rashtra bhasha

संसार की उन्नत भाषाओं में हिंदी सबसे अधिक व्यवस्थित भाषा है

14 सितम्बर : #राष्ट्रभाषा दिवस
🚩 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत की #राजभाषा होगी। सरकारी काम काज #हिंदी भाषा# में ही होगा ।

🚩इसी महत्वपूर्ण निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिये #राष्ट्रभाषा #प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर #सन् 1953 से संपूर्ण भारत में 14 सितंबर को प्रतिवर्ष #हिन्दी-दिवस #के रूप में मनाया जाता है।

rashtra bhasha hindi

 

🚩 #लॉर्ड मैकाले ने कहा था : ‘मैं यहाँ# (भारत) की शिक्षा-पद्धति में ऐसे कुछ #संस्कार #डाल जाता हूँ कि आनेवाले वर्षों में भारतवासी अपनी ही संस्कृति से घृणा करेंगे… #मंदिर# में जाना पसंद नहीं करेंगे… माता-पिता को प्रणाम करने में तौहीन महसूस करेंगे… वे #शरीर से तो #भारतीय होंगे लेकिन दिलोदिमाग से हमारे ही #गुलाम होंगे..!
🚩अंग्रेजी भाषा के #मूल शब्द लगभग 10,000 हैं, जबकि हिन्दी के मूल# शब्दों की संख्या 2,50,000 से भी अधिक है। #संसार की #उन्नत भाषाओं में हिंदी सबसे अधिक व्यवस्थित #भाषा है।
🚩#हिंदी दुनिया की सबसे #अधिक# बोली जाने वाली भाषा है । लेकिन अभी तक हम इसे संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा नहीं बना पाएं ।
🚩हिंदी दुनिया की #सर्वाधिक तीव्रता से प्रसारित हो रही भाषाओं में से #एक है । वह सच्चे अर्थों में #विश्व भाषा बनने की #पूर्ण अधिकारी है । हिंदी का #शब्दकोष बहुत विशाल #है और एक-एक भाव को व्यक्त करने के लिए सैकड़ों #शब्द हैं जो अंग्रेजी भाषा में नही है ।
🚩हिन्दी लिखने के लिये प्रयुक्त #देवनागरी लिपि #अत्यन्त वैज्ञानिक है । हिन्दी को #संस्कृत शब्दसंपदा एवं नवीन #शब्द-रचना-सामर्थ्य विरासत में मिली है।
🚩आज उन# मैकाले की वजह से ही हमने अपनी मानसिक गुलामी बना ली है कि अंग्रेजी के बिना हमारा काम चल नहीं सकता । हमें हिंदी भाषा का महत्व समझकर उपयोग करना चाहिए ।
🚩#मदन मोहन मालवीयजी ने 1898 में सर एंटोनी #मैकडोनेल के सम्मुख हिंदी भाषा की प्रमुखता को बताते हुए, कचहरियों में हिन्दी भाषा को प्रवेश दिलाया ।
🚩#लोकमान्य तिलकजी #ने हिन्दी भाषा को खूब प्रोत्साहित किया ।
वे कहते थे : ‘‘ अंग्रेजी शिक्षा देने के लिए बच्चों को सात-आठ वर्ष तक अंग्रेजी पढ़नी पड़ती है । जीवन के ये आठ वर्ष कम नहीं होते । ऐसी स्थिति विश्व के किसी और देश में नहीं है । ऐसी #शिक्षा-प्रणाली किसी भी #सभ्य देश में नहीं पायी जाती ।’’
🚩जिस प्रकार बूँद-बूँद से घड़ा भरता है, उसी प्रकार #समाज में कोई भी बड़ा परिवर्तन लाना हो #तो किसी-न-किसीको तो पहला कदम उठाना ही पड़ता है और फिर धीरे-धीरे एक कारवा बन जाता है व उसके पीछे-पीछे पूरा #समाज चल पड़ता है ।
🚩हमें भी अपनी राष्ट्रभाषा को उसका खोया हुआ# सम्मान और गौरव# दिलाने के लिए व्यक्तिगत स्तर से पहल चालू करनी चाहिए ।
🚩एक-एक मति के मेल से ही बहुमति और फिर सर्वजनमति बनती है । हमें अपने #दैनिक जीवन# में से अंग्रेजी को तिलांजलि देकर विशुद्ध रूप से मातृभाषा अथवा #हिन्दी का प्रयोग# करना चाहिए ।
🚩#राष्ट्रीय अभियानों, राष्ट्रीय नीतियों व अंतराष्ट्रीय आदान-प्रदान हेतु अंग्रेजी नहीं #राष्ट्रभाषा हिन्दी ही साधन# बननी चाहिए ।
🚩 जब कमाल पाशा #अरब देश में तुर्की भाषा को लागू करने के लिए अधिकारियों की कुछ दिन की मोहलत  ठुकराकर रातोंरात परिवर्तन कर सकते हैं तो हमारे लिए क्या यह असम्भव है  ?
🚩आज सारे संसार की आशादृष्टि भारत पर टिकी है । हिन्दी की संस्कृति केवल देशीय नहीं सार्वलौकिक है क्योंकि #अनेक राष्ट्र ऐसे हैं जिनकी भाषा हिन्दी के उतनी करीब है जितनी भारत के अनेक राज्यों की भी नहीं है । इसलिए हिन्दी की संस्कृति को #विश्व को अपना #अंशदान करना है ।
🚩#राष्ट्रभाषा राष्ट्र का गौरव है# । इसे अपनाना और इसकी अभिवृद्धि करना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है । यह राष्ट्र की एकता और अखंडता की नींव है । आओ, इसे सुदृढ़ बनाकर राष्ट्ररूपी भवन की सुरक्षा करें ।
🚩स्वभाषा की महत्ता बताते हुए हिन्दू #संत आसारामजी बापू कहते हैं : ‘‘मैं तो जापानियों को #धन्यवाद दूँगा । वे अमेरिका में जाते हैं तो वहाँ भी अपनी मातृभाषा में ही बातें करते हैं । …और हम भारतवासी !# भारत में रहते हैं फिर भी अपनी हिन्दी, गुजराती, मराठी आदि भाषाओं में अंग्रेजी के शब्द बोलने लगते हैं । आदत जो पड़ गयी है ! आजादी मिले 70 वर्ष से भी अधिक समय हो गया, बाहरी गुलामी की जंजीर तो छूटी लेकिन भीतरी गुलामी, दिमागी गुलामी अभी तक नहीं गयी ।’’
(लोक कल्याण सेतु : नवम्बर 2012)
🚩#अंग्रेजी भाषा के #दुष्परिणाम
🚩#विदेशी शासन #के अनेक दोषों में देश के नौजवानों पर डाला गया #विदेशी भाषा के #माध्यम का घातक बोझ इतिहास में एक सबसे बड़ा दोष माना जायेगा। इस माध्यम ने राष्ट्र की शक्ति हर ली है, विद्यार्थियों की आयु घटा दी है, उन्हें आम जनता से दूर कर दिया है और शिक्षण को बिना कारण खर्चीला बना दिया है। अगर यह प्रक्रिया अब भी जारी रही तो वह राष्ट्र की आत्मा को नष्ट कर देगी। इसलिए शिक्षित भारतीय जितनी जल्दी विदेशी माध्यम के भयंकर वशीकरण से बाहर निकल जायें उतना ही उनका और #जनता का लाभ होगा।
🚩अपनी मातृभाषा की गरिमा को पहचानें । अपने बच्चों को अंग्रेजी#(कन्वेंट स्कूलो) में शिक्षा दिलाकर उनके विकास को# अवरुद्ध न करें । उन्हें मातृभाषा(गुरुकुलों) में पढ़ने की स्वतंत्रता देकर उनके चहुमुखी #विकास में सहभागी बनें ।
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सावधान : विधर्मियों के द्वारा हिन्दुओं को आपस में बाँटने की साजिश को नाकाम करना होगा

