महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने कानून के विरोध में उतरी महिलाएं..

22 july 2018 

🚩बलात्कार की बढ़ती घटनाओं के कारण महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाये गये लेकिन इसका दुरुपयोग भी भयंकर हो रहा है । 
🚩न्यायालय में बलात्कार के केस अधिकतर साबित ही नही हो पाते है । अधिक्तर न्यायालयों का मानना है कि कुछ लड़कियां बदला लेने या पैसे ऐठने के लिए झूठे केस दर्ज करवाती है ।
🚩झूठे केस दर्ज करवाने के लिए कई गिरोह भी काम कर रहे है, इसी कारण घरेलू महिलाएं परेशान हो गई है आज किसी भी निर्दोष पुरुष पर झूठे केस दर्ज करने पर उसके साथ जुड़ी माँ, बहन, पत्नी, बेटियां को परेशानी होती है उनका पालन करने वाले को ही जेल भेज दिया जाता है तो फिर उनको घर सँभालना मुश्किल हो जाता है इसलिए ऐसी प्रताड़ित महिलाओं ने रविवार को ट्वीटर पर 
MisuseOfPOCSOlaw हैशटैग लेकर ट्रेंड चलाया जो घण्टों भर टॉप में रहा ।
Women in protest against the law made for protection of women.
🚩आइए आपको बताते है ट्वीटर पर क्या प्रतिक्रिया दे रही थीं महिलाएं…
*🚩1.* प्रीति गुप्ता लिखती है कि आपसी मतभेद या किसी से बदला लेने, महज़ पैसों के लिए POCSO जैसे बेहद कठिन कानून का दुरुपयोग आजकल किया जा रहा है 
क्या यह कानून से आपके पिता/भाई/दोस्त/रिश्तेदार सब सुरक्षित हैं ?
उत्तर -बिल्कुल नहीं , कानून में बदलाव लाने की अति आवश्यकता है।

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*🚩2.* डॉ. भूमि लिखती है कि हर महीने कितने निर्दोष लोग #MisuseOfPOCSOlaw की वजह से पीड़ित होते है, निर्दोष के साथ अन्याय होना क्या ये सही है?? जिस कानून से निर्दोष को सजा मिले, उस कानून का क्या मतलब??


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*🚩3.* प्रियंका लिखती है कि जो कानून बना न्याय के लिए, उसे हथियार बनाया जा रहा है निर्दोषों को फँसाने के लिए!
कानून का दुरूपयोग बंद हो!
निर्दोष को न्याय कब मिलेगा?
 #MisuseOfPOCSOlaw कब होगा बंद?
कानून की चुप्पी,
निर्दोष पीड़ित!
कौन देगा न्याय?


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*🚩4.* जेनी लुहाना लिखती है एक झूठी कहानी..
ये केस नहीं मात्र एक षड्यंत्र…
एक झूठे रेप की धारा..
एक POCSO Misuse..
इस तरह निर्दोष Sant Asaram Bapu Ji को फँसाया गया!


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*🚩5.* आरती प्रजापति कहती है कि POCSO Misuse से हो रही तबाही!
बेगुनाह को हो रही जेल!
इसका साक्षात उदाहरण है की पहले के मुकाबले रेप केस बढ गये है 
 POCSO Misuse द्वारा आम आदमी षड़यंत्र का शिकार बन रहा है 
क्या मोदी जी ये गलत कानून हटायेंगे?


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*🚩6.* अश्विनी जायसवाल कहती है कि  
जुर्म हुआ नहीं..
सबूत मिला नहीं.. फ़िर भी एक लड़की के इशारे पर एक निर्दोष संत को जेल!
Asaram Bapu Ji ने जाँच मे सहयोग दिया! समर्थको ने शांति बनाए रखी! पर अभी तक न्याय नही मिला! #MisuseOfPOCSOlaw 


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*🚩7.*गार्गी पटेल लिखती है कि बंद करो ऐसे कानून, जिससे निर्दोष हैं जेल मे
मोदी जी, POCSO Misuse रोककर देश की रक्षा करें ।


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*🚩8.* वनिता लिखती है कि मीडिया द्वारा केवल ओर केवल निर्दोष हिन्दू सन्तों को ही एक एक करके निशाने पर लेना और 
  #MisuseOfPOCSOlaw दोनो एक ही सिक्के के पहलू हैं।


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🚩इस तरीके से हजारों महिलाएं ट्वीट के जरिये बता रही थीं कि बलात्कार कानून में पोस्को एक्ट है उसमें संसोधन किया जाये जिससे निर्दोष पुरषों फंसे नही और साथ ही साथ ये भी कहा कि जो झूठे केस दर्ज करवाती है उनपर भी कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए ।
🚩पास्को कानून क्या है?
🚩18 साल से कम उम्र की किसी लड़की ने अगर किसी पुरुष के खिलाफ FIR दर्ज करा दी कि मेरे साथ छेड़खानी हुई है तो पुलिस आपसे बिना कोई भी #पूछताछ किये गिरफ्तार कर लेगी । उसके बाद आपको #जमानत भी नही मिल सकती और अब उस लड़की को कुछ नही करना पुरूष को साबित करना है कि वह निर्दोष हो और अगर पुरूष खुद की निर्दोषता साबित नही कर पाये सीधी उम्रकैद हो सकती है ।
🚩NCRB (National Crime Report Beauro) के अनुसार वर्ष 2013 में 65,000 से 70,000 हजार पुरुष हर साल महिला कानूनों से तंग आकर आत्महत्या करते थे। यानी हर नौवें मिनट में एक पुरुष सुसाइड करता था। 
🚩आज भारत में हर एक से डेढ़ मिनट के भीतर एक फर्जी केस रजिस्टर्ड हो रहा है। सोचिए कहाँ जा रहे हैं हम ??
🚩प्रतापगढ़ जिला एवं सेशन न्यायाधीश राजेन्द्र सिंह ने बताया कि 90 प्रतिशत बलात्कार के केस साबित ही नही हो पाते है । दलालों द्वारा प्रतिवर्ष काफी संख्या में बालिकाओं तथा महिलाओं द्वारा दुष्कर्म के प्रकरण दर्ज कराए जाते हैंं। 
🚩इन कानूनों का निर्माण महिला उत्थान के लिये किया गया था मगर आज पथभ्रष्ट महिलाएं इसका धड़ल्ले से दुरुपयोग कर रही हैं । सरकार को इन पथभ्रष्ट महिलाओं द्वारा किये जा रहे हर फर्जी केस पर कठोर कार्यवाही करनी चाहिए तथा ऐसी महिलाओं को कठोर से कठोर दंड देने चाहिए जो अपनी स्वार्थपूर्त्ति के लिए किसी के जीवन से खेल रही हैं । 
🚩आपको बता दे कि इस ट्वीटर ट्रेड में ट्वीट के जरिये काफी महिलाएं पोस्को कानून के तहत उम्रकैद काट रहे हिन्दू संत आसाराम बापू को सपोर्ट कर रही थीं।
🚩महिलाओं ने कहा कि हिन्दू #संत #आसारामजी #बापू सदा हर वर्ग, हर प्राणी को ईश्वरीय सुख-शांति, आत्मिक निर्विकारी आनंद पहुँचाने का अथक प्रयास करते रहे हैं । #समाज, संस्कृति और विश्वसेवा के दैवी कार्य में #बापू आसारामजी का योगदान अद्वितीय है । 
🚩बापू #आसारामजी के ओजस्वी जीवन एवं उपदेशों से असंख्य लोगों ने व्यसन, मांस आदि बड़ी सहजता से छोड़कर संयम-सदाचार का रास्ता अपनाया है ।
🚩एक 82 वर्षीय बुजुर्ग #संत, जिन्हें करोड़ों लोगों के जीवन में संयम-सदाचार जागृत करने व उन्हें भगवान के रास्ते चलाने तथा करोड़ों दुःखियों के चेहरों पर मुस्कान लाने का श्रेय जाता है उनको झूठे केस में फसाया गया है अब तो न्याय मिलना ही चाहिए ।
🚩आम जनता के अलावा राष्ट्रहित में क्रांतिकारी पहल करनेवाली सुप्रतिष्ठित हस्तियों, संतों-महापुरुषों एवं समाज के लिए आगे आने वाले  के खिलाफ बलात्कार कानूनों का राष्ट्र एवं संस्कृति विरोधी ताकतों द्वारा कूटनीतिपूर्वक अंधाधुंध इस्तेमाल हो रहा है।
इसमे जो खामियां है उसको दूर करना चाहिए ।
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धर्मशिक्षा के अभाव के कारण बलात्कार के 1.10 लाख मामले दर्ज किए गए

