दस साल बाद सामने आया ‘समझौता ब्लास्ट’ का सच

🚩 दस साल बाद सामने आया ‘समझौता ब्लास्ट’ का सच, पाकिस्तानी को बचाया, हिंदुस्तानी को फंसाया
जून, 22, 2017
p chidambaram samjhauta express blast
🚩नई
दिल्ली: #समझौता ब्लास्ट केस में एक बड़ा खुलासा हुआ है। समझौता ब्लास्ट
केस को बहाना बनाकर हिन्दू #आतंकवाद का जुमला इजाद किया गया। पाकिस्तानियों
को बचाने के लिए और हिन्दुस्तानियों को फंसाने के लिए 2007 में हुए
#समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट का इस्तेमाल किया गया। इस केस में पाकिस्तानी
#आतंकवादी पकड़ा गया था, उसने अपना गुनाह भी कबूल किया था लेकिन महज 14
दिनों में उसे चुपचाप छोड़ दिया। इसके बाद इस केस में #स्वामी असीमानंद जी
को  फंसाया गया ताकि भगवा आतंकवाद या हिन्दू आतंकवाद को अमली जामा पहनाया
जा सके।
🚩#समझौता केस के जांच अधिकारी का खुलासा :
🚩हादसा
10 साल पुराना है लेकिन ये खुलासा सिर्फ बारह दिन पहले हुआ, जब जांच
अधिकारी ने अदालत में अपना बयान दर्ज करवाया। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि
पाकिस्तानी #आतंकवादी को छोड़ने का आदेश देने वाला कौन था?
🚩किसने पाकिस्तानी आतंकवादी को छोड़ने के लिए कहा, वो कौन है जिसके दिमाग में भगवा आतंकवाद का खतरनाक आइडिया आया…
🚩18
फरवरी 2007 को #समझौता एक्सप्रैस में ब्लास्ट हुआ था इसमें 68 लोग मारे
गए। दस साल से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन अबतक आखिरी फैसला नहीं आया है। इस
केस में दो पाकिस्तानी संदिग्ध पकड़े गए, इनमें से एक ने गुनाह कबूल किया
लेकिन पुलिस ने सिर्फ 14 दिन में जांच पूरी करके उसे बेगुनाह करार दिया।
अदालत में पाकिस्तानी संदिग्ध को केस से बरी करने की अपील की गई और अदालत
ने पुलिस की बात पर यकीन किया और पाकिस्तानी संदिग्ध आजाद हो गया। फिर कहां
गया ये किसी को नहीं मालूम….क्या ये सब इत्तेफाक था या फिर एक बड़ी
राजनीतिक साजिश थी?
🚩इस
केस से जुड़े #डॉक्युमेंट्स सामने आए हैं जिसे देखने के बाद कोई भी सोचने
पर मजबूर हो जाये कि उस समय की सरकार को #2 पाकिस्तानी संदिग्ध को छोड़ने
की इतनी जल्दी क्यों थी ?
फिर अचानक इस केस में हिन्दू आतंकवाद कैसे आ गया?
🚩इस
केस के पहले इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर थे इंस्पेक्टर गुरदीप सिंह जो कि अब
रिटायर हो चुके हैं। गुरदीप सिंह ने 9 जून को कोर्ट में अपना बयान रिकॉर्ड
करवाया है।
🚩इस
बयान में इंस्पेक्टर #गुरदीप ने कहा है, ‘ये सही है कि समझौता ब्लॉस्ट में
पाकिस्तानी अजमत अली को गिरफ्तार किया गया था। वो बिना पासपोर्ट के, बिना
लीगल ट्रैवल डाक्यूमेंटस के भारत आया था। दिल्ली, मुंबई समेत देश के कई
शहरों में घूमा था। मैंने अपने सीनियर अधिकारियों, सुपिरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस
#भारती अरोड़ा और डीआईजी के निर्देश के मुताबिक #अजमत अली को कोर्ट से बरी
करवाया।
🚩इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर ने कोर्ट को जो बयान दिया वो काफी हैरान करने वाला है
‘ऊपर से आदेश आया, पाकिस्तानी संदिग्ध छोड़ा गया’
पुलिस
अधिकारी ऐसा तभी करते हैं जब उन पर ऊपर से दवाब आता है। आखिर इतने सीनियर
अधिकारियों को पाकिस्तानी संदिग्ध को छोड़ने के लिए किसने दबाव बनाया?
एक ब्लास्ट केस में सिर्फ 14 दिन में पुलिस ने ये कैसे तय कर लिया कि आरोपी बेगुनाह है और उसे छोड़ देना चाहिए?
🚩#अजमत अली है कौन?
🚩कोर्ट
में जमा डॉक्युमेंट्स के मुताबिक अजमत अली पाकिस्तानी नागरिक था। उसे भारत
में अटारी बॉर्डर के पास से GRP ने अरेस्ट किया था। उसके पास न तो
पासपोर्ट था, न वीजा था और ना ही कोई लीगल डॉक्यूमेंट। इस शख्स ने पूछताछ
में कबूल किया कि वो पाकिस्तानी है और उसके पिता का नाम मेहम्मद शरीफ है।
उसने अपने घर का पता बताया था- हाउस नंबर 24, गली नंबर 51, हमाम स्ट्रीट
जिला लाहौर, पाकिस्तान।
🚩सबसे
बड़ी बात ये है कि ब्लास्ट के बाद दो प्रत्यक्षदर्शियों ने बम रखने वाले
का जो हुलिया बताया था वो #अजमत अली से मिलता जुलता था। प्रत्यक्षदर्शी के
बताने पर स्केच तैयार किए गए थे, और उस स्केच के आधार पर ही अजमत अली और
#मोहम्मद उस्मान को इस केस में आरोपी बनाया गया था। #इंस्पेक्टर गुरदीप ने
भी 12 दिन पहले कोर्ट को जो बयान दिया था उसमें कहा है कि ट्रेन में सफर कर
रहीं शौकत अली और रुखसाना के बताए हुलिए के आधार पर दोनों आरोपियों के
स्केच बनाए गए थे।
🚩समझौता
ब्लास्ट 18 फरवरी 2007 को हुआ था। पुलिस ने $अजमत अली को एक मार्च 2007 को
अटारी बॉर्डर के पास से बिना लीगल डॉक्युमेंट्स के गिरफ्तार किया था। उस
वक्त वो पाकिस्तान वापस लौटने की कोशिश कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद अजमत
अली को अमृतसर की सेंट्रल जेल में भेजा गया। वहीं से समझौता ब्लास्ट की
जांच टीम को बताया गया था कि समझौता ब्लास्ट के जिन संदिग्धों के उन्होंने
स्केच जारी किए हैं उनमें से एक का चेहरा अजमत अली से मिलता है। इसके बाद
लोकल पुलिस ने अजमत अली को कोर्ट में समझौता पुलिस की जांच टीम को हैंडओवर
कर दिया।
🚩जांच
टीम ने 6 मार्च 2007 को कोर्ट से अजमत अली की 14 दिन की रिमांड मांगी। जो
ऐप्लिकेशन पुलिस ने कोर्ट में जमा की थी, इस एप्लिकेशन में जांच अधिकारी ने
साफ साफ लिखा है कि समझौता ब्लास्ट मामले में गवाहों की याददाश्त के
मुताबिक संदिग्धों के स्केचेज बनाकर टीवी और अखबारों को जारी किए गए थे।
#अटारी जीआरपी ने इस स्केच से मिलते जुलते संदिग्ध अजमत अली को गिरफ्तार
किया। इसने पूछताछ में बताया कि वो तीन नवंबर 2006 को #बिना पासपोर्ट और
वीजा के भारत आया था। इसी आधार पर कोर्ट ने अजमत अली को 14 दिन की पुलिस
रिमांड में भेज दिया था।
🚩अबतक
की कहानी साफ है समझौता ट्रेन में ब्लास्ट हुआ, इस ब्लास्ट के दो
आईविटनेसेज ने ट्रेन में बम रखने वालों का हुलिया बताया, उसके आधार पर दो
लोगों के स्केच बने, उन्हें अटारी रेलवे पुलिस ने गिरफ्तार किया और फिर
पूछताछ करने के बाद समझौता ब्लास्ट की जांच कर रही टीम को सौंप दिया। इस
टीम ने भी उसका चेहरा स्केच से मिला कर देखा, चेहरा मिलता जुलता दिखा, तो
उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया। कोर्ट ने इसे 14 दिन की पुलिस
रिमांड में भेज दिया। 14 दिन की पुलिस #रिमांड में पूछताछ हुई।
🚩पूछताछ
और जांच के बाद उम्मीद थी कि कुछ कंक्रीट निकल कर सामने आएगा लेकिन 14 दिन
बाद, 20 मार्च को जब पुलिस ने दोबारा अजमत अली को कोर्ट में पेश किया तब
उम्मीद थी कि पुलिस दोबारा उसका रिमांड मांगेगी, लेकिन हुआ उल्टा। पुलिस ने
कोर्ट को बताया कि उनकी जांच पूरी हो गयी है, #अजमत अली के खिलाफ कोई ठोस
#सबूत नहीं मिले हैं, इसलिए उसे इस केस से #डिस्चार्ज कर दिया जाए। कोर्ट
ने पुलिस की दलील पर भरोसा किया और कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा कि अजमत
अली की रिहाई की अर्जी पुलिस ने ये कहते हुए दी है कि मौजूदा केस की जांच
में इसकी कोई जरूरत नहीं है। जब जांच टीम ने ही ये कह दिया तो कोर्ट ने
अजमत अली को रिहा कर दिया।
🚩करनाल
में इंडिया टीवी रिपोर्टर #चंदर किशोर को गुरदीप सिंह ने बताया कि शुरुआती
जांच के बाद ही अजमत को छोड़ दिया गया था। उन बड़े अफसरों के बारे में भी
बताया जो इस टीम का हिस्सा थे जिन्होंने इस केस की जांच की और पाकिस्तानी
नागरिक को छोड़ा ।
🚩अब
यहां एक बड़ा सवाल तो यह है कि इतने सारे शहरों में पुलिस ने जांच सिर्फ
14 दिन में कैसे पूरी कर ली। अजमत अली का न तो नार्को टेस्ट हुआ, न ही
पोलीग्राफी टेस्ट किया गया। सिर्फ 14 दिन की पूछताछ के बाद पुलिस ने ये मान
लिया कि समझौता ब्लास्ट में अजमत अली का हाथ नहीं है…ये शक को पैदा करता
है।
🚩अजमत
अली को छोड़ देना तो एक बड़ा ट्विस्ट था लेकिन इससे भी बड़ा ट्विस्ट इस
केस की शुरुआती जांच में आया था। शुरुआत में उस वक्त की #कांग्रेस सरकार ने
कहा था कि #समझौता ब्लास्ट के पीछे #लश्कर-ए-तैयबा का हाथ है लेकिन जांच
बढ़ने के कुछ ही दिन बाद इस केस में भगवा आतंकवाद का नाम आया।
🚩इस केस में शुरुआत में जांच में जल्दी-जल्दी ट्विस्ट आए इसपर हमारे कुछ सवाल हैं…
🚩क्या
एक पाकिस्तानी नागरिक जो बम धमाके का आरोपी हो उसे इतनी आसानी से छोड़ा जा
सकता है? अक्सर छोटे क्राइम में भी पकड़े गए पाकिस्तानी नागरिक की जांच
में भी ऐसी जल्दीबाजी नहीं होती उससे पूछताछ होती है, उसकी बातों को
वैरीफाई किया जाता है लेकिन समझौता ब्लास्ट के केस में अजमत अली को तुरंत
छोड़ दिया गया।
🚩आखिर
सरकार की तरफ से अजमत को छोड़ने की ऐसी जल्दबाजी क्यों की गयी? क्या पुलिस
को अजमत अली का नार्को या पोलीग्राफी टेस्ट करके सच निकलवाने की कोशिश
नहीं करनी चाहिए थी? पहले जब इंटेलिजेंस और जांच एजेंसियों ने इस धमाके को
लश्कर का मॉड्यूल बताया तो फिर एकाएक इसे हिंदू टेरर का नाम कैसे दिया गया?