सावधान : विधर्मियों के द्वारा हिन्दुओं को आपस में बाँटने की साजिश को नाकाम करना होगा
🚩सनातन धर्म के संतों ने जब-जब व्यापकरूप से समाज को जगाने का प्रयास किया है, तब-तब उनको #विधर्मी #ताकतों के द्वारा #बदनाम करने के लिए षड्यंत्र किये गये हैं, जिनमें वे कभी-कभी हिन्दू संतों को भी मोहरा बनाकर #हिन्दू संतों के खिलाफ #दुष्प्रचार करने में सफल हो जाते हैं । यह हिन्दुओं की दुर्बलता है कि वे विधर्मियों के चक्कर में आकर अपने ही संतों की निंदा सुनकर विधर्मियों की हाँ में हाँ करने लग जाते हैं और उनकी हिन्दू धर्म को नष्ट करने की गहरी साजिश को समझ नहीं पाते । इसे हिन्दुओं का भोलापन भी कह सकते हैं । कुछ तो इतने भोले हैं कि जब किसी बड़े संत पर षड्यंत्रकारी आरोप लगाते हैं तो खुश होते हैं कि ‘अब हम बड़े हो जायेंगे’ और वे नं. 1 बनने की कवायद करने लग जाते हैं । उनको पता नहीं कि वे भी आगे चलकर षड्यंत्रकारियों के शिकार होंगे । ऐसे लोग भी विधर्मियों के षड्यंत्रों से अपनी संस्कृति की रक्षा करने के बदले उनके पिट्ठू बन जाते हैं ।
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🚩स्वामी #विवेकानंदजी जब अमेरिका में #सनातन धर्म की #महिमा गाकर #भारत का #गौरव बढ़ा रहे थे तब वहाँ कुछ हिन्दुओं ने ही उनकी निंदा करना, कुप्रचार करनेवालों को सहयोग देना शुरू कर दिया, जिनमें मुख्य थे वीरचंद गांधी और प्रतापचन्द्र मजूमदार । प्रतापचन्द्र मजूमदार ईसाई मिशनरियों की कठपुतली बन गया । ‘विवेकानंदजी एक विषयलम्पट साधु, विलासी युवान और हमेशा जवान लड़कियों के बीच रहनेवाला चरित्रहीन पुरुष है’ – ऐसा अमेरिका के प्रसिद्ध अखबारों में लिखने लगा । इन दुष्प्रचारकों ने विवेकानंदजी के भक्त की नौकरानी का विवेकानंदजी के द्वारा यौन-शोषण किया गया ऐसी #मनगढ़ंत कहानी भी छाप दी । जिस भवन में स्वामी विवेकानंदजी का प्रवचन होता उसके सामने वे लोग एक अर्धनग्न लड़की के साथ विवेकानंदजी के फोटो के पोस्टर भी लगा देते थे । फिर भी स्वामी विवेकानंदजी के अमेरिकन भक्तों की श्रद्धा वे हिला न सके । तब #प्रतापचन्द्र मजूमदार भारत आया और उनकी #निंदा करने लगा । विवेकानंदजी पर ठगी, अनेक स्त्रियों का चरित्रभंग करने के आरोप लगाने लगा । ‘स्वामी विवेकानंदजी भारत के सनातन धर्म के किसी भी मत के साधु ही नहीं हैं’ – ऐसा दुष्प्रचार करने लगा ।
🚩विधर्मियों द्वारा षड़्यंत्रों के तहत लगवाये गये ऐसे अनेक आरोपों को झेलते हुए भी स्वामी #विवेकानंदजी #सनातन धर्म का प्रचार करते रहे । उन्हें आज समस्त #विश्व के लोग एक महापुरुष के रूप में आदर से देखते हैं लेकिन मजूमदार किस नरक में सड़ता होगा हमें पता नहीं ।
🚩आरोप लगनेमात्र से यदि महात्मा कलंकित हो जाते तो वर्तमानकालीन शंकराचार्य श्री जयेन्द्र सरस्वतीजी, कृपालुजी महाराज, स्वामी केशवानंदजी आदि तथा पूर्वकालीन संत जैसे स्वामी विवेकानंदजी, नरसिंह मेहता, संत एकनाथजी आदि पर भी कई दुष्टों ने आरोप लगाये थे । आरोप लगानेवालों ने तो भगवान को भी नहीं बख्शा था । भगवान श्रीकृष्ण पर भी स्यमंतक मणि चुराने का आरोप और अन्य कई प्रकार के आरोप लगाये गये थे । भगवान श्रीरामचन्द्रजी पर भी आरोप लगा था कि बालि को उन्होंने युद्धधर्म की नीति का उल्लंघन करके मारा था और महान पतिव्रता नारी सीता देवी पर भी एक धोबी ने चरित्रभ्रष्ट होने का आरोप लगाया था । इससे क्या उनकी भगवत्ता कलंकित हो गयी ? महात्मा बुद्ध पर भी तत्कालीन दुष्ट अधर्मियों ने आरोप लगाये थे तो क्या इससे उनकी महानता कलंकित हो गयी ?
🚩#जीवन्मुक्त #महापुरुषों के व्यवहार में #भिन्नता होने पर भी वे सब #ज्ञाननिष्ठा में पूर्ण होते हैं । वेदव्यासजी के पुत्र शुकदेवजी बड़े त्यागी थे लेकिन उनको ज्ञान लेने के लिए गृहस्थी महापुरुष राजा जनक के पास जाना पड़ा । #रामकृष्ण परमहंस त्यागी परमहंस थे लेकिन उनके शिष्य #विवेकानंदजी देश-विदेश में #धर्म-प्रचार के लिए भ्रमण करते थे, पुरुष और स्त्री दोनों को शिक्षा-दीक्षा देते थे इसलिए वे महान संत नहीं थे यह कहना उचित नहीं है । राजा जनक, महात्मा बुद्ध, आद्य शंकराचार्यजी आदि अनेक संतों-महापुरुषों ने स्त्रियों के उद्धार के द्वारा समाज का उद्धार करने के लिए स्त्रियों को शिक्षा-दीक्षा दी ।