🚩भारत मे अन्य देशों की बलात्कार मामले की बहुत कम संख्या है लेकिन महान भारत देश के लिए एक भी बलात्कार की घटना शर्म की बात है । भारत मे पहले एक भी बलात्कार नही होते थे जबसे मुगल और अंग्रेज आये तब से लेकर आज भी वही सिलसिला है जिसको रोकना जरूरी है ।
🚩जब भी किसी महिला के साथ बलात्कार होता है तो सारे बुद्धिजीवी केंडल मार्च निकालना शुरू कर देते है और मीडिया 24 घण्टो खबरे दिखाने लगती है कि इतने बलात्कार क्यो हो रहे है उसपर कोई ध्यान नही देता, आगे किसी महिला के साथ दुष्कर्म न हो इसपर कोई चर्चा नही करता, कानून के बल पर कुछ अंश में रोक लग सकती है लेकिन पूर्णता रोक लगने के लिए बचपन से ही धर्म की शिक्षा देना जरूरी है । अगर व्यक्ति के अंदर अच्छे संस्कार नही होंगे तो वे अपराध करेगा ही ।
1.10 lakh cases of rape were registered due to lack of education
🚩आज जितने बलात्कार होते है उसके मूल में जाओगे तो आपको मिलेगा की उसके जीवन मे धर्म की शिक्षा ही नही है ऊपर से टीवी में जो चलचित्र चलते है बॉलीवुड में जो अश्लीलता परोसी जा रही है मीडिया में जो नंगापन दिखाया जा रहा है, इंटरनेट पर पोर्न फिल्म आदि जो दिखाई जाती है उससे प्रेरित होकर ही अधिकतर बलात्कार होते है। अगर टीवी, मीडिया, इंटरनेट और सिनेमाघरों में धर्मिक सिरियल, फिल्मे चलने लग जाये नॉवेल, अख़बारो में धार्मिक लेख और चित्र छपने लगे और बचपन से ही धर्म की शिक्षा दी जाये तो बिना कानून के ही बलात्कार रुक जाएगा ।
🚩अभी हाल ही में केंद्र सरकार ने बताया है कि, 2014 से 2016 के दौरान देशभर में बलात्कार के 1,10,333 मामले दर्ज किए गए । केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने बुधवार को राज्यसभा में यह जानकारी दी । उन्होंने बताया कि 2016 में बलात्कार के 38,947 मामले दर्ज किए गए जबकि 2015 में 34,651 और 2014 में 36,735 मामले दर्ज किए गए थे
🚩उन्होंने बताया कि, 2014 में महिलाओं
के खिलाफ अपराध के 3,39,457 मामले दर्ज किए गए जबकि 2015 में 3,29,243 मामले और 2016 में 3,38,954 मामले दर्ज किए गए ।
स्त्रोत : नवभारत टाइम्स
🚩बलात्कार के मामले जितने दर्ज किये गए है उसमें कुछ तो झूठे मामले होते है जो मनचली लड़कियां पैसे या बदला लेने की भावना से केस दर्ज कराती है और कुछ सज्जन महिलाओं के साथ दुष्कर्म हो भी जाता है फिर भी किसी को बताते नही है ऐसे भी कई केस होंगे जो मामले दर्ज नही करवाये होंगे ।
🚩यदि सख्त कानून से बलात्कार की घटनाओं पर अंकुश सम्भव होता तो नये बलात्कार निरोधक कानून बनने के बाद बलात्कार की शिकायतों (कम्प्लेंट्स) में 35% की वृद्धि नहीं होती । इसके लिए संयम-शिक्षा तथा सच्चे सात्त्विक मूल्यों को पुनर्स्थापित करना होगा । यह कार्य निस्वार्थ रूप से समाज की भलाई में लगे हुए संत-महापुरुष ही कर सकते हैं । भारतीय संस्कृति के आधारभूत सिद्धांत को अपने जीवन में उतारनेवाले स्वामी रामतीर्थ, श्री रमण महर्षि, समर्थ रामदासजी, स्वामी विवेकानंद, साँईं लीलाशाहजी महाराज आदि महापुरुषों ने पूरी दुनियां में भारतीय अध्यात्म-ज्ञान का डंका बजाया । वर्तमान में संत आसारामजी बापू से मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से देश-विदेश में करोड़ों साधक ब्रह्मचर्य का पालन करके जीवन धन्य बना रहे हैं । हजारों बाल-संस्कार केन्द्रों द्वारा देश-विदेश के बालक-बालिकाओं को सुसंस्कारित किया जा रहा है । करोड़ों युवाओं को संयमी और व्यशन मुक्त बनाया । महिलाओं के उत्थान के लिये अनेक कार्य किये और भी अनेक समाजसेवा के कार्य बापू आसारामजी की प्रेरणा से चल रहे हैं ।
🚩केवल कानून और डंडे के जोर से सच्चा सुधार नहीं हो सकता । सच्चे और स्थायी सुधार के लिए बलात्कार जैसे नृशंस अपराधो को रोकने के लिए संयम-शिक्षा पर बल देने की आवश्यकता है । संत आसारामजी बापू द्वारा प्रेरित ‘युवाधन सुरक्षा अभियान’, ‘दिव्य प्रेरणा-प्रकाश ज्ञान प्रतियोगिता’, ‘योग व उच्च संस्कार शिक्षा’, ‘महिला जागृति’, ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’, ‘नशामुक्ति’ जैसे अभियानों को और अधिक व्यापक बनाने की आवश्यकता है । इनके माध्यम से हमारी युवा पीढ़ी को ब्रह्मचर्य, संयम-सदाचार की शिक्षा देकर उन्हें ईमानदार व सच्चा नागरिक बनाया जा रहा है । किंतु हमारे प्रेरणास्रोत, राष्ट— एवं संस्कृति के रक्षक संतों-महापुरुषों पर झूठे आरोप लगवाकर षड्यंत्रपूर्वक उन्हें जेल में बंद करवाना यह दर्शाता है कि कुछ स्वार्थी राष्ट्र विरोधी ताकतें कानून की आड़ लेकर भारतीय संस्कृति को नष्ट करने की बुरी मंशा रखती हैं । संत-महापुरुष ही समाज के प्रहरी हैं  हमें उन पर हो रहे इस आघात को रोकना होगा ।
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क्रांतिकारी गदर पार्टी के किस्से अब अमेरिका में भी पढाए जाएंगे