🚩हम
आपको बताते है कि हिंदू टेरर का नाम कैसे आया, इसका जवाब भी पुलिस
अधिकारियों की एक मीटिंग की नोटिंग में मिला। 21 जुलाई 2010 को बंद कमरे
में कुछ अधिकारियों की मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में ये तय हुआ था कि
हरियाणा पुलिस द्वारा समझौता एक्सप्रैस ब्लास्ट की जांच किसी नतीजे पर नहीं
पहुंच पा रही है इसलिए इसे नेशनल इनवेस्टिगेटिव एजेंसी को सौंप देना
चाहिए। इसी मीटिंग में ये बात भी हुई थी कि इस केस की जांच हिंदू ग्रुप के
इन्वॉल्वमेंट पर भी होना चाहिए। नोटिंग में लिखा है कि एसएस (आईएस) को याद
होगा, उनके चेंबर में इस बात पर डिस्कशन हुआ था, कि इसकी जांच हिंदू ग्रुप
के ब्लास्ट में शामिल होने की संभावना पर भी होनी चाहिए।
🚩पुलिस की नोटिंग से सवाल ये उठता है कि  किसके कहने पर हिंदू टेरर ग्रुप का नाम इस धमाके से जोड़ने का आइडिया आया?
बंद
कमरे में वो कौन-कौन ऑफिसर थे जिन्होंने इस धमाके को हिन्दू टेरर का एंगल
देने की कोशिश की? इन अफसरों के नाम सामने आना जरूरी हैं, उनसे पूछताछ
होगी, तभी पता चलेगा कि उनपर किसका दबाव था?
🚩बीजेपी
नेता #सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि ये देश के साथ विश्वासघात है।
उन्होंने कहा कि सिर्फ #हिंदू आतंकवाद का नाम देने के लिए ये पूरी #साजिश
रची गयी थी।
🚩आपको
बता दें कि तत्कालीन #गृह मंत्री #सुशील कुमार शिंदे ने AICC की मीटिंग
में भगवा #आतंकवाद की बात करके सबको चौंका दिया था बाद में #पी चिदंबरम ने
और #दिग्विजय सिंह ने बार-बार बीजेपी को बैकफुट पर लाने के लिए इस जुमले का
इस्तेमाल किया।
🚩समझौता
ब्लास्ट के केस में जिस तरह से पहले लश्कर ए तैयबा का नाम आया फिर उस वक्त
की सरकार ने पाकिस्तानियों को छोड़ दिया और स्वामी असीमानंद को आरोपी
बनाकर इस केस को पूरी तरह से पलट दिया….इसके पीछे एक सोची समझी साजिश थी।
🚩अब
ये साफ है कि भगवा आतंकवाद का जुमला क्वाइन करने के लिए, हिन्दू आतंकवाद
का हब्बा खड़ा करने के लिए इस केस में पाकिस्तानियों को बचाया गया और
हिन्दुस्तानियों को फंसाया गया।
🚩अब सवाल सिर्फ इतना है कि इस साजिश के पीछे किसका शातिर दिमाग था ??
क्या पी चिदंबरम, दिग्विजय सिंह या सुशील कुमार शिन्दे में से कोई इस साजिश में शामिल था…..ये सच बाहर आना जरूरी है।
🚩स्त्रोत्र:इंडिया टीवी
🚩आपको
बता दें कि जॉइंट #इंटेलीजेंसी कमेटी के पूर्व प्रमुख और पूर्व
उपराष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. एस.डी. प्रधान ने देश में भगवा आतंक की
थ्योरी को लेकर कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं।
🚩उन्होंने
भी स्पष्ट बताया है कि समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट, मालेगाँव ब्लास्ट,
#इशरतजहाँ मामला का पहले से ही हमें पता था और अमेरिकन खुफिया विभाग ने भी
बताया था कि ये सब घटनाएं होने वाली थी और ये पाकिस्तान करवा रहा है और
हमने तात्कालीन #गृहमंत्री पी.चिदंबरम को बताया भी था लेकिन उन्होंने
राजनैतिक फायदे के लिए भगवा #आतंकवाद सिद्ध करने के लिए #डी.जी.वंजारा,
साध्वी प्रज्ञा, स्वामी #असीमानन्द, #शंकराचार्य अमृतानन्दजी, कर्नल
पुरोहित और बाद में दूसरे फर्जी केस बनाकर  हिन्दू संत आसारामजी बापू और
उनके बेटे को जेल भेजा गया था ।
 🚩जब
साध्वी प्रज्ञा जमानत पर बाहर आई तो कहा कि कांग्रेस के तात्कालीन
गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने भगवा आतंकवाद की परिभाषा गढ़ी थी और मुझे फंसाने
की साजिश की थी लेकिन कोर्ट में इतना तो साबित हो गया कि कोई भगवा आतंकवाद
नहीं होता ।
🚩आज
भी #कांग्रेस सरकार द्वारा रचे गए #षडयंत्र के तहत कई #हिन्दू साधु-संत
जेल में बंद है लेकिन अब #हिंदुत्ववादी कहलाने वाली #BJP सरकार कैसे
हिंदुओं के माप-दण्ड पर खरी उतरती है , ये देखना है ।
🚩कब #निर्दोष संतों की जल्द से जल्द सह-सम्मान रिहाई करवाती है उसी पर सभी #हिंदुओं की निगाहें टिकी है ।
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जहर परोसने वाली पेप्सी और कोका कोला का जनता कर रही है त्याग, अपना रहे है देशी पेय पदार्थ

जहर परोसने वाली पेप्सी और कोका कोला का जनता कर रही है त्याग, अपना रहे है देशी पेय पदार्थ
20 मई 2017
पेप्सी 1989 में भारत आई थी । कोका-कोला को जॉर्ज फर्नींडीज ने एक बार भगा दिया था, दोबारा वो 1993 में इंडिया फिर से आई ।
coca cola pepsi
इन
दोनों अमेरिकी कंपनियों ने बाकी कंपनियों को रास्ते से हटाने के लिए
धमकाने से लेकर कंपनी खरीदने तक की हर टैक्टिक का इस्तेमाल किया और सफल रहे
। बाद में आपस में जूझ गए । सॉफ्ट ड्रिंक का ये मार्केट इंडिया में 60
हजार करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गया ।
कोका
कोला और पेप्सी दोनों कंपनियां भारत सॉफ्ट ड्रिंक मार्केट में राज करती
हैं लेकिन अब उनका मार्केट खतरे में है, क्योंकि जनता लो-शुगर और लो-कैलोरी
सॉफ्ट ड्रिंक्स की तरफ शिफ्ट हो रही है ।
दोनों
कंपनियां एक तरफ हैं । दूसरी तरफ डाबर, पार्ले, हेक्टर बीवरेज, आईटीसी और
मनपसंद बीवरेज जैसी कंपनियां हैं । इन कंपनियों ने नये तरीके के ड्रिंक
निकाले हैं और स्मार्ट मार्केटिंग की है ।
ये
मार्केट दूध बेस्ट ड्रिंक्स और पैकड पानी का है। हेल्थ को लेकर नई
कॉन्शसनेस बनी है । जनता इधर शिफ्ट हो रही है। पेप्सी और कोला इसे नहीं देख
पाई है।
वड़ोदरा की कंपनी बीवरेज और कई भारत की कंपनियों ने 5 प्रतिशत फ्रूट जूस मिलना शुरू कर दिया है ।
मार्केट इन कंपनियों के बारे में क्या कह रहा है?
1.
यूरोमॉनीटर के मुताबिक 2014 और 2016 के बीच कोका कोला का इंडियन मार्केट
35.5 प्रतिशत से घटकर 33.5 प्रतिशत हो गया है । पेप्सी का मार्केट 23.2
प्रतिशत से घटकर 22.2 प्रतिशत हो गया है ।
2.
सॉफ्ट ड्रिंक के मार्केट में बॉटल्ड वाटर पिछले 5 सालों में बढ़कर 24
प्रतिशत हिस्सा पकड़ चुका है । 24 प्रतिशत के साथ पार्ले बिस्लेरी इस मामले
में सबसे आगे है । कोका कोला का किनले 17 प्रतिशत था, पर अब घट गया है।
3.
कॉर्बोनेटेड ड्रिंक्स के मार्केट में कोका कोला और पेप्सी का 96 प्रतिशत
शेयर है। पिछले दो-तीन सालों में ये मार्केट 16 हजार करोड़ रुपये बढ़ा और
ये दोनों कंपनियां इसका ज्यादा फायदा उठा पाने में कामयाब नहीं रहीं । ये
फायदा नई कंपनियों को ही गया ।
4.
कोका कोला ने तीन नये नॉन-कॉर्बनेटेड यानी प्लेन ड्रिंक लॉन्च किये ।
एक्वेरियस, दूध आधारित वायो और नारियल पानी बेस्ड जिको।  पेप्सी ने प्रॉमिस
किया कि अपने ड्रिंक्स में वो कैलोरी का लेवल कम करेंगे। पर ये टैक्टिक
काम नहीं कर रही है।
5.
लगातार ये चीजें भी सामने आती गई हैं कि ये दोनों ड्रिंक्स हेल्थ के लिए
हानिकारक हैं। पेप्सी पर तो बाकायदा कीटनाशक होने का आरोप लगा था।
ये दोनों कंपनियां पीछे जा रही हैं, भारत की कंपनियां आगे आ रही हैं
1.
वॉट्सऐप पर लगातार इनसे जुड़ी खबरें चलती हैं कि इनके गिलास में इतनी चीनी
होती है कि खीर बन जाए। पर इन दोनों कंपनियों ने इस चीज को ज्यादा
सीरियसली नहीं लिया। अब इनकी सच्चाई पता चलने पर लोग पीना छोड़ रहे है ।
सरकार द्वारा इनको पाप यानी कि अनहेल्दी चीजों में रखा जा रहा है।
2.
पेप्सी के फ्रूट प्रोडक्ट ट्रॉपिकाना भी जूस के मार्केट में 33.5 प्रतिशत
हिस्सेदारी से नीचे गिरकर 28.7 प्रतिशत तक आ गया । डाबर इसमें 56.3 प्रतिशत
मार्केट की हिस्सेदारी रखता है ।
3.
देसी ब्रांड्स के साथ फायदा ये है कि लोग इनसे जुड़ें जा रहे हैं। अभी
नेशनलिज्म का दौर है तो पहले वाली बात नहीं रही कि अमेरिका का है तो अच्छा
है। पार्ले एग्रो तो अपने एप्पी फिज्ज के साथ बहुत आगे निकल गया है। अभी
हाल में ही फ्रूटी फिज्ज भी लॉन्च किया है। ये मैंगो ड्रिंक है। जिसमें 11
प्रतिशत फल की मात्रा है। जबकि फैंटा या मिरिंडा बस फ्रूट फ्लेवर वाले
ड्रिंक्स हैं।
4.
यहां तक कि 100 साल पुराने ब्रांड रूह अफजा वाले हमदर्द ने भी रेडी टू
ड्रिंक मार्केट में 20 प्रतिशत फल की मात्रा वाला जूस लॉन्च कर दिया है,
रूह अफजा फ्यूजन। डाबर तो फ्रूट जूस के अलावा वेजीटेबल जूस भी बना रहा
है।इनका नया मैंगो जूस Ju C भी लॉन्च हुआ है।
5
हेक्टर बीवरेज जैसी देसी कंपनियां तो ठंडई और आम का पना भी बना रही हैं।
ये अपने पेपर बोट ब्रांड से लोगों तक पहुंच रही हैं। हेक्टर बीवरेज बनाने
वाले लोग पहले कोका कोला कंपनी में ही काम करते थे। नये जमाने में इंडियन
होना नया कॉन्फिडेंस दे रहा है तो देसी नॉस्टैल्जिया मार्केटिंग में काम आ
रहा है।
6
कोका-पेप्सी दोनों कंपनियों को मार्केट के अलावा भी दिक्कतें हैं। पानी की
समस्या देश में कई जगह पर है। जहां पर इन कंपनियों के प्लांट लगते हैं,
विरोध होना शुरू हो जाता है। मार्च 2017 में देश के सबसे इंडस्ट्रियलाइज्ड
राज्य तमिलनाडु की दो बड़ी ट्रेड एशोसिएशन्स ने कोका-कोला और पेप्सी को
राज्य में बैन कर दिया। कहा कि ये कंपनियां जो पानी खा जाती हैं, वो
किसानों को मिलेगा।
“पेप्सी
और कॉक” में उपयोग होने वाले रासायनिक तत्व सोडियम मोनो ग्लूटामेट,
पोटेशियम सोरबेट, ब्रोमिनेटेड वेजिटेबल ऑइल (BVO), और सोडियम बेन्जोईट ये
चारो  कैंसर करते है।
मिथाइल बेन्जीन – ये #किडनी को खराब करता है।
इसमें सबसे खराब जहर है – एंडोसल्फान – ये #कीड़े मारने के लिए खेतों में डाला जाता है।
और ऊपर से होता है – #कार्बन डाईऑक्साइड – जो कि बहुत जहरीली गैस है इसीलिए इन #कोल्ड ड्रिंक्स को “#कार्बोनेटेड वाटर” कहा जाता है
सरकार
के एक अध्ययन के अनुसार #स्वास्थ्य राज्यमंत्री फग्गन सिंह कुलास्ते ने
राज्यसभा में बताया है कि कुछ सॉफ्ट ड्रिंक्स और फार्मा प्रोडक्ट वाली
पीईटी बोतलों (#स्प्राइट, #माउंटेन #ड्यू, #सेवन अप, #पेप्सी और #कोकाकोला)
के सैंपल में भारी धातु मिले हैं जो #स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं।
अमेरिका
हावर्ड #यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध के मुताबिक सॉफ्ट ड्रिंक की लत से हर
साल 1.33 लाख जानें जाती हैं, हृदयरोग से लगभग 45,000 और कैंसर से 6,500
लोग मौत का शिकार बनते हैं। यानी कुल 1.84 लाख मौतों के लिए सॉफ्ट ड्रिंक
जिम्मेदार है।
यह ड्रिंक्स हड्डियों, मांसपेशियों, दांतों, आंखों और किडनी की सेहत के लिए भारी हानिकारक है।
कई
विदेशी कंपनियाँ कुछ #नेताओं की #मिलीभगत से #हिन्दुस्तान में बोतलबंद
#जहर खुल्लेआम बेच रही है, इस जहर को हिन्दुस्तान की सांसदों की केंटीन में
प्रतिबंधित कर दिया गया है,  अगर कोल्ड्रिंक जहरीला है ये हमारे सांसद
जानते हैं तो इसे पूरे भारत में प्रतिबंधित क्यों नहीं करते??