🚩कुछ संकीर्ण मानसिकता से ग्रस्त नासमझ लोग शास्त्रों का गलत अर्थघटन करके समाज में भ्रांतियाँ फैलाते हैं कि ‘स्त्री का गुरु तो पति ही है, अतः अन्य गुरु का निषेध अपने-आप हो जाता है ।’ उन लोगों को शास्त्र के दृष्टांतों से ही बता सकते हैं कि उनकी मान्यता गलत है । #भगवान शंकर ने अपनी पत्नी #पार्वती को #वामदेव ऋषि से दीक्षा दिलायी थी । शबरी के गुरु उसके पति नहीं थे, भगवान श्रीराम भी नहीं थे, एक महापुरुष #मतंग ऋषि शबरी के गुरु थे । #मीराबाई के गुरु उनके पति नहीं थे, भगवान कृष्ण को भी मीरा ने गुरु नहीं बनाया, संत #रैदासजी को गुरु बनाया । सहजोबाई ने पति को गुरु नहीं बनाया, संत चरनदासजी को गुरु बनाया और वे कहती हैं :
🚩राम तजूँ पै गुरु न बिसारुँ ।गुरु के सम हरि कूँ न निहारुँ ।।
🚩कुछ तथाकथित निगुरे लेखक शास्त्रों का मनमाना अर्थ लगाकर लोगों को यहाँ तक कह डालते हैं कि श्रीकृष्ण या शिवजी को ही गुरु मान लो । भगवान श्रीकृष्ण ने ऐसा नहीं कहा कि उनको ही गुरु बना लो । जीवित महापुरुष सांदीपनि मुनि को गुरु बनानेवाले श्रीकृष्ण गीता के चौथे अध्याय के 34वें श्लोक में कहते हैं :
🚩तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया ।
उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः ।।
🚩‘उस ज्ञान को तू तत्त्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर समझ । उनको भलीभाँति दण्डवत् प्रणाम करने से, उनकी सेवा करने से और कपट छोड़कर सरलतापूर्वक प्रश्न करने से वे परमात्म-तत्त्व को भलीभाँति जाननेवाले ज्ञानी महात्मा तुझे उस तत्त्वज्ञान का उपदेश करेंगे ।’
🚩वैदिक साहित्य के उपनिषद्, गीता या अन्य किसी भी ग्रंथ में निगुरे रहने का उपदेश नहीं दिया गया । श्रुति कहती है :
🚩तद्विज्ञानार्थं स गुरुमेवाभिगच्छेत् समित्पाणिः श्रोत्रियं ब्रह्मनिष्ठम् ।
🚩‘उस जिज्ञासु को परमात्मा का वास्तविक तत्त्वज्ञान प्राप्त करने के लिए हाथ में समिधा लेकर श्रद्धा और विनय भाव के सहित ऐसे सद्गुरु की शरण में जाना चाहिए जो वेदों के रहस्य को भलीभाँति जानते हों और परब्रह्म-परमात्मा में स्थित हों ।’          (मुण्डकोपनिषद् : 1.2.12)
🚩ऐसी सनातन धर्म की दिव्य परम्परा को नष्ट करने का स्वप्न देखनेवाले लोगों से सावधान होना बहुत जरूरी है ।
🚩भगवान #विट्ठल ने अपने भक्त #नामदेव के लिए स्वयं गुरु न बनकर उन्हें ब्रह्मनिष्ठ महापुरुष विसोबा खेचर से दीक्षा लेने को कहा था । यही नहीं स्वयं आद्यशक्ति माँ काली ने $रामकृष्ण परमहंसजी को स्वयं दीक्षा न देकर उन्हें गुरु #तोतापुरीजी की शरण में जाने को कहा था । और तो और, स्वयं भगवान श्रीराम व श्रीकृष्ण ने भी गुरु बनाये थे ।
🚩अतः भ्रांतियाँ फैलानेवालों को कुछ बोलने या लिखने से पहले सोचना चाहिए । अपनी अल्पबुद्धि का परिचय नहीं देना चाहिए । डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी जैसे तटस्थ न्यायविदों ने जो बात कही है कि #‘‘संत आसाराम जी बापू के #खिलाफ किया गया #केस पूरी तरह #बोगस है ।’’ और यह भी कहा कि ‘‘हिन्दू-विरोधी एवं #राष्ट्रविरोधी ताकतों के गहरे #षड्यंत्रों को और हिन्दू संतों को बदनाम करने के उनके (विधर्मियों के) गुप्त हथकंडों को सीधे व भोले-भाले हिन्दू नहीं देख पा रहे हैं ।’’ इन बातों की कद्र करके अपनी हिन्दू संस्कृति की रक्षा करनी चाहिए । एक ईसाई या मौलवी से कोई गलत काम हो जाता है, न्यायालय में सिद्ध भी हो जाता है तो भी दूसरा ईसाई या मौलवी उसको दोषी नहीं कहता क्योंकि अपने धर्म का है । हिन्दू संस्कृति ये नहीं कहती कि तुम दोषी को दोषी न कहो लेकिन इतना जरूर कहती है कि निर्दोष पर दोषारोपण करने के पहले सच्चाई जानने का प्रयास तो करो । हिन्दू संस्कृति के दुश्मन, हिन्दुत्व के लिए पूरा जीवन अर्पण करनेवाले किसी संत को षड्यंत्र करके फँसाने का प्रयास करते हैं और दूसरे कुछ हिन्दू, जो अपने को हिन्दुत्व के रक्षक मानते हैं, बिना सत्य की गहराई में गये उन संत पर टिप्पणी करने लगते हैं यह कितने खेद की बात है !
🚩डॉ. डेविड फ्रॉली कहते हैं : ‘‘भारत को अपने लक्ष्य तक पहुँचना है और वह लक्ष्य है अपनी #आध्यात्मिक संस्कृति का #पुनरुद्धार । इसमें न केवल भारत का अपितु मानवता का कल्याण निहित है । यह तभी सम्भव है जब भारत के बुद्धिजीवी आधुनिकता का मोह त्यागकर अपने धर्म और अध्यात्म की कटु आलोचना से विरत होंगे ।’’         (पृष्ठ 14, ‘उत्तिष्ठ कौन्तेय’)
🚩अतः सावधान रहने की आवश्यकता है । #विधर्मियों के #हिन्दुओं को आपस में #बाँटने की #साजिश को समझना चाहिए । – वरिष्ठ पत्रकार श्री अरुण रामतीर्थकर
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parshuram

