ यह पांच सात दस लोग ही चलाने वाले हैं। आम लोगों से इस बारे में कोई राय नहीं ली जाती कोई मशवरा नहीं किया जाता इसलिए भी मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं।
आज कल इन दिनों हिंदू मुसलमान का एक बड़ा फसाद दिखाया जा रहा है और रोहिंग्या मुसलमानों को ले करके भी TRP और अभी थोड़े दिन पहले बाबा राम रहीम का जो प्रकरण हुआ गुरमीत राम रहीम का, उसको लेकर के तो मीडिया की भूख मिट ही नहीं रही। TRP की भूख इस तरह से हासिल है कि जो काम हुआ ही नहीं उसको एकदम से फ़्लैश किया।
 यानी आप देखिए इतनी जल्दी थी मीडिया चैनलों को फैसले को लेकर कि मीडिया चैनलों ने अपने आप ही सजा सुना दी 10 साल की। जज ने सजा सुनाई 10+10 की लेकिन मीडिया में ब्रेकिंग न्यूज आई,सब चैनलों पर एक ही न्यूज थी कि बाबा को सजा 10 साल की..
यानी कोई भी सब्र नहीं करना चाहता की फैक्ट लाया जाए।
हम भी इसमें शामिल हैं हम भी जब मौके पर जाते हैं देखते हैं कि चेन मिसिंग हो गई ये भी पूछने की कोशिश नहीं करते भई चेन सोने की थी, असली थी, नकली थी, हम ये भी कोशिश नहीं करते कि दो लाशें  पानी में बह रही है, किसकी है औरत की है,हम फटाफट कोशिश करते हैं आपस में कोई जल्दी से जल्दी खबर को ब्रेक करने की, हमारे अंदर इतनी जल्दी होती है या होड़ होती है कि फटाफट खबर को ब्रेक कर दिया जाए उसके फैक्ट्स बाद में आते रहते हैं तो हम बाद में कॉमेंट्स में या उस पोस्ट में एडिट करके लिखते हैं। ये आज की विडंबना है। असलियत यही है,हकीकत यही है कि मीडिया की वो भूमिका सामने नहीं आ रही जिस भूमिका की लोग हमसे उम्मीद करते हैं।
 मैं उसमें शामिल हूँ और सबसे बड़ा कटाक्ष भी मैं आज खुद पर कर रहा हूँ, मैं किसी दूसरे पर उंगली नहीं उठा रहा, अगर कुछ साथियों को लगे कि ये मीडिया पर उंगली उठा रहा है या ये अपने आप को साफ चरित्र का पत्रकार बताने में लगा हुआ है तो दोस्तों ऐसा कतई नहीं है।
आप भी अपने अंदर झांकिए, मैंने तो झांका ही है और मुझे ये लगता है कि मीडिया उतना निष्पक्ष उतना साफ इतना बेदाग नहीं है।
हम कोठे पर एक वेश्या की तरह हैं,  हम पूंजीवादी लोगों की रखेल की तरह हैं और इसलिए आज हम पर सबसे बड़े सवाल उठ रहे हैं क्योंकि हमने खुद को मंडी के रूप में तब्दील कर लिया है। किसी की कीमत इतनी किसी की कीमत इतनी।
दोस्तों मीडिया को मंडी होने से बचाइए, हमारा साथ दीजिए इस खबर को दूर-दूर तक पहुंचाइए अगर आप इस खबर को दूर-दूर तक पहुंचाने में सफल रहे, कामयाब रहे तो शायद कारगिल पर में जो जा करके जो सियाचिन में जाकर के अपने देश भक्ति की भावना दिखाते हैं टेलीविजन चैनलों पर छाती ठोक करके अपने आप को राष्ट्रभक्त बताते हैं और कोई ईमानदार बताते हैं ।
कोई सरकार की बखिया उधेड़ रहा है तो कोई सरकार को पॉलिश करने में लगा हुआ है। दोनों ही तरह के लोग हमारे सामने हैं । आपको ही तय करना है कि हमें किसे देखना है किसे नहीं देखना।
मुझे लगता है कहीं मीडिया हाउसेस जो है वो सरकार को चमकाने में लगे हुए हैं और कई मीडिया हाउसेस ऐसे हैं जो बिन देखे ही बिना कोई प्रमाण के सरकार के बखिया उधेड़ने पर लगे हुए हैं। यानी कुछ मीडिया हाउसेस सरकार का समर्थन जुटाने में और कुछ मीडिया हाउसेस यह दिखाने में कि हम सरकार से पावरफुल है।
दोस्तो ऐसा मत कीजिए आप अपने देश के बारे में सोचिए जो सही है उसे सही दिखाइए जो गलत है उसे गलत दिखाइए क्योंकि अगर मीडिया नहीं बचेगा तो मैं यकीन के साथ कह सकता हूँ लोकतंत्र में कुछ नहीं बचेगा।
हम किसी के पांव की जूती ना बने ,हम किसी पूंजीवादी की रखेल ना बने, हम किसी कोठे की वेश्या ना बने और हम पूंजीवादी चौखट पर घुटने ना टेके, माथा ना रगड़े ।
 ये सवाल हमारे सामने है और इसका हल भी हमें ही खोजना है। मेरा आपसे फिर अनुरोध है इस खबर को हो सके तो ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिए ।
 – पत्रकार देवेंद्र गांधी
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In the cases of rape, the court admitted that 90 percent of the cases are false ...