🚩नेताओं का स्वास्थ्य बेहतर रहना चाहिए तो जनता का क्यो नहीं??
🚩हमारे
देश मे बहुत सी विदेशी कम्पनियाँ हानिकारक पेय व खाद्य सामग्री बेच रही है
और #सरकार टेक्स के चक्कर में आंखे बन्द करके बैठी है ।
🚩नींबू स्वास्थ्य में उत्तम लाभदायी !!
🚩#नींबू
का रस स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी  है। #रक्त की अम्लता को दूर करने
का विशिष्ट गुण रखता है। त्रिदोष, वायु-सम्बन्धी रोगों, मंदाग्नि, कब्ज और
हैजे में नींबू विशेष उपयोगी है। #नींबू में कृमि-कीटाणुनाशक और सड़न दूर
करने का विशेष गुण है। यह रक्त व त्वचा के विकारों में भी लाभदायक है।
#नींबू की खटाई में #ठंडक उत्पन्न करने का विशिष्ट गुण है जो हमें गर्मी से
बचाता है।
मुँह
सूखना, पित्तप्रकोप, उदररोग, अपच, अरुचि, पेटदर्द, मंदाग्नि,  मोटापा,
कब्ज, दाँतों से खून निकलना, बालों की रूसी, सिर की फोड़े-फुंसी आदि #नीबू
के प्रयोग से मिट जाते हैं ।
क्यों
ऐसी #विदेशी कंपनियों के #ज़हरीले पेय-पदार्थों का सेवन करना जो हमारा पैसा
लेने के साथ-साथ हमारे शरीर को भी बिमारियों का घर बनाना चाहते है।
इसे
तो प्राकृतिक वस्तुओं जैसे #नीबूंपानी #गुलाब शर्बत, नारियल पानी आदि का
सेवन कर #गरीबों की रोजी #रोटी में मदद रूप हो और #देश की समृद्धि में
सहायक होने के साथ-साथ अपना स्वास्थ्य भी बढ़िया रखे।
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केरल में हर दिन होती है एक हिंदू की हत्या, अब तक हो चुकी है 294 हिंदुओं की हत्या

केरल में हर दिन होती है एक हिंदू की हत्या, अब तक हो चुकी है 294 हिंदुओं की हत्या
19 मई 2017
केरल
: हिंदुओं पर लगातार अत्याचार बढ़ता ही जा रहा है। आए दिन हिंदुओं पर हमले
होते हैं जिस वजह से उन्हें पलायन करना पड़ता है। अगर हिन्दू उस हमले का
सामना करते हैं तो उनकी हत्या कर दी जाती है।
ऐसा
ही एक मामला आया है केरल के कन्नूर का। जहां हर रोज लगभग किसी न किसी
हिंदू की बर्बरता से हत्या हो रही है, हर रोज एक हिंदू की मां अपने बेटे के
शव पर रोती है।
Hindus Outraged
केरल
में बीजू नाम का एक हिन्दू वामपंथियों का शिकार हो गया। बीजू को
वामपंथियों ने घेरकर धारदार हथियारों से कत्ल कर दिया। जिसके बाद न्याय
पाने के लिए बीजू के पिता केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप में मिलने रूडी
पहुंचे, जहां उन्होंने मदद की गुहार लगाई है।
आपको बता दें कि पिछले 1 साल में केरल में 294 हिन्दुओं की हत्या हो चुकी है।
केरल के मालाबार में लव जिहाद के ईनाम की घोषणा और संचालन होता है ।
केवल केरल में ही लव जिहाद के 5000 से अधिक मामले कोर्ट के सामने आये हैं ।
रिपोर्ट के अनुसार केरल आदि में तो लव जिहाद के जरिये से 4 लाख करीबन हिन्दू लड़कियाँ गायब हो गई है ।
केरल में ईसाई मिशनरियां भी बहुत सक्रिय है जो हिंदुओं का दिन-रात धर्मान्तरण करवाती रहती है ।
वहाँ
जो भी हिंदुत्वनिष्ठ लव जिहाद, धर्मान्तरण आदि का विरोध करता है उसको वहाँ
से भाग जाने की धमकी मिलती है या उनकी हत्या करवा दी जाती है ।
कब तक हिन्दुस्तान में ही हिन्दू अत्याचार सहता रहेगा?
बांग्लादेश
के प्रोफेसर डॉ. अब्दुल बरकत ने रिपोर्ट अनुसार बताया कि अभी अत्याचार के
कारण जिस तरह बांग्लादेश से हिन्दू पलायन हो रहे है 632 हिंदू रोजाना छोड़
रहे हैं बांग्लादेश । तीन दशक बाद बांग्लादेश में एक भी हिन्दू नहीं बचेगा ।
पाकिस्तान
में भी हिंदू नरक जैसी जिदंगी जी रहे हैं उनकी बहू-बेटियों को उठा ले जाते
हैं, पथराव करते हैं,वहाँ की सरकार भी हिंदुओं को कोई सुरक्षा नही देती है
भारत में भी कश्मीर से #पंडितों को भगा दिया गया और आज भी मुस्लिम बाहुल इलाकों से हिन्दू परिवार पलायन कर रहे हैं।
#ईसाई
मिशनरियाँ और #मुस्लिम देश दिन-रात #हिंदुस्तान और पूरी दुनिया से
हिन्दुस्तान को मिटाने में लगे हैं अतः हिन्दू #सावधान रहें ।
अभी समय है हिन्दू #एक होकर #हिन्दुओं पर हो रहे प्रहार को रोके तभी हिन्दू बच पायेंगे । हिन्दू होगा तभी सनातन संस्कृति बचेगी ।
अगर
#सनातन #संस्कृति नही बचेगी तो दुनिया में इंसानियत ही नही बचेगी क्योंकि
#हिन्दू संस्कृति ही ऐसी है जिसने “वसुधैव कुटुम्बकम्” का वाक्य चरितार्थ
करके दिखाया है ।
#सदाचार व भाई-चारे की भावना अगर किसी #संस्कृति में है तो वो सनातन संस्कृति है ।
#शत्रु को भी क्षमा करने की #ताकत अगर किसी संस्कृति में है तो वो #सनातन संस्कृति है ।
#प्राणिमात्र
में ईश्वरत्व के दर्शन कर, सर्वोत्वकृष्ट ज्ञान प्राप्त कर जीव में से
#शिवत्व को प्रगट करने की क्षमता अगर किसी संस्कृति में है तो वो सनातन
#संस्कृति में है ।
ऐसी #महान संस्कृति में हमारा #जन्म हुआ है , #हिन्दू संस्कृति को बचाने के लिए आज हिंदुओं को ही #संगठित होने की जरुरत है ।
दुनिया में केवल एक मात्र भारत ही हिन्दू बाहुल राष्ट्र है अगर वहाँ पर भी हिन्दू सुरक्षित नही रहेगा तो कहाँ रहेगा?
#हिन्दू_कार्यकर्ताओं और #हिन्दू_संतों को जेल भेज दिया गया , फिर भी हिन्दू सोया हुआ है….!!!
हिन्दू कार्यकर्ताओं की दिन दहाड़े हत्याएं हो रही है, फिर भी हिन्दू सोया है…!!!
कश्मीर से सभी #पंडितों को भगा दिया गया, फिर भी हिन्दू सोया है…!!!
मुस्लिम बाहुल इलाकों से हिंदुओं का पलायन हो रहा है, फिर भी हिन्दू सोया है…!!!
#ईसाई दिन-रात हिंदुओं का #धर्मान्तरण कर रहे हैं , फिर भी हिन्दू सोया है…!!!
एक नही,दो नही, हजार नही , लाखों हिन्दू #लड़कियों को लव जिहाद में फंसाकर ले जाते हैं फिर भी हिन्दू सोया है…!!!
हिंदुओं के #मंदिर तोड़े जा रहे है फिर भी हिन्दू सोया है…!!!
और भी कई ऐसी घटनाएँ है जिस पर हिन्दू मौन धारण करके सोया है…!!!
हिन्दू कब जागेगा नींद से …???
अभी
भी वक्त है हिन्दू #संगठित हो जाएँ । कानून या सरकार आपकी रक्षा नही करेगी
। #धर्म की रक्षा खुद को ही करनी पड़ेगी,इसलिए आपके आस-पास कहीं भी हिन्दू
के साथ #अत्याचार हो रहा हो तो निर्भयता से एक होकर सामना करो ।
हे वीर हिन्दू! जाग अपनी महिमा में…
देश
के साथ गद्दारी करने वाले मीडिया हॉउसस्  , #ईसाई_मिशनरियों
#मुस्लिम_समुदाय के जो भी आतंकी आतंक फैला रहे हैं और जो #राजनीति में
हिन्दू संस्कृति विरोधी बैठे है उनको उखाड़ फैको ।
हे हिन्दू! तू वीर #शिवाजी, #पृथ्वीराज_चौहाण, #वीर_महाराणा प्रताप जैसे वीरों का वंशज है । देश के गद्दारों का सफाया कर दें ।

भारत को लूटने वाले क्रूर, बर्बर विदेशी शासक – एक तथ्य

भारत को लूटने वाले क्रूर, बर्बर विदेशी शासक – एक तथ्य
मई 16-2017
हमारे
देश भारत को कभी सोने की चिड़िया कहा जाता था। कुछ दार्शनिक और विदेशी
इतिहासकारों ने भारत में कभी गरीबी नहीं देखी थी। हम सब जानते है कि मध्य
युग में भारत सोने की चिड़िया कहलाता था। इसलिए हमारा देश शुरू से ही विदेशी
आक्रांताओं के निशाने पर रहा। सन् 187 ई० पू० में मौर्य साम्राज्य के पतन
के बाद भारतीय इतिहास की राजनीतिक एकता बिखर गई।
The-cruel-barbarous-foreign-ruler-who-robbed-India-a-fact.

 

इस
खंडित एकता के चलते देश के उत्तर-पश्चिमी मार्गों से कई विदेशी आक्रांताओं
ने आकर अनेक भागों में एक ओर जहाँ लूटपाट की, वहीं दूसरी ओर उन्होंने
अपने-अपने राज्य स्थापित कर लिए। इन आक्रांताओं और लुटेरों में से कुछ तो
महाक्रूर और बर्बर हत्यारे थे जिन्होंने भारतीय जनता को बेरहमी से कुचला।
आओं जानते हैं ऐसे कुछ बर्बर लुटेरों के बारे में ….