देश को आज परशुराम की ही जरूरत है !!

09-Sep-2017
शक्तिधर #परशुराम का चरित्र एक ओर जहाँ शक्ति के केन्द्र सत्ताधीशों को #त्यागपूर्ण आचरण की #शिक्षा देता है वहीं दूसरी ओर वह शोषित #पीड़ित क्षुब्ध #जनमानस को भी उसकी शक्ति और #सामर्थ्य का एहसास दिलाता है । #शासकीय दमन के विरूद्ध वह क्रान्ति का #शंखनाद है । वह सर्वहारा वर्ग के लिए अपने न्यायोचित अधिकार प्राप्त करने की मूर्तिमंत प्रेरणा है।  वह राजशक्ति पर लोकशक्ति का विजयघोष है।
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आज स्वतंत्र भारत में सैकड़ों-हजारों #सहस्रबाहु देश के कोने-कोने में विविध स्तरों पर #सक्रिय हैं । ये कहीं न कहीं #न्याय का #आडम्बर करते हुए भोली जनता को छल रहे हैं, कहीं उसका श्रम हड़पकर अबाध विलास में ही राजपद की सार्थकता मान रहे हैं, तो कहीं #अपराधी #माफिया गिरोह #खुलेआम #आतंक फैला रहे हैं। तब असुरक्षित जन-सामान्य की रक्षा के लिए आत्म-स्फुरित ऊर्जा से भरपूर व्यक्तियों के निर्माण की बहुत आवश्यकता है । इसकी आदर्श पूर्ति के निमित्त परशुराम जैसे प्रखर व्यक्तित्व विश्व इतिहास में विरल ही हैं।  इस प्रकार परशुराम का चरित्र शासक और शासित-दोनों स्तरों पर प्रासंगिक है ।
शस्त्र शक्ति का विरोध करते हुए #अहिंसा का ढोल चाहे कितना ही क्यों न पीटा जाये, उसकी आवाज सदा ढोल के पोलेपन के समान #खोखली और #सारहीन ही #सिद्ध हुई है । उसमें ठोस यथार्थ की सारगर्भिता कभी नहीं आ सकी। सत्य हिंसा और अहिंसा के संतुलन बिंदु पर ही केन्द्रित है । कोरी अहिंसा और विवेकहीन पाश्विक हिंसा, दोनों ही मानवता के लिए समान रूप से घातक हैं । आज जब हमारे #राष्ट्र की सीमाएं #असुरक्षित हैं, कभी #कारगिल, कभी #कश्मीर, कभी #बंग्लादेश तो कभी देश के अन्दर #नक्सलवादी शक्तियों के कारण हमारी #अस्मिता का #चीरहरण हो रहा है तब परशुराम जैसे वीर और विवेकशील व्यक्तित्व के नेतृत्व की आवश्यकता है ।
गत शताब्दी में कोरी अहिंसा की उपासना करने वाले हमारे नेतृत्व के प्रभाव से हम जरुरत के समय सही कदम उठाने में हिचकते रहे हैं । यदि सही और सार्थक प्रयत्न किया जाये तो देश के अन्दर से ही प्रश्न खड़े होने लगते हैं। परिणाम यह है कि हमारे तथाकथित बुद्धिजीवियों और व्यवस्थापकों की धमनियों का लहू इतना सर्द हो गया है कि देश की जवानी को व्यर्थ में ही कटवाकर भी वे आत्मसंतोष और आत्मश्लाघा का ही अनुभव करते हैं। अपने नौनिहालों की कुर्बानी पर वे गर्व अनुभव करते हैं, उनकी वीरता के गीत तो गाते हैं किन्तु उनके हत्यारों से बदला लेने के लिए उनका खून नहीं खौलता। प्रतिशोध की ज्वाला अपनी #चमक #खो बैठी है । #शौर्य के #अंगार तथाकथित संयम की राख से ढंके हैं । शत्रु-शक्तियां सफलता के उन्माद में सहस्रबाहु की तरह उन्मादित हैं लेकिन परशुराम अनुशासन और संयम के बोझ तले मौन हैं ।
राष्ट्रकवि दिनकर ने सन् #1962 ई. में #चीनी #आक्रमण के समय देश को ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ शीर्षक से ओजस्वी काव्यकृति देकर सही रास्ता चुनने की प्रेरणा दी थी । युग चारण ने अपने दायित्व का सही-सही निर्वाह किया । किन्तु #राजसत्ता की #कुटिल और अंधी #स्वार्थपूर्ण #लालसा ने हमारे तत्कालीन नेतृत्व के बहरे कानों तक उसकी पुकार ही नहीं आने दी । पांच दशक बीत गये । इस बीच एक ओर साहित्य में परशुराम के प्रतीकार्थ को लेकर समय पर प्रेरणाप्रद रचनाएं प्रकाश में आती रही और दूसरी ओर सहस्रबाहु की तरह विलासिता में डूबा हमारा नेतृत्व #राष्ट्र-विरोधी #षड़यंत्रों को देश के भीतर और बाहर दोनों ओर #पनपने का अवसर देता रहा । परशुराम पर केन्द्रित साहित्यिक रचनाओं के संदेश को व्यावहारिक स्तर पर स्वीकार करके हम साधारण जनजीवन और राष्ट्रीय गौरव की रक्षा कर सकते हैं ।
#महापुरूष किसी एक देश, एक युग, एक जाति या एक धर्म के नहीं होते । वे तो सम्पूर्ण मानवता की, समस्त विश्व की, समूचे #राष्ट्र की #विभूति होते हैं । उन्हें किसी भी सीमा में बाँधना ठीक नहीं । दुर्भाग्य से हमारे यहां स्वतंत्रता में महापुरूषों को स्थान, धर्म और जाति की बेड़ियों में जकड़ा गया है । विशेष महापुरूष विशेष वर्ग के द्वारा ही सत्कृत हो रहे हैं । एक समाज विशेष ही विशिष्ट व्यक्तित्व की जयंती मनाता है । अन्य जन उसमें रूचि नहीं दर्शाते,अक्सर ऐसा ही देखा जा रहा है। यह स्थिति दुभाग्यपूर्ण है । महापुरूष चाहे किसी भी देश, जाति, वर्ग, धर्म आदि से संबंधित हो, वह सबके लिए समान रूप से पूज्य है, अनुकरणीय है  ।
इस संदर्भ में भगवान परशुराम जो उपर्युक्त विडंबनापूर्ण स्थिति के चलते केवल ब्राह्मण वर्ग तक सीमित हो गए हैं । समस्त #शोषित वर्ग के लिए प्रेरणा स्रोत #क्रान्तिदूत के रूप में स्वीकार किये जाने योग्य हैं और सभी शक्तिधरों के लिए संयम के अनुकरणीय आदर्श हैं ।
#भा माना -#अध्यात्म
#रत माना – उसमें #रत रहने वाले
“जिस देश के लोग #अध्यात्म में #रत रहते हैं उसका नाम है #भारत।”
#भारत की #गरिमा उसके #संतों से ही रही है सदा । भगवान भी बार-बार जिस धरा पर अवतरित होते आये हैं वो भूमि भारत की भूमि है । किसी भी देश को माँ कहकर संबोधित नहीं किया जाता पर भारत को “भारत माता” कहकर संबोधित किया जाता है क्योंकि यह देश आध्यात्मिक देश है,संतों महापुरुषों का देश है । भौतिकता के साथ-साथ यहाँ आध्यात्मिकता को भी उतना ही महत्व दिया गया है। पर आज के #पाश्चात्य कल्चर की ओर बढ़ते कदम इसकी गरिमा को भूलते चले जा रहे हैं । #संतों महापुरुषों का #महत्व,उनके #आध्यात्मिक स्पन्दन #भूलते जा रहे हैं ।
 संत और समाज में #खाई खोदने में एक #बड़ा वर्ग #सक्रीय है । #मिशनरियां सक्रीय हैं । #मीडिया सक्रीय है । #विदेशी #कम्पनियाँ सक्रीय हैं । विदेशी फण्ड से चलने वाले #NGOs सक्रीय हैं । कई #राजनैतिक दल अपने फायदे के लिए #सक्रीय हैं ।
इतने #सब वर्ग जब एक साथ #सक्रीय होंगे तो किसी के भी प्रति भी गलत धारणाएं #समाज के मन में उत्पन्न करना बहुत ही आसान हो जाता है और यही हो रहा है हमारे संत समाज के साथ ।
पिछले कुछ सालों से एक दौर ही चल पड़ा है हिन्दू संतों को लेकर । हर #संत को सिर्फ #आरोपों के #आधार पर सालों #जेल में #रखा जाता है फिर #विदेशी फण्ड से चलने वाली #मीडिया उनको अच्छे से #बदनाम करके उनकी #छवि समाज के सामने इतनी #धूमिल कर देती है कि समाज उन झूठे आरोपों के पीछे की सच्चाई तक पहुँचने का प्रयास ही नहीं करता ।
पर अब #समाज को #जगना होगा, #संतों के साथ हो रहे #अन्याय को समझने के लिए । अगर अब भी #हिन्दू #मौन दर्शक बनकर देखता रहा तो #हिंदुओं का #भविष्य #खतरे में हैं ।
rape by father in missionary school

मीडिया हिन्दू धर्मगुरुओं पर ही बहस करती रही वहाँ मौलवी और फादर ने कर दिया बलात्कार