20 july 2018 
🚩भारत के इतिहास में आज भी लुटेरे अंग्रेजों के किस्से पढाये जाते है और उनकी महिमा मंडन की जा रही है लेकिन जिन क्रांतिकारीयों ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की बलि दे दी उनके किस्से हमे नही पढाये जा रहे है ये बड़े दुर्भाग्यपूर्ण बात है लेकिन अमेरिका में यह निर्णय लिया गया है कि भारत की स्वतंत्रता के लिए योगदान देनेवाली क्रांतिकारी गदर पार्टी के किस्से  पढाए जाएंगे ।
🚩अमेरिका के ऑरेगन स्टेट के विद्यालयों में जल्द ही भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देने वाली गदर पार्टी के बारे में पढने को मिलेगा । क्रांतिकारी समूह गदर पार्टी की स्थापना के 105 साल पूरे होने के मौके पर ऑरेगन के शीर्ष अधिकारियों ने यह घोषणा की ।
Tales of Revolutionary Gadar Party will now be read in the US
🚩ऐतिहासिक शहर एस्टोरिया में कुछ भारतीय-अमेरिकी मूल के परिवार हैं । आधिकारिक रिकॉर्ड्स के अनुसार 1910  में 74 भारतीय पुरुष यहां आए थे । इनमें से ज्यादातर पंजाब के सिख थे, जो वहां मजदूरी करते थे । इन्हीं लोगों को जोडकर इस इलाके में गदर पार्टी की स्थापना की गई थी ।
🚩टिंबर फैक्ट्री में काम करने वाले इन भारतीयों के वंशज रविवार को गदर पार्टी के पहले स्थापना सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इकट्ठे हुए थे । इस सम्मेलन में ऑरेगन के एटॉर्नी जनरल एलेन एफ रोजनब्लम ने गवर्नर केट ब्राउन की मौजूदगी में यह अहम घोषणा की । उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि एस्टोरिया इस खास घटना का एक प्रतीक है । इस के साथ उन्होने घोषणा की कि ऐतिहासिक घटना राज्य के विद्यालयों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनेगी ।
🚩गदर पार्टी की स्थापना
🚩ग़दर पार्टी पराधीन भारत को अंग्रेज़ों से स्वतंत्र कराने के उद्देश्य से बना एक संगठन था। इसे अमेरिका और कनाडा के भारतीयों ने 25 जून1913 में बनाया था। इसे प्रशान्त तट का हिन्दी संघ (Hindi Association of the Pacific Coast) भी कहा जाता था। यह पार्टी “हिन्दुस्तान ग़दर” नाम का पत्र भी निकालती थी जो उर्दू और पंजाबी में छपता था। 
🚩गदर पार्टी ने भारत को अनेक महान क्रांतिकारी दिए। ग़दर पार्टी के महान नेताओं सोहन सिंह भाकना, करतार सिंह सराभा, लाला हरदयाल आदि ने जो कार्य किये उसने भगत सिंह, उधम सिंह जैसे क्रांतिकारियों को उत्प्रेरित किया। पहले महायुद्ध के छिड़ते ही जब भारत के अन्य दल अंग्रेज़ों को सहयोग दे रहे थे गदरियों ने अंग्रेजी राज के विरूध्द जंग घोषित कर दी। उनका मानना था-
सुरा सो पहचानिये, जो लडे दीन के हेत।पुर्जा-पुर्जा कट मरे, कभूं न छाडे खेत॥
🚩‘गदर दी गूंज’ (ग़दर की गूँज) नामक पुस्तक को भारत में सन्  1913 में अंग्रेज़ी सरकार ने प्रतिबन्धित कर दिया था। इसमें राष्ट्रीय एवं सोसलिस्ट साहित्य का संग्रह था।
🚩ग़दर पार्टी का जन्म अमेरिका के सैन फ़्रांसिस्को के एस्टोरिया में 1913 में अंग्रेज़ी साम्राज्य को जड़ से उखाड़ फेंकने के उद्देश्य से हुआ। 
🚩स्थापना के बाद गदर पार्टी की पहली बैठक सैक्रामेंटो, कैलिफ़ोर्निया में दिसम्बर 1913 में आयोजित की गयी। इसमें कार्यकारिणी के सदस्यों की घोषणा भी की गयी। 
🚩गदर पार्टी ने 21 अप्रैल 1913 को ऑस्ट्रेलिया की आरा मिलों में एक बुनियादी प्रस्ताव पास किया जिसके तहत कहा गया कि गदर पार्टी हथियारबंद इंक़लाब की मदद से अंग्रेज़ी राज से भारत को आज़ाद कर गणतंत्र कायम करेंगी। 
🚩गदर पार्टी ने अपना पत्र “हिन्दुस्तान ग़दर” निकाला जिसमें ब्रितानी हकुमत का खुला विरोध किया गया। हिन्दुस्तान ग़दर नामक पत्र हिन्दी, पंजाबी, उर्दू और अन्य भारतीय भाषाओं में छापा जाता था। “युगान्तर आश्रम” ग़दर पार्टी का मुख्यालय था। यहीं से ग़दर पार्टी ने एक पोस्टर छापा था जिसे पंजाब में जगह जगह चिपकाया भी गया था। इस पोस्टर पर लिखा था – “जंग दा होका” अर्थात युद्ध की घोषणा।
*योजना*
🚩ग़दर के नेताओं ने निर्णय लिया कि अब वह समय आ गया है कि हम ब्रितानी सरकार के ख़िलाफ़ उसकी सेना में संगठित विद्रोह कर सकते हैं। क्योंकि तब प्रथम विश्वयुद्ध धीरे-धीरे क़रीब आ रहा था ।
🚩अमेरिका ने तो क्रन्तिकारी गदर पार्टी के किस्से पढ़ाने के निर्णय ले लिया लेकिन भारत मे इसका निर्णय कब लिया जाएगा?, भारत के इतिहास में आक्रमणकारि, लुटेरे, बलात्कारी, क्रूर अंग्रेजों और मुगलों की महिमा मंडन किया जाता है लेकिन वास्तव में जिन्होंने अपनी जवानी ओर प्राण देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान दे दिया उनका इतिहास कब पढ़ाया जाएगा???
🚩असली इतिहास नही पढ़ाया जाने के कारण आज किसी को सही इतिहास पता भी नही है गदर पार्टी के बारे में भी अधिकतर भारतवासीयों को पता नही होगा इसलिए सरकार मुगलो व अंग्रेजो के इतिहास हटाकर क्रांतिकारियों व महापुरुषों के इतिहास पढ़ाना चाहिए ।
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महाराष्ट्र सरकार मंदिरों पर नियंत्रण कर रही है, मस्जिद और चर्च पर नहीं : शिवसेना