 *मुहम्मद बिन कासिम* (Muhammad Bin Qasim)
7वीं
सदी के बाद अफगानिस्तान और पाकिस्तान भारत के हाथ से जाता रहा। भारत में
इस्लामिक शासन का विस्तार 7वीं शताब्दी के अंत में मोहम्मद बिन कासिम के
सिन्ध पर आक्रमण के बाद मुस्लिम शासकों द्वारा हुआ। लगभग  712 में इराकी
शासक अल हज्जाज के भतीजे एवं दामाद मुहम्मद बिन कासिम ने 17 वर्ष की अवस्था
में सिन्ध और बूच के अभियान का सफल नेतृत्व किया।
 #इस्लामिक खलीफाओं ने सिन्ध फतह के लिए कई अभियान चलाए। 10 हजार #सैनिकों
का एक दल ऊंट-घोड़ों के साथ सिन्ध पर आक्रमण करने के लिए भेजा गया। सिन्ध
पर ईस्वी सन् 638 से 711 ई. तक के 74 वर्षों के काल में 9 खलीफाओं ने 15
बार आक्रमण किया। 15वें आक्रमण का नेतृत्व मोहम्मद बिन कासिम ने किया।
मुहम्मद
बिन कासिम अत्यंत क्रूर यौद्धा था। सिंध के दीवान गुन्दुमल की बेटी ने सर
कटवाना स्वीकर किया, पर मीर कासिम की पत्नी बनना नहीं। इसी तरह वहां के
राजा दाहिर (679 ईस्वी में राजा बने) और उनकी पत्नियों और पुत्रियों ने भी
अपनी मातृभूमि और अस्मिता की रक्षा के लिए अपना बलिदान दे दिया। सिंध देश
के सभी राजाओं की कहानियाँ बहुत ही मार्मिक और दुखदायी हैं। आज सिंध देश
पाकिस्तान का एक प्रांत बनकर रह गया है। राजा दाहिर अकेले ही अरब और ईरान
के दरिंदों से लड़ते रहे। उनका साथ किसी ने नहीं दिया बल्कि कुछ लोगों ने
उनके साथ गद्दारी की।
 *महमूद गजनवी* (Mahmud Ghaznavi)
अरबों
के बाद तुर्कों ने भारत पर आक्रमण किया। अलप्तगीन नामक एक तुर्क सरदार ने
#गजनी में तुर्क साम्राज्य की स्थापना की। 177 ई. में अलप्तगीन के दामाद
सुबुक्तगीन ने गजनी पर शासन किया। सबुक्तगीन ने मरने से पहले कई लड़ाईयाँ
लड़ते हुए अपने राज्य की सीमाएं अफगानिस्तान, खुरासान, बल्ख एवं
पश्चिमोत्तर भारत तक फैला ली थी। सुबुक्तगीन की मुत्यु के बाद उसका पुत्र
महमूद गजनवी गजनी की गद्दी पर बैठा। महमूद गजनवी ने बगदाद के खलीफा के
आदेशानुसार भारत के अन्य हिस्सों पर आक्रमण करना शुरू किया ।
उसने
भारत पर 1001 से 1016 ई. के बीच 17 बार आक्रमण किए। उसने प्रत्येक वर्ष
भारत के अन्य हिस्सों पर आक्रमण करने की प्रतिज्ञा की। अपने 13वें अभियान
में गजनवी ने बुंदेलखंड, किरात तथा लोहकोट आदि को जीत लिया। 14वां आक्रमण
ग्वालियर तथा कालिंजर पर किया। अपने 15वें आक्रमण में उसने लोदोर्ग
(जैसलमेर), चिकलोदर (गुजरात) तथा अन्हिलवाड (गुजरात) पर आक्रमण कर वहां खूब
लूटपाट की।
माना
जाता है कि #महमूद_गजनवी ने अपना 16वां आक्रमण (1025 ई.) सोमनाथ पर किया।
उसने वहां के प्रसिद्ध मंदिरों को तोड़ा और वहां से अपार धन प्राप्त किया।
इस मंदिर को लूटते समय महमूद ने लगभग 50,000 ब्राह्मणों एवं हिन्दुओं का
कत्ल कर दिया। इसकी चर्चा पूरे देश में आग की तरह फैल गई। 17वां आक्रमण
उसने सिन्ध और मुल्तान के तटवर्ती क्षेत्रों के जाटों के ऊपर किया। इसमें
जाट पराजित हुए।
 *मुहम्मद गौरी*(Muhammad Ghori)
 #मुहम्मद_बिन_कासिम के बाद महमूद गजनवी और उसके बाद मुहम्मद गौरी ने भारत
पर आक्रमण कर अंधाधुंध कत्लेआम और लूटपाट मचाई। इसका पूरा नाम शिहाबुद्दीन
उर्फ मुईजुद्दीन मुहम्मद गौरी था। भारत में तुर्क साम्राज्य की स्थापना
करने का श्रेय मुहम्मद गौरी को ही जाता है। गौरी गजनी और हेरात के मध्य
स्थित छोटे से पहाड़ी प्रदेश गौर का शासक था।
उसने
पहला आक्रमण 1175 ईस्वी में मुल्तान पर किया, दूसरा आक्रमण 1178 ईस्वी में
गुजरात पर किया। इसके बाद 1179-86 ईस्वी के बीच उसने पंजाब पर फतह हासिल
की। इसके बाद उसने 1179 ईस्वी में पेशावर तथा 1185 ईस्वी में स्यालकोट अपने
कब्जे में ले लिया। 1191 ईस्वी में उसका युद्ध पृथ्वीराज चौहान से हुआ। इस
युद्ध में मुहम्मद गौरी को बुरी तरह पराजित होना पड़ा। इस युद्ध में गौरी
को बंधक बना लिया गया, किंतु पृथ्वीराज चौहान ने उसे छोड़ दिया। इसे तराइन
का प्रथम युद्ध कहा जाता था।
इसके
बाद मुहम्मद गौरी ने अधिक ताकत के साथ पृथ्वीराज चौहान पर आक्रमण कर दिया।
तराइन का यह द्वितीय युद्ध 1192 ईस्वी में हुआ था। अबकी बार इस युद्ध में
पृथ्वीराज चौहान हार गए और उनको बंधक बना लिया गया। ऐसा माना जाता है कि
बाद में उन्हें गजनी ले जाकर मार दिया गया। गौरी भारत में गुलामवंश का शासन
स्थापित करके पुन: अपने राज्य लौट गया।
 *चंगेज खान*(Changez khan)
(मंगोलियाई
नाम चिंगिस खान, सन 1162 से 18 अगस्त, 1227)। चंगेज खान ने मुस्लिम
साम्राज्य को लगभग नष्ट ही कर दिया था। वह एक मंगोल शासक था। वह बौद्ध धर्म
का अनुयायी था। हलाकू खान भी बौद्ध था। चंगेज अपनी संगठन शक्ति, बर्बरता
तथा साम्राज्य विस्तार के लिए कुख्यात रहा। भारत सहित संपूर्ण रशिया, एशिया
और अरब देश चंगेज खान के नाम से ही कांपते थे।
 #चंगेज_खान का जन्म 1162 के आसपास आधुनिक मंगोलिया के उत्तरी भाग में ओनोन
नदी के निकट हुआ था। उसका वास्तविक या प्रारंभिक नाम तेमुजिन (या तेमूचिन)
था। उसके पिता का नाम येसूजेई था जो कियात कबीले का मुखिया था।
चंगेज
खान ने अपने अभियान चलाकर ईरान, गजनी सहित पश्‍चिम भारत के काबुल, कन्धार,
पेशावर सहित कश्मीर पर भी अधिकार कर लिया। इस समय चंगेज खान ने सिंधु नदी
को पार कर उत्तरी भारत और असम के रास्ते मंगोलिया वापस लौटने की सोची।
किंतु वह ऐसा नहीं कर पाया। इस तरह उत्तर भारत एक संभावित लूटपाट और वीभत्स
उत्पात से बच गया।
एक
नए अनुसंधान के अनुसार इस क्रूर मंगोल योद्धा ने अपने हमलों में इस कदर
लूटपाट और खूनखराबा किया कि एशिया में चीन, अफगानिस्तान सहित उजबेकिस्तान,
#तिब्बत और बर्मा आदि देशों की बहुत बड़ी आबादी का सफाया हो गया था।
मुसलमानों के लिए तो चंगेज खान और हलाकू खान अल्लाह का कहर था।
 *तैमूर*(Timur Lang)
तैमूर
लंग भी चंगेज खान जैसा शासक बनना चाहता था। सन 1369 ईस्वी में वह समरकंद
का शासक बना। उसके बाद उसने अपनी विजय और क्रूरता की यात्रा शुरू की। मध्य
एशिया के मंगोल लोग इस बीच में मुसलमान हो चुके थे और तैमूर खुद भी मुसलमान
था।
क्रूरता
के मामले में वह चंगेज खान की तरह ही था। कहते हैं, एक जगह उसने दो हजार
जिन्दा आदमियों की एक मीनार बनवाई और उन्हें ईंट और गारे में चुनवा दिया।
जब
तैमूर ने भारत पर आक्रमण किया तब उत्तर भारत में तुगलक वंश का राज था।
1399 में तैमूर लंग द्वारा देहली पर आक्रमण के साथ ही तुगलक साम्राज्य का
अंत माना जाना चाहिए। तैमूर मंगोलों की फौज लेकर आया तो उसका कोई कड़ा
मुकाबला नहीं हुआ और वह कत्लेआम करता हुआ मजे के साथ आगे बढ़ता गया।
 #तैमूर के आक्रमण के समय हिन्दू और मुसलमान दोनों ने मिलकर जौहर की
राजपूती रस्म अदा की थी, यानी युद्ध में लड़ते-लड़ते मर जाने के लिए बाहर
निकल पड़े थे। देहली में वह 15 दिन रहा और उसने इस बड़े शहर को कसाईखाना
बना दिया। बाद में कश्मीर को लूटता हुआ वह समरकंद वापस लौट गया। तैमूर के
जाने के बाद देहली #मुर्दों का शहर रह गया था।
 *बाबर*(Babar)
मुगल
वंश का संस्थापक बाबर एक लूटेरा था। उसने उत्तर भारत में कई लूट को अंजाम
दिया। मध्य एशिया के समरकंद राज्य की एक बहुत छोटी सी #जागीर फरगना
(वर्तमान खोकन्द) में 1483 ई. में बाबर का जन्म हुआ था। उसका पिता उमर शेख
मिर्जा, तैमूरशाह तथा माता कुनलुक निगार खानम #मंगोलों की वंशज थी।
बाबर
ने चगताई तुर्की भाषा में अपनी आत्मकथा ‘तुजुक ए बाबरी’ लिखी इसे इतिहास
में #बाबरनामा भी कहा जाता है। बाबर का टकराव देहली के शासक #इब्राहिम लोदी
से हुआ। बाबर के जीवन का सबसे बड़ा टकराव मेवाड़ के #राणा सांगा के साथ
था। बाबरनामा में इसका विस्तृत वर्णन है। संघर्ष में 1927 ई. में खन्वाह के
युद्ध में, अन्त में उसे सफलता मिली।
 #बाबर ने अपने विजय पत्र में अपने को मूर्तियों की नींव का खण्डन करने
वाला बताया। इस भयंकर संघर्ष से बाबर को गाजी की उपाधि प्राप्त हुई। गाजी
वह जो काफिरों का कत्ल करे। बाबर ने अमानुषिक ढंग से तथा क्रूरतापूर्वक
हिन्दुओं का नरसंहार ही नहीं किया, बल्कि अनेक हिन्दू मंदिरों को भी नष्ट
किया। बाबर की आज्ञा से मीर बाकी ने अयोध्या में राम जन्मभूमि पर निर्मित
प्रसिद्ध #मंदिर को नष्ट कर मस्जिद बनवाई, इसी भांति ग्वालियर के निकट उरवा
में अनेक जैन मंदिरों को नष्ट किया। उसने चंदेरी के प्राचीन और ऐतिहासिक
मंदिरों को भी नष्ट करवा दिया था, जो आज बस खंडहर है।
 *औरंगजेब*(Aurangzeb)
भारत
में मुगल शासकों में सबसे क्रूर औरंगजेब था। मुहीउद्दीन मुहम्मद औरंगजेब
का जन्म 1618 ईस्वी में हुआ था। उसके पिता शाहजहाँ और माता का नाम मुमताज
था।
बाबर
का बेटा नासिरुद्दीन मुहम्मद हुमायूं देहली के तख्त पर बैठा। हुमायूं के
बाद जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर, अकबर के बाद नूरुद्दीन सलीम जहांगीर, जहांगीर