मीडिया हिन्दू धर्मगुरुओं पर ही बहस करती रही वहाँ मौलवी और फादर ने कर दिया बलात्कार
अगस्त 6, 2017
मात्र एक वर्ग विशेष पर नजर गड़ाये बैठा खास मीडिया वर्ग ना जाने इन खबरों को क्यों नहीं दिखा रहा है, क्यों भगवा वस्त्र देख अपने सारे कैमरे अचानक ही सब महत्वपूर्ण खबरों पर से हटाकर उधर घूमा देता है ??
पिछले काफी समय से एक ही खबर पर चटखारे ले रहा और जबरन राम नाम को बार बार खींचने की कोशिश कर रहा एक बड़ा वर्ग इस खबर को क्यों नहीं सुर्खियाँ बना रहा है जहाँ गुरु शिष्या के रिश्ते तो कलंकित हुए ही हैं साथ ही एक बड़े भरोसे का भी कत्ल हुआ है जहाँ एक माता पिता ने अपनी बेटी उस हैवान को सौंप दी जिसे वही नहीं बल्कि सभी फादर और मौलवी कहते हैं ।
rape by father in missionary school
अपने नाम के आगे फादर और मौलवी लगाने वाले उस विधर्मी ने गुरु शिष्या के रिश्ते को तार-तार करते हुए अपने ही स्कूल की एक छात्रा का बलात्कार किया है।
ईसाई पादरी का मामला मध्यप्रदेश के रीवा के बड़े और नामी क्रिश्चियन स्कूल ज्योति में ईसाई फादर जार्ज ने 12 वी कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिग छात्रा का बलात्कार किया, और हिन्दू संगठनों ने आवाज उठाई तो भाग गया, पुलिस ने फादर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है । छात्रा को धमकाया भी गया था और पहले भी कई लड़कियों के साथ दुष्कर्म किया था लेकिन डर के कारण बता नही पाती थी ।
यहाँ ये भी ध्यान देने योग्य है कि ईसाईयत के प्रचार के लिए इन्होने स्कूल का नाम ज्योति रखा है जो हिन्दुओं को आकर्षित करने में मदद करता है वहां का माहौल विदेशी रूप में बना कर रखा है और इसका प्रिंसिपल जार्ज चर्च में रहता है ।
दूसरा मामला
मस्जिद में उर्दू की पढाई करने आने वाली नाबालिग बच्ची का मौलवी ने ही बलात्कार कर दिया। पुणे ग्रामीण पुलिस ने मौलवी को गिरफ्तार कर लिया मौलवी पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग का रहने वाला है उसका नाम शाहिद रजा मुनीर है ।
बच्ची राजगुरुनगर के तुरुकवादी गाँव की रहने वाली है, बच्ची को उर्दू सिखाने के लिए मौलवी के पास भेजा था पर मौलवी ने बच्ची का बलात्कार किया ।
बच्ची डर कर घर वापस चली गयी, लेकिन वो छोटी थी तो वो पीड़ा सह नहीं पायी और उसने अपने परिजनों को सब बता दिया ।
कुछ दिन पहले भी 39 महिलाओं का रेप करने वाले मौलवी को गिरफ्तार किया है लेकिन मीडिया केवल हिन्दू धर्म के गुरुओं को ही झूठी कहानियां बनाकर बदनाम कर रही है पर इन सच्ची खबरों पर कोई मीडिया दिखाने के लिए तैयार नही है ।
अगर मीडिया इतनी निष्पक्ष होती तो मौलवी और ईसाई फादर के लिए भी खबरें दिखाती और डिबेट बैठाकर उनके खिलाफ भी बहस करती लेकिन ऐसा नही कर रही है इससे साफ पता चलता है कि मीडिया को बाकि कोई खबरों से लेना देना नही है।
मीडिया का केवल यही उद्देश्य है कि कैसे भी करके भारतीय संस्कृति को खत्म कर दिया जाये इसलिए हिन्दुओं के धर्मगुरुओं को टारगेट किया जा रहा है जिससे उनके ऊपर जो करोड़ो लोगों की आस्था है वो टूट जाये और पश्चिमी संस्कृति को अपना ले ।
और बड़े मजे की बात है कि उस न्यूज को हिन्दू ही देखते हैं और बाद में उन्हीं का मजाक उड़ाते है कि देखो कैसे भक्तों को मूर्ख बनाकर पैसे लूट रहे हैं और लड़कियों के बलात्कार करते हैं, लेकिन वही भोला भाला हिन्दू दूसरी ओर कभी नही सोचता कि आखिर हमारी देश की कई बड़ी बड़ी समस्याएं है, मंहगाई, बेरोजगारी, किसानों की आत्महत्या, राम मंदिर, 370, गौ हत्या आदि आदि पर मीडिया नही दिखाती है और न ही ईसाई पादरी और मौलवियों के खिलाफ दिखाती है । क्यों इतना प्राइम टाइम देकर हिन्दू धर्मगुरुओं पर ही बहस करती है तो आखिर इतने पैसे आते कहाँ से हैं..??
जैसा कि हम बताते ही आये हैं कि मीडिया का अधिकतर फंड वेटिकन सिटी और मुस्लिम देशों से आता है । जिनका उद्देश्य है कि कैसे भी करके हिन्दू संस्कृति को खत्म करें । जिससे वो आसानी से धर्मान्तरण करा सके ।
दूसरा पहलू ये भी है कि राजनेता भी नहीं चाहते हैं कि किसी भी धर्मगुरू के इतने फॉलोवर्स हो जिससे उनको हर चुनाव में उनके सामने नाक रगड़ना पड़े इसलिए वो भी इसमे शामिल है क्योंकि राजनेता केवल वोट बैंक को ही देखते हैं उनको हिन्दू धर्म से कोई लेना देना नही है।
हमने आज तक अपने पाठकों को सच्चाई से अवगत कराने का प्रयास किया है और आगे भी करवाते रहेंगे ।
आज हर हिन्दुस्तानी का कर्त्तव्य है कि वो मीडिया की बातों में न आकर स्वयं सच्चाई तक पहुँचने का प्रयास करे ।
जय हिन्द!!
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संजय राउत ने बोला संत मुक्त भारत होना चाहिए, जनता बोली संत नही नेता मुक्त होना चाहिए

अगस्त 5, 2017
मीडिया में अभी हिन्दू साधु-संतों के खिलाफ खूब जहर उगला जा रहा है जैसे कि सबसे बड़े अपराधी साधु-संत ही हैं लेकिन अगर हिन्दू थोड़ा भी विचार करेगा तो पता चलेगा कि यह केवल विदेशी ताकतों द्वारा बदनाम करने का एक षड़यंत्र है जिसमें कई राजनैतिक पार्टियां भी शामिल हैं ।
भारत भूमि ऋषि-मुनियों, साधु-संतों की भूमि रही है और विदेशी ताकतें समझ रही हैं कि अगर भारतवासियों की नाभि में छेद करो तो तुरतं काम हो जायेगा, अधिकतर भारतवासियों की आस्था किसी न किसी साधु-संत में होती है क्योंकि वहीं हमें भारतीय संस्कृति का ज्ञान देते हैं और हमें अच्छे रास्ते चलने की प्रेरणा देते हैं जिससे विदेशी कंपनियों का प्रोडक्ट बिकता नही है और ईसाई मिशनरियां एवं मौलवी आसानी से धर्मान्तरण करवा नही पाते है इसलिए हिन्दू साधु-संतों को मीडिया द्वारा बदनाम करवाते है।

जैसा कि हमनें पहले भी बताया है कि अधिकतर मीडिया के मालिक विदेश के हैं, फिर सेक्युलर नेता भी टीआरपी के लिए उनके खिलाफ बयान बाजी करने लगते हैं ।

controversial stament of sanjay raut

 

ऐसे ही शिवसेना के सामना अखबार में सांसद संजय राउत का लेख आया था कि भारत साधु-संत,महाराज मुक्त होना चाहिए जिसकी सोशल मीडिया पर लोगो ने कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि…