बलात्कर के मामलों में न्यायालय ने माना कि 90 प्रतिशत मामले झूठे होते हैं…

सितम्बर 25, 2017
🚩नारियों की सुरक्षा हेतु बलात्कार-निरोधक नये कानून बनाये गये । परंतु दहेज विरोधी कानून की तरह इनका भी भयंकर दुरुपयोग हो रहा है । दो दिन पहले प्रतापगढ़ जिला एवं सेशन न्यायाधीश राजेन्द्र सिंह ने बताया कि दलालों द्वारा प्रतिवर्ष काफी संख्या में बालिकाओं तथा महिलाओं द्वारा दुष्कर्म के प्रकरण दर्ज कराए जाते हैंं। जिसमें अनुसंधान के बाद अभियुक्तों के विरूद्ध आरोप पत्र प्रस्तुत किए जाते हैं। न्यायालय में गवाही के दौरान 90 प्रतिशत मामलों में पीडि़ताएं मुकर जाती हैं। जिसमें खेत, सम्पत्ति व रास्ते की रंजिश, पारिवारिक अथवा अन्य कारणों से अथवा अभियुक्त को ब्लेकमेल कर रुपए ऐंठने के लिए झूठी रिपोर्ट दर्ज करवाई गई थी, ऐसी स्थिति बताती है। पीडि़ताएं न्यायालय में स्वयं के द्वारा दी गई रिपोर्ट का भी समर्थन नहीं करती हैं ।
In the case of rape, the court admitted that 90 percent of the cases are false …
🚩न्यायालय ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रकरण दर्ज करवाए जाने से बयान करवाए जाने तक सब कुछ पूर्व निर्धारित होकर न्यायिक प्रक्रिया का पूर्णत: दुरूपयोग किया जा रहा है।
🚩वर्तमान में हिन्दू साधु-संतों पर बलात्कार का आरोप लगने में बाढ़ सी आ गई है और मीडिया उनको खूब बदनाम कर रही है लेकिन आपको बता देते हैं कि षडयंत्र के तहत कैसे साधु-संतों पर झूठे आरोप लगाए जाते है।
🚩दस साल से स्वामी चिन्मयानंद के आश्रम में रहने वाली साध्वी चिदर्पिता ने बी पी गौतम के नाम के व्यक्ति से प्रेम विवाह कर लिया उसके बाद शाहजहापुर की कोतवाली में स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ रेप का आरोप लगाया और इतना गंदे गंदे आरोप लगाये कि यहाँ पर लिखने पर शर्म महसूस हो रही है, मीडिया ने भी स्वामी की खूब बदनामी की, लेकिन आठ महीने साध्वी अपने प्रेमी पति के साथ रही जब उससे झगड़ा हो गया तो फिर से आश्रम में रहने लगी और बोली कि मैंने दबाव में आकर उनके खिलाफ केस किया था ।
🚩गुजरात द्वारका के स्वामी #केशवानंदजी पर कुछ समय पूर्व एक महिला ने बलात्कार का आरोप लगाया और न्यायालय ने 12 साल की सजा भी सुना दी लेकिन जब दूसरे जज की बदली हुई तब देखा कि ये मामला झूठा है, स्वामी जी को फंसाने के लिए झूठा मामला दर्ज किया गया है, तब स्वामी को न्यायालय ने 7 साल के बाद निर्दोष बरी किया ।
🚩ऐसे ही दक्षिण भारत के स्वामी #नित्यानन्द जी के ऊपर भी फर्जी सेक्स सीडी बनाकर रेप का आरोप लगाया गया और उनको जेल भेज दिया गया बाद में उनको हाईकोर्ट ने क्लीनचिट देकर बरी कर दिया ।
🚩ऐसे ही हाल ही में #शिवमोगा और बैंगलोर मठ के शंकराचार्य राघवेश्वर भारती स्वामीजी से एक #गायिका ने 3 करोड़ रुपये मांगे, नही देने पर 167 बार बलात्कार करने का आरोप लगाया ।
उनको भी न्यायालय ने झूठा मामला देखकर शंकराचार्य जी को निर्दोष बरी कर दिया ।
🚩सुप्रसिद्ध हस्तियों को अपने जाल में #फँसाकर करोड़ों रूपये एठने का धंधा चल पड़ा है और नहीं देने पर उन पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें #जेल भेजने की कोशिश की जाती है।
🚩इसी प्रकार का मामला सामने  है बापू #आसारामजी और उनके बेटे #नारायण साईं का ।
उन पर #अक्टूबर 2013 में प्राथमिकी दर्ज की गई कि उनकेे आश्रम में रहने वाली सूरत गुजरात की 2 महिलायें, जो सगी #बहनें हैं, उनमें से बड़ी बहन ने बापू आसारामजी के ऊपर 2001 में और छोटी बहन ने नारायण साईं जी पर 2003 में #बलात्कार हुआ , ऐसा आरोप लगाया है ।
🚩किसके दबाव में आकर 11/12 साल पुराना केस दर्ज किया गया ?

 बड़ी बहन FIR में लिखती है कि 2001 में मेरे साथ बापू आसारामजी ने दुष्कर्म किया लेकिन जरा सोचिए कि अगर किसी लड़की के साथ #दुष्कर्म होता है तो क्या वो अपनी सगी बहन को बाद में #आश्रम में #समर्पित करा सकती है..???