के बाद #शाहबउद्दीन मुहम्मद शाहजहां, शाहजहां के बाद मुहीउद्दीन मुहम्मद
औरंगजेब ने तख्त संभाला।
हिन्दुस्तान
के इतिहास के सबसे जालिम शासक जिसने, अपने पिता को कैद किया, अपने सगे
भाइयों और भतीजों की बेरहमी से हत्या की, गुरु तेग बहादुर का सर कटवाया,
गुरु #गोविन्द सिंह के बच्चों को जिंदा दीवार में चुनवाया, जिसने सैकड़ों
मंदिरों को तुड़वाया, जिसने अपनी प्रजा पर बे-इन्तहा जुल्म किए और अपने शासन
क्षेत्र में गैर-मुस्लिमों के लिए मुनादी करावा दी कि या तो आप इस्लाम
कबूल कर ले या फिर मरने के लिए तैयार रहें। औरंगजेब एक तुर्क था। उसके काल
में ही उत्तर भारत का तेजी से इस्लामी करण हुआ। अधिकतर ब्राह्मणों को या तो
मुसलमान बनना पड़ा या उन्होंने प्रदेश को छोड़कर महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश
के गांवों में शरण ली।
उत्तर
प्रदेश के प्रसिद्ध #इतिहासकार राधाकृष्ण बुंदेली अनुसार मुगल शासक
औरंगजेब ने अपनी सेना को सन् 1669 में जारी कर अपने एक हुक्मनामे पर
हिंदुओं के सभी मंदिर ध्वस्त करने का आदेश दिया था। इस दौरान सोमनाथ मंदिर,
वाराणसी का मंदिर, मथुरा का केशव राय मंदिर के अलावा कई हिंदू
देवी-देवताओं के प्रसिद्ध मंदिर तोड़ दिए गए थे।
 #औरंगजेब ने हिन्दू त्यौहारों को सार्वजनिक तौर पर मनाने पर प्रतिबन्ध
लगाया और उसने हिन्दू मंदिरों को तोड़ने का आदेश दिया । औरंगजेब ने दारुल
हर्ब (काफिरों का देश भारत) को दारुल इस्लाम (इस्लाम का देश) में परिवर्तित
करने का अपना महत्वपूर्ण लक्ष्य बनाया था। 1669 ई. में औरंगजेब ने बनारस
के विश्वनाथ मंदिर एवं मथुरा के केशव राय मदिंर को तुड़वा दिया था।
*नादिर शाह* (Nadir Shah)
(जन्म
6 अगस्त, 1688 मृत्यु 17 जून, 1747) : #नादिरशाह का पूरा नाम नादिर कोली
बेग था। यह ईरान का शासक था। उसने भारत पर आक्रमण कर कई तरह की लूटपाट और
कत्लेआम को अंजाम दिया। देहली की सत्ता पर आसीन उस वक्त के मुगल बादशाह
मुहम्मदशाह को हराने के बाद उसने वहां से अपार सम्पत्ति अर्जित की, जिसमें
कोहिनूर हीरा भी शामिल था।
 #मुगल बादशाह #मुहम्मदशाह और नादिरशाह के मध्य करनाल का युद्ध 1739 ई. में
लड़ा गया। काबुल पर कब्जा करने के बाद उसने देहली पर आक्रमण किया। करनाल
में मुगल राजा मोहम्मद शाह और नादिर की सेना के बीच लड़ाई हुई। इसमें नादिर
की सेना मुगलों के मुकाबले छोटी थी पर अपने बारूदी अस्त्रों के कारण फारसी
सेना जीत गई।
हारने
के बाद देहली के #सुल्तान #मोहम्मद शाह ने संभवत मार्च 1739 में देहली
पहुंचने पर यह अफवाह फैलायी कि नादिर शाह मारा गया। इससे देहली में भगदड़ मच
गई और फारसी सेना का कत्ल शुरू हो गया। नादिर को जब यह पता चला तो उसने
इसका बदला लेने के लिए देहली पर आक्रमण कर दिया। उसने देहली में भयानक
खूनखराबा किया और एक दिन में कई हजारों लोगों को मौत के घाट उतार दिया।
इसके अलावा उसने शाह से भारी धनराशि भी लूट ली। मोहम्मद शाह ने सिंधु नदी
के पश्चिम की सारी भूमि भी नादिरशाह को दान में दे दी। हीरे जवाहरात का एक
जखीरा भी उसे भेंट किया गया जिसमें कोहिनूर (कूह-ए-नूर), दरियानूर और
ताज-ए-मह नामक विख्यात हीरे शामिल थे।
 *अहमद शाह अब्दाली* (Ahmad Shah Abdali)
 #अहमदशाह अब्दाली को अहमदशाह दुर्रानी भी कहते हैं। सन 1747 में नादिर शाह
की मौत के बाद वह अफगानिस्तान का शासक बना। अपने पिता की तरह अब्दाली ने
भी भारत पर सन 1748 से 1758 तक कई बार आक्रमण किया और लूटपाट करके अपार धन
संपत्ति को इकट्ठा किया।
सन
1757 में जनवरी के माह में उसने देहली पर आक्रमण किया। उसने अब्दाली से
बहुत ही शर्मनाक संधि की, जिसमें एक शर्त देहली को लूटने की अनुमति देना भी
था। अहमदशाह एक माह तक देहली में ठहरकर लूटमार और कत्लेआम करता रहा। वहां
की लूट में उसे करोड़ों की संपदा हाथ लगी।
देहली
लूटने के बाद अब्दाली का लालच बढ़ गया। वहां से उसने आगरा पर आक्रमण किया।
आगरा के बाद बल्लभगढ़ पर आक्रमण किया। बल्लभगढ़ में उसने जाटों को हराया और
बल्लभगढ़ और उसके आस-पास के क्षेत्रों को लूटा और व्यापक जन−संहार किया।
उसके
बाद अहमदशाह ने अपने पठान सैनिकों को मथुरा लूटने और हिन्दुओं के सभी
पवित्र स्थलों को तोड़ने के साथ ही हिन्दुओं का व्यापक पैमाने पर कत्लेआम
करने का आदेश दिया। उसने अपने सिपाहियों से कहा प्रत्येक हिन्दू के एक कटे
सिर के बदले इनाम दिया जाएगा।
मथुरा
के इस जनसंहार के विस्तृत ब्यौरा आज भी मथुरा के इतिहास में दर्ज है।
अब्दाली द्वारा मथुरा और ब्रज की भीषण लूट बहुत ही क्रूर और बर्बर थी। यह
लेख यहां से लिया गया है।
– शिवम शर्मा भारतीय
स्त्रोत : इंडियन नोव्हा
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जेल में बंद शंकराचार्य अमृतानन्द की चिट्ठी पढ़कर हिन्दुस्तानियों का खून खोल उठेगा

जेल में बंद शंकराचार्य अमृतानन्द की चिट्ठी पढ़कर हिन्दुस्तानियों का खून खोल उठेगा ।
भारत
की जनता जानती है कि हिन्दूओं को बदनाम करने के लिए #तत्कालीन सरकार ने
“भगवा आतंकवाद” के नाम से कई #हिंदुत्वनिष्ठों को झूठे आरोपों में फंसाया
था और उनको #अमानवीय प्रताड़नायें भी दी ।
Shankaracharya Amritananda
आपने
मालेगांव ब्लास्ट में साध्वी प्रज्ञा, स्वामी असीमानन्द, कर्नल #पुरोहित
का नाम तो खूब सुना ही होगा लेकिन तत्कालीन सरकार के इशारे पर #ATS ने एक
ऐसा नाम छुपाया और उन्हें इतनी भयंकर प्रताड़नायें दी जिससे आज भी अधिकतर
#हिन्दुस्तान की जनता अनभिज्ञ है ।
जैसे
साध्वी प्रज्ञा ने जेल से चिट्ठी लिखी थी ऐसे ही जेल में बंद पीओके
(कश्मीर) शारदा पीठ के शंकराचार्य #अमृतानंद देव तीर्थ ने भी #चिट्ठी लिखी
थी लेकिन जनता तक पहुँच नही पाई ।
आइये आज हम उस #षड्यंत्र का खुलासा करते हुए उनकी चिट्ठी आपके सामने रखते हैं । जिसे पढ़कर आपका खून खोल उठेगा ।
पढ़िये पूरी चिट्ठी..
शंकराचार्य
अमृतानंद देव तीर्थ जी ने लिखा कि “भारत दुनिया का चौथा सबसे अधिक #आबादी
वाला एकमात्र हिंदू राष्ट्र है, फिर भी एक विभाजित भारत, धर्मनिरपेक्षता के
वजन तले दबा हुआ है, एक #हिंदू राष्ट्र होने के बाद भी दोषी महसूस करता
है। पिछले 1200 सालों से, अपनी #एकजुट ताकत से अनजान, इस समाज में सच्चाई
की बात करने के लिए साहस का #अभाव है और इतिहास के सबक से बचने में काफी
अनुभव है, बहुत अपमान और #आक्रामकता से पीड़ित, अब अपनी पहचान के लिए खोज
कर रहा है। “
इस
संम्बध में, मैं हिंदू समाज की पहचान और #विश्वास का प्रतीक हूँ, वर्तमान
परिस्थितियों में जगद्गुरु शंकराचार्य, अनंतश्री बिभुशित स्वामी #अमृतानंद
देव तीर्थ (जन्म से सुधाकर धर), शंकराचार्य, श्री शारदा सर्वज्ञ पीठ, जम्मू
कश्मीर (पीओके), #हिन्दू समाज के बेकार, उदासीन, अविश्वास और #आस्थाहीन
नेतृत्व पर नाखुश होकर यह पत्र लिख रहा हूँ ।
क्योंकि,
मुंबई #आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) के माध्यम से, हिंदू समाज #गुमराह
किया जा रहा है और मेरे प्रति क्रूर और #अमानवीय अत्याचारों जैसे  – मेरा
असली नाम हटाकर दयानंद पांडेय किया जो कि एक फर्जी नाम है, जो कभी मेरा नाम
नही था वो #जबरदस्ती रखवाया इसी नाम की पहचान का प्रचार करने से लेकर,
मुझे स्वयं घोषित संत , महंत या पुजारी कहने तक रोका गया और मुझे कुछ
#अपराधों के आयोग को स्वीकार करने के लिए #जबरदस्ती मजबूर किया गया ।
1]
“मेरे भगवा वस्त्रों को हटा दिया गया और तीन दिनों के लिए #वातानुकूलित
कमरे में गीला रखा गया और बिजली के भयंकर #झटके दिए गए थे।”
2] “मेरे निजी पूजा के लिए इस्तेमाल किये गए श्री यंत्र और #धार्मिक पुस्तकें (जपजी साहिब सहित) को नाले में फेंक दिया गया ।”
3]
“तीन पुरुषों ने मेरे पैरों पर खड़े होकर मेरे पैरों के तलवों पर मुझे
#बेल्ट के साथ मारा,जब तक मैं बेहोश ना हुआ तब-तक मारते रहे ।”
4] “मांस मेरे #मुंह में धकेल दिया गया था और मुझे बताया गया था कि यह #गौ -मांस (बीफ) था।”
5] “मुझे कुछ लिपियों को पढ़ने के लिए मजबूर किया गया था, और फिर मेरी आवाज #डब की गई, और #ऑडियो-वीडियो टेप का उत्पादन किया गया।”
6]  “मुझे धमकी दी गई कि हिन्दू समाज में मुझे बदनाम करने के लिए , मेरी #अश्लील सीडी बनाई जाएगी [यानी, कंप्यूटर सिमुलेशन द्वारा]”
“ये
केवल कुछ उदाहरण हैं। मैं उनकी #हिरासत में 17 दिनों तक था, और आप इस बारे
में कल्पना कर सकते हैं कि उन्होंने मेरे साथ क्या-क्या किया होगा !”
“यदि एटीएस के पास मेरे खिलाफ कोई #सबूत है, तो उन्हें मेरे खिलाफ #फर्जी प्रमाण बनाने की आवश्यकता क्यों थी?
एटीएस
ने कहा, ‘यहाँ हम तुम्हें मार देंगे, बाहर #मुसलमान तुम्हें मार देंगे;
तुम्हें किसी भी हालत में मरना है,  तो अपने #अपराधों को स्वीकार करो ‘।
उन्होंने मुझे सवालों के जवाब रटवाए, और फिर एक #नारको विश्लेषण किया ‘.