19 july 2018 
🚩भारतीय राज्य संविधान के अनुच्छेद 26 (ड) के अनुसार भारतीय जनता को धार्मिक विषयों का व्यवस्थापन संभालने के लिए पूर्णरूप से स्वतंत्र है। ऐसा होते हुए भी लाखों भाविकों की श्रद्धा को ठेस पहुंचाकर सरकार मंदिरों का सरकारीकरण करना चाहती है। 
🚩शिवसेना ने महाराष्ट्र सरकार के कानून के जरिये शनि शिंगणापुर मंदिर पर नियंत्रण करने के निर्णय पर मंगलवार को सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि, उसने (महाराष्ट्र सरकार ने) मस्जिदों और चर्च को छोड दिया है ।
🚩अहमदनगर जिले में स्थित मंदिर पर नियंत्रण के लिए कानून बनाने की सरकार की योजना के विरोध में शिवसेना विधायकों ने महाराष्ट्र विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया । विधायकों का तर्क है कि उस्मानाबाद जिले के प्रसिद्ध तुलजाभवानी मंदिर सहित सरकार द्वारा नियंत्रित मंदिरों में अधिकारियों की ‘लूट’ देखी जा सकती है । प्रकाश सुर्वे, प्रकाश फतरपेकर, सदानंद चव्हाण और भारत गोगवाले सहित अन्य विधायकों ने नारेबाजी की और आरोप लगाया कि सरकार केवल मंदिरों पर नियंत्रण कर रही है और चर्च तथा मस्जिदों को छोड रही है ।
Maharashtra government is controlling temples,
not in mosque and church: Shivsena
🚩गोगवाले ने कहा कि सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि मंदिरों के प्रबंधन में कोई अनियमितता नहीं हो परंतु शनि मंदिर का सरकारीकरण नहीं होना चाहिए । उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की नजर केवल मंदिरों पर है और इस मुद्दे पर उसे अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए । उल्लेखनीय है कि राज्य विधानमंडल का मॉनसून सत्र अभी नागपुर में चल रहा है । 
🚩सरकार केवल मंदिरों के धन पर आंखें गड़ाए राजकीय असंतुष्टों का पुनर्वसन करने हेतु सुव्यवस्थापन के नाम पर केवल हिन्दुओं के ही मंदिर नियंत्रण में ले रही है। पंढरपुर का श्री विठ्ठल मंदिर, मुंबई का श्री सिद्धीविनायक मंदिर, तुळजापुर का श्री भवानी मंदिर, कोल्हापुर का श्री महालक्ष्मी मंदिर, शिर्डी का साईबाबा मंदिर, पश्‍चिम महाराष्ट्र देवस्थान समिति के अंतर्गत कोल्हापुर, सांगली एवं सिंधुदुर्ग जिलों के 3067 मंदिरों का सरकार ने अतिक्रमण किया है। सरकारीकरण हुए इन मंदिरों में प्रचंड मात्रा में आर्थिक अपहार और भ्रष्टाचार हुआ है ।
🚩इसके कुछ उदाहरण . . .
*🚩1.* पश्‍चिम महाराष्ट्र देवस्थान समिति : इस समिति के पास 25 हजार एकड भूमि में से 8 हजार एकड भूमि लापता है देवस्थानों के जेवरात-अलंकारों की कहीं प्रविष्टि नहीं, 25 वर्षों से लेखापरीक्षण नहीं !
*🚩2.* श्री विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर समिति, पंढरपुर :इस मंदिर की 1200 एकड भूमि होते हुए भी गत 25 वर्षों से वह नियंत्रण में नहीं, इसके साथ ही एक रुपये का उत्पन्न भी मंदिर को नहीं मिलता; मंदिर की गोशाला का गोधन कसाईयों को बेच दिया गया !
*🚩3.* श्री भवानी मंदिर, तुळजापुर : इस मंदिर समिति के बडे-बडे घोटालों की सीआयडी जांच चल रही है !
🚩ऐसी ही स्थिति सरकारीकरण हुए अन्य सभी मंदिरों की है। मंदिर में भाविकों द्वारा अर्पित दान का उपयोग धर्मप्रसार हेतु नहीं अपितु मुसलमान एवं ईसाई पंथियों के लिए किया गया है। अंधाधुंद कार्यभार कर मंदिरों में हुए करोडों रुपयों का भ्रष्टाचार उजागर होने पर भी उसे बडी सहजता से अनदेखा कर सरकार ने शिंगणापुर के श्री शनैश्वर देवस्थान के सरकारीकरण का आदेश दिया है। अब मुंबई के श्री मुंबादेवी मंदिर पर भी वक्रदृष्टि पड़ी है !
🚩सरकारीकरण हुए मंदिरों में अपेक्षित पवित्रता नहीं रखी जाती है। अनेक स्थानों पर पूर्व से चली आ रहीं अनेक प्रथा-परंपराओं को तोडा जा रहा है, वंशपरंपरागत पुजारियों को हटाकर धर्मशास्त्र न जाननेवाले वेतन लेनेवाले पुजारियों को नियुक्त करने का प्रयत्न सभी मंदिरों में हो रहा है। सरकारी नियम से नियुक्त किए गए पुजारियों को धार्मिक प्रथा-परंपराओं की कितनी जानकारी है, यह तो भगवान ही जानें ! 
🚩हिन्दू मंदिर, चैतन्य और सात्त्विकता के केंद्र होते हैं। इस सात्त्विकता को टिकाने के लिए मंदिरों की पवित्रता को संजोना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है ! यदि सरकार ऐसी अर्थहीन पद्धति से मंदिरों का कारोबार करेगी, तो ऐसे लोगों पर भगवान कभी प्रसन्न होंगे अथवा उनका कोप होगा, यह अलग से बताने की आवश्यकता नहीं। इसलिए वंशपरंपरागत पुजारी एवं प्रथा-परंपराएं, मंदिरों में कायम रखी जाएं।
🚩स्वयं को धर्मनिरपेक्ष कहलवानेवाला शासन मस्जिदों और चर्च के सरकारीकरण का विचार नहीं करता केवल मंदिरों का ही सरकारीकरण कर रहा है। यह हिन्दू समाज पर किया जानेवाला अन्याय और सामाजिक भेदभाव है।
🚩हिन्दू मन्दिरों पर सरकारी नियंत्रण और मस्जिदों, चर्च को खुली छूट, ये कैसा सेक्युलरवाद ?
🚩सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार सरकार के मंदिर सरकारीकरण का प्रयत्न असंवैधानिक है। इसलिए सरकारीकरण हुए सभी मंदिर सरकार भक्तों के स्वाधीन करे, वंशपरंपरागत पुजारियों की परंपरा कायम रखते हुए मंदिरों में धार्मिक प्रथा-परंपराओं में मनमानी परिवर्तन न करे । 
🚩मंदिर की संपत्ति का उपयोग हिन्दूहित के लिए नहीं किया जाता । इससे हिन्दू आर्थिक दृष्टि से निर्बल बन रहे हैं । हिन्दुआें के धर्मांतरण का यह एक बडा कारण है । मंदिरों का प्रशासन पुनः यदि हिन्दुआें के पास आ गया तो उससे हिन्दुआें में आत्मविश्‍वास जागृत होगा तथा मंदिरों की संपत्ति का उपयोग हिन्दूहित के लिए ही किया जाएगा । इस संपत्ति का उपयोग हिन्दुआें को पारंपरिक शस्त्रविद्या, शिक्षा आदि अनेक विषय की शिक्षा देने के लिए किया जा सकता है । स्तोत्र : हिन्दू जन जागृति समिति
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पादरी का खुलासा : मिशनरियां सदियों से सेवा कि आड़ में कर रहे है गोरखधंधा..