🚩लेकिन बड़ी बहन ने छोटी बहन को 2002 में संत आसारामजी बापू आश्रम में सपर्पित करवाया था। उसके बाद छोटी बहन 2005 और बड़ी बहन 2007 तक आश्रम में रही । दोनों #बहनें 2007 में आश्रम छोड़कर चली जाती हैं 2010 में उनकी शादी हो जाती है और जनवरी  2013 तक वो बापू आसारामजी और नारायण साईं के #कार्य्रकम में आती रहती हैं, सत्संग सुनती हैं, #कीर्तन करती हैं।
🚩लेकिन अचानक क्या होता है कि अक्टूबर 2013 में #बलात्कार का आरोप लगाती हैं और दिसम्बर 2014 में लड़की केस वापिस लेना चाहती है लेकिन सरकार द्वारा विरोध किया जाता है ।
🚩यहाँ तक कि केस 12 साल पुराना होते हुए भी, कोई सबूत न होते हुये भी, बापू आसारामजी की #वृद्धावस्था को देखते हुए भी, 81 वर्ष की उम्र में चलना-फिरना मुश्किल होते हुए भी, जमानत तक नही दी जा रही है ।
🚩लगातार #मीडिया द्वारा बापू आसारामजी की छवि को #धूमिल करने का प्रयास करना, सरकार द्वारा जमानत तक का विरोध करना और #न्यायालय का जमानत देने से इंकार करना इससे साफ साबित होता है कि यह मामला भी उपजाऊ और फर्जी है ।
🚩आज सुप्रसिद्ध हस्तियाँ और संतों को फंसाने में #महिला कानून का #अंधाधुन दुरूपयोग किया जा रहा है
🚩आपको बता दें कि दिल्ली में बीते छह महीनों में 45 फीसदी ऐसे मामले अदालत में आएं जिनमें #महिलाएँ हकीकत में पीड़िता नहीं थी,बल्कि अपनी माँगें पूरी न होने पर बलात्कार का केस दर्ज करा रही थी ।
🚩छह जिला #अदालतों के रिकॉर्ड से ये बात सामने आई है कि बलात्कार के 70 फीसदी मामले अदालतों में साबित ही नहीं हो पाते हैं ।
🚩बलात्कार कानून की आड़ में महिलाएं आम नागरिक से लेकर सुप्रसिद्ध हस्तियों, संत-महापुरुषों को भी #ब्लैकमेल कर झूठे बलात्कार आरोप लगाकर जेल में डलवा रही हैं । कानून का दुरुपयोग करने पर वास्तविकता में जो महिला पीड़ित होती है उसको न्याय भी नही मिला पाता है ।
🚩बलात्कार निरोधक #कानूनों की खामियों को दूर करना होगा। तभी समाज के साथ न्याय हो पायेगा अन्यथा एक के बाद एक निर्दोष सजा भुगतने के लिए मजबूर होते रहेंगे ।
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Dishonor of religion in TV serial The Sikhs bowed down the producer in two days.

टीवी सीरियल में धर्म का अपमान हुआ तो सरदारों ने प्रोड्यूसर को दो दिन में झुका दिया..

सितम्बर 23, 2017
🚩वर्तमान में #मीडिया, #बॉलीवुड, #टीवी सीरियलों द्वारा हिन्दू धर्म के #देवी-देवताओं, #धर्मगुरुओं, #हिन्दू त्यौहारों की खूब #मजाक #उड़ाई जाती है, अपमान किया जाता है पर हिन्दूओं में एकता नही है तो ये सब रुकने को तैयार ही नही है और ज्यादा मजाक उड़ाते ही जा रहे हैं ।
Dishonor of religion in TV serial The Sikhs bowed down the producer in two days.
🚩एकता में शक्ति होती है , भक्ति में शक्ति होती है और इसका कोई जीवंत उदाहरण है तो वो है भारत के सरदारों की वो दृढ़ता जिससे उन्होंने बड़े-बड़ों को घुटने के बल ला दिया है जिन्होंने भी धर्म या संस्कृति के अपमान के सपने देखे ।
🚩एक बार फिर से कुछ ऐसा ही हुआ उस मशहूर शो के साथ में जिसमें उन्होंने उन सभी को माफी मांगने पर मजबूर कर दिया जो भी उनकी भावनाओं को आहत करने में शामिल थे ।
🚩ज्ञात हो कि छोटे विगत आठ वर्षों से चल रहा टीवी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ पिछले कुछ समय से धार्मिक मामलों में कुछ ज्यादा ही हस्तक्षेप कर रहा था ।
🚩उसने बारी बारी मनोरंजन के नाम पर विभिन्न मतो की धार्मिक भावनाओं को चोट पहुचानी शुरू की इसी क्रम में उन्होंने सरदारों के खालसा वेश में एक अभिनेता को दिखाया था जिसके बाद सरदारों ने इसका जबरदस्त विरोध किया और सिखों की सर्वोच्च संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी ने तो बाकायदा #धार्मिक #भावनाओं के #खिलवाड़ से जनता का मनोरंजन करने वाले इस शो को बंद तक करने की मांग कर डाली ।
🚩जब अपनी गलती का एहसास इन शो निर्माताओं को हुआ तब उन्होंने अपनी भूल को समय रहते सुधारा और पूज्य गुरु गोविंद सिंह जी के जीवित स्वरुप को दिखाने के अपने अपराध को भूल मानते हुए शो के प्रोड्यूसर असित कुमार मोदी ने कहा कि, ‘हमने रोशन सिंह सोढ़ी को गुरु गोविन्द सिंह जी के खालसा के रूप में दिखाया था।
🚩इसका सबूत उनके द्वारा बोले गए संवाद उनका प्रदर्शन है। हम हमेशा सभी धर्मों का बराबर सम्मान करते हैं । हम किसी भी धर्म का न तो अपमान कर सकते हैं, न ही किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं।’ असित कुमार मोदी ने यह भी कहा कि, ‘हमारे शो में अलग-अलग धर्मों संस्कृतियों के लोग साथ रहते हैं। सभी मिल-जुलकर हर त्यौहार को मनाते हैं।
🚩ज्ञात हो कि मुंबई के स्टूडियों में बैठे वो तमाम अभिनेता और अभिनेत्रियां कभी भी खालसा के गौरवमय इतिहास को नहीं समझ सकते हैं और ना ही उसकी बलिदानी परंपरा को । केवल वेश मनोरंजन के लिए पहनकर किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वालों के विरुद्ध कार्यवाही आपेक्षित है जिसका समर्थन सुदर्शन न्यूज, आजाद भारत और दैनिक भारत आदि  करते है ।
🚩राष्ट्र विरोधी ताकतें बॉलीवुड, मीडिया, टीवी सीरियलों शिक्षा पद्धति आदि में खूब पैसे डाल रही हैं । जिससे हिन्दू संस्कृति को खत्म कर सके, इन सभी द्वारा #हिंदुओं की #आस्था स्वरूप देवी-देवताओं, साधु-संतों, त्यौहारों, गौ-गीता-गंगा पर #कुठाराघात कर रहे हैं ।
🚩हिन्दू भी आज मैकोले की शिक्षा पद्धति के कारण अनजाने में इनका शिकार हो रहा है अतः #हिन्दू #संगठित होकर इनका #विरोध #करें नहीं तो भारतीय संस्कृति को खत्म करके फिर से देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा जायेगा।
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eight years imprisonment Sentence to maulvi for raping