‘इन
परिस्थितियों में, मुझे उम्मीद है कि #हिंदू समाज इस पत्र को पढ़ेगा । और
अपने #धर्माचार्यों के सत्य के प्रमाण के रूप में स्वीकार करेगा।’
“यहां
उल्लेख करना उचित होगा कि #शंकराचार्य परंपरा  की मूल और प्राचीन सीट,
श्री शारदा सर्वज्ञ पीठ,  ग्राम शारदी, तालुका अत्तुमकम, जिला नीलम,
विभाजित भारत के उत्तरी राज्य #जम्मू कश्मीर के पाकिस्तान द्वारा जब्त 48%
इलाकों में निहित है।”
पाकिस्तानी
जब्ती के कारण ना केवल इस सीट को खोना पड़ा, बल्कि पिछले 60 वर्षों में,
उस क्षेत्र के #लाखों हिंदुओं ने अपने मानव अधिकारों को खो दिया है,
बुनियादी नागरिक सुविधाओं से #वंचित रखा है, और वे सामाजिक या सरकारी
सहायता के बिना दर दर की #ठोकरें खा रहे हैं  ।”
“पाक-कब्जे
वाले #कश्मीर को वापस लेने के तीन प्रस्तावों में धूल जमा हो रही है ।
#धर्मनिरपेक्ष सरकारों के इस दृष्टिकोण को इस्लामी राष्ट्र और #इस्लामी
नेतृत्व जानते हैं । जिसके परिणामस्वरूप उत्पीड़न की नीति का पालन किया जा
रहा है, और भारत में, इस्लामिक परिवर्तन पाकिस्तान और अन्य इस्लामिक देशों
के #समर्थक हो रहे हैं।
नतीजा
यह है कि 18-20 साल पहले, लाखों हिंदुओं को #कश्मीर छोड़ने के लिए मजबूर
किया गया; उन्होंने देश के अन्य #हिंदू राज्यों में शरण पायी । लेकिन आज,
सात तटीय राज्यों में, हिंदू 10% से कम के अल्पसंख्यक हैं।  अगर दूसरे
राज्यों में भी #हिंदुओं की इसी प्रकार की उड़ान हो जाती है,तो वे शरण कहाँ
लेगे?”
“इस
भय-ग्रस्त समाज के प्रमुख विचारकों, काशी विद्वत परिषद, दंडी सन्यासी सेवा
समिति, काशी के #विश्वास-प्रेमी और प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने हाथ मिलाकर
एक सार्वजनिक समारोह का आयोजन किया और फिर से श्री #शारदा सर्वज्ञ पीठ की
लुप्त शंकराचार्य परंपरा को पुन: स्थापित किया ।”
पीओके
के हिंदुओं के उत्पीड़न और उड़ान को रोकना, पीओके के निवासी हिंदुओं के
कष्टों को साझा करना और उन्हें न्याय और उनके #अधिकार प्राप्त करने में
सहायता करना, #कश्मीरी पंडितों को घाटी में वापस करने के लिए प्रोत्साहित
करना, और पीओके को पुनः प्राप्त करने के लिए तीन #संसदीय प्रस्तावों की
सरकार को याद दिलाना, यह एक चुनौती थी।
“इस
प्रकार, 16 मई 2003 को, मुझे शंकराचार्य नियुक्त किया गया और मुझे इन
जिम्मेदारियों का #उत्तरदायित्व दिया गया। तब से आज तक, सभी प्रकार के
खतरों और खतरों से निपटते हुए,  मैं अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहा हूँ । इस
पर एक विशेष #रिपोर्ट आरएसएस मुखपत्र, आयोजक की 17 फरवरी 2008 संस्करण में
पढ़ी जा सकती है। “
“धर्म
के आधार पर विभाजित भारत का जम्मू क्षेत्र, स्वतंत्रता के समय से,
#धर्मनिरपेक्षता की कसौटी बन गया है। वहां शंकराचार्य की नियुक्ति आधिकारिक
धर्मनिरपेक्षता का #पर्दाफाश कर सकती है। इस डर से प्रेरित, तत्कालीन
केंद्रीय और राज्य सरकारों ने अभिनव भारत कार्यक्रमों का इस्तेमाल करने की
मांग की है और कश्मीर शंकराचार्य के रूप में मेरी आधिकारिक क्षमता में,
साक्ष्यों को बनाने और मुझे अपमानित करने के लिए #एटीएस का इस्तेमाल किया
“इसलिए,
हिंदू समाज के माध्यम से, मैं #आत्महत्या करने की अनुमति लेने के लिए
सम्मानित राष्ट्रपति और सम्मानित #न्यायपालिका से अपील करता हूं, क्योंकि
इस तरह के #अपमान के बाद मैं हर-दूसरे क्षण धीमे मौत मर रहा हूँ। । और, उन
घटनाओं की वजह से, जिनका  मुझे सामना करना पड़ा था, जिसे मैं समाज के सामने
आने वाले भारी खतरों के संकेत के रूप में लेता हूँ, मुझे उम्मीद है कि
#हिंदू समाज और उसके नेतृत्व करने वाले सतर्क और #जाग्रत होंगे ।”
स्वामी
अमृतानन्द देव तीर्थ जी के उपरोक्त पत्र से स्पष्ट है कि #हिंदुओं के दमन
के लिए तत्कालीन सरकार ने खूब प्रयास किये लेकिन वे सफल नही हो पाई और उनको
जनता ने #उखाड़कर फेंक दिया लेकिन अभी वर्तमान सरकार का भी हिंदुओं के
प्रति #उदासीन चेहरा देखकर हिंदुत्व #खतरे में ही लग रहा है ।
आज
भी सालों से बिना सबूत हिंदुत्वनिष्ठ शंकराचार्य अमृतानन्द, कर्नल
पुरोहित, संत #आसारामजी बापू, धनंजय देसाई आदि जेल में बन्द हैं ।
जब
इनकी #रिहाई होगी और वो फिर से बाहर आकर जनता में जागृति लायेगें तभी
#हिन्दू संस्कृति टिक पाएगी अन्यथा राष्ट्रविरोधी ताकतों से हिन्दू
#संस्कृति खतरे में है ।
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बांग्लादेश प्रधानमंत्री का खुलासा : मक्का में हिन्दू मंत्रों के उच्चारण की आती है ध्वनि

बांग्लादेश प्रधानमंत्री का खुलासा : मक्का में हिन्दू मंत्रों के उच्चारण की आती है ध्वनि
‘काबा’
अरब का प्राचीन #मन्दिर है। जो मक्का शहर में है। विक्रम की प्रथम शताब्दी
के आरम्भ में रोमक इतिहास #लेखक ‘द्यौद्रस् सलस्’ लिखता है – यहाँ इस देश
में एक मन्दिर है, जो अरबों का अत्यन्त #पूजनीय है। इस कथन से इस बात को बल
मिलता है कि काबा और भगवान शिव का कोई न कोई प्राचीन जुड़ाव जरूर है। पूरा
विश्‍व आज काबा के सच को जानने को #उत्सुक है किन्‍तु वर्तमान परिदृश्‍य
में काबा में #गैर-इस्‍लामिक या कहे कि गैर मुस्लिम का जाना प्रतिबंधित है
इस कारण काबा के अंदर क्या है और इसके पीछे के सच का खुलासा आज तक नहीं हो
पाया है।
sacred sound from kaba
दुनियाँ
में इस्लामिक #आतंक सबसे ज्यादा है । दुनियाँ का लगभग हर देश इस आतंक से
#ग्रस्त है, हर कोई इस्लामिक आतंक से लड़ रहा है। इस इस्लामिक आतंक का बस एक
#मक्सद है इस्लाम का प्रचार करना । इस्लाम के आकाओं के अनुसार इस्लाम
दुनियाँ में सबसे पुराना है ।
मुसलमान
कहते हैं कुरान परमात्मा की वाणी है जो #अनादि काल से चली आ रही है ।
लेकिन ये बात बिल्कुल आधारहीन है इसका कोई तर्क नहीं है । क्योंकि मुस्लिम
धर्म की स्थापना पैगंबर मोहम्मद ने 1400 साल पहले की थी और हमारे ग्रंथो के
अनुसार पृथ्वी पर सबसे पहले #हिन्दू धर्म (सनातन धर्म) की छाया के
सिद्धांत ही प्रतीत होते है जिसे कई देशों ने भी माना है ।
मुसलमानों
के तौर तरीके, रीति-रिवाज आदि हिन्दुओं जैसे ही हैं । हिन्दुओं से ही सीख
लेकर इन्होनें अपने हिसाब से इन्हें ढाल लिया है। जिसके सबूत कई जगहों पर
मिलते रहे हैं और कई लोगों ने इसकी #पुष्टि भी की है ।
अब
बांग्लादेश की #प्रधानमंत्री शेख हसीना ने खुद स्वीकारा है कि, सऊदी अरब
के मक्का में मुस्लिमों का जो मजहबी स्थल है, जिसे काबा के नाम से भी जानते
हैं उसमें से हिन्दू #मंत्रों की आवाज आती है । शेख हसीना ने बांग्लादेश
की एक बड़ी #न्यूज एजेंसी को दिए गए बयान में कहा कि मक्का से अलग अलग
मन्त्रों की आवाज आती है जैसे “ॐ” इत्यादि । इस बात की पुष्टि न्यूज एजेंसी
ने भी की है ।
मक्का मदीना का सच
मुसलमानों
के सबसे बड़े तीर्थ मक्का #मक्केश्वर महादेव का मंदिर था। वहाँ काले पत्थर
का विशाल #शिवलिंग था जो खंडित अवस्था में अब भी वहाँ है। हज के समय संगे
अस्वद (संग अर्थात् पत्थर, अस्वद अर्थात् अश्वेत यानी काला) कहकर मुसलमान
उसे ही #पूजते और चूमते हैं।
इस
सम्‍बन्‍ध में #प्रख्‍यात प्रसिद्ध इतिहासकार स्व. पी.एन.ओक ने अपनी
पुस्तक ‘वैदिक विश्व राष्ट्र का इतिहास’ में समझाया है कि मक्का और उस
इलाके में इस्लाम के आने से पहले #मूर्ति पूजा होती थी। हिंदू देवी-देवताओं
के मंदिर थे, गहन #रिसर्च के बाद उन्होंने यह भी दावा किया कि काबा में
भगवान शिव का #ज्योतिर्लिंग है। पैगंबर मोहम्मद ने हमला कर मक्का की
मूर्तियां #तोड़ी थी। यूनान और भारत में बहुतायत में मूर्ति पूजा की जाती
रही है, पूर्व में इन दोनों ही देशों की #सभ्यताओं का दूरस्थ इलाकों पर
प्रभाव था। ऐसे में दोनों ही इलाकों के कुछ विद्वान काबा में #मूर्ति पूजा
होने का तर्क देते हैं। हज करने वाले लोग काबा के पूर्वी कोने पर जड़े हुए
एक काले पत्थर के दर्शन को पवित्र मानते हैं जो कि हिन्‍दूओं का #पवित्र
शिवलिंग है। वास्‍तव में इस्लाम से पहले मिडल-ईस्ट में #पीगन जनजाति रहती
थी और वह हिंदू रीति-रिवाज को ही मानती थी।
एक
प्रसिद्ध मान्‍यता के अनुसार काबा में “पवित्र गंगा” है। जिसका निर्माण
#महापंडित रावण ने किया था, रावण शिव भक्त था वह शिव के साथ गंगा और
चन्द्रमा के ‍महत्व को समझता था और यह जानता था कि क‍भी #शिव को गंगा से
अलग नहीं किया जा सकता। जहाँ भी शिव होंगे, पवित्र गंगा की अवधारणा निश्चित
ही मौजूद होती है। काबा के पास भी एक पवित्र #झरना पाया जाता है, इसका
पानी भी पवित्र माना जाता है। इस्लामिक काल से पहले भी इसे पवित्र (आबे
जम-जम) ही माना जाता था। रावण की तपस्‍या से प्रसन्‍न होकर भगवान शिव ने
रावण को एक #शिवलिंग प्रदान किया जिसे लंका में स्‍थापित करने को कहा और
बाद में  जब रावण आकाश मार्ग से लंका की ओर जाता है पर रास्ते में कुछ ऐसे
हालात बनते हैं कि रावण को शिवलिंग #धरती पर ही रखना पड़ता है। वह दोबारा
शिवलिंग को उठाने की कोशिश करता है पर खूब प्रयत्न करने पर भी लिंग उस
स्थान से हिलता नहीं। #वेंकटेश पण्डित के अनुसार यह स्थान वर्तमान में सऊदी
अरब के मक्का नामक स्थान पर स्थित है। सऊदी अरब के पास ही यमन नामक राज्य
भी है जहाँ #श्री कृष्ण ने कालयवन नामक राक्षस का विनाश किया था। जिसका
जिक्र #श्रीमद्भगवत पुराण में भी आता है।
पहले
राजा भोज ने मक्का में जाकर वहां स्थित #प्रसिद्ध शिवलिंग मक्केश्वर
महादेव का पूजन किया था, इसका वर्णन भविष्य-पुराण में निम्न प्रकार है :-
“नृपश्चैवमहादेवं मरुस्थल निवासिनं !