भारत साधु-संतों की भूमि है, तुम्हारे जैसे भ्रष्ट नेताओं से मुक्त भारत होना चाहिए तभी भारत विकास कर पायेगा, नेता भारत की संपत्ति हड़प लेते हैं और दोष संतो को देते हैं, आगे बोला कि हिम्मत है तो मौलवी या पादरी मुक्त भारत बोलकर दिखाओ ।

संजय राउत ने पहली बार टिप्पणी नही की है उससे पहले भी की थी तो जैन मुनि आचार्य सूर्य सागर ने चेतावनी भी दी थी उनको ।
आइये जानते है क्या कहा था आचार्य जी ने…
तंबाकू गुटखा सेवन करके कैमरे के सामने आकर बड़बड़ाहट और अपनी खुजली से अपनी जुबान को शांत करने वाला संजय राउत मैं तुझे इतनी बात कहना चाहता हूँ कि तूने किस आधार से एक जैन मुनि को जोकर कहा ?
जोकर तो तुम ही नजर आते हो ।
हम लोग आप जैसे छिछोरे लोगों की बातों को सुनकर के चुपचाप से बैठ जाए ऐसे नहीं हैं, तुम्हें निष्काषित करने के लिए सामर्थ्य हम रखते हैं ।
बौखलाहट नजर आ रही है। पिछली बार नगर पालिका के चुनावों में आप लोग हार गए और आगे भी तुम लोगों का नामोनिशान मिट जाने वाला है, शवसेना होने वाली है, तुम्हारी शिवसेना नही रहेगी।
तुमने कहा, साधु होकर ये साधु तो मुझे साधु नजर नहीं आता,
तेरे लाइसेंस और तेरे प्रमाणिक करने से साधु साधु हो जाएगा?
मुझे तो तेरे में ही कोई गुण नजर नहीं आता है,पूरे के पूरे अवगुण भरे नजर आते हैं,कौनसा ऐसा धर्म का कार्य आज तक आपकी शिवसेना के द्वारा हुआ है ? जालीदार टोपी पहन करके धर्म का प्रचार नहीं होता, कट्टरता होनी आवश्यक होती है।
जैसे छत्रपति शिवाजी महाराज ने सभी संप्रदायों को साथ ले करकेे हिंदुस्तान की, भारत की,महाराष्ट्र की नींव रखी वह नींव आप नहीं रख पा रहे हो।
आपके बालासाहेब जब स्वर्ग से देखते होंगे ना आप की लीलाओं को तो बड़े दुखी हो रहे होंगे और लालायित हो रहे होंगे कि कब मैं धरती पर जाकर के तुम जैसे को दो चांटे और दो लप्पड़ मारु, और वह समय आएगा।
तुमने कहा कि साधुओं को राजनीति नहीं करनी चाहिए, जरा शास्त्रों को, हमारी पूर्व परंपराओं को सही ढंग से पढ़ो लेकिन तुम्हारे संस्कार ही नहीं,तुम क्या पढ़ोगे? बस तुम्हें बेफिजूल बकबक करके हाईलाइट होना है, तुम्हें कोई जानता ही नहीं उल्टा तुम लोग कुप्रख्यात हो रहे हो, सुप्रख्यात नहीं हो रहे हो।
साधुओं ने ही इस देश को बचाया है इस भारत भूमि को बचाया है,आचार्य चाणक्य ने बचाया है,सम्राट पृथ्वीराज चौहान के गुरु भी एक सन्यासी थे उन्होंने इस संसार को बचाया है । आदित्यनाथ योगी नाम तो सुना है ना? उनके नाम से भी आपको बहुत खट्टापन महसूस होता है वह तो एक सन्यासी हैं। मंदिर की घंटी बजाते हुए आज उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े तख्ते पर वो विराजमान हो गए। नीति और न्याय का साथ देकर , नीति न्याय का साथ लेकर के योगी आदित्यनाथ योगी उत्तर प्रदेश के CM बने हैं।
शब्दों को सही सलामत ढंग से इस्तेमाल करने की जो क्षमता है उसे अपने ह्रदय में पहले स्थापित तो करो बाद में नेता बनो गुटखा खाकर के कोई नेता नहीं बनता तुम जैसे चरित्रहीन नेताओं के कारण पूरी शिवसेना पूरा नेता समाज बदनाम हो रहा है।
उद्धव ठाकरे जी,मैं आपसे एक अपील करना चाहता हूँ कि इस संजय राउत के खिलाफ आप कुछ ना कुछ एक्शन लें, वरना एक्शन लेने के लिए कुछ-न-कुछ तो मसले सामने आएंगे एक्शन परमात्मा भी लेगा और परमात्मा के दूत भी लेंगे।
जाकिर नायक का तो कुछ नहीं उखाड़ पाए तुम लोग और तुम हमारे  साधुओं की भाषा शैली पर जाते हो अरे वर्तमान की स्थिति यही है कि हमें इस आधार से बोलना पड़ता है जब तुम हमें नहीं छोड़ेंगे तो हम क्यों छोड़ेंगे ?
तुम हमें मत छेड़ो,हम तुम्हे नहीं छेड़ेंगे , तुम हमें छेड़ोगे तो हम तुम्हे छोड़ेंगे नहीं।
आपको बता दें कि अभी सोशल मीडिया पर संजय राउत के खिलाफ खूब आक्रोश है, जनता उनके खिलाफ खूब प्रतिक्रिया दे रही है।
“जिस देश में संत फकीरों का होता आदर सम्मान है,
जहाँ मात-पिता और गुरुओं की सेवा करता इंसान है,
वो देश हमारा भारत है,उस देश की धरती को नमन!!”
जय हिन्द !!
RAPE BY MOULANA