बलात्कारी मौलवी को आठ साल की सजा, मीडिया में छाया मातम, साधी चुप्पी

सितम्बर 22, 2017

🚩 मीडिया हिन्दू साधु-संतों पर कोलाहल करती रही, वहाँ बलात्कारी मौलवी को आठ साल की सुनाई सजा, अगर यही मुद्दा किसी हिन्दू साधु-संत का होता तो मीडिया 24 घण्टे चिल्ला-चिल्लाकर खबरे दिखाती और डिबेट पर डिबेट करती लेकिन यही मामला दूसरे धर्म का है तो मीडिया एकदम शांत है, जैसे कि वहाँ कुछ हुआ ही नही हो ।
rigorous eight years imprisonment Sentence to maulvi
🚩 पटना : बखरी थाने के मोहनपुर निवासी 15 वर्षीये किशोरी का 21 अप्रैल, 2015 की मध्य रात में अपहरण कर मस्जिद के एक कमरे में बंद कर दिया गया था। वहां उसके साथ दो दिनों तक दुष्कर्म किया गया। पीड़िता ने 164 के तहत न्यायालय के समक्ष बयान में बताया था कि गांव के मस्जिद का इमाम मोहम्मद काशिफ जया उसे लेकर भाग गया और मस्जिद के एक कमरे में बंद कर दो दिनों तक दुष्कर्म किया। लड़की किसी तरह उसके चंगुल से बच निकली और परिजनों से जाकर पूरी बात बताई। परिजनों ने पुलिस थाने में एफआइआर दर्ज करायी।
🚩 कोर्ट ने दी आठ साल जेल की सजा
बेगूसराय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीयूष कमल दीक्षित ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले के आरोपित सहरसा जिले के सलखुआ थाने के हरेबा निवासी व ग्रामीण के मस्जिद के इमाम मो काशिफ जया को अंतर्गत धारा 365 भादवि में दोषी पाकर आठ सितम्बर को पांच साल का कारावास एवं पांच हजार रुपये अर्थदंड एवं पॉक्सो की धारा चार के तहत दोषी पाकर आठ साल के कारावास एवं पांच हजार अर्थदंड की सजा सुनायी है।
🚩 मीडिया बाबा राम रहीम के खिलाफ खूब ट्रायल चला रही है लेकिन दूसरे धर्म के कितने मामले बाहर आये इसपर मीडिया ने चुप्पी साध ली है ।
🚩 अभी कुछ ही दिन पहले इलाहाबाद पुलिस ने 39 महिलाओं का बलात्कार करने वाले आरोपी मौलाना आफताब को गिरफ्तार किया है ।
🚩एक महीने पहले मस्जिद में उर्दू की पढाई करने आने वाली #नाबालिग बच्ची का #मौलवी ने ही #बलात्कार कर दिया। पुणे ग्रामीण #पुलिस ने #मौलवी को #गिरफ्तार कर लिया मौलवी पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग का रहने वाला है उसका नाम #शाहिद रजा मुनीर है ।
🚩 दो दिन पहले हैदराबाद पुलिस ने अनुबंध पर शादी’ कराने वाले काजियों का भंडाफोड किया है जो मध्य पूर्व और खाड़ी देश के पुरुषों के साथ यहां की स्थानीय महिलाओं और नाबालिग लडकियों की शादी कराते हैं । एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को बताया कि पुलिस ने इस मामले में 20 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जिसमें आठ विदेशी नागरिक शामिल हैं। विदेशी नागरिक शादी करके नाबालिग लड़कियां यहां से खाडी देश ले जाने के लिए आए थे। इन काजियों में फरीद अहमद नाम का मुंबई का चीफ काजी भी शामिल है।
🚩 अगस्त 2017, ईसाई पादरी का मामला : मध्यप्रदेश के रीवा के बड़े और नामी क्रिश्चियन स्कूल ज्योति में #ईसाई फादर जार्ज ने #12 वी कक्षा में पढ़ने वाली #नाबालिग छात्रा का #बलात्कार किया, और भाग गया ।
🚩 कितने मौलवियों और पादरियों ने दुष्कर्म किये हैं परंतु फिर भी मीडिया के इसपर कोर्इ ‘ब्रेकिंग न्यूज’ या चर्चासत्र दिखार्इ नहीं दिए ? ना कोर्इ सेक्युलर, मानवाधिकार तथा स्त्री-मुक्ति संगठन के कार्यकर्ता इस विषयपर कुछ ‘टिप्पणी’ देने के लिए सामने आए है ?
🚩 यदि इस प्रकार का आरोप भी किसी हिन्दू साधू या संत पर होता है या उन्हें इस विषय में गिरफ्तार किया जाता है, तो तुरंत सभी मीडिया ‘ब्रेकिंग न्यूज’ बना देते है तथा कर्इ हिन्दू द्वेषी व्यक्तियों को बुलाकर हिन्दू धर्म का अपमान करना प्रारंभ करते है । इसलिए अब हिन्दुआें को जागरूक होकर इस प्रकार के दोगले मीडिया का पूर्ण बहिष्कार कर देना चाहिए ।
 🚩#मीडिया का केवल यही #उद्देश्य है कि कैसे भी करके #भारतीय संस्कृति को #खत्म कर दिया जाये इसलिए #हिन्दुओं के #धर्मगुरुओं को #टारगेट किया जा रहा है जिससे उनके ऊपर जो करोड़ो लोगों की आस्था है वो टूट जाये और पश्चिमी संस्कृति को अपना ले ।
🚩और बड़े मजे की बात है कि उस न्यूज को हिन्दू ही देखते हैं और बाद में अपने ही हिंदू संतों का मजाक बनाते हैं । लेकिन वही भोला भाला हिन्दू दूसरी ओर कभी नही सोचता कि आखिर #हमारी देश की कई बड़ी बड़ी समस्याएं है, #मंहगाई, #बेरोजगारी, किसानों की #आत्महत्या, #राम मंदिर, 370, #गौ हत्या आदि आदि पर #मीडिया #नही #दिखाती है और न ही ईसाई पादरी और मौलवियों के खिलाफ दिखाती है । क्यों इतना प्राइम टाइम देकर हिन्दू धर्मगुरुओं पर ही बहस करती है तो आखिर इतने पैसे आते कहाँ से हैं..??
🚩जैसा कि हम बताते ही आये हैं कि #मीडिया का अधिकतर #फंड #वेटिकन सिटी और मुस्लिम देशों से आता है । जिनका #उद्देश्य है कि कैसे भी करके #हिन्दू संस्कृति को #खत्म करें । जिससे वो आसानी से #धर्मान्तरण करा सके ।
🚩दूसरा पहलू ये भी है कि #राजनेता भी #नहीं चाहते हैं कि किसी भी धर्मगुरू के इतने फॉलोवर्स हो जिससे उनको हर चुनाव में उनके सामने नाक रगड़ना पड़े इसलिए वो भी इसमे शामिल है क्योंकि #राजनेता केवल #वोट बैंक को ही देखते हैं उनको #हिन्दू धर्म से कोई लेना देना नही है।
🚩हमने आज तक अपने पाठकों को सच्चाई से अवगत कराने का प्रयास किया है और आगे भी करवाते रहेंगे ।
🚩आज हर #हिन्दुस्तानी का #कर्त्तव्य है कि वो #मीडिया की बातों में #न आकर स्वयं #सच्चाई तक #पहुँचने का #प्रयास करे ।
🚩जय हिन्द!!
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self realization day,