18 july 2018 
🚩ईसाई मिशनरियों के एक के बाद एक चौकाने वाले खुलासे हो रहे है भारत मे मिशनरियों ने किस तरह से सेवा के नाम पे गोरखधंधा की जाल बिछाई गई है वे जानकर आपके भी रोंगटे खड़े हो जायेंगे ।
🚩भूतपूर्व पादरी सोलोमन ने मिशनरियां के कई खुलासे किये है ।
🚩हिन्दू जागरण मंच के झारखंड-बिहार के क्षेत्रीय संगठन मंत्री डॉ. सुमन कुमार ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी पर रघुवर सरकार के स्तर से की जा रही कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि 
🚩सोलोमन ने बताया कि अब जनता के सामने मिशनरियों का वास्तविक चरित्र उजागर हो रहा है।
Disclosure of Pastor: Missionaries have been working
for centuries under the guise of Gorakhandha ..
🚩रांची के मिशनरीज ऑफ चैरिटी में नित्य हो रहे नए खुलासे और बच्चा बेचने, कुंवारी बालिकाओं के प्रसव कराकर अनैतिक कामों को अंजाम देनेवाले मिशनरियों पर प्रहार करते हुए पूर्व पादरी सोलोमन ने कहा कि यह समाज के लिए आंखे खोलनेवाला सच है। उन्होंने कहा कि मिशन के गुप्त एजेंडा पूरे झारखंड को ईसाई लैंड बनाने के षडयंत्र का ही एक हिस्सा नवजात शिशुओं को बेचने का मामला है।
🚩पादरी सोलोमन ने आगे कहा कि इसके गूढ़ रहस्य को सभी को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि रघुवर सरकार के द्वारा उक्त काले कारनामों को समाज के सामने उजागर होने से हम हर्षित है। साथ ही उन्होंने कहा कि कम से कम आजादी के बाद देश भर के सभी मिशन संस्थाओं के पूरी गतिविधियों की गहन पड़ताल करने की अब जरूरत है। 
🚩मदर टेरेसा भी यही धंधा करती थी
🚩सोलोमन ने आगे बताया कि मां के रूप में मदर टेरेसा को रेखांकित किया जाता है लेकिन उनके द्वारा गठित संगठन ने बेहद ही कलंकित कार्य किया है। क्या कोई माँ ऐसा कर सकती है? कहा कि सेवा कि आड़ में सदियों से गोरखधंधा भारत में चलाया जा रहा है। खुद मदर टेरेसा भी सेवा कि आड़ में लोगों का ब्रेनवास करके धर्मांतरण किया करती थीं । 
🚩आगे उन्होंने कहा कि रांची में रोज हो रहे खुलासे से साबित हो ही गया है किस तरह लोगों की आंखों में धूल झोंक कर सेवा के नाम पर समाज को धोखा देने का काम मिशनारियां करती रही हैं। अब जब मामले का उद्भेदन समाज के सामने हो गया है तो फिर ये कहना कि सिस्टर्स निर्दोष हैं ये चोरी और सीनाजोरी को ही चरितार्थ करता है। निश्चित ही इससे वेटिकन पॉप और चर्च की भूमिका पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा होता है। 
🚩कहा गये केंडल मार्च निकालने वाले?
🚩पूर्व पादरी सोलोमन ने बताया कि आज भारत में यदि कहीं कोई साधु संतों, हिन्दू संगठनों पर कोई आरोप लगता तो दिखावे के लोग कैंडल मार्च निकालते हैं। पूरे भारत में हदुओं को बदनाम किया जाता है लेकिन रांची के मिशन संस्था द्वारा बेहद घृणित कुकृत्य किए जाने पर कहीं कोई कैंडल मार्च नहीं निकला। देश में कोई शोर नहीं है। यही धार्मिक पक्षपात हमारे साथ होता आया है। 
🚩बच्चा बेचने की घटना का अभी सिर्फ रांची में ही उजागर हुआ है। कहा कि इसकी पूरी संभावना है कि दूसरे राज्यों में भी इस तरह के असामाजिक कार्य किए जाते होंगे। हम सरकार से ये मांग करती है कि मिशन के संस्थाओं पर पैनी निगाह रखी जाए साथ ही इनके सभी गतिविधियों की सीबीआइ जांच की जाए।
🚩आपको बता दे कि इंडोनेशिया के पूर्व ईसाई फादर रॉबर्ट सोलोमन को मिशनरियों ने भारत मे भेजा था धर्मान्तरण कराने लेकिन उनकी भेंट हिन्दू संत आसाराम बापू से हुई उनका प्रवचन सुना उसके बाद उनको ईसाई मिशनरियों से घृणा हो गई और उन्होंने ने ईसाई धर्म त्याग करके हिन्दू धर्म मे आ गये औरर उनका नाम रखा डॉ सुमन कुमार, तब से वे हिन्दू धर्म का प्रचार प्रसार करते है ।
🚩वर्तमान में अब डॉ. सुमन कुमार हिन्दू जागरण मंच के झारखंड-बिहार के क्षेत्रीय संगठन के मंत्री है । 
🚩बता दे कि सोलोमन से बने डॉ सुमन कुमार अब ईसाई मिशनरियों के काले धन्धे को उजागर करते रहते है और जो मिशनरियां भोले भारतवासियों को धर्मपरिवर्तन करवाती है उनको घर वापसी कार्यक्रम करवाते है ।
🚩भारतीय संस्कृति इतनी महान है कि उसकी महानता समझ ले तो वे अन्य धर्म का त्याग करके हिन्दू धर्म अपना लेगा और हमारे साधु-संतों के संपर्क में आ गया तो वे निश्चित ही हमेंशा के लिए हिन्दू धर्म के प्रति समर्पित हो जायेगे इसलिए मिशनरियां मीडिया को भारी फंडिग करके हिन्दू साधु-संतों को बदनाम करवाती है जिससे उनके काले कारनामे आसानी से चलते रहे ।
🚩अब समय आ गया है कि भारतवासी इन षडयंत्र को समझे और अपने धर्मगुरुओं को बदनाम करने वाली मीडिया और उनको फंडिंग करने वाली मिशनरियां का त्याग करें तभी हिन्दू संस्कृति बचेगी ।
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खुलासा : अमेरिकी पुरातत्वविद ने माना कि ताजमहल एक हिंदू भवन है…