39 महिलाओं से रेप करने वाला बलात्कारी मौलवी हुआ गिरफ्तार, मीडिया ने साधी चुप्पी

39 महिलाओं से रेप करने वाला बलात्कारी मौलवी हुआ गिरफ्तार, मीडिया ने साधी चुप्पी
अगस्त 30, 2017
मीडिया द्वारा केवल हिन्दू साधु-संतों को ही टारगेट किया जा रहा है, उनके खिलाफ नई-नई झूठी कहानियाँ बनाकर जनता में इस तरह से परोसा जा रहा है कि बस दुनिया मे केवल अपराधी हैं तो वो हिन्दू संत ही हैं । एक आतंकवादी की तरह हिन्दू संत की छवि को समाज के सामने लाया जा रहा है पर उसके पीछे छिपी सच्चाई किसी तक नहीं पहुँचाई जाती ।
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 दूसरी ओर जब ईसाई पादरी या मुस्लिम धर्मगुरु पर ऐसे आरोप सिद्ध भी हो जाते हैं तो भी हमारे देश की मीडिया चुप्पी साध लेती है,
आखिर क्यों सिर्फ हिन्दू साधु संतों और हिन्दू कार्यकर्ताओं से जुड़ी खबरों को ही तूल दिया जाता है..???
इसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण है जिससे अधिकांश भारतवासी अनजान हैं ।
मैकाले ने कहा था कि मैं ऐसी शिक्षा प्रणाली डालकर जाऊंगा कि जो भारतीय संस्कृति को खत्म कर देगा और आज वो प्रत्यक्ष देखने को मिल रहा है ।
 अधिकतर मीडिया विदेशी फंड से चलती है उनका उद्देश्य है कि हिन्दू धर्म को विश्व में बदनाम करना । इसलिए सबसे पहला प्रहार हिंदुओं के आस्था के केंद्रों पर हुआ । हमारे धर्म गुरुओं की न्यूज को जितना आज मिर्च मसाला लगाकर उछाला जाता है क्या कभी आपने देखा कि किसी दूसरी कौम पर मीडिया ने इतनी टिपण्णियां की हों..???
जवाब सबका एक होगा…(नहीं..)
तो इसके पीछे का बहुत बड़ा कारण है हिन्दू धर्म की जडें खोखली करना । हिंदुओं के मन में अपने धर्म गुरुओं के प्रति नफरत भरना, जिससे धर्मांतरण का कार्य सुगमता से हो सकें ।
अब सवाल उठता है कि हम मीडिया की बातें नहीं माने पर हिन्दू साधु-संतों ने देश को बर्बाद कर दिया, उन्होंने इतनी सम्पत्ति क्यों इकट्ठी की ??
तो उसका जवाब है कि पहले ऋषि मुनियों के आश्रम के पास इतनी संपत्ति रहती थी कि राजाओं को भी मदद करते थे । अगर उनके पास धन नही होगा तो आश्रमवासी का पालन कैसे करेंगे..??
 समाज का कार्य कैसे करेंगे..???
साधु-संतों के पास सम्पति सबको दिखती है पर उनके द्वारा उस सम्पति से कितने गरीबों की मदद हो रही है,कितने आदिवासियों को धर्मान्तरण से बचाया जा रहा है, आकाल,बाढ़ पीड़ितों,भूकम्प आदि में उनके आश्रमों द्वारा कितने सेवाकार्य होते हैं, उस पर किसी की दृष्टि नहीं जाती ।
आज साधु संतों के आश्रम है तभी आज करोड़ों की संख्या में जनता वहां जाकर ईश्वरीय शांति, ईश्वरीय आनंद का अनुभव कर पाती है।
अगर साधु संतों के आश्रम नहीं हो तो मनुष्य एक मशीन की तरह हो जायेगा। संत के पास अगर सम्पति है तो वो समाज हित में ही उपयोग होती है ।
पहले हमारा देश सोने की चिड़िया कहलाता था । लेकिन विदेशी आक्रमणकारियों मुगल एवं अंग्रेज इसे लूट कर ले गए और बाकी नेताओं ने अरबो-खबरों का घोटाला करके देश को लूट लिया ।
तीसरा सवाल है कि :-
आजकल के हिन्दू साधु-संत पहले जैसे नहीं हैं तो वे भी इस गलतफहमी में न रहे ।
आप स्वयं सोचे!
कि आज का मनुष्य बिना चमत्कार के नमस्कार किसी को नहीं करता । अगर किसी के करोड़ों समर्थक हैं तो उसके पीछे कोई न कोई तो कारण होगा ही । ऐसे तो कोई किसी को नहीं मानता ।
 विदेशी ताकतों द्वारा चलायी जा रही मीडिया की पोलपट्टी जब तक हम नहीं समझेंगे तब तक मीडिया हमें यूँ ही भ्रमित करता रहेगा ।
 बॉलीवुड में भी आजकल हिन्दू साधू संतों को गलत बताया जा रहा है जिससे हमारे दिमाग में फिट हो जाये कि अगर कोई हिन्दू साधु संत है तो वह अवश्य ही खराब है ।
 हमारे पाठकों से हमारा अनुरोध है कि मीडिया की बातों में न आकर स्वयं सच्चाई तक पहुँचने का प्रयास करें ।
कई हिंदूवादी राष्ट्रवादी कहलाने वाले लोग जो कि राजनीति का हिस्सा है, और कहीं न कहीं उनको भी कुछ गलतफहमी हो जाती है या कोई राजनीति पार्टी से प्रेरित भी ऐसा करते हैं । कई बड़े-बड़े हिन्दू संगठन राजनीतिक फायदे के लिए और अपना संगठन बड़ा करने के लिए भी साधु-संतों के खिलाफ षडयंत्र में शामिल होते हैं ।
कुछ लोग जो कान्वेंट स्कूलों में पढ़े हैं । ऐसा हो सकता है कि वो हमारी बातों से सहमत न हो लेकिन अपने पाठकों तक सच पहुचाना हमारा कर्तव्य बनता है ।
आप गौर करेंगे..
तो आप देखेंगे कि मीडिया कभी भी संतो के अच्छे कार्य,देश धर्म और संस्कृति के लिए उनके किये गए सेवाकार्य नहीं दिखाती ।
उनके लाखों करोड़ों पढ़े-लिखे समर्थकों के अनुभव नहीं बताती कि आखिर क्यों वो मीडिया के इतना बदनाम करने के बावजूद भी संत से जुड़ें हैं ।
कभी दिखायेगी तो भी उन्हें अंधश्रद्धालु के रूप में ।
अब आते हैं मौलाना की खबर पर :-
पुलिस ने मौलाना आफताब को गिरफ्तार किया है ये एक इनामी शातिर अपराधी आफताब उर्फ नाटे था जो पिछले 32 साल से पुलिस और आम जनता की आंखों में धूल झोंककर मौलवी के रूप में छुपकर घूम रहा था।
यही नहीं, इस दौरान इसने ट्रिपल तलाक की पीड़ित मुस्लिम महिलाओं का हलाला के नाम पर यौन शोषण भी किया।
आफताब उर्फ नाटे पर इलाहाबाद पुलिस ने 12 हजार रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। एसपी सिटी सिद्धार्थ शंकर मीणा के मुताबिक नाटे 1985 से फरार चल रहा था। “नाटे नाम बदलकर मौलाना करीम के नाम से घूम रहा था। वो मुंबई, सूरत, अजमेर शरीफ और फर्रुखाबाद जैसे शहरों की मस्जिदों और दरगाहों में छिपता फिर रहा था।” नाटे दरगाहों में आने वाले श्रद्धालुओं से कहता था कि मैं तांत्रिक हूँ, भूत-प्रेत की बाधा दूर कर सकता हूँ। ऐसा बोलकर वो लोगों से पैसे ऐंठता और उन्हें आफताब गंडा और ताबीज बनाकर देता।
एसपी सिटी के मुताबिक नाटे खुद को हलाला निकाह एक्सपर्ट भी बताता था।  “उसने पूछताछ के दौरान झांसा देकर 39 महिलाओं का हलाला करवाने की बात कबूल की है। उसने लोगों को धोखा तो दिया ही, साथ ही लाखों रुपए भी ऐंठे।”
इस धोखेबाजी के बिजनेस के लिए उसने अपना नेटवर्क तैयार किया था। 33 सालों में उसने खुद को सिद्ध मौलाना बताकर दर्जन से ज्यादा शागिर्दों की टीम बनाई थी। ये शागिर्द उसके तंत्र मंत्र की विद्या का प्रचार प्रसार करते थे। मौलाना करीम के नाम से ही वह सारे गलत कार्य करता था, लेकिन कहीं पर भी उसने अपना कोई ID प्रूफ नहीं बनवाया था।
पुलिस से बचने के लिए वह महीने-15 दिन में सिम कार्ड चेंज कर देता था। गोपनीय तरीके से फैमिली से कॉन्टेक्ट में रहता था। जब पुलिस ने फैमिली से पूछताछ की तो उन्होंने उसके बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी देने से मना कर दिया था। परिवार का कहना था कि नाटे से उनका कोई संबंध नहीं है, क्योंकि वह उन पर तेजाब फेंक कर घर से भागा था और तब से वापस नहीं लौटा। पुलिस ने लगातार उनका नंबर सर्विलांस पर रखा और नाटे की लोकेशन का पता लगाया।
गिरफ्तार होने के बाद नाटे ने बताया, “मैं इलाहाबाद के शाहगंज थाना क्षेत्र में रहता था। 1981 में मौहल्ले के लड़के मोहम्मद अजमत ने मेरी भांजी से छेड़खानी की थी। उसकी हरकत ने मेरे अंदर इतना गुस्सा भर दिया कि मैंने बदला लेने की ठान ली।” “मैं अजमत के पास पहुंचा और उसे वहीं गोली से उड़ा दिया। पुलिस ने मुझे गिरफ्तार किया और दो साल बाद 1983 में मुझे जिला कोर्ट ने ताउम्र कारावास की सजा सुनाई।”  “मैंने सजा के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दाखिल की और दो साल बाद 1985 में मुझे जमानत भी मिल गई। जेल से बाहर आते ही मैं शहर से भाग गया।”
26 एनकाउंटर कर चुके इंस्पेक्टर अनिरुद्ध सिंह ने बताया, “हमने एक महीने पहले इसकी तलाश तेज की। 15 दिन पहले खबर मिली कि आफताब उर्फ नाटे कौशांबी एक प्रोग्राम में आ रहा है। हम वहां पहुंचे थे, लेकिन वो चकमा दे कर निकल गया।” “हमने उसके फैमिली मेंबर्स का फोन सर्विलांस पर रखा था, जिससे हमें पुराने साथी नवाब के बारे में पता चला। हमने उसे दबोचा। पहले उसने नाटक किया, फिर हमारी सख्ती के बाद उसने नाटे की डीटेल्स बताईं।” “नवाब ने बताया- नाटे पीर बाबा की मजार पर एक मेंटल आदमी की झाड़-फूंक करने आया था। वही फैमिली उसका नंबर देगी।”
अब इस पर मीडिया कोई बहस नही करेगी क्योंकि
इस मामले का हिन्दू धर्म से लेना देना नही है ।
साध्वी प्रज्ञा,स्वामी असीमानंद की मीडिया ने खूब बदनामी की लेकिन निर्दोष साबित हुए तो चुप्पी साध ली ऐसे ही हिन्दू संत आसाराम बापू के लिए सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि मैंने पूरा केस पढ़ा है, केस फर्जी है , धर्मपरिवर्तन में रुकावट बनने के कारण सोनिया गांधी ने जेल भिजवाया था और अभी राजनीति के कारण उनको जमानत नहीं मिल पा रही है लेकिन उनको फंसाने के कई सबूत मिले हैं पर मीडिया केवल एक तरफा बताकर जनता को गुमराह कर रही है ।
अतः विदेशी फंड से चलने वाली मीडिया से हर हिंदुस्तानी सावधान रहें नही तो आपस में भिड़कर विदेशियों के हाथ में सत्ता चली जायेगी ।