करोड़ो भक्तों ने क्यों मनाया धर्मगुरु बापू आसारामजी का आत्म-साक्षात्कार दिवस?

सितम्बर 21, 2017
🚩 जोधपुर जेल में धर्मगुरु बापू आसारामजी, बिना आरोप सिद्ध हुए चार साल से जेल में बंद हैं और वे हमेशा मीडिया की सुर्खियों में रहते हैं ।
🚩 आपको बता दें कि उनके करोड़ो भक्त गुरुवार को आत्म-साक्षात्कार दिवस मना रहे हैं,अब आपको प्रश्न होगा कि मीडिया ने इतना बता दिया फिर भी उनको उनके करोड़ भक्त क्यों मान रहे हैं..?? आत्म-साक्षात्कार दिवस क्यों मना रहे हैं..??
बापू आसारामजी वास्तव में कौन है..??
Reality of Asaram Bapu
🚩 आइये इन सवालों का निष्पक्ष उत्तर जाने…
बापू आसारामजी का जीवनी :-
🚩 धर्मगुरु आशारामजी बापू का बचपन का नाम आसुमल था । उनका जन्म अखंड भारत के सिंध प्रांत के बेराणी गाँव में 1 मई 1937 के दिन हुआ था । उनकी माता महँगीबा व पिताजी थाऊमल नगरसेठ थे ।
🚩बालक #आसुमल को देखते ही उनके कुलगुरु ने #भविष्यवाणी की थी कि ‘आगे चलकर यह बालक एक महान संत बनेगा, लोगों का उद्धार करेगा ।
🚩बापू का #बाल्यकाल संघर्षों की एक लंबी कहानी हैं 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के कारण अथाह सम्पत्ति को छोड़कर बालक आसुमल #परिवार सहित अहमदाबाद आ बसे। उनके पिताजी द्वारा लकड़ी और कोयले का व्यवसाय आरम्भ करने से आर्थिक परिस्थिति में सुधार होने लगा । तत्पश्चात् शक्कर का व्यवसाय भी आरम्भ हो गया ।
🚩माता-पिता के अतिरिक्त बालक आसुमल के परिवार में एक बड़े भाई तथा दो छोटी बहनें थी ।
🚩बालक आसुमल को #बचपन से ही प्रगाढ़ भक्ति प्राप्त थी । प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर ठाकुरजी की पूजा में लग जाना उनका नित्य नियम था ।
🚩दस वर्ष की नन्ही आयु में बालक आसुमल के पिताजी थाऊमलजी देहत्याग कर स्वधाम चले गये ।
🚩पिता के देहत्यागोपरांत आसुमल को पढ़ाई (तीसरी कक्षा) छोड़कर छोटी-सी उम्र में ही कुटुम्ब को सहारा देने के लिये सिद्धपुर(गुजरात) में एक परिजन के यहाँ नौकरी करनी पड़ी ।  3 साल तक नौकरी के साथ-साथ साधना में भी प्रगति करते रहे ।
🚩3 साल बाद वे वापिस अहमदाबाद आ गए और भाई के साथ शक्कर की दुकान पर बैठने लगे ।
🚩लेकिन उनका मन सांसारिक कार्यो में नही लगता था, ज्यादातर जप-ध्यान में ही समय निकालते थे ।
🚩21 साल की उम्र में घर वाले आसुमल की शादी करना चाहते थे लेकिन उनका मन संसार से विरक्त और भगवान में तल्लीन रहता था । इसलिए वे घर छोड़कर भरुच के अशोक आश्रम चले गए पर घरवालो ने उन्हें ढूंढ कर जबरदस्ती शादी करवा दी ।
🚩लेकिन मोह-ममता का त्याग कर ईश्वर प्राप्ति की लगन मन में लिए शादी के बाद भी तुरंत पुनः घर छोड़ दिया और आत्म पद की प्राप्ति हेतु जंगलों-बीहडों में घूमते और ईश्वर प्राप्ति के लिए तड़पते रहे ।
🚩नैनीताल के जंगल में योगी ब्रह्मनिष्ठ संत साँर्इं लीलाशाहजी बापू को उन्होंने सद्गुरु के रूप में स्वीकार किया ।
🚩#ईश्वरप्राप्ति की तीव्र तड़प देखकर सद्गुरु लीलाशाहजी बापू का ह्रदय छलक उठा और उन्हें 23 वर्ष की उम्र में सद्गुरु की कृपा से आत्म-साक्षात्कार हो गया । तब सद्गुरु लीलाशाह जी ने उनका नाम आसुमल से आशारामजी रखा ।
🚩अपने गुरु #लीलाशाहजी बापू की आज्ञा शिरोधार्य कर हिन्दू संत आसारामजी बापू समाधि-अवस्था का सुख छोड़कर तप्त लोगों के हृदय में शांति का संचार करने हेतु समाज के बीच आ गये।