17 july 2018 
🚩‘ताजमहल’ वास्तु मुसलमानों की नहीं, अपितु वह मूलतः #हिंदुओं की है । वहां इससे पूर्व #भगवान #शिवजी का मंदिर था यह इतिहास सूर्यप्रकाश के जितना ही स्पष्ट है । मुसलमानों ने इस वास्तु को ताजमहल बनाया । #ताजमहल इससे पूर्व #शिवालय होने का प्रमाण पुरातत्व विभाग के अधिकारी, अन्य पुरातत्वतज्ञ, इतिहास के अभ्यासक तथा देश-विदेश के तज्ञ बताते हैं ।
Revealed: The American archaeologist believed
that the Taj Mahal is a Hindu temple …
🚩भारत के मशहूर इतिहासकार पुरुषोत्तम नागेश ओक ने ताजमहल को हिंदू संरचना साबित किया था। तब मार्क्सवादी इतिहासकारों ने उनका खूब मजाक उड़ाया था। जबकि पीएम ओक की ही परिकल्पना थी कि वह मकबरा नहीं तेजोमहालय नाम का हिंदू स्मारक था। उस समय उन्होंने सबूत के साथ साबित किया था कि इसका निर्माण शहजहां ने नहीं बल्कि जय सिंह ने कराया था।
🚩लेकिन शाहजहां ने उस पर कब्जा कर लिया और फिर उसे मकबरा में बदल दिया था। लेकिन अब अमेरिका के पुरातत्वविद प्रो. मार्विन एच मिल्स ने ताजमहल को हिंदू भवन माना है। उन्होंने अपने शोध पत्र में सबूत के साथ स्थापित किया है। इतिहास में झूठ और फरेब स्थापित करने में लगे नेहरूवादी और मार्क्सवादी इतिहासकारों को इससे चोट पहुंच सकती है।
🚩अब जब ताजमहल को लेकर नए-नए तथ्य उजागर होने लगे हैं तो मुसलमानों ने अपनी मंशा जाहिर कर दी है। तामजमहल को लेकर अपनी धार्मिक बुनियाद मजबूत करने के लिए ही मुसलमानों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर नमाज अदा करने की इजाजत मांगी थी। लेकिन उनकी मंशा को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मांगें खारिज कर दी है।
🚩सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह विश्व धरोहर के साथ ही दुनिया के सात अजूबों में से एक है। इसलिए इसलिए इसे ध्यान में रखने हुए ताजमहल स्थित मस्जिद में नमाज अदा करने की कोई अनुमित नहीं दी जाएगी। नमाज कहीं और भी अदा की जा सकती है।
🚩अमेरिका की कूटनीतिक राजधानी न्यूयॉर्क स्थित प्रैट इंस्टीट्यूट के प्रसिद्ध शिल्पकार तथा प्रोफेसर मार्विन मिल्स ने ताजमहल का विस्तृत अध्ययन किया और उस पर अपना शोध पत्र भी लिखा। ताजमहल पर लिखा उनका शोध पत्र उस समय न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित हुआ था। उनके शोध से ही ताजमहल के बारे में कई नई सूचनाएं और विश्लेषण सामने आए हैं।
🚩वैसे तो भारतीय विद्वान इतिहासकार ओक ने तो पहले ही यह स्थापित कर दिया था कि ताजमहल शाहजहां का बनवाया मकबरा नहीं बल्कि हिंदू राजा जय सिंह द्वारा बनाया गया तेजोमहल था। लेकिन मिल्स के इस शोध पत्र ने उनकी परिकल्पना पर मोहर लगा दी है।
🚩मिल्स ने अपने शोध पत्र में जोर देते हुए कहा है कि शुरू में ताजमहल एक हिंदू स्मारक था जिसे बाद में मुगलों ने कब्जा कर उसे मकबरे में बदल दिया। उन्होंने अपने शोधपत्र में ताजमहल से जुड़े ऐसे-ऐसे ऐतिहासिक साक्ष्य दिए हैं कि कोई उसे झुठला नहीं सकता। ताजमहल की बाईं ओर एक भवन है जो अब मस्जिद है। वह मस्जिद पश्चिमाभिमुख है यानि उसका मुख पश्चिम की ओर है। सवाल उठता है कि अगर उसे मूल रूप से मस्जिद के रूप में बनाया गया होता तो उसका मुख पश्चिम की बजाय मक्का की ओर होता। जबकि यह मस्जिद पश्चिमोन्मुख है।
🚩इसकी मीनारें भी बताती हैं कि यह मस्जिद का नहीं बल्कि हिंदू स्मारक की प्रतीक हैं। ताज महल के चारों ओर बनाई गई मीनारें भी कब्र या मस्जिद के हिसाब से उपयुक्त नहीं है। तर्क के साथ देखें तो इन चारों मीनारों को मसजिद के आगे होना चाहिए क्योंकि यह जगह नमाजियों के लिए होती हैं। जबकि चारों मीनारें मस्जिद की चारों ओर बनाई गई हैं। जो हिंदू स्मारकों की दृष्टि से बिल्कुल उपयुक्त है।
🚩इस प्रकार उन्होंने अपने शोधपत्र के माध्यम से यह अपील की है कि ताजमहल के उद्भव को जानने के लिए कार्बन -14 और थर्मोल्यूमिनेन्सेंस के माध्यम से असली तारीख तय की जा सकती है। इसके लिए भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग को सरकार से इस कार्य को पूरा कराने का अनुरोध करना चाहिए। ताकि इस विश्व धरोहर की सच्चाई देश और देशवासियों के सामने आ सके।