गंगाजलैश्च संस्नाप्य पंचगव्य समन्विते :
चंद्नादीभीराम्भ्यचर्य तुष्टाव मनसा हरम !
इतिश्रुत्वा स्वयं देव: शब्दमाह नृपाय तं!
गन्तव्यम भोज राजेन महाकालेश्वर स्थले !! “
इस्लाम
नींव इस आधार पर रखी गई कि दूसरों के धर्म का #अनादर करों और उनको
#नेस्‍तानाबूत और पवित्र स्थलों को खंडित कर वहाँ मस्जिद और मकबरे का
निर्माण किया  जाए। इस काम में बाधा डालने वाले जो लोग भी सामने आये उन
लोगों को #मौत के घाट उतार दिया जाये। भले ही वे लोग मुस्लिमों को परेशान न
करते हो।
1400
साल पहले मुहम्‍मद साहब और #मुसलमानों के हमले से मक्‍का और मदीना के आस
पास का पूरा इतिहास बदल दिया गया। इस्लाम एक #तलवार पे बना धर्म था है और
रहेगा। पी.एन.ओक ने सिद्ध कर दिया है मक्केश्वर शिवलिंग ही हजे अस्वद है।
मुसलमानों के सबसे बड़े तीर्थ मक्का #मक्केश्वर महादेव का मंदिर था। वहां
काले पत्थर का विशाल शिवलिंग था जो #खंडित अवस्था में अब भी वहां है। हज के
समय संगे अस्वद (संग अर्थात पत्थर, अस्वद अर्थात अश्वेत यानी काला) कहकर
मुसलमान उसे ही #पूजते और चूमते हैं।
द्वारिका
शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य जी का मानना है कि #मक्का में मक्केश्वर
महादेव #मंदिर है। मुहम्मद साहब भी शैव थे, इसलिए वे मक्केश्वर महादेव को
मानते थे। एक बार वहां लोगों ने बुद्ध की मूर्ति लगा दी थी, वह इसके बहुत
विरोधी थे। अरब में मुहम्मद पैगम्बर से पूर्व #शिवलिंग को ‘लात’ कहा जाता
था। मक्का के कावा में जिस काले पत्थर की उपासना की जाती रही है, भविष्य
पुराण में उसका उल्लेख #मक्केश्वर के रूप में हुआ है। इस्लाम के प्रसार से
पहले #इजराइल और अन्य #यहूदियों द्वारा इसकी पूजा किए जाने के स्पष्ट
प्रमाण मिले हैं।
इराक
और सीरिया में #सुबी नाम से एक जाति थी यही #साबिईन है। इन साबिईन को अरब
के लोग #बहुदेववादी मानते थे। कहते हैं कि साबिईन अर्थात नूह की कौम। माना
जाता है कि भारतीय मूल के लोग बहुत बड़ी संख्या में यमन में आबाद थे, जहां
आज भी श्याम और हिन्द नामक किले #मौजूद हैं। विद्वानों के अनुसार सऊदी अरब
के मक्का में जो काबा है, वहां कभी प्राचीनकाल में ‘मुक्तेश्वर’ नामक एक
शिवलिंग था जिसे बाद में ‘मक्केश्‍वर’ कहा जाने लगा।
अरब के मक्का नामक स्थान पर स्थित है ‘मक्केश्वर लिंग’ (मक्केश्वर महादेव)
मक्का
के गेट पर साफ-साफ लिखा था कि #काफिरों का अंदर जाना गैर-कानूनी है। कहा
जा रहा है अब इस बोर्ड को उतार दिया गया है और लिख दिया है #नॉन-मुस्लिम्स
का अंदर जाना मना है। इसका मतलब है कि ईसाई, जैनी या बौद्ध धर्म को भी
#मानने वाले इसके अंदर नहीं जा सकते हैं।
मक्का मदीना के शिवलिंग का रहस्य क्‍या है ? इसे इस्‍लाम पंथियों द्वारा सदा से छिपाया जा रहा है।
मुसलमानों
के पैगम्‍बर मुहम्‍मद ने मदीना से मक्का के शांतिप्रिय #मूर्तिपूजकों पर
हमला किया और जबरदस्‍त नरसंहार किया। मक्‍का का मदीना का अपना अलग अस्तित्व
था किन्‍तु मुहम्‍मद साहब के हमले के बाद मक्‍का मदीना को एक साथ जोड़कर
देखा जाने लगा। जबकि मक्‍का के लोग जो कि शिव के उपासक माने जाते हैं।
मुहम्‍मद की टोली ने मक्‍का में स्‍थापित कर वहां पर स्थापित की हुई 360
में से 359 मूर्तियाँ #नष्ट कर दी और सिर्फ काला पत्थर #सुरक्षित रखा जिसको
आज भी मुस्‍लिमों द्वारा पूजा जाता है।
उसके
अलावा अल-उज्जा, अल-लात और मनात नाम की #तीन देवियों के मंदिरों को नष्ट
करने का आदेश भी मुहम्मद ने दिया और आज उन मंदिरों का नामों निशान नही है
(हिशम इब्न अल-कलबी, 25-26)। इतिहास में यह किसी हिन्दू मंदिर पर सबसे पहला
इस्लामिक आतंकवादी हमला था। उस काले पत्थर की तरफ आज भी मुस्लिम
#श्रद्धालु अपना शीश झुकाते हैं । किसी #हिंदू पूजा के दौरान बिना सिला हुआ
वस्त्र या धोती पहनते हैं, उसी तरह हज के दौरान भी बिना सिला हुआ सफेद
सूती कपड़ा ही पहना जाता है।
जिस
प्रकार हिंदुओं की मान्यता होती है कि गंगा का पानी #शुद्ध होता है ठीक
उसी प्रकार मुस्लिम भी #आबे जम-जम के पानी को पाक मानते हैं। जिस तरह हिंदू
#गंगा स्नान के बाद इसके पानी को भरकर अपने घर लाते हैं ठीक उसी प्रकार
मुस्लिम भी मक्का के #आबे जम-जम का पानी भर कर अपने घर ले जाते हैं। ये भी
एक समानता है कि गंगा को मुस्लिम भी पाक मानते हैं और इसकी अराधना किसी न
किसी रूप में जरूर करते हैं।
तो
पाठक समझ गए होंगे कि #हिन्दू धर्म ही सनातन धर्म है जो सृष्टि की
उत्पत्ति करने के समय से है और बाद में अनेक धर्म, महजब, पंथ बने है अतः
हिंदुओं को अपने #सनातन धर्म पर #गर्व करना चाहिए और उसके खिलाफ जो भी
#षड्यंत्र हो रहे है उसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
जय हिन्द!!
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माँ गंगा के पौराणिक इतिहास एवं महत्ता

माँ गंगा जयंती : 2 मई
पौराणिक
कथा के अनुसार राजा सगर ने #तपस्या करके साठ हजार पुत्रों की प्राप्ति की।
एक दिन राजा #सगर ने देवलोक पर विजय प्राप्त करने के लिये एक #यज्ञ किया।
यज्ञ के लिये #घोड़ा आवश्यक था जो #ईर्ष्यालु इंद्र ने चुरा लिया था।
Ganga Jayanti
सगर
ने अपने सारे पुत्रों को घोड़े की खोज में भेज दिया अंत में उन्हें घोड़ा
#पाताल लोक में मिला जो एक #ऋषि के समीप बँधा था। सगर के पुत्रों ने यह सोच
कर कि ऋषि ही घोड़े के #गायब होने की वजह हैं उन्होंने ऋषि का अपमान किया।
तपस्या में #लीन ऋषि ने हजारों वर्ष बाद अपनी आँखें खोली और उनके क्रोध से
सगर के सभी साठ हजार पुत्र जल कर वहीं #भस्म हो गये।
सगर
के पुत्रों की #आत्माएँ भूत बनकर विचरने लगीं क्योंकि उनका #अंतिम संस्कार
नहीं किया गया था। सगर के पुत्र #अंशुमान ने आत्माओं की मुक्ति का #असफल
प्रयास किया और बाद में अंशुमान के पुत्र #दिलीप ने भी।
भगीरथ
राजा दिलीप की #दूसरी पत्नी के पुत्र थे। उन्होंने अपने #पूर्वजों का
अंतिम संस्कार किया। उन्होंने गंगा को पृथ्वी पर लाने का प्रण किया जिससे
उनके #अंतिम संस्कार कर, राख को गंगाजल में #प्रवाहित किया जा सके और भटकती
आत्माएं #स्वर्ग में जा सकें। भगीरथ राजा ने ब्रह्मा की घोर तपस्या की
ताकि गंगा को #पृथ्वी पर लाया जा सके। ब्रह्मा प्रसन्न हुये और गंगा को
पृथ्वी पर भेजने के लिये तैयार हुये और गंगा को पृथ्वी पर और उसके बाद
#पाताल में जाने का आदेश दिया ताकि सगर के पुत्रों की आत्माओं की मुक्ति
संभव हो सके।
तब
गंगा ने कहा कि मैं इतनी ऊँचाई से जब पृथ्वी पर #गिरूँगी, तो पृथ्वी इतना
#वेग कैसे सह पाएगी? तब भगीरथ ने भगवान ₹शिव से निवेदन किया और उन्होंने
अपनी खुली #जटाओं में गंगा के वेग को रोक कर, एक लट खोल दी, जिससे गंगा की
अविरल धारा पृथ्वी पर प्रवाहित हुई। वह धारा भगीरथ के पीछे-पीछे गंगा सागर
#संगम तक गई, जहाँ सगर-पुत्रों का #उद्धार हुआ। शिव के स्पर्श से गंगा और
भी पावन हो गयी और पृथ्वी #वासियों के लिये बहुत ही श्रद्धा का केन्द्र बन
गयीं।
भारत
की सबसे #महत्वपूर्ण नदी गंगा जो भारत और बांग्लादेश में मिलाकर 2,510
किमी की दूरी तय करती हुई #उत्तराखंड में हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी के
#सुंदरवन तक विशाल भू भाग को सींचती है, देश की प्राकृतिक संपदा ही नही,
जन जन की #भावनात्मक आस्था का आधार भी है। 2,071 कि.मी तक भारत तथा उसके
बाद बांग्लादेश में अपनी लंबी यात्रा करते हुए यह सहायक नदियों के साथ दस
लाख वर्ग किलोमीटर #क्षेत्रफल के अति विशाल उपजाऊ मैदान की रचना करती है।
सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से #अत्यंत महत्वपूर्ण
गंगा का यह मैदान अपनी घनी जनसंख्या के कारण भी जाना जाता है। 100 फीट (31
मी) की अधिकतम गहराई वाली यह नदी भारत में #पवित्र मानी जाती है तथा इसकी
#उपासना माँ और देवी के रूप में की जाती है। #भारतीय पुराण और साहित्य में
अपने #सौंदर्य और महत्व के कारण बार-बार आदर के साथ #वंदित गंगा नदी के
प्रति विदेशी साहित्य में भी #
प्रशंसा और भावुकतापूर्ण वर्णन किए गए हैं।
गंगा नदी पर बने पुल, बाँध और नदी #परियोजनाएँ भारत की बिजली, पानी और कृषि से संबन्धित जरुरतों को पूरा करती हैं।
भागीरथी नदी गंगोत्री में
गंगा
नदी की #प्रधान शाखा भागीरथी है जो #कुमायूँ में हिमालय के गोमुख नामक
स्थान पर #गंगोत्री हिमनद से निकलती है।  गंगा के इस उद्गम स्थल की #ऊँचाई
3140 मीटर है। यहाँ गंगा जी को समर्पित एक #मंदिर भी है।
गंगोत्री
तीर्थ, शहर से 19 कि.मी. उत्तर की ओर 3892 मी.(12,770 फी.) की ऊँचाई पर इस
#हिमनद का मुख है। यह हिमनद 25 कि.मी. लंबा व 4 कि.मी. चौड़ा और लगभग 40
मी. ऊँचा है। इसी #ग्लेशियर से भागीरथी एक छोटे से #गुफानुमा मुख पर अवतरित