🚩सन् 1972 में अहमदाबाद साबरमती के तट पर आश्रम स्थापित किया । भारत की राष्ट्रीय एकता, अखंडता और विश्व शांति के लिए संत आसारामजी बापू ने राष्ट्र के कल्याणार्थ अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया ।
🚩संत आशारामजी बापू के मार्गदर्शन में देश-विदेश में हजारों ‘बाल संस्कार केन्द्र, विद्यालयों में ‘योग व उच्च संस्कार शिक्षा अभियान चलाया जा रहा है।
उनके द्वारा व्यसनमुक्ति अभियान, गौ-रक्षा अभियान, पर्यावरण सुरक्षा कार्यक्रम आदि चलते हैं ।
🚩‘#वेलेंटाइन डे जैसे  त्यौहारों से भी बचने हेतु हर वर्ष 14 फरवरी को ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’मनाया जा रहा है । क्रिसमस डे की जगह तुलसी पूजन शुरू करवाया ।
🚩हिन्दू संस्कृति पद्धति अनुसार अनेकों गुरुकुलों चलाए जा रहे हैं ।
🚩‘युवाधन सुरक्षा अभियान चलाया जा रहा है तथा ‘युवा सेवा संघ एवं ‘महिला उत्थान मंडल की स्थापना की गयी है । जिनका लाभ लेकर युवक-युवतियाँ अपना सर्वांगीण विकास कर रहे हैं ।
🚩समाज के पिछडे, शोषित, बेरोजगार व बेसहारा लोगों की सहायता के लिए #संत #आसारामजी बापू द्वारा ‘#भजन करो, #भोजन करो, #दक्षिणा पाओ’ योजना चलायी जा रही है ।
🚩इसके अंतर्गत उन्हें कहा जाता है कि वे आश्रम में अथवा आश्रम द्वारा संचालित समितियों के केन्द्रों में आकर दिनभर केवल भजन, कीर्तन और ध्यान करें । उन्हें दिन का भोजन और शाम को घर जाते समय 50 रुपये तक की नकद राशि दी जाती है । इसमें भाग लेनेवालों की संख्या बढती ही जा रही है ।
🚩 जिससे #ईसाई #मिशनरियों द्वारा धर्मान्तरण में रोक लग रही है और जहाँ लोगों को भोजन की विकट समस्या से निजात मिलती है, वहीं उनका आध्यात्मिक उत्थान भी हो रहा है । इससे बेरोजगार लोगों में आपराधिक प्रवृत्ति को रोकने में बहुत मदद मिल रही है ।
🚩संत आसारामजी बापू ने #भारत में 17,000 निःशुल्क बाल संस्कार #केन्द्र, 40 गुरुकुल, 1 डिग्री कॉलेज तथा प्रति वर्ष 4,000 संकीर्तन यात्राएँ, 1,500 सत्संग, 4,68,000  भजन संध्या-कार्यक्रम तथा भारत में प्रति वर्ष 2,200 ‘विद्यार्थी उत्थान शिविर, 25 से 27 #लाख ‘विद्यार्थियों को दिव्य प्रेरणा प्रकाश प्रतियोगिता, 2 लाख 50 हजार ‘युवा संस्कार सभाएँ आदि के माध्यम से पाश्चात्य संस्कृति को भारत में फैलने से रोकते हैं ।
🚩 कत्लखाने जाती #गायों को रोककर अनेक गौशालायें खोली गई है ।
🚩इन सबके कारण धर्मान्तरण पर रोक लगी और उनके करोड़ों भक्तों ने बीड़ी, सिगरेट, दारू आदि व्यसन् और विदेशी सामान का #बहिष्कार किया इसलिए वेटिकन सिटी और विदेशी कम्पनियों ने मिलकर मीडिया द्वारा बदनाम करवाया जो सिलसिला अभी भी चालू है । नेताओं को बार-बार वोट मांगने नाक रगड़ना पड़ता था इसलिए उनके करोड़ों फॉलोवर्स को तोड़ने के लिए #जेल भेजा गया है, जबकि अभीतक एक भी आरोप उनपर सिद्ध नही हुआ है ।फिर भी उनको जमानत नही मिल रही है और मीडिया ट्रायल चलाया जा रहा है ।
🚩संत आसारामजी बापू का एक बहुत बड़ा साधक-समुदाय है, जो करीब 6 से 8 करोड़ के बीच में होगा, आज भी उनके भक्तों की श्रद्धा में कमी नही आई है उनके बताये अनुसार गरीबों की सेवा, गायों की सेवा, आदि सभी #निःशुल्क सेवाकार्य सुचारू रूप से चल रहे हैं ।
🚩गौरतलब है कि 54 साल पहले शारदीय नवरात्रि दूज को संत आशारामजी बापू के गुरूजी  लीलाशाहजी महाराज ने आत्म-साक्षात्कार (परमात्मा प्राप्ति) कराया था । इसलिए इस दिन को उनके करोड़ो भक्त अनेक सेवाकार्य सहित बड़ी धूम-धाम से मना रहे हैं ।
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dr ramvilas vedanti