🚩मिल्स ने कहा है कि वैन एडिसन की किताब ताज महल तथा जियाउद्दीन अहमद देसाई की लिखी किताब द इल्यूमाइंड टॉम्ब में काफी प्रशंसनीय आंकड़े और सूचनाएं हैं। जो इनलोगों ने ताजमहल के उद्भव और विकास के लिए समकालीन स्रोतों के माध्यम से एकत्रित किए थे। इनमें कई फोटो चित्र, इतिहासकारों के विवरण, शाही निर्देशों के साथ-साथ अक्षरों, योजनाओं, उन्नयन और आरेखों का संग्रह शामिल है। लेकिन दोनों इतिहासकारों ने प्यार की परिणति के रूप में ताजमहल के उद्भव की बात को सिरे से खारिज कर दिया है। दोनों इतिहासकारों ने ताजमहल के उद्भव को मुगलकाल का मानने से भी इनकार कर दिया है।
🚩मिल्स ने ताजमहल पर खड़े किए ये सवाल
🚩ताजमहल के दोनों तरफ बने भवनों को गौर से देखिए। कहा जाता है कि इसमें से एक मस्जिद के रूप में कार्य करता है तो दूसरे का अतिथि गृह के रूप में उपयोग किया जाता। जबकि दोनों भवनों की बनावट एक जैसी है। सवाल उठता है कि जो शाहजहां अपनी बीवी के प्रेम में ताजमहल बनवा सकता है क्या वे दो प्रकार के कार्य निष्पादन करने के लिए एक ही प्रकार का भवन बनवाया होगा। दोनों भवनो को भिन्न-भिन्न प्रकार से बनाया जाना चाहिए था?
🚩दूसरा सवाल है कि जब मुगलों ने भारत पर आक्रमण किया था उसी समय देश में तोपें आ गई थी उसके बाद भी आखिर ताजमहल परिसर की दीवारें मध्ययूगीन, तोपखाने पूर्व तथा रक्षात्मक क्यों थीं? सवाल उठता है कि कब्र के लिए सुरक्षात्मक दीवार की आवश्यकता क्यों? (जबकि किसी राजमहल के लिए ऐसा होना अनिवार्य होता है )
🚩तीसरा सवाल है कि आखिर ताजमहल के उत्तर दिशा में टेरेस के नीचे 20 कमरे यमुना की तरफ करके क्यों बनाए गए? किसी कब्र को 20 कमरे कि क्या जरूरत है? जबकि राजमहल की बात अलग है क्योंकि कमरे का अच्छा उपयोग हो सकता था।
🚩चौथा सवाल है कि ताजमहल के दक्षिण दिशा में बने 20 कमरों को आखिर सील कर क्यों रखा गया है। आखिर विद्वानों को वहां प्रवेश क्यों नहीं है ? विद्वानों को अंदर जाकर वहां रखी चीजों का अध्ययन करने की इजाजत क्यों नहीं दी जाती है?
🚩पांचवां और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आखिर यहां जो मस्जिद है वह मक्का की तरफ नहीं होकर पश्चिम की ओर क्यों है ? अगर यह सातवीं शताब्दी की बात होती तो इसमें कोई परेशानी नहीं थी।
🚩छठा सवाल उठता है कि आखिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने ताजमहल की वास्तविक तारीख तय करने के लिए कार्बन -14 या थर्मो-लुमिनिस्कनेस के उपयोग को ब्लॉक क्यों कर रखा है? अगर इसकी इजाजत दे दी जाती है तो ताजमहल के उद्भव को लेकर उठने वाले विवाद तुरंत शांत होंगे क्योंकि इस विधि से आसानी से पता लगाया जा सकता है कि ताजमहल कब बना था? लेकिन न तो इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण तैयार है न ही भारत सरकार। स्त्रोत : दैनिक भारत
🚩भारत के मंदिर में स्थित शिवलिंग को ‘तेजोलिंग’ एवं मंदिर को तेजोमहालय कहा जाता था । ताजमहल #भगवान शिव का मंदिर #अग्रेश्वर नाम से प्रसिद्ध था । इससे ही इस नगर को आगरा नाम पड़ा । मुंज बटेश्वर आदेश के अनुसार यह मंदिर 848 वर्ष पुराना है । 
🚩मुसलमान आक्रमणकारियों की दैनिकी में (डायरी) भी उन्होंने कहा है कि #ताजमहल #हिंदुओं की वास्तु है । तब भी मुसलमान इस वास्तु पर अपना अधिकार जताते हैं । #शिवालय के विषय में #सरकार के पास सैकडों प्रमाण धूल खाते पड़े हैं । #सरकार इस पर कुछ नहीं करेगी । इसलिए अब अपनी हथियाई गई वास्तु वापस प्राप्त करने हेतु यथाशक्ति प्रयास करना ही #हिंदुओं का धर्म व कर्तव्य है । ऐसी वास्तुएं वापस प्राप्त करने हेतु एवं हिंदुओं की वास्तुओं की रक्षा के लिए ‘हिंदु राष्ट्र’ अनिवार्य है ।
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जॉनसन के प्रोडक्ट का उपयोग करते हैं तो हो जाइये सावधान, पढ़ ले रिपोर्ट

15 july 2018 
🚩अधिकतर लोग ये सोचते है कि मार्केट में बच्चों के लिए जो प्रोडक्ट आते है। उनसे सेफ शायद कुछ नहीं हो सकता है। वह हमारी स्किन के लिए बिल्कुल परफेक्ट होते है। माना जाता है कि बच्चों के प्रोडक्ट्स में दूध का इस्तेमाल किया जाता है। जिससे कि उनकी स्किन सॉफ्ट बनी रहें लेकिन आप ये बात नहीं जानते है कि इससे भी साइड इफेक्ट होते है और ऐसे साइड इफेक्ट जिससे कि आपकी जान भी जा सकती है। 
If Johnson uses the product then be careful, read the report
🚩भारत समेत कई देशों में बच्चों के लिए ज्यादातर लोग जॉनसन एंड जॉनसन के प्रोडक्ट का इस्तेमाल करते आ रहे हैं। लेकिन अमेरिका में कुछ महिलाओं में जॉनसन एंड जॉनसन बेबी पाउडर की वजह से ओवेरियन (गर्भाशय) कैंसर के लक्षण मिले हैं। पिछले दिनों अमेरिका की एक कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान महिलाओं ने कहा कि उन्हें जॉनसन एंड जॉनसन के बेबी पाउडर में मौजूद अस्बस्ट्स की वजह से ओवेरियन कैंसर हुआ।
🚩1970 से पाउडर में मौजूद है अबस्टस
🚩कोर्ट में केस करने वाली महिलाओं का कहना है कि बेबी पाउडर में अबस्टस की मौजूदगी साल 1970 से प्रमाणित है इसके बावजूद कंपनी ने ग्राहकों को न तो इसके बारे में जानकारी दी है और न ही इससे होने वाले खतरों से आगाह किया है।
🚩कोर्ट ने दिया मुआबजा देने का आदेश
🚩दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद कोर्ट इस नतीजे पर पहुंचा है कि महिलाओं को कैंसर बेबी पाउडर के कारण ही हुआ है। पीड़ित महिलाओं की बात सुनने के बाद कोर्ट ने कंपनी को मुआबजा देने का आदेश जारी किया है। कोर्ट ने 22 पीड़ित महिलाओं को 4.69 अरब डॉलर के मुआबजे आदेश जारी किया है। कोर्ट के आदेश के बाद जहां 
550 मिलियन डॉलर हर्जाने के रूप में देने के आदेश हुए, वहीं 4.14 बिलियन डॉलर का कंपनी पर दंड लगाया है।
🚩9000 केस लड़ रही हैं कंपनी
🚩जॉनसन एंड जॉनसन के खिलाफ अमेरिका में यह कोई पहला केस नहीं है। प्रोडक्ट के कारण कई बीमारियां सामने आने के बाद जॉनसन एंड जॉनसन कई देशों में लगभग 9000 से ज्यादा केस लड़ रही है। पहले भी अरबो रुपये का जुर्माना भरना पड़ा है ।
🚩यदि आप अपने नवजात शिशु या बच्‍चे के शरीर पर जॉनसन एंड जॉनसन का पॉवडर या बेबी ऑयल या कोई अन्‍य उत्‍पाद इस्‍तेमाल कर रहे हैं, तो सावधान हो जायें। इसमें इथाइल ऑक्‍साइड हो सकता है। यही कारण है कि महाराष्‍ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्‍ट्रेशन (एफडीए) ने मुंबई में मुलुंड स्थित कंपनी के प्‍लांट का लाइसेंस निलंबित कर दिया था।
🚩यह खबर न्‍यू इंडियन एक्‍सप्रेस में प्रकाशित हुई थी, खबर के अनुसार यह आदेश 2007 में जारी किया गया था जब जॉनसन एंड जॉनसन के उत्‍पादों में कार्सिनोजेनिक तत्‍व पाये गये थे। बाद में पता चला कि ऐसे तत्‍व टेलकम पॉवडर को इथाइल ऑक्‍साइड से स्‍टरलाइज किये जाने पर पैदा हुए और ये तत्‍व त्‍वचा के लिये हानिकारक होते हैं।
🚩एफडीए ज्‍वाइंट कमिशनर (ड्रग्‍स) ने इस संबंध में अखबार से कहा है कि कंपनी के उत्‍पादों में जरूरत से अधिक इथईलीन ऑक्‍साइड पाया गया, जिससे कैंसर तक हो सकता है। इथईलीन ऑक्‍साइड का इस्‍तेमाल टेलकम पॉवडर बनाने में किया जाता है। लेकिन पाउडर में यह तत्‍व नहीं पाया जाना चाहिये। चूंकि ये पॉवडर नवजात बच्‍चों के लिये होता है इसलिये हमने लाइसेंस कैंसल कर दिया।
🚩आपको बता दे कि नमी को अवशोषित और सुधार लाने के लिए पाउडर का विभिन्न कॉस्मेटिक उत्पादों में इस्तेमाल किया जाता है। पाउडर स्वाभाविक रूप से खनिज है और मैग्नीशियम, सिलिकॉन, ऑक्सीजन और हाइड्रोजन से बना होता है। कई अध्ययनों के अनुसार, प्रिनेअल एरिया (perineal area) में पाउडर लगाने से गर्भाशय का कैंसर हो सकता है। जर्नल कैंसर में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, पाउडर कैंसरकारी तत्व (carcinogen) की तरह होता है, जिससे गर्भाशय का कैंसर हो सकता है। पाउडर का अत्यधिक इस्तेमाल एंडोमेट्रियल कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है।
🚩पाउडर से केवल कैंसर का ही खतरा नहीं होता है बल्कि इससे विशेषकर बच्चों को सांस की बीमारियों का भी खतरा हो सकता है। निमोनिया इन बीमारियों में से एक है।
🚩मालिस तेल में मिट्टी का तेल
🚩बहुत सी माताएं बहनें अपने नवजात शिशुओ छोटे बच्चों की मालिश जॉन्सन बेबी तेल से करती है। गाँव में रहने वाली बहनें एवं शहरी पढ़ी लिखी माताएं भी इस तेल के जाल में भ्रमित हैं। टीवी पर प्रचार की वजह से ये तेल लोगो के दिमाग में छा गया है। अधिकांश पढ़े लिखे लोग भी ये विश्वास नहीं करेंगे की इस जॉन्सन बेबी तेल में सिर्फ मिट्टी का तेल है। जी हाँ केरोसिन घासलेट । यकीन नहीं होता तो सीसी पर कम्पोजीशन पढ़िएगा। उसमे लिखा है की mineral oil ,vitamin E बस और कुछ नहीं। दाम देखिये दो सौ रुपये में दो सौ मिली लीटर। यानि हजार रुपये लीटर। माँ बहने इस तेल से मालिश करने में गर्व महसूस करती है क्योंकि प्रचार के बल पर ब्रेन वाश कर दिया है विदेशी कम्पनी ने। 
🚩विदेशी कम्पनियों ने टीवी में विज्ञापन देकर जनता को लुभाती है और पढ़े लिखे लोग भी मूर्ख बन जाते है और उनकी प्रोडक्ट खरीद के उपयोग करते है जो आपके स्वास्थ्य और पैसे की बर्बादी करता है अतः सावधान रहें और आज से ही स्वदेशी प्रोडक्ट का इस्तेमाल करके सुखी, स्वस्थ्य रहे ।
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