संत आसारामजी बापू की तुलना किसी से करना गलत : नरसिंहानंद जी महाराज

बाबा राम रहीम से ज्यादा मीडिया जिम्मेदार है, संत आसारामजी बापू की तुलना किसी से करना गलत :
नरसिंहानंद जी महाराज
अगस्त 29, 2017 

asaram bapu- narsimhanand ji maharaj sudarshan news

 

सुदर्शन न्यूज चैनल के बिंदास बोल में चैनल के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके और अखिल भारतीय संत समाज के राष्ट्रीय संयोजक व सिद्ध पीठ प्रचंड देवी मंदिर डासना के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की आप में चर्चा की गई ।
सुरेश चव्हाणके : भावनाओं को ,आस्थाओं को प्रतिक्रियाओं को देख,इसमे जो अच्छे लोग हैं वो भी पीछे जा रहे हैं, नरसिंहानंद जी महाराज जिस प्रकार से कुछ ऐसे लोग जब धर्म को, आस्था को बदनाम करते हैं तो उसके बाद में जो अच्छे लोग हैं उन पर भी सवाल या निशान पैदा होते हैं ।
नरसिंहानंद जी महाराज : अभी जैसे एक बहन ने हिन्दू संत आशारामजी बापू की तुलना दूसरे से की, लेकिन देखिये जिस केस में आशारामजी बापू फंसे हैं, वो केस फेंक है, वो केस झूठा है, फर्जी है ये मैं गारेंटी के साथ यहाँ बैठ कर कह देना चाहता हूँ और एक षड्यन्त्र के तहत बापूजी को फंसाया गया था और ये षड्यन्त्र किसने बुना है ये सब लोग जानते हैं  ।
लेकिन सबसे बड़ी खास बात यह है कि हिन्दू कल तक कोई नही बोल रहा था । कोई रामरहीम के बारे में टिप्पणी नहीं कर रहा था । आज सारे बाबाओं को संत आशारामजी बापू के साथ लगा दिया गया।
कल को एक महिला खड़ी हो जाएगी हम पर आरोप लगा देगी फिर हमें भी इनके साथ घसीट लिया जायेगा, सबसे पहले इस सिस्टम को देखना पड़ेगा कि हमारी सिस्टम में कहाँ  कमी आ गयी?
पहले तो हमारी महिलाओं को हमारी बहन बेटियों को ये बात समझना पड़ेगा।
आज सारे हिन्दू समाज के अंदर संतो के प्रति एक विचसना पैदा की जा रही है, ये विचसना हो नही रही है विचसना पैदा की जा रही है और इसका जो ये बाबा रामरहीम जैसे लोग हैं ये इसका कारण बन रहे हैं, लेकिन सबको इनके साथ पीसना सही नहीं है। आसारामजी बापू की राह अब और कठिन हो गयी है, उन्हें जमानत मिल सकती थी, लेकिन उनको सबके साथ घसीट कर विदेशी षड्यन्त्रकारी और भारत में रहने वाले जिहाद्दी और जो क्रिश्चन चर्च के लोग हैं इन्हें बल मिलेगा कि सारे हिन्दू ऐसे होते हैं ।
मीडिया जो पिछले 3 दिन से इस माहौल को बना रहा है, रामरहीम से ज्यादा दोषी मीडिया के वो लोग हैं जो पूरे हिंदुस्तान को एक तरह से सिविल वॉर की आग में झोंक देना चाहते हैं,ये जो कुछ हुआ वो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।
सुरेश चव्हाणके : महाराज जी, यही मीडिया हिंदुस्तान के बाबा की कल तक इंटरव्यू ले रहा था, उनके इंटरव्यू लेने के लिए उनके यहां पर एजेंसिया लगा रहा था, उनके विज्ञापन चला रहा था, उनके फिल्म्स के अनिमशन्स ले रहा था, यही मीडिया कल तक मेहमनमन्दित कर रहा था आज एकदम उल्टी भूमिका में है ।
नरसिंहानंद जी महाराज : देखिये ये मीडिया का तो क्या है ये तो इस देश में मजाक हो रहा है, आज इस देश में जो मीडिया वाले हैं उनकी न तो धर्म में आस्था है न देश में आस्था है न इस मिट्टी में आस्था है। उन्होंने सारी चीजों को मजाक बना दिया है और ये जो बबाल हुआ है इसके लिए राम रहीम से ज्यादा जिम्मेदार या गैरजिम्मेदार मीडिया है जिसने इसे इतना भयंकर तूल दिया है, यदि इसे इतनी भयंकर तूल न दी जाती, इस मामले की, बाबा रामरहीम को सीधा जेल भेज दिया जाता तो ये मामला नहीं उठता।
ये इतना दुर्भाग्यपूर्ण मामला है और ये मै रामरहीम का बचाव  नही कर रहा हूँ लेकिन इसमें मुझे लगता है सब मामला षड्यंत्रकारियों से मिला हुआ है।