अखाड़ा की बैठक में बैठे संतों ने कहा कि बापू आसारामजी का नाम दबाव के कारण डाला गया

 अगस्त, 19, 2017
🚩#डॉ. रामविलास वेदांतीजी, लोकसभा के पूर्व सदस्य ने बताया कि अखाड़ा परिषद में जिन संतों की चर्चा की है उसमें से कुछ ऐसे संत हैं जैसे स्वामी #असीमानंदजी वनवासी, आदिवासी, #दलितों के #उत्थान के #कार्य कर रहे थे, जिन हिन्दुओं को ईसाई मिशनरियां धर्मान्तरण करके ईसाई बना रही थी उनको #पुनः #हिन्दू धर्म में #लाने का #कार्य किया ।
dr ramvilas vedanti

 

🚩ठीक उसी प्रकार #आशारामजी बापू जिनके आचरण में , स्वभाव में किसी प्रकार का गलत नही हुआ है, हमारे विश्व हिंदू परिषद के अन्तर्राष्ट्रीय माननीय श्री अशोक सिंघल जी जब उनको स्वयं जोधपुर जेल में मिलने गये थे तब पत्रकारों ने उनको पूछा तो अशोक सिंघल ने बताया कि #कांग्रेस सरकार ने #जानबूझकर #झूठा #आरोप लगाकर संत आशारामजी बापू को #जेल भेजा जिससे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर साधु-संतों की निंदा की जाये । संत आशारामजी बापू स्वाभाविक धर्म और #हिन्दू संस्कृति के लिए काम कर रहे थे, बापूजी ने #मातृ-पितृ पूजन #कार्यक्रम किया, अशोक सिंघल जी और मैं भी गया था, ऐसे महापुरुष बापूजी के लिए और स्वामी असीमानंद के लिए जो अखाड़ा परिषद ने शब्द प्रयोग किया वो गलत है।
🚩मीडिया ने जिस ढंग से साधु या बाबा शब्द को प्रदूषित किया है वो बिलकुल गलत है, मै साफ शब्दों में कहता हूँ कि संत #आशारामजी बापू समाज के हित में देश के हित में #हिन्दुओं के #हित में लगे थे, धार्मिक कार्यों में लगे थे उनको अचानक कांग्रेस सरकार ने जानबूझकर पकड़कर आरोप लगाकर जेल में बंद किया, वो आरोप भी गलत था ।
🚩 अखाड़ा परिषद ने जो संत आशारामजी बापू का और स्वामी असीमानंद का नाम लिया वो गलत है,
मैं इसकी घोर निंदा करता हूँ, अखाड़ा परिषद को ये दोनों नाम वापिस लेना चाहिए।*
🚩जो संत आशारामजी बापू के भक्त हैं उनको कहना चाहता हूँ कि #अखाड़ा परिषद के #कुकृत्य को उजागर करें, जिनका नाम लेना चाहिए उनका नाम नही लिया और जिनका नाम नही लेना चाहिए उनका नाम लिया ये बहुत गलत है।
🚩भगवान से प्रार्थना करता हूँ कि संत आशारामजी बापू जेल से जल्दी से जल्दी छूटे और फिर से हिन्दू संस्कृति का प्रचार देश और विदेश में घूम-घूमकर करें।
🚩अखाड़ा परिषद की बैठेक में बैठे प्रयागराज इलाहाबाद से पधारे महंत गजानंददास ने भी नरेद्र गिरी को खूब लताड़ा । *उन्होंने कहा कि संत आशारामजी बापू एक आत्म साक्षात्कारी ब्रह्मनिष्ठ संत हैं उनका नाम फर्जी बाबाओं में लिखना वो बिलकुल गलत है, अखाड़ा परिषद में बैठे हुए कई संतों ने उस समय विरोध भी किया कि संत आशारामजी बापू का नाम नहीं डालो लेकिन #नरेद्र गिरी ने #दबाव और #लालच में आकर #संत आशारामजी बापू का नाम #सूची में डाला, वो #बिलकुल #गलत है ।*
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Narendra Giri

14 बाबाओं की लिस्ट बनाने वाला नरेन्द्र गिरी खुद निकला फर्जी, देशभर में हो रहा है विरोध

सितम्बर 12, 2017
नरेन्द्र गिरी ने अभी इलाहाबाद में मीटिंग करके बाबा राम रहीम, राधे मां आदि 14 साधुओं की लिस्ट बनाकर उनको फर्जी घोषित किया । लेकिन आज उनका देशभर में कई जगह पर पुतला जलाया गया है और कई जगहों से लीगली नोटिस निकाली जा रही है तो कई जगह पर देशव्यापी आंदोलन होने जा रहा है।
Narendra Giri himself is bogus
हिन्दू संत आसारामजी बापू के अधिवक्ता सज्जनराज सुरणा ने फर्जी बाबाओं की लिस्ट में आसारामजी बापू के नाम पर कहा कि अखाड़ा परिषद को यह अधिकार किसने दिया..???
कैसे वे किसी को फर्जी घोषित कर सकते हैं..??
टीवी पर ऐसे बोलते हैं जैसे डॉग्स। घिन्न आती है इन पर मुझको।
 चार लोग कैसे किसी का फैसला कर सकते हैं जबकि यह सन्यासी बन चुके तो इनकी सीविल डेथ हो चुकी है। बकवास करते रहते हैं ये लोग।
 इस पर पत्रकारों ने अगला सवाल कानूनी कार्रवाई को लेकर पूछा तो वे बोले कि कुत्ते भौंकते रहते हैं। किस-किस कुत्ते पर कार्रवाई करूँ ।
उनके ही अखाड़े में रहने वाले साधु ने उन पर आरोप लगाया है कि..
आचार्य कुश मुनि ने बताया कि मैंने अखाड़ों में हो रहे भ्रष्टाचार व चरित्रहीनता को देखकर 2012 में  छोड़ दिया था ।
नरेंद्र गिरी मेरा नाम फर्जी संतो की सूची में कैसे डाल सकता है..??
 और वो भी एक ऐसा आदमी मेरा नाम कैसे डाल सकता है जिस पर (नरेन्द्र गिरी)  खुद अनेकों आरोप लगे हैं । गिरी का अपराधिक इतिहास रहा है, गिरी ने स्वयं मठ की संपत्ति एक सपा के भूतपूर्व विधायक महेश सिंह को बेची थी। गिरि एक प्रॉपर्टी डीलर दलाल है, गिरी समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव के परिवार का दलाल है। ये कहां से हो गया अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष और अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष तो ज्ञानदास है।
नरेंद्र गिरी महाराज ने इलाहाबाद में सचिन दत्ता से पैसे लेकर के एक महामंडलेश्वर बनाया सच्चिदानंद गिरी, जब पूरे समाज ने विरोध किया तब जाकर के इसने वापस लिया। ये क्या बात करेंगे जो महामंडलेश्वर पद बेचते हैं।
समाज में नशे, गांजा चरस अफीम इन सब का प्रचार-प्रसार अखाड़े करते हैं, नई पीढ़ी को गुमराह अखाड़े करते हैं अखाड़े देश के विकास में कोई योगदान नहीं करते है। इनमें साधुता जैसे कोई लक्षण नहीं हैं,केवल गाँजे से इनकी सुबह होती है और साधु अपने आप को कहते हैं,इनसे बड़ा राक्षस कोई नहीं है, ये अपने आप को साधु कहते हैं,ये साधु कहां से हैं..?? संत के नाम पर कलंक हैं ।
मेरा ये मानना है तथाकथित अखाड़े के साधु का समाज बहिष्कार करें तभी हिंदू धर्म सुधर सकता है ।
दांडी अचुत्यानंद जी महाराज ने कहा कि नरेन्द्र गिरी जो अपने आपको तथाकथित अखाड़े का अध्यक्ष कहता है वो प्रमाण दे, कब उसका रजिस्ट्रेशन हुआ  है ? क्या उसका बायो लॉज है ? और किस अधिकार से उन्होंने फर्जी संत की व्याख्या करी ? कौन होता है वो फर्जी संत कहनेवाला ? किसने अधिकार दिया उसको? वो अधिकार के कागजात दिखाये । कौन से बायो लॉज में है ? वो कैसे कह सकता है? उसको भोगना पड़ेगा, प्रायश्चित करना पड़ेगा । उसका अधिकार क्षेत्रहीन है ।
गिरी पूर्णरूप से दोषी हैं,उसका प्रायश्चित करें वो माफी मांगे, माफिपत्र दे ।
अचुत्यानंद स्वामी ने कहा कि ये फ्लेट बेचते हैं, धर्माधर ट्रस्ट की सम्पति अपनी मानते है । 250 फ्लेट बनाकर बेच दिये, कहाँ जाता है पैसा..??
 कहाँ हिसाब है लाखों रुपयों का..???
अभी जगदीशपुर में जमीन बेची है इन्होंने । माननीय अखाड़ो ने बेची, जूना अखाड़ो ने बेची है ।
आपको बता दें कि संत आसारामजी बापू के करोड़ो भक्तों ने दावा किया है कि हमारे बापू को षड़यंत्र के तहत जेल में भेजा गया है अभीतक एक भी आरोप सिद्ध नही हुआ है ।
स्वामी विवेकानंद के 100 साल बाद World Religious Parliament में हिन्दू धर्म की ध्वजा फहराई है संत आसाराम जी बापू ने । अपने जीवन के 50 साल उन्होंने देश धर्म और संस्कृति पर न्यौछावर किये हैं ।
क्या किया है अखाड़ो वालो ने देश या समाज के लिए ??
किस आधार पर ये दूसरों को फर्जी लिस्ट में डाल सकते हैं,क्या प्रमाण है इनके पास कि ये फर्जी हैं..??
बस ये केवल अपनी बिगड़ती साख बचाने के लिए दूसरों को फर्जी संत घोषित कर रहे हैं ।