होती है। इसका जल #स्रोत 5000 मी. ऊँचाई पर स्थित एक बेसिन है। इस #बेसिन
का मूल पश्चिमी ढलान की संतोपंथ की चोटियों में है। गौमुख के रास्ते में
3600 मी. ऊँचे चिरबासा ग्राम से विशाल #गोमुख हिमनद के दर्शन होते हैं। इस
हिमनद में नंदा देवी, कामत पर्वत एवं त्रिशूल पर्वत का हिम #पिघल कर आता
है। यद्यपि गंगा के आकार लेने में अनेक छोटी #धाराओं का योगदान है लेकिन 6
बड़ी और उनकी सहायक 5 छोटी धाराओं का भौगोलिक और सांस्कृतिक महत्व अधिक
है।
अलकनंदा
की सहायक नदी धौली, विष्णु गंगा तथा मंदाकिनी है। धौली गंगा का अलकनंदा से
#विष्णु प्रयाग में संगम होता है। यह 1372 मी. की ऊँचाई पर स्थित है। फिर
2805 मी. ऊँचे नंद प्रयाग में #अलकनन्दा का #नंदाकिनी नदी से संगम होता है।
इसके बाद कर्ण प्रयाग में अलकनन्दा का कर्ण गंगा या पिंडर नदी से #संगम
होता है।
फिर
#ऋषिकेश से 139 कि.मी. दूर स्थित रुद्र प्रयाग में अलकनंदा मंदाकिनी से
मिलती है। इसके बाद भागीरथी व अलकनन्दा 1500 फीट पर स्थित #देव प्रयाग में
संगम करती हैं यहाँ से यह सम्मलित जल-धारा गंगा नदी के नाम से आगे प्रवाहित
होती है। इन पांच प्रयागों को सम्मलित रूप से #पंच प्रयाग कहा जाता है।इस
प्रकार 200 कि.मी. का #संकरा पहाड़ी रास्ता तय करके गंगा नदी ऋषिकेश होते
हुए प्रथम बार मैदानों का #स्पर्श हरिद्वार में करती है।
त्रिवेणी-संगम, प्रयाग
हरिद्वार
से लगभग 800 कि.मी. #मैदानी यात्रा करते हुए गढ़मुक्तेश्वर, सोरों,
फर्रुखाबाद, कन्नौज, बिठूर, कानपुर होते हुए गंगा #इलाहाबाद (प्रयाग)
पहुँचती है। यहाँ इसका संगम #यमुना नदी से होता है। यह संगम स्थल हिन्दुओं
का एक महत्वपूर्ण तीर्थ है। इसे तीर्थराज प्रयाग कहा जाता है। इसके बाद
हिन्दू धर्म की प्रमुख #मोक्षदायिनी नगरी काशी (वाराणसी) में गंगा एक वक्र
लेती है, जिससे यह यहाँ #उत्तरवाहिनी कहलाती है। यहाँ से मीरजापुर, पटना,
भागलपुर होते हुए पाकुर पहुँचती है। इस बीच इसमें बहुत-सी सहायक #नदियाँ,
जैसे सोन, गंडक, घाघरा, कोसी आदि मिल जाती हैं। भागलपुर में #राजमहल की
पहाड़ियों से यह दक्षिणवर्ती होती है। पश्चिम बंगाल के #मुर्शिदाबाद जिले
के गिरिया स्थान के पास गंगा नदी दो शाखाओं में #विभाजित हो जाती
है-भागीरथी और पद्मा। भागीरथी नदी गिरिया से दक्षिण की ओर बहने लगती है
जबकि पद्मा नदी दक्षिण-पूर्व की ओर बहती #फरक्का बैराज (1974 निर्मित) से
छनते हुई बंगला देश में प्रवेश करती है। यहाँ से गंगा का #डेल्टाई भाग शुरू
हो जाता है। मुर्शिदाबाद शहर से #हुगली शहर तक गंगा का नाम भागीरथी नदी
तथा हुगली शहर से मुहाने तक गंगा का नाम #हुगली नदी है। गंगा का यह मैदान
मूलत: एक भू-अभिनति गर्त है जिसका निर्माण मुख्य रूप से हिमालय #पर्वतमाला
निर्माण प्रक्रिया के तीसरे चरण में लगभग 3-4 #करोड़ वर्ष पहले हुआ था। तब
से इसे #हिमालय और प्रायद्वीप से निकलने वाली नदियाँ अपने साथ लाये हुए
अवसादों से पाट रही हैं। इन मैदानों में #जलोढ़ की औसत गहराई 1000 से 2000
मीटर है। इस मैदान में नदी की #प्रौढ़ावस्था में बनने वाली अपरदनी और
निक्षेपण स्थलाकॄतियाँ, जैसे- बालू-रोधका, विसर्प, गोखुर झीलें और गुंफित
नदियाँ पाई जाती हैं।
गंगा
की इस #घाटी में एक ऐसी सभ्यता का उद्भव और विकास हुआ जिसका #प्राचीन
इतिहास अत्यन्त गौरवमयी और #वैभवशाली है। जहाँ ज्ञान, धर्म, अध्यात्म व
सभ्यता-संस्कृति की ऐसी किरण प्रस्फुटित हुई जिससे न केवल भारत बल्कि समस्त
#संसार आलोकित हुआ।
पाषाण
या #प्रस्तर युग का जन्म और विकास यहाँ होने के अनेक #साक्ष्य मिले हैं।
इसी घाटी में #रामायण और महाभारत कालीन युग का उद्भव और विलय हुआ। शतपथ
ब्राह्मण, पंचविश ब्राह्मण, गौपथ ब्राह्मण, ऐतरेय आरण्यक, कौशितकी आरण्यक,
सांख्यायन आरण्यक, वाजसनेयी संहिता और #महाभारत इत्यादि में वर्णित घटनाओं
से #उत्तर वैदिककालीन गंगा घाटी की जानकारी मिलती है। प्राचीन मगध महाजनपद
का उद्भव गंगा घाटी में ही हुआ जहाँ से #गणराज्यों की परंपरा विश्व में
पहली बार प्रारंभ हुई। यहीं भारत का वह स्वर्ण युग विकसित हुआ जब मौर्य और
गुप्त वंशीय राजाओं ने यहाँ #शासन किया।
सुंदरवन-विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा-गंगा का #मुहाना-बंगाल की खाड़ी में है ।
हुगली
नदी कोलकाता, हावड़ा होते हुए #सुंदरवन के भारतीय भाग में सागर से #संगम
करती है। #पद्मा में ब्रह्मपुत्र से निकली शाखा नदी जमुना नदी एवं मेघना
नदी मिलती हैं। अंततः ये 350 कि.मी. चौड़े सुंदरवन डेल्टा में जाकर #बंगाल
की खाड़ी में सागर-संगम करती है। यह #डेल्टा गंगा एवं उसकी सहायक नदियों
द्वारा लाई गई नवीन #जलोढ़ से 1,000 वर्षों में निर्मित समतल एवं निम्न
मैदान है। यहाँ #गंगा और बंगाल की खाड़ी के संगम पर एक प्रसिद्ध हिन्दू
तीर्थ है जिसे #गंगा-सागर-संगम कहते हैं।
गोमुख पर शुद्ध गंगा
गंगा
नदी विश्व भर में अपनी #शुद्धीकरण क्षमता के कारण जानी जाती है। लंबे समय
से प्रचलित इसकी शुद्धीकरण की मान्यता का #वैज्ञानिक आधार भी है। वैज्ञानिक
मानते हैं कि इस नदी के जल में #बैक्टीरियोफेज नामक विषाणु होते हैं, जो
जीवाणुओं व अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों को जीवित नहीं रहने देते हैं। नदी
के जल में #प्राणवायु (ऑक्सीजन) की मात्रा को बनाए रखने की #असाधारण क्षमता
है। किंतु इसका कारण अभी तक अज्ञात है। एक राष्ट्रीय सार्वजनिक #रेडियो
कार्यक्रम के अनुसार इस कारण हैजा और पेचिश जैसी #बीमारियाँ होने का खतरा
बहुत ही कम हो जाता है, जिससे #महामारियाँ होने की संभावना बड़े स्तर पर टल
जाती है।
लेकिन
गंगा के तट पर घने बसे #औद्योगिक नगरों के #नालों की गंदगी सीधे गंगा नदी
में मिलने से गंगा का प्रदूषण पिछले कई सालों से #चिंता का विषय बना हुआ
है। औद्योगिक कचरे के साथ-साथ #प्लास्टिक कचरे की #बहुतायत ने गंगा जल को
भी बेहद प्रदूषित किया है।
वैज्ञानिक जांच के अनुसार गंगा का #बायोलाजिकल ऑक्सीजन स्तर 3 डिग्री (सामान्य) से बढ़कर 6 डिग्री हो चुका है।
गंगा
में 2 करोड़ 90 लाख लीटर प्रदूषित कचरा #प्रतिदिन गिर रहा है।  यह घोर
#चिन्तनीय है कि कब गंगा-जल की सफाई पूर्ण होगी । गंगा नदी की सफाई के लिए
कई बार पहल की गयी लेकिन कोई भी #संतोषजनक स्थिति तक नहीं पहुँच पाया।
वाराणसी घाट
भारत
की अनेक #धार्मिक अवधारणाओं में गंगा नदी को देवी के रूप में निरुपित किया
गया है। बहुत से पवित्र #तीर्थस्थल गंगा नदी के किनारे पर बसे हुये हैं ।
जिनमें वाराणसी और #हरिद्वार सबसे प्रमुख हैं। गंगा नदी को भारत की पवित्र
नदियों में सबसे पवित्र माना जाता है एवं  गंगा में स्नान करने से मनुष्य
के सारे #पापों का नाश हो जाता है । गंगाजल को पवित्र समझा जाता है तथा
समस्त #संस्कारों में उसका होना आवश्यक है। पंचामृत में भी गंगाजल को एक
#अमृत माना गया है।
महाभारत
के अनुसार मात्र प्रयाग में माघ मास में #गंगा-यमुना के संगम पर तीन करोड़
दस हजार तीर्थों का संगम होता है। ये तीर्थ स्थल सम्पूर्ण भारत में
#सांस्कृतिक एकता स्थापित करते हैं।
माँ गंगा की अपार महिमा
भारत
की राष्ट्र-नदी गंगा जल ही नहीं, अपितु भारत और #हिंदी साहित्य की #मानवीय
चेतना को भी प्रवाहित करती है। ऋग्वेद, महाभारत, रामायण एवं अनेक पुराणों
में #गंगा को पुण्य सलिला, पाप-नाशिनी, मोक्ष प्रदायिनी, सरित्श्रेष्ठा एवं
महानदी कहा गया है।
जैसे
मंत्रों में #ॐकार, स्त्रियों में #गौरीदेवी, तत्वों में #गुरुतत्व और
विद्याओं में #आत्मविद्या उत्तम है, उसी प्रकार सम्पूर्ण तीर्थों में
#गंगातीर्थ विशेष माना गया है । गंगाजी की वंदना करते हुए कहा गया है :
संसारविषनाशिन्यै जीवनायै नमोऽस्तु ते । तापत्रितयसंहन्त्र्यै प्राणेश्यै ते नमो नमः ।।
‘देवी
गंगे ! आप संसाररूपी विष का नाश करनेवाली हैं । आप जीवनरूपा हैं । आप
आधिभौतिक,आधिदैविक और आध्यात्मिक तीनों प्रकार के तापों का संहार करनेवाली
तथा प्राणों की स्वामिनी हैं । आपको बार-बार नमस्कार है ।’
(स्कंद पुराण, काशी खं. पू. : 27.160)
जिस
दिन #गंगाजी की उत्पत्ति हुई वह दिन ‘गंगा जयंती’ (वैशाख शुक्ल सप्तमी – 2
मई) और जिस दिन गंगाजी पृथ्वी पर #अवतरित हुईं वह दिन ‘गंगा दशहरा’
(ज्येष्ठ शुक्ल दशमी – 4 जून) के नाम से जाना जाता है । इन दिनों में
गंगाजी में #गोता मारने से विशेष #सात्विकता, प्रसन्नता और पुण्यलाभ होता
है । वैशाख, कार्तिक और माघ मास की पूर्णिमा, माघ मास की #अमावस्या तथा
#कृष्णपक्षीय अष्टमी तिथि को गंगास्नान करने से भी विशेष #पुण्यलाभ होता